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	<title>एक्सक्लूसिव Archives - Samvaad India</title>
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	<title>एक्सक्लूसिव Archives - Samvaad India</title>
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		<title>महिला आरक्षण और परिसीमन पर फिर तेज हुई सियासत, कांग्रेस ने पीएम पर साधा निशाना</title>
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		<dc:creator><![CDATA[संवाद इंडिया]]></dc:creator>
		<pubDate>Tue, 28 Apr 2026 10:05:27 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[अंतरराष्ट्रीय]]></category>
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		<category><![CDATA[Politics on women's reservation and delimitation intensified again]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>जयराम रमेश बोले—सर्वदलीय बैठक बुलाकर 2029 से लागू हो महिला आरक्षण, ‘परिसीमन की साजिश’ का लगाया आरोप नई</p>
<p>The post <a href="https://www.samvaadindia.com/politics-on-womens-reservation-and-delimitation-intensified-again-congress-targeted-the-pm/">महिला आरक्षण और परिसीमन पर फिर तेज हुई सियासत, कांग्रेस ने पीएम पर साधा निशाना</a> appeared first on <a href="https://www.samvaadindia.com">Samvaad India</a>.</p>
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										<content:encoded><![CDATA[<p><strong>जयराम रमेश बोले—सर्वदलीय बैठक बुलाकर 2029 से लागू हो महिला आरक्षण, ‘परिसीमन की साजिश’ का लगाया आरोप</strong></p>
<p>नई दिल्ली, 28 अप्रैल 2026। देश की राजनीति में महिला आरक्षण और परिसीमन को लेकर एक बार फिर बहस तेज हो गई है। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और महासचिव जयराम रमेश ने प्रधानमंत्री पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा है कि सरकार ने लोकसभा के परिसीमन को राजनीतिक लाभ के लिए इस्तेमाल करने की कोशिश की, लेकिन विपक्ष की एकजुटता के कारण यह प्रयास विफल हो गया। उन्होंने मांग की है कि अब सरकार को महिला आरक्षण कानून को लागू करने के लिए ठोस पहल करनी चाहिए और इस विषय पर सर्वदलीय बैठक बुलानी चाहिए।<br />
सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर जारी अपने विस्तृत बयान में जयराम रमेश ने कहा कि अब जबकि चुनाव प्रचार समाप्त हो चुका है और परिसीमन को लेकर सरकार की “चालाकी भरी कोशिश” नाकाम हो गई है, तो प्रधानमंत्री को विपक्ष की उस मांग पर ध्यान देना चाहिए जो मार्च 2026 के मध्य से लगातार उठाई जा रही है। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में सहमति और संवाद की भूमिका अहम होती है, ऐसे में सरकार को एकतरफा निर्णय लेने के बजाय सभी दलों को साथ लेकर चलना चाहिए।<br />
कांग्रेस नेता ने अपने बयान में विशेष रूप से नारी शक्ति वंदन अधिनियम, 2023 का उल्लेख करते हुए कहा कि इस कानून को 16 अप्रैल 2026 की देर रात “घबराहट में अधिसूचित” किया गया। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार ने इसे बिना व्यापक चर्चा और तैयारी के लागू करने की कोशिश की, जो लोकतांत्रिक प्रक्रिया के अनुरूप नहीं है। रमेश ने सुझाव दिया कि इस कानून को 2029 से लोकसभा की मौजूदा सीटों की संख्या के साथ लागू किया जा सकता है, बशर्ते इसके लिए सभी राजनीतिक दलों के बीच सहमति बनाई जाए।</p>
<blockquote class="twitter-tweet" data-width="550" data-dnt="true">
<p lang="hi" dir="ltr">अब जबकि चुनाव प्रचार समाप्त हो चुका है और लोकसभा के खतरनाक परिसीमन को जबरन लागू करने की उनकी चालाकी भरी कोशिश विपक्ष की एकजुटता और सामूहिकता के कारण बुरी तरह विफल हो गई है, अब समय आ गया है कि प्रधानमंत्री वही करें, जिसकी मांग विपक्ष मार्च 2026 के मध्य से एकजुट होकर लगातार करता आ…</p>
<p>&mdash; Jairam Ramesh (@Jairam_Ramesh) <a href="https://twitter.com/Jairam_Ramesh/status/2049042101447569535?ref_src=twsrc%5Etfw">April 28, 2026</a></p></blockquote>
<p><script async src="https://platform.twitter.com/widgets.js" charset="utf-8"></script></p>
<p>उन्होंने स्पष्ट कहा कि इस विषय पर चर्चा के लिए एक सर्वदलीय बैठक बुलाई जानी चाहिए। उनके अनुसार, यह न केवल संभव है बल्कि लोकतांत्रिक दृष्टि से वांछनीय और आवश्यक भी है। उन्होंने कहा कि महिला आरक्षण जैसे महत्वपूर्ण मुद्दे को राजनीतिक लाभ-हानि के नजरिए से नहीं बल्कि सामाजिक न्याय और समानता के दृष्टिकोण से देखा जाना चाहिए।<br />
जयराम रमेश ने केंद्र सरकार पर यह भी आरोप लगाया कि संसद के विशेष सत्र के दौरान महिला आरक्षण वास्तव में मुख्य मुद्दा था ही नहीं। उनके अनुसार, उस समय का वास्तविक एजेंडा परिसीमन था, जिसे प्रधानमंत्री के “राजनीतिक संरक्षण” के लिए आगे बढ़ाया जा रहा था। उन्होंने कहा कि सरकार ने महिला आरक्षण को एक राजनीतिक औजार के रूप में इस्तेमाल किया, जिससे इस महत्वपूर्ण मुद्दे की गंभीरता कम हुई।<br />
कांग्रेस नेता ने अपने बयान में प्रधानमंत्री से तीखा सवाल करते हुए कहा कि अब समय आ गया है कि वे देश की महिलाओं के प्रति अपनी जिम्मेदारी निभाएं। उन्होंने आरोप लगाया कि महिलाओं का इस्तेमाल निजी राजनीतिक एजेंडे को आगे बढ़ाने के लिए किया गया, जो न केवल अनुचित है बल्कि लोकतांत्रिक मूल्यों के खिलाफ भी है। उन्होंने कहा कि सरकार को “प्रायश्चित” करते हुए महिलाओं को उनका अधिकार दिलाना चाहिए।<br />
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह बयान ऐसे समय में आया है जब देश में महिला आरक्षण और परिसीमन को लेकर व्यापक बहस चल रही है। एक ओर सरकार इसे ऐतिहासिक कदम बता रही है, वहीं विपक्ष इसे राजनीतिक रणनीति का हिस्सा मान रहा है। इस मुद्दे ने आगामी चुनावों के मद्देनजर राजनीतिक दलों के बीच टकराव को और तेज कर दिया है।<br />
विशेषज्ञों के अनुसार, महिला आरक्षण कानून का प्रभावी क्रियान्वयन कई जटिल प्रक्रियाओं से जुड़ा हुआ है, जिनमें परिसीमन भी शामिल है। परिसीमन के तहत लोकसभा और विधानसभा क्षेत्रों की सीमाओं का पुनर्निर्धारण किया जाता है, जिससे सीटों की संख्या और उनका वितरण प्रभावित होता है। ऐसे में यह सवाल उठ रहा है कि क्या बिना परिसीमन के महिला आरक्षण लागू किया जा सकता है या इसके लिए पहले परिसीमन आवश्यक है।<br />
कांग्रेस का तर्क है कि महिला आरक्षण को मौजूदा सीटों के साथ भी लागू किया जा सकता है और इसके लिए किसी बड़े बदलाव की आवश्यकता नहीं है। वहीं सरकार का पक्ष यह रहा है कि परिसीमन के बाद ही इस कानून को प्रभावी रूप से लागू किया जा सकेगा, ताकि आरक्षण का सही संतुलन सुनिश्चित किया जा सके।<br />
इस पूरे विवाद के बीच सर्वदलीय बैठक की मांग को एक महत्वपूर्ण राजनीतिक पहल के रूप में देखा जा रहा है। यदि सरकार इस मांग को स्वीकार करती है, तो इससे संवाद का रास्ता खुल सकता है और इस जटिल मुद्दे का कोई सर्वमान्य समाधान निकल सकता है। हालांकि, यह भी स्पष्ट है कि इस मुद्दे पर राजनीतिक सहमति बनाना आसान नहीं होगा, क्योंकि इसमें विभिन्न दलों के हित और रणनीतियां जुड़ी हुई हैं।<br />
महिला संगठनों और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने भी इस मुद्दे पर अपनी प्रतिक्रिया दी है। उनका कहना है कि महिला आरक्षण लंबे समय से लंबित मांग रही है और इसे अब और टाला नहीं जाना चाहिए। उन्होंने राजनीतिक दलों से अपील की है कि वे इस मुद्दे को राजनीतिक विवाद से ऊपर उठकर देखें और महिलाओं को समान प्रतिनिधित्व दिलाने के लिए मिलकर काम करें।<br />
इस बीच, भाजपा की ओर से अभी तक जयराम रमेश के बयान पर कोई औपचारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है, लेकिन पार्टी के नेताओं ने पहले भी यह स्पष्ट किया है कि महिला आरक्षण कानून सरकार की प्राथमिकता है और इसे लागू करने के लिए आवश्यक सभी कदम उठाए जाएंगे।<br />
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि आने वाले दिनों में यह मुद्दा और अधिक गरमा सकता है। विपक्ष जहां सरकार पर दबाव बनाने की कोशिश करेगा, वहीं सरकार अपने रुख पर कायम रह सकती है। ऐसे में यह देखना दिलचस्प होगा कि क्या सर्वदलीय बैठक की मांग पर कोई ठोस निर्णय लिया जाता है या यह मुद्दा राजनीतिक बयानबाजी तक ही सीमित रह जाता है।<br />
अंततः, यह विवाद केवल राजनीतिक नहीं बल्कि सामाजिक महत्व का भी है। महिला आरक्षण देश में लैंगिक समानता की दिशा में एक बड़ा कदम माना जाता है, और इसका प्रभाव आने वाले वर्षों में देश की राजनीति और समाज दोनों पर पड़ सकता है। ऐसे में यह आवश्यक है कि इस मुद्दे पर गंभीरता से विचार किया जाए और ऐसा समाधान निकाला जाए जो सभी पक्षों के लिए स्वीकार्य हो।<br />
फिलहाल, जयराम रमेश के बयान ने इस बहस को एक नई दिशा दे दी है और अब सबकी नजरें केंद्र सरकार के अगले कदम पर टिकी</p>
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		<title>पंजाब राज्यसभा विवाद पर कांग्रेस का तीखा हमला, भाजपा-आप पर जनादेश से खिलवाड़ का आरोप</title>
		<link>https://www.samvaadindia.com/congress-launches-scathing-attack-on-punjab-rajya-sabha-row-accuses-bjp-aap-of-tampering-with-mandate/</link>
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		<dc:creator><![CDATA[संवाद इंडिया]]></dc:creator>
		<pubDate>Mon, 27 Apr 2026 15:02:35 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[अंतरराष्ट्रीय]]></category>
		<category><![CDATA[उत्तर प्रदेश]]></category>
		<category><![CDATA[एक्सक्लूसिव]]></category>
		<category><![CDATA[दिल्ली]]></category>
		<category><![CDATA[ब्रेकिंग]]></category>
		<category><![CDATA[accuses BJP-AAP of tampering with mandate]]></category>
		<category><![CDATA[Congress launches scathing attack on Punjab Rajya Sabha row]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>अजय माकन- 6.6% वोट वाली भाजपा ने 86% प्रतिनिधित्व हासिल किया, आप को बताया भाजपा की “बी टीम”</p>
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]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p><strong>अजय माकन- 6.6% वोट वाली भाजपा ने 86% प्रतिनिधित्व हासिल किया, आप को बताया भाजपा की “बी टीम”</strong><br />
नई दिल्ली, 27 अप्रैल। पंजाब की राजनीति में राज्यसभा प्रतिनिधित्व को लेकर नया विवाद खड़ा हो गया है। भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस ने सोमवार को भारतीय जनता पार्टी और आम आदमी पार्टी पर तीखा हमला बोलते हुए आरोप लगाया कि दोनों दलों ने मिलकर जनादेश के साथ “खिलवाड़” किया है। पार्टी के राष्ट्रीय कोषाध्यक्ष अजय माकन ने दावा किया कि भाजपा ने आम आदमी पार्टी के राज्यसभा सांसदों को अपने पक्ष में करके पंजाब से राज्यसभा में 86 प्रतिशत प्रतिनिधित्व हासिल कर लिया है, जबकि उसे विधानसभा चुनाव में महज 6.6 प्रतिशत वोट मिले थे।<br />
कांग्रेस मुख्यालय में आयोजित पत्रकार वार्ता में अजय माकन ने आंकड़ों के जरिए भाजपा और आम आदमी पार्टी पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में राज्यसभा के लिए प्रतिनिधियों का चयन विधानसभा में प्राप्त जनादेश के अनुपात में होता है, लेकिन पंजाब में जो हुआ वह लोकतंत्र की मूल भावना के विपरीत है। उन्होंने कहा कि 2022 के विधानसभा चुनाव में भाजपा को बहुत सीमित जनसमर्थन मिला था और उसके केवल दो विधायक जीत सके थे, इसके बावजूद आज वह राज्यसभा में अत्यधिक प्रतिनिधित्व का दावा कर रही है।<br />
माकन ने सवाल उठाया कि आखिर भाजपा पंजाब की जनता को कैसे समझाएगी कि उनके वोट का महत्व क्या रह गया है। उन्होंने कहा कि यदि जनता ने किसी पार्टी को सीमित समर्थन दिया है, तो उस पार्टी को उसी अनुपात में प्रतिनिधित्व मिलना चाहिए, लेकिन यहां राजनीतिक जोड़तोड़ के जरिए जनादेश को पलटने की कोशिश की गई है।<br />
कांग्रेस नेता ने इस पूरे घटनाक्रम को देश की एकता और अखंडता के लिए भी खतरनाक बताया। उन्होंने कहा कि पंजाब जैसे संवेदनशील और सरहदी राज्य में इस तरह की राजनीतिक गतिविधियां अलगाववादी ताकतों को मजबूत कर सकती हैं। माकन ने कहा कि भाजपा ने वही किया है, जिसे अलगाववादी ताकतें लंबे समय से साबित करने की कोशिश करती रही हैं— कि आम जनता की आवाज को दबा दिया जाता है और उनके मत का सम्मान नहीं होता।<br />
उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा कि पंजाब पहले भी अशांत दौर देख चुका है और वर्तमान परिस्थितियों में किसी भी प्रकार की राजनीतिक अस्थिरता या जनादेश की अनदेखी से स्थिति बिगड़ सकती है। माकन ने कहा कि खालिस्तान समर्थक तत्व एक बार फिर विदेशों में सक्रिय हो रहे हैं और इस प्रकार की घटनाएं उनके प्रचार को बल दे सकती हैं।<br />
अजय माकन ने अपने बयान में पंजाब की आंतरिक स्थिति को लेकर भी चिंता जताई। उन्होंने कहा कि राज्य में अपराध, ड्रग्स तस्करी और गैंगवार जैसी घटनाएं बढ़ रही हैं, जो किसी बड़े संकट की ओर इशारा करती हैं। उन्होंने कहा कि इतिहास गवाह है कि जब भी ऐसे हालात बनते हैं, तो अलगाववाद को बढ़ावा मिलता है।<br />
उन्होंने कहा कि 1980 के दशक में पंजाब ने जिस तरह की हिंसा और अस्थिरता देखी थी, वैसी स्थिति फिर से बनने के संकेत मिल रहे हैं। ऐसे में राजनीतिक दलों को जिम्मेदारी के साथ काम करना चाहिए, न कि सत्ता के लिए किसी भी हद तक जाने की प्रवृत्ति अपनानी चाहिए।<br />
कांग्रेस नेता ने आम आदमी पार्टी पर भी गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि पार्टी अब “आम आदमी” की नहीं रही, बल्कि “धनकुबेरों और अरबपतियों की पार्टी” बन गई है। माकन ने दावा किया कि भाजपा में शामिल हुए आप के राज्यसभा सांसदों की औसत संपत्ति 800 करोड़ रुपये से अधिक है।<br />
उन्होंने कहा कि जिन लोगों को राज्यसभा भेजा गया, वे आम आदमी नहीं बल्कि बड़े उद्योगपति और कारोबारी हैं। इससे यह स्पष्ट होता है कि पार्टी ने अपने मूल सिद्धांतों से समझौता कर लिया है।<br />
अजय माकन ने अरविंद केजरीवाल पर सीधे आरोप लगाते हुए कहा कि उन्होंने राज्यसभा की सीटें पैसे लेकर “बेचीं”। उन्होंने कहा कि पहले पार्टी ने धनबल के आधार पर लोगों को सांसद बनाया और बाद में वही सांसद भाजपा के साथ चले गए।<br />
माकन ने कहा कि यह पूरी प्रक्रिया लोकतंत्र के लिए बेहद खतरनाक है और इससे जनता का विश्वास राजनीतिक व्यवस्था से उठ सकता है। उन्होंने आरोप लगाया कि केजरीवाल खुद आलीशान जीवन जीते हैं और आम आदमी की बात केवल चुनावी मंचों तक सीमित है।<br />
कांग्रेस नेता ने आम आदमी पार्टी के शुरुआती दौर का जिक्र करते हुए कहा कि पार्टी ने अपने ही संस्थापक सदस्यों और वरिष्ठ नेताओं की अनदेखी की। उन्होंने योगेंद्र यादव, प्रशांत भूषण और आशुतोष जैसे नेताओं का उदाहरण देते हुए कहा कि इन योग्य व्यक्तियों को दरकिनार कर दिया गया।<br />
माकन ने आरोप लगाया कि इन नेताओं को इसलिए बाहर किया गया क्योंकि वे पार्टी की कार्यप्रणाली और निर्णयों पर सवाल उठा रहे थे। उन्होंने कहा कि इससे यह स्पष्ट होता है कि पार्टी में लोकतांत्रिक मूल्यों की कमी है।<br />
अजय माकन ने आम आदमी पार्टी को भाजपा की “बी टीम” करार दिया। उन्होंने कहा कि आप केवल उन राज्यों में चुनाव लड़ती है जहां कांग्रेस और भाजपा के बीच सीधा मुकाबला होता है, ताकि कांग्रेस के वोटों को काटा जा सके।<br />
उन्होंने गुजरात, हरियाणा और गोवा का उदाहरण देते हुए कहा कि इन राज्यों में आप की मौजूदगी ने भाजपा को फायदा पहुंचाया है। माकन ने कहा कि अब यह पूरी तरह स्पष्ट हो गया है कि आप का असली उद्देश्य भाजपा को लाभ पहुंचाना है।<br />
माकन ने यह भी आरोप लगाया कि आम आदमी पार्टी ने कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं को बदनाम करने की कोशिश की। उन्होंने डॉ. मनमोहन सिंह और शीला दीक्षित का उल्लेख करते हुए कहा कि ये दोनों नेता अपनी ईमानदारी के लिए जाने जाते हैं, लेकिन आप ने राजनीतिक लाभ के लिए उनकी छवि खराब करने का प्रयास किया।<br />
उन्होंने कहा कि जब भाजपा इन नेताओं के खिलाफ कुछ साबित नहीं कर पाई, तो उसने आम आदमी पार्टी को आगे कर दिया, ताकि कांग्रेस को कमजोर किया जा सके।<br />
कांग्रेस ने इस पूरे मामले को जनादेश की अवहेलना बताया। माकन ने कहा कि लोकतंत्र में जनता सर्वोपरि होती है और उसके फैसले का सम्मान किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि यदि राजनीतिक दल चुनाव के बाद जोड़तोड़ कर अपनी स्थिति मजबूत करते हैं, तो यह जनता के विश्वास के साथ धोखा है।<br />
उन्होंने कहा कि भाजपा और आम आदमी पार्टी की इस रणनीति से लोकतांत्रिक व्यवस्था कमजोर होती है और इससे जनता का भरोसा टूटता है।<br />
प्रेस वार्ता के दौरान अजय माकन ने आगामी चुनावों को लेकर कांग्रेस की रणनीति भी स्पष्ट की। उन्होंने कहा कि पार्टी पंजाब में एकजुट होकर चुनाव लड़ेगी और जनता के मुद्दों को प्रमुखता देगी।<br />
उन्होंने कहा कि वर्तमान राजनीतिक परिस्थितियों में शिरोमणि अकाली दल की स्थिति कमजोर है, जिससे कांग्रेस के लिए अवसर पैदा हुआ है। माकन ने विश्वास जताया कि कांग्रेस पंजाब में मजबूत वापसी करेगी।<br />
इस पूरे घटनाक्रम के बाद पंजाब और राष्ट्रीय राजनीति में बहस तेज हो गई है। एक ओर कांग्रेस भाजपा और आम आदमी पार्टी पर गंभीर आरोप लगा रही है, वहीं दूसरी ओर इन आरोपों पर अन्य दलों की प्रतिक्रियाएं भी सामने आने की संभावना है।<br />
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह मुद्दा आने वाले समय में और तूल पकड़ सकता है, क्योंकि इसमें लोकतंत्र, जनादेश और राजनीतिक नैतिकता जैसे महत्वपूर्ण सवाल जुड़े हुए हैं।<br />
पंजाब राज्यसभा प्रतिनिधित्व को लेकर उठे इस विवाद ने राजनीतिक माहौल को गरमा दिया है। कांग्रेस ने जहां भाजपा और आम आदमी पार्टी पर मिलकर जनादेश को पलटने का आरोप लगाया है, वहीं यह मामला लोकतांत्रिक मूल्यों और राजनीतिक नैतिकता पर भी गंभीर प्रश्न खड़े करता है। आने वाले दिनों में इस मुद्दे पर राजनीतिक घमासान और तेज होने की संभावना</p>
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		<title>विधेयक गिरा, लोकतंत्र जीता: प्रियंका गांधी का मोदी सरकार पर तीखा हमला</title>
		<link>https://www.samvaadindia.com/bill-struck-down-democracy-wins-priyanka-gandhi-launches-scathing-attack-on-modi-government/</link>
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		<dc:creator><![CDATA[संवाद इंडिया]]></dc:creator>
		<pubDate>Sat, 18 Apr 2026 15:30:23 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[अंतरराष्ट्रीय]]></category>
		<category><![CDATA[एक्सक्लूसिव]]></category>
		<category><![CDATA[खास खबर]]></category>
		<category><![CDATA[दिल्ली]]></category>
		<category><![CDATA[ब्रेकिंग]]></category>
		<category><![CDATA[Bill struck down]]></category>
		<category><![CDATA[democracy wins: Priyanka Gandhi launches scathing attack on Modi government]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>महिला आरक्षण के नाम पर परिसीमन की साजिश का आरोप, 2023 में पारित विधेयक तुरंत लागू करने की</p>
<p>The post <a href="https://www.samvaadindia.com/bill-struck-down-democracy-wins-priyanka-gandhi-launches-scathing-attack-on-modi-government/">विधेयक गिरा, लोकतंत्र जीता: प्रियंका गांधी का मोदी सरकार पर तीखा हमला</a> appeared first on <a href="https://www.samvaadindia.com">Samvaad India</a>.</p>
]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p><strong>महिला आरक्षण के नाम पर परिसीमन की साजिश का आरोप, 2023 में पारित विधेयक तुरंत लागू करने की मांग</strong></p>
<p>नई दिल्ली, 18 अप्रैल (संवाददाता)। लोकसभा में संविधान संशोधन विधेयक के गिरने के बाद सियासत तेज हो गई है। कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी वाद्रा ने इसे लोकतंत्र और संविधान की जीत बताते हुए केंद्र सरकार पर गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि महिला आरक्षण के नाम पर परिसीमन को प्रभावित करने की सरकार की साजिश नाकाम हो गई है।</p>
<p>कांग्रेस मुख्यालय में आयोजित प्रेस वार्ता में प्रियंका गांधी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह पर निशाना साधते हुए कहा कि सरकार की मंशा महिला सशक्तिकरण नहीं, बल्कि राजनीतिक लाभ हासिल करना था। उन्होंने आरोप लगाया कि 2011 की जनगणना को आधार बनाकर परिसीमन कराने की तैयारी थी, जिससे भविष्य में सीटों के पुनर्गठन के जरिए सत्ता को फायदा पहुंचाया जा सके।</p>
<p>प्रियंका गांधी ने कहा कि सरकार ने एक “दोहरी रणनीति” अपनाई थी। अगर विधेयक पास हो जाता तो परिसीमन के जरिए राजनीतिक लाभ लिया जाता और अगर पास नहीं होता तो विपक्ष को महिला विरोधी बताकर जनता के बीच भ्रम फैलाया जाता। उन्होंने कहा कि विपक्ष की एकजुटता ने इस पूरी योजना को विफल कर दिया।</p>
<p>उन्होंने संसद का विशेष सत्र अचानक बुलाने और अंतिम समय में विधेयक का मसौदा पेश करने पर भी सवाल उठाए। उनका कहना था कि इससे विपक्ष को पर्याप्त समय नहीं मिला और सरकार खुली बहस से बचना चाहती थी। यह प्रक्रिया लोकतांत्रिक परंपराओं के विपरीत है।</p>
<p>महिला आरक्षण के मुद्दे पर कांग्रेस महासचिव ने स्पष्ट किया कि पूरा विपक्ष इसके समर्थन में है। उन्होंने मांग की कि 2023 में सर्वसम्मति से पारित महिला आरक्षण विधेयक को तुरंत लागू किया जाए। उन्होंने कहा कि लोकसभा की मौजूदा 543 सीटों में से 33 प्रतिशत महिलाओं को आरक्षण देने के लिए विपक्ष पूरी तरह तैयार है।</p>
<p>इसके साथ ही उन्होंने अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) की महिलाओं के लिए भी आबादी के अनुपात में आरक्षण देने की मांग उठाई। उन्होंने कहा कि जब तक ओबीसी महिलाओं को आरक्षण नहीं मिलेगा, तब तक महिला आरक्षण अधूरा रहेगा।</p>
<p>भाजपा के महिला हितैषी दावों पर हमला करते हुए प्रियंका गांधी ने कहा कि देश की महिलाओं ने उन्नाव और हाथरस जैसे मामलों, महिला खिलाड़ियों के विरोध और मणिपुर की घटनाओं में सरकार का रवैया देखा है। उन्होंने आरोप लगाया कि इन मुद्दों पर सरकार संवेदनशीलता दिखाने में विफल रही है।</p>
<p>प्रधानमंत्री और गृह मंत्री के बयानों पर प्रतिक्रिया देते हुए उन्होंने कहा कि भाजपा द्वारा भरोसे की बात करना वास्तविकता से परे है। “जनता का भरोसा इस सरकार से उठ चुका है,” उन्होंने कहा।</p>
<p>सरकार द्वारा इस दिन को “ब्लैक डे” कहे जाने पर प्रियंका गांधी ने पलटवार करते हुए इसे लोकतंत्र का “गोल्डन डे” बताया। उन्होंने कहा कि यह दिन साबित करता है कि संसद में विपक्ष की भूमिका कितनी अहम है और सरकार को हर फैसले में सहमति बनानी चाहिए।</p>
<p>प्रेस वार्ता में कांग्रेस के वरिष्ठ नेता जयराम रमेश भी मौजूद रहे। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में संवाद और पारदर्शिता जरूरी है, न कि एकतरफा निर्णय।</p>
<p>राजनीतिक जानकारों का मानना है कि इस घटनाक्रम का असर आने वाले चुनावों पर पड़ सकता है। महिला आरक्षण और परिसीमन जैसे मुद्दे अब राष्ट्रीय राजनीति के केंद्र में आ गए हैं और इन पर आगे भी सियासी घमासान जारी रहने की संभावना है।</p>
<p>The post <a href="https://www.samvaadindia.com/bill-struck-down-democracy-wins-priyanka-gandhi-launches-scathing-attack-on-modi-government/">विधेयक गिरा, लोकतंत्र जीता: प्रियंका गांधी का मोदी सरकार पर तीखा हमला</a> appeared first on <a href="https://www.samvaadindia.com">Samvaad India</a>.</p>
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		<item>
		<title>लोकसभा में संशोधन विधेयक गिरा: कांग्रेस का दावा—लोकतंत्र की जीत, मोदी-शाह की “साज़िश” नाकाम</title>
		<link>https://www.samvaadindia.com/amendment-bill-defeated-in-lok-sabha-congress-claims-victory-for-democracy-modi-shahs-conspiracy-foiled/</link>
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		<dc:creator><![CDATA[संवाद इंडिया]]></dc:creator>
		<pubDate>Fri, 17 Apr 2026 16:02:38 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[अंतरराष्ट्रीय]]></category>
		<category><![CDATA[एक्सक्लूसिव]]></category>
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		<category><![CDATA[दिल्ली]]></category>
		<category><![CDATA[ब्रेकिंग]]></category>
		<category><![CDATA[Amendment Bill Defeated in Lok Sabha: Congress Claims—Victory for Democracy]]></category>
		<category><![CDATA[Modi-Shah’s “Conspiracy” Foiled]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>नई दिल्ली, 17 अप्रैल। लोकसभा में महिला आरक्षण को परिसीमन से जोड़ने वाले संविधान संशोधन विधेयक के गिरने</p>
<p>The post <a href="https://www.samvaadindia.com/amendment-bill-defeated-in-lok-sabha-congress-claims-victory-for-democracy-modi-shahs-conspiracy-foiled/">लोकसभा में संशोधन विधेयक गिरा: कांग्रेस का दावा—लोकतंत्र की जीत, मोदी-शाह की “साज़िश” नाकाम</a> appeared first on <a href="https://www.samvaadindia.com">Samvaad India</a>.</p>
]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p>नई दिल्ली, 17 अप्रैल। लोकसभा में महिला आरक्षण को परिसीमन से जोड़ने वाले संविधान संशोधन विधेयक के गिरने के बाद देश की राजनीति में तीखी प्रतिक्रिया सामने आई है। कांग्रेस ने इस घटनाक्रम को केंद्र सरकार की “असंवैधानिक चाल” की हार और लोकतंत्र व संविधान की जीत करार दिया है। पार्टी के शीर्ष नेताओं—मल्लिकार्जुन खरगे, राहुल गांधी, प्रियंका गांधी वाड्रा और जयराम रमेश —ने एक सुर में सरकार पर हमला बोला और विपक्ष की एकजुटता को लोकतांत्रिक मूल्यों की रक्षा के रूप में प्रस्तुत किया।</p>
<p>कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर पोस्ट करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह पर गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि मोदी-शाह ने देश की आधी आबादी—महिलाओं—को एक “ढाल” बनाकर परिसीमन लागू करने की कोशिश की, जो लोकतंत्र, संविधान और संघीय ढांचे पर सीधा प्रहार था। खड़गे के मुताबिक, यह प्रयास न केवल राजनीतिक रूप से संदिग्ध था बल्कि संवैधानिक मूल्यों के भी विपरीत था।</p>
<blockquote class="twitter-tweet" data-width="550" data-dnt="true">
<p lang="hi" dir="ltr">मोदी-शाह ने देश की आधी आबादी को ढाल बनाकर Delimitation करने की कोशिश की और इस देश के लोकतंत्र, संविधान और Federalism को चोट पहुँचाने का कुत्सित प्रयास किया। </p>
<p>उनकी ये चालबाज़ी एकजुट विपक्ष — INDIA ने भाँप ली और संविधान संशोधन बिल गिर गया। हम सभी विपक्षी दलों के नेताओं का हृदय से…</p>
<p>&mdash; Mallikarjun Kharge (@kharge) <a href="https://twitter.com/kharge/status/2045159302403690842?ref_src=twsrc%5Etfw">April 17, 2026</a></p></blockquote>
<p><script async src="https://platform.twitter.com/widgets.js" charset="utf-8"></script></p>
<p>खड़गे ने दावा किया कि सरकार की इस “चालबाज़ी” को विपक्षी गठबंधन INDIA ने समय रहते समझ लिया और एकजुट होकर इसका विरोध किया, जिसके परिणामस्वरूप संविधान संशोधन विधेयक लोकसभा में पारित नहीं हो सका। उन्होंने कहा कि यह विपक्ष की सामूहिक जीत है और कांग्रेस सभी सहयोगी दलों के नेताओं का आभार व्यक्त करती है, जिन्होंने इस मुद्दे पर एकजुटता दिखाई।</p>
<p>अपने बयान में खड़गे ने तीखा हमला करते हुए कहा कि मोदी और शाह अपनी राजनीति चमकाने के लिए भारत के लोकतंत्र को “तबाह” करने चले थे, लेकिन उनकी यह “साज़िश औंधे मुंह गिर गई।” उन्होंने यह भी कहा कि यह घटनाक्रम इस बात का प्रमाण है कि जब विपक्ष एकजुट होता है, तो वह लोकतंत्र को कमजोर करने वाली किसी भी कोशिश को विफल कर सकता है।</p>
<blockquote class="twitter-tweet" data-width="550" data-dnt="true">
<p lang="hi" dir="ltr">यह महिला आरक्षण बिल नहीं है &#8211; इसका महिलाओं से कोई संबंध नहीं।</p>
<p>यह बिल OBC विरोधी है,<br />यह बिल SC-ST विरोधी है,<br />यह बिल Anti National है &#8211; दक्षिण, उत्तर-पूर्व, उत्तर-पश्चिम और छोटे राज्यों के खिलाफ है।</p>
<p>हम भारत जोड़ने वाले न किसी का हक़ छिनने देंगे, न देश को बंटने देंगे। <a href="https://t.co/9tAUMZOI9g">pic.twitter.com/9tAUMZOI9g</a></p>
<p>&mdash; Rahul Gandhi (@RahulGandhi) <a href="https://twitter.com/RahulGandhi/status/2045099567671394458?ref_src=twsrc%5Etfw">April 17, 2026</a></p></blockquote>
<p><script async src="https://platform.twitter.com/widgets.js" charset="utf-8"></script></p>
<p>महिला आरक्षण के मुद्दे पर कांग्रेस ने सरकार से अपनी मांग दोहराई। खड़गे ने कहा कि 2023 में पारित Nari Shakti Vandan Adhiniyam के तहत महिलाओं को 33 प्रतिशत आरक्षण 2029 के आम चुनावों से ही लागू किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि कांग्रेस सितंबर 2023 से लगातार यह मांग कर रही है और अब यह प्रधानमंत्री की “नारी शक्ति” के प्रति प्रतिबद्धता की असली परीक्षा है।</p>
<p>वहीं लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने इस पूरे घटनाक्रम को संविधान पर हमला करार दिया। संसद परिसर में पत्रकारों से बातचीत करते हुए उन्होंने कहा कि यह वास्तव में महिला आरक्षण बिल नहीं था, बल्कि भारत के राजनीतिक और चुनावी ढांचे को बदलने की कोशिश थी। उनके मुताबिक, यह विधेयक संविधान के मूल सिद्धांतों को कमजोर करने का प्रयास था, जिसे विपक्ष ने सफलतापूर्वक रोक दिया।</p>
<p>राहुल गांधी ने प्रधानमंत्री को चुनौती देते हुए कहा कि यदि सरकार वास्तव में महिलाओं को आरक्षण देना चाहती है, तो 2023 का महिला आरक्षण कानून तत्काल प्रभाव से लागू करे। उन्होंने आश्वासन दिया कि इस मुद्दे पर पूरा विपक्ष सरकार का “100 प्रतिशत समर्थन” करेगा। उन्होंने यह भी कहा कि महिलाओं के अधिकारों को लेकर कोई भी राजनीति नहीं होनी चाहिए और इसे ईमानदारी से लागू किया जाना चाहिए।</p>
<p>बाद में X पर पोस्ट करते हुए राहुल गांधी ने खुशी जताई कि संशोधन विधेयक गिर गया। उन्होंने लिखा कि मोदी सरकार ने महिलाओं के नाम पर संविधान को तोड़ने के लिए असंवैधानिक तरीके अपनाए, लेकिन विपक्ष ने इसे रोक दिया। उन्होंने “संविधान की जय” का नारा देते हुए कहा कि यह लोकतंत्र की जीत है और देश ने देख लिया कि एकजुट विपक्ष किस तरह सरकार को चुनौती दे सकता है।</p>
<p>कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी वाड्रा ने भी सरकार पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि जिस तरह से महिला आरक्षण को प्रस्तुत किया गया, उसका पारित होना “नामुमकिन” था। उनके अनुसार, भाजपा सरकार ने इस मुद्दे को परिसीमन और पुरानी जनगणना से जोड़कर इसे जटिल बना दिया, जिसमें ओबीसी वर्ग को शामिल नहीं किया गया था। उन्होंने स्पष्ट किया कि कांग्रेस ऐसी व्यवस्था से कभी सहमत नहीं हो सकती।</p>
<p>प्रियंका गांधी ने कहा कि आज जो हुआ, वह देश के लोकतंत्र और उसकी अखंडता के लिए “बहुत बड़ी जीत” है। उन्होंने भाजपा पर निशाना साधते हुए कहा कि जिन मुद्दों पर सरकार को कार्रवाई करनी चाहिए थी—जैसे हाथरस, उन्नाव और मणिपुर—वहां सरकार विफल रही, लेकिन अब महिला हितों की बात कर रही है। उन्होंने इसे “विरोधाभासी राजनीति” करार दिया।</p>
<p>अपने सोशल मीडिया पोस्ट में प्रियंका गांधी ने कहा कि संसद और विधानसभाओं में महिला आरक्षण महिलाओं का अधिकार है और इसे कोई नहीं रोक सकता। उन्होंने विश्वास जताया कि एक दिन यह हकीकत बनेगा। हालांकि, उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार ने इसे 2011 की जनगणना और परिसीमन से जोड़कर महिलाओं के हितों को टालने की कोशिश की, जो अंततः विफल रही।</p>
<p>प्रियंका गांधी ने विपक्ष की एकजुटता की सराहना करते हुए कहा कि आज का दिन भारतीय राजनीति में ऐतिहासिक माना जाएगा। उन्होंने कहा कि विपक्ष ने अपनी शक्ति का सही उपयोग करते हुए लोकतंत्र और देशहित को प्राथमिकता दी। उनके अनुसार, यदि ये विधेयक पारित हो जाते, तो देश के लोकतांत्रिक ढांचे पर गंभीर असर पड़ सकता था।</p>
<p>कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और संचार विभाग के प्रभारी जयराम रमेश ने भी इस मुद्दे पर विस्तार से प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री और गृह मंत्री द्वारा महिलाओं के आरक्षण को परिसीमन के “खतरनाक प्रस्तावों” से जोड़ने का प्रयास एक कुटिल राजनीतिक रणनीति थी, जिसे लोकसभा में निर्णायक रूप से पराजित कर दिया गया। उन्होंने इसे लोकतांत्रिक व्यवस्था, संघीय ढांचे और संविधान की जीत बताया।</p>
<p>जयराम रमेश ने यह भी कहा कि सरकार के लिए अब रास्ता स्पष्ट है—उसे 2029 के चुनावों से पहले मौजूदा लोकसभा संरचना में ही महिलाओं को 33 प्रतिशत आरक्षण लागू करना चाहिए। उन्होंने याद दिलाया कि सितंबर 2023 में संसद द्वारा सर्वसम्मति से पारित नारी शक्ति वंदन अधिनियम के बाद से ही विपक्ष लगातार इसकी मांग कर रहा है।</p>
<p>राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, यह पूरा विवाद केवल महिला आरक्षण तक सीमित नहीं है, बल्कि इसके पीछे व्यापक राजनीतिक और संवैधानिक प्रश्न जुड़े हुए हैं। परिसीमन की प्रक्रिया, जो जनसंख्या के आधार पर निर्वाचन क्षेत्रों के पुनर्निर्धारण से संबंधित है, लंबे समय से एक संवेदनशील मुद्दा रही है। यदि इसे संतुलित और पारदर्शी तरीके से लागू नहीं किया गया, तो यह क्षेत्रीय असंतुलन और राजनीतिक प्रतिनिधित्व में असमानता को जन्म दे सकता है।</p>
<p>विशेषज्ञों का मानना है कि दक्षिण भारत और उत्तर-पूर्वी राज्यों में लंबे समय से यह चिंता रही है कि जनसंख्या आधारित परिसीमन से उनकी राजनीतिक शक्ति कम हो सकती है, जबकि अधिक जनसंख्या वाले राज्यों का प्रभाव बढ़ सकता है। यही कारण है कि विपक्ष इस मुद्दे को लेकर विशेष रूप से सतर्क है और सरकार से स्पष्टता की मांग कर रहा है।</p>
<p>वहीं केंद्र सरकार पहले यह कह चुकी है कि महिला आरक्षण का उद्देश्य राजनीति में महिलाओं की भागीदारी बढ़ाना है और यह एक ऐतिहासिक कदम है। हालांकि, विपक्ष का आरोप है that इसे लागू करने में जानबूझकर देरी की जा रही है और इसे जटिल प्रक्रियाओं से जोड़कर टालने की कोशिश की जा रही है।</p>
<p>लोकसभा में विधेयक के गिरने के बाद यह मुद्दा अब और अधिक राजनीतिक महत्व प्राप्त कर चुका है। आने वाले चुनावों में महिला आरक्षण, सामाजिक न्याय और संघीय ढांचे जैसे मुद्दे प्रमुख भूमिका निभा सकते हैं। कांग्रेस और अन्य विपक्षी दल इसे सरकार की “नीतिगत विफलता” के रूप में पेश कर रहे हैं, जबकि भाजपा इसे अलग नजरिए से देखने की कोशिश कर सकती है।</p>
<p>इस पूरे घटनाक्रम ने एक बार फिर यह स्पष्ट कर दिया है कि भारत में लोकतंत्र केवल संख्याबल का खेल नहीं है, बल्कि इसमें संवैधानिक मूल्यों, राजनीतिक संतुलन और जनप्रतिनिधित्व की अहम भूमिका होती है। विपक्ष की एकजुटता ने यह दिखाया है कि यदि राजनीतिक इच्छाशक्ति हो, तो किसी भी विवादास्पद प्रस्ताव को रोका जा सकता है।</p>
<p>अंततः, अब सबकी निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि केंद्र सरकार आगे क्या कदम उठाती है। क्या वह विपक्ष की मांग मानते हुए महिला आरक्षण को जल्द लागू करेगी, या फिर इस मुद्दे पर राजनीतिक टकराव और बढ़ेगा—यह आने वाला समय ही बताएगा। फिलहाल, लोकसभा में इस विधेयक का गिरना भारतीय राजनीति में एक महत्वपूर्ण मोड़ के रूप में देखा जा रहा है, जिसने लोकतंत्र, संविधान और महिलाओं के अधिकारों को लेकर एक नई बहस को जन्म दिया है।</p>
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		<item>
		<title>महिला आरक्षण पर प्रियंका गांधी का तीखा हमला: “मौजूदा सीटों में ही लागू हो 33% आरक्षण, OBC महिलाओं को भी मिले अधिकार”</title>
		<link>https://www.samvaadindia.com/priyanka-gandhi-launches-sharp-attack-on-womens-reservationreservation-must-be-implemented-within-existing-seats-obc-women-too-deserve-their-rights/</link>
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		<dc:creator><![CDATA[संवाद इंडिया]]></dc:creator>
		<pubDate>Fri, 17 Apr 2026 01:53:42 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[अंतरराष्ट्रीय]]></category>
		<category><![CDATA[एक्सक्लूसिव]]></category>
		<category><![CDATA[खास खबर]]></category>
		<category><![CDATA[दिल्ली]]></category>
		<category><![CDATA[ब्रेकिंग]]></category>
		<category><![CDATA[Deserve Their Rights"]]></category>
		<category><![CDATA[Priyanka Gandhi Launches Sharp Attack on Women's Reservation: "33% Reservation Must Be Implemented Within Existing Seats; OBC Women]]></category>
		<category><![CDATA[too]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>सरकार पर ‘राजनीतिक मंशा’ का आरोप; जातिगत जनगणना और पारदर्शी परिसीमन के बिना बिल को बताया अधूरा नई</p>
<p>The post <a href="https://www.samvaadindia.com/priyanka-gandhi-launches-sharp-attack-on-womens-reservationreservation-must-be-implemented-within-existing-seats-obc-women-too-deserve-their-rights/">महिला आरक्षण पर प्रियंका गांधी का तीखा हमला: “मौजूदा सीटों में ही लागू हो 33% आरक्षण, OBC महिलाओं को भी मिले अधिकार”</a> appeared first on <a href="https://www.samvaadindia.com">Samvaad India</a>.</p>
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										<content:encoded><![CDATA[<p><strong>सरकार पर ‘राजनीतिक मंशा’ का आरोप; जातिगत जनगणना और पारदर्शी परिसीमन के बिना बिल को बताया अधूरा</strong><br />
नई दिल्ली, 16 अप्रैल। कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी वाड्रा ने लोकसभा में महिला आरक्षण को लेकर केंद्र सरकार पर जोरदार हमला बोला और स्पष्ट रूप से कहा कि महिलाओं को 33 प्रतिशत आरक्षण मौजूदा 543 लोकसभा सीटों के भीतर ही दिया जाना चाहिए। उन्होंने यह भी मांग रखी कि इस आरक्षण में अनुसूचित जाति (SC), अनुसूचित जनजाति (ST) और अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) की महिलाओं के लिए भी अलग से कोटा सुनिश्चित किया जाए।<br />
प्रियंका गांधी ने अपने संबोधन में कहा कि अगर सरकार की मंशा वास्तव में महिला सशक्तिकरण की होती, तो यह बिल बिना किसी देरी के और सर्वसम्मति से आज ही पारित हो सकता था। उन्होंने सरकार को चुनौती देते हुए कहा कि “सही निर्णय ले लीजिए, पूरा विपक्ष आपके साथ खड़ा होगा।”<br />
प्रियंका गांधी ने दो टूक कहा कि कांग्रेस पार्टी महिला आरक्षण के पक्ष में मजबूती से खड़ी है, लेकिन मौजूदा विधेयक में कई गंभीर खामियां हैं, जो इसकी नीयत पर सवाल खड़े करती हैं। उन्होंने कहा कि महिला आरक्षण को लागू करने के नाम पर सरकार एक ऐसा ढांचा तैयार कर रही है, जिससे लोकतांत्रिक संतुलन बिगड़ सकता है।<br />
उन्होंने कहा कि महिलाओं को उनका अधिकार देने के लिए नए परिसीमन या सीटों के विस्तार की कोई आवश्यकता नहीं है। मौजूदा सीटों में ही 33 प्रतिशत आरक्षण लागू किया जा सकता है, जिससे प्रक्रिया सरल और पारदर्शी बनी रहेगी। अपने भाषण में प्रियंका गांधी ने विशेष रूप से OBC महिलाओं के अधिकारों का मुद्दा उठाया। उन्होंने कहा कि यदि महिला आरक्षण में OBC महिलाओं के लिए अलग से प्रावधान नहीं किया गया, तो यह सामाजिक न्याय के सिद्धांत के खिलाफ होगा।<br />
उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार जानबूझकर OBC वर्ग को नजरअंदाज कर रही है। “यह सिर्फ तकनीकी मामला नहीं है, बल्कि करोड़ों लोगों के अधिकारों का सवाल है,।<br />
प्रियंका गांधी ने सरकार द्वारा 2011 की जनगणना को परिसीमन का आधार बनाने के प्रस्ताव पर कड़ी आपत्ति जताई। उन्होंने कहा कि यह जनगणना पुरानी हो चुकी है और इसमें OBC वर्ग की सही संख्या का कोई स्पष्ट डेटा नहीं है।<br />
उन्होंने कहा कि सरकार इस पुराने आंकड़े का इस्तेमाल इसलिए करना चाहती है, ताकि OBC वर्ग के अधिकारों को सीमित किया जा सके। “प्रधानमंत्री Narendra Modi इस आधार पर परिसीमन कराकर OBC का हक छीनना चाहते हैं, लेकिन कांग्रेस ऐसा नहीं होने देगी,। प्रियंका गांधी ने जोर देकर कहा कि जब तक देश में जातिगत जनगणना नहीं कराई जाती, तब तक सही प्रतिनिधित्व सुनिश्चित नहीं किया जा सकता। उन्होंने कहा कि जनसंख्या के आधार पर ही लोकतंत्र में भागीदारी तय होती है, इसलिए सटीक आंकड़े बेहद जरूरी हैं।<br />
उन्होंने यह भी कहा कि सरकार जानबूझकर जातिगत जनगणना से बच रही है, क्योंकि इससे सामाजिक असमानताओं की वास्तविक तस्वीर सामने आ जाएगी। संविधान संशोधन और परिसीमन विधेयक पर बोलते हुए प्रियंका गांधी ने कहा कि यह पूरा मामला सिर्फ महिला आरक्षण का नहीं है, बल्कि इसके पीछे एक बड़ी राजनीतिक रणनीति छिपी हुई है।<br />
उन्होंने आरोप लगाया कि इस विधेयक के जरिए कुछ राज्यों की राजनीतिक ताकत को कम करने की कोशिश की जा रही है। “लोकतंत्र की धज्जियां उड़ाई जा रही हैं और अगले चुनाव के लिए भाजपा के पक्ष में जमीन तैयार की जा रही है।<br />
प्रियंका गांधी ने संसद के प्रस्तावित 50 प्रतिशत विस्तार को लेकर भी गंभीर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि विधेयक में यह स्पष्ट नहीं किया गया है कि यह विस्तार कैसे होगा, इसके नियम क्या होंगे और किन मानकों के आधार पर सीटों का पुनर्विन्यास किया जाएगा। उन्होंने इसे एक “अस्पष्ट और संदिग्ध प्रक्रिया” करार दिया और कहा कि इससे पारदर्शिता पर सवाल उठते हैं।<br />
प्रियंका गांधी ने कहा कि 1971 में संसद में राज्यों की भागीदारी को संतुलित तरीके से तय किया गया था और इस पर बदलाव की रोक भी लगाई गई थी। लेकिन वर्तमान विधेयक के जरिए इस संतुलन को बदलने की कोशिश की जा रही है।<br />
उन्होंने चेतावनी दी कि यदि यह विधेयक इसी रूप में पारित हुआ, तो कई राज्यों की राजनीतिक शक्ति कमजोर हो सकती है, जिससे संघीय ढांचे पर असर पड़ेगा।<br />
प्रियंका गांधी ने असम का उदाहरण देते हुए कहा कि वहां परिसीमन के दौरान सीटों में जो बदलाव किए गए, उससे कई क्षेत्रों का राजनीतिक संतुलन प्रभावित हुआ। उन्होंने आशंका जताई कि यही मॉडल पूरे देश में लागू किया जा सकता है।<br />
प्रियंका गांधी ने कहा कि इस विधेयक के तहत परिसीमन आयोग के तीन सदस्य पूरे देश के राज्यों का राजनीतिक भविष्य तय करेंगे। उन्होंने इसे लोकतंत्र के लिए खतरनाक बताते हुए कहा कि इतनी बड़ी जिम्मेदारी कुछ लोगों के हाथों में देना उचित नहीं है।<br />
अपने भाषण में प्रियंका गांधी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर यह भी आरोप लगाया कि वे अंतरराष्ट्रीय दबावों से घिरे हुए हैं और महिला आरक्षण जैसे महत्वपूर्ण मुद्दे का इस्तेमाल राजनीतिक लाभ के लिए कर रहे हैं।<br />
उन्होंने कहा कि यह एक ऐतिहासिक अवसर था, लेकिन सरकार ने इसे भी सत्ता बनाए रखने के साधन के रूप में इस्तेमाल किया।<br />
प्रियंका गांधी ने कहा कि सरकार ने बिना किसी सर्वदलीय बैठक के आखिरी समय में विधेयक का प्रारूप साझा किया, जिससे विपक्ष को अचानक निर्णय लेने की स्थिति में डाल दिया गया।<br />
उन्होंने इसे “राजनीतिक चाल” बताते हुए कहा कि सरकार जानबूझकर विपक्ष को असहज स्थिति में डालना चाहती थी।<br />
अपने संबोधन के अंत में प्रियंका गांधी ने महिला अधिकारों में कांग्रेस पार्टी के योगदान को भी विस्तार से बताया। उन्होंने कहा कि महिलाओं के समान अधिकार की नींव 1928 की मोतीलाल नेहरू रिपोर्ट और 1931 के कराची अधिवेशन में रखी गई थी।<br />
उन्होंने पूर्व प्रधानमंत्री Rajiv Gandhi का उल्लेख करते हुए कहा कि उन्होंने सबसे पहले पंचायतों और नगर पालिकाओं में महिलाओं के लिए 33 प्रतिशत आरक्षण का प्रस्ताव रखा था, जिसे बाद में कांग्रेस सरकार ने लागू किया।<br />
लोकसभा में प्रियंका गांधी का यह भाषण केवल महिला आरक्षण तक सीमित नहीं रहा, बल्कि उन्होंने इसे सामाजिक न्याय, संघीय ढांचे और लोकतांत्रिक मूल्यों से जोड़ते हुए व्यापक मुद्दा बना दिया।<br />
उन्होंने स्पष्ट संदेश दिया कि कांग्रेस महिला आरक्षण के खिलाफ नहीं, बल्कि उसके “सही और न्यायसंगत स्वरूप” की पक्षधर है। उनके मुताबिक, बिना जातिगत जनगणना, पारदर्शी परिसीमन और सभी वर्गों की भागीदारी सुनिश्चित किए बिना कोई भी आरक्षण अधूरा और असंतुलित रहेगा।<br />
अब यह देखना दिलचस्प होगा कि सरकार इन आरोपों और सुझावों पर क्या रुख अपनाती है और क्या महिला आरक्षण का यह मुद्दा संसद में सहमति का रूप ले पाता है या फिर राजनीतिक टकराव का कारण बना रहेगा।</p>
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		<item>
		<title>महिला आरक्षण बनाम परिसीमन: कांग्रेस का मोदी सरकार पर तीखा हमला, ‘जातिगत जनगणना से बचने की चाल’ का आरोप</title>
		<link>https://www.samvaadindia.com/womens-reservation-vs-delimitation-congress-launches-scathing-attack-on-modi-government-accuses-it-of-ploy-to-avoid-caste-census/</link>
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		<dc:creator><![CDATA[संवाद इंडिया]]></dc:creator>
		<pubDate>Mon, 13 Apr 2026 14:39:57 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[अंतरराष्ट्रीय]]></category>
		<category><![CDATA[एक्सक्लूसिव]]></category>
		<category><![CDATA[खास खबर]]></category>
		<category><![CDATA[दिल्ली]]></category>
		<category><![CDATA[ब्रेकिंग]]></category>
		<category><![CDATA[accuses it of 'ploy to avoid caste census']]></category>
		<category><![CDATA[Women's reservation vs. delimitation: Congress launches scathing attack on Modi government]]></category>
		<guid isPermaLink="false">https://www.samvaadindia.com/?p=1169</guid>

					<description><![CDATA[<p>नई दिल्ली, 13 अप्रैल। देश की राजनीति में एक बार फिर महिला आरक्षण और परिसीमन का मुद्दा गरमा</p>
<p>The post <a href="https://www.samvaadindia.com/womens-reservation-vs-delimitation-congress-launches-scathing-attack-on-modi-government-accuses-it-of-ploy-to-avoid-caste-census/">महिला आरक्षण बनाम परिसीमन: कांग्रेस का मोदी सरकार पर तीखा हमला, ‘जातिगत जनगणना से बचने की चाल’ का आरोप</a> appeared first on <a href="https://www.samvaadindia.com">Samvaad India</a>.</p>
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										<content:encoded><![CDATA[<p>नई दिल्ली, 13 अप्रैल। देश की राजनीति में एक बार फिर महिला आरक्षण और परिसीमन का मुद्दा गरमा गया है। कांग्रेस ने केंद्र की मोदी सरकार पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा है कि सरकार महिला आरक्षण के नाम पर “शकुनी चाल” चल रही है, जिसका असली मकसद देश में गलत परिसीमन करना और जातिगत जनगणना से बचना है।<br />
कांग्रेस मुख्यालय में आयोजित एक प्रेस वार्ता के दौरान पार्टी की सोशल मीडिया एवं डिजिटल प्लेटफॉर्म्स की चेयरपर्सन सुप्रिया श्रीनेत ने कांग्रेस संसदीय दल की अध्यक्ष सोनिया गांधी के हालिया लेख का हवाला देते हुए केंद्र सरकार की नीतियों पर तीखा प्रहार किया। उन्होंने कहा कि महिला आरक्षण अब मुद्दा नहीं है, क्योंकि यह पहले ही संसद में सर्वसम्मति से पारित हो चुका है, लेकिन सरकार इसे ढाल बनाकर परिसीमन की प्रक्रिया को विवादित तरीके से आगे बढ़ाना चाहती है।<br />
प्रेस वार्ता में सुप्रिया श्रीनेत ने सबसे बड़ा सवाल यह उठाया कि बिना अद्यतन जनगणना के आंकड़ों के परिसीमन कैसे किया जा सकता है। उन्होंने कहा कि देश में आखिरी जनगणना 2011 में हुई थी और 2021 की जनगणना अब तक नहीं कराई गई है, जिससे आंकड़ों का आधार ही कमजोर हो गया है।<br />
उन्होंने कहा, “जब सरकार खुद मान रही है कि अलग-अलग राज्यों और क्षेत्रों में जनसंख्या में बड़ा बदलाव आया है, तो बिना सटीक आंकड़ों के परिसीमन करना न केवल गलत है, बल्कि लोकतांत्रिक प्रतिनिधित्व के लिए खतरनाक भी है।”<br />
श्रीनेत ने यह भी सवाल उठाया कि यदि जनगणना के आंकड़े उपलब्ध नहीं हैं, तो अनुसूचित जाति (SC) और अनुसूचित जनजाति (ST) के लिए आरक्षित सीटों का निर्धारण किस आधार पर किया जाएगा। उन्होंने कहा कि यह प्रक्रिया केवल गणितीय नहीं, बल्कि सामाजिक और राजनीतिक न्याय से जुड़ी होती है।<br />
कांग्रेस ने यह भी आरोप लगाया कि प्रस्तावित परिसीमन से देश के उत्तर और दक्षिण राज्यों के बीच असंतुलन पैदा हो सकता है। सुप्रिया श्रीनेत ने कहा कि जिन राज्यों ने जनसंख्या नियंत्रण और परिवार नियोजन में बेहतर काम किया है, उन्हें सीटों के बंटवारे में नुकसान नहीं होना चाहिए।<br />
उन्होंने कहा, “परिसीमन का मतलब सिर्फ सीटें बढ़ाना नहीं है, बल्कि यह सुनिश्चित करना है कि हर क्षेत्र और समुदाय को न्यायसंगत प्रतिनिधित्व मिले। अगर यह प्रक्रिया केवल जनसंख्या के आधार पर की गई, तो इससे क्षेत्रीय असमानताएं और बढ़ सकती है।<br />
कांग्रेस ने केंद्र सरकार पर जातिगत जनगणना से बचने का भी आरोप लगाया। सुप्रिया श्रीनेत ने कहा कि बिहार और तेलंगाना में हुए जातिगत सर्वेक्षणों ने यह स्पष्ट कर दिया है कि पिछड़े वर्गों की जनसंख्या काफी अधिक है, लेकिन केंद्र सरकार इस सच्चाई को सामने लाने से बच रही है।<br />
उन्होंने कहा कि कांग्रेस ने 2023 में महिला आरक्षण विधेयक पारित होने के समय ही यह मांग रखी थी कि ओबीसी महिलाओं के लिए भी अलग से आरक्षण सुनिश्चित किया जाए। लेकिन सरकार ने इस मांग को नजरअंदाज कर दिया।<br />
श्रीनेत ने आरोप लगाया कि “सरकार जानबूझकर जातिगत जनगणना नहीं कराना चाहती, क्योंकि इससे सामाजिक वास्तविकताएं सामने आ जाएंगी और उसे आरक्षण के दायरे को व्यापक बनाना पड़ेगा।<br />
कांग्रेस प्रवक्ता ने सितंबर 2023 में पारित हुए नारी शक्ति वंदन अधिनियम का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि इस कानून में महिला आरक्षण लागू करने से पहले जनगणना और परिसीमन की शर्त रखी गई थी।<br />
उन्होंने याद दिलाया कि उस समय कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे और सोनिया गांधी ने मांग की थी कि बिना किसी शर्त के 2024 से ही महिला आरक्षण लागू किया जाए, लेकिन सरकार ने इसे स्वीकार नहीं किया।<br />
अब, जब 30 महीने बीत चुके हैं, तो सरकार खुद अपनी ही बनाई शर्तों को बदलने की तैयारी कर रही है। श्रीनेत ने सवाल उठाया,<br />
“जब 2023 में सरकार ने खुद ये शर्तें लगाईं थीं, तो अब अचानक इन्हें बदलने की जरूरत क्यों पड़ रही है?<br />
कांग्रेस ने 16 अप्रैल से बुलाए गए संसद के विशेष सत्र पर भी कड़ी आपत्ति जताई है। श्रीनेत ने कहा कि पश्चिम बंगाल और तमिलनाडु में चल रहे चुनाव प्रचार के बीच यह सत्र बुलाना राजनीतिक रूप से प्रेरित कदम है।<br />
उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार इस सत्र का उपयोग चुनावी लाभ के लिए करना चाहती है और विपक्षी सांसदों को जनता के बीच जाने से रोक रही है।<br />
कांग्रेस ने यह भी कहा कि विपक्ष ने सरकार को कई बार पत्र लिखकर सर्वदलीय बैठक बुलाने की मांग की थी, ताकि संविधान संशोधन जैसे महत्वपूर्ण मुद्दों पर व्यापक चर्चा हो सके। लेकिन सरकार ने इन मांगों को नजरअंदाज कर दिया।<br />
कांग्रेस ने इस मुद्दे को राहुल गांधी द्वारा उठाई गई जातिगत जनगणना की मांग से भी जोड़ा। श्रीनेत ने कहा कि राहुल गांधी लगातार इस मुद्दे को उठा रहे हैं, लेकिन सरकार इससे बचने की कोशिश कर रही है।<br />
उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में हलफनामा देकर जातिगत जनगणना का विरोध किया था और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इसे “अर्बन नक्सल सोच” से जोड़कर प्रस्तुत किया।<br />
कांग्रेस ने यह भी आरोप लगाया कि सरकार महिला आरक्षण के मुद्दे का इस्तेमाल अन्य गंभीर मुद्दों से ध्यान भटकाने के लिए कर रही है। श्रीनेत ने कहा कि विधानसभा चुनावों के बाद एपस्टीन फाइल्स, विदेश नीति की विफलता, बेरोजगारी और महंगाई जैसे मुद्दों पर चर्चा से बचने के लिए यह रणनीति अपनाई जा रही है।<br />
उन्होंने सवाल किया कि जिन मुद्दों के लिए विशेष सत्र बुलाया गया है, क्या उन पर चर्चा हाल ही में समाप्त हुए संसद सत्र में नहीं हो सकती थी?<br />
कांग्रेस प्रवक्ता ने यह भी दावा किया कि महिला आरक्षण की नींव कांग्रेस पार्टी ने ही रखी थी। उन्होंने कहा कि पंचायती राज संस्थाओं में महिलाओं को एक-तिहाई आरक्षण देने का काम कांग्रेस सरकार ने 73वें और 74वें संविधान संशोधनों के जरिए किया था।<br />
इस पहल का श्रेय पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी को देते हुए उन्होंने कहा कि आज देशभर में पंचायती राज संस्थाओं में 15 लाख से अधिक महिलाएं निर्वाचित प्रतिनिधि हैं, जो उसी नीति का परिणाम है।<br />
अंत में कांग्रेस ने मांग की कि केंद्र सरकार किसी भी बड़े निर्णय से पहले सभी राजनीतिक दलों की बैठक बुलाए और व्यापक चर्चा के बाद ही आगे बढ़े। श्रीनेत ने कहा, “यह केवल राजनीतिक मुद्दा नहीं है, बल्कि देश के लोकतांत्रिक ढांचे और सामाजिक न्याय से जुड़ा सवाल है। इसलिए जल्दबाजी में लिया गया कोई भी फैसला देश के लिए नुकसानदेह हो सकता है।”<br />
महिला आरक्षण, परिसीमन और जातिगत जनगणना जैसे मुद्दे अब केवल नीतिगत बहस तक सीमित नहीं रहे, बल्कि यह देश की राजनीति के केंद्र में आ चुके हैं। कांग्रेस और भाजपा के बीच इस मुद्दे पर बढ़ता टकराव आने वाले समय में और तेज हो सकता है।<br />
जहां एक ओर सरकार इसे महिला सशक्तिकरण की दिशा में बड़ा कदम बता रही है, वहीं विपक्ष इसे लोकतांत्रिक संतुलन और सामाजिक न्याय के लिए खतरा मान रहा है।<br />
अब देखना यह होगा कि संसद के विशेष सत्र और आने वाले राजनीतिक घटनाक्रमों में यह मुद्दा किस दिशा में आगे बढ़ता है और क्या इस पर कोई सर्वसम्मति बन पाती है या</p>
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		<title>राष्ट्रभक्ति ही देश संचालन का आधार, जाति-धर्म की राजनीति से नहीं चलेगा राष्ट्र : डॉ दिनेश शर्मा</title>
		<link>https://www.samvaadindia.com/patriotism-is-the-basis-of-running-the-country-the-nation-will-not-run-on-caste-religion-politics-dr-dinesh-sharma/</link>
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		<dc:creator><![CDATA[संवाद इंडिया]]></dc:creator>
		<pubDate>Mon, 13 Apr 2026 04:32:14 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[अंतरराष्ट्रीय]]></category>
		<category><![CDATA[उत्तर प्रदेश]]></category>
		<category><![CDATA[एक्सक्लूसिव]]></category>
		<category><![CDATA[खास खबर]]></category>
		<category><![CDATA[ब्रेकिंग]]></category>
		<category><![CDATA[Patriotism is the basis of running the country]]></category>
		<category><![CDATA[the nation will not run on caste-religion politics: Dr. Dinesh Sharma]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>लखनऊ/शामली,  13 अप्रैल। राज्यसभा सांसद एवं उत्तर प्रदेश के पूर्व उपमुख्यमंत्री डॉ दिनेश शर्मा ने स्पष्ट शब्दों में</p>
<p>The post <a href="https://www.samvaadindia.com/patriotism-is-the-basis-of-running-the-country-the-nation-will-not-run-on-caste-religion-politics-dr-dinesh-sharma/">राष्ट्रभक्ति ही देश संचालन का आधार, जाति-धर्म की राजनीति से नहीं चलेगा राष्ट्र : डॉ दिनेश शर्मा</a> appeared first on <a href="https://www.samvaadindia.com">Samvaad India</a>.</p>
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										<content:encoded><![CDATA[<p>लखनऊ/शामली,  13 अप्रैल। राज्यसभा सांसद एवं उत्तर प्रदेश के पूर्व उपमुख्यमंत्री डॉ दिनेश शर्मा ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि भारत जैसे विशाल और विविधतापूर्ण देश को केवल राष्ट्रभक्ति के आधार पर ही संचालित किया जा सकता है। उन्होंने कहा कि जाति और धर्म के आधार पर राजनीति करना देश की एकता और अखंडता के लिए घातक है। गुर्जर समाज के वरिष्ठ नेता एवं सदस्य विधान परिषद वीरेंद्र सिंह और भाजपा नेता मनीष चौहान के संयोजन में आयोजित विशाल जनसभा में मुख्य अतिथि के रूप में संबोधित करते हुए उन्होंने यह विचार व्यक्त किए।<br />
उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में देश की राजनीति को राष्ट्रहित और जनकल्याण की दिशा में आगे बढ़ाना आवश्यक है। उन्होंने जोर देकर कहा कि भारतीय जनता पार्टी की सरकार “सबका साथ, सबका विकास और सबका विश्वास” के सिद्धांत पर कार्य कर रही है, जिसमें किसी भी वर्ग के साथ भेदभाव नहीं किया जा रहा है।<br />
डॉ शर्मा ने विपक्षी दलों पर तीखा प्रहार करते हुए कहा कि अल्पसंख्यक समुदाय को लंबे समय तक केवल वोट बैंक के रूप में इस्तेमाल किया गया। उन्होंने कहा कि जहां विपक्षी दलों ने तुष्टिकरण की राजनीति की, वहीं भाजपा सरकार अल्पसंख्यकों को देश का सम्मानित नागरिक मानते हुए उनके विकास के लिए कार्य कर रही है। उन्होंने कहा कि देश को मजबूत बनाने का यही सही रास्ता है, जहां हर नागरिक को समान अवसर और सम्मान मिले।<br />
शामली में आयोजित एक अन्य कार्यक्रम में बोलते हुए उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में केंद्र सरकार महिलाओं को संसद और विधानसभाओं में आरक्षण देने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठा रही है। उन्होंने कहा कि यह निर्णय महिलाओं को सशक्त बनाने और उन्हें राष्ट्र निर्माण की मुख्यधारा में शामिल करने की दिशा में ऐतिहासिक साबित होगा। इस दौरान उपस्थित जनसमूह ने हाथ उठाकर महिला आरक्षण के समर्थन में अपनी सहमति जताई।<br />
उन्होंने कहा कि विपक्षी दलों को सरकार की यह पहल रास नहीं आएगी, क्योंकि उनकी राजनीति हमेशा वादाखिलाफी और भ्रम फैलाने पर आधारित रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस सहित कई दलों ने वर्षों तक जनता से किए गए वादों को पूरा नहीं किया, जिससे नेताओं की विश्वसनीयता पर प्रश्नचिह्न लग गया।<br />
डॉ शर्मा ने भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस पर निशाना साधते हुए कहा कि गरीबी हटाने के नाम पर वर्षों तक शासन करने के बावजूद गरीबों की स्थिति में कोई ठोस सुधार नहीं हुआ। उन्होंने कहा कि कांग्रेस शासनकाल में आपातकाल जैसे निर्णय लेकर लोकतंत्र को भी कलंकित किया गया।<br />
समाजवादी पार्टी पर हमला करते हुए उन्होंने कहा कि पूर्व में प्रदेश में दंगों का माहौल रहता था और सत्ता में बैठे लोग ही समाज को बांटने का काम करते थे। उन्होंने राम मंदिर आंदोलन का उल्लेख करते हुए कहा कि आस्था के मुद्दे पर गोली चलवाने का इतिहास भी जनता भूली नहीं है।<br />
उन्होंने कहा कि भाजपा की कथनी और करनी में एकरूपता है, जिसके कारण जनता का भरोसा फिर से राजनीतिक नेतृत्व पर मजबूत हुआ है। उन्होंने कहा कि आज देश का नेतृत्व एक मजबूत और निर्णायक हाथों में है, जिसने भारत को वैश्विक स्तर पर नई पहचान दिलाई है।<br />
डॉ शर्मा ने कहा कि आज का भारत आत्मनिर्भर और आत्मविश्वासी राष्ट्र के रूप में उभर रहा है। उन्होंने कहा कि अंतरराष्ट्रीय मंचों पर भारत की स्थिति पहले से कहीं अधिक सशक्त हुई है। उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि जी-20 जैसे मंचों पर भारत की भूमिका नेतृत्वकारी रही है, जो देश की बढ़ती वैश्विक प्रतिष्ठा को दर्शाता है।<br />
उन्होंने पड़ोसी देशों की स्थिति का उल्लेख करते हुए कहा कि जहां अन्य देशों में आर्थिक और राजनीतिक अस्थिरता देखने को मिल रही है, वहीं भारत में केंद्र सरकार के कुशल प्रबंधन के कारण आम जनता पर किसी प्रकार का संकट नहीं आया है। उन्होंने कहा कि वैश्विक परिस्थितियों के बावजूद भारत में आवश्यक वस्तुओं की उपलब्धता और स्थिरता बनी हुई है।<br />
पश्चिमी उत्तर प्रदेश के विकास का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि पहले यह क्षेत्र बदहाल सड़कों और दंगों के लिए जाना जाता था, लेकिन आज यहां की तस्वीर पूरी तरह बदल चुकी है। उन्होंने कहा कि भाजपा सरकार के कार्यकाल में सड़क, बिजली और बुनियादी सुविधाओं में अभूतपूर्व सुधार हुआ है।<br />
उन्होंने कहा कि आज प्रदेश में सड़कों का जाल बिछ चुका है और आवागमन में लगने वाला समय काफी कम हो गया है। बिजली व्यवस्था में सुधार का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि पहले बिजली आना खबर बनती थी, जबकि आज बिजली जाना खबर बन जाता है।<br />
डॉ शर्मा ने केंद्र और राज्य सरकार की योजनाओं का जिक्र करते हुए कहा कि प्रधानमंत्री जन धन योजना, प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना और आयुष्मान भारत योजना जैसी योजनाओं ने गरीब और मध्यम वर्ग के जीवन में व्यापक परिवर्तन लाया है। उन्होंने कहा कि अब लाभ सीधे लोगों के खातों में पहुंच रहा है, जिससे पारदर्शिता बढ़ी है।<br />
उन्होंने गोरखपुर क्षेत्र का उदाहरण देते हुए कहा कि स्वच्छता अभियान के कारण मस्तिष्क ज्वर जैसी गंभीर बीमारी पर नियंत्रण पाया गया है, जो पहले हर साल कई बच्चों की जान ले लेती थी।<br />
उत्तर प्रदेश में हो रहे विकास कार्यों का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में प्रदेश ने नई ऊंचाइयों को छुआ है। उन्होंने कहा कि प्रदेश में एक्सप्रेसवे, हवाई अड्डों और रेलवे स्टेशनों का तेजी से विकास हुआ है।<br />
उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश अब माफिया मुक्त हो चुका है और कानून का राज स्थापित हुआ है। उन्होंने कहा कि अपराधियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई ने प्रदेश में सुरक्षा का माहौल बनाया है, जिससे निवेश और विकास को गति मिली है।<br />
उन्होंने युवाओं के संदर्भ में कहा कि आज का युवा रोजगार पाने के साथ-साथ रोजगार देने वाला भी बन रहा है। उन्होंने कहा कि सरकार की नीतियों ने युवाओं को आत्मनिर्भर बनने के लिए प्रेरित किया है।<br />
कृषि क्षेत्र का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि किसानों को आर्थिक सहायता और सिंचाई सुविधाओं के विस्तार से उनकी आय में वृद्धि हो रही है। उन्होंने “हर घर नल से जल” योजना का भी जिक्र किया, जिससे ग्रामीण क्षेत्रों में पेयजल की समस्या दूर हो रही है।<br />
कश्यप जयंती के अवसर पर आयोजित कार्यक्रम में बोलते हुए उन्होंने महर्षि कश्यप के योगदान को याद किया और कहा कि भारतीय संस्कृति में ऋषि-मुनियों का महत्वपूर्ण स्थान रहा है। उन्होंने भगवान राम और निषादराज की कथा का उल्लेख करते हुए सामाजिक समरसता का संदेश दिया।<br />
उन्होंने कहा कि जो लोग भगवान राम का विरोध करते हैं, वे समाज की भावनाओं को समझने में असफल हैं। उन्होंने कहा कि समाज ऐसे लोगों को उचित जवाब देगा।<br />
अंत में उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा पिछड़ा वर्ग आयोग को संवैधानिक दर्जा देना सामाजिक न्याय की दिशा में बड़ा कदम है। उन्होंने कहा कि आज प्रदेश और देश दोनों विकास के पथ पर अग्रसर हैं और जनता का विश्वास भाजपा के साथ मजबूती से जुड़ा हुआ है।<br />
कार्यक्रम में कई जनप्रतिनिधि और गणमान्य लोग उपस्थित रहे, जिनमें भाजपा प्रदेश महामंत्री मोहित बेनीवाल, जिला अध्यक्ष रामजीलाल कश्यप, हरियाणा की मेयर कोमल सैनी सहित अन्य नेता शामिल रहे। जनसभा में बड़ी संख्या में लोगों की भागीदारी ने कार्यक्रम को सफल बनाया।</p>
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		<title>पश्चिम एशिया संकट पर घमासान: जयराम रमेश का विदेश नीति पर तीखा हमला, सरकार पर उठे गंभीर सवाल</title>
		<link>https://www.samvaadindia.com/uproar-over-west-asia-crisis-jairam-ramesh-launches-sharp-attack-on-foreign-policy-serious-questions-raised-against-the-government/</link>
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		<dc:creator><![CDATA[संवाद इंडिया]]></dc:creator>
		<pubDate>Thu, 26 Mar 2026 06:46:18 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[अंतरराष्ट्रीय]]></category>
		<category><![CDATA[अमेरिका ईरान युद्ध]]></category>
		<category><![CDATA[एक्सक्लूसिव]]></category>
		<category><![CDATA[बिहार]]></category>
		<category><![CDATA[ब्रेकिंग]]></category>
		<category><![CDATA[Uproar over West Asia Crisis: Jairam Ramesh Launches Sharp Attack on Foreign Policy; Serious Questions Raised Against the Government]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>नई दिल्ली 26 मार्च। पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष को लेकर भारत की कूटनीति एक बार फिर राजनीतिक</p>
<p>The post <a href="https://www.samvaadindia.com/uproar-over-west-asia-crisis-jairam-ramesh-launches-sharp-attack-on-foreign-policy-serious-questions-raised-against-the-government/">पश्चिम एशिया संकट पर घमासान: जयराम रमेश का विदेश नीति पर तीखा हमला, सरकार पर उठे गंभीर सवाल</a> appeared first on <a href="https://www.samvaadindia.com">Samvaad India</a>.</p>
]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p>नई दिल्ली 26 मार्च। पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष को लेकर भारत की कूटनीति एक बार फिर राजनीतिक बहस के केंद्र में आ गई है। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता जयराम रमेश ने विदेश मंत्री एस. जयशंकर और केंद्र सरकार की विदेश नीति पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर विस्तृत टिप्पणी करते हुए आरोप लगाया कि भारत की कूटनीति कमजोर पड़ी है और इसके चलते पाकिस्तान जैसे देश को क्षेत्रीय मध्यस्थ की भूमिका में उभरने का अवसर मिल गया है।<br />
जयराम रमेश ने अपनी टिप्पणी में कहा कि यह भारत के लिए “भारी शर्मिंदगी” की बात है कि पाकिस्तान जैसे देश को पश्चिम एशिया के संवेदनशील मुद्दे में मध्यस्थ के रूप में देखा जा रहा है। उन्होंने इसे भारत की कूटनीतिक विफलता बताते हुए कहा कि सरकार इस स्थिति को छिपाने की कोशिश कर रही है।<br />
उन्होंने पाकिस्तान के इतिहास का हवाला देते हुए कहा कि यह वही देश है जिसने दशकों तक आतंकवाद को प्रायोजित किया है। रमेश के अनुसार, पाकिस्तान की राज्य व्यवस्था लंबे समय से भारत सहित कई देशों में आतंकवाद फैलाने में संलिप्त रही है। उन्होंने यह भी याद दिलाया कि वैश्विक आतंकी ओसामा बिन लादेन को पाकिस्तान में शरण मिली थी, जो इस देश की भूमिका पर गंभीर सवाल खड़े करता है।</p>
<blockquote class="twitter-tweet" data-width="550" data-dnt="true">
<p lang="hi" dir="ltr">स्टाइलिश और लंबे समय से अनुभवी कहे जाने वाले विदेश मंत्री पश्चिम एशिया में जारी युद्ध को समाप्त कराने के लिए बातचीत में पाकिस्तान के मध्यस्थ और पहलकर्ता के रूप में उभरने से भारत को हुई भारी शर्मिंदगी और क्षेत्रीय कूटनीति को लगे झटके को ढकने की पूरी कोशिश कर रहे हैं।</p>
<p>यह वास्तव…</p>
<p>&mdash; Jairam Ramesh (@Jairam_Ramesh) <a href="https://twitter.com/Jairam_Ramesh/status/2037023204942708869?ref_src=twsrc%5Etfw">March 26, 2026</a></p></blockquote>
<p><script async src="https://platform.twitter.com/widgets.js" charset="utf-8"></script></p>
<p>कांग्रेस नेता ने पाकिस्तान के परमाणु कार्यक्रम पर भी सवाल उठाए। उन्होंने अब्दुल कादिर खान के नेटवर्क का उल्लेख करते हुए कहा कि पाकिस्तान ने अंतरराष्ट्रीय परमाणु अप्रसार नियमों का उल्लंघन किया और अन्य देशों को परमाणु क्षमता हासिल करने में मदद की।<br />
रमेश ने कहा कि तत्कालीन राष्ट्रपति परवेज़ मुशर्रफ ने भी इस नेटवर्क की भूमिका को सार्वजनिक रूप से स्वीकार किया था। ऐसे देश को शांति प्रक्रिया में मध्यस्थ के रूप में स्वीकार करना वैश्विक स्तर पर एक गंभीर विरोधाभास है।<br />
उन्होंने पाकिस्तान पर आरोप लगाया कि उसने अफगानिस्तान में नागरिक ठिकानों पर हमले किए और अपने ही देश में बलूचिस्तान, खैबर पख्तूनख्वा जैसे क्षेत्रों में हिंसक कार्रवाइयाँ कीं। उनके अनुसार, धार्मिक अल्पसंख्यकों के खिलाफ पाकिस्तान की नीतियाँ भी उसे किसी भी शांति प्रक्रिया के लिए अनुपयुक्त बनाती हैं।<br />
जयराम रमेश ने सीधे तौर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की विदेश नीति पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि पाकिस्तान का मध्यस्थ के रूप में उभरना “प्रधानमंत्री की कूटनीति की वास्तविकता” को उजागर करता है।<br />
उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार की विदेश नीति बड़े-बड़े दावों और कमजोर क्रियान्वयन से चिह्नित रही है। रमेश ने कहा कि “विश्वगुरु” बनने के दावे के बावजूद भारत की वैश्विक स्थिति कमजोर हुई है और कूटनीतिक स्तर पर कई अवसर गंवाए गए हैं।<br />
कांग्रेस नेता ने 26/11 Mumbai attacks का उल्लेख करते हुए कहा कि उस समय की सरकार ने पाकिस्तान को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अलग-थलग करने में सफलता हासिल की थी। उन्होंने पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह की सरकार की सराहना करते हुए कहा कि उस दौर में भारत ने प्रभावी कूटनीति का प्रदर्शन किया था।<br />
रमेश के अनुसार, 2008 के हमलों के बाद भारत ने वैश्विक मंच पर पाकिस्तान की भूमिका को उजागर किया और उसे कूटनीतिक दबाव में ला दिया। उन्होंने कहा कि यह वर्तमान स्थिति के बिल्कुल विपरीत है।<br />
उन्होंने 22 अप्रैल 2025 को हुए पहलगाम आतंकी हमले का जिक्र करते हुए कहा कि इस हमले के पीछे पाकिस्तान की भूमिका को लेकर पर्याप्त कूटनीतिक दबाव नहीं बनाया गया। रमेश ने पाकिस्तान सेना प्रमुख आसिम मुनीर के बयानों को “सांप्रदायिक और उकसाने वाला” बताते हुए कहा कि इसके बावजूद भारत पाकिस्तान को वैश्विक मंच पर अलग-थलग करने में विफल रहा।<br />
उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि हालिया घटनाओं के बाद पाकिस्तान की अंतरराष्ट्रीय प्रासंगिकता बढ़ी है और वह एक “महत्वपूर्ण खिलाड़ी” के रूप में उभरा है।<br />
कांग्रेस नेता ने अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का जिक्र करते हुए कहा कि पाकिस्तान के सैन्य नेतृत्व को अमेरिकी प्रशासन का समर्थन मिलता दिख रहा है। उन्होंने इसे भारत की कूटनीतिक कमजोरी का संकेत बताया।<br />
विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने हाल ही में कहा था कि भारत “कोई ब्रोकर देश नहीं है” और वह अपनी स्वतंत्र विदेश नीति पर चलता है। इस पर प्रतिक्रिया देते हुए जयराम रमेश ने कहा कि यह बयान सही हो सकता है, लेकिन वास्तविकता इससे अलग है।<br />
उन्होंने आरोप लगाया कि भारत की कूटनीति, वैश्विक संपर्क और नैरेटिव प्रबंधन में विफलताओं के कारण पाकिस्तान जैसे देश को “ब्रोकर” की भूमिका मिल गई है।<br />
रमेश ने “नैरेटिव मैनेजमेंट” पर विशेष जोर देते हुए कहा कि आज की वैश्विक राजनीति में केवल कूटनीतिक कदम ही नहीं, बल्कि अंतरराष्ट्रीय धारणा भी महत्वपूर्ण होती है। उन्होंने आरोप लगाया कि भारत इस मोर्चे पर पीछे रह गया है।<br />
उनके अनुसार, भारत अपने पक्ष को प्रभावी तरीके से दुनिया के सामने रखने में असफल रहा है, जबकि पाकिस्तान ने इस अवसर का फायदा उठाया है।<br />
इस मुद्दे को लेकर देश की राजनीति भी गर्मा गई है। कांग्रेस जहां इसे सरकार की “कूटनीतिक विफलता” बता रही है, वहीं सत्तारूढ़ दल इसे “राजनीतिक बयानबाजी” करार दे सकता है।<br />
विशेषज्ञों का मानना है कि पश्चिम एशिया की जटिल परिस्थितियों में किसी भी देश की भूमिका को लेकर जल्दबाजी में निष्कर्ष निकालना उचित नहीं होगा। हालांकि, यह भी सच है कि भारत जैसे बड़े देश के लिए क्षेत्रीय संतुलन बनाए रखना एक बड़ी चुनौती है।<br />
पश्चिम एशिया संकट के बीच भारत की विदेश नीति पर उठे सवाल आने वाले समय में और गहराने की संभावना है। जयराम रमेश के बयान ने इस बहस को तेज कर दिया है कि क्या भारत अपनी पारंपरिक कूटनीतिक ताकत को बनाए रख पा रहा है या नहीं।<br />
एक तरफ सरकार अपने प्रयासों को सफल बता रही है, वहीं विपक्ष इसे विफलता के रूप में पेश कर रहा है। ऐसे में सच्चाई क्या है, यह आने वाले कूटनीतिक घटनाक्रम और वैश्विक समीकरणों से ही स्पष्ट हो पाएगा।</p>
<p>The post <a href="https://www.samvaadindia.com/uproar-over-west-asia-crisis-jairam-ramesh-launches-sharp-attack-on-foreign-policy-serious-questions-raised-against-the-government/">पश्चिम एशिया संकट पर घमासान: जयराम रमेश का विदेश नीति पर तीखा हमला, सरकार पर उठे गंभीर सवाल</a> appeared first on <a href="https://www.samvaadindia.com">Samvaad India</a>.</p>
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		<title>ट्रान्सजेन्डर अधिकारों पर सियासत तेज, जनसंसद में राहुल गांधी ने उठाए गंभीर सवाल</title>
		<link>https://www.samvaadindia.com/politics-over-transgender-rights-intensifies-rahul-gandhi-raises-serious-questions-in-the-jan-sansad/</link>
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		<dc:creator><![CDATA[संवाद इंडिया]]></dc:creator>
		<pubDate>Wed, 25 Mar 2026 13:27:20 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[अंतरराष्ट्रीय]]></category>
		<category><![CDATA[एक्सक्लूसिव]]></category>
		<category><![CDATA[खास खबर]]></category>
		<category><![CDATA[दिल्ली]]></category>
		<category><![CDATA[ब्रेकिंग]]></category>
		<category><![CDATA[Politics over transgender rights intensifies; Rahul Gandhi raises serious questions in the 'Jan Sansad'.]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>नई दिल्ली/लखनऊ 25 मार्च। देश में ट्रांसजेंडर समुदाय के अधिकारों को लेकर एक बार फिर राजनीतिक बहस तेज</p>
<p>The post <a href="https://www.samvaadindia.com/politics-over-transgender-rights-intensifies-rahul-gandhi-raises-serious-questions-in-the-jan-sansad/">ट्रान्सजेन्डर अधिकारों पर सियासत तेज, जनसंसद में राहुल गांधी ने उठाए गंभीर सवाल</a> appeared first on <a href="https://www.samvaadindia.com">Samvaad India</a>.</p>
]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p>नई दिल्ली/लखनऊ 25 मार्च। देश में ट्रांसजेंडर समुदाय के अधिकारों को लेकर एक बार फिर राजनीतिक बहस तेज हो गई है। कांग्रेस नेता Rahul Gandhi ने जनसंसद के मंच पर ट्रांसजेंडर समुदाय के प्रतिनिधिमंडल से मुलाकात कर उनकी समस्याओं को विस्तार से सुना और केंद्र सरकार पर गंभीर आरोप लगाए। राहुल गांधी ने कहा कि भारतीय जनता पार्टी (BJP) सरकार द्वारा लाया गया ट्रांसजेंडर पर्सन्स अमेंडमेंट बिल न केवल इस समुदाय के संवैधानिक अधिकारों का उल्लंघन करता है, बल्कि उनकी पहचान और गरिमा पर भी सीधा हमला है।<br />
जनसंसद में उठी आवाज़, ट्रांसजेंडर समुदाय की पीड़ा सामने<br />
राहुल गांधी ने अपने बयान में कहा कि जनसंसद में आए ट्रांसजेंडर प्रतिनिधियों ने संस्थागत भेदभाव, सामाजिक बहिष्कार और नीतिगत उत्पीड़न के कई उदाहरण साझा किए। उन्होंने बताया कि शिक्षा, रोजगार, स्वास्थ्य और सामाजिक सुरक्षा जैसे बुनियादी क्षेत्रों में भी उन्हें बराबरी का अधिकार नहीं मिल पा रहा है।<br />
राहुल गांधी के मुताबिक, प्रतिनिधिमंडल ने यह भी कहा कि मौजूदा नीतियां उनकी स्थिति सुधारने के बजाय उन्हें और अधिक हाशिए पर धकेल रही हैं। कई मामलों में सरकारी प्रक्रियाएं इतनी जटिल हैं कि ट्रांसजेंडर व्यक्तियों के लिए अपने अधिकारों तक पहुंचना लगभग असंभव हो जाता है।<br />
कांग्रेस नेता ने विशेष रूप से ट्रांसजेंडर पर्सन्स अमेंडमेंट बिल की आलोचना करते हुए कहा कि यह कानून ट्रांसजेंडर व्यक्तियों के self-identification के अधिकार को खत्म करता है। उन्होंने इसे NALSA v. Union of India के ऐतिहासिक फैसले का उल्लंघन बताया।<br />
इस फैसले में सुप्रीम कोर्ट ने ट्रांसजेंडर व्यक्तियों को अपनी पहचान स्वयं निर्धारित करने का अधिकार दिया था और इसे मौलिक अधिकारों के दायरे में रखा था। राहुल गांधी का कहना है कि नया विधेयक इस सिद्धांत को कमजोर करता है और ट्रांसजेंडर व्यक्तियों को मेडिकल बोर्ड के सामने जाकर अपनी पहचान साबित करने के लिए मजबूर करता है, जो न केवल अपमानजनक है बल्कि उनकी गरिमा के खिलाफ भी है।<br />
राहुल गांधी ने यह भी आरोप लगाया कि यह बिल देश की सांस्कृतिक विविधता को खत्म करने की कोशिश करता है। भारत में किन्नर, हिजड़ा, अरावनी जैसे कई पारंपरिक समुदाय सदियों से मौजूद हैं और उन्हें सामाजिक-सांस्कृतिक मान्यता प्राप्त रही है।<br />
उनका कहना है कि यह कानून इन विविध पहचानों को एक संकीर्ण ढांचे में बांधने का प्रयास करता है, जिससे उनकी विशिष्ट पहचान और परंपराएं प्रभावित होंगी। उन्होंने इसे भारत की समृद्ध सामाजिक विरासत के खिलाफ बताया।<br />
राहुल गांधी ने बिल के उस प्रावधान पर भी सवाल उठाया जिसमें ट्रांसजेंडर व्यक्तियों को मेडिकल बोर्ड के सामने पेश होकर प्रमाणित करना होगा। उन्होंने कहा कि यह प्रक्रिया अपमानजनक है और इससे समुदाय के लोगों को मानसिक और सामाजिक रूप से नुकसान पहुंचता है।<br />
उन्होंने यह भी कहा कि पहचान किसी व्यक्ति का निजी अधिकार है, जिसे किसी सरकारी समिति के सामने साबित करने की आवश्यकता नहीं होनी चाहिए।<br />
राहुल गांधी ने कहा कि यह बिल ऐसे दंडात्मक प्रावधानों को बढ़ावा देता है जिनमें पर्याप्त सुरक्षा उपाय नहीं हैं। उनका आरोप है कि इससे ट्रांसजेंडर समुदाय के खिलाफ पुलिस और प्रशासनिक दमन की संभावना बढ़ सकती है। उन्होंने कहा कि कानून का उद्देश्य सुरक्षा और संरक्षण होना चाहिए, न कि निगरानी और नियंत्रण।<br />
कांग्रेस नेता ने सबसे गंभीर आरोप यह लगाया कि सरकार ने इस बिल को लाने से पहले ट्रांसजेंडर समुदाय से कोई सार्थक संवाद नहीं किया। उन्होंने कहा कि किसी भी कानून को बनाने से पहले संबंधित समुदाय की भागीदारी आवश्यक होती है, लेकिन इस मामले में सरकार ने एकतरफा निर्णय लिया।<br />
राहुल गांधी ने कहा, “अगर आप किसी समुदाय के जीवन को प्रभावित करने वाला कानून बना रहे हैं, तो उनके साथ बातचीत करना लोकतंत्र की बुनियादी शर्त है।”<br />
राहुल गांधी ने अपने बयान में भारतीय संविधान का हवाला देते हुए कहा कि हर नागरिक को जीवन, स्वतंत्रता, पहचान और गरिमा का अधिकार है। उन्होंने आरोप लगाया कि BJP सरकार अपने “संकीर्ण विचारों” के चलते इन मूल्यों को कमजोर कर रही है।<br />
उन्होंने कहा कि यह केवल एक कानून का मुद्दा नहीं है, बल्कि देश के लोकतांत्रिक और संवैधानिक ढांचे की परीक्षा है।<br />
राहुल गांधी ने स्पष्ट किया कि कांग्रेस पार्टी इस बिल का पुरजोर विरोध करेगी। उन्होंने कहा कि पार्टी ट्रांसजेंडर समुदाय के साथ खड़ी है और उनके अधिकारों की रक्षा के लिए हर संभव प्रयास करेगी। उन्होंने यह भी संकेत दिया कि आने वाले समय में इस मुद्दे को संसद और सड़क दोनों जगह उठाया जाएगा।<br />
हालांकि, सरकार और BJP के नेताओं का कहना है कि यह बिल ट्रांसजेंडर समुदाय को अधिकार और सुरक्षा देने के उद्देश्य से लाया गया है। सरकार का दावा है कि इसमें पहचान प्रमाणन, सामाजिक सुरक्षा योजनाएं और भेदभाव के खिलाफ प्रावधान शामिल हैं।<br />
सरकार का यह भी कहना है कि यह कानून ट्रांसजेंडर व्यक्तियों को मुख्यधारा में लाने और उनके लिए अवसर बढ़ाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।<br />
कानूनी और सामाजिक विशेषज्ञों का मानना है कि इस पूरे विवाद का केंद्र “पहचान का अधिकार” है। एक पक्ष का तर्क है कि self-identification मौलिक अधिकार है और इसमें किसी तरह की बाध्यता नहीं होनी चाहिए, जबकि दूसरा पक्ष कहता है कि प्रशासनिक प्रक्रियाओं के लिए कुछ प्रमाणन आवश्यक होता है।<br />
विशेषज्ञों का यह भी कहना है कि किसी भी कानून को लागू करते समय संवेदनशीलता और समुदाय की भागीदारी बेहद जरूरी है।<br />
देश में ट्रांसजेंडर समुदाय आज भी कई चुनौतियों का सामना कर रहा है। शिक्षा और रोजगार के अवसर सीमित हैं, स्वास्थ्य सेवाओं तक पहुंच में बाधाएं हैं और सामाजिक भेदभाव अब भी व्यापक रूप से मौजूद है।<br />
कई राज्यों में ट्रांसजेंडर कल्याण योजनाएं लागू हैं, लेकिन उनका प्रभाव सीमित है। जमीनी स्तर पर इन योजनाओं का लाभ सभी तक नहीं पहुंच पा रहा है।<br />
आने वाले चुनावों के मद्देनजर यह मुद्दा राजनीतिक रूप से भी महत्वपूर्ण हो सकता है। विपक्ष जहां इसे अधिकारों और संवैधानिक मूल्यों से जोड़कर देख रहा है, वहीं सरकार इसे सामाजिक सुधार और कल्याण की दिशा में उठाया गया कदम बता रही है।<br />
विश्लेषकों का मानना है कि यह मुद्दा शहरी और शिक्षित वर्ग के साथ-साथ सामाजिक संगठनों के बीच भी चर्चा का केंद्र बन सकता है।<br />
ट्रांसजेंडर पर्सन्स अमेंडमेंट बिल को लेकर जारी विवाद यह दिखाता है कि भारत में अधिकार और नीति के बीच संतुलन बनाना कितना चुनौतीपूर्ण है। एक ओर सरकार का दावा है कि वह सुधार और सुरक्षा की दिशा में काम कर रही है, वहीं दूसरी ओर विपक्ष और समुदाय के कई लोग इसे अधिकारों पर हमला मान रहे हैं।<br />
इस पूरे घटनाक्रम ने यह सवाल खड़ा कर दिया है कि क्या कानून बनाते समय प्रभावित समुदाय की आवाज़ को पर्याप्त महत्व दिया जा रहा है या नहीं।<br />
आने वाले समय में यह देखना दिलचस्प होगा कि क्या सरकार इस बिल में संशोधन करती है या विपक्ष के विरोध के बावजूद इसे आगे बढ़ाती है। फिलहाल, इतना साफ है कि ट्रांसजेंडर समुदाय के अधिकारों का मुद्दा अब राष्ट्रीय बहस का केंद्र बन चुका है।</p>
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		<title>मुंबई में रेल परियोजना पर सियासत तेज—वर्षा गायकवाड़ ने लोकसभा में उठाया विस्थापन का मुद्दा, पुनर्वास नीति पर सरकार से मांगा जवाब</title>
		<link>https://www.samvaadindia.com/politics-heats-up-over-mumbai-rail-project-varsha-gaikwad-raises-displacement-issue-in-lok-sabha-seeks-governments-response-on-rehabilitation-policy/</link>
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		<dc:creator><![CDATA[संवाद इंडिया]]></dc:creator>
		<pubDate>Mon, 23 Mar 2026 11:08:59 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[अंतरराष्ट्रीय]]></category>
		<category><![CDATA[एक्सक्लूसिव]]></category>
		<category><![CDATA[खास खबर]]></category>
		<category><![CDATA[ब्रेकिंग]]></category>
		<category><![CDATA[महाराष्ट्र]]></category>
		<category><![CDATA[Politics Heats Up Over Mumbai Rail Project—Varsha Gaikwad Raises Displacement Issue in Lok Sabha]]></category>
		<category><![CDATA[Seeks Government's Response on Rehabilitation Policy]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>नई दिल्ली/मुंबई 23 मार्च। देश की आर्थिक राजधानी मुंबई में प्रस्तावित रेल परियोजना को लेकर हजारों परिवारों के</p>
<p>The post <a href="https://www.samvaadindia.com/politics-heats-up-over-mumbai-rail-project-varsha-gaikwad-raises-displacement-issue-in-lok-sabha-seeks-governments-response-on-rehabilitation-policy/">मुंबई में रेल परियोजना पर सियासत तेज—वर्षा गायकवाड़ ने लोकसभा में उठाया विस्थापन का मुद्दा, पुनर्वास नीति पर सरकार से मांगा जवाब</a> appeared first on <a href="https://www.samvaadindia.com">Samvaad India</a>.</p>
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										<content:encoded><![CDATA[<p>नई दिल्ली/मुंबई 23 मार्च। देश की आर्थिक राजधानी मुंबई में प्रस्तावित रेल परियोजना को लेकर हजारों परिवारों के संभावित विस्थापन का मुद्दा अब संसद तक पहुंच गया है। लोकसभा में कांग्रेस सांसद वर्षा एकनाथ गायकवाड़ ने इस गंभीर विषय पर चर्चा के लिए नोटिस देते हुए सरकार से स्पष्ट जवाब मांगा है। उन्होंने कहा कि कुर्ला से ट्रॉम्बे तक बनाई जा रही रेलवे लाइन के कारण हजारों परिवारों के सामने अपने घरों से बेघर होने का संकट खड़ा हो गया है, जिससे स्थानीय निवासियों में भय, असमंजस और असुरक्षा का माहौल है।<br />
वर्षा गायकवाड़ ने सदन में अपनी बात रखते हुए कहा कि यह मामला केवल अवैध निर्माण या झुग्गियों का नहीं है, बल्कि यह उन हजारों परिवारों की जिंदगी से जुड़ा हुआ है, जिनके लिए ये घर ही उनका सब कुछ हैं। उन्होंने कहा, “यह सिर्फ झोपड़ियां नहीं हैं, बल्कि वहां लोगों के परिवार, उनके बच्चों का भविष्य और उनकी वर्षों की मेहनत की कमाई जुड़ी हुई है। ऐसे में सरकार को मानवीय दृष्टिकोण अपनाते हुए या तो इन घरों को बचाने का प्रयास करना चाहिए या फिर उचित पुनर्वास की व्यवस्था सुनिश्चित करनी चाहिए।”<br />
<strong>परियोजना और विस्थापन का संकट</strong><br />
मुंबई महानगर क्षेत्र में परिवहन व्यवस्था को सुदृढ़ करने के लिए कुर्ला से ट्रॉम्बे तक नई रेलवे लाइन बिछाने की योजना पर काम किया जा रहा है। यह परियोजना शहर के पूर्वी हिस्सों में यातायात दबाव को कम करने और कनेक्टिविटी बढ़ाने के लिहाज से महत्वपूर्ण मानी जा रही है। लेकिन इस परियोजना की जद में आने वाले क्षेत्रों में बड़ी संख्या में झुग्गी-झोपड़ियां और छोटे मकान स्थित हैं, जहां वर्षों से हजारों परिवार निवास कर रहे हैं।</p>
<blockquote class="twitter-tweet" data-width="550" data-dnt="true">
<p lang="hi" dir="ltr">आज मुंबई में कुर्ला से ट्रॉम्बे तक रेलवे लाइन बनाई जा रही है। </p>
<p>इस कारण हजारों परिवारों को नोटिस दिया गया है, जिसमें घर तोड़ने की बात कही गई है। इन नोटिसों को लेकर स्थानीय निवासियों में भय और असमंजस का माहौल है।</p>
<p>मेरा सरकार से अनुरोध है:</p>
<p>•  यह सिर्फ झोपड़ियां नहीं है। वहां… <a href="https://t.co/9uoJ4YREp7">pic.twitter.com/9uoJ4YREp7</a></p>
<p>&mdash; Congress (@INCIndia) <a href="https://twitter.com/INCIndia/status/2036001432055517368?ref_src=twsrc%5Etfw">March 23, 2026</a></p></blockquote>
<p><script async src="https://platform.twitter.com/widgets.js" charset="utf-8"></script><br />
स्थानीय प्रशासन द्वारा इन परिवारों को नोटिस जारी किए गए हैं, जिनमें उन्हें अपने घर खाली करने और तोड़ने के निर्देश दिए गए हैं। इन नोटिसों के बाद से प्रभावित क्षेत्रों में चिंता और डर का माहौल बना हुआ है। लोग अपने भविष्य को लेकर अनिश्चितता में हैं और उन्हें यह समझ नहीं आ रहा कि वे आगे कहां जाएंगे।<br />
<strong>“नोटिस नहीं, समाधान चाहिए”</strong><br />
वर्षा गायकवाड़ ने कहा कि केवल नोटिस जारी कर देना किसी समस्या का समाधान नहीं हो सकता। उन्होंने सरकार पर आरोप लगाया कि बिना ठोस पुनर्वास योजना के लोगों को बेघर करना न केवल अमानवीय है, बल्कि यह उनके मौलिक अधिकारों का भी उल्लंघन है।<br />
उन्होंने कहा, “सरकार को यह समझना होगा कि शहर के विकास की कीमत गरीब और मध्यम वर्ग के लोगों को अपने घर खोकर नहीं चुकानी चाहिए। अगर विकास करना है, तो उसमें मानवीय संवेदनाएं भी शामिल होनी चाहिए।”<br />
<strong>मंत्री और अधिकारियों से मुलाकात</strong><br />
गायकवाड़ ने यह भी बताया कि उन्होंने इस मुद्दे को लेकर संबंधित मंत्री और अधिकारियों से मुलाकात की है। उन्होंने प्रशासन से मांग की है कि प्रभावित क्षेत्रों का विस्तृत सर्वे कराया जाए और प्रत्येक परिवार के लिए पुनर्वास की ठोस योजना बनाई जाए।<br />
उन्होंने कहा, “मैंने अधिकारियों से स्पष्ट रूप से कहा है कि जब तक सर्वे पूरा नहीं हो जाता और पुनर्वास की व्यवस्था तय नहीं हो जाती, तब तक किसी भी तरह की तोड़फोड़ की कार्रवाई नहीं की जानी चाहिए।”<br />
<strong>पुनर्वास नीति का अभाव</strong><br />
वर्षा गायकवाड़ ने अपने बयान में एक व्यापक मुद्दा भी उठाया—मुंबई में झुग्गी-झोपड़ियों में रहने वाले लाखों लोगों के लिए स्पष्ट और प्रभावी पुनर्वास नीति का अभाव। उन्होंने कहा कि यह समस्या केवल इस एक परियोजना तक सीमित नहीं है, बल्कि पूरे शहर में फैली हुई है।<br />
“मुंबई में लाखों लोग झुग्गी-झोपड़ियों में रहते हैं, लेकिन उनके पुनर्वास के लिए कोई स्पष्ट और प्रभावी नीति नहीं है। यह स्थिति बेहद चिंताजनक है। राज्य और केंद्र सरकार को मिलकर इस दिशा में काम करना चाहिए और एक ऐसी नीति बनानी चाहिए, जो इन लोगों को सम्मानजनक जीवन दे सके,” उन्होंने कहा।<br />
<strong>स्थानीय निवासियों की पीड़ा</strong><br />
प्रभावित क्षेत्रों में रहने वाले लोगों का कहना है कि वे वर्षों से इन जगहों पर रह रहे हैं और उन्होंने अपनी पूरी जिंदगी यहीं बिता दी है। कई लोगों ने बताया कि उन्होंने अपनी मेहनत की कमाई से अपने घर बनाए हैं और अब अचानक उन्हें खाली करने का नोटिस मिल गया है।<br />
एक स्थानीय निवासी ने कहा, “हम यहां 20-25 साल से रह रहे हैं। हमारे बच्चे यहीं बड़े हुए हैं, यहीं स्कूल जाते हैं। अगर हमारा घर टूट गया तो हम कहां जाएंगे? सरकार हमें रहने के लिए कोई जगह दे, तभी हम यहां से हटेंगे।”<br />
महिलाओं ने भी अपनी चिंता जाहिर करते हुए कहा कि घर टूटने के बाद सबसे ज्यादा परेशानी बच्चों और बुजुर्गों को होगी। “हमारे पास इतना पैसा नहीं है कि हम कहीं और घर ले सकें। अगर सरकार हमें कहीं बसाएगी नहीं, तो हम सड़कों पर आ जाएंगे,”<br />
<strong>विकास बनाम विस्थापन</strong><br />
यह मुद्दा एक बार फिर उस पुरानी बहस को सामने लाता है—विकास बनाम विस्थापन। जहां एक ओर सरकार शहर के बुनियादी ढांचे को मजबूत करने के लिए नई परियोजनाएं शुरू कर रही है, वहीं दूसरी ओर इन परियोजनाओं की कीमत गरीब और कमजोर वर्ग को चुकानी पड़ रही है।<br />
विशेषज्ञों का मानना है कि विकास परियोजनाओं को लागू करते समय सामाजिक प्रभावों का आकलन करना बेहद जरूरी है। यदि समय रहते पुनर्वास और पुनर्स्थापन की योजना नहीं बनाई जाती, तो इससे बड़े सामाजिक और मानवीय संकट पैदा हो सकते हैं।<br />
<strong>सरकार का पक्ष</strong><br />
हालांकि इस मुद्दे पर सरकार की ओर से आधिकारिक रूप से विस्तृत बयान अभी सामने नहीं आया है, लेकिन सूत्रों के अनुसार परियोजना को जनहित में आवश्यक बताया जा रहा है। अधिकारियों का कहना है कि रेलवे लाइन बनने से लाखों लोगों को फायदा होगा और शहर में यातायात व्यवस्था बेहतर होगी।<br />
सरकार के कुछ प्रतिनिधियों का यह भी कहना है कि प्रभावित लोगों के पुनर्वास के लिए योजनाएं बनाई जा रही हैं और किसी को भी बिना वैकल्पिक व्यवस्था के बेघर नहीं किया जाएगा। हालांकि, विपक्ष का आरोप है कि यह दावे जमीन पर नजर नहीं आ रहे हैं।<br />
<strong>संसद में बहस की संभावना</strong><br />
वर्षा गायकवाड़ द्वारा दिए गए नोटिस के बाद यह संभावना जताई जा रही है कि आने वाले दिनों में इस मुद्दे पर लोकसभा में विस्तृत चर्चा हो सकती है। विपक्ष इस मुद्दे को लेकर सरकार को घेरने की तैयारी में है, जबकि सरकार अपने विकास एजेंडे को सामने रखकर इसका बचाव कर सकती है।<br />
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह मुद्दा केवल मुंबई तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि देश के अन्य शहरों में भी इसी तरह के मामलों को लेकर बहस को हवा दे सकता है।<br />
<strong>समाधान की राह</strong><br />
विशेषज्ञों का सुझाव है कि इस तरह के मामलों में सरकार को तीन स्तरों पर काम करना चाहिए—पहला, प्रभावित लोगों की सही पहचान और सर्वे; दूसरा, उनके लिए वैकल्पिक आवास की व्यवस्था; और तीसरा, पुनर्वास के बाद उनके रोजगार और आजीविका के साधनों को सुरक्षित करना।<br />
इसके अलावा, दीर्घकालिक दृष्टि से शहरी गरीबों के लिए सस्ती और सुलभ आवास नीति बनाना भी जरूरी है, ताकि भविष्य में इस तरह की समस्याएं न उत्पन्न हों।<br />
मुंबई में कुर्ला-ट्रॉम्बे रेल परियोजना के कारण उत्पन्न विस्थापन का मुद्दा अब राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा का विषय बन चुका है। वर्षा गायकवाड़ ने लोकसभा में इस मुद्दे को उठाकर न केवल प्रभावित परिवारों की आवाज बुलंद की है, बल्कि सरकार के सामने एक महत्वपूर्ण सवाल भी खड़ा किया है—क्या विकास की कीमत गरीबों के घर उजाड़कर चुकाई जाएगी, या फिर एक ऐसा रास्ता निकाला जाएगा जिसमें विकास और मानवीय संवेदनाएं दोनों साथ चल सकें?<br />
आने वाले दिनों में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि सरकार इस मुद्दे पर क्या रुख अपनाती है और क्या प्रभावित परिवारों को राहत मिल पाती है या नहीं। फिलहाल, हजारों परिवार अपने भविष्य को लेकर अनिश्चितता और चिंता के बीच जी रहे हैं, और उनकी नजरें सरकार के अगले कदम पर टिकी हुई हैं।</p>
<p>The post <a href="https://www.samvaadindia.com/politics-heats-up-over-mumbai-rail-project-varsha-gaikwad-raises-displacement-issue-in-lok-sabha-seeks-governments-response-on-rehabilitation-policy/">मुंबई में रेल परियोजना पर सियासत तेज—वर्षा गायकवाड़ ने लोकसभा में उठाया विस्थापन का मुद्दा, पुनर्वास नीति पर सरकार से मांगा जवाब</a> appeared first on <a href="https://www.samvaadindia.com">Samvaad India</a>.</p>
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