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	<title>Delhi Archives - Samvaad India</title>
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	<title>Delhi Archives - Samvaad India</title>
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		<title>प्रतियोगी परीक्षाओं में संसाधन विहीन छात्र-छात्राओं का रिकॉर्ड अव्वल</title>
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		<dc:creator><![CDATA[संवाद इंडिया]]></dc:creator>
		<pubDate>Sun, 21 Apr 2024 03:43:26 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[उत्तर प्रदेश]]></category>
		<category><![CDATA[एक्सक्लूसिव]]></category>
		<category><![CDATA[खास खबर]]></category>
		<category><![CDATA[शिक्षा]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>दिल्ली जामिया विश्विद्यालय के प्रबंध तंत्र को बधाई  UP बोर्ड की परिक्षाओं में सीतापुर के students ने फिर</p>
<p>The post <a href="https://www.samvaadindia.com/record-of-resource-less-students-becoming-top-in-competitive-examinations/">प्रतियोगी परीक्षाओं में संसाधन विहीन छात्र-छात्राओं का रिकॉर्ड अव्वल</a> appeared first on <a href="https://www.samvaadindia.com">Samvaad India</a>.</p>
]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<ul>
<li><strong>दिल्ली जामिया विश्विद्यालय के प्रबंध तंत्र को बधाई </strong></li>
<li><strong>UP बोर्ड की परिक्षाओं में सीतापुर के students ने फिर top किया</strong></li>
</ul>
<p>पहले UPSC और अब यूपी बोर्ड के परिणामों ने देश और समाज के अंदर शिक्षा के क्षेत्र में तेजी से हो रहे बदलाव का संकेत दे रहे है सामान्य तौर पर माना जाता रहा है की शिक्षा के क्षेत्र में साधन संपन्न वर्ग के लोगों का ही कब्जा रहा है संसाधन के दम पर महानगरों में अपने बच्चों को पढ़ाकर परीक्षाओं में कामयाबी दिलाने का एक लंबा इतिहास रहा है लेकिन यूनियन पब्लिक सर्विस कमिशन और बोर्ड की परीक्षाओं के परिणामों ने समाज में अपने संसाधनों के दम पर लंबे समय तक कब्जा जमाए ऐसे लोगों, वर्गों और शहरी क्षेत्र के लोगों के लिए एक कड़ी चुनौती पेश की है।<br />
पिछले कई वर्षों से यूनियन पब्लिक सर्विस कमिशन की परीक्षाओं में जामिया मिलिया विश्वविद्यालय के छात्र- छात्राओं का आउटस्टैंडिंग परफॉर्मेंस रहा है दिल्ली स्थित जामिया विश्वविद्यालय अपने कैंपस के अंदर होनहार छात्रों के लिए बगैर शुल्क कोचिंग और आवासीय सुविधा मुहैया कराता रहा है और यहां पर पढ़ने वाले छात्र-छात्राओं में सभी मजहब और वर्गों के छात्र शामिल रहते हैं यूनियन पब्लिक सर्विस कमीशन के परिणाम पर अगर नजर डाला जाए तो इस विश्वविद्यालय के कोचिंग सेंटर से पढ़कर कामयाबी हासिल करने वाले छात्र-छात्राओं की तादाद काफी बड़ी है यह विश्वविद्यालय देश के तमाम विश्वविद्यालयों में से एक अलग ही पहचान रखता है यह अलग बात है कि जब यहां के छात्र-छात्राओं ने इन प्रतियोगी परीक्षाओं में कामयाबी हासिल करना शुरू किया तो मीडिया के एक वर्ग की तरफ से इस विश्वविद्यालय पर मजहबी रंग चढाने की कोशिश की गई परिणाम स्वरूप देश के सर्वोच्च अदालत ने ऐसे टीवी चैनलों के विरुद्ध कार्रवाई करने के लिए सरकार को निर्देश भी जारी किया था।<br />
एक बार फिर इस विश्वविद्यालय के छात्र-छात्राओं ने शानदार कामयाबी हासिल की है और इस कामयाबी के लिए न केवल छात्र-छात्राएं बल्कि इस कोचिंग सेंटर को चलाने वाले सभी शिक्षक शिक्षिकाएं और विश्वविद्यालय का प्रबंध तंत्र भी बधाई का पात्र है।<br />
जहां तक निशुल्क कोचिंग चलाने की योजना का सवाल है तो यह योजना बहुत पुरानी है वर्ष 84 &#8211; 85 में केंद्र सरकार की तरफ से देश के चुनिंदा विश्वविद्यालय में आर्थिक रूप से कमजोर छात्र-छात्राओं के लिए कैंपस के अंदर ही निशुल्क कोचिंग पढ़ने की व्यवस्था शुरू की गई थी। यह अलग बात है की सरकार की इस योजना का लाभ देश के बाकी विश्वविद्यालय में चलने वाले सेंटर्स के मुकाबले जामिया मिलिया का कोचिंग सेंटर ज्यादा प्रोफेशनल तरीके से उठाता रहा और उसका लाभ प्रतियोगी परीक्षाओं में हिस्सा लेने वाले छात्र-छात्राओं को मिलता रहा है<br />
दूसरी ओर जिस तरह के अभ्यर्थी यूनियन पब्लिक सर्विस कमिशन जैसी टफेस्ट परीक्षा को उत्तीर्ण होने में कामयाब रहे हैं उससे एक बात और साबित हो रही है कि समाज का पूरा का पूरा सोशियो इकोनामिक डायनॉमिक्स बहुत तेजी से बदल रहा है।<br />
इससे एक बात और साबित हो रही है कि संसाधन और जोड़ तोड़ के दम पर यूपीएससी जैसी परीक्षाओं में कामयाबी हासिल नहीं की जा सकती ठीक इसी तरह से बोर्ड के परीक्षाओं के परिणाम भी शिक्षा के क्षेत्र में एकाधिकार बनाए हुए वर्गों के लोगों के लिए चुनौती पेश कर रहे हैं। उदाहरण के तौर पर उत्तर प्रदेश बोर्ड की परीक्षाओं के परिणाम से यह बात साबित हो रही है कि अब बेहतर शिक्षा सिर्फ महानगरों और और संसाधनों के दम पर हासिल नहीं की जा सकती महानगरों की तुलना में दूर दराज के इलाक़ों में भी चलने वाले विद्यालयों में पढ़ने वाले छात्र-छात्राएं शहरी क्षेत्र में पढ़ने वाले छात्र-छात्राओं की तुलना में ज्यादा मेधावी हैं ज्यादा मेहनती हैं और ज्यादा बेहतर परिणाम हासिल करने वाले हैं। यूपी बोर्ड की इस बार की परीक्षा में भी टॉप करने वाले ज्यादातर लड़के लड़कियां उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ से लगे ग्रामीण क्षेत्रों में चलने वाले विद्यालयों के हैं शहरों में कोचिंग सेंटर्स पैसा कमाने का एक जरिया बन गया है । शहरी क्षेत्र में पढ़ने वाले छात्र-छात्राएं और चलने वाले स्कूल चमक और भौतिकवादी संस्कृति से ज्यादा प्रभावित है शायद यही कारण है कि जब मेरिट के दम पर परीक्षाओं को उत्तीर्ण करने का वक्त आता है तो शहरी क्षेत्र के मुकाबले ग्रामीण क्षेत्र के छात्र-छात्राएं अच्छा मुकाम हासिल कर लेते हैं।<br />
एक और महत्वपूर्ण संकेत इन प्रतियोगी परीक्षाओं के परिणामों से देखने को मिल रहा है इन परिणामों के आधार पर कहा जा सकता है कि समाज का वह कमजोर तबका अब ज्यादा जागरूक ,ज्यादा सजग और अपने हक और हुकुम के लिए ज्यादा चौकन्ना हो गया है उसको इस बात का एहसास हो गया है कि संसाधनों की कमी के बावजूद कठिन परिश्रम और डिटरमिनेशन के दम पर अपने लक्ष्य तक पहुंचा जा सकता है शायद यही कारण है की इन प्रतियोगी परीक्षाओं में टॉप 10 पोजीशन हासिल करने वाले छात्र-छात्राओं में ज्यादातर बच्चे इसी तबके से आते हैं और आ रहे हैं जो की संसाधनों की कमी के बावजूद अपना मुकाम हासिल करना चाहते हैं।</p>
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		<title>न्याय पत्र है कांग्रेस का लोकसभा चुनाव के लिए जारी किया गया घोषणा पत्र</title>
		<link>https://www.samvaadindia.com/nyaya-patra-is-the-manifesto-released-by-congress-for-the-lok-sabha-elections/</link>
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		<dc:creator><![CDATA[संवाद इंडिया]]></dc:creator>
		<pubDate>Fri, 05 Apr 2024 15:46:15 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[उत्तर प्रदेश]]></category>
		<category><![CDATA[दिल्ली]]></category>
		<category><![CDATA[लोकसभा चुनाव 2024]]></category>
		<category><![CDATA[Brijbhushansharansingh]]></category>
		<category><![CDATA[Congress]]></category>
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		<category><![CDATA[Loksabha election]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>घोषणा पत्र में युवाओं, महिलाओं, श्रमिकों और किसानों के लिए कई योजनाएं लागू करने का किया वादा   नई</p>
<p>The post <a href="https://www.samvaadindia.com/nyaya-patra-is-the-manifesto-released-by-congress-for-the-lok-sabha-elections/">न्याय पत्र है कांग्रेस का लोकसभा चुनाव के लिए जारी किया गया घोषणा पत्र</a> appeared first on <a href="https://www.samvaadindia.com">Samvaad India</a>.</p>
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										<content:encoded><![CDATA[<p style="text-align: center;"><strong>घोषणा पत्र में युवाओं, महिलाओं, श्रमिकों और किसानों के लिए कई योजनाएं लागू करने का किया वादा  </strong></p>
<p>नई दिल्ली, 05 अप्रैल, लोकसभा चुनाव के लिए कांग्रेस ने अपना घोषणा पत्र जारी कर दिया। कांग्रेस ने इस घोषणा पत्र को न्याय पत्र का नाम दिया है। 48 पन्नों के इस न्याय पत्र में युवा न्याय, नारी न्याय, किसान न्याय, श्रमिक न्याय, हिस्सेदारी न्याय, संवैधानिक न्याय, आर्थिक न्याय, राज्य न्याय, रक्षा न्याय, पर्यावरण न्याय नाम के दस संकल्प दिए गए हैं। इन दस संकल्पों के अंतर्गत कई घोषणाएं की गई हैं।</p>
<p>कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे, कांग्रेस संसदीय दल की अध्यक्ष सोनिया गांधी और पूर्व कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी, कांग्रेस घोषणा पत्र समिति के चेयरमैन मंत्री पी चिदंबरम, कांग्रेस के संगठन महासचिव केसी वेणुगोपाल, कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी समेत अन्य वरिष्ठ नेताओं की मौजूदगी में कांग्रेस मुख्यालय में घोषणा पत्र जारी किया गया।</p>
<p>पार्टी के घोषणा पत्र में 30 लाख सरकारी नौकरियां भरने, दैनिक मजदूरी 400 रुपये करने, केंद्र सरकार की नई नियुक्तियों में महिलाओं को 50 प्रतिशत आरक्षण और गरीब परिवार की महिला को साल में एक लाख रुपये देने, एमएसपी को कानून गारंटी देने, जाति जनगणना कराने, अग्निपथ योजना को समाप्त करने समेत कई वादे किए गए हैं।</p>
<p><img fetchpriority="high" decoding="async" class="alignnone size-medium wp-image-300 aligncenter" src="https://www.samvaadindia.com/wp-content/uploads/2024/04/IMG-20240405-WA0080-300x200.jpg" alt="" width="300" height="200" /></p>
<p>कांग्रेस ने यह भी वादा किया है कि केंद्र में सरकार बनने पर वरिष्ठ नागरिक, विधवा और विकलांग पेंशन में केंद्रीय सरकार के योगदान को बढ़ाकर न्यूनतम 1,000 रूपये प्रति माह किया जाएगा। इसके साथ ही उदीयमान खिलाड़ियों के लिए 10,000 रूपये प्रतिमाह की खेल छात्रवृत्ति, सरकारी परिक्षाओं और सरकारी पदों के लिए आवेदन शुल्क समाप्त किया जाएगा, कक्षा नौवीं से 12वीं तक के सभी छात्रों को समान अवसर हेतु मोबाइल फोन देने का वादा किया गया है। इसी के साथ यह भी वादा किया गया है कि आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं की संख्या दोगुनी होगी, जिससे 14 लाख नई नौकरियां पैदा होंगी।इसके अलावा स्कूल फीस रेगुलेशन कमेटी बनाने के लिए राज्य सरकारों को प्रोत्साहित किया जाएगा।</p>
<p>&nbsp;</p>
<p>कांग्रेस ने घोषणा पत्र में वादा किया है कि केंद्र में इंडिया गठबंधन की सरकार बनने पर युवा न्याय गारंटी के अंतर्गत 30 लाख सरकारी नौकरियां भरी जाएंगी। शिक्षित युवाओं को सालाना एक लाख रूपये की अप्रेंटिसशिप ट्रेनिंग दी जाएगी। पेपर लीक रोकने के लिए कानून और नीतियां बनाई जाएंगी। गिग श्रमिकों के लिए बेहतर काम-काजी नियम बनाए जाएंगे और संपूर्ण सामाजिक सुरक्षा दी जाएगी। युवाओं के लिए 5,000 करोड़ रुपये का स्टार्टअप फंड बनाया जाएगा।</p>
<p>नारी न्याय गारंटी के अंतर्गत गरीब परिवार की एक महिला को सालाना एक लाख रुपये की सहायता दी जाएगी। केंद्र सरकार की नई नियुक्तियों में महिलाओं को 50 प्रतिशत आरक्षण मिलेगा। आंगनबाड़ी, आशा और मिड डे मील वर्कर को ज्यादा वेतन मिलेगा, केंद्र सरकार का योगदान दोगुना होगा। हर पंचायत में महिलाओं को उनके हकों के लिए जागरूक करने और जरूरी मदद के लिए एक अधिकार सहेली की नियुक्ति की जाएगी। सावित्री बाई फुले हॉस्टल के तहत भारत सरकार देशभर में सभी जिला मुख्यालयों में कम से कम एक कामकाजी महिलाओं का हॉस्टल बनाएगी और पूरे देश में इन हॉस्टलों की संख्या दोगुनी की जाएगी।</p>
<p>श्रमिक न्याय के अंर्तगत⁠ दैनिक मजदूरी 400 रुपये की जाएगी, जो मनरेगा में भी लागू होगी। ⁠सबको स्वास्थ्य अधिकार के तहत गरीबों को 25 लाख रुपये का हेल्थ-कवर मुफ्त में दिया जाएगा, मुफ्त इलाज, दवा, टेस्ट और सर्जरी की भी सुविधा मिलेगी। शहरी रोजगार गारंटी में शहरों के लिए भी मनरेगा जैसी नई योजना लाई जाएगी। ⁠सामाजिक सुरक्षा के तहत असंगठित मजदूरों के लिए जीवन और दुर्घटना बीमा दिया जाएगा। ⁠सुरक्षित रोजगार के तहत मुख्य सरकारी कार्यों में कॉन्ट्रैक्ट सिस्टम मजदूरी बंद होगी।</p>
<p>किसान न्याय के अंतर्गत किसानों को स्वामीनाथन फार्मूला के साथ न्यूनतम समर्थन मूल्य की कानूनी गारंटी दी जाएगी। कर्ज माफी प्लान प्रभावी ढंग से लागू करने के लिए परमानेंट आयोग बनाया जाएगा। फसल नुकसान पर 30 दिन के अंदर सीधे खाते में पैसा ट्रांसफर होगा। किसानों की सलाह से नई इंपोर्ट-एक्सपोर्ट पॉलिसी बनेगी। किसानी के लिए जरूरी हर चीज से जीएसटी हटेगी।</p>
<p>हिस्सेदारी न्याय के अंतर्गत सामाजिक व आर्थिक समानता के लिए हर व्यक्ति, हर वर्ग की गिनती होगी। संवैधानिक संशोधन द्वारा 50 प्रतिशत सीमा हटाकर एससी, एसटी, ओबीसी को आरक्षण का पूरा हक दिया जाएगा। एससी-एसटी सब प्लान की कानूनी गारंटी के अंतर्गत जितनी एससी-एसटी जनसंख्या, उतना बजट; यानी ज्यादा हिस्सेदारी सुनिश्चित होगी। वन अधिकार क़ानून वाले पट्टों का एक साल में फैसला होगा। जहां एसटी सबसे ज्यादा होंगे, वहां पेसा कानून लागू होगा।</p>
<p>घोषणापत्र में संवैधानिक न्याय खंड में लोकतंत्र बचाओ, भय से मुक्ति से लेकर मीडिया, न्यायपालिका की आजादी, भ्रष्टाचार के खिलाफ मुहिम जैसे मुद्दे भी शामिल किए गए हैं।कांग्रेस ने वादा किया है कि एनडीए शासनकाल में पिछले 10 वर्षों में हुए भ्रष्टाचार के मामलों की जांच कराई जाएगी। नोटबंदी, राफेल सौदा, पेगासस स्पाइवेयर, चुनावी बॉन्ड योजना समेत जैसे संदिग्ध सौदों और योजनाओं की जांच की जाएगी। कांग्रेस संविधान की दसवीं अनुसूची में संशोधन करेगी और दलबदल (जिस मूल पार्टी से विधायक या सांसद चुना गया था उसे छोडना) को विधानसभा या संसद की सदस्यता से स्वत: अयोग्य घोषित करेगी। इसी के साथ यह भी सुनिश्चित किया जाएगा कि पुलिस, जांच और खुफिया एजेंसियां सख्ती से कानून के अनुसार काम करेंगी। जिन बेलगाम शक्तियों का अभी वह प्रयोग करते हैं, उन्हें कम कर दिया जाएगा। जैसा भी मामला हो, उन्हें संसद या राज्य विधानमंडलों की निगरानी में लाया जाएगा।</p>
<p>आर्थिक न्याय खंड में आर्थिक नीतियों, बेरोजगारी, कराधान और टैक्स में सुधार, उद्योग और आधारभूत संरचना पर ठोस विजन दिया गया है।</p>
<p>राज्य न्याय में संघीय ढांचा और केंद्र तथा राज्य संबंधों के साथ ग्रामीण और शहरी विकास, पूर्वोत्तर भारत पर रोशनी डाली गई है। राज्य न्याय के अंतर्गत वादा किया गया है कि जम्मू-कश्मीर के पूर्ण राज्य का दर्जा तुरंत बहाल होगा। लद्दाख के जनजातीय क्षेत्र संविधान के छठे शेड्यूल में शामिल होंगे। आंध्र प्रदेश को विशेष राज्य का दर्जा दिया जाएगा। एनसीटी दिल्ली सरकार अधिनियम, 1991 में इस हिसाब से संशोधन किया जाएगा कि तीन मामलों को छोड़कर एलजी दिल्ली के मंत्रिपरिषद की सलाह पर कार्य करेंगे। पुडुचेरी को पूर्ण राज्य का दर्जा मिलेगा। मणिपुर की वर्तमान राज्य सरकार को हटाकर दोनों समुदायों के बीच नफरत कम की जाएगी। मणिपुर में राजनीतिक और प्रशासनिक समाधान के लिए सुलह आयोग नियुक्त होगा। मणिपुर हिंसा के पीड़ितों और आश्रितों को उचित मुआवजा और न्याय दिया जाएगा।<br />
2013-14 में हुए प्रारंभिक समझौते के आधार पर नागा समूहों के साथ अंतिम समाधान और समझौता होगा।</p>
<p>देश की रक्षा और आंतरिक सुरक्षा के महत्व को ध्यान में रखकर रक्षा न्याय भी घोषणा पत्र में शामिल किया गया है, जिसमें विदेश नीति भी शामिल है। कांग्रेस ने रक्षा न्याय के अंतर्गत यह वादा भी किया है कि केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों की ताकत बढ़ाकर आधुनिकीकरण किया जाएगा। केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों में 33 प्रतिशत महिलाएं शामिल की जाएंगी।</p>
<p>कांग्रेस के घोषणा पत्र में &#8216;एक राष्ट्र एक चुनाव&#8217; का भी विरोध किया गया है। घोषणा पत्र में कहा गया है कि लोकसभा और विधानसभा चुनाव तय समय पर ही करवाए जाएंगे। साथ ही कहा गया है कि मतदान ईवीएम के जरिए होंगे। लेकिन इलेक्ट्रॉनिक वोट का मिलान, वीवीपैट की पर्ची से किया जाएगा।</p>
<p>The post <a href="https://www.samvaadindia.com/nyaya-patra-is-the-manifesto-released-by-congress-for-the-lok-sabha-elections/">न्याय पत्र है कांग्रेस का लोकसभा चुनाव के लिए जारी किया गया घोषणा पत्र</a> appeared first on <a href="https://www.samvaadindia.com">Samvaad India</a>.</p>
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		<title>तमिलनाडु की राजनीति पर कितना असर डालेगा कच्चातिवु द्वीप विवाद?</title>
		<link>https://www.samvaadindia.com/how-much-impact-will-the-ravathivu-island-dispute-have-on-tamil-nadu-politics/</link>
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		<dc:creator><![CDATA[संवाद इंडिया]]></dc:creator>
		<pubDate>Wed, 03 Apr 2024 07:35:11 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[अंतरराष्ट्रीय]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>क्या कच्चातिवु द्वीप मामले में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के बयान के बाद भारत के विदेश मंत्री डॉ एस</p>
<p>The post <a href="https://www.samvaadindia.com/how-much-impact-will-the-ravathivu-island-dispute-have-on-tamil-nadu-politics/">तमिलनाडु की राजनीति पर कितना असर डालेगा कच्चातिवु द्वीप विवाद?</a> appeared first on <a href="https://www.samvaadindia.com">Samvaad India</a>.</p>
]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<div></div>
<div>
<div dir="auto"><strong>क्या कच्चातिवु द्वीप मामले में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के बयान के</strong> <strong>बाद भारत के विदेश मंत्री डॉ एस जयशंकर का बयान खुद भारतीय जनता पार्टी और उसकी सरकार के लिए एक विवाद खड़ा कर गया है?</strong></div>
<div dir="auto">
<div dir="auto"><strong>क्या कच्चातिवु द्वीप  का मामला लोकसभा चुनाव के बीच में खास तौर से तमिलनाडु की राजनीति में कोई राजनीतिक असर डाल पाएगा?</strong></div>
<div dir="auto"></div>
<div dir="auto"><strong>क्या कच्चातिवु द्वीप सचमुच भारत सरकार ने एक समझौते के तहत श्रीलंका को दे दिया था ?</strong></div>
<div dir="auto"></div>
<div dir="auto">यह तमाम ऐसे सवाल है जिनको समझना और उनका प्रासंगिक जवाब तलाशना बहुत ही जरूरी हो गया है हम सब जानते हैं कि मछुआरों को लेकर तमिलनाडु की राजनीति हमेशा से संवेदनशील रही है भारत और श्रीलंका के बीच मछुआरों का मुद्दा हमेशा से एक विवाद का मुद्दा रहा है मछली पकड़ने को लेकर भारतीय मछुआरों को अक्सर श्रीलंका की सुरक्षा एजेंसियां गिरफ्तार करती रही है और इस मुद्दे को लेकर तमिलनाडु राज्य सरकार और भारत सरकार समय-समय पर श्रीलंका सरकार के साथ वार्ता करके एक दूसरे के साथ सहमति बनाकर मछुआरों को छुड़ाने से लेकर विवाद सुलझाने का प्रयास करते रहे हैं।</div>
</div>
<div dir="auto"><img decoding="async" class="size-medium wp-image-288 aligncenter" src="https://www.samvaadindia.com/wp-content/uploads/2024/04/images-11-300x164.jpeg" alt="" width="300" height="164" srcset="https://www.samvaadindia.com/wp-content/uploads/2024/04/images-11-300x164.jpeg 300w, https://www.samvaadindia.com/wp-content/uploads/2024/04/images-11-1024x560.jpeg 1024w, https://www.samvaadindia.com/wp-content/uploads/2024/04/images-11-768x420.jpeg 768w, https://www.samvaadindia.com/wp-content/uploads/2024/04/images-11-1536x841.jpeg 1536w, https://www.samvaadindia.com/wp-content/uploads/2024/04/images-11-2048x1121.jpeg 2048w" sizes="(max-width: 300px) 100vw, 300px" /></div>
<div dir="auto">
<div dir="auto">भारतीय जनता पार्टी इस लोकसभा चुनाव में तमिलनाडु सहित पूरे दक्षिण भारत में अपना राजनीतिक जनाधार बढ़ाने में लगी है भाजपा की कोशिश है की उत्तर भारत से होने वाले राजनीतिक नुकसान की भरपाई दक्षिण भारतीय राज्यों में अपनी जीत सुनिश्चित करके पुरी की जा सके नॉर्थ ईस्ट इंडिया के राज्यों में भारतीय जनता पार्टी की स्थिति दक्षिण भारतीय राज्यों की तरह बहुत अच्छी नहीं है। भारतीय जनता पार्टी की कोशिश कभी काशी तमिल संगम का आयोजन करके तो कभी लोकसभा के नए भवन के लोकार्पण के समय दक्षिण भारत के साधु संतों को आमंत्रित करके अपने राजनीतिक जमीन तैयार करने की रही है शायद यही कारण है कि प्रधानमंत्री का भाषण दक्षिण भारत राज्यों में भारतीय जनता पार्टी से जुड़े कार्यकर्ताओं के मन में डीएमके और कांग्रेस के खिलाफ एक नया जोश भरने का है। कांग्रेस पार्टी ने जवाबी हमला करते हुए 2015 के लोकसभा में दिए गए विदेश मंत्रालय द्वारा जवाब का हवाला देकर तत्कालीन विदेश सचिव और मौजूदा विदेश मंत्री डॉ एस जयशंकर के बयान को ही बीजेपी प्रधानमंत्री और खुद डॉक्टर एस जयशंकर के लिए एक नई चुनौती पेश कर दी है।</div>
<div dir="auto"> कांग्रेस पार्टी की तरफ से जय राम रमेश ने एक डिटेल बयान जारी की है अपने बयान में जय राम रमेश ने लिखा है &#8211;</div>
<div dir="auto"></div>
<div dir="auto"></div>
<div dir="auto">Is Dr. S Jaishankar, now Minister of External Affairs, disowning the reply given by the Ministry of External Affairs on January 27th, 2015, when the same Dr. Jaishankar was Foreign Secretary?</div>
<div dir="auto"></div>
<div dir="auto">The MEA’s response to a RTI query on Katchatheevu in 2015 had said “This [Agreement] did not involve either acquiring or ceding of territory belonging to India since the area in question had never been demarcated. Under the Agreements, the Island of Katchatheevu lies on the Sri Lankan side of the India-Sri Lanka International Maritime Boundary Line.”</div>
<div dir="auto"></div>
<div dir="auto">The easiest to hunt in a political expedition is a scapegoat. Who will it be?</div>
<div dir="auto"></div>
<div dir="auto">( क्या डॉ. एस जयशंकर, जो अब विदेश मंत्री हैं, 27 जनवरी, 2015 को विदेश मंत्रालय द्वारा दिए गए जवाब को अस्वीकार कर रहे हैं, जब वही डॉ. जयशंकर विदेश सचिव थे? 2015 में कच्चातिवू पर एक आरटीआई क्वेरी के जवाब में विदेश मंत्रालय ने कहा था, &#8220;इस [समझौते] में भारत से संबंधित क्षेत्र का अधिग्रहण या त्याग शामिल नहीं था क्योंकि प्रश्न में क्षेत्र का कभी भी सीमांकन नहीं किया गया था। समझौतों के तहत, कच्चाथीवू द्वीप भारत-श्रीलंका अंतर्राष्ट्रीय समुद्री सीमा रेखा के श्रीलंकाई हिस्से पर स्थित है। किसी राजनीतिक अभियान में बलि का बकरा ढूंढ़ना सबसे आसान है। वह कौन होगा?)</div>
<div dir="auto"></div>
<div dir="auto">कांग्रेस नेता जयराम रमेश का x पर लिखा गया बयान सीधे तौर पर प्रधानमंत्री विदेश मंत्री भारत सरकार को कटघरे में खड़ा कर रहा है कांग्रेस पार्टी का दावा है कि प्रधानमंत्री से लेकर उनके विदेश मंत्री तक सभी कच्चातिवु द्वीप के मुद्दे को उछाल कर इस चुनाव में राजनीतिक लाभ लेना चाहते हैं यहां यह समझाना जरूरी है कि आखिर यह मुद्दा राजनीतिक पटल पर और चुनावी कैंपेन में कैसे आया ।</div>
<div dir="auto">भारतीय जनता पार्टी की तमिलनाडु यूनिट के अध्यक्ष के अन्नामलाई ने एक आरटीआई के जरिए जो जानकारी हासिल की है उसके मुताबिक तत्कालीन प्रधानमंत्री श्रीमती इंदिरा गांधी ने एक समझौता के तहत कच्चातिवु द्वीप श्रीलंका को हैंडोवर कर दिया था बीजेपी पहले पंडित जवाहरलाल नेहरू और अब इंदिरा गांधी पर भारत की संप्रभुता और एकता के साथ समझौता करने के आरोप लगाती रही है भारतीय जनता पार्टी का आरोप रहा है की पंडित जवाहरलाल नेहरू से लेकर श्रीमती इंदिरा गांधी तक कांग्रेस के इन सभी पूर्व प्रधानमंत्री ने भारत की टेरिटोरियल इंटीग्रिटी को बचाए रखने में बहुत ही लचर रवैया अपनाए रखा। भारतीय जनता पार्टी पंडित नेहरू पर भारत का एक बहुत बड़ा भूभाग चीन के हवाले करने का आरोप लगाती रही है और आज देश में मौजूद तमाम आंतरिक समस्याओं के लिए और बाह्य समस्याओं के लिए पंडित जवाहरलाल नेहरू की डोमेस्टिक पॉलिसी और एक्सटर्नल पॉलिसी को जिम्मेदार ठहरती रही है।</div>
<div dir="auto">कमोबेश यही स्थिति इंदिरा गांधी के प्रधानमंत्री काल में लिए गए फैसलों को लेकर भी है दूसरी तरफ कांग्रेस पार्टी मौजूदा समय में भारत सरकार पर चीन के सामने झुकने के आरोप लगा रही है! कांग्रेस पार्टी का आरोप है की मौजूदा वक्त में चीन ने भारत के एक बहुत बड़े भूभाग पर कब्जा कर रखा है और मौजूदा सरकार चीन के द्वारा किए गए अनाधिकृत कब्जे पर कोई आक्रामक तरीका अख्तियार किए बगैर उसको वापस लेने में विफल रही है कांग्रेस पार्टी की इन आरोपों को और मजबूती देने के लिए भारतीय जनता पार्टी से नाराज चल रहे डॉक्टर सुब्रमण्यम स्वामी ने भी मौजूदा भारत सरकार की आर्थिक और विदेश नीति की खुली आलोचना शुरू कर दी है।</div>
<div dir="auto">राजनीतिक तौर पर भारतीय जनता पार्टी भले ही पंडित जवाहरलाल नेहरू और श्रीमती इंदिरा गांधी के विदेश नीतियों की आलोचना कर रही हो लेकिन यह भी ऐतिहासिक सच्चाई है की पंडित जवाहरलाल नेहरू ही आधुनिक भारत के निर्माता के रूप में जाने जाते हैं पंडित जवाहरलाल नेहरू की नीतियों के चलते भारत को पूरी दुनिया के डिप्लोमेटिक पटल पर एक अलग पहचान मिली थी! पंडित नेहरू का NON-ALLIGNMENT MOVEMENT ,पंचशील के सिद्धांत तत्कालीन दौर में खास तौर से डेवलपिंग कंट्रीज के लिए एक बहुत ही महत्वपूर्ण योगदान के रूप में देखा जाता है।</div>
<div dir="auto">श्रीमती इंदिरा गांधी की एग्रेसिव विदेश नीति के चलते ही पाकिस्तान के दो टुकड़े हुए अमेरिका जैसे शक्तिशाली देश को इंदिरा गांधी ने हमेशा अपनी शर्तों पर शर्तों पर रहने के लिए मजबूर किया। भारत को आंतरिक और विदेशी मामलों में एक अलग पहचान दिलाई !राजनीति के लिए भले कच्चा तिबू का मुद्दा उछाल कर तमिलनाडु में अपना-अपना वोट बैंक मजबूत करने की कोशिश होती रही हो लेकिन यह भी सच्चाई है कि श्रीलंका हमारा पड़ोसी मुल्क है  श्रीलंका में भारत का बहुत ही ज्यादा stake है अगर श्रीलंका भारत से दूरी बनाकर चीन के गोद में जाकर बैठ जाएगा तो उसका राजनीतिक खामियाजा सबसे ज्यादा भारत को ही उठाना पड़ेगा।</div>
<div dir="auto">शायद यही कारण है की पंडित जवाहरलाल नेहरू से लेकर श्रीमती इंदिरा गांधी राजीव गांधी तक सभी पूर्व प्रधानमंत्री ने श्रीलंका के साथ बेहतर डिप्लोमेटिक रिलेशंस बनाए रखने की कोशिश की थी। चीन को श्रीलंका से दूर रखने की कोशिश में राजीव गाँधी ने IPKF भेजा था!इसलिए इस तरह के कच्चातिवु द्वीप जैसे संवेदनशील मुद्दों को उछलने से पहले भारत के लार्जर इंटरेस्ट को ध्यान में रखना चाहिए तमिलनाडु की डीएमके और कांग्रेस पार्टी एक एलायंस के तहत लोकसभा चुनाव लड़ रहे हैं। भारतीय जनता पार्टी को संवेदनशील मुद्दों के बजाय राजनीतिक मुद्दों को उछालकर और डीएमके सरकार की खामियों को जनता के बीच में ले जाकर इस चुनाव में अपनी जीत सुनिश्चित करने की कोशिश करनी चाहिए।</div>
<div dir="auto">डीएमके पहले से ही भारतीय जनता पार्टी के खिलाफ अग्रसिव पॉलिटिक्स करती रही है चाहे वह सनातन धर्म का मामला हो या राज्यपाल के जरिए केंद्र की सरकार को चुनौती देने का मामला, डीएमके की सरकार जनता की अदालत से लेकर सर्वोच्च न्यायालय तक में तमिलनाडु के राज्यपाल की भूमिका केंद्र सरकार की अनावश्यक दखलअंदाजी का मुद्दा उठती रही है इस चुनाव में भी डीएमके और उसकी सरकार की तरफ से तमिलनाडु के मौजूदा राज्यपाल के कार्यशाली उनकी अनावश्यक दखलअंदाजी का मुद्दा उछाला जा रहा है डीएमके और कांग्रेस का आरोप है की मौजूदा केंद्र की सरकार राज्यपालों और केंद्रीय जांच एजेंटीयों के माध्यम से भारत के फेडरल स्ट्रक्चर को कमजोर करने की कोशिश कर रही है कांग्रेस पार्टी की तरफ से तो लगातार आरोप लगाए जा रहे हैं कि केंद्र सरकार की नीतियों के कारण भारत के संघीय ढांचे के लिए खतरा पैदा हो रहा है।</div>
<div dir="auto">अब देखना है कि दक्षिण भारत और खास तौर पर तमिलनाडु की जनता भारतीय जनता पार्टी की चुनावी आख्यान पर कितना भरोसा करती है।</div>
<div dir="auto"></div>
</div>
</div>
<p>The post <a href="https://www.samvaadindia.com/how-much-impact-will-the-ravathivu-island-dispute-have-on-tamil-nadu-politics/">तमिलनाडु की राजनीति पर कितना असर डालेगा कच्चातिवु द्वीप विवाद?</a> appeared first on <a href="https://www.samvaadindia.com">Samvaad India</a>.</p>
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		<title>किस राजनीतिक पार्टी को मिले कितने रुपये के बॉन्ड और किसने किसने खरीदे</title>
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		<dc:creator><![CDATA[संवाद इंडिया]]></dc:creator>
		<pubDate>Fri, 22 Mar 2024 07:36:19 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[एक्सक्लूसिव]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>सुप्रीम कोर्ट के आदेश के चलते स्टेट बैंक का इंडिया ने चुनावी चंदे से संबंधित संपूर्ण जानकारी इलेक्शन</p>
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										<content:encoded><![CDATA[<p>सुप्रीम कोर्ट के आदेश के चलते स्टेट बैंक का इंडिया ने चुनावी चंदे से संबंधित संपूर्ण जानकारी इलेक्शन कमीशन ऑफ इंडिया सौंप दिया है और इलेक्शन कमीशन ऑफ इंडिया की तरफ से अपनी ऑफ़िशियल वेबसाइट पर संपूर्ण जानकारी अपलोड कर दी गई है। अब कोई भी व्यक्ति चुनावी चंदे से संबंधित जानकारी इलेक्शन कमीशन ऑफ इंडिया द्वारा अपलोड किए गए तथ्यों के आधार पर हासिल कर सकता है</p>
<p><a href="https://www.samvaadindia.com/wp-content/uploads/2024/03/sUnkgmGLhg.pdf">बॉण्ड खरीदारों की डिटेल</a></p>
<p><a href="https://www.samvaadindia.com/wp-content/uploads/2024/03/FwBCY25Tlk.pdf">राजनीतिक दलों को मिले चंदे की डिटेल </a></p>
<p>&nbsp;</p>
<p>सुप्रीम कोर्ट के दबाव के चलते उजागर हुआ चुनावी चंदे का पूरा का पूरा सच, देश के संसदीय लोकतंत्र के लिए एक बहुत ही अच्छा संकेत है</p>
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		<title>भारतीय राजनीति में एक और प्रयोग विफल, अरविंद केजरीवाल का राजनैतिक उद्भव और पतन</title>
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		<dc:creator><![CDATA[संवाद इंडिया]]></dc:creator>
		<pubDate>Fri, 22 Mar 2024 04:54:44 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[एक्सक्लूसिव]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>(वाशिंद्र मिश्रा) अरविंद केजरीवाल का राजनीतिक सफर लगभग 12 साल का रहा है !एक आरटीआई एक्टिविस्ट के रूप</p>
<p>The post <a href="https://www.samvaadindia.com/another-failed-experiment-in-indian-politics-political-rise-and-fall-of-arvind-kejriwal/">भारतीय राजनीति में एक और प्रयोग विफल, अरविंद केजरीवाल का राजनैतिक उद्भव और पतन</a> appeared first on <a href="https://www.samvaadindia.com">Samvaad India</a>.</p>
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										<content:encoded><![CDATA[<p>(वाशिंद्र मिश्रा) अरविंद केजरीवाल का राजनीतिक सफर लगभग 12 साल का रहा है !एक आरटीआई एक्टिविस्ट के रूप में शुरू हुआ उनका राजनीतिक सफर दिल्ली के मुख्यमंत्री के पद पर पहुंचने के बाद अब लगता है कि विराम लगने वाला है</p>
<p>अभी तो प्रारंभिक तौर पर अरविंद केजरीवाल के राजनीतिक भविष्य के बारे में कोई भविष्यवाणी करना जल्द बाजी होगी! लेकिन आईटीआई एक्टिविस्ट से लेकर मुख्यमंत्री बनने तक जिस तरह की राजनीति की शुरुआत और राजनीतिक संस्कृति अरविंद केजरीवाल ने शुरू की वह अपने आप में एक नया शोध का विषय हो सकता है! इंडिया अगेंस्ट करप्शन ट्रांसपेरेंसी इन गवर्नेंस politics of disruption कटर ईमानदार का दावा करने वाले अरविंद केजरीवाल आज खुद इस भ्रष्टाचार के दलदल में दिखाई दे रहे हैं जिसका विरोध करके उन्होंने समाज सेवी अन्ना हजारे के साथ एक जन आंदोलन खड़ा किया था!<br />
यह अलग बात है की बाद में उन्होंने खुद अन्ना हजारे को अलग कर दिया और फिर एक-एक करके उन तमाम आम आदमी पार्टी के फाउंडर लीडर्स को बाहर का रास्ता दिखा दिया जिन्होंने दिन-रात मेहनत करके आम आदमी पार्टी बनाई थी सत्ता में आने के बाद अरविंद केजरीवाल ने राजनीतिक में सभी अनैतिक और गंदे tarikon को अपनाया जिसके दम पर नेता लोग apni राजनीतिक सत्ता बचाए रखने की कोशिश में लगे रहते हैं<br />
इसलिए उनकी गिरफ्तारी देर से ही सही लेकिन यह एक तय प्रक्रिया का हिस्सा है और इस तरह से कहा जा सकता है कि अरविंद केजरीवाल जिस ईमानदार छवि के दम पर इतने कम समय में देश की राजनीति में अपनी अलग पहचान बनाने में कामयाब रहे वह एक छलावा था ठीक उसी तरह से जैसे उनके पूर्व भर्ती राजनेताओं ने अपनी छवि बनाकर देश की जनता को लंबे समय तक गुमराह किया और सत्ता की मलाई खाते रहे भारत के राजनीतिक इतिहास में अरविंद केजरीवाल से पहले भी तमाम ऐसे नेता हुए हैं जिन्होंने झूठ fareb धोखाधड़ी के दम पर सत्ता हासिल की है लेकिन समय के साथ वक्त ने उनके साथ भी ठीक उसी तरह से न्याय किया था जिस तरह का न्याय अरविंद केजरीवाल के साथ होता दिखाई दे रहा है<br />
अब मामला जांच एजेंसी और कोर्ट के बीच में है देश की सबसे बड़ी अदालत के सामने भी अरविंद केजरीवाल और उनके साथी जाने की तैयारी में है लोकसभा के चुनाव की प्रक्रिया शुरू हो गई है सभी दल अपने अपने प्रत्याशियों के चयन और उनके ऐलान में जुटे हुए हैं  केजरीवाल की पार्टी भी दिल्ली पंजाब हरियाणा गुजरात गोवा और असम में अपना उम्मीदवार खड़ा करने वाली है केजरीवाल की ईमानदारी और बेईमानी का फैसला देश की सबसे बड़ी लोक अदालत में भी होने वाला है अब देखना है कि देश की अदालतों के अलावा लोक अदालत केजरीवाल के पक्ष में फैसला देती है या जांच एजेंसी के पक्ष में एजेंसी की दावों पर अगर भरोसा किया जाए तो केजरीवाल के खिलाफ दिल्ली के कथित शराब घोटाले में शामिल होने के पर्याप्त सबूत है ऐसी स्थिति में अब अदालत को तय करना है की जांच एजेंसी के द्वारा जुटाए गए एविडेंस कितने प्रमाणिक हैं और कितने भरोसेमंद है, लेकिन एक बात तय है की दिल्ली के कथित शराब घोटाले में अब तक जिस तरह की गिरफ्तारियां हुई है उसके आधार पर कहा जा सकता है की जांच एजेंटीयों के एविडेंस प्रारंभिक तौर पर ज्यादा भरोसेमंद और प्रामाणिक प्रतीत होते हैं</p>
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		<title>त्वैश मिश्रा को मिला रामनाथ गोयनका अवार्ड</title>
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		<dc:creator><![CDATA[संवाद इंडिया]]></dc:creator>
		<pubDate>Tue, 19 Mar 2024 15:11:32 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[उत्तर प्रदेश]]></category>
		<category><![CDATA[एक्सक्लूसिव]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>नई दिल्ली। बड़ी खबर आ रही है दिल्ली से जहां पर द इकोनॉमिक्स टाइम्स के वरिष्ठ पत्रकार त्वैश</p>
<p>The post <a href="https://www.samvaadindia.com/twash-mishra-received-ramnath-goenka-award/">त्वैश मिश्रा को मिला रामनाथ गोयनका अवार्ड</a> appeared first on <a href="https://www.samvaadindia.com">Samvaad India</a>.</p>
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										<content:encoded><![CDATA[<p>नई दिल्ली। बड़ी खबर आ रही है दिल्ली से जहां पर द इकोनॉमिक्स टाइम्स के वरिष्ठ पत्रकार त्वैश मिश्रा को रामनाथ गोयनका अवार्ड से सम्मानित किया गया है उनको यह सम्मान केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी द्वारा प्रदान किया गया है आपको बता दें कि त्वैश मिश्रा काफी दिनों से द इकोनॉमिक्स टाइम्स के लिए काम कर रहे हैं त्वैश मिश्रा वरिष्ठ पत्रकार वसीन्द्र मिश्रा के पुत्र हैं त्वैश की इस उपलब्धि से उनके परिवारजनों और मित्रों में खुशी है।</p>
<p><img decoding="async" class="alignnone size-medium wp-image-202" src="https://www.samvaadindia.com/wp-content/uploads/2024/03/Screenshot_20240319_200452_Chrome-252x300.jpg" alt="" width="252" height="300" srcset="https://www.samvaadindia.com/wp-content/uploads/2024/03/Screenshot_20240319_200452_Chrome-252x300.jpg 252w, https://www.samvaadindia.com/wp-content/uploads/2024/03/Screenshot_20240319_200452_Chrome-861x1024.jpg 861w, https://www.samvaadindia.com/wp-content/uploads/2024/03/Screenshot_20240319_200452_Chrome-768x914.jpg 768w, https://www.samvaadindia.com/wp-content/uploads/2024/03/Screenshot_20240319_200452_Chrome-1024x1218.jpg 1024w, https://www.samvaadindia.com/wp-content/uploads/2024/03/Screenshot_20240319_200452_Chrome.jpg 1080w" sizes="(max-width: 252px) 100vw, 252px" /></p>
<p>त्वैश की स्टोरी जिसमें उन्होंने &#8220;रसिया और यूक्रेन वार के कारण भारतीय रेलवे के द्वारा चाइना की बनी हुई पहिया इंपोर्ट की थी&#8221; का वर्णन किया था और इसी स्टोरी को इस अवार्ड के लिए चुना गया। त्वैश अपनी बेबाक ख़बरों के लिए जाने जाते हैं। बहुत ही कम समय में उन्होंने अपनी बेबाक ख़बरों और लेखनी के कारण अपनी अलग पहचान बना ली है।</p>
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