सरकार पर ‘राजनीतिक मंशा’ का आरोप; जातिगत जनगणना और पारदर्शी परिसीमन के बिना बिल को बताया अधूरा
नई दिल्ली, 16 अप्रैल। कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी वाड्रा ने लोकसभा में महिला आरक्षण को लेकर केंद्र सरकार पर जोरदार हमला बोला और स्पष्ट रूप से कहा कि महिलाओं को 33 प्रतिशत आरक्षण मौजूदा 543 लोकसभा सीटों के भीतर ही दिया जाना चाहिए। उन्होंने यह भी मांग रखी कि इस आरक्षण में अनुसूचित जाति (SC), अनुसूचित जनजाति (ST) और अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) की महिलाओं के लिए भी अलग से कोटा सुनिश्चित किया जाए।
प्रियंका गांधी ने अपने संबोधन में कहा कि अगर सरकार की मंशा वास्तव में महिला सशक्तिकरण की होती, तो यह बिल बिना किसी देरी के और सर्वसम्मति से आज ही पारित हो सकता था। उन्होंने सरकार को चुनौती देते हुए कहा कि “सही निर्णय ले लीजिए, पूरा विपक्ष आपके साथ खड़ा होगा।”
प्रियंका गांधी ने दो टूक कहा कि कांग्रेस पार्टी महिला आरक्षण के पक्ष में मजबूती से खड़ी है, लेकिन मौजूदा विधेयक में कई गंभीर खामियां हैं, जो इसकी नीयत पर सवाल खड़े करती हैं। उन्होंने कहा कि महिला आरक्षण को लागू करने के नाम पर सरकार एक ऐसा ढांचा तैयार कर रही है, जिससे लोकतांत्रिक संतुलन बिगड़ सकता है।
उन्होंने कहा कि महिलाओं को उनका अधिकार देने के लिए नए परिसीमन या सीटों के विस्तार की कोई आवश्यकता नहीं है। मौजूदा सीटों में ही 33 प्रतिशत आरक्षण लागू किया जा सकता है, जिससे प्रक्रिया सरल और पारदर्शी बनी रहेगी। अपने भाषण में प्रियंका गांधी ने विशेष रूप से OBC महिलाओं के अधिकारों का मुद्दा उठाया। उन्होंने कहा कि यदि महिला आरक्षण में OBC महिलाओं के लिए अलग से प्रावधान नहीं किया गया, तो यह सामाजिक न्याय के सिद्धांत के खिलाफ होगा।
उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार जानबूझकर OBC वर्ग को नजरअंदाज कर रही है। “यह सिर्फ तकनीकी मामला नहीं है, बल्कि करोड़ों लोगों के अधिकारों का सवाल है,।
प्रियंका गांधी ने सरकार द्वारा 2011 की जनगणना को परिसीमन का आधार बनाने के प्रस्ताव पर कड़ी आपत्ति जताई। उन्होंने कहा कि यह जनगणना पुरानी हो चुकी है और इसमें OBC वर्ग की सही संख्या का कोई स्पष्ट डेटा नहीं है।
उन्होंने कहा कि सरकार इस पुराने आंकड़े का इस्तेमाल इसलिए करना चाहती है, ताकि OBC वर्ग के अधिकारों को सीमित किया जा सके। “प्रधानमंत्री Narendra Modi इस आधार पर परिसीमन कराकर OBC का हक छीनना चाहते हैं, लेकिन कांग्रेस ऐसा नहीं होने देगी,। प्रियंका गांधी ने जोर देकर कहा कि जब तक देश में जातिगत जनगणना नहीं कराई जाती, तब तक सही प्रतिनिधित्व सुनिश्चित नहीं किया जा सकता। उन्होंने कहा कि जनसंख्या के आधार पर ही लोकतंत्र में भागीदारी तय होती है, इसलिए सटीक आंकड़े बेहद जरूरी हैं।
उन्होंने यह भी कहा कि सरकार जानबूझकर जातिगत जनगणना से बच रही है, क्योंकि इससे सामाजिक असमानताओं की वास्तविक तस्वीर सामने आ जाएगी। संविधान संशोधन और परिसीमन विधेयक पर बोलते हुए प्रियंका गांधी ने कहा कि यह पूरा मामला सिर्फ महिला आरक्षण का नहीं है, बल्कि इसके पीछे एक बड़ी राजनीतिक रणनीति छिपी हुई है।
उन्होंने आरोप लगाया कि इस विधेयक के जरिए कुछ राज्यों की राजनीतिक ताकत को कम करने की कोशिश की जा रही है। “लोकतंत्र की धज्जियां उड़ाई जा रही हैं और अगले चुनाव के लिए भाजपा के पक्ष में जमीन तैयार की जा रही है।
प्रियंका गांधी ने संसद के प्रस्तावित 50 प्रतिशत विस्तार को लेकर भी गंभीर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि विधेयक में यह स्पष्ट नहीं किया गया है कि यह विस्तार कैसे होगा, इसके नियम क्या होंगे और किन मानकों के आधार पर सीटों का पुनर्विन्यास किया जाएगा। उन्होंने इसे एक “अस्पष्ट और संदिग्ध प्रक्रिया” करार दिया और कहा कि इससे पारदर्शिता पर सवाल उठते हैं।
प्रियंका गांधी ने कहा कि 1971 में संसद में राज्यों की भागीदारी को संतुलित तरीके से तय किया गया था और इस पर बदलाव की रोक भी लगाई गई थी। लेकिन वर्तमान विधेयक के जरिए इस संतुलन को बदलने की कोशिश की जा रही है।
उन्होंने चेतावनी दी कि यदि यह विधेयक इसी रूप में पारित हुआ, तो कई राज्यों की राजनीतिक शक्ति कमजोर हो सकती है, जिससे संघीय ढांचे पर असर पड़ेगा।
प्रियंका गांधी ने असम का उदाहरण देते हुए कहा कि वहां परिसीमन के दौरान सीटों में जो बदलाव किए गए, उससे कई क्षेत्रों का राजनीतिक संतुलन प्रभावित हुआ। उन्होंने आशंका जताई कि यही मॉडल पूरे देश में लागू किया जा सकता है।
प्रियंका गांधी ने कहा कि इस विधेयक के तहत परिसीमन आयोग के तीन सदस्य पूरे देश के राज्यों का राजनीतिक भविष्य तय करेंगे। उन्होंने इसे लोकतंत्र के लिए खतरनाक बताते हुए कहा कि इतनी बड़ी जिम्मेदारी कुछ लोगों के हाथों में देना उचित नहीं है।
अपने भाषण में प्रियंका गांधी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर यह भी आरोप लगाया कि वे अंतरराष्ट्रीय दबावों से घिरे हुए हैं और महिला आरक्षण जैसे महत्वपूर्ण मुद्दे का इस्तेमाल राजनीतिक लाभ के लिए कर रहे हैं।
उन्होंने कहा कि यह एक ऐतिहासिक अवसर था, लेकिन सरकार ने इसे भी सत्ता बनाए रखने के साधन के रूप में इस्तेमाल किया।
प्रियंका गांधी ने कहा कि सरकार ने बिना किसी सर्वदलीय बैठक के आखिरी समय में विधेयक का प्रारूप साझा किया, जिससे विपक्ष को अचानक निर्णय लेने की स्थिति में डाल दिया गया।
उन्होंने इसे “राजनीतिक चाल” बताते हुए कहा कि सरकार जानबूझकर विपक्ष को असहज स्थिति में डालना चाहती थी।
अपने संबोधन के अंत में प्रियंका गांधी ने महिला अधिकारों में कांग्रेस पार्टी के योगदान को भी विस्तार से बताया। उन्होंने कहा कि महिलाओं के समान अधिकार की नींव 1928 की मोतीलाल नेहरू रिपोर्ट और 1931 के कराची अधिवेशन में रखी गई थी।
उन्होंने पूर्व प्रधानमंत्री Rajiv Gandhi का उल्लेख करते हुए कहा कि उन्होंने सबसे पहले पंचायतों और नगर पालिकाओं में महिलाओं के लिए 33 प्रतिशत आरक्षण का प्रस्ताव रखा था, जिसे बाद में कांग्रेस सरकार ने लागू किया।
लोकसभा में प्रियंका गांधी का यह भाषण केवल महिला आरक्षण तक सीमित नहीं रहा, बल्कि उन्होंने इसे सामाजिक न्याय, संघीय ढांचे और लोकतांत्रिक मूल्यों से जोड़ते हुए व्यापक मुद्दा बना दिया।
उन्होंने स्पष्ट संदेश दिया कि कांग्रेस महिला आरक्षण के खिलाफ नहीं, बल्कि उसके “सही और न्यायसंगत स्वरूप” की पक्षधर है। उनके मुताबिक, बिना जातिगत जनगणना, पारदर्शी परिसीमन और सभी वर्गों की भागीदारी सुनिश्चित किए बिना कोई भी आरक्षण अधूरा और असंतुलित रहेगा।
अब यह देखना दिलचस्प होगा कि सरकार इन आरोपों और सुझावों पर क्या रुख अपनाती है और क्या महिला आरक्षण का यह मुद्दा संसद में सहमति का रूप ले पाता है या फिर राजनीतिक टकराव का कारण बना रहेगा।
