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	<title>संवाद इंडिया, Author at Samvaad India</title>
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		<title>महिला आरक्षण और परिसीमन पर फिर तेज हुई सियासत, कांग्रेस ने पीएम पर साधा निशाना</title>
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		<dc:creator><![CDATA[संवाद इंडिया]]></dc:creator>
		<pubDate>Tue, 28 Apr 2026 10:05:27 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[अंतरराष्ट्रीय]]></category>
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		<category><![CDATA[Congress targeted the PM]]></category>
		<category><![CDATA[Politics on women's reservation and delimitation intensified again]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>जयराम रमेश बोले—सर्वदलीय बैठक बुलाकर 2029 से लागू हो महिला आरक्षण, ‘परिसीमन की साजिश’ का लगाया आरोप नई</p>
<p>The post <a href="https://www.samvaadindia.com/politics-on-womens-reservation-and-delimitation-intensified-again-congress-targeted-the-pm/">महिला आरक्षण और परिसीमन पर फिर तेज हुई सियासत, कांग्रेस ने पीएम पर साधा निशाना</a> appeared first on <a href="https://www.samvaadindia.com">Samvaad India</a>.</p>
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										<content:encoded><![CDATA[<p><strong>जयराम रमेश बोले—सर्वदलीय बैठक बुलाकर 2029 से लागू हो महिला आरक्षण, ‘परिसीमन की साजिश’ का लगाया आरोप</strong></p>
<p>नई दिल्ली, 28 अप्रैल 2026। देश की राजनीति में महिला आरक्षण और परिसीमन को लेकर एक बार फिर बहस तेज हो गई है। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और महासचिव जयराम रमेश ने प्रधानमंत्री पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा है कि सरकार ने लोकसभा के परिसीमन को राजनीतिक लाभ के लिए इस्तेमाल करने की कोशिश की, लेकिन विपक्ष की एकजुटता के कारण यह प्रयास विफल हो गया। उन्होंने मांग की है कि अब सरकार को महिला आरक्षण कानून को लागू करने के लिए ठोस पहल करनी चाहिए और इस विषय पर सर्वदलीय बैठक बुलानी चाहिए।<br />
सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर जारी अपने विस्तृत बयान में जयराम रमेश ने कहा कि अब जबकि चुनाव प्रचार समाप्त हो चुका है और परिसीमन को लेकर सरकार की “चालाकी भरी कोशिश” नाकाम हो गई है, तो प्रधानमंत्री को विपक्ष की उस मांग पर ध्यान देना चाहिए जो मार्च 2026 के मध्य से लगातार उठाई जा रही है। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में सहमति और संवाद की भूमिका अहम होती है, ऐसे में सरकार को एकतरफा निर्णय लेने के बजाय सभी दलों को साथ लेकर चलना चाहिए।<br />
कांग्रेस नेता ने अपने बयान में विशेष रूप से नारी शक्ति वंदन अधिनियम, 2023 का उल्लेख करते हुए कहा कि इस कानून को 16 अप्रैल 2026 की देर रात “घबराहट में अधिसूचित” किया गया। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार ने इसे बिना व्यापक चर्चा और तैयारी के लागू करने की कोशिश की, जो लोकतांत्रिक प्रक्रिया के अनुरूप नहीं है। रमेश ने सुझाव दिया कि इस कानून को 2029 से लोकसभा की मौजूदा सीटों की संख्या के साथ लागू किया जा सकता है, बशर्ते इसके लिए सभी राजनीतिक दलों के बीच सहमति बनाई जाए।</p>
<blockquote class="twitter-tweet" data-width="550" data-dnt="true">
<p lang="hi" dir="ltr">अब जबकि चुनाव प्रचार समाप्त हो चुका है और लोकसभा के खतरनाक परिसीमन को जबरन लागू करने की उनकी चालाकी भरी कोशिश विपक्ष की एकजुटता और सामूहिकता के कारण बुरी तरह विफल हो गई है, अब समय आ गया है कि प्रधानमंत्री वही करें, जिसकी मांग विपक्ष मार्च 2026 के मध्य से एकजुट होकर लगातार करता आ…</p>
<p>&mdash; Jairam Ramesh (@Jairam_Ramesh) <a href="https://twitter.com/Jairam_Ramesh/status/2049042101447569535?ref_src=twsrc%5Etfw">April 28, 2026</a></p></blockquote>
<p><script async src="https://platform.twitter.com/widgets.js" charset="utf-8"></script></p>
<p>उन्होंने स्पष्ट कहा कि इस विषय पर चर्चा के लिए एक सर्वदलीय बैठक बुलाई जानी चाहिए। उनके अनुसार, यह न केवल संभव है बल्कि लोकतांत्रिक दृष्टि से वांछनीय और आवश्यक भी है। उन्होंने कहा कि महिला आरक्षण जैसे महत्वपूर्ण मुद्दे को राजनीतिक लाभ-हानि के नजरिए से नहीं बल्कि सामाजिक न्याय और समानता के दृष्टिकोण से देखा जाना चाहिए।<br />
जयराम रमेश ने केंद्र सरकार पर यह भी आरोप लगाया कि संसद के विशेष सत्र के दौरान महिला आरक्षण वास्तव में मुख्य मुद्दा था ही नहीं। उनके अनुसार, उस समय का वास्तविक एजेंडा परिसीमन था, जिसे प्रधानमंत्री के “राजनीतिक संरक्षण” के लिए आगे बढ़ाया जा रहा था। उन्होंने कहा कि सरकार ने महिला आरक्षण को एक राजनीतिक औजार के रूप में इस्तेमाल किया, जिससे इस महत्वपूर्ण मुद्दे की गंभीरता कम हुई।<br />
कांग्रेस नेता ने अपने बयान में प्रधानमंत्री से तीखा सवाल करते हुए कहा कि अब समय आ गया है कि वे देश की महिलाओं के प्रति अपनी जिम्मेदारी निभाएं। उन्होंने आरोप लगाया कि महिलाओं का इस्तेमाल निजी राजनीतिक एजेंडे को आगे बढ़ाने के लिए किया गया, जो न केवल अनुचित है बल्कि लोकतांत्रिक मूल्यों के खिलाफ भी है। उन्होंने कहा कि सरकार को “प्रायश्चित” करते हुए महिलाओं को उनका अधिकार दिलाना चाहिए।<br />
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह बयान ऐसे समय में आया है जब देश में महिला आरक्षण और परिसीमन को लेकर व्यापक बहस चल रही है। एक ओर सरकार इसे ऐतिहासिक कदम बता रही है, वहीं विपक्ष इसे राजनीतिक रणनीति का हिस्सा मान रहा है। इस मुद्दे ने आगामी चुनावों के मद्देनजर राजनीतिक दलों के बीच टकराव को और तेज कर दिया है।<br />
विशेषज्ञों के अनुसार, महिला आरक्षण कानून का प्रभावी क्रियान्वयन कई जटिल प्रक्रियाओं से जुड़ा हुआ है, जिनमें परिसीमन भी शामिल है। परिसीमन के तहत लोकसभा और विधानसभा क्षेत्रों की सीमाओं का पुनर्निर्धारण किया जाता है, जिससे सीटों की संख्या और उनका वितरण प्रभावित होता है। ऐसे में यह सवाल उठ रहा है कि क्या बिना परिसीमन के महिला आरक्षण लागू किया जा सकता है या इसके लिए पहले परिसीमन आवश्यक है।<br />
कांग्रेस का तर्क है कि महिला आरक्षण को मौजूदा सीटों के साथ भी लागू किया जा सकता है और इसके लिए किसी बड़े बदलाव की आवश्यकता नहीं है। वहीं सरकार का पक्ष यह रहा है कि परिसीमन के बाद ही इस कानून को प्रभावी रूप से लागू किया जा सकेगा, ताकि आरक्षण का सही संतुलन सुनिश्चित किया जा सके।<br />
इस पूरे विवाद के बीच सर्वदलीय बैठक की मांग को एक महत्वपूर्ण राजनीतिक पहल के रूप में देखा जा रहा है। यदि सरकार इस मांग को स्वीकार करती है, तो इससे संवाद का रास्ता खुल सकता है और इस जटिल मुद्दे का कोई सर्वमान्य समाधान निकल सकता है। हालांकि, यह भी स्पष्ट है कि इस मुद्दे पर राजनीतिक सहमति बनाना आसान नहीं होगा, क्योंकि इसमें विभिन्न दलों के हित और रणनीतियां जुड़ी हुई हैं।<br />
महिला संगठनों और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने भी इस मुद्दे पर अपनी प्रतिक्रिया दी है। उनका कहना है कि महिला आरक्षण लंबे समय से लंबित मांग रही है और इसे अब और टाला नहीं जाना चाहिए। उन्होंने राजनीतिक दलों से अपील की है कि वे इस मुद्दे को राजनीतिक विवाद से ऊपर उठकर देखें और महिलाओं को समान प्रतिनिधित्व दिलाने के लिए मिलकर काम करें।<br />
इस बीच, भाजपा की ओर से अभी तक जयराम रमेश के बयान पर कोई औपचारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है, लेकिन पार्टी के नेताओं ने पहले भी यह स्पष्ट किया है कि महिला आरक्षण कानून सरकार की प्राथमिकता है और इसे लागू करने के लिए आवश्यक सभी कदम उठाए जाएंगे।<br />
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि आने वाले दिनों में यह मुद्दा और अधिक गरमा सकता है। विपक्ष जहां सरकार पर दबाव बनाने की कोशिश करेगा, वहीं सरकार अपने रुख पर कायम रह सकती है। ऐसे में यह देखना दिलचस्प होगा कि क्या सर्वदलीय बैठक की मांग पर कोई ठोस निर्णय लिया जाता है या यह मुद्दा राजनीतिक बयानबाजी तक ही सीमित रह जाता है।<br />
अंततः, यह विवाद केवल राजनीतिक नहीं बल्कि सामाजिक महत्व का भी है। महिला आरक्षण देश में लैंगिक समानता की दिशा में एक बड़ा कदम माना जाता है, और इसका प्रभाव आने वाले वर्षों में देश की राजनीति और समाज दोनों पर पड़ सकता है। ऐसे में यह आवश्यक है कि इस मुद्दे पर गंभीरता से विचार किया जाए और ऐसा समाधान निकाला जाए जो सभी पक्षों के लिए स्वीकार्य हो।<br />
फिलहाल, जयराम रमेश के बयान ने इस बहस को एक नई दिशा दे दी है और अब सबकी नजरें केंद्र सरकार के अगले कदम पर टिकी</p>
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		<title>पंजाब राज्यसभा विवाद पर कांग्रेस का तीखा हमला, भाजपा-आप पर जनादेश से खिलवाड़ का आरोप</title>
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		<dc:creator><![CDATA[संवाद इंडिया]]></dc:creator>
		<pubDate>Mon, 27 Apr 2026 15:02:35 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[अंतरराष्ट्रीय]]></category>
		<category><![CDATA[उत्तर प्रदेश]]></category>
		<category><![CDATA[एक्सक्लूसिव]]></category>
		<category><![CDATA[दिल्ली]]></category>
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		<category><![CDATA[accuses BJP-AAP of tampering with mandate]]></category>
		<category><![CDATA[Congress launches scathing attack on Punjab Rajya Sabha row]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>अजय माकन- 6.6% वोट वाली भाजपा ने 86% प्रतिनिधित्व हासिल किया, आप को बताया भाजपा की “बी टीम”</p>
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]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p><strong>अजय माकन- 6.6% वोट वाली भाजपा ने 86% प्रतिनिधित्व हासिल किया, आप को बताया भाजपा की “बी टीम”</strong><br />
नई दिल्ली, 27 अप्रैल। पंजाब की राजनीति में राज्यसभा प्रतिनिधित्व को लेकर नया विवाद खड़ा हो गया है। भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस ने सोमवार को भारतीय जनता पार्टी और आम आदमी पार्टी पर तीखा हमला बोलते हुए आरोप लगाया कि दोनों दलों ने मिलकर जनादेश के साथ “खिलवाड़” किया है। पार्टी के राष्ट्रीय कोषाध्यक्ष अजय माकन ने दावा किया कि भाजपा ने आम आदमी पार्टी के राज्यसभा सांसदों को अपने पक्ष में करके पंजाब से राज्यसभा में 86 प्रतिशत प्रतिनिधित्व हासिल कर लिया है, जबकि उसे विधानसभा चुनाव में महज 6.6 प्रतिशत वोट मिले थे।<br />
कांग्रेस मुख्यालय में आयोजित पत्रकार वार्ता में अजय माकन ने आंकड़ों के जरिए भाजपा और आम आदमी पार्टी पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में राज्यसभा के लिए प्रतिनिधियों का चयन विधानसभा में प्राप्त जनादेश के अनुपात में होता है, लेकिन पंजाब में जो हुआ वह लोकतंत्र की मूल भावना के विपरीत है। उन्होंने कहा कि 2022 के विधानसभा चुनाव में भाजपा को बहुत सीमित जनसमर्थन मिला था और उसके केवल दो विधायक जीत सके थे, इसके बावजूद आज वह राज्यसभा में अत्यधिक प्रतिनिधित्व का दावा कर रही है।<br />
माकन ने सवाल उठाया कि आखिर भाजपा पंजाब की जनता को कैसे समझाएगी कि उनके वोट का महत्व क्या रह गया है। उन्होंने कहा कि यदि जनता ने किसी पार्टी को सीमित समर्थन दिया है, तो उस पार्टी को उसी अनुपात में प्रतिनिधित्व मिलना चाहिए, लेकिन यहां राजनीतिक जोड़तोड़ के जरिए जनादेश को पलटने की कोशिश की गई है।<br />
कांग्रेस नेता ने इस पूरे घटनाक्रम को देश की एकता और अखंडता के लिए भी खतरनाक बताया। उन्होंने कहा कि पंजाब जैसे संवेदनशील और सरहदी राज्य में इस तरह की राजनीतिक गतिविधियां अलगाववादी ताकतों को मजबूत कर सकती हैं। माकन ने कहा कि भाजपा ने वही किया है, जिसे अलगाववादी ताकतें लंबे समय से साबित करने की कोशिश करती रही हैं— कि आम जनता की आवाज को दबा दिया जाता है और उनके मत का सम्मान नहीं होता।<br />
उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा कि पंजाब पहले भी अशांत दौर देख चुका है और वर्तमान परिस्थितियों में किसी भी प्रकार की राजनीतिक अस्थिरता या जनादेश की अनदेखी से स्थिति बिगड़ सकती है। माकन ने कहा कि खालिस्तान समर्थक तत्व एक बार फिर विदेशों में सक्रिय हो रहे हैं और इस प्रकार की घटनाएं उनके प्रचार को बल दे सकती हैं।<br />
अजय माकन ने अपने बयान में पंजाब की आंतरिक स्थिति को लेकर भी चिंता जताई। उन्होंने कहा कि राज्य में अपराध, ड्रग्स तस्करी और गैंगवार जैसी घटनाएं बढ़ रही हैं, जो किसी बड़े संकट की ओर इशारा करती हैं। उन्होंने कहा कि इतिहास गवाह है कि जब भी ऐसे हालात बनते हैं, तो अलगाववाद को बढ़ावा मिलता है।<br />
उन्होंने कहा कि 1980 के दशक में पंजाब ने जिस तरह की हिंसा और अस्थिरता देखी थी, वैसी स्थिति फिर से बनने के संकेत मिल रहे हैं। ऐसे में राजनीतिक दलों को जिम्मेदारी के साथ काम करना चाहिए, न कि सत्ता के लिए किसी भी हद तक जाने की प्रवृत्ति अपनानी चाहिए।<br />
कांग्रेस नेता ने आम आदमी पार्टी पर भी गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि पार्टी अब “आम आदमी” की नहीं रही, बल्कि “धनकुबेरों और अरबपतियों की पार्टी” बन गई है। माकन ने दावा किया कि भाजपा में शामिल हुए आप के राज्यसभा सांसदों की औसत संपत्ति 800 करोड़ रुपये से अधिक है।<br />
उन्होंने कहा कि जिन लोगों को राज्यसभा भेजा गया, वे आम आदमी नहीं बल्कि बड़े उद्योगपति और कारोबारी हैं। इससे यह स्पष्ट होता है कि पार्टी ने अपने मूल सिद्धांतों से समझौता कर लिया है।<br />
अजय माकन ने अरविंद केजरीवाल पर सीधे आरोप लगाते हुए कहा कि उन्होंने राज्यसभा की सीटें पैसे लेकर “बेचीं”। उन्होंने कहा कि पहले पार्टी ने धनबल के आधार पर लोगों को सांसद बनाया और बाद में वही सांसद भाजपा के साथ चले गए।<br />
माकन ने कहा कि यह पूरी प्रक्रिया लोकतंत्र के लिए बेहद खतरनाक है और इससे जनता का विश्वास राजनीतिक व्यवस्था से उठ सकता है। उन्होंने आरोप लगाया कि केजरीवाल खुद आलीशान जीवन जीते हैं और आम आदमी की बात केवल चुनावी मंचों तक सीमित है।<br />
कांग्रेस नेता ने आम आदमी पार्टी के शुरुआती दौर का जिक्र करते हुए कहा कि पार्टी ने अपने ही संस्थापक सदस्यों और वरिष्ठ नेताओं की अनदेखी की। उन्होंने योगेंद्र यादव, प्रशांत भूषण और आशुतोष जैसे नेताओं का उदाहरण देते हुए कहा कि इन योग्य व्यक्तियों को दरकिनार कर दिया गया।<br />
माकन ने आरोप लगाया कि इन नेताओं को इसलिए बाहर किया गया क्योंकि वे पार्टी की कार्यप्रणाली और निर्णयों पर सवाल उठा रहे थे। उन्होंने कहा कि इससे यह स्पष्ट होता है कि पार्टी में लोकतांत्रिक मूल्यों की कमी है।<br />
अजय माकन ने आम आदमी पार्टी को भाजपा की “बी टीम” करार दिया। उन्होंने कहा कि आप केवल उन राज्यों में चुनाव लड़ती है जहां कांग्रेस और भाजपा के बीच सीधा मुकाबला होता है, ताकि कांग्रेस के वोटों को काटा जा सके।<br />
उन्होंने गुजरात, हरियाणा और गोवा का उदाहरण देते हुए कहा कि इन राज्यों में आप की मौजूदगी ने भाजपा को फायदा पहुंचाया है। माकन ने कहा कि अब यह पूरी तरह स्पष्ट हो गया है कि आप का असली उद्देश्य भाजपा को लाभ पहुंचाना है।<br />
माकन ने यह भी आरोप लगाया कि आम आदमी पार्टी ने कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं को बदनाम करने की कोशिश की। उन्होंने डॉ. मनमोहन सिंह और शीला दीक्षित का उल्लेख करते हुए कहा कि ये दोनों नेता अपनी ईमानदारी के लिए जाने जाते हैं, लेकिन आप ने राजनीतिक लाभ के लिए उनकी छवि खराब करने का प्रयास किया।<br />
उन्होंने कहा कि जब भाजपा इन नेताओं के खिलाफ कुछ साबित नहीं कर पाई, तो उसने आम आदमी पार्टी को आगे कर दिया, ताकि कांग्रेस को कमजोर किया जा सके।<br />
कांग्रेस ने इस पूरे मामले को जनादेश की अवहेलना बताया। माकन ने कहा कि लोकतंत्र में जनता सर्वोपरि होती है और उसके फैसले का सम्मान किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि यदि राजनीतिक दल चुनाव के बाद जोड़तोड़ कर अपनी स्थिति मजबूत करते हैं, तो यह जनता के विश्वास के साथ धोखा है।<br />
उन्होंने कहा कि भाजपा और आम आदमी पार्टी की इस रणनीति से लोकतांत्रिक व्यवस्था कमजोर होती है और इससे जनता का भरोसा टूटता है।<br />
प्रेस वार्ता के दौरान अजय माकन ने आगामी चुनावों को लेकर कांग्रेस की रणनीति भी स्पष्ट की। उन्होंने कहा कि पार्टी पंजाब में एकजुट होकर चुनाव लड़ेगी और जनता के मुद्दों को प्रमुखता देगी।<br />
उन्होंने कहा कि वर्तमान राजनीतिक परिस्थितियों में शिरोमणि अकाली दल की स्थिति कमजोर है, जिससे कांग्रेस के लिए अवसर पैदा हुआ है। माकन ने विश्वास जताया कि कांग्रेस पंजाब में मजबूत वापसी करेगी।<br />
इस पूरे घटनाक्रम के बाद पंजाब और राष्ट्रीय राजनीति में बहस तेज हो गई है। एक ओर कांग्रेस भाजपा और आम आदमी पार्टी पर गंभीर आरोप लगा रही है, वहीं दूसरी ओर इन आरोपों पर अन्य दलों की प्रतिक्रियाएं भी सामने आने की संभावना है।<br />
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह मुद्दा आने वाले समय में और तूल पकड़ सकता है, क्योंकि इसमें लोकतंत्र, जनादेश और राजनीतिक नैतिकता जैसे महत्वपूर्ण सवाल जुड़े हुए हैं।<br />
पंजाब राज्यसभा प्रतिनिधित्व को लेकर उठे इस विवाद ने राजनीतिक माहौल को गरमा दिया है। कांग्रेस ने जहां भाजपा और आम आदमी पार्टी पर मिलकर जनादेश को पलटने का आरोप लगाया है, वहीं यह मामला लोकतांत्रिक मूल्यों और राजनीतिक नैतिकता पर भी गंभीर प्रश्न खड़े करता है। आने वाले दिनों में इस मुद्दे पर राजनीतिक घमासान और तेज होने की संभावना</p>
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		<title>विधेयक गिरा, लोकतंत्र जीता: प्रियंका गांधी का मोदी सरकार पर तीखा हमला</title>
		<link>https://www.samvaadindia.com/bill-struck-down-democracy-wins-priyanka-gandhi-launches-scathing-attack-on-modi-government/</link>
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		<dc:creator><![CDATA[संवाद इंडिया]]></dc:creator>
		<pubDate>Sat, 18 Apr 2026 15:30:23 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[अंतरराष्ट्रीय]]></category>
		<category><![CDATA[एक्सक्लूसिव]]></category>
		<category><![CDATA[खास खबर]]></category>
		<category><![CDATA[दिल्ली]]></category>
		<category><![CDATA[ब्रेकिंग]]></category>
		<category><![CDATA[Bill struck down]]></category>
		<category><![CDATA[democracy wins: Priyanka Gandhi launches scathing attack on Modi government]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>महिला आरक्षण के नाम पर परिसीमन की साजिश का आरोप, 2023 में पारित विधेयक तुरंत लागू करने की</p>
<p>The post <a href="https://www.samvaadindia.com/bill-struck-down-democracy-wins-priyanka-gandhi-launches-scathing-attack-on-modi-government/">विधेयक गिरा, लोकतंत्र जीता: प्रियंका गांधी का मोदी सरकार पर तीखा हमला</a> appeared first on <a href="https://www.samvaadindia.com">Samvaad India</a>.</p>
]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p><strong>महिला आरक्षण के नाम पर परिसीमन की साजिश का आरोप, 2023 में पारित विधेयक तुरंत लागू करने की मांग</strong></p>
<p>नई दिल्ली, 18 अप्रैल (संवाददाता)। लोकसभा में संविधान संशोधन विधेयक के गिरने के बाद सियासत तेज हो गई है। कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी वाद्रा ने इसे लोकतंत्र और संविधान की जीत बताते हुए केंद्र सरकार पर गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि महिला आरक्षण के नाम पर परिसीमन को प्रभावित करने की सरकार की साजिश नाकाम हो गई है।</p>
<p>कांग्रेस मुख्यालय में आयोजित प्रेस वार्ता में प्रियंका गांधी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह पर निशाना साधते हुए कहा कि सरकार की मंशा महिला सशक्तिकरण नहीं, बल्कि राजनीतिक लाभ हासिल करना था। उन्होंने आरोप लगाया कि 2011 की जनगणना को आधार बनाकर परिसीमन कराने की तैयारी थी, जिससे भविष्य में सीटों के पुनर्गठन के जरिए सत्ता को फायदा पहुंचाया जा सके।</p>
<p>प्रियंका गांधी ने कहा कि सरकार ने एक “दोहरी रणनीति” अपनाई थी। अगर विधेयक पास हो जाता तो परिसीमन के जरिए राजनीतिक लाभ लिया जाता और अगर पास नहीं होता तो विपक्ष को महिला विरोधी बताकर जनता के बीच भ्रम फैलाया जाता। उन्होंने कहा कि विपक्ष की एकजुटता ने इस पूरी योजना को विफल कर दिया।</p>
<p>उन्होंने संसद का विशेष सत्र अचानक बुलाने और अंतिम समय में विधेयक का मसौदा पेश करने पर भी सवाल उठाए। उनका कहना था कि इससे विपक्ष को पर्याप्त समय नहीं मिला और सरकार खुली बहस से बचना चाहती थी। यह प्रक्रिया लोकतांत्रिक परंपराओं के विपरीत है।</p>
<p>महिला आरक्षण के मुद्दे पर कांग्रेस महासचिव ने स्पष्ट किया कि पूरा विपक्ष इसके समर्थन में है। उन्होंने मांग की कि 2023 में सर्वसम्मति से पारित महिला आरक्षण विधेयक को तुरंत लागू किया जाए। उन्होंने कहा कि लोकसभा की मौजूदा 543 सीटों में से 33 प्रतिशत महिलाओं को आरक्षण देने के लिए विपक्ष पूरी तरह तैयार है।</p>
<p>इसके साथ ही उन्होंने अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) की महिलाओं के लिए भी आबादी के अनुपात में आरक्षण देने की मांग उठाई। उन्होंने कहा कि जब तक ओबीसी महिलाओं को आरक्षण नहीं मिलेगा, तब तक महिला आरक्षण अधूरा रहेगा।</p>
<p>भाजपा के महिला हितैषी दावों पर हमला करते हुए प्रियंका गांधी ने कहा कि देश की महिलाओं ने उन्नाव और हाथरस जैसे मामलों, महिला खिलाड़ियों के विरोध और मणिपुर की घटनाओं में सरकार का रवैया देखा है। उन्होंने आरोप लगाया कि इन मुद्दों पर सरकार संवेदनशीलता दिखाने में विफल रही है।</p>
<p>प्रधानमंत्री और गृह मंत्री के बयानों पर प्रतिक्रिया देते हुए उन्होंने कहा कि भाजपा द्वारा भरोसे की बात करना वास्तविकता से परे है। “जनता का भरोसा इस सरकार से उठ चुका है,” उन्होंने कहा।</p>
<p>सरकार द्वारा इस दिन को “ब्लैक डे” कहे जाने पर प्रियंका गांधी ने पलटवार करते हुए इसे लोकतंत्र का “गोल्डन डे” बताया। उन्होंने कहा कि यह दिन साबित करता है कि संसद में विपक्ष की भूमिका कितनी अहम है और सरकार को हर फैसले में सहमति बनानी चाहिए।</p>
<p>प्रेस वार्ता में कांग्रेस के वरिष्ठ नेता जयराम रमेश भी मौजूद रहे। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में संवाद और पारदर्शिता जरूरी है, न कि एकतरफा निर्णय।</p>
<p>राजनीतिक जानकारों का मानना है कि इस घटनाक्रम का असर आने वाले चुनावों पर पड़ सकता है। महिला आरक्षण और परिसीमन जैसे मुद्दे अब राष्ट्रीय राजनीति के केंद्र में आ गए हैं और इन पर आगे भी सियासी घमासान जारी रहने की संभावना है।</p>
<p>The post <a href="https://www.samvaadindia.com/bill-struck-down-democracy-wins-priyanka-gandhi-launches-scathing-attack-on-modi-government/">विधेयक गिरा, लोकतंत्र जीता: प्रियंका गांधी का मोदी सरकार पर तीखा हमला</a> appeared first on <a href="https://www.samvaadindia.com">Samvaad India</a>.</p>
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		<item>
		<title>लोकसभा में संशोधन विधेयक गिरा: कांग्रेस का दावा—लोकतंत्र की जीत, मोदी-शाह की “साज़िश” नाकाम</title>
		<link>https://www.samvaadindia.com/amendment-bill-defeated-in-lok-sabha-congress-claims-victory-for-democracy-modi-shahs-conspiracy-foiled/</link>
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		<dc:creator><![CDATA[संवाद इंडिया]]></dc:creator>
		<pubDate>Fri, 17 Apr 2026 16:02:38 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[अंतरराष्ट्रीय]]></category>
		<category><![CDATA[एक्सक्लूसिव]]></category>
		<category><![CDATA[खास खबर]]></category>
		<category><![CDATA[दिल्ली]]></category>
		<category><![CDATA[ब्रेकिंग]]></category>
		<category><![CDATA[Amendment Bill Defeated in Lok Sabha: Congress Claims—Victory for Democracy]]></category>
		<category><![CDATA[Modi-Shah’s “Conspiracy” Foiled]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>नई दिल्ली, 17 अप्रैल। लोकसभा में महिला आरक्षण को परिसीमन से जोड़ने वाले संविधान संशोधन विधेयक के गिरने</p>
<p>The post <a href="https://www.samvaadindia.com/amendment-bill-defeated-in-lok-sabha-congress-claims-victory-for-democracy-modi-shahs-conspiracy-foiled/">लोकसभा में संशोधन विधेयक गिरा: कांग्रेस का दावा—लोकतंत्र की जीत, मोदी-शाह की “साज़िश” नाकाम</a> appeared first on <a href="https://www.samvaadindia.com">Samvaad India</a>.</p>
]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p>नई दिल्ली, 17 अप्रैल। लोकसभा में महिला आरक्षण को परिसीमन से जोड़ने वाले संविधान संशोधन विधेयक के गिरने के बाद देश की राजनीति में तीखी प्रतिक्रिया सामने आई है। कांग्रेस ने इस घटनाक्रम को केंद्र सरकार की “असंवैधानिक चाल” की हार और लोकतंत्र व संविधान की जीत करार दिया है। पार्टी के शीर्ष नेताओं—मल्लिकार्जुन खरगे, राहुल गांधी, प्रियंका गांधी वाड्रा और जयराम रमेश —ने एक सुर में सरकार पर हमला बोला और विपक्ष की एकजुटता को लोकतांत्रिक मूल्यों की रक्षा के रूप में प्रस्तुत किया।</p>
<p>कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर पोस्ट करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह पर गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि मोदी-शाह ने देश की आधी आबादी—महिलाओं—को एक “ढाल” बनाकर परिसीमन लागू करने की कोशिश की, जो लोकतंत्र, संविधान और संघीय ढांचे पर सीधा प्रहार था। खड़गे के मुताबिक, यह प्रयास न केवल राजनीतिक रूप से संदिग्ध था बल्कि संवैधानिक मूल्यों के भी विपरीत था।</p>
<blockquote class="twitter-tweet" data-width="550" data-dnt="true">
<p lang="hi" dir="ltr">मोदी-शाह ने देश की आधी आबादी को ढाल बनाकर Delimitation करने की कोशिश की और इस देश के लोकतंत्र, संविधान और Federalism को चोट पहुँचाने का कुत्सित प्रयास किया। </p>
<p>उनकी ये चालबाज़ी एकजुट विपक्ष — INDIA ने भाँप ली और संविधान संशोधन बिल गिर गया। हम सभी विपक्षी दलों के नेताओं का हृदय से…</p>
<p>&mdash; Mallikarjun Kharge (@kharge) <a href="https://twitter.com/kharge/status/2045159302403690842?ref_src=twsrc%5Etfw">April 17, 2026</a></p></blockquote>
<p><script async src="https://platform.twitter.com/widgets.js" charset="utf-8"></script></p>
<p>खड़गे ने दावा किया कि सरकार की इस “चालबाज़ी” को विपक्षी गठबंधन INDIA ने समय रहते समझ लिया और एकजुट होकर इसका विरोध किया, जिसके परिणामस्वरूप संविधान संशोधन विधेयक लोकसभा में पारित नहीं हो सका। उन्होंने कहा कि यह विपक्ष की सामूहिक जीत है और कांग्रेस सभी सहयोगी दलों के नेताओं का आभार व्यक्त करती है, जिन्होंने इस मुद्दे पर एकजुटता दिखाई।</p>
<p>अपने बयान में खड़गे ने तीखा हमला करते हुए कहा कि मोदी और शाह अपनी राजनीति चमकाने के लिए भारत के लोकतंत्र को “तबाह” करने चले थे, लेकिन उनकी यह “साज़िश औंधे मुंह गिर गई।” उन्होंने यह भी कहा कि यह घटनाक्रम इस बात का प्रमाण है कि जब विपक्ष एकजुट होता है, तो वह लोकतंत्र को कमजोर करने वाली किसी भी कोशिश को विफल कर सकता है।</p>
<blockquote class="twitter-tweet" data-width="550" data-dnt="true">
<p lang="hi" dir="ltr">यह महिला आरक्षण बिल नहीं है &#8211; इसका महिलाओं से कोई संबंध नहीं।</p>
<p>यह बिल OBC विरोधी है,<br />यह बिल SC-ST विरोधी है,<br />यह बिल Anti National है &#8211; दक्षिण, उत्तर-पूर्व, उत्तर-पश्चिम और छोटे राज्यों के खिलाफ है।</p>
<p>हम भारत जोड़ने वाले न किसी का हक़ छिनने देंगे, न देश को बंटने देंगे। <a href="https://t.co/9tAUMZOI9g">pic.twitter.com/9tAUMZOI9g</a></p>
<p>&mdash; Rahul Gandhi (@RahulGandhi) <a href="https://twitter.com/RahulGandhi/status/2045099567671394458?ref_src=twsrc%5Etfw">April 17, 2026</a></p></blockquote>
<p><script async src="https://platform.twitter.com/widgets.js" charset="utf-8"></script></p>
<p>महिला आरक्षण के मुद्दे पर कांग्रेस ने सरकार से अपनी मांग दोहराई। खड़गे ने कहा कि 2023 में पारित Nari Shakti Vandan Adhiniyam के तहत महिलाओं को 33 प्रतिशत आरक्षण 2029 के आम चुनावों से ही लागू किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि कांग्रेस सितंबर 2023 से लगातार यह मांग कर रही है और अब यह प्रधानमंत्री की “नारी शक्ति” के प्रति प्रतिबद्धता की असली परीक्षा है।</p>
<p>वहीं लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने इस पूरे घटनाक्रम को संविधान पर हमला करार दिया। संसद परिसर में पत्रकारों से बातचीत करते हुए उन्होंने कहा कि यह वास्तव में महिला आरक्षण बिल नहीं था, बल्कि भारत के राजनीतिक और चुनावी ढांचे को बदलने की कोशिश थी। उनके मुताबिक, यह विधेयक संविधान के मूल सिद्धांतों को कमजोर करने का प्रयास था, जिसे विपक्ष ने सफलतापूर्वक रोक दिया।</p>
<p>राहुल गांधी ने प्रधानमंत्री को चुनौती देते हुए कहा कि यदि सरकार वास्तव में महिलाओं को आरक्षण देना चाहती है, तो 2023 का महिला आरक्षण कानून तत्काल प्रभाव से लागू करे। उन्होंने आश्वासन दिया कि इस मुद्दे पर पूरा विपक्ष सरकार का “100 प्रतिशत समर्थन” करेगा। उन्होंने यह भी कहा कि महिलाओं के अधिकारों को लेकर कोई भी राजनीति नहीं होनी चाहिए और इसे ईमानदारी से लागू किया जाना चाहिए।</p>
<p>बाद में X पर पोस्ट करते हुए राहुल गांधी ने खुशी जताई कि संशोधन विधेयक गिर गया। उन्होंने लिखा कि मोदी सरकार ने महिलाओं के नाम पर संविधान को तोड़ने के लिए असंवैधानिक तरीके अपनाए, लेकिन विपक्ष ने इसे रोक दिया। उन्होंने “संविधान की जय” का नारा देते हुए कहा कि यह लोकतंत्र की जीत है और देश ने देख लिया कि एकजुट विपक्ष किस तरह सरकार को चुनौती दे सकता है।</p>
<p>कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी वाड्रा ने भी सरकार पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि जिस तरह से महिला आरक्षण को प्रस्तुत किया गया, उसका पारित होना “नामुमकिन” था। उनके अनुसार, भाजपा सरकार ने इस मुद्दे को परिसीमन और पुरानी जनगणना से जोड़कर इसे जटिल बना दिया, जिसमें ओबीसी वर्ग को शामिल नहीं किया गया था। उन्होंने स्पष्ट किया कि कांग्रेस ऐसी व्यवस्था से कभी सहमत नहीं हो सकती।</p>
<p>प्रियंका गांधी ने कहा कि आज जो हुआ, वह देश के लोकतंत्र और उसकी अखंडता के लिए “बहुत बड़ी जीत” है। उन्होंने भाजपा पर निशाना साधते हुए कहा कि जिन मुद्दों पर सरकार को कार्रवाई करनी चाहिए थी—जैसे हाथरस, उन्नाव और मणिपुर—वहां सरकार विफल रही, लेकिन अब महिला हितों की बात कर रही है। उन्होंने इसे “विरोधाभासी राजनीति” करार दिया।</p>
<p>अपने सोशल मीडिया पोस्ट में प्रियंका गांधी ने कहा कि संसद और विधानसभाओं में महिला आरक्षण महिलाओं का अधिकार है और इसे कोई नहीं रोक सकता। उन्होंने विश्वास जताया कि एक दिन यह हकीकत बनेगा। हालांकि, उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार ने इसे 2011 की जनगणना और परिसीमन से जोड़कर महिलाओं के हितों को टालने की कोशिश की, जो अंततः विफल रही।</p>
<p>प्रियंका गांधी ने विपक्ष की एकजुटता की सराहना करते हुए कहा कि आज का दिन भारतीय राजनीति में ऐतिहासिक माना जाएगा। उन्होंने कहा कि विपक्ष ने अपनी शक्ति का सही उपयोग करते हुए लोकतंत्र और देशहित को प्राथमिकता दी। उनके अनुसार, यदि ये विधेयक पारित हो जाते, तो देश के लोकतांत्रिक ढांचे पर गंभीर असर पड़ सकता था।</p>
<p>कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और संचार विभाग के प्रभारी जयराम रमेश ने भी इस मुद्दे पर विस्तार से प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री और गृह मंत्री द्वारा महिलाओं के आरक्षण को परिसीमन के “खतरनाक प्रस्तावों” से जोड़ने का प्रयास एक कुटिल राजनीतिक रणनीति थी, जिसे लोकसभा में निर्णायक रूप से पराजित कर दिया गया। उन्होंने इसे लोकतांत्रिक व्यवस्था, संघीय ढांचे और संविधान की जीत बताया।</p>
<p>जयराम रमेश ने यह भी कहा कि सरकार के लिए अब रास्ता स्पष्ट है—उसे 2029 के चुनावों से पहले मौजूदा लोकसभा संरचना में ही महिलाओं को 33 प्रतिशत आरक्षण लागू करना चाहिए। उन्होंने याद दिलाया कि सितंबर 2023 में संसद द्वारा सर्वसम्मति से पारित नारी शक्ति वंदन अधिनियम के बाद से ही विपक्ष लगातार इसकी मांग कर रहा है।</p>
<p>राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, यह पूरा विवाद केवल महिला आरक्षण तक सीमित नहीं है, बल्कि इसके पीछे व्यापक राजनीतिक और संवैधानिक प्रश्न जुड़े हुए हैं। परिसीमन की प्रक्रिया, जो जनसंख्या के आधार पर निर्वाचन क्षेत्रों के पुनर्निर्धारण से संबंधित है, लंबे समय से एक संवेदनशील मुद्दा रही है। यदि इसे संतुलित और पारदर्शी तरीके से लागू नहीं किया गया, तो यह क्षेत्रीय असंतुलन और राजनीतिक प्रतिनिधित्व में असमानता को जन्म दे सकता है।</p>
<p>विशेषज्ञों का मानना है कि दक्षिण भारत और उत्तर-पूर्वी राज्यों में लंबे समय से यह चिंता रही है कि जनसंख्या आधारित परिसीमन से उनकी राजनीतिक शक्ति कम हो सकती है, जबकि अधिक जनसंख्या वाले राज्यों का प्रभाव बढ़ सकता है। यही कारण है कि विपक्ष इस मुद्दे को लेकर विशेष रूप से सतर्क है और सरकार से स्पष्टता की मांग कर रहा है।</p>
<p>वहीं केंद्र सरकार पहले यह कह चुकी है कि महिला आरक्षण का उद्देश्य राजनीति में महिलाओं की भागीदारी बढ़ाना है और यह एक ऐतिहासिक कदम है। हालांकि, विपक्ष का आरोप है that इसे लागू करने में जानबूझकर देरी की जा रही है और इसे जटिल प्रक्रियाओं से जोड़कर टालने की कोशिश की जा रही है।</p>
<p>लोकसभा में विधेयक के गिरने के बाद यह मुद्दा अब और अधिक राजनीतिक महत्व प्राप्त कर चुका है। आने वाले चुनावों में महिला आरक्षण, सामाजिक न्याय और संघीय ढांचे जैसे मुद्दे प्रमुख भूमिका निभा सकते हैं। कांग्रेस और अन्य विपक्षी दल इसे सरकार की “नीतिगत विफलता” के रूप में पेश कर रहे हैं, जबकि भाजपा इसे अलग नजरिए से देखने की कोशिश कर सकती है।</p>
<p>इस पूरे घटनाक्रम ने एक बार फिर यह स्पष्ट कर दिया है कि भारत में लोकतंत्र केवल संख्याबल का खेल नहीं है, बल्कि इसमें संवैधानिक मूल्यों, राजनीतिक संतुलन और जनप्रतिनिधित्व की अहम भूमिका होती है। विपक्ष की एकजुटता ने यह दिखाया है कि यदि राजनीतिक इच्छाशक्ति हो, तो किसी भी विवादास्पद प्रस्ताव को रोका जा सकता है।</p>
<p>अंततः, अब सबकी निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि केंद्र सरकार आगे क्या कदम उठाती है। क्या वह विपक्ष की मांग मानते हुए महिला आरक्षण को जल्द लागू करेगी, या फिर इस मुद्दे पर राजनीतिक टकराव और बढ़ेगा—यह आने वाला समय ही बताएगा। फिलहाल, लोकसभा में इस विधेयक का गिरना भारतीय राजनीति में एक महत्वपूर्ण मोड़ के रूप में देखा जा रहा है, जिसने लोकतंत्र, संविधान और महिलाओं के अधिकारों को लेकर एक नई बहस को जन्म दिया है।</p>
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		<item>
		<title>महिला आरक्षण पर प्रियंका गांधी का तीखा हमला: “मौजूदा सीटों में ही लागू हो 33% आरक्षण, OBC महिलाओं को भी मिले अधिकार”</title>
		<link>https://www.samvaadindia.com/priyanka-gandhi-launches-sharp-attack-on-womens-reservationreservation-must-be-implemented-within-existing-seats-obc-women-too-deserve-their-rights/</link>
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		<dc:creator><![CDATA[संवाद इंडिया]]></dc:creator>
		<pubDate>Fri, 17 Apr 2026 01:53:42 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[अंतरराष्ट्रीय]]></category>
		<category><![CDATA[एक्सक्लूसिव]]></category>
		<category><![CDATA[खास खबर]]></category>
		<category><![CDATA[दिल्ली]]></category>
		<category><![CDATA[ब्रेकिंग]]></category>
		<category><![CDATA[Deserve Their Rights"]]></category>
		<category><![CDATA[Priyanka Gandhi Launches Sharp Attack on Women's Reservation: "33% Reservation Must Be Implemented Within Existing Seats; OBC Women]]></category>
		<category><![CDATA[too]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>सरकार पर ‘राजनीतिक मंशा’ का आरोप; जातिगत जनगणना और पारदर्शी परिसीमन के बिना बिल को बताया अधूरा नई</p>
<p>The post <a href="https://www.samvaadindia.com/priyanka-gandhi-launches-sharp-attack-on-womens-reservationreservation-must-be-implemented-within-existing-seats-obc-women-too-deserve-their-rights/">महिला आरक्षण पर प्रियंका गांधी का तीखा हमला: “मौजूदा सीटों में ही लागू हो 33% आरक्षण, OBC महिलाओं को भी मिले अधिकार”</a> appeared first on <a href="https://www.samvaadindia.com">Samvaad India</a>.</p>
]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p><strong>सरकार पर ‘राजनीतिक मंशा’ का आरोप; जातिगत जनगणना और पारदर्शी परिसीमन के बिना बिल को बताया अधूरा</strong><br />
नई दिल्ली, 16 अप्रैल। कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी वाड्रा ने लोकसभा में महिला आरक्षण को लेकर केंद्र सरकार पर जोरदार हमला बोला और स्पष्ट रूप से कहा कि महिलाओं को 33 प्रतिशत आरक्षण मौजूदा 543 लोकसभा सीटों के भीतर ही दिया जाना चाहिए। उन्होंने यह भी मांग रखी कि इस आरक्षण में अनुसूचित जाति (SC), अनुसूचित जनजाति (ST) और अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) की महिलाओं के लिए भी अलग से कोटा सुनिश्चित किया जाए।<br />
प्रियंका गांधी ने अपने संबोधन में कहा कि अगर सरकार की मंशा वास्तव में महिला सशक्तिकरण की होती, तो यह बिल बिना किसी देरी के और सर्वसम्मति से आज ही पारित हो सकता था। उन्होंने सरकार को चुनौती देते हुए कहा कि “सही निर्णय ले लीजिए, पूरा विपक्ष आपके साथ खड़ा होगा।”<br />
प्रियंका गांधी ने दो टूक कहा कि कांग्रेस पार्टी महिला आरक्षण के पक्ष में मजबूती से खड़ी है, लेकिन मौजूदा विधेयक में कई गंभीर खामियां हैं, जो इसकी नीयत पर सवाल खड़े करती हैं। उन्होंने कहा कि महिला आरक्षण को लागू करने के नाम पर सरकार एक ऐसा ढांचा तैयार कर रही है, जिससे लोकतांत्रिक संतुलन बिगड़ सकता है।<br />
उन्होंने कहा कि महिलाओं को उनका अधिकार देने के लिए नए परिसीमन या सीटों के विस्तार की कोई आवश्यकता नहीं है। मौजूदा सीटों में ही 33 प्रतिशत आरक्षण लागू किया जा सकता है, जिससे प्रक्रिया सरल और पारदर्शी बनी रहेगी। अपने भाषण में प्रियंका गांधी ने विशेष रूप से OBC महिलाओं के अधिकारों का मुद्दा उठाया। उन्होंने कहा कि यदि महिला आरक्षण में OBC महिलाओं के लिए अलग से प्रावधान नहीं किया गया, तो यह सामाजिक न्याय के सिद्धांत के खिलाफ होगा।<br />
उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार जानबूझकर OBC वर्ग को नजरअंदाज कर रही है। “यह सिर्फ तकनीकी मामला नहीं है, बल्कि करोड़ों लोगों के अधिकारों का सवाल है,।<br />
प्रियंका गांधी ने सरकार द्वारा 2011 की जनगणना को परिसीमन का आधार बनाने के प्रस्ताव पर कड़ी आपत्ति जताई। उन्होंने कहा कि यह जनगणना पुरानी हो चुकी है और इसमें OBC वर्ग की सही संख्या का कोई स्पष्ट डेटा नहीं है।<br />
उन्होंने कहा कि सरकार इस पुराने आंकड़े का इस्तेमाल इसलिए करना चाहती है, ताकि OBC वर्ग के अधिकारों को सीमित किया जा सके। “प्रधानमंत्री Narendra Modi इस आधार पर परिसीमन कराकर OBC का हक छीनना चाहते हैं, लेकिन कांग्रेस ऐसा नहीं होने देगी,। प्रियंका गांधी ने जोर देकर कहा कि जब तक देश में जातिगत जनगणना नहीं कराई जाती, तब तक सही प्रतिनिधित्व सुनिश्चित नहीं किया जा सकता। उन्होंने कहा कि जनसंख्या के आधार पर ही लोकतंत्र में भागीदारी तय होती है, इसलिए सटीक आंकड़े बेहद जरूरी हैं।<br />
उन्होंने यह भी कहा कि सरकार जानबूझकर जातिगत जनगणना से बच रही है, क्योंकि इससे सामाजिक असमानताओं की वास्तविक तस्वीर सामने आ जाएगी। संविधान संशोधन और परिसीमन विधेयक पर बोलते हुए प्रियंका गांधी ने कहा कि यह पूरा मामला सिर्फ महिला आरक्षण का नहीं है, बल्कि इसके पीछे एक बड़ी राजनीतिक रणनीति छिपी हुई है।<br />
उन्होंने आरोप लगाया कि इस विधेयक के जरिए कुछ राज्यों की राजनीतिक ताकत को कम करने की कोशिश की जा रही है। “लोकतंत्र की धज्जियां उड़ाई जा रही हैं और अगले चुनाव के लिए भाजपा के पक्ष में जमीन तैयार की जा रही है।<br />
प्रियंका गांधी ने संसद के प्रस्तावित 50 प्रतिशत विस्तार को लेकर भी गंभीर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि विधेयक में यह स्पष्ट नहीं किया गया है कि यह विस्तार कैसे होगा, इसके नियम क्या होंगे और किन मानकों के आधार पर सीटों का पुनर्विन्यास किया जाएगा। उन्होंने इसे एक “अस्पष्ट और संदिग्ध प्रक्रिया” करार दिया और कहा कि इससे पारदर्शिता पर सवाल उठते हैं।<br />
प्रियंका गांधी ने कहा कि 1971 में संसद में राज्यों की भागीदारी को संतुलित तरीके से तय किया गया था और इस पर बदलाव की रोक भी लगाई गई थी। लेकिन वर्तमान विधेयक के जरिए इस संतुलन को बदलने की कोशिश की जा रही है।<br />
उन्होंने चेतावनी दी कि यदि यह विधेयक इसी रूप में पारित हुआ, तो कई राज्यों की राजनीतिक शक्ति कमजोर हो सकती है, जिससे संघीय ढांचे पर असर पड़ेगा।<br />
प्रियंका गांधी ने असम का उदाहरण देते हुए कहा कि वहां परिसीमन के दौरान सीटों में जो बदलाव किए गए, उससे कई क्षेत्रों का राजनीतिक संतुलन प्रभावित हुआ। उन्होंने आशंका जताई कि यही मॉडल पूरे देश में लागू किया जा सकता है।<br />
प्रियंका गांधी ने कहा कि इस विधेयक के तहत परिसीमन आयोग के तीन सदस्य पूरे देश के राज्यों का राजनीतिक भविष्य तय करेंगे। उन्होंने इसे लोकतंत्र के लिए खतरनाक बताते हुए कहा कि इतनी बड़ी जिम्मेदारी कुछ लोगों के हाथों में देना उचित नहीं है।<br />
अपने भाषण में प्रियंका गांधी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर यह भी आरोप लगाया कि वे अंतरराष्ट्रीय दबावों से घिरे हुए हैं और महिला आरक्षण जैसे महत्वपूर्ण मुद्दे का इस्तेमाल राजनीतिक लाभ के लिए कर रहे हैं।<br />
उन्होंने कहा कि यह एक ऐतिहासिक अवसर था, लेकिन सरकार ने इसे भी सत्ता बनाए रखने के साधन के रूप में इस्तेमाल किया।<br />
प्रियंका गांधी ने कहा कि सरकार ने बिना किसी सर्वदलीय बैठक के आखिरी समय में विधेयक का प्रारूप साझा किया, जिससे विपक्ष को अचानक निर्णय लेने की स्थिति में डाल दिया गया।<br />
उन्होंने इसे “राजनीतिक चाल” बताते हुए कहा कि सरकार जानबूझकर विपक्ष को असहज स्थिति में डालना चाहती थी।<br />
अपने संबोधन के अंत में प्रियंका गांधी ने महिला अधिकारों में कांग्रेस पार्टी के योगदान को भी विस्तार से बताया। उन्होंने कहा कि महिलाओं के समान अधिकार की नींव 1928 की मोतीलाल नेहरू रिपोर्ट और 1931 के कराची अधिवेशन में रखी गई थी।<br />
उन्होंने पूर्व प्रधानमंत्री Rajiv Gandhi का उल्लेख करते हुए कहा कि उन्होंने सबसे पहले पंचायतों और नगर पालिकाओं में महिलाओं के लिए 33 प्रतिशत आरक्षण का प्रस्ताव रखा था, जिसे बाद में कांग्रेस सरकार ने लागू किया।<br />
लोकसभा में प्रियंका गांधी का यह भाषण केवल महिला आरक्षण तक सीमित नहीं रहा, बल्कि उन्होंने इसे सामाजिक न्याय, संघीय ढांचे और लोकतांत्रिक मूल्यों से जोड़ते हुए व्यापक मुद्दा बना दिया।<br />
उन्होंने स्पष्ट संदेश दिया कि कांग्रेस महिला आरक्षण के खिलाफ नहीं, बल्कि उसके “सही और न्यायसंगत स्वरूप” की पक्षधर है। उनके मुताबिक, बिना जातिगत जनगणना, पारदर्शी परिसीमन और सभी वर्गों की भागीदारी सुनिश्चित किए बिना कोई भी आरक्षण अधूरा और असंतुलित रहेगा।<br />
अब यह देखना दिलचस्प होगा कि सरकार इन आरोपों और सुझावों पर क्या रुख अपनाती है और क्या महिला आरक्षण का यह मुद्दा संसद में सहमति का रूप ले पाता है या फिर राजनीतिक टकराव का कारण बना रहेगा।</p>
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		<title>पश्चिम बंगाल के लिए कांग्रेस की ‘5 गारंटी’ का ऐलान, राहुल गांधी ने दिया चुनावी रोडमैप</title>
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		<dc:creator><![CDATA[संवाद इंडिया]]></dc:creator>
		<pubDate>Tue, 14 Apr 2026 09:43:06 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[Bangal election]]></category>
		<category><![CDATA[अंतरराष्ट्रीय]]></category>
		<category><![CDATA[पश्चिम बंगाल]]></category>
		<category><![CDATA[ब्रेकिंग]]></category>
		<category><![CDATA[Congress announces '5 guarantees' for West Bengal]]></category>
		<category><![CDATA[Rahul Gandhi gives election roadmap]]></category>
		<guid isPermaLink="false">https://www.samvaadindia.com/?p=1172</guid>

					<description><![CDATA[<p>स्वास्थ्य, शिक्षा, किसान, युवा और महिलाओं पर फोकस—₹10 लाख स्वास्थ्य बीमा से लेकर ₹2000 मासिक सहायता तक के</p>
<p>The post <a href="https://www.samvaadindia.com/congress-announces-guarantees-for-west-bengal-rahul-gandhi-gives-election-roadmap/">पश्चिम बंगाल के लिए कांग्रेस की ‘5 गारंटी’ का ऐलान, राहुल गांधी ने दिया चुनावी रोडमैप</a> appeared first on <a href="https://www.samvaadindia.com">Samvaad India</a>.</p>
]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p><strong>स्वास्थ्य, शिक्षा, किसान, युवा और महिलाओं पर फोकस—₹10 लाख स्वास्थ्य बीमा से लेकर ₹2000 मासिक सहायता तक के वादे</strong><br />
नई दिल्ली/कोलकाता 14 अप्रैल। राहुल गाँधी ने पश्चिम बंगाल के आगामी राजनीतिक परिदृश्य को ध्यान में रखते हुए एक बड़ा चुनावी दांव खेला है। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर साझा किए गए अपने संदेश में उन्होंने राज्य के लिए कांग्रेस की ‘5 गारंटी’ का ऐलान किया है। इन गारंटियों में स्वास्थ्य, शिक्षा, किसान, युवा और महिलाओं के लिए व्यापक योजनाओं का खाका पेश किया गया है।<br />
राहुल गांधी ने अपने पोस्ट में दावा किया कि ये गारंटियां केवल वादे नहीं बल्कि एक “रोडमैप” हैं, जो पश्चिम बंगाल को सामाजिक सुरक्षा, आर्थिक मजबूती और अवसरों की दिशा में आगे ले जाएंगी। उन्होंने कहा कि कांग्रेस का लक्ष्य राज्य में हर वर्ग को सशक्त बनाना और विकास के लाभ को समान रूप से वितरित करना है।</p>
<blockquote class="twitter-tweet" data-width="550" data-dnt="true">
<p lang="hi" dir="ltr">पश्चिम बंगाल को कांग्रेस की 5 गारंटी:</p>
<p>1️⃣ विधान स्वास्थ्य सुरक्षा<br />&#8211; ₹10 लाख तक स्वास्थ्य बीमा<br />&#8211; ज़िला अस्पतालों में मुफ्त डायलिसिस और कैंसर का इलाज</p>
<p>2️⃣ शिक्षा आलो<br />&#8211; छात्रों को स्नातक तक मुफ्त शिक्षा<br />&#8211; महिलाओं को PG तक मुफ्त शिक्षा<br />&#8211; स्कूल में AI और अंग्रेजी की शिक्षा</p>
<p>3️⃣ कृषक… <a href="https://t.co/jHzWzxO9GM">pic.twitter.com/jHzWzxO9GM</a></p>
<p>&mdash; Rahul Gandhi (@RahulGandhi) <a href="https://twitter.com/RahulGandhi/status/2043976491164414301?ref_src=twsrc%5Etfw">April 14, 2026</a></p></blockquote>
<p><script async src="https://platform.twitter.com/widgets.js" charset="utf-8"></script></p>
<p><strong>स्वास्थ्य क्षेत्र में बड़ा वादा: ₹10 लाख तक बीमा</strong><br />
कांग्रेस की पहली गारंटी ‘विधान स्वास्थ्य सुरक्षा’ है। इसके तहत हर परिवार को ₹10 लाख तक का स्वास्थ्य बीमा देने की बात कही गई है। इसके अलावा, जिला अस्पतालों में मुफ्त डायलिसिस और कैंसर के इलाज की सुविधा उपलब्ध कराने का भी वादा किया गया है।<br />
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यह योजना लागू होती है, तो यह राज्य के गरीब और मध्यम वर्ग के लिए राहतकारी साबित हो सकती है। पश्चिम बंगाल में पहले से ही स्वास्थ्य सेवाओं को लेकर राजनीतिक बहस होती रही है, ऐसे में कांग्रेस का यह वादा सीधे तौर पर मतदाताओं को प्रभावित करने की कोशिश माना जा रहा है।<br />
<strong>शिक्षा पर फोकस: AI और अंग्रेजी की पढ़ाई</strong><br />
दूसरी गारंटी ‘शिक्षा आलो’ के तहत कांग्रेस ने छात्रों को स्नातक तक मुफ्त शिक्षा देने की घोषणा की है। वहीं महिलाओं को पोस्टग्रेजुएशन तक मुफ्त शिक्षा का लाभ देने की बात कही गई है। इसके साथ ही स्कूल स्तर पर आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और अंग्रेजी की शिक्षा को अनिवार्य रूप से शामिल करने का वादा भी किया गया है।<br />
यह पहल न केवल शिक्षा को सुलभ बनाने का प्रयास है, बल्कि बदलती तकनीकी दुनिया में युवाओं को प्रतिस्पर्धी बनाने की दिशा में भी एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। AI जैसी आधुनिक तकनीकों को स्कूल स्तर पर शामिल करना कांग्रेस की नई सोच को दर्शाता है।<br />
<strong>किसानों के लिए आर्थिक सहारा</strong><br />
तीसरी गारंटी ‘कृषक सम्मान’ के तहत किसानों को ₹15,000 वार्षिक सहायता देने का वादा किया गया है। इसके साथ ही 200 यूनिट तक मुफ्त बिजली देने की घोषणा भी की गई है।<br />
कृषि विशेषज्ञों का कहना है कि यह योजना किसानों की लागत कम करने और उनकी आय बढ़ाने में सहायक हो सकती है। हालांकि, इसके लिए राज्य के बजट पर कितना दबाव पड़ेगा, यह एक महत्वपूर्ण सवाल बना हुआ है।<br />
<strong>युवाओं को रोजगार और कौशल विकास</strong><br />
चौथी गारंटी ‘युवा सम्मान’ के तहत कांग्रेस ने युवाओं के लिए रोजगार और कौशल विकास पर जोर दिया है। इसमें सभी सरकारी रिक्त पदों को भरने का वादा किया गया है। साथ ही सुनिश्चित इंटर्नशिप और जिला स्तर पर AI स्किल डेवलपमेंट केंद्र खोलने की बात भी कही गई है।<br />
राहुल गांधी ने अपने संदेश में कहा कि युवाओं को केवल डिग्री नहीं, बल्कि रोजगार के अवसर चाहिए। कांग्रेस का यह प्रस्ताव युवाओं को रोजगार के साथ-साथ आधुनिक कौशल प्रदान करने पर केंद्रित है।<br />
<strong>महिलाओं के लिए ‘दुर्गा सम्मान’</strong><br />
पांचवीं और अंतिम गारंटी ‘दुर्गा सम्मान’ के तहत महिलाओं को ₹2000 प्रति माह की आर्थिक सहायता देने का वादा किया गया है। कांग्रेस का दावा है कि यह योजना महिलाओं को आर्थिक रूप से सशक्त बनाएगी और उनके जीवन स्तर में सुधार लाएगी।<br />
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह योजना सीधे तौर पर महिला मतदाताओं को साधने का प्रयास है, जो चुनावों में निर्णायक भूमिका निभाती हैं।<br />
<strong>राजनीतिक संदेश और रणनीति</strong><br />
राहुल गांधी का यह ऐलान ऐसे समय में आया है जब पश्चिम बंगाल की राजनीति में सत्तारूढ़ दल और विपक्ष के बीच तीखी प्रतिस्पर्धा देखने को मिल रही है। कांग्रेस लंबे समय से राज्य में अपनी खोई जमीन वापस पाने की कोशिश कर रही है।<br />
इन ‘5 गारंटी’ के जरिए कांग्रेस ने यह संकेत दिया है कि वह केवल आलोचना तक सीमित नहीं रहना चाहती, बल्कि ठोस नीतिगत विकल्प भी पेश कर रही है।<br />
<strong>वित्तीय व्यवहार्यता पर सवाल</strong><br />
हालांकि, इन घोषणाओं के साथ-साथ वित्तीय व्यवहार्यता को लेकर सवाल भी उठने लगे हैं। ₹10 लाख स्वास्थ्य बीमा, मुफ्त शिक्षा, किसानों को सहायता और महिलाओं को मासिक भत्ता जैसी योजनाओं के लिए बड़े बजट की आवश्यकता होगी।<br />
आर्थिक विशेषज्ञों का कहना है कि यदि इन योजनाओं को लागू करना है, तो राज्य सरकार को राजस्व के नए स्रोत तलाशने होंगे या फिर मौजूदा खर्चों में कटौती करनी होगी।<br />
<strong>अन्य राज्यों की तर्ज पर मॉडल</strong><br />
कांग्रेस पहले भी विभिन्न राज्यों में इस तरह की ‘गारंटी’ योजनाएं पेश कर चुकी है। कर्नाटक और हिमाचल प्रदेश में इसी तरह के वादों के आधार पर चुनावी रणनीति बनाई गई थी।<br />
पश्चिम बंगाल में भी कांग्रेस उसी मॉडल को दोहराने की कोशिश कर रही है, जिसमें सीधे लाभ पहुंचाने वाली योजनाओं पर जोर दिया गया है।<br />
<strong>चुनावी असर की संभावनाएं</strong><br />
राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, कांग्रेस की ये घोषणाएं राज्य के विभिन्न वर्गों—किसानों, युवाओं, महिलाओं और गरीबों—को आकर्षित कर सकती हैं। हालांकि, इसका वास्तविक असर चुनाव परिणामों में कितना दिखेगा, यह आने वाला समय ही बताएगा।<br />
राहुल गांधी द्वारा पेश की गई ‘5 गारंटी’ पश्चिम बंगाल के लिए एक व्यापक चुनावी रोडमैप के रूप में सामने आई है। इसमें सामाजिक सुरक्षा, आर्थिक सहायता और आधुनिक शिक्षा पर विशेष ध्यान दिया गया है।<br />
अब यह देखना दिलचस्प होगा कि कांग्रेस इन वादों को जमीन पर उतारने के लिए किस तरह की रणनीति अपनाती है और मतदाता इन घोषणाओं को कितना भरोसेमंद मानते हैं।</p>
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		<title>महिला आरक्षण बनाम परिसीमन: कांग्रेस का मोदी सरकार पर तीखा हमला, ‘जातिगत जनगणना से बचने की चाल’ का आरोप</title>
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		<dc:creator><![CDATA[संवाद इंडिया]]></dc:creator>
		<pubDate>Mon, 13 Apr 2026 14:39:57 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[अंतरराष्ट्रीय]]></category>
		<category><![CDATA[एक्सक्लूसिव]]></category>
		<category><![CDATA[खास खबर]]></category>
		<category><![CDATA[दिल्ली]]></category>
		<category><![CDATA[ब्रेकिंग]]></category>
		<category><![CDATA[accuses it of 'ploy to avoid caste census']]></category>
		<category><![CDATA[Women's reservation vs. delimitation: Congress launches scathing attack on Modi government]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>नई दिल्ली, 13 अप्रैल। देश की राजनीति में एक बार फिर महिला आरक्षण और परिसीमन का मुद्दा गरमा</p>
<p>The post <a href="https://www.samvaadindia.com/womens-reservation-vs-delimitation-congress-launches-scathing-attack-on-modi-government-accuses-it-of-ploy-to-avoid-caste-census/">महिला आरक्षण बनाम परिसीमन: कांग्रेस का मोदी सरकार पर तीखा हमला, ‘जातिगत जनगणना से बचने की चाल’ का आरोप</a> appeared first on <a href="https://www.samvaadindia.com">Samvaad India</a>.</p>
]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p>नई दिल्ली, 13 अप्रैल। देश की राजनीति में एक बार फिर महिला आरक्षण और परिसीमन का मुद्दा गरमा गया है। कांग्रेस ने केंद्र की मोदी सरकार पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा है कि सरकार महिला आरक्षण के नाम पर “शकुनी चाल” चल रही है, जिसका असली मकसद देश में गलत परिसीमन करना और जातिगत जनगणना से बचना है।<br />
कांग्रेस मुख्यालय में आयोजित एक प्रेस वार्ता के दौरान पार्टी की सोशल मीडिया एवं डिजिटल प्लेटफॉर्म्स की चेयरपर्सन सुप्रिया श्रीनेत ने कांग्रेस संसदीय दल की अध्यक्ष सोनिया गांधी के हालिया लेख का हवाला देते हुए केंद्र सरकार की नीतियों पर तीखा प्रहार किया। उन्होंने कहा कि महिला आरक्षण अब मुद्दा नहीं है, क्योंकि यह पहले ही संसद में सर्वसम्मति से पारित हो चुका है, लेकिन सरकार इसे ढाल बनाकर परिसीमन की प्रक्रिया को विवादित तरीके से आगे बढ़ाना चाहती है।<br />
प्रेस वार्ता में सुप्रिया श्रीनेत ने सबसे बड़ा सवाल यह उठाया कि बिना अद्यतन जनगणना के आंकड़ों के परिसीमन कैसे किया जा सकता है। उन्होंने कहा कि देश में आखिरी जनगणना 2011 में हुई थी और 2021 की जनगणना अब तक नहीं कराई गई है, जिससे आंकड़ों का आधार ही कमजोर हो गया है।<br />
उन्होंने कहा, “जब सरकार खुद मान रही है कि अलग-अलग राज्यों और क्षेत्रों में जनसंख्या में बड़ा बदलाव आया है, तो बिना सटीक आंकड़ों के परिसीमन करना न केवल गलत है, बल्कि लोकतांत्रिक प्रतिनिधित्व के लिए खतरनाक भी है।”<br />
श्रीनेत ने यह भी सवाल उठाया कि यदि जनगणना के आंकड़े उपलब्ध नहीं हैं, तो अनुसूचित जाति (SC) और अनुसूचित जनजाति (ST) के लिए आरक्षित सीटों का निर्धारण किस आधार पर किया जाएगा। उन्होंने कहा कि यह प्रक्रिया केवल गणितीय नहीं, बल्कि सामाजिक और राजनीतिक न्याय से जुड़ी होती है।<br />
कांग्रेस ने यह भी आरोप लगाया कि प्रस्तावित परिसीमन से देश के उत्तर और दक्षिण राज्यों के बीच असंतुलन पैदा हो सकता है। सुप्रिया श्रीनेत ने कहा कि जिन राज्यों ने जनसंख्या नियंत्रण और परिवार नियोजन में बेहतर काम किया है, उन्हें सीटों के बंटवारे में नुकसान नहीं होना चाहिए।<br />
उन्होंने कहा, “परिसीमन का मतलब सिर्फ सीटें बढ़ाना नहीं है, बल्कि यह सुनिश्चित करना है कि हर क्षेत्र और समुदाय को न्यायसंगत प्रतिनिधित्व मिले। अगर यह प्रक्रिया केवल जनसंख्या के आधार पर की गई, तो इससे क्षेत्रीय असमानताएं और बढ़ सकती है।<br />
कांग्रेस ने केंद्र सरकार पर जातिगत जनगणना से बचने का भी आरोप लगाया। सुप्रिया श्रीनेत ने कहा कि बिहार और तेलंगाना में हुए जातिगत सर्वेक्षणों ने यह स्पष्ट कर दिया है कि पिछड़े वर्गों की जनसंख्या काफी अधिक है, लेकिन केंद्र सरकार इस सच्चाई को सामने लाने से बच रही है।<br />
उन्होंने कहा कि कांग्रेस ने 2023 में महिला आरक्षण विधेयक पारित होने के समय ही यह मांग रखी थी कि ओबीसी महिलाओं के लिए भी अलग से आरक्षण सुनिश्चित किया जाए। लेकिन सरकार ने इस मांग को नजरअंदाज कर दिया।<br />
श्रीनेत ने आरोप लगाया कि “सरकार जानबूझकर जातिगत जनगणना नहीं कराना चाहती, क्योंकि इससे सामाजिक वास्तविकताएं सामने आ जाएंगी और उसे आरक्षण के दायरे को व्यापक बनाना पड़ेगा।<br />
कांग्रेस प्रवक्ता ने सितंबर 2023 में पारित हुए नारी शक्ति वंदन अधिनियम का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि इस कानून में महिला आरक्षण लागू करने से पहले जनगणना और परिसीमन की शर्त रखी गई थी।<br />
उन्होंने याद दिलाया कि उस समय कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे और सोनिया गांधी ने मांग की थी कि बिना किसी शर्त के 2024 से ही महिला आरक्षण लागू किया जाए, लेकिन सरकार ने इसे स्वीकार नहीं किया।<br />
अब, जब 30 महीने बीत चुके हैं, तो सरकार खुद अपनी ही बनाई शर्तों को बदलने की तैयारी कर रही है। श्रीनेत ने सवाल उठाया,<br />
“जब 2023 में सरकार ने खुद ये शर्तें लगाईं थीं, तो अब अचानक इन्हें बदलने की जरूरत क्यों पड़ रही है?<br />
कांग्रेस ने 16 अप्रैल से बुलाए गए संसद के विशेष सत्र पर भी कड़ी आपत्ति जताई है। श्रीनेत ने कहा कि पश्चिम बंगाल और तमिलनाडु में चल रहे चुनाव प्रचार के बीच यह सत्र बुलाना राजनीतिक रूप से प्रेरित कदम है।<br />
उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार इस सत्र का उपयोग चुनावी लाभ के लिए करना चाहती है और विपक्षी सांसदों को जनता के बीच जाने से रोक रही है।<br />
कांग्रेस ने यह भी कहा कि विपक्ष ने सरकार को कई बार पत्र लिखकर सर्वदलीय बैठक बुलाने की मांग की थी, ताकि संविधान संशोधन जैसे महत्वपूर्ण मुद्दों पर व्यापक चर्चा हो सके। लेकिन सरकार ने इन मांगों को नजरअंदाज कर दिया।<br />
कांग्रेस ने इस मुद्दे को राहुल गांधी द्वारा उठाई गई जातिगत जनगणना की मांग से भी जोड़ा। श्रीनेत ने कहा कि राहुल गांधी लगातार इस मुद्दे को उठा रहे हैं, लेकिन सरकार इससे बचने की कोशिश कर रही है।<br />
उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में हलफनामा देकर जातिगत जनगणना का विरोध किया था और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इसे “अर्बन नक्सल सोच” से जोड़कर प्रस्तुत किया।<br />
कांग्रेस ने यह भी आरोप लगाया कि सरकार महिला आरक्षण के मुद्दे का इस्तेमाल अन्य गंभीर मुद्दों से ध्यान भटकाने के लिए कर रही है। श्रीनेत ने कहा कि विधानसभा चुनावों के बाद एपस्टीन फाइल्स, विदेश नीति की विफलता, बेरोजगारी और महंगाई जैसे मुद्दों पर चर्चा से बचने के लिए यह रणनीति अपनाई जा रही है।<br />
उन्होंने सवाल किया कि जिन मुद्दों के लिए विशेष सत्र बुलाया गया है, क्या उन पर चर्चा हाल ही में समाप्त हुए संसद सत्र में नहीं हो सकती थी?<br />
कांग्रेस प्रवक्ता ने यह भी दावा किया कि महिला आरक्षण की नींव कांग्रेस पार्टी ने ही रखी थी। उन्होंने कहा कि पंचायती राज संस्थाओं में महिलाओं को एक-तिहाई आरक्षण देने का काम कांग्रेस सरकार ने 73वें और 74वें संविधान संशोधनों के जरिए किया था।<br />
इस पहल का श्रेय पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी को देते हुए उन्होंने कहा कि आज देशभर में पंचायती राज संस्थाओं में 15 लाख से अधिक महिलाएं निर्वाचित प्रतिनिधि हैं, जो उसी नीति का परिणाम है।<br />
अंत में कांग्रेस ने मांग की कि केंद्र सरकार किसी भी बड़े निर्णय से पहले सभी राजनीतिक दलों की बैठक बुलाए और व्यापक चर्चा के बाद ही आगे बढ़े। श्रीनेत ने कहा, “यह केवल राजनीतिक मुद्दा नहीं है, बल्कि देश के लोकतांत्रिक ढांचे और सामाजिक न्याय से जुड़ा सवाल है। इसलिए जल्दबाजी में लिया गया कोई भी फैसला देश के लिए नुकसानदेह हो सकता है।”<br />
महिला आरक्षण, परिसीमन और जातिगत जनगणना जैसे मुद्दे अब केवल नीतिगत बहस तक सीमित नहीं रहे, बल्कि यह देश की राजनीति के केंद्र में आ चुके हैं। कांग्रेस और भाजपा के बीच इस मुद्दे पर बढ़ता टकराव आने वाले समय में और तेज हो सकता है।<br />
जहां एक ओर सरकार इसे महिला सशक्तिकरण की दिशा में बड़ा कदम बता रही है, वहीं विपक्ष इसे लोकतांत्रिक संतुलन और सामाजिक न्याय के लिए खतरा मान रहा है।<br />
अब देखना यह होगा कि संसद के विशेष सत्र और आने वाले राजनीतिक घटनाक्रमों में यह मुद्दा किस दिशा में आगे बढ़ता है और क्या इस पर कोई सर्वसम्मति बन पाती है या</p>
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		<item>
		<title>राष्ट्रभक्ति ही देश संचालन का आधार, जाति-धर्म की राजनीति से नहीं चलेगा राष्ट्र : डॉ दिनेश शर्मा</title>
		<link>https://www.samvaadindia.com/patriotism-is-the-basis-of-running-the-country-the-nation-will-not-run-on-caste-religion-politics-dr-dinesh-sharma/</link>
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		<dc:creator><![CDATA[संवाद इंडिया]]></dc:creator>
		<pubDate>Mon, 13 Apr 2026 04:32:14 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[अंतरराष्ट्रीय]]></category>
		<category><![CDATA[उत्तर प्रदेश]]></category>
		<category><![CDATA[एक्सक्लूसिव]]></category>
		<category><![CDATA[खास खबर]]></category>
		<category><![CDATA[ब्रेकिंग]]></category>
		<category><![CDATA[Patriotism is the basis of running the country]]></category>
		<category><![CDATA[the nation will not run on caste-religion politics: Dr. Dinesh Sharma]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>लखनऊ/शामली,  13 अप्रैल। राज्यसभा सांसद एवं उत्तर प्रदेश के पूर्व उपमुख्यमंत्री डॉ दिनेश शर्मा ने स्पष्ट शब्दों में</p>
<p>The post <a href="https://www.samvaadindia.com/patriotism-is-the-basis-of-running-the-country-the-nation-will-not-run-on-caste-religion-politics-dr-dinesh-sharma/">राष्ट्रभक्ति ही देश संचालन का आधार, जाति-धर्म की राजनीति से नहीं चलेगा राष्ट्र : डॉ दिनेश शर्मा</a> appeared first on <a href="https://www.samvaadindia.com">Samvaad India</a>.</p>
]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p>लखनऊ/शामली,  13 अप्रैल। राज्यसभा सांसद एवं उत्तर प्रदेश के पूर्व उपमुख्यमंत्री डॉ दिनेश शर्मा ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि भारत जैसे विशाल और विविधतापूर्ण देश को केवल राष्ट्रभक्ति के आधार पर ही संचालित किया जा सकता है। उन्होंने कहा कि जाति और धर्म के आधार पर राजनीति करना देश की एकता और अखंडता के लिए घातक है। गुर्जर समाज के वरिष्ठ नेता एवं सदस्य विधान परिषद वीरेंद्र सिंह और भाजपा नेता मनीष चौहान के संयोजन में आयोजित विशाल जनसभा में मुख्य अतिथि के रूप में संबोधित करते हुए उन्होंने यह विचार व्यक्त किए।<br />
उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में देश की राजनीति को राष्ट्रहित और जनकल्याण की दिशा में आगे बढ़ाना आवश्यक है। उन्होंने जोर देकर कहा कि भारतीय जनता पार्टी की सरकार “सबका साथ, सबका विकास और सबका विश्वास” के सिद्धांत पर कार्य कर रही है, जिसमें किसी भी वर्ग के साथ भेदभाव नहीं किया जा रहा है।<br />
डॉ शर्मा ने विपक्षी दलों पर तीखा प्रहार करते हुए कहा कि अल्पसंख्यक समुदाय को लंबे समय तक केवल वोट बैंक के रूप में इस्तेमाल किया गया। उन्होंने कहा कि जहां विपक्षी दलों ने तुष्टिकरण की राजनीति की, वहीं भाजपा सरकार अल्पसंख्यकों को देश का सम्मानित नागरिक मानते हुए उनके विकास के लिए कार्य कर रही है। उन्होंने कहा कि देश को मजबूत बनाने का यही सही रास्ता है, जहां हर नागरिक को समान अवसर और सम्मान मिले।<br />
शामली में आयोजित एक अन्य कार्यक्रम में बोलते हुए उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में केंद्र सरकार महिलाओं को संसद और विधानसभाओं में आरक्षण देने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठा रही है। उन्होंने कहा कि यह निर्णय महिलाओं को सशक्त बनाने और उन्हें राष्ट्र निर्माण की मुख्यधारा में शामिल करने की दिशा में ऐतिहासिक साबित होगा। इस दौरान उपस्थित जनसमूह ने हाथ उठाकर महिला आरक्षण के समर्थन में अपनी सहमति जताई।<br />
उन्होंने कहा कि विपक्षी दलों को सरकार की यह पहल रास नहीं आएगी, क्योंकि उनकी राजनीति हमेशा वादाखिलाफी और भ्रम फैलाने पर आधारित रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस सहित कई दलों ने वर्षों तक जनता से किए गए वादों को पूरा नहीं किया, जिससे नेताओं की विश्वसनीयता पर प्रश्नचिह्न लग गया।<br />
डॉ शर्मा ने भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस पर निशाना साधते हुए कहा कि गरीबी हटाने के नाम पर वर्षों तक शासन करने के बावजूद गरीबों की स्थिति में कोई ठोस सुधार नहीं हुआ। उन्होंने कहा कि कांग्रेस शासनकाल में आपातकाल जैसे निर्णय लेकर लोकतंत्र को भी कलंकित किया गया।<br />
समाजवादी पार्टी पर हमला करते हुए उन्होंने कहा कि पूर्व में प्रदेश में दंगों का माहौल रहता था और सत्ता में बैठे लोग ही समाज को बांटने का काम करते थे। उन्होंने राम मंदिर आंदोलन का उल्लेख करते हुए कहा कि आस्था के मुद्दे पर गोली चलवाने का इतिहास भी जनता भूली नहीं है।<br />
उन्होंने कहा कि भाजपा की कथनी और करनी में एकरूपता है, जिसके कारण जनता का भरोसा फिर से राजनीतिक नेतृत्व पर मजबूत हुआ है। उन्होंने कहा कि आज देश का नेतृत्व एक मजबूत और निर्णायक हाथों में है, जिसने भारत को वैश्विक स्तर पर नई पहचान दिलाई है।<br />
डॉ शर्मा ने कहा कि आज का भारत आत्मनिर्भर और आत्मविश्वासी राष्ट्र के रूप में उभर रहा है। उन्होंने कहा कि अंतरराष्ट्रीय मंचों पर भारत की स्थिति पहले से कहीं अधिक सशक्त हुई है। उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि जी-20 जैसे मंचों पर भारत की भूमिका नेतृत्वकारी रही है, जो देश की बढ़ती वैश्विक प्रतिष्ठा को दर्शाता है।<br />
उन्होंने पड़ोसी देशों की स्थिति का उल्लेख करते हुए कहा कि जहां अन्य देशों में आर्थिक और राजनीतिक अस्थिरता देखने को मिल रही है, वहीं भारत में केंद्र सरकार के कुशल प्रबंधन के कारण आम जनता पर किसी प्रकार का संकट नहीं आया है। उन्होंने कहा कि वैश्विक परिस्थितियों के बावजूद भारत में आवश्यक वस्तुओं की उपलब्धता और स्थिरता बनी हुई है।<br />
पश्चिमी उत्तर प्रदेश के विकास का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि पहले यह क्षेत्र बदहाल सड़कों और दंगों के लिए जाना जाता था, लेकिन आज यहां की तस्वीर पूरी तरह बदल चुकी है। उन्होंने कहा कि भाजपा सरकार के कार्यकाल में सड़क, बिजली और बुनियादी सुविधाओं में अभूतपूर्व सुधार हुआ है।<br />
उन्होंने कहा कि आज प्रदेश में सड़कों का जाल बिछ चुका है और आवागमन में लगने वाला समय काफी कम हो गया है। बिजली व्यवस्था में सुधार का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि पहले बिजली आना खबर बनती थी, जबकि आज बिजली जाना खबर बन जाता है।<br />
डॉ शर्मा ने केंद्र और राज्य सरकार की योजनाओं का जिक्र करते हुए कहा कि प्रधानमंत्री जन धन योजना, प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना और आयुष्मान भारत योजना जैसी योजनाओं ने गरीब और मध्यम वर्ग के जीवन में व्यापक परिवर्तन लाया है। उन्होंने कहा कि अब लाभ सीधे लोगों के खातों में पहुंच रहा है, जिससे पारदर्शिता बढ़ी है।<br />
उन्होंने गोरखपुर क्षेत्र का उदाहरण देते हुए कहा कि स्वच्छता अभियान के कारण मस्तिष्क ज्वर जैसी गंभीर बीमारी पर नियंत्रण पाया गया है, जो पहले हर साल कई बच्चों की जान ले लेती थी।<br />
उत्तर प्रदेश में हो रहे विकास कार्यों का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में प्रदेश ने नई ऊंचाइयों को छुआ है। उन्होंने कहा कि प्रदेश में एक्सप्रेसवे, हवाई अड्डों और रेलवे स्टेशनों का तेजी से विकास हुआ है।<br />
उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश अब माफिया मुक्त हो चुका है और कानून का राज स्थापित हुआ है। उन्होंने कहा कि अपराधियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई ने प्रदेश में सुरक्षा का माहौल बनाया है, जिससे निवेश और विकास को गति मिली है।<br />
उन्होंने युवाओं के संदर्भ में कहा कि आज का युवा रोजगार पाने के साथ-साथ रोजगार देने वाला भी बन रहा है। उन्होंने कहा कि सरकार की नीतियों ने युवाओं को आत्मनिर्भर बनने के लिए प्रेरित किया है।<br />
कृषि क्षेत्र का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि किसानों को आर्थिक सहायता और सिंचाई सुविधाओं के विस्तार से उनकी आय में वृद्धि हो रही है। उन्होंने “हर घर नल से जल” योजना का भी जिक्र किया, जिससे ग्रामीण क्षेत्रों में पेयजल की समस्या दूर हो रही है।<br />
कश्यप जयंती के अवसर पर आयोजित कार्यक्रम में बोलते हुए उन्होंने महर्षि कश्यप के योगदान को याद किया और कहा कि भारतीय संस्कृति में ऋषि-मुनियों का महत्वपूर्ण स्थान रहा है। उन्होंने भगवान राम और निषादराज की कथा का उल्लेख करते हुए सामाजिक समरसता का संदेश दिया।<br />
उन्होंने कहा कि जो लोग भगवान राम का विरोध करते हैं, वे समाज की भावनाओं को समझने में असफल हैं। उन्होंने कहा कि समाज ऐसे लोगों को उचित जवाब देगा।<br />
अंत में उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा पिछड़ा वर्ग आयोग को संवैधानिक दर्जा देना सामाजिक न्याय की दिशा में बड़ा कदम है। उन्होंने कहा कि आज प्रदेश और देश दोनों विकास के पथ पर अग्रसर हैं और जनता का विश्वास भाजपा के साथ मजबूती से जुड़ा हुआ है।<br />
कार्यक्रम में कई जनप्रतिनिधि और गणमान्य लोग उपस्थित रहे, जिनमें भाजपा प्रदेश महामंत्री मोहित बेनीवाल, जिला अध्यक्ष रामजीलाल कश्यप, हरियाणा की मेयर कोमल सैनी सहित अन्य नेता शामिल रहे। जनसभा में बड़ी संख्या में लोगों की भागीदारी ने कार्यक्रम को सफल बनाया।</p>
<p>The post <a href="https://www.samvaadindia.com/patriotism-is-the-basis-of-running-the-country-the-nation-will-not-run-on-caste-religion-politics-dr-dinesh-sharma/">राष्ट्रभक्ति ही देश संचालन का आधार, जाति-धर्म की राजनीति से नहीं चलेगा राष्ट्र : डॉ दिनेश शर्मा</a> appeared first on <a href="https://www.samvaadindia.com">Samvaad India</a>.</p>
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		<title>बदलता जनसंख्या स्वरूप चिंताजनक: डॉ. दिनेश शर्मा ने मांगी समावेशी नीति</title>
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		<dc:creator><![CDATA[संवाद इंडिया]]></dc:creator>
		<pubDate>Fri, 03 Apr 2026 04:40:52 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[अंतरराष्ट्रीय]]></category>
		<category><![CDATA[उत्तर प्रदेश]]></category>
		<category><![CDATA[खास खबर]]></category>
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		<category><![CDATA[Changing population pattern is worrying: Dr. Dinesh Sharma calls for an inclusive policy]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>नई दिल्ली/लखनऊ। देश में जनसंख्या के बदलते स्वरूप को लेकर राजनीतिक और सामाजिक विमर्श एक बार फिर तेज</p>
<p>The post <a href="https://www.samvaadindia.com/changing-population-pattern-is-worrying-dr-dinesh-sharma-calls-for-an-inclusive-policy/">बदलता जनसंख्या स्वरूप चिंताजनक: डॉ. दिनेश शर्मा ने मांगी समावेशी नीति</a> appeared first on <a href="https://www.samvaadindia.com">Samvaad India</a>.</p>
]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p>नई दिल्ली/लखनऊ। देश में जनसंख्या के बदलते स्वरूप को लेकर राजनीतिक और सामाजिक विमर्श एक बार फिर तेज हो गया है। राज्यसभा सांसद और उत्तर प्रदेश के पूर्व उपमुख्यमंत्री Dinesh Sharma ने संसद में यह मुद्दा उठाते हुए कहा कि देश के सीमावर्ती क्षेत्रों और कुछ राज्यों में जनसंख्या संरचना में तेजी से हो रहा बदलाव सामाजिक समरसता और राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए चिंता का विषय बनता जा रहा है। उन्होंने इसे केवल सांख्यिकीय परिवर्तन नहीं, बल्कि दीर्घकालिक रणनीतिक चुनौती करार दिया।<br />
जनसांख्यिकीय संतुलन पर आधारित होती है राष्ट्र की स्थिरता<br />
राज्यसभा में विशेष उल्लेख के दौरान Dinesh Sharma ने कहा कि किसी भी राष्ट्र की स्थिरता और विकास उसकी संतुलित जनसांख्यिकीय संरचना पर आधारित होती है। यदि जनसंख्या का संतुलन बिगड़ता है, तो इसका असर सामाजिक ढांचे, संसाधनों के वितरण और राष्ट्रीय सुरक्षा पर पड़ता है।<br />
उन्होंने कहा कि भारत जैसे विविधतापूर्ण देश में जनसंख्या संतुलन बनाए रखना अत्यंत आवश्यक है, क्योंकि यहां धर्म, भाषा और संस्कृति की विविधता ही इसकी सबसे बड़ी ताकत है। लेकिन यदि किसी एक क्षेत्र या समुदाय की जनसंख्या तेजी से बढ़ती है और दूसरे की घटती है, तो इससे सामाजिक असंतुलन पैदा हो सकता है।<br />
सांसद ने विशेष रूप से सीमावर्ती क्षेत्रों का जिक्र करते हुए कहा कि वहां जनसंख्या के स्वरूप में हो रहे बदलाव को गंभीरता से देखने की आवश्यकता है। उन्होंने संकेत दिया कि ऐसे क्षेत्रों में यह बदलाव केवल सामाजिक नहीं, बल्कि रणनीतिक दृष्टि से भी महत्वपूर्ण हो सकता है।<br />
उन्होंने कहा कि देश के कई सीमावर्ती जिलों में जनसंख्या का अनुपात तेजी से बदल रहा है, जिससे भविष्य में सुरक्षा से जुड़े जोखिम भी उत्पन्न हो सकते हैं। ऐसे में केंद्र और राज्य सरकारों को मिलकर इस दिशा में ठोस नीति बनाने की जरूरत है।<br />
Dinesh Sharma ने अपने वक्तव्य में पिछले 65 वर्षों के आंकड़ों का हवाला देते हुए कहा कि देश में हिंदू आबादी में लगभग 8 प्रतिशत की कमी आई है, जबकि मुस्लिम आबादी में करीब 43 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई है।<br />
उन्होंने यह भी कहा कि देश के सात राज्यों और सीमावर्ती 100 से अधिक जिलों में हिंदू समुदाय अल्पसंख्यक हो गया है। यह स्थिति सामाजिक संतुलन के लिए चिंता का विषय है और इसे नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।<br />
सांसद ने जनसंख्या के एक और महत्वपूर्ण पहलू पर ध्यान आकर्षित किया—प्रजनन दर में गिरावट। उन्होंने कहा कि हिंदू समाज की कुल प्रजनन दर (TFR) 1.9 से कम हो गई है, जो जनसंख्या स्थिरीकरण के मानक 2.1 से नीचे है।<br />
उन्होंने चेतावनी दी कि यदि यह प्रवृत्ति जारी रहती है, तो भविष्य में देश को वृद्धजन की बढ़ती संख्या का सामना करना पड़ सकता है। इससे स्वास्थ्य सेवाओं, पेंशन व्यवस्था और सामाजिक सुरक्षा पर अतिरिक्त दबाव पड़ेगा।<br />
Dinesh Sharma ने कहा कि असंतुलित जनसंख्या वृद्धि का असर समाज की संरचना पर भी पड़ रहा है। उन्होंने कहा कि कई क्षेत्रों में सांस्कृतिक और सामाजिक बदलाव तेजी से हो रहे हैं, जो स्थानीय पहचान और परंपराओं को प्रभावित कर सकते हैं।<br />
उन्होंने यह भी कहा कि यदि समय रहते इस पर ध्यान नहीं दिया गया, तो भविष्य में सामाजिक तनाव और टकराव की स्थिति भी उत्पन्न हो सकती है।<br />
सांसद ने इस समस्या के समाधान के लिए एक समान और समावेशी जनसंख्या नीति बनाने की मांग की। उन्होंने कहा कि ऐसी नीति सभी वर्गों पर समान रूप से लागू होनी चाहिए और इसमें किसी प्रकार का भेदभाव नहीं होना चाहिए।<br />
उन्होंने सुझाव दिया कि सरकार को जनसंख्या नियंत्रण और संतुलन के लिए दीर्घकालिक रणनीति तैयार करनी चाहिए, जिसमें शिक्षा, स्वास्थ्य और जागरूकता को प्रमुखता दी जाए।<br />
Dinesh Sharma ने अपने वक्तव्य में अवैध घुसपैठ और जबरन या प्रलोभन के जरिए किए जा रहे धर्मांतरण के मुद्दे को भी उठाया।<br />
उन्होंने कहा कि इन दोनों कारकों का भी जनसंख्या संरचना पर प्रभाव पड़ता है और इन पर कठोर नियंत्रण आवश्यक है। उन्होंने सरकार से आग्रह किया कि इस दिशा में प्रभावी कानून और सख्त कार्रवाई सुनिश्चित की जाए।<br />
सांसद ने कहा कि जिन क्षेत्रों में जनसंख्या संरचना में तेजी से बदलाव आया है, वहां संसाधनों और सरकारी योजनाओं का वैज्ञानिक और न्यायसंगत पुनर्वितरण किया जाना चाहिए।<br />
उन्होंने कहा कि इससे न केवल विकास का संतुलन बना रहेगा, बल्कि सामाजिक समरसता भी मजबूत होगी। उन्होंने यह भी कहा कि योजनाओं के क्रियान्वयन में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करना जरूरी है।<br />
Dinesh Sharma ने कहा कि केवल सरकारी नीतियों से ही समस्या का समाधान संभव नहीं है। इसके लिए समाज के सभी वर्गों की भागीदारी जरूरी है।<br />
उन्होंने संतुलित परिवार व्यवस्था के प्रति लोगों को जागरूक करने की आवश्यकता पर जोर दिया और कहा कि शिक्षा और जागरूकता के माध्यम से ही जनसंख्या संतुलन को कायम रखा जा सकता है।<br />
डॉ. दिनेश शर्मा के इस बयान के बाद राजनीतिक हलकों में बहस तेज होने की संभावना है। जहां एक ओर इसे राष्ट्रीय सुरक्षा और सामाजिक संतुलन से जुड़ा गंभीर मुद्दा बताया जा रहा है, वहीं दूसरी ओर विपक्ष इस पर अलग दृष्टिकोण पेश कर सकता है।<br />
विशेषज्ञों का मानना है कि जनसंख्या से जुड़े मुद्दों पर चर्चा करते समय संतुलित और तथ्यपरक दृष्टिकोण अपनाना आवश्यक है, ताकि समाज में किसी प्रकार का विभाजन न हो।<br />
जनसंख्या विशेषज्ञों का कहना है कि भारत में कुल प्रजनन दर में गिरावट एक सामान्य वैश्विक प्रवृत्ति का हिस्सा है। जैसे-जैसे शिक्षा और आर्थिक विकास बढ़ता है, प्रजनन दर में कमी आती है।<br />
हालांकि, वे यह भी मानते हैं कि क्षेत्रीय असमानताएं और जनसंख्या वितरण में बदलाव नीतिगत स्तर पर ध्यान देने योग्य विषय हैं।<br />
डॉ. दिनेश शर्मा द्वारा उठाया गया मुद्दा केवल राजनीतिक बयान नहीं, बल्कि एक व्यापक सामाजिक और नीतिगत बहस का हिस्सा है।<br />
भारत जैसे विविधता भरे देश में जनसंख्या संतुलन बनाए रखना एक जटिल चुनौती है, जिसमें सरकार, समाज और विशेषज्ञों—सभी की भूमिका महत्वपूर्ण है।<br />
Dinesh Sharma के बयान ने इस बहस को एक नई दिशा दी है। अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि सरकार इस पर किस तरह की नीति बनाती है और क्या यह मुद्दा आने वाले समय में राष्ट्रीय स्तर पर एक बड़े विमर्श का रूप लेता है।</p>
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		<title>दलित न्याय पर सियासत तेज: राहुल गांधी की PM मोदी से अपील—निर्दोष युवाओं को मिले राहत</title>
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		<dc:creator><![CDATA[संवाद इंडिया]]></dc:creator>
		<pubDate>Fri, 03 Apr 2026 04:30:20 +0000</pubDate>
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		<category><![CDATA[उत्तर प्रदेश]]></category>
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		<category><![CDATA[राष्ट्रीय]]></category>
		<category><![CDATA[Politics Over Dalit Justice Intensifies: Rahul Gandhi Appeals to PM Modi—Innocent Youth Must Receive Relief]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>नई दिल्ली, 02 अप्रैल। देश की राजनीति में दलित अधिकारों और सामाजिक न्याय का मुद्दा एक बार फिर</p>
<p>The post <a href="https://www.samvaadindia.com/politics-over-dalit-justice-intensifies-rahul-gandhi-appeals-to-pm-modi-innocent-youth-must-receive-relief/">दलित न्याय पर सियासत तेज: राहुल गांधी की PM मोदी से अपील—निर्दोष युवाओं को मिले राहत</a> appeared first on <a href="https://www.samvaadindia.com">Samvaad India</a>.</p>
]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p>नई दिल्ली, 02 अप्रैल। देश की राजनीति में दलित अधिकारों और सामाजिक न्याय का मुद्दा एक बार फिर केंद्र में आ गया है। कांग्रेस नेता और लोकसभा में विपक्ष के नेता Rahul Gandhi ने प्रधानमंत्री Narendra Modi को पत्र लिखकर 2018 के एससी-एसटी एक्ट बचाओ आंदोलन के दौरान दर्ज मुकदमों को वापस लेने की मांग की है। इस मुद्दे को लेकर कांग्रेस ने केंद्र सरकार पर तीखा हमला बोला है और इसे सामाजिक न्याय से जुड़ा गंभीर विषय बताया है।<br />
02 अप्रैल 2018 को देशभर में व्यापक स्तर पर अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति समुदाय के लोगों ने विरोध प्रदर्शन किया था। यह आंदोलन सुप्रीम कोर्ट के उस फैसले के खिलाफ था, जिसे दलित संगठनों ने एससी-एसटी (अत्याचार निवारण) अधिनियम को कमजोर करने वाला बताया था। इस आंदोलन में लाखों लोग सड़कों पर उतरे और कई जगहों पर हिंसा की घटनाएं भी सामने आईं।<br />
कांग्रेस का दावा है कि यह आंदोलन मूलतः संवैधानिक और शांतिपूर्ण था, लेकिन प्रशासनिक सख्ती और पुलिस कार्रवाई के कारण हालात बिगड़े। पार्टी नेताओं का कहना है कि इस दौरान 14 लोगों की मौत हुई और हजारों युवाओं पर मुकदमे दर्ज किए गए, जिनमें से कई आज भी अदालतों में लंबित हैं।<br />
Rahul Gandhi ने अपने पत्र में लिखा है कि आठ साल बाद भी हजारों युवा इन मुकदमों का बोझ उठा रहे हैं, जबकि उन्होंने लोकतांत्रिक अधिकारों का इस्तेमाल करते हुए आंदोलन किया था।<br />
उन्होंने कहा कि इन युवाओं में बड़ी संख्या ऐसे छात्रों और युवाओं की है, जो अपने परिवार में पहली पीढ़ी के शिक्षित लोग हैं। इन मुकदमों के कारण उनकी पढ़ाई, नौकरी और सामाजिक प्रतिष्ठा पर गहरा असर पड़ा है।<br />
राहुल गांधी ने प्रधानमंत्री से अपील की कि वे व्यक्तिगत हस्तक्षेप करते हुए इन मामलों को समाप्त कराने की दिशा में कदम उठाएं। उन्होंने यह भी कहा कि एक मजबूत एससी-एसटी एक्ट सिर्फ कानून नहीं, बल्कि सामाजिक न्याय की आधारशिला है।<br />
कांग्रेस ने इस मुद्दे को केवल केंद्र सरकार तक सीमित नहीं रखा है। पार्टी ने अपने शासित राज्यों के मुख्यमंत्रियों को भी निर्देश दिए हैं कि वे अपने-अपने राज्यों में दर्ज मामलों की समीक्षा करें और निर्दोष युवाओं के खिलाफ दर्ज मुकदमों को वापस लेने की प्रक्रिया शुरू करें।<br />
यह कदम कांग्रेस की उस रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है, जिसके तहत वह खुद को दलित हितों के सबसे बड़े संरक्षक के रूप में स्थापित करना चाहती है।<br />
कांग्रेस के अनुसूचित जाति विभाग के अध्यक्ष Rajendra Pal Gautam ने इस मुद्दे पर प्रेस वार्ता करते हुए भाजपा सरकार को कटघरे में खड़ा किया।<br />
उन्होंने कहा कि 2018 का आंदोलन पूरी तरह संवैधानिक था, लेकिन सरकार ने इसे दबाने के लिए व्यापक स्तर पर मुकदमे दर्ज कर दिए। गौतम ने आरोप लगाया कि आज भी हजारों युवा न्याय के लिए अदालतों के चक्कर काट रहे हैं, जबकि उनकी कोई गलती नहीं थी।<br />
उन्होंने मृतकों को श्रद्धांजलि देते हुए कहा कि यह आंदोलन सामाजिक न्याय की लड़ाई का प्रतीक था, जिसे दबाने की कोशिश की गई।<br />
प्रेस वार्ता में गौतम ने केवल आंदोलन तक ही अपनी बात सीमित नहीं रखी, बल्कि दलित अधिकारियों के साथ होने वाले कथित भेदभाव का मुद्दा भी उठाया।<br />
उन्होंने उत्तर प्रदेश कैडर के आईएएस अधिकारी Rinku Singh Rahi के इस्तीफे का मामला उठाते हुए कहा कि यह केवल एक व्यक्ति की कहानी नहीं, बल्कि पूरे सिस्टम की सच्चाई को उजागर करता है।<br />
गौतम के अनुसार, रिंकू सिंह राही ने पीसीएस अधिकारी रहते हुए एससी फंड से जुड़े करोड़ों रुपये के घोटाले का पर्दाफाश किया था। इसके बाद उन पर जानलेवा हमला हुआ, जिसमें उन्हें सात गोलियां लगीं। इसके बावजूद उन्होंने हार नहीं मानी और 2021 में आईएएस परीक्षा पास कर ली।<br />
गौतम ने सवाल उठाया कि क्या भ्रष्टाचार के खिलाफ आवाज उठाने वाले अधिकारियों को इसी तरह प्रताड़ित किया जाएगा?<br />
उन्होंने कहा कि राही को पिछले आठ महीनों से कोई जिम्मेदारी नहीं दी गई, जिससे आहत होकर उन्होंने वेतन लेने से इनकार कर दिया और अंततः इस्तीफा भेज दिया।<br />
गौतम ने राष्ट्रपति से मांग की कि रिंकू सिंह राही का इस्तीफा स्वीकार न किया जाए और उन्हें सम्मानजनक पद दिया जाए।<br />
रिंकू सिंह राही के हवाले से गौतम ने दावा किया कि नौकरशाही में एक समानांतर भ्रष्टाचार तंत्र काम कर रहा है, जहां बिना काम के भी भुगतान होता है।<br />
यह बयान प्रशासनिक व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े करता है और यह संकेत देता है कि भ्रष्टाचार के खिलाफ लड़ाई लड़ने वाले अधिकारियों को संस्थागत स्तर पर समर्थन नहीं मिल रहा।<br />
कांग्रेस ने इस मुद्दे को व्यापक सामाजिक संदर्भ में भी जोड़ा। गौतम ने हरियाणा में असिस्टेंट प्रोफेसर भर्ती का उदाहरण देते हुए कहा कि 120 पदों में से केवल तीन दलित उम्मीदवारों का चयन किया गया, जबकि बाकी को ‘नॉट फाउंड सूटेबल’ बताकर बाहर कर दिया गया।<br />
उन्होंने इसे संस्थागत भेदभाव का उदाहरण बताते हुए कहा कि योग्य उम्मीदवारों को भी अवसर नहीं दिया जा रहा है।<br />
गौतम ने विश्वविद्यालयों में दलित छात्रों के साथ होने वाले भेदभाव का मुद्दा उठाते हुए Rohith Vemula और Payal Tadvi के मामलों का उल्लेख किया।<br />
उन्होंने कहा कि ये घटनाएं दिखाती हैं कि शिक्षा संस्थानों में भी दलित छात्रों को मानसिक प्रताड़ना का सामना करना पड़ता है, जो कई बार गंभीर परिणामों में बदल जाती है।<br />
कांग्रेस ने इस पूरे मुद्दे को भाजपा सरकार की नीतियों से जोड़ते हुए कहा कि दलितों के अधिकारों की रक्षा में सरकार विफल रही है।<br />
पार्टी नेताओं का आरोप है कि एक तरफ सरकार दलित कल्याण की बात करती है, वहीं दूसरी तरफ जमीनी स्तर पर भेदभाव और उत्पीड़न की घटनाएं लगातार सामने आ रही हैं।<br />
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह मुद्दा केवल सामाजिक न्याय तक सीमित नहीं है, बल्कि इसमें राजनीतिक रणनीति भी शामिल है।<br />
आगामी चुनावों को देखते हुए कांग्रेस दलित वोट बैंक को साधने की कोशिश कर रही है। वहीं भाजपा भी अपने स्तर पर दलित समुदाय के बीच अपनी पकड़ मजबूत करने के प्रयास में है।<br />
मुकदमों को वापस लेने का सवाल केवल राजनीतिक नहीं, बल्कि कानूनी भी है। किसी भी मामले को वापस लेने के लिए राज्य सरकारों को कानूनी प्रक्रिया का पालन करना होता है, जिसमें अदालत की मंजूरी भी आवश्यक होती है। ऐसे में यह देखना दिलचस्प होगा कि कांग्रेस शासित राज्य इस दिशा में कितनी तेजी से कदम उठाते हैं।</p>
<p><img fetchpriority="high" decoding="async" class="aligncenter size-full wp-image-1161" src="https://www.samvaadindia.com/wp-content/uploads/2026/04/IMG-20260403-WA0000.jpg" alt="" width="966" height="1386" srcset="https://www.samvaadindia.com/wp-content/uploads/2026/04/IMG-20260403-WA0000.jpg 966w, https://www.samvaadindia.com/wp-content/uploads/2026/04/IMG-20260403-WA0000-209x300.jpg 209w, https://www.samvaadindia.com/wp-content/uploads/2026/04/IMG-20260403-WA0000-714x1024.jpg 714w, https://www.samvaadindia.com/wp-content/uploads/2026/04/IMG-20260403-WA0000-768x1102.jpg 768w" sizes="(max-width: 966px) 100vw, 966px" /><img decoding="async" class="aligncenter size-full wp-image-1162" src="https://www.samvaadindia.com/wp-content/uploads/2026/04/IMG-20260403-WA0001.jpg" alt="" width="982" height="1386" srcset="https://www.samvaadindia.com/wp-content/uploads/2026/04/IMG-20260403-WA0001.jpg 982w, https://www.samvaadindia.com/wp-content/uploads/2026/04/IMG-20260403-WA0001-213x300.jpg 213w, https://www.samvaadindia.com/wp-content/uploads/2026/04/IMG-20260403-WA0001-726x1024.jpg 726w, https://www.samvaadindia.com/wp-content/uploads/2026/04/IMG-20260403-WA0001-768x1084.jpg 768w" sizes="(max-width: 982px) 100vw, 982px" /><br />
राहुल गांधी ने अपने पत्र में विशेष रूप से इस बात पर जोर दिया कि इन मुकदमों का सबसे ज्यादा असर युवाओं के भविष्य पर पड़ा है।.कई युवा सरकारी नौकरियों के लिए आवेदन नहीं कर पा रहे हैं, क्योंकि उनके खिलाफ आपराधिक मामले लंबित हैं। इससे उनकी सामाजिक और आर्थिक स्थिति पर भी असर पड़ा यह मुद्दा एक बार फिर यह सवाल खड़ा करता है कि क्या शांतिपूर्ण आंदोलन करना वास्तव में सुरक्षित है?<br />
राहुल गांधी ने कहा कि लोकतंत्र में विरोध करना नागरिकों का अधिकार है और इसे अपराध की तरह नहीं देखा जाना चाहिए।<br />
फिलहाल इस पूरे मामले पर केंद्र सरकार की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। हालांकि, राजनीतिक गलियारों में इस मुद्दे को लेकर बहस तेज हो गई है और आने वाले दिनों में यह संसद और सड़क दोनों जगह चर्चा का विषय बन सकता है।<br />
एससी-एसटी एक्ट बचाओ आंदोलन से जुड़े मुकदमों को वापस लेने की मांग ने एक बार फिर देश में सामाजिक न्याय, प्रशासनिक जवाबदेही और राजनीतिक इच्छाशक्ति पर बहस को तेज कर दिया है।<br />
Rahul Gandhi की चिट्ठी ने इस मुद्दे को राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा के केंद्र में ला दिया है। अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि Narendra Modi सरकार इस पर क्या रुख अपनाती है और क्या वाकई उन युवाओं को राहत मिल पाती है, जो वर्षों से न्याय की उम्मीद में अदालतों के चक्कर काट रहे हैं।</p>
<p>The post <a href="https://www.samvaadindia.com/politics-over-dalit-justice-intensifies-rahul-gandhi-appeals-to-pm-modi-innocent-youth-must-receive-relief/">दलित न्याय पर सियासत तेज: राहुल गांधी की PM मोदी से अपील—निर्दोष युवाओं को मिले राहत</a> appeared first on <a href="https://www.samvaadindia.com">Samvaad India</a>.</p>
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