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	<title>New Delhi Archives - Samvaad India</title>
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	<title>New Delhi Archives - Samvaad India</title>
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		<title>सीमा पर शांति और स्थिरता बनाए रखना दोनों देशों की सर्वोच्च प्राथमिकता- प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी</title>
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		<dc:creator><![CDATA[संवाद इंडिया]]></dc:creator>
		<pubDate>Wed, 23 Oct 2024 14:45:19 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[अंतरराष्ट्रीय]]></category>
		<category><![CDATA[ब्रेकिंग]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>नई दिल्ली 23 अक्टूबर। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग के बीच हाल ही में कज़ान</p>
<p>The post <a href="https://www.samvaadindia.com/maintaining-peace-and-stability-on-the-border-is-the-top-priority-of-both-countries-prime-minister-narendra-modi/">सीमा पर शांति और स्थिरता बनाए रखना दोनों देशों की सर्वोच्च प्राथमिकता- प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी</a> appeared first on <a href="https://www.samvaadindia.com">Samvaad India</a>.</p>
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										<content:encoded><![CDATA[<p>नई दिल्ली 23 अक्टूबर। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग के बीच हाल ही में कज़ान में हुई द्विपक्षीय वार्ता ने अंतरराष्ट्रीय संबंधों और सीमा विवादों पर चल रही चर्चाओं को एक नया मोड़ दिया है। दोनों नेताओं के बीच यह वार्ता पूर्वी लद्दाख में वास्तविक नियंत्रण रेखा (LAC) पर लंबे समय से जारी तनाव के बीच हुई, जो भारत और चीन के संबंधों में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है। प्रधानमंत्री मोदी ने सीमा पर शांति और स्थिरता को बनाए रखने पर बल दिया, जिसे दोनों देशों की प्राथमिकता बताया।</p>
<p><strong>वार्ता का ऐतिहासिक परिप्रेक्ष्य</strong></p>
<p>इस द्विपक्षीय वार्ता से पहले भारत और चीन के बीच संबंधों में पिछले कुछ वर्षों में गंभीर तनाव पैदा हुआ था, विशेष रूप से 2020 में गलवान घाटी में हुए सैन्य टकराव के बाद। उस संघर्ष में दोनों पक्षों के सैनिकों की जानें गईं, जिसके बाद दोनों देशों के बीच संबंधों में खटास आ गई। गलवान की घटना के बाद से ही सीमा पर स्थिति को लेकर भारत और चीन के बीच कई दौर की सैन्य और कूटनीतिक वार्ताएं हुईं, लेकिन कोई ठोस नतीजा सामने नहीं आ पाया।</p>
<p>हालांकि, ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के इतर प्रधानमंत्री मोदी और शी जिनपिंग के बीच कज़ान में हुई इस औपचारिक मुलाकात को दोनों देशों के बीच बढ़ते तनाव को कम करने और सीमा पर स्थिरता सुनिश्चित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। यह वार्ता पांच साल बाद दोनों नेताओं के बीच हुई पहली औपचारिक बातचीत थी, जो वैश्विक शांति और स्थिरता के लिए भी बेहद महत्वपूर्ण है।</p>
<p><strong>सीमा पर शांति और स्थिरता की प्राथमिकता</strong></p>
<p>प्रधानमंत्री मोदी ने वार्ता के दौरान चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग से स्पष्ट रूप से कहा कि सीमा पर शांति और स्थिरता बनाए रखना दोनों देशों की सर्वोच्च प्राथमिकता होनी चाहिए। उन्होंने कहा, &#8220;हम सीमा पर पिछले चार वर्षों में उत्पन्न हुए मुद्दों पर बनी सहमति का स्वागत करते हैं। हमारा मानना है कि भारत-चीन संबंध न केवल हमारे लोगों के लिए बल्कि वैश्विक शांति, स्थिरता और प्रगति के लिए भी बहुत महत्वपूर्ण हैं।&#8221;</p>
<p><img fetchpriority="high" decoding="async" class="aligncenter wp-image-651 size-full" src="https://www.samvaadindia.com/wp-content/uploads/2024/10/1000409285.jpg" alt="" width="843" height="961" srcset="https://www.samvaadindia.com/wp-content/uploads/2024/10/1000409285.jpg 843w, https://www.samvaadindia.com/wp-content/uploads/2024/10/1000409285-263x300.jpg 263w, https://www.samvaadindia.com/wp-content/uploads/2024/10/1000409285-768x876.jpg 768w" sizes="(max-width: 843px) 100vw, 843px" /></p>
<p>प्रधानमंत्री मोदी ने इस बात पर जोर दिया कि दोनों देशों के बीच विश्वास, सम्मान और संवेदनशीलता को बनाए रखना जरूरी है, ताकि भविष्य में किसी भी तरह की अशांति से बचा जा सके। उन्होंने आगे कहा कि भारत और चीन के बीच संबंधों में सकारात्मकता बनाए रखने के लिए सीमा पर शांति और स्थिरता बेहद जरूरी है। यह न केवल दोनों देशों के नागरिकों के लिए बल्कि क्षेत्रीय और वैश्विक स्थिरता के लिए भी आवश्यक है।</p>
<p><strong>शी जिनपिंग की प्रतिक्रिया</strong></p>
<p>प्रधानमंत्री मोदी के बयान का समर्थन करते हुए चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने भी कहा कि भारत और चीन के बीच किसी भी विवाद को सुलझाने के लिए संवाद और सहयोग का रास्ता अपनाना चाहिए। शी जिनपिंग ने कहा, &#8220;दोनों पक्षों के लिए अधिक संवाद और सहयोग करना, अपने मतभेदों और असहमतियों को ठीक से सुलझाना और एक-दूसरे की विकास आकांक्षाओं को पूरा करने में सहायता करना महत्वपूर्ण है।&#8221;</p>
<p>शी जिनपिंग ने यह भी कहा कि भारत और चीन के लिए यह महत्वपूर्ण है कि वे अपनी अंतरराष्ट्रीय जिम्मेदारियों को समझें और विकासशील देशों के लिए एक मिसाल कायम करें। उन्होंने कहा कि दोनों देशों को बहु-ध्रुवीयता और अंतरराष्ट्रीय लोकतंत्र को बढ़ावा देने के लिए मिलकर काम करना चाहिए।</p>
<p><strong>एलएसी पर गश्त व्यवस्था का समझौता</strong></p>
<p>द्विपक्षीय वार्ता से कुछ ही दिन पहले, भारत और चीन ने वास्तविक नियंत्रण रेखा (LAC) पर गश्त व्यवस्था के संबंध में एक महत्वपूर्ण समझौते पर हस्ताक्षर किए थे। यह समझौता पिछले कई हफ्तों से जारी कूटनीतिक और सैन्य चर्चाओं का परिणाम था, जिसका उद्देश्य सीमा पर शांति और स्थिरता सुनिश्चित करना था। इस समझौते से दोनों देशों के बीच सीमा पर तनाव को कम करने और गश्त को व्यवस्थित तरीके से संचालित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।</p>
<p>विदेश मंत्रालय के अनुसार, यह समझौता दोनों देशों के बीच नियमित गश्त को फिर से शुरू करने के लिए किया गया है, जो कि 2020 के गलवान घटना के बाद बंद हो गई थी। समझौते के तहत दोनों पक्षों ने यह निर्णय लिया है कि सीमा क्षेत्र में शांति और स्थिरता बनाए रखने के लिए नियमित गश्त की जाएगी, ताकि भविष्य में किसी भी तरह के सैन्य टकराव से बचा जा सके।</p>
<p><strong>प्रधानमंत्री मोदी का दृष्टिकोण</strong></p>
<p>प्रधानमंत्री मोदी ने इस द्विपक्षीय वार्ता के दौरान स्पष्ट किया कि भारत-चीन संबंधों का भविष्य आपसी विश्वास, आपसी सम्मान और आपसी संवेदनशीलता पर आधारित होना चाहिए। उन्होंने कहा कि सीमा पर शांति और स्थिरता बनाए रखना न केवल दोनों देशों के लिए बल्कि पूरे विश्व के लिए महत्वपूर्ण है। उन्होंने यह भी कहा कि दोनों देशों को अपने मतभेदों को बातचीत और संवाद के माध्यम से सुलझाना चाहिए, ताकि भविष्य में किसी भी तरह के संघर्ष से बचा जा सके।</p>
<p>प्रधानमंत्री मोदी ने शी जिनपिंग से कहा, &#8220;हमारा मानना है कि भारत-चीन संबंध न केवल हमारे लोगों के लिए बल्कि वैश्विक शांति, स्थिरता और प्रगति के लिए भी बहुत महत्वपूर्ण हैं।&#8221; उन्होंने जोर देकर कहा कि सीमा पर पिछले चार वर्षों में उत्पन्न हुए मुद्दों को सुलझाने के लिए बातचीत और संवाद ही एकमात्र रास्ता है।</p>
<p><strong>वैश्विक परिप्रेक्ष्य में भारत-चीन संबंध</strong></p>
<p>भारत और चीन दुनिया की सबसे बड़ी और तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्थाओं में शामिल हैं। दोनों देशों का न केवल एशिया में बल्कि वैश्विक राजनीति और अर्थव्यवस्था में भी महत्वपूर्ण योगदान है। ऐसे में दोनों देशों के बीच संबंधों का वैश्विक शांति और स्थिरता पर सीधा प्रभाव पड़ता है। प्रधानमंत्री मोदी और शी जिनपिंग के बीच हुई यह वार्ता न केवल द्विपक्षीय संबंधों को सुधारने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है, बल्कि वैश्विक परिप्रेक्ष्य में भी इसका महत्व है।</p>
<p>भारत और चीन के बीच सीमा विवाद एक लंबे समय से चल रहा मुद्दा रहा है, लेकिन दोनों देशों ने हमेशा इस बात पर जोर दिया है कि इन विवादों को बातचीत और संवाद के माध्यम से सुलझाया जाना चाहिए। प्रधानमंत्री मोदी और शी जिनपिंग के बीच हुई इस वार्ता से यह स्पष्ट होता है कि दोनों देश अब भी शांति और स्थिरता को प्राथमिकता दे रहे हैं और सीमा विवादों को सुलझाने के लिए सकारात्मक दृष्टिकोण अपना रहे हैं।</p>
<p><strong>2020 से पहले और बाद के संबंध</strong></p>
<p>भारत और चीन के संबंधों में 2020 में गलवान घाटी में हुए सैन्य संघर्ष के बाद से ही तनाव बढ़ गया था। इस संघर्ष ने दोनों देशों के बीच के संबंधों को गहरा नुकसान पहुंचाया था और दोनों पक्षों के बीच विश्वास की कमी उत्पन्न हो गई थी। हालांकि, पिछले कुछ वर्षों में दोनों देशों के बीच कूटनीतिक और सैन्य स्तर पर कई दौर की वार्ताएं हुईं, जिनका उद्देश्य सीमा पर स्थिति को सामान्य बनाना और तनाव को कम करना था।</p>
<p>2022 में इंडोनेशिया के बाली में और 2023 में दक्षिण अफ्रीका के जोहान्सबर्ग में जी-20 की बैठकों के दौरान भी प्रधानमंत्री मोदी और शी जिनपिंग के बीच मुलाकात हुई थी, लेकिन इन मुलाकातों में कोई औपचारिक बातचीत नहीं हो पाई थी। कज़ान में हुई यह औपचारिक वार्ता दोनों नेताओं के बीच पांच साल में पहली बार हुई थी, जिसमें सीमा विवाद और द्विपक्षीय संबंधों पर गहन चर्चा की गई।</p>
<p><strong>संवाद और सहयोग की आवश्यकता</strong></p>
<p>प्रधानमंत्री मोदी और शी जिनपिंग दोनों ने इस बात पर जोर दिया कि भारत और चीन को अपने मतभेदों को सुलझाने के लिए संवाद और सहयोग का रास्ता अपनाना चाहिए। दोनों नेताओं ने कहा कि संवाद के जरिए ही दोनों देशों के बीच के विवादों को सुलझाया जा सकता है और भविष्य में शांति और स्थिरता को सुनिश्चित किया जा सकता है।</p>
<p>शी जिनपिंग ने भी इस बात पर जोर दिया कि भारत और चीन को बहु-ध्रुवीयता और अंतरराष्ट्रीय लोकतंत्र को बढ़ावा देने के लिए मिलकर काम करना चाहिए। उन्होंने कहा कि दोनों देशों के लिए यह जरूरी है कि वे अंतरराष्ट्रीय मंच पर अपनी जिम्मेदारियों को समझें और विकासशील देशों के लिए एक उदाहरण प्रस्तुत करें।</p>
<p><strong>भारत-चीन संबंधों का भविष्य</strong></p>
<p>कज़ान में हुई इस वार्ता से यह स्पष्ट होता है कि भारत और चीन दोनों ही अपने संबंधों को सुधारने और सीमा पर शांति और स्थिरता बनाए रखने के लिए प्रतिबद्ध हैं। हालांकि, दोनों देशों के बीच अभी भी कई मुद्दों पर मतभेद हैं, लेकिन इस वार्ता से यह संकेत मिलता है कि दोनों पक्ष अब भी बातचीत के जरिए इन मतभेदों को सुलझाने की दिशा में काम कर रहे हैं।</p>
<p>भारत और चीन के बीच सीमा विवाद लंबे समय से चल रहा है, लेकिन दोनों देशों ने हमेशा इस बात पर जोर दिया है कि इन विवादों को बातचीत और संवाद के माध्यम से सुलझाया जाना चाहिए। कज़ान में हुई यह वार्ता इसी दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है, जिससे दोनों देशों के बीच संबंधों में सुधार की संभावना बढ़ गई है।</p>
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		<title>सुप्रीम कोर्ट के कोटा विद इन कोटा के फैसले ने क्या खोला जातीय जनगणना का रास्ता?</title>
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		<dc:creator><![CDATA[संवाद इंडिया]]></dc:creator>
		<pubDate>Fri, 02 Aug 2024 09:52:49 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[उत्तर प्रदेश]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>(वसिंद्र मिश्र) नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट के संविधान पीठ का फैसला भारत के अलग-अलग राजनीतिक दलों के लिए</p>
<p>The post <a href="https://www.samvaadindia.com/did-the-supreme-courts-decision-on-quota-with-these-quotas-open-the-way-for-caste-census/">सुप्रीम कोर्ट के कोटा विद इन कोटा के फैसले ने क्या खोला जातीय जनगणना का रास्ता?</a> appeared first on <a href="https://www.samvaadindia.com">Samvaad India</a>.</p>
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										<content:encoded><![CDATA[<p>(वसिंद्र मिश्र) नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट के संविधान पीठ का फैसला भारत के अलग-अलग राजनीतिक दलों के लिए एक कैच 22 की स्थिति पैदा कर दिया है भारतीय जनता पार्टी की सरकार की तरफ से संविधान पीठ के सामने एससी एसटी के अंदर उप वर्गीकरण का सुझाव दिया गया था संविधान पीठ ने अपने ऐतिहासिक फैसले में एससी-एसटी के अंदर कोटा विद इन कोटा या हम कहें कि क्रीमी लेयर का फार्मूला लागू करने का सुझाव दिया है संविधान पीठ ने साफ कर दिया है कि आजादी के इतने साल बाद भी एससी एसटी जातियों में अभी भी छुआछूत बरकरार है और एससी एसटी वर्ग के अंदर तमाम ऐसी जातियां हैं जो उसी वर्ग के दूसरी जातियों के साथ में छुआछूत में विश्वास रखती है भेदभाव करती है इसलिए जो जातियां अती दलित है अति कमजोरी है उनको वरीयता दी जानी चाहिए और उनका एक वर्गीकरण करके आरक्षण की सुविधा सबसे पहले उनको दी जानी चाहिए सुप्रीम कोर्ट के इस ऐतिहासिक फैसले का तमिलनाडु, तेलंगाना राज्यों के मुख्यमंत्रियों ने स्वागत किया है लेकिन बीएसपी सुप्रीमो मायावती ने इस फैसले का विरोध किया है उनका कहना है कि एससी एसटी वर्ग में अभी भी सामाजिक आर्थिक पिछलापन ज्यादा है इसलिए कोटा विद इन कोटा व्यवस्था लागू नहीं किया जाना चाहिए उनका कहना है कि संविधान पीठ का फैसला व्यावहारिक नहीं है अब मायावती के अपने तर्क हो सकते हैं उनके अपने पॉलिटिकल कंपल्शन हो सकते हैं इसी तरह के पॉलिटिकल कंपल्शन बाकी राजनीतिक दलों का भी हो सकता है लेकिन भारतीय जनता पार्टी की सरकार की तरफ से और सुप्रीम कोर्ट की संविधान पीठ की तरफ वर्गीकरण का फैसला आ गया है और सरकार ने भी कहा है की सुप्रीम कोर्ट के फैसले को माननें में उनको कोई एतराज नहीं है लेकिन अब देखना है की किस तरह से ये फैसला लागू होगा।</p>
<p>सुप्रीम कोर्ट ने अपने फैसले में राज्यों को अधिकार दिया है कि वह अपने-अपने राज्यों में सामाजिक स्थिति का आकलन करके कास्ट और सब कास्ट के एक रिपोर्ट तैयार करें और उस आधार पर अपने अपने राज्यों में एससी एसटी के अंदर कोटा विद इन कोटा लागू करें हम सब जानते हैं कि बिहार में नीतीश कुमार की सरकार ने कई साल पहले महादलित और अति पिछड़ों को लेकर एक वर्गीकरण किया था और उस आधार पर बिहार में आरक्षण की व्यवस्था की थी कहा जाता है नीतीश कुमार का यही ट्रंप कार्ड था जिसके चलते हुए लगातार बिहार के राजनीतिक में रेलीवेंट बने हुए हैं और जब-जब चुनाव होता है तो उनको दलित समाज का अति पिछड़ा या अति गरीब कहिए या महा दलित कहिए नितेश कुमार को वोट देता है और पिछड़ों में भी जो अति पिछड़ा है वह नीतीश कुमार को वोट देता है भारत में कोटा विद इन कोटा लागू करने की शुरुआत 1975 में पंजाब की सरकार ने किया था और उसके देखा देखी आंध्र प्रदेश की सरकार ने भी लागू करने की कोशिश की थी लेकिन इन दोनों राज्य सरकारों के उसे निर्णय को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दे दी गई थी और सुप्रीम कोर्ट ने 2004 में पांच जज की पीठ ने पंजाब और आंध्र प्रदेश सरकार के उसे कोटा विद इन कोटा या वर्गीकरण करने संबंधी फैसले को खारिज कर दिया था और इस तरह से जो पुरानी व्यवस्था थी एससी एसटी पूरे समुदाय को आरक्षण देने की वह अभी तक चली आ रही थी उसके बाद प्रकरण संविधान पीठ के सामने गया और संविधान पीठ ने कई वर्षों तक सुनवाई करने के बाद 1 अगस्त को अपना फैसला सुनाया है सात जजों की संविधान पीठ में से 6 न्यायाधीशों ने कोटा विद इन कोटा या हम कहें क्रीमी लेयर जातियों के वर्गीकरण और उप वर्गीकरण का फैसला सुनाया है और साथ जज में से एक जज जस्टिस वेला त्रिवेदी ने मेजोरिटी फैसले के खिलाफ अपने राय जाहिर की भारत के मुख्य न्यायाधीश डिवाई चंद्रचूड़ की अध्यक्षता में गठित इस संविधान पीठ ने अपने फैसले में 1917 और 1932 में अंग्रेजी हुकूमत के दौरान एससी-एसटी को लेकर कराए गए सर्वे और उन सर्वे रिपोर्ट्स का हवाला दिया डिवाई चंद्रचूड़ ने अपने विस्तृत फैसले में लिखा है कि ब्रिटिश टाइम में भी जो रिपोर्ट पेश हुई थी उसमें एससी एसटी के अंदर छुआ छुआ और जातियों के अंदर भेदभाव की पुष्टि की गई तो 1917 और 1932 की दो रिपोर्ट और उसके बाद के जितने भी विभिन्न डाटा आज अवेलेबल है उसके आधार पर संविधान पीठ ने फैसला सुनाया है कि क्रीमी लेयर की व्यवस्था लागू की जानी चाहिए जातियों के अंदर वर्गीकरण की व्यवस्था लागू होनी चाहिए और एससी-एसटी के अंदर जो सबसे ज्यादा कमजोर है जो पिछड़े हैं उनको आरक्षण की सुविधा मिलनी चाहिए संविधान पीठ के एक जज ने तो यह भी सुझाव दिया है कि एक बार जिस परिवार को आरक्षण की सुविधा मिल गई हो उसको दोबारा इसकी सुविधा नहीं मिलनी चाहिए अब इस तरह का फैसला आने के बाद जो आरक्षण विरोधी तत्व रहे हैं जो शुरू से आरक्षण का विरोध करते रहे हैं जातीय आधार पर उनको एक नया तर्क मिल गया है अपनी बात और मजबूती से रखने के लिए और जब ओबीसी के अंदर क्रीमी लेयर का फार्मूला लागू करने का जजमेंट आया था तब भी और अब एससी एसटी के अंदर जब क्रीमी लेयर और वर्गीकरण के फैसले को लागू करने का सुझाव आया है तब भी ऐसी ताकत है जो आरक्षण का विरोध करती है उनको एक नई एनर्जी मिली है एक नई ऊर्जा मिली है समाज के अंदर अपनी बात करने के लिए। लेकिन अगर संविधान पीठ के फैसले पर गंभीरता से स्टडी किया जाए उसे पर विचार किया जाए तो एक बात सबसे जो महत्वपूर्ण निकलकर आ रही है कि संविधान पीठ ने कहा है कि पता लगाइए जनगणना कराकर एससी एसटी के अंदर एक वर्गीकरण किया जाना चाहिए भारत सरकार पिछले कई वर्षों से जातीय जनगणना को टाल रही है पहले कोविड का सहारा लेकर जनगणना को टाल दिया गया था और अब जब गैर भाजपा सभी पार्टियां जाति आधार पर जनगणना की मांग कर रही है राहुल गांधी अखिलेश यादव तेजस्वी यादव सहित इंडिया एलायंस के ज्यादातर घटक दलों की तरफ से जातीय जनगणना को लेकर चुनाव में भी मुद्दा बनाया गया था और चुनाव परिणाम आने के बाद भी संसद के अंदर और बाहर मुद्दा बनाने की बात की जा रही है तो अब सरकार ऐसी स्थिति में क्या फैसला लेती है यह देखने की बात है क्योंकि भारत के मुख्य न्यायाधीश की अध्यक्षता में गठित संविधान पीठ का फैसला अगर सरकार लागू करना चाहेगी तो उसे स्थिति में उसको सभी कमजोर वर्गों को पता लगाने के लिए एक सर्वे करना पड़ेगा एक जनगणना करना पड़ेगा और वह जनगणना तभी हो सकता है जब जातीय जनगणना पूरे देश में कराई जाए जिसकी मांग इंडिया एलायंस के सभी दल कर रहे हैं तो अब देखना है कि पहली बात यह की संविधान पीठ के इस फैसले का देश के कौन-कौन से राजनीतिक दल खुले तौर पर सपोर्ट कर रहे हैं कौन-कौन से राजनीतिक दल इसमें अपनी अलग राय रखता है और दूसरा अगर सरकार जिस तरह से कोर्ट के अंदर उप वर्गीकरण का वकालत कर चुकी है अगर इस स्टैंड पर कायम रहती है तो फिर उसकी जातिय जनगणना के दिशा में पहल करनी पड़ेगी और अगर वह जाति जनगणना की दिशा में पहल करती है तो राहुल गांधी से लेकर अखिलेश यादव और तेजस्वी यादव का जो पॉलीटिकल स्टैंड है कि वह जाति जनगणना को इसी संसद में पारित कराने की कोशिश करेंगे उनके इस दावे को बल मिलेगा और उसका पॉलीटिकल माइलेज इंडिया एलायंस की पार्टियां लेने की कोशिश करेंगी।</p>
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		<title>प्रतियोगी परीक्षाओं में बड़े पैमाने पर पेपर लीक हुए हैं और गड़बड़ी- जयराम रमेश</title>
		<link>https://www.samvaadindia.com/there-have-been-large-scale-paper-leaks-and-irregularities-in-competitive-examinations-jairam-ramesh/</link>
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		<dc:creator><![CDATA[संवाद इंडिया]]></dc:creator>
		<pubDate>Fri, 28 Jun 2024 08:26:47 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[दिल्ली]]></category>
		<category><![CDATA[Bjp]]></category>
		<category><![CDATA[Congress]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>नई दिल्ली 28 जून।जयराम रमेश ने पेपर लीक पर सरकार पर निशाना साधते हुए कहा है कि पिछले</p>
<p>The post <a href="https://www.samvaadindia.com/there-have-been-large-scale-paper-leaks-and-irregularities-in-competitive-examinations-jairam-ramesh/">प्रतियोगी परीक्षाओं में बड़े पैमाने पर पेपर लीक हुए हैं और गड़बड़ी- जयराम रमेश</a> appeared first on <a href="https://www.samvaadindia.com">Samvaad India</a>.</p>
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										<content:encoded><![CDATA[<p>नई दिल्ली 28 जून।जयराम रमेश ने पेपर लीक पर सरकार पर निशाना साधते हुए कहा है कि पिछले दस वर्षों में देश भर में प्रतियोगी परीक्षाओं में बड़े पैमाने पर पेपर लीक हुए हैं और गड़बड़ी हुई है &#8211; NET और NEET केवल इसके सबसे ताज़ा उदाहरण हैं। सबसे हाल के आंकड़ों के मुताबिक़ देश भर में 2.26 करोड़ युवा इन पेपर लीक से प्रभावित हुए हैं।</p>
<p>यह मोदी सरकार की अक्षमता के साथ-साथ उसमें फैले व्यापक भ्रष्टाचार को भी दिखाता है। अहमदाबाद स्थित एक परीक्षा आयोजित करने वाली कंपनी, जो यूपी पुलिस कांस्टेबल भर्ती परीक्षा सहित कई पेपर लीक में फंसी है और जिसकी वजह से 48 लाख उम्मीदवार प्रभावित हुए हैं, को देश भर में मोदी सरकार और भाजपा की राज्य सरकारों से बार-बार संरक्षण मिल रहा है। यूपी और बिहार सरकार ने कंपनी को ब्लैकलिस्ट कर दिया है, लेकिन अक्टूबर 2023 तक मोदी सरकार उन्हें क़रीब 80 करोड़ के ठेके देती रही।</p>
<p>ऐसा क्यों? क्योंकि कंपनी का मालिक बीजेपी का वैचारिक और राजनीतिक समर्थक है।</p>
<p>The post <a href="https://www.samvaadindia.com/there-have-been-large-scale-paper-leaks-and-irregularities-in-competitive-examinations-jairam-ramesh/">प्रतियोगी परीक्षाओं में बड़े पैमाने पर पेपर लीक हुए हैं और गड़बड़ी- जयराम रमेश</a> appeared first on <a href="https://www.samvaadindia.com">Samvaad India</a>.</p>
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		<title>नीट को लेकर गरीब ग्रामीण नौजवानों की दुहाई दे रही है सरकार और विपक्ष, नौजवानों में असंतोष और आक्रोश</title>
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		<dc:creator><![CDATA[संवाद इंडिया]]></dc:creator>
		<pubDate>Fri, 21 Jun 2024 03:24:10 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[उत्तर प्रदेश]]></category>
		<category><![CDATA[एक्सक्लूसिव]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>(वसिंद्र मिश्र) नई दिल्ली 21 जून। नीट की परीक्षाओं में हुई धांधली को लेकर देश के नौजवान आंदोलित</p>
<p>The post <a href="https://www.samvaadindia.com/government-and-opposition-are-appealing-to-the-youth-of-poor-rural-areas-regarding-neet-examinations-dissatisfaction-and-anger-among-the-youth/">नीट को लेकर गरीब ग्रामीण नौजवानों की दुहाई दे रही है सरकार और विपक्ष, नौजवानों में असंतोष और आक्रोश</a> appeared first on <a href="https://www.samvaadindia.com">Samvaad India</a>.</p>
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										<content:encoded><![CDATA[<p>(वसिंद्र मिश्र) नई दिल्ली 21 जून। नीट की परीक्षाओं में हुई धांधली को लेकर देश के नौजवान आंदोलित हैं, उद्दवलित है, देश की प्रमुख विपक्षी पार्टियां भी आन्दोलित है और कांग्रेस पार्टी के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी से लेकर इंडिया गठबंधन के लगभग सभी नेताओं ने नीट परीक्षा में हुई कथित धाधली के खिलाफ अपनी आवाज़ बुलंद की है। विपक्ष के आरोपों की सफाई देने के लिए देश के शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान मीडिया से मुखातिब हुए हैं। धर्मेंद्र प्रधान के मीडिया की साथ जो चर्चा हुई है उसको भी आप लोगो ने अलग-अलग समाचार माध्यमों के जरिए देखा है, सुना है, अब तक आप लोगों ने पढ़ लिया होगा मैं यहां पर इन दोनों नेताओं की प्रेस कॉन्फ्रेंसेज और उन प्रेस कॉन्फ्सेज के आधार पर कई सवाल उपजे हैं जिनके जवाब जरूरी है।<br />
सबसे पहले हम चर्चा करते हैं देश के शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान की तरफ से प्रेस कॉन्फ्र्स के जरिए नीट परीक्षा में शामिल लाखों युवा को आश्वस्त करने वाली बातों को लेके धर्मेंद्र प्रधान ने प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान आज पहली बार यह स्वीकार किया है कि इस परीक्षा में हुई कथित गड़बड़ी और खामियों के लिए वे खुद को नैतिक रूप से जिम्मेदार मानते हैं। उन्होंने यह भी ऐलान किया है, कि सरकार जल्दी ही एक हाई पावर कमेटी बनाएगी और उस हाई पावर कमेटी में हाई लेवल के टेक्नोक्रैट, ब्यूरोक्रैट, एडमिनिस्ट्रेटर, शिक्षाविद, समाज के अलग-अलग क्षेत्रों के जो एक्सपर्ट होंगे उनको शामिल किया जाएगा, और उस कमेटी की रिकमेन्डेशन आने के बाद एनटीए के स्ट्रक्चर, एनटीए के आमूलचूल परिवर्तनों और सुधार के बारे में विचार किया जाएगा। एक और बात उन्होंने बार &#8211; बार दोहराया है कि मैं विपक्ष के नेताओं से गरीब छात्रों के हित में अपील कर रहा हूँ कि नीट की परीक्षा का राजनीतिकरण न करें, नीट की परीक्षा के राजनीतिकरण से देश के लाखों गरीब छात्रों का भविष्य दांव पर लग जाया, उन्होंने यह भी कहा है कि पिछले सरकार ने संसद में एंटी चीटिंग एक्ट बनाने के लिए बिल पास कर दिया था, और उस बिल में पारित प्राविधान के तहत देश का कानून मंत्रालय जल्दी ही एक विस्तृत नोटिफिकेशन जारी करेगा और उस एंटी चीटिंग बिल के कानून बनने के बाद इस तरह के जो आरोप है, इस तरह की जो गड़बढ़िया हैं, जो देश के अलग-अलग राज्यों में केंद्रीय परीक्षाओं में समय &#8211; समय पर देखने को &#8211; सुनने को मिलती है उस पर अंकुश लगाया जा सकता है अब सवाल यह उठता है कि<br />
क्या महज कानून बना देने से किसी अपराधिक मामले पर लगाम लगाया जा सकता है?<br />
हमारे देश में तमाम इस तरह के कानून मौजूद हैं। चाहे महिलाओं के खिलाफ अत्याचार रोकने का सवाल हो, एस. सी. एस. टी. के खिलाफ रोज होने वाले उत्पीड़न का सवाल हो या इस तरह के तमाम और सामाजिक बुराइयों, और राजनैतिक बुराइयों से लड़ने के लिए या करप्शन को रोकने का सवाल हो इस पर सैकड़ों कानून बने हुए अलग-अलग राज्यों और देश में, तो क्या इन कानूनों ने हमारे समाज के अंदर हमारे देश के अलग-अलग राज्यों में इस तरह की बुराइयों को पूरी तरह से समाप्त कर दिया है, लगाम लगा दिया है। क्या हमने कुछ साल पहले मध्यप्रदेश में हुए व्यापम घोटाले से अब तक कोई सबक नहीं लिया है?</p>
<p><img decoding="async" class="alignnone size-medium wp-image-409" src="https://www.samvaadindia.com/wp-content/uploads/2024/06/images-20-300x193.jpeg" alt="" width="300" height="193" srcset="https://www.samvaadindia.com/wp-content/uploads/2024/06/images-20-300x193.jpeg 300w, https://www.samvaadindia.com/wp-content/uploads/2024/06/images-20-1024x660.jpeg 1024w, https://www.samvaadindia.com/wp-content/uploads/2024/06/images-20-768x495.jpeg 768w, https://www.samvaadindia.com/wp-content/uploads/2024/06/images-20-1536x990.jpeg 1536w, https://www.samvaadindia.com/wp-content/uploads/2024/06/images-20-2048x1321.jpeg 2048w" sizes="(max-width: 300px) 100vw, 300px" /></p>
<p>क्या हमने अब तक अलग-अलग राज्यों में हुए तमाम प्रतियोगी परीक्षाओं के पेपर लीक होने से लेकर उसके कैंसिलेशन तक से कोई सबक नहीं लिया है?<br />
क्या महज कानून बनाना ही इस तरह की बुराइयों पर लगाम लगाना है?<br />
एंटी चीटिंग एक्ट संभवतः जितनी मेरी जानकारी है उसमें देश में सबसे पहले राजनाथ सिंह ने उत्तर प्रदेश में बनाई थी जब राजनाथ सिंह उत्तर प्रदेश की सरकार में शिक्षा मंत्री थे उस समय उत्तर प्रदेश में भारतीय जनता पार्टी की सरकार थी, कल्याण सिंह उस सरकार के मुख्यमंत्री थे। राजनाथ सिंह बहैसियत शिक्षा मंत्री नकल विरोधी कानून बनाए थे और उसके बाद जब चुनाव हुआ तो बीजेपी सत्ता से बेदखल हो गई उसके बाद राज्य में जो सरकार बनी थी उसने उस कानून में बदलाव किया और जब तक वह कानून रहा तब तक उत्तर प्रदेश में हुई परीक्षाओं में तमाम ऐसे लड़के &#8211; लड़किया जेल भेज दिए गए जिनकी कोई बडी गलती नहीं थी जो अभी तक का अनुभव बताता है कि ज्यादातर मामलों में ज्यादातर वक्त में बने कानूनों का सत्ता में बैठे हुए प्रशासनिक अधिकारी अपनी सुविधा के अनुसार उसका दुरुपयोग करते रहे हैं तो क्या जिस तरह से देश में बने अलग-अलग वक्त में अलग-अलग अपराधों की प्रकृति को रोकने के लिए जो कानून बने हैं उन्हीं कड़ी में एक और यह कानून शक्ल लेगा जो कि कुछ पिछले कार्यकाल में नरेंद्र मोदी की सरकार ने संसद के दोनों सदनों से पारित किया था और उसका नोटिफिकेशन होने वाला है जिसकी औपचारिक घोषणा आज देश के शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने की है । एक और जो महत्वपूर्ण सवाल धर्मेंद्र प्रधान से जब पूछा गया तो उनका यह कहना था कि यूजीसी नेट की परीक्षा को कैंसिल करने के पीछे देश के गृह मंत्रालय की तरफ से उनको जानकारी मिली थी। वह जानकारी पुख्ता थी इसलिए उस जानकारी के आधार पर यूजीसी नेट की परीक्षा कैंसल की गई तो नीट की परीक्षा के बारे में भी तो बिहार की सरकार और वहां के जांच एजेंसियों ने कई हफ्ते पहले केंद्र की सरकार और जो परीक्षा आयोजित करती है उस संस्था को और शिक्षा मंत्रालय को जानकारी दे दी थी बावजूद उसके अभी तक नीट के बारे में सरकार ने कोई तार्किक निर्णय क्यों नहीं लिया?<br />
क्या सरकार अभी तक विपक्ष के राजनैतिक प्रेसर का इंतजार कर रही थी?<br />
क्या आज सरकार को लगा नीट के सवाल पर नीट की परीक्षा में हुई कथित धांधली के सवाल पर जिस तरह से आक्रामक मुद्रा में राहुल गांधी से ले के विपक्ष के बाकी नेताओं के तरफ से देखने को मिल रहा है वह आने वाले संसद के सत्र में सरकार के लिए मुश्किल पैदा कर सकता है देश के नौजवानों में सरकार के प्रति नाराजगी और असंतोष बढ़ा सकता है देश की पूरी की पूरी परीक्षा प्रणाली पर एक सवालिया निशान खड़ा कर सकता है और नेट जैसे उच्च स्तरीय संस्था पर उसकी विश्वसनीयता पर सवाल खड़ा कर सकता है इसलिए आज देश के शिक्षा मंत्री को मीडिया के सामने मुखातिब होना पडा है और आज उन्होंने नैतिक तौर पर अपनी जिम्मेदारी ली है, ज़िम्मेदारी स्वीकार की। हम सब जानते हैं कि जिस समय सेंट्रलाइज़ एडमिशन सिस्टम को लेकर केंद्र की सरकार कानून बना रही थी और इस संस्था का गठन कर रही थी तब से लगातार दक्षिण भारत के राज्यों की तरफ से इसका विरोध होता रहा। तमिलनाडु की तरफ से लगातार इस बात का आरोप लगाया जाता रहा कि नेट के जरिए दक्षिण भारत के राज्यों के नौजवानों के साथ, अभ्यर्थियों के साथ नाइंसाफी करने की तैयारी चल रही है। यह कानून जब बना, यह संस्था जब बनी अपने गठन के वक्त से ही लगातार विवादों में रही है लेकिन सरकार ने उन सभी आपत्तियों को, उन सभी आशंकाओं को सिरे से खारिज करते हुए इस संस्था का गठन किया और उस संस्था को प्रतियोगी परीक्षाओं को आयोजित करने की जिम्मेदारी सौंप दी । हम सबने देखा है कि शुरुआती दौर में पहले संस्था के एक अधिकारी की तरफ से, फिर देश के शिक्षा मंत्री की तरफ से नीट में हुई कथित धांधली के आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया गया था और जब एक &#8211; एक कर के लोग गिरफ्तार हो रहे है, अब एक &#8211; एक करके जब उसके तार एक-दूसरे से जुड़ते नजर आ रहा है जब एक &#8211; एक करके इस कथित घोटाले का केंद्र देश के कुछ राज्य बनते दिखाई दे रहे हैं तब केंद्र के शिक्षा मंत्री और उनकी विभाग की तरफ से पूरे मामले के उच्च स्तरीय जांच कराने की मांगों को स्वीकार कर लिया गया है, अब अभी तक जो उच्च स्तरीय कमेटी बनने जा रही है उसका नोटिफिकेशन नहीं जारी हुआ उस उच्चस्तरीय कमेटी में कौन-कौन मेम्बर होगा उनके नामों का भी ऐलान नहीं हुआ।</p>
<p>अब हम आते हैं राहुल गांधी की आज की प्रेस कॉन्फ्रेंस पर, राहुल गांधी ने आज एक बार फिर सीधे तौर पर भारतीय जनता पार्टी, संघ परिवार और उनसे जुडे हुए पदाधिकारियों और अधिकारियों पर हमला बोला है। उन्होंने अपने प्रेस कॉन्फ्रेंस में सीधे तौर पर आरोप लगाया है, कि देश के तमाम संस्थाओं पर एक विचारधारा विशेष के लोगों के नियुक्ति हो रही है और उस विचारधारा विशेष के लोगों के जो क्षमता है जो उनकी विश्वसनीयता है वह इस लायक नहीं है, कि वे इतने महत्वपूर्ण संस्थानों के मुखिया के रूप में इस तरह की परीक्षाओं का बिना किसी विवाद के, बिना किसी आरोप के उसका आयोजन कर सके उसको संपन्न करा सके। राहुल गांधी ने यह भी आरोप लगाया है कि पिछले 10 वर्षों से लगातार देश के लगभग सभी संस्थाओं पर एक विचारधारा विशेष के लोगों को तैनात किया जाता रहा है और इस तैनाती में क्षमता योग्यता और विश्वसनीयता की अनदेखी की जाती रही है जिसका नतीजा है कि ज्यादातर संस्थाए पीछे होती जा रही है। उन संस्थाओं का प्रदर्शन गिरता जा रहा है उनका शासन बहुत ही खराब होता जा रहा है। राहुल गांधी ने सीधे प्रधानमंत्री पर भी आरोप लगाया है और उन्होंने कहा है कि प्रधानमंत्री की कोशिश इस समय देश के नौजवानो की समस्याओं के निराकरण से ज्यादा लोकसभा में स्पीकर कौन होगा इसके चयन को लेके हैं। प्रधानमंत्री की सारी चिंता इस बात की है कि किसी भी तरह से लोकसभा के स्पीकर के पद पर अपने पसंदीदा व्यक्ति की तैनाती कराई जाए उनका यह भी आरोप है कि प्रधानमंत्री से लेकर उनकी पूरी की पूरी सरकार पारदर्शिता और विश्वसनीयता से काम नहीं कर रहे। यही कारण है कि चाहे नेट की परीक्षा हो या नीट की परीक्षा हो या अलग-अलग राज्यों में पिछले कुछ वर्षों में हुई पेपर लीक की घटनाएं हों उन सभी मामलों में सरकार का प्रदर्शन संस्थाओं का प्रदर्शन बेहद निराशाजनक और लचर रहा है, उन्होंने मांग की है कि नीट की कथित घोटाले के जांच के साथ &#8211; साथ इस पूरे मामले में यथा शीघ्र तार्किक कार्रवाई होनी चाहिए जिससे कि देश के लाखों नौजवानों का भविष्य बचाया जा सके। अब दोनों तरफ से देश के नौजवानों के भविष्य की दुहाई दी जा रही है आपने सुना होगा कि देश के शिक्षा मंत्री भी अपने बचाव में देश के उन तमाम गरीब ग्रामीण क्षेत्र के नौजवानों के भविष्य की दुहाई दे रहे और विपक्ष से अपील कर रहे हैं कि वे देश के लाखों गरीब ग्रामीण क्षेत्र के नौजवानों के भविष्य को ध्यान में रखते हुए नीट की परीक्षा पर किसी भी तरह का संदेह पैदा न करें और राहुल गांधी भी देश के उन्ही लाखों गरीब वंचित नौजवानों की बात कर रहे हैं और कह रहे हैं इस सरकार की तरफ से, सरकार द्वारा अपॉइंटेड एजेंसीज की तरफ से, सरकार द्वारा गठित संस्थाओं की तरफ से और सरकार द्वारा इन संस्थाओं में अप्वाइंटेड अधिकारियों की तरफ से जो काम हो रहा है उनके चलते देश के लाखों &#8211; लाखों नौजवान अपने भविष्य को डूबता देख रहा है और यह बहुत गंभीर विषय है, देश के भविष्य का सवाल है क्योंकि अगर देश के नौजवान का भविष्य सुरक्षित नहीं होगा तो देश का भी भविष्य सुरक्षित नहीं होगा। अब इससे एक बात बिल्कुल तय है कि संसद के आने वाले सत्र में लोकसभा के स्पीकर का चयन तो प्राथमिकता पर है टॉप एजेंडा है लेकिन उसके साथ ही संपूर्ण विपक्ष की कोशिश है कि नीट और नेट जैसे परीक्षाओं में कोई कथित धाधली को लेकर सरकार के घेरा बंदी किया जाए सरकार को कठघरे में खड़ा किया जाए और देश के लाखों नौजवानों को न्याय दिलाया जाए और ये जो कथित घोटाला हुआ है इसकी जांच करके इस घोटाले में शामिल व्यक्तियों और विरोह को कठोर से कठोर कार्रवाई कराई जाए। उनके विरुद्ध कठोर से कठोर दंड दिया जाए। अभी सरकार को तय करना है कि सरकार विपक्ष के इस आक्रमक रुख को देखते हुए सरकार लाखों नौजवानों के असंतोष और आक्रोश को देखते हुए कितना जल्दी सुधारात्मक उपाय करती है या अभी इस मामले को कुछ दिन और टालने की पक्षधर है लेकिन एक बात तय है कि पिछले कुछ दिनों से लगातार सरकार पर दबाव बढता जा रहा है और यह भी तय है कि नौजवानों की नाराजगी सरकार के प्रति लगातार और उग्र होती जा रही सबसे दिलचस्प बात यह है कि नीट की परीक्षा में हुए कथित घोटाले को लेकर अन्य छात्र संगठनों के साथ &#8211; साथ भारतीय जनता पार्टी से जुड़े अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद की तरफ से भी विरोध किया जा रहा है और परीक्षा में हुई कथित धांधली के खिलाफ आवाज़ उठाई जा रही है। वैसे एक बात बिल्कुल तय है कि नीट की परीक्षा में हुई कथित धांधली के मामले में पार्टी से हट कर नौजवानों का गुस्सा लगातार बढ़ रहा है। बेहतर होगा कि सरकार नौजवानों के इस बढ़ते गुस्से का आकलन करके इस पर जल्दी से जल्दी कोई फैसला ले और नौजवानों के वक्त और उनके भविष्य के साथ न्याय करें।</p>
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		<title>क्या नीतीश कुमार की ख़राब सेहत एनडीए की ख़राब कर सकती है सेहत?</title>
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		<dc:creator><![CDATA[संवाद इंडिया]]></dc:creator>
		<pubDate>Tue, 18 Jun 2024 12:22:50 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[अंतरराष्ट्रीय]]></category>
		<category><![CDATA[खास खबर]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>(वाशिंद्र मिश्रा) एनडीए सरकार का पहला शक्ति परीक्षण 26 जून को होने जा रहा है। शक्ति परीक्षण का</p>
<p>The post <a href="https://www.samvaadindia.com/can-nitish-kumars-poor-health-spoil-the-health-of-nda/">क्या नीतीश कुमार की ख़राब सेहत एनडीए की ख़राब कर सकती है सेहत?</a> appeared first on <a href="https://www.samvaadindia.com">Samvaad India</a>.</p>
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										<content:encoded><![CDATA[<p>(वाशिंद्र मिश्रा) एनडीए सरकार का पहला शक्ति परीक्षण 26 जून को होने जा रहा है। शक्ति परीक्षण का कारण लोकसभा के स्पीकर का चुनाव है। परंपरा के मुताबिक लोकसभा का स्पीकर सत्तारुढ़ दल का होता है। भाजपा या एनडीए आज की तारीख में सत्तारुढ़ दल है। सत्तारुढ़ गठबंधन है इसलिए स्पीकर एनडीए की तरफ से होना चाहिए लेकिन पिछले कुछ वर्षों से सामान्य तौर पर यह देखा जा रहा है कि देश की राजनीति में संसदीय परंपराओं और मान्यताओं का जिस तेजी से क्षरण हो रहा है उसके चलते इस आदर्श स्थिति की कल्पना करना मुश्किल लग रहा है या हम कह सकते हैं कि दीवास्वप्न लग रहा है। एनडीए की तरफ से कोशिश है कि वह अपना उम्मीदवार स्पीकर के पद पर बिठाए, इंडिया गठबंधन की कोशिश है कि स्पीकर के चुनाव को लेकर एनडीए सरकार के बहुमत का एनडीए सरकार के शक्ति परीक्षण का एक आधार तैयार किया जाए। एनडीए ने अपने सभी घटक दलों के नेताओं से बातचीत और विमर्श शुरू कर दिया है एक राउंड की बैठक केंद्रीय रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह के घर में हो चुकी है और लगातार बैठकों का सिलसिला जारी है। इंडिया गठबंधन की तरफ से भी माइंड गेम चल रहा है। इंडिया गठबंधन की पहली कोशिश है कि एनडीए में किसी भी तरह से एक बिखराव पैदा किया जाए और स्पीकर के सवाल पर जनता दल युनाइटेड और तेलुगु देसम पार्टी में की तरफ से किसी एक को उम्मीद्दार बनाया जाए। शिवसेना उद्भव की तरफ से इस बात का संकेत दिया जा चुका है कि अगर तेलुगु देशम पार्टी स्पीकर पद के लिए दावा पेश करती है तो शिवसेना और इंडिया गठबंधन उसको समर्थन देने पर विचार कर सकता है। यह कोई गंभीर ठोस प्रस्ताव नहीं है। एनडीए की भरपूर कोशिश है कि यह संदेश दिया जाए कि जिस तरह से एनडीए 1 और एनडीए 2 नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में सरकारें चली उसी तरह से एनडीए 3 की सरकार में नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में नरेंद्र मोदी की इच्छानुसार नरेंद्र मोदी के ही एक्शन प्लान के मुताबिक चलेंगे इसलिए कैबिनेट के विस्तार के समय कैबिनेट के फॉर्मेशन के समय नरेंद्र मोदी ने सभी पुराने चेहरों को एक बार फिर मंत्रि परिषद में जगह दे दिया और इसके पीछे एक ही सोच है कि यह संदेश दिया जाए देश की जनता में अपने राजनीतिक विरोधियों को कि सब कुछ ठीक चल रहा है एनडीए में तीसरा जो कार्यकाल है वह भी उसी तरह से रहेगा जिस तरह से एनडीए 1 और एनडीए 2 का कार्यकाल था। लेकिन इंडिया गठबंधन इस बार पिछले समय के मुताबिक ज्यादा सशक्त ज्यादा मजबूत और ज्यादा ऑर्गेनाइज दिखाई दे रहा है और राजनीति में सबसे बड़ा कारण होता है मनौवैज्ञानिक होता है मोराल का होता है और आज की तारीख में इंडिया गठबंधन में शामिल घटक दलों का मोराल काफी हाई है। खासतौर से कांग्रेस पार्टी का जो कि इंडिया गठबंधन का सबसे बड़ा घटक दल है और दूसरे नंबर पर समाजवादी पार्टी का और उसके मुखिया अखिलेश यादव का अब उम्मीद की जा रही है कि इंडिया गठबंधन की तरफ से इस बात की भरपूर कोशिश होगी कि आखिर समय तक स्पीकर के चुनाव को लेकर एनडीए को मनोवैज्ञानिक दबाव में रखा जाए और अगर किसी भी तरह से गुंजाइश बनती है कोई संभावना आती है तो एनडीए में स्पीकर के सवाल पर विचारों में मतभेद बनाने की कोशिश किया जाए। टीडीपी और जनता दल युनाइटेड दोनों इस बात को अच्छी तरह समझते हैं उनको पता है कि अगर स्पीकर के सवाल पर उन्होंने भारतीय जनता पार्टी से सीधे टकराव मोल लिया तो एनडीए सरकार का भविष्य भी दांव पर लग सकता है लेकिन दूसरी तरफ यह भी चिंता है कि अगर स्पीकर के पद भारतीय जनता पार्टी की तरफ से कोई चुना जाता है या काबिज होता है तो फिर भविष्य की राजनीति के लिए टीडीपी और जनता दल यूनाइटेड के लिए भी उतना ही खतरा हो सकता है जितना खतरा कि इंडिया गठबंधन में शामिल छोटे दलों के लिए हो सकता है इसलिए स्पीकर की भूमिका को लेकर स्पीकर के अधिकारों को लेकर स्पीकर का महत्वपूर्ण है उसको लेकर खींचतान बनी हुई है। अब देखना है कि एनडीए स्पीकर के चुनाव में बाजी मारता है या इंडिया गठबंधन स्पीकर के सवाल पर एनडीए में बिखराव पैदा करने में कामयाबी हासिल कर लेता है।<br />
दूसरा महत्वपूर्ण राजनैतिक घटनाक्रम पिछले 48 घंटे में देखने को मिला है। बताया जा रहा है जनता दल यूनाइटेड के मुखिया बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की तबीयत खराब हो गई है। सुनने में ये भी आ रहा है कि उनको गहन मेडिकल परीक्षण में रखा गया है और उनका इलाज चल रहा है अगर नीतीश कुमार का स्वास्थ बिगड़ता है तो उसका सीधा असर जनता दल यूनाइटेड के राजनीतिक सम्भावनाओं पर भी पड़ सकता है। अगर नीतीश कुमार किन्हीं कारणों से अस्वस्थ रहते हैं लंबे समय तक तो इसका सीधा असर बिहार की राज्य सरकार के राजनैतिक भविष्य पर उसकी स्थिरता पर भी पड़ सकता है। इस तरह भी इंडिया और एनडीए के घटक दलों के प्रमुख नेताओं की नजर है। उनकी निगाहें है वे नीतीश कुमार के स्वास्थ को लेकर तरह तरह की अटकलबाइयों का बाज़ार गर्म है। माना ये जा रहा है कि जिस तरह की अस्वस्थता नीतीश कुमार को देखने को मिल रही है वह निकट भविष्य मे न केवल बिहार के सरकार के राजनैतिक भविष्य पर असर डाल सकता है बल्कि एनडीए की जो दिल्ली में सरकार है उसके भविष्य पर भी उसकी स्टेबिलिटी पर भी आसार डाल सकता है।<br />
तीसरा एक महत्वपूर्ण घटनाक्रम हुआ है पिछले 24 घंटों में, राहुल गांधी ने रायबरेली संसदीय सीट उसको अपने पास रखा है और वायनाड संसदीय सीट से त्याग पत्र दे दिया है वायनाड संसदीय क्षेत्र से प्रियंका गांधी अब चुनाव लड़ेंगी। माना जा रहा है कि इसके पीछे कांग्रेस पार्टी की भविष्य के लिए राजनैतिक रणनीति है। ये तो यही है उत्तर प्रदेश में जो खोया हुआ जनाधार है उसको दोबारा वापस लाया जाए। उस खोए हुए जनाधार को वापस लाने के लिए राहुल गांधी का पूरे उत्तर प्रदेश में सघन राजनैतिक दौरा कराया जाय दूसरी रणनीति हैं कि दक्षिण भारत हमेशा से कांग्रेस पार्टी के लिए ऑक्सीजन का काम करता रहा। कांग्रेस नेतृत्व खासतौर से गांधी परिवार पर जब जब राजनैतिक संकट आया दक्षिण भारत ने गांधी परिवार की मदद की कांग्रेस पार्टी की मदद की कांग्रेस पार्टी को दोबारा सत्ता में वापसी कराया इसलिए दक्षिण भारत में भी गांधी परिवार और कांग्रेस पार्टी अपना राबता अपना सरोकार अपनी प्रतिबद्धता बनाए रखना चाहती हैं इसलिए परिवार के सबसे करीबी और राहुल गांधी के सबसे भरोसेमंद प्रियंका गांधी को वायनाड की सीट दी गई हैं। कल जब राहुल गांधी और मल्लिकार्जुन खड़गे रायबरेली और वायनाड के बारे में अपना निर्णय सुना रहे थे उसके बाद जब प्रियंका गांधी से पूछा गया कि आपका क्या मानना है कि राहुल गांधी ने वायनाड छोडकर ठीक किया या खराब किया। प्रियंका गांधी ने आश्वस्त किया है कि वायनाड की जनता को राहुल गांधी की कमी महसूस नहीं होने दी जाएगी। उन्होंने ये भी कहा है कि वे खुद राहुल गांधी के जितने भी वायदे हैं जितने भी अधूरे काम है जो वायनाड की जनता से राहुल गांधी ने किए हैं उन सभी वादों और अधूरे कार्यों को वे पूरा करने की कोशिश करेंगी। प्रियंका ने दावा किया है कि राहुल और प्रियंका दोनो रायबरेली अमेठी और वायनाड तीनों संसदीय क्षेत्रों में लगातार जाते रहेंगे। वहां की जनता से मिलते रहे। वहाँ की जनता के दुख दर्द में हिस्सेदारी निभाते रहेंगे और उनकी समस्याओं के निराकरण करने की कोशिश करते रहेंगे। ये जो 3 महत्वपूर्ण राजनैतिक घटनाक्रम है ये आने वाले समय में देश की राजनीति की दिशा और दशा तय करने वाले हैं। लोकसभा स्पीकर का चुनाव एनडीए सरकार के लिए एक बहुत बड़ा चुनौतीपूर्ण काम है अगर एनडीए की सरकार स्पीकर के पद पर अपना उम्मीदवार जिताने में कामयाब हो जाती है। तो आने वाले कुछ महीने के लिए एनडीए की सरकार को राजनैतिक ताकत मिल जाएगी और वे आप अपना पॉलिटिकल एजेंडा आगे बढ़ा सकते हैं।</p>
<p>The post <a href="https://www.samvaadindia.com/can-nitish-kumars-poor-health-spoil-the-health-of-nda/">क्या नीतीश कुमार की ख़राब सेहत एनडीए की ख़राब कर सकती है सेहत?</a> appeared first on <a href="https://www.samvaadindia.com">Samvaad India</a>.</p>
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		<title>बीजेपी और निर्वाचन आयोग को राहत, विपक्षी दलों को झटका</title>
		<link>https://www.samvaadindia.com/relief-to-bjp-and-election-commission-shock-to-opposition-parties/</link>
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		<dc:creator><![CDATA[संवाद इंडिया]]></dc:creator>
		<pubDate>Fri, 26 Apr 2024 12:17:32 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[एक्सक्लूसिव]]></category>
		<category><![CDATA[खास खबर]]></category>
		<category><![CDATA[लोकसभा चुनाव 2024]]></category>
		<category><![CDATA[Election commission]]></category>
		<category><![CDATA[New Delhi]]></category>
		<category><![CDATA[Supreme court order]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>दिल्ली 26 अप्रैल। ई वी एम और स्त्री धन के मामले में सुप्रीम कोर्ट के दो ऐतिहासिक फैसलों</p>
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										<content:encoded><![CDATA[<p>दिल्ली 26 अप्रैल। ई वी एम और स्त्री धन के मामले में सुप्रीम कोर्ट के दो ऐतिहासिक फैसलों ने देश की राजनीति में एक नया आयाम जोड़ दिया है स्त्री धन और ई वी एम दो ऐसे विषय रहे हैं जिनको लेकर पिछले कई वर्षों से अदालतों के अंदर और बाहर डिबेट देखने को मिलता रहा है हम सबसे पहले ईवीएम के बारे में सुप्रीम कोर्ट की तरफ से दिए गए फैसले का विश्लेषण करेंगे<br />
और उसके बाद स्त्री धन को लेकर भी देश की सबसे बड़ी अदालत का जो नजरिया है उससे अवगत कराएंगे।<br />
हम सब जानते हैं कि 2009-10 में सबसे पहले ई वी एम की जगह बैलेट पेपर के माध्यम से चुनाव कराने की मांग भारतीय जनता पार्टी के नेता लाल कृष्ण आडवाणी ने की थी। लालकृष्ण आडवाणी के करीबी बीजेपी के तमाम बड़े नेताओं ने इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन की निष्पक्षता उसके विश्वसनीयता पर सवाल खड़ा किया था तब से यह विवाद चल रहा था।<br />
2014 में जब नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारतीय जनता पार्टी को देश के सत्ता की बागडोर मिली तो सभी गैर भाजपा दलों के नेताओं ने एक बार फिर ई वी एम के मुद्दे को देश की जनता की अदालत से लेकर सर्वोच्च अदालत तक में पहुंचा दिया। सुप्रीम कोर्ट में लगभग एक दर्जन संगठनों की तरफ से इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन की जगह वैलेट पेपर से चुनाव कराने की याचिकाएं दाखिल की गई थी<br />
इन याचिकाओं में याचिकर्ताओं की तरफ से निर्वाचन आयोग से चुनाव कराने की पुरानी व्यवस्था को बहाल करने की मांग की गई थी सुप्रीम कोर्ट की डबल बेंच ने गहन समीक्षा और सुनवाई के बाद इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन को हटाकर बैलेट पेपर से चुनाव कराने की पुरानी व्यवस्था को बहाल करने संबंधी याचिका को खारिज कर दिया सुप्रीम कोर्ट ने साफ कर दिया है की ई वी एम को हटाकर बैलेट पेपर से चुनाव कराने के लिए पेटीशनर्स की तरफ से कोई ठोस दलील पेश नहीं की जा सकी सुप्रीम कोर्ट ने अपेक्षा की है की संवैधानिक संस्थाओं के क्रेडिबिलिटी बचाए रखने की जिम्मेदारी सब की है इसलिए बगैर किसी ठोस प्रमाण के संवैधानिक संस्थाओं के विश्वसनीयता पर सवाल खड़ा करना उचित नहीं सुप्रीम कोर्ट के इस निर्णय ने निर्वाचन आयोग और भारतीय जनता पार्टी को एक बहुत बड़ी रिलीफ दी है<br />
वहीं दूसरी तरफ सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले को चुनाव प्रचार के बीच में गैर भाजपा दलों के लिए एक झटके के रूप में देखा जा रहा है सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले के बाद कांग्रेस पार्टी ने खुद को दूरी बनाए रखते हुए साफ किया है कि उसकी तरफ से कोई पिटीशन फाइल नहीं किया गया था कांग्रेस पार्टी की तरफ से अपने बचाव में 2009 में बीजेपी के शीर्ष नेता लाल कृष्ण आडवाणी द्वारा ईवीएम के खिलाफ दिए गए बयानों का हवाला दिया गया है<br />
तार्किक तौर पर भले कांग्रेस पार्टी बचाव करने में सफल दिखाई दे रही हो लेकिन सच्चाई यह है की सुप्रीम कोर्ट के आए फैसले ने सभी बीजेपी विरोधी दलों को कटघरे में खड़ा कर दिया है<br />
दूसरा महत्वपूर्ण फैसला स्त्री धन पर कानूनी अधिकार का है हम सब जानते हैं कि भारतीय परिवारों में स्त्री धन पर अधिकार को लेकर हमेशा से विवाद और तकरार रहा है और समय-समय पर अधिकार को लेकर अदालत में भी याचिकाएं दाखिल होती रही है<br />
सुप्रीम कोर्ट की तरफ से स्त्री धन पर अधिकार के बारे में भी बहुत ही ऐतिहासिक फैसला आया है सुप्रीम कोर्ट ने साफ कर दिया है की स्त्री धन पर एकमात्र स्त्री का ही अधिकार होता है स्त्री धन पर स्त्री को उसके अधिकार से वंचित नहीं किया जा सकता<br />
इस तरह से इन दो फैसलों ने जहां एक तरफ राजनीतिक दलों में खलबली पैदा कर दी है वहीं दूसरी तरफ भारतीय परिवारों में तकरार के मुद्दे को हमेशा के लिए समाप्त कर दिया है</p>
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		<item>
		<title>कांग्रेस का वादा- स्वास्थ्य सुविधा और सुरक्षित रोजगार मिलेगा, न्यूनतम मजदूरी 400 रुपये प्रतिदिन और मुख्य सरकारी कार्यों में ठेका प्रथा बंद होगी </title>
		<link>https://www.samvaadindia.com/congresss-promise-health-facilities-and-secure-employment-will-be-provided-minimum-wage-will-be-rs-400-per-day-and-contract-system-will-be-stopped-in-main-government-works/</link>
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		<dc:creator><![CDATA[संवाद इंडिया]]></dc:creator>
		<pubDate>Wed, 27 Mar 2024 06:25:09 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[राष्ट्रीय]]></category>
		<category><![CDATA[लोकसभा चुनाव 2024]]></category>
		<category><![CDATA[Congress]]></category>
		<category><![CDATA[Loksabha election]]></category>
		<category><![CDATA[New Delhi]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>नई दिल्ली, 26 मार्च, कांग्रेस ने कहा कि मोदी सरकार में खेतिहर मजदूर और श्रमिकों की हालत खराब</p>
<p>The post <a href="https://www.samvaadindia.com/congresss-promise-health-facilities-and-secure-employment-will-be-provided-minimum-wage-will-be-rs-400-per-day-and-contract-system-will-be-stopped-in-main-government-works/">कांग्रेस का वादा- स्वास्थ्य सुविधा और सुरक्षित रोजगार मिलेगा, न्यूनतम मजदूरी 400 रुपये प्रतिदिन और मुख्य सरकारी कार्यों में ठेका प्रथा बंद होगी </a> appeared first on <a href="https://www.samvaadindia.com">Samvaad India</a>.</p>
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										<content:encoded><![CDATA[<p>नई दिल्ली, 26 मार्च, कांग्रेस ने कहा कि मोदी सरकार में खेतिहर मजदूर और श्रमिकों की हालत खराब है। इसलिए कांग्रेस श्रमिक न्याय लेकर आई है, जिससे लोगों को न्याय मिल सके। कांग्रेस ने आंकड़ों के साथ मोदी सरकार के कार्यकाल में खेतिहर मजदूर, मजदूर और श्रमिकों की खस्ता हालत की पोल खोली। कांग्रेस ने कहा कि केंद्र में कांग्रेस की सरकार आने पर सभी श्रमिकों के लिए स्वास्थ्य के अधिकार कानून की गारंटी दी जाएगी। राष्ट्रीय स्तर पर न्यूनतम मजदूरी को बढ़ाकर 400 रुपये प्रतिदिन किया जाएगा, जो मनरेगा श्रमिकों के लिए न्यूनतम होगी। कांग्रेस शहरी क्षेत्रों के लिए रोजगार गारंटी कानून लाएगी। सभी असंगठित श्रमिकों के लिए जीवन बीमा और दुर्घटना बीमा सहित व्यापक सामाजिक सुरक्षा की गारंटी दी जाएगी। मुख्य सरकारी कार्यों में रोज़गार के लिए ठेका प्रथा बंद की जाएगी।</p>
<p>कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने कहा कि मोदी सरकार के कार्यकाल में 2014-15 और 2021-22 के बीच वास्तविक मजदूरी की वृद्धि दर प्रति वर्ष एक प्रतिशत से भी कम थी। खेत मजदूरों के लिए केवल 0.9 प्रतिशत थी। निर्माण कर्मियों के लिए मात्र 0.2 प्रतिशत थी। गैर-कृषि श्रमिकों के लिए सिर्फ़ 0.3 प्रतिशत थी। कांग्रेस-यूपीए-2 (2009-10 से 2013-14) के दौरान वास्तविक कृषि और गैर-कृषि ग्रामीण मजदूरी क्रमशः 8.6 प्रतिशत और 6.9 प्रतिशत प्रति वर्ष की दर से बढ़ी। इसके विपरीत मोदी सरकार के दूसरे कार्यकाल में वास्तविक ग्रामीण मजदूरी की वृद्धि दर कृषि में (-0.6 प्रतिशत) और गैर-कृषि ग्रामीण मजदूरी (-1.4 प्रतिशत) दोनों के लिए नकारात्मक हो गई है। मनरेगा में आधार बेस्ड पेमेंट में अनिवार्यता लाकर, मोदी सरकार ने पिछले दो वर्षों में सात करोड़ लोगों से काम का अधिकार छीना। इसलिए कांग्रेस श्रमिक न्याय लेकर आई है।</p>
<p>वहीं नई दिल्ली स्थित कांग्रेस मुख्यालय में पत्रकार वार्ता करते हुए कांग्रेस के पूर्व सांसद संदीप दीक्षित ने कहा कि श्रमिक न्याय के पीछे का संदर्भ बेहद महत्वपूर्ण है। मोदी सरकार का सबसे खराब प्रभाव उन क्षेत्रों में रहा, जहां हमारे खेतिहर मजदूर, मजदूर और श्रमिक काम करते रहे हैं। साल 1991के बाद से सर्विस क्षेत्र में रोजगार बढ़ता चला गया, जीडीपी बढ़ती चली गई। कृषि पर रोजगार की निर्भरता कम होना विकसित देश की निशानी होती है। 2004 से लेकर 2014 के बीच कृषि में काम करने वाले लोगों की संख्या लगातार कम हुई थी। वहीं 2016-17 के बाद से 41 प्रतिशत लोग किसानी पर निर्भर थे। पीएलएफएस के अनुसार 2018-19 तक तीन करोड़ से ज्यादा लोग कृषि में गए थे। वहीं 2014-15 के बाद करीब 6.5 करोड़ लोग दूसरी जगहों से रोजगार छोड़कर कृषि में चले गए हैं। ये हिंदुस्तान के इतिहास में पहली बार हुआ है। एक तरफ प्रधानमंत्री मोदी मेक इन इंडिया का नारा दे रहे हैं, दूसरी तरफ लोग कृषि में जा रहे हैं। वहीं कृषि क्षेत्र ने पिछले सात-आठ वर्षों में इतना अभूतपूर्व विकास नहीं किया है। यही कारण है कि आज किसान सड़कों पर हैं।</p>
<p>संदीप दीक्षित ने कहा कि मोदी सरकार ढिंढोरा पीट रही है कि देश में बेरोजगारी दर बहुत कम हुई है। लेकिन वे एक आंकड़ा बताना भूल गए। मोदी सरकार के अनुसार आप घर पर कोई भी काम कर लें तो उसे रोजगार मान लिया जाता है। हिंदुस्तान एकमात्र ऐसा देश है, जिसमें अनपेड फैमिली वर्कर को एंप्लॉयड माना जाता है। आज इनका आंकड़ा 9.5 करोड़ पहुंच गया है। इन्हीं अनपेड फैमिली लेबर के जरिए मोदी सरकार ने अपने बेरोजगारी के आंकड़ों को कम किया है।</p>
<p>संदीप दीक्षित ने कहा कि 2011-12 में एनुअल सर्वे ऑफ इंडस्ट्रीज में एक आंकड़ा आया था, जिसमें सिर्फ 28 प्रतिशत फैक्ट्रियां कॉन्ट्रैक्ट लेबर लिया करती थीं, जबकि 72 प्रतिशत स्थायी रोजगार देती थीं। लेकिन पिछले साल आए एनुअल सर्वे ऑफ इंडस्ट्रीज की रिपोर्ट में कॉन्ट्रैक्ट लेबर का 28 प्रतिशत का आंकड़ा बढ़कर 98 प्रतिशत पर आ गया है। अब धीरे-धीरे स्थायी रोजगार भी कॉन्ट्रैक्ट में बदल जाएगा। इसलिए कांग्रेस श्रमिक न्याय लेकर आई है, जिससे लोगों को न्याय मिल सके।</p>
<p>संदीप दीक्षित ने बताया कि श्रमिक न्याय की पहली गारंटी स्वास्थ्य अधिकार के तहत कांग्रेस श्रमिकों के लिए स्वास्थ्य अधिकार का कानून बनाने की गारंटी देती है।इसके साथ असंगठित क्षेत्र में काम करने वालों तथा विकलांगता के शिकार लोगों के लिए जरूरी जांच, मुफ्त इलाज, दवाओं का इंतजाम, सर्जरी सहित पुनर्वास और पैलिएटिव केयर सहित यूनिवर्सल हेल्थ केयर की व्यवस्था की जाएगी।</p>
<p>दूसरी गारंटी श्रम का सम्मान के तहत कांग्रेस पार्टी राष्ट्रीय स्तर पर न्यूनतम मजदूरी को बढ़ाकर 400 रुपये प्रतिदिन करेगी, जो मनरेगा श्रमिकों के लिए भी लागू होगी। तीसरी गारंटी शहरी रोजगार गारंटी के तहत कांग्रेस शहरी क्षेत्रों के लिए रोजगार गारंटी कानून लाएगी। इसके तहत पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर बनाने, शहरों को जलवायु के अनुसार ढालने और सामाजिक सेवा तंत्र को और मजबूत बनाने पर ध्यान दिया जाएगा।</p>
<p>चौथी गारंटी सामाजिक सुरक्षा के तहत असंगठित क्षेत्र के सभी श्रमिकों की सामाजिक सुरक्षा के लिए जीवन बीमा और दुर्घटना बीमा का प्रावधान होगा।</p>
<p>पांचवीं गारंटी सुरक्षित रोजगार के तहत मोदी सरकार द्वारा पारित एंटी वर्कर लेबर कोड्स की कांग्रेस व्यापक समीक्षा करेगी। श्रमिकों के अधिकारों की रक्षा के लिए लेबर कोड्स में उचित संशोधन की भी कांग्रेस गारंटी देती है। कांग्रेस मुख्य सरकारी कार्यों मेंरोजगार के लिए ठेका प्रथा को बंद करेगी। ठेका मजदूरी केवल आखिरी विकल्प होगा, जिसमें श्रमिकों के अधिकारों की रक्षा सुनिश्चित होगी। निजी क्षेत्रों के लिए भी कांट्रैक्ट रोजगार में सामाजिक सुरक्षा का पालन करना जरूरी होगा।</p>
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		<title>किस राजनीतिक पार्टी को मिले कितने रुपये के बॉन्ड और किसने किसने खरीदे</title>
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		<dc:creator><![CDATA[संवाद इंडिया]]></dc:creator>
		<pubDate>Fri, 22 Mar 2024 07:36:19 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[एक्सक्लूसिव]]></category>
		<category><![CDATA[खास खबर]]></category>
		<category><![CDATA[दिल्ली]]></category>
		<category><![CDATA[राष्ट्रीय]]></category>
		<category><![CDATA[Delhi]]></category>
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		<category><![CDATA[Supreme Court]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>सुप्रीम कोर्ट के आदेश के चलते स्टेट बैंक का इंडिया ने चुनावी चंदे से संबंधित संपूर्ण जानकारी इलेक्शन</p>
<p>The post <a href="https://www.samvaadindia.com/how-much-bonds-did-any-political-party-receive-and-who-bought-them/">किस राजनीतिक पार्टी को मिले कितने रुपये के बॉन्ड और किसने किसने खरीदे</a> appeared first on <a href="https://www.samvaadindia.com">Samvaad India</a>.</p>
]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p>सुप्रीम कोर्ट के आदेश के चलते स्टेट बैंक का इंडिया ने चुनावी चंदे से संबंधित संपूर्ण जानकारी इलेक्शन कमीशन ऑफ इंडिया सौंप दिया है और इलेक्शन कमीशन ऑफ इंडिया की तरफ से अपनी ऑफ़िशियल वेबसाइट पर संपूर्ण जानकारी अपलोड कर दी गई है। अब कोई भी व्यक्ति चुनावी चंदे से संबंधित जानकारी इलेक्शन कमीशन ऑफ इंडिया द्वारा अपलोड किए गए तथ्यों के आधार पर हासिल कर सकता है</p>
<p><a href="https://www.samvaadindia.com/wp-content/uploads/2024/03/sUnkgmGLhg.pdf">बॉण्ड खरीदारों की डिटेल</a></p>
<p><a href="https://www.samvaadindia.com/wp-content/uploads/2024/03/FwBCY25Tlk.pdf">राजनीतिक दलों को मिले चंदे की डिटेल </a></p>
<p>&nbsp;</p>
<p>सुप्रीम कोर्ट के दबाव के चलते उजागर हुआ चुनावी चंदे का पूरा का पूरा सच, देश के संसदीय लोकतंत्र के लिए एक बहुत ही अच्छा संकेत है</p>
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		<title>भारतीय राजनीति में एक और प्रयोग विफल, अरविंद केजरीवाल का राजनैतिक उद्भव और पतन</title>
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		<dc:creator><![CDATA[संवाद इंडिया]]></dc:creator>
		<pubDate>Fri, 22 Mar 2024 04:54:44 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[एक्सक्लूसिव]]></category>
		<category><![CDATA[दिल्ली]]></category>
		<category><![CDATA[Aam aadmi parti]]></category>
		<category><![CDATA[Aap]]></category>
		<category><![CDATA[Arvind kejriwal]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>(वाशिंद्र मिश्रा) अरविंद केजरीवाल का राजनीतिक सफर लगभग 12 साल का रहा है !एक आरटीआई एक्टिविस्ट के रूप</p>
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										<content:encoded><![CDATA[<p>(वाशिंद्र मिश्रा) अरविंद केजरीवाल का राजनीतिक सफर लगभग 12 साल का रहा है !एक आरटीआई एक्टिविस्ट के रूप में शुरू हुआ उनका राजनीतिक सफर दिल्ली के मुख्यमंत्री के पद पर पहुंचने के बाद अब लगता है कि विराम लगने वाला है</p>
<p>अभी तो प्रारंभिक तौर पर अरविंद केजरीवाल के राजनीतिक भविष्य के बारे में कोई भविष्यवाणी करना जल्द बाजी होगी! लेकिन आईटीआई एक्टिविस्ट से लेकर मुख्यमंत्री बनने तक जिस तरह की राजनीति की शुरुआत और राजनीतिक संस्कृति अरविंद केजरीवाल ने शुरू की वह अपने आप में एक नया शोध का विषय हो सकता है! इंडिया अगेंस्ट करप्शन ट्रांसपेरेंसी इन गवर्नेंस politics of disruption कटर ईमानदार का दावा करने वाले अरविंद केजरीवाल आज खुद इस भ्रष्टाचार के दलदल में दिखाई दे रहे हैं जिसका विरोध करके उन्होंने समाज सेवी अन्ना हजारे के साथ एक जन आंदोलन खड़ा किया था!<br />
यह अलग बात है की बाद में उन्होंने खुद अन्ना हजारे को अलग कर दिया और फिर एक-एक करके उन तमाम आम आदमी पार्टी के फाउंडर लीडर्स को बाहर का रास्ता दिखा दिया जिन्होंने दिन-रात मेहनत करके आम आदमी पार्टी बनाई थी सत्ता में आने के बाद अरविंद केजरीवाल ने राजनीतिक में सभी अनैतिक और गंदे tarikon को अपनाया जिसके दम पर नेता लोग apni राजनीतिक सत्ता बचाए रखने की कोशिश में लगे रहते हैं<br />
इसलिए उनकी गिरफ्तारी देर से ही सही लेकिन यह एक तय प्रक्रिया का हिस्सा है और इस तरह से कहा जा सकता है कि अरविंद केजरीवाल जिस ईमानदार छवि के दम पर इतने कम समय में देश की राजनीति में अपनी अलग पहचान बनाने में कामयाब रहे वह एक छलावा था ठीक उसी तरह से जैसे उनके पूर्व भर्ती राजनेताओं ने अपनी छवि बनाकर देश की जनता को लंबे समय तक गुमराह किया और सत्ता की मलाई खाते रहे भारत के राजनीतिक इतिहास में अरविंद केजरीवाल से पहले भी तमाम ऐसे नेता हुए हैं जिन्होंने झूठ fareb धोखाधड़ी के दम पर सत्ता हासिल की है लेकिन समय के साथ वक्त ने उनके साथ भी ठीक उसी तरह से न्याय किया था जिस तरह का न्याय अरविंद केजरीवाल के साथ होता दिखाई दे रहा है<br />
अब मामला जांच एजेंसी और कोर्ट के बीच में है देश की सबसे बड़ी अदालत के सामने भी अरविंद केजरीवाल और उनके साथी जाने की तैयारी में है लोकसभा के चुनाव की प्रक्रिया शुरू हो गई है सभी दल अपने अपने प्रत्याशियों के चयन और उनके ऐलान में जुटे हुए हैं  केजरीवाल की पार्टी भी दिल्ली पंजाब हरियाणा गुजरात गोवा और असम में अपना उम्मीदवार खड़ा करने वाली है केजरीवाल की ईमानदारी और बेईमानी का फैसला देश की सबसे बड़ी लोक अदालत में भी होने वाला है अब देखना है कि देश की अदालतों के अलावा लोक अदालत केजरीवाल के पक्ष में फैसला देती है या जांच एजेंसी के पक्ष में एजेंसी की दावों पर अगर भरोसा किया जाए तो केजरीवाल के खिलाफ दिल्ली के कथित शराब घोटाले में शामिल होने के पर्याप्त सबूत है ऐसी स्थिति में अब अदालत को तय करना है की जांच एजेंसी के द्वारा जुटाए गए एविडेंस कितने प्रमाणिक हैं और कितने भरोसेमंद है, लेकिन एक बात तय है की दिल्ली के कथित शराब घोटाले में अब तक जिस तरह की गिरफ्तारियां हुई है उसके आधार पर कहा जा सकता है की जांच एजेंटीयों के एविडेंस प्रारंभिक तौर पर ज्यादा भरोसेमंद और प्रामाणिक प्रतीत होते हैं</p>
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		<title>त्वैश मिश्रा को मिला रामनाथ गोयनका अवार्ड</title>
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		<dc:creator><![CDATA[संवाद इंडिया]]></dc:creator>
		<pubDate>Tue, 19 Mar 2024 15:11:32 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[उत्तर प्रदेश]]></category>
		<category><![CDATA[एक्सक्लूसिव]]></category>
		<category><![CDATA[खास खबर]]></category>
		<category><![CDATA[दिल्ली]]></category>
		<category><![CDATA[राष्ट्रीय]]></category>
		<category><![CDATA[Delhi]]></category>
		<category><![CDATA[New Delhi]]></category>
		<category><![CDATA[Reporter]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>नई दिल्ली। बड़ी खबर आ रही है दिल्ली से जहां पर द इकोनॉमिक्स टाइम्स के वरिष्ठ पत्रकार त्वैश</p>
<p>The post <a href="https://www.samvaadindia.com/twash-mishra-received-ramnath-goenka-award/">त्वैश मिश्रा को मिला रामनाथ गोयनका अवार्ड</a> appeared first on <a href="https://www.samvaadindia.com">Samvaad India</a>.</p>
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										<content:encoded><![CDATA[<p>नई दिल्ली। बड़ी खबर आ रही है दिल्ली से जहां पर द इकोनॉमिक्स टाइम्स के वरिष्ठ पत्रकार त्वैश मिश्रा को रामनाथ गोयनका अवार्ड से सम्मानित किया गया है उनको यह सम्मान केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी द्वारा प्रदान किया गया है आपको बता दें कि त्वैश मिश्रा काफी दिनों से द इकोनॉमिक्स टाइम्स के लिए काम कर रहे हैं त्वैश मिश्रा वरिष्ठ पत्रकार वसीन्द्र मिश्रा के पुत्र हैं त्वैश की इस उपलब्धि से उनके परिवारजनों और मित्रों में खुशी है।</p>
<p><img decoding="async" class="alignnone size-medium wp-image-202" src="https://www.samvaadindia.com/wp-content/uploads/2024/03/Screenshot_20240319_200452_Chrome-252x300.jpg" alt="" width="252" height="300" srcset="https://www.samvaadindia.com/wp-content/uploads/2024/03/Screenshot_20240319_200452_Chrome-252x300.jpg 252w, https://www.samvaadindia.com/wp-content/uploads/2024/03/Screenshot_20240319_200452_Chrome-861x1024.jpg 861w, https://www.samvaadindia.com/wp-content/uploads/2024/03/Screenshot_20240319_200452_Chrome-768x914.jpg 768w, https://www.samvaadindia.com/wp-content/uploads/2024/03/Screenshot_20240319_200452_Chrome-1024x1218.jpg 1024w, https://www.samvaadindia.com/wp-content/uploads/2024/03/Screenshot_20240319_200452_Chrome.jpg 1080w" sizes="(max-width: 252px) 100vw, 252px" /></p>
<p>त्वैश की स्टोरी जिसमें उन्होंने &#8220;रसिया और यूक्रेन वार के कारण भारतीय रेलवे के द्वारा चाइना की बनी हुई पहिया इंपोर्ट की थी&#8221; का वर्णन किया था और इसी स्टोरी को इस अवार्ड के लिए चुना गया। त्वैश अपनी बेबाक ख़बरों के लिए जाने जाते हैं। बहुत ही कम समय में उन्होंने अपनी बेबाक ख़बरों और लेखनी के कारण अपनी अलग पहचान बना ली है।</p>
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