महिला आरक्षण के नाम पर परिसीमन की साजिश का आरोप, 2023 में पारित विधेयक तुरंत लागू करने की मांग
नई दिल्ली, 18 अप्रैल (संवाददाता)। लोकसभा में संविधान संशोधन विधेयक के गिरने के बाद सियासत तेज हो गई है। कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी वाद्रा ने इसे लोकतंत्र और संविधान की जीत बताते हुए केंद्र सरकार पर गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि महिला आरक्षण के नाम पर परिसीमन को प्रभावित करने की सरकार की साजिश नाकाम हो गई है।
कांग्रेस मुख्यालय में आयोजित प्रेस वार्ता में प्रियंका गांधी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह पर निशाना साधते हुए कहा कि सरकार की मंशा महिला सशक्तिकरण नहीं, बल्कि राजनीतिक लाभ हासिल करना था। उन्होंने आरोप लगाया कि 2011 की जनगणना को आधार बनाकर परिसीमन कराने की तैयारी थी, जिससे भविष्य में सीटों के पुनर्गठन के जरिए सत्ता को फायदा पहुंचाया जा सके।
प्रियंका गांधी ने कहा कि सरकार ने एक “दोहरी रणनीति” अपनाई थी। अगर विधेयक पास हो जाता तो परिसीमन के जरिए राजनीतिक लाभ लिया जाता और अगर पास नहीं होता तो विपक्ष को महिला विरोधी बताकर जनता के बीच भ्रम फैलाया जाता। उन्होंने कहा कि विपक्ष की एकजुटता ने इस पूरी योजना को विफल कर दिया।
उन्होंने संसद का विशेष सत्र अचानक बुलाने और अंतिम समय में विधेयक का मसौदा पेश करने पर भी सवाल उठाए। उनका कहना था कि इससे विपक्ष को पर्याप्त समय नहीं मिला और सरकार खुली बहस से बचना चाहती थी। यह प्रक्रिया लोकतांत्रिक परंपराओं के विपरीत है।
महिला आरक्षण के मुद्दे पर कांग्रेस महासचिव ने स्पष्ट किया कि पूरा विपक्ष इसके समर्थन में है। उन्होंने मांग की कि 2023 में सर्वसम्मति से पारित महिला आरक्षण विधेयक को तुरंत लागू किया जाए। उन्होंने कहा कि लोकसभा की मौजूदा 543 सीटों में से 33 प्रतिशत महिलाओं को आरक्षण देने के लिए विपक्ष पूरी तरह तैयार है।
इसके साथ ही उन्होंने अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) की महिलाओं के लिए भी आबादी के अनुपात में आरक्षण देने की मांग उठाई। उन्होंने कहा कि जब तक ओबीसी महिलाओं को आरक्षण नहीं मिलेगा, तब तक महिला आरक्षण अधूरा रहेगा।
भाजपा के महिला हितैषी दावों पर हमला करते हुए प्रियंका गांधी ने कहा कि देश की महिलाओं ने उन्नाव और हाथरस जैसे मामलों, महिला खिलाड़ियों के विरोध और मणिपुर की घटनाओं में सरकार का रवैया देखा है। उन्होंने आरोप लगाया कि इन मुद्दों पर सरकार संवेदनशीलता दिखाने में विफल रही है।
प्रधानमंत्री और गृह मंत्री के बयानों पर प्रतिक्रिया देते हुए उन्होंने कहा कि भाजपा द्वारा भरोसे की बात करना वास्तविकता से परे है। “जनता का भरोसा इस सरकार से उठ चुका है,” उन्होंने कहा।
सरकार द्वारा इस दिन को “ब्लैक डे” कहे जाने पर प्रियंका गांधी ने पलटवार करते हुए इसे लोकतंत्र का “गोल्डन डे” बताया। उन्होंने कहा कि यह दिन साबित करता है कि संसद में विपक्ष की भूमिका कितनी अहम है और सरकार को हर फैसले में सहमति बनानी चाहिए।
प्रेस वार्ता में कांग्रेस के वरिष्ठ नेता जयराम रमेश भी मौजूद रहे। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में संवाद और पारदर्शिता जरूरी है, न कि एकतरफा निर्णय।
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि इस घटनाक्रम का असर आने वाले चुनावों पर पड़ सकता है। महिला आरक्षण और परिसीमन जैसे मुद्दे अब राष्ट्रीय राजनीति के केंद्र में आ गए हैं और इन पर आगे भी सियासी घमासान जारी रहने की संभावना है।
