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	<title>Aap Archives - Samvaad India</title>
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		<title>दिल्ली विधानसभा चुनाव 2025: आप, भाजपा और कांग्रेस के बीच सियासी घमासान</title>
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		<dc:creator><![CDATA[संवाद इंडिया]]></dc:creator>
		<pubDate>Tue, 07 Jan 2025 16:18:15 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[Delhi elections]]></category>
		<category><![CDATA[अंतरराष्ट्रीय]]></category>
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		<category><![CDATA[Delhi Assembly Elections 2025: Political battle between AAP]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>दिल्ली, 7 जनवरी। विधानसभा चुनाव की तारीखों का ऐलान हो गया है, और इस बार की लड़ाई तीन</p>
<p>The post <a href="https://www.samvaadindia.com/delhi-assembly-elections-2025-political-battle-between-aap-bjp-and-congress/">दिल्ली विधानसभा चुनाव 2025: आप, भाजपा और कांग्रेस के बीच सियासी घमासान</a> appeared first on <a href="https://www.samvaadindia.com">Samvaad India</a>.</p>
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										<content:encoded><![CDATA[<p>दिल्ली, 7 जनवरी। विधानसभा चुनाव की तारीखों का ऐलान हो गया है, और इस बार की लड़ाई तीन बड़े दलों- आम आदमी पार्टी (आप), भारतीय जनता पार्टी (भाजपा), और कांग्रेस के बीच बेहद दिलचस्प होने जा रही है। सत्तारूढ़ आप, जो पिछले 12 वर्षों से दिल्ली की सत्ता पर काबिज है, अपने काम के दम पर लगातार चौथी बार जीत दर्ज करने की कोशिश में है। वहीं, भाजपा और कांग्रेस, दोनों ही दल आप को घेरने और अपनी जमीन मजबूत करने के लिए पूरी ताकत झोंक रहे हैं।</p>
<p>इस चुनाव में कई प्रमुख मुद्दे और कद्दावर चेहरे चर्चा में हैं। जहां एक ओर आप पर भ्रष्टाचार और विवादों के आरोप लग रहे हैं, वहीं दूसरी ओर भाजपा और कांग्रेस अपने मजबूत उम्मीदवारों के साथ चुनावी रण में उतर चुके हैं।</p>
<p><strong>दिल्ली विधानसभा चुनाव 2025 के प्रमुख मुद्दे</strong></p>
<p><strong><span style="color: #ff0000;">1. मनी लॉन्ड्रिंग और शराब घोटाला</span></strong></p>
<p>पिछले कुछ वर्षों में आम आदमी पार्टी के शीर्ष नेताओं पर भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप लगे हैं। इनमें सबसे ज्यादा चर्चा में रहे हैं मनी लॉन्ड्रिंग और शराब घोटाला। इस घोटाले में पार्टी के प्रमुख नेता मनीष सिसोदिया और संजय सिंह जैसे बड़े नाम जेल जा चुके हैं।</p>
<p><strong>भाजपा और कांग्रेस का हमला:</strong> विपक्षी दलों ने इस मुद्दे को लेकर आप सरकार पर लगातार निशाना साधा है। भाजपा ने दावा किया है कि आप ने दिल्ली के खजाने को लूटा और भ्रष्टाचार को बढ़ावा दिया। कांग्रेस ने भी इस मुद्दे को लेकर आप को घेरते हुए इसे जनता के साथ धोखा करार दिया।</p>
<p><strong>आप का बचाव:</strong> आप ने इन आरोपों को राजनीतिक साजिश बताया है। पार्टी का कहना है कि केंद्र सरकार एजेंसियों का दुरुपयोग कर रही है ताकि आप नेताओं की छवि खराब की जा सके।</p>
<p><strong><span style="color: #ff0000;">2. यमुना नदी की सफाई</span></strong></p>
<p>आप सरकार ने अपने शुरुआती कार्यकाल में वादा किया था कि यमुना नदी को इतना साफ किया जाएगा कि लोग उसमें डुबकी लगा सकें। हालांकि, 12 वर्षों के बाद भी यमुना की स्थिति जस की तस है।</p>
<p><strong>विपक्ष का आरोप:</strong> भाजपा और कांग्रेस का कहना है कि यमुना की सफाई के लिए आवंटित धनराशि को आप ने अपने प्रचार में खर्च कर दिया।</p>
<p><strong>सरकार का पक्ष:</strong> सरकार का कहना है कि उसने कई सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट बनाए हैं और यमुना की सफाई के लिए लगातार प्रयासरत है।</p>
<p><span style="color: #ff0000;"><strong>3. मुख्यमंत्री बंगले का रेनोवेशन (शीशमहल मुद्दा)</strong></span></p>
<p>मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल के बंगले के रेनोवेशन पर करीब 33 करोड़ रुपये खर्च होने का मामला इस चुनाव में आप के लिए बड़ी चुनौती बनकर सामने आया है।</p>
<p><strong>भाजपा का हमला:</strong> भाजपा ने इसे जनता के पैसे का दुरुपयोग बताते हुए आप सरकार को आड़े हाथों लिया है।</p>
<p><strong>आप का बचाव:</strong> आप का कहना है कि यह खर्च सरकारी अनुमोदन के बाद हुआ और इसे बेवजह राजनीतिक रंग दिया जा रहा है।</p>
<p><span style="color: #ff0000;"><strong>4. महिलाओं के लिए आर्थिक योजनाएं</strong></span></p>
<p>आम आदमी पार्टी ने महिलाओं के लिए सम्मान राशि योजना की घोषणा की है, जिसके तहत 18 वर्ष से अधिक उम्र की महिलाओं को 1,000 रुपये प्रति माह देने का वादा किया गया है।</p>
<p><strong>विपक्ष का जवाब:</strong> कांग्रेस ने प्यारी दीदी योजना के तहत 2,500 रुपये देने का वादा किया है। भाजपा ने इसे जनता को गुमराह करने की रणनीति बताया है।</p>
<p><strong>प्रमुख चेहरे और सीटों का गणित</strong></p>
<p><strong><span style="color: #ff0000;">1. अरविंद केजरीवाल (आप)</span></strong></p>
<p>नई दिल्ली सीट से चुनाव लड़ रहे अरविंद केजरीवाल एक बार फिर से मुख्यमंत्री पद के लिए सबसे प्रबल दावेदार हैं।</p>
<p><strong>चुनौती:</strong> भाजपा और कांग्रेस ने इस बार मजबूत उम्मीदवार उतारकर केजरीवाल को कड़ी टक्कर देने की तैयारी की है।</p>
<p><span style="color: #ff0000;"><strong>2. संदीप दीक्षित (कांग्रेस)</strong></span></p>
<p>नई दिल्ली सीट पर कांग्रेस ने पूर्व मुख्यमंत्री शीला दीक्षित के बेटे संदीप दीक्षित को मैदान में उतारा है।</p>
<p><strong>मजबूती:</strong> संदीप दीक्षित का राजनीतिक अनुभव और कांग्रेस की पुरानी पकड़ इस सीट पर मुकाबले को दिलचस्प बना रही है।</p>
<p><span style="color: #ff0000;"><strong>3. प्रवेश वर्मा (भाजपा)</strong></span></p>
<p>भाजपा ने प्रवेश वर्मा को नई दिल्ली सीट से उतारा है।</p>
<p><strong>रणनीति:</strong> भाजपा का लक्ष्य है कि केजरीवाल को उनके गढ़ में हराकर बड़ा संदेश दिया जाए।</p>
<p><strong><span style="color: #ff0000;">4. मनीष सिसोदिया (आप)</span></strong></p>
<p>पटपड़गंज सीट को छोड़कर इस बार मनीष सिसोदिया जंगपुरा सीट से चुनाव लड़ रहे हैं।</p>
<p><span style="color: #000000;"><strong>रणनीति:</strong> </span>जंगपुरा आप का गढ़ मानी जाती है, और सिसोदिया यहां से सुरक्षित जीत हासिल करना चाहते हैं।</p>
<p><span style="color: #ff0000;"><strong>5. आतिशी मर्लेना (आप)</strong></span></p>
<p>कालकाजी सीट से मौजूदा मुख्यमंत्री आतिशी मर्लेना चुनाव लड़ रही हैं।</p>
<p><strong>चुनौती:</strong> भाजपा ने उनके खिलाफ रमेश बिधूड़ी को मैदान में उतारा है, जो इस सीट पर कड़ी टक्कर दे सकते हैं।</p>
<p><span style="color: #ff0000;"><strong>6. अलका लांबा (कांग्रेस)</strong></span></p>
<p>अलका लांबा कालकाजी सीट से कांग्रेस की उम्मीदवार हैं।</p>
<p><strong>रणनीति:</strong> अलका लांबा का अनुभव और उनकी क्षेत्र में पकड़ कांग्रेस के लिए फायदेमंद हो सकती है।</p>
<p><strong>चुनावी प्रचार और संभावनाएं</strong></p>
<p><strong><span style="color: #ff0000;">आप का प्रचार</span></strong></p>
<p>आम आदमी पार्टी अपने काम को केंद्र में रखकर प्रचार कर रही है। मोहल्ला क्लीनिक, शिक्षा क्षेत्र में सुधार, और बिजली-पानी की सस्ती दरों को आप अपने मुख्य उपलब्धियों के तौर पर पेश कर रही है।</p>
<p><span style="color: #ff0000;"><strong>भाजपा का अभियान</strong></span></p>
<p>भाजपा ने इस बार आप पर लगाए गए भ्रष्टाचार के आरोपों को मुख्य मुद्दा बनाया है। साथ ही, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की लोकप्रियता को भुनाने के लिए बड़े पैमाने पर प्रचार अभियान चलाया जा रहा है।</p>
<p><strong><span style="color: #ff0000;">कांग्रेस की रणनीति</span></strong></p>
<p>कांग्रेस अपने पुराने जनाधार को वापस पाने की कोशिश कर रही है। पार्टी का फोकस महिलाओं, युवाओं और अल्पसंख्यकों पर है।</p>
<p><strong>सम्पादक विशेष</strong></p>
<p>दिल्ली विधानसभा चुनाव 2025 त्रिकोणीय मुकाबले की ओर बढ़ रहा है। जहां एक तरफ आप को अपने विवादों और भ्रष्टाचार के आरोपों का सामना करना पड़ रहा है, वहीं भाजपा और कांग्रेस भी आप को कड़ी टक्कर देने के लिए पूरी तरह तैयार हैं।</p>
<p>इस चुनाव के परिणाम न केवल दिल्ली की राजनीति को बल्कि देश की राजनीति को भी नई दिशा दे सकते हैं। जनता किसे अपना नेता चुनती है, यह देखने के लिए 8 फरवरी 2025 का इंतजार करना होगा।</p>
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		<title>भारतीय राजनीति में एक और प्रयोग विफल, अरविंद केजरीवाल का राजनैतिक उद्भव और पतन</title>
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		<dc:creator><![CDATA[संवाद इंडिया]]></dc:creator>
		<pubDate>Fri, 22 Mar 2024 04:54:44 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[एक्सक्लूसिव]]></category>
		<category><![CDATA[दिल्ली]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>(वाशिंद्र मिश्रा) अरविंद केजरीवाल का राजनीतिक सफर लगभग 12 साल का रहा है !एक आरटीआई एक्टिविस्ट के रूप</p>
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										<content:encoded><![CDATA[<p>(वाशिंद्र मिश्रा) अरविंद केजरीवाल का राजनीतिक सफर लगभग 12 साल का रहा है !एक आरटीआई एक्टिविस्ट के रूप में शुरू हुआ उनका राजनीतिक सफर दिल्ली के मुख्यमंत्री के पद पर पहुंचने के बाद अब लगता है कि विराम लगने वाला है</p>
<p>अभी तो प्रारंभिक तौर पर अरविंद केजरीवाल के राजनीतिक भविष्य के बारे में कोई भविष्यवाणी करना जल्द बाजी होगी! लेकिन आईटीआई एक्टिविस्ट से लेकर मुख्यमंत्री बनने तक जिस तरह की राजनीति की शुरुआत और राजनीतिक संस्कृति अरविंद केजरीवाल ने शुरू की वह अपने आप में एक नया शोध का विषय हो सकता है! इंडिया अगेंस्ट करप्शन ट्रांसपेरेंसी इन गवर्नेंस politics of disruption कटर ईमानदार का दावा करने वाले अरविंद केजरीवाल आज खुद इस भ्रष्टाचार के दलदल में दिखाई दे रहे हैं जिसका विरोध करके उन्होंने समाज सेवी अन्ना हजारे के साथ एक जन आंदोलन खड़ा किया था!<br />
यह अलग बात है की बाद में उन्होंने खुद अन्ना हजारे को अलग कर दिया और फिर एक-एक करके उन तमाम आम आदमी पार्टी के फाउंडर लीडर्स को बाहर का रास्ता दिखा दिया जिन्होंने दिन-रात मेहनत करके आम आदमी पार्टी बनाई थी सत्ता में आने के बाद अरविंद केजरीवाल ने राजनीतिक में सभी अनैतिक और गंदे tarikon को अपनाया जिसके दम पर नेता लोग apni राजनीतिक सत्ता बचाए रखने की कोशिश में लगे रहते हैं<br />
इसलिए उनकी गिरफ्तारी देर से ही सही लेकिन यह एक तय प्रक्रिया का हिस्सा है और इस तरह से कहा जा सकता है कि अरविंद केजरीवाल जिस ईमानदार छवि के दम पर इतने कम समय में देश की राजनीति में अपनी अलग पहचान बनाने में कामयाब रहे वह एक छलावा था ठीक उसी तरह से जैसे उनके पूर्व भर्ती राजनेताओं ने अपनी छवि बनाकर देश की जनता को लंबे समय तक गुमराह किया और सत्ता की मलाई खाते रहे भारत के राजनीतिक इतिहास में अरविंद केजरीवाल से पहले भी तमाम ऐसे नेता हुए हैं जिन्होंने झूठ fareb धोखाधड़ी के दम पर सत्ता हासिल की है लेकिन समय के साथ वक्त ने उनके साथ भी ठीक उसी तरह से न्याय किया था जिस तरह का न्याय अरविंद केजरीवाल के साथ होता दिखाई दे रहा है<br />
अब मामला जांच एजेंसी और कोर्ट के बीच में है देश की सबसे बड़ी अदालत के सामने भी अरविंद केजरीवाल और उनके साथी जाने की तैयारी में है लोकसभा के चुनाव की प्रक्रिया शुरू हो गई है सभी दल अपने अपने प्रत्याशियों के चयन और उनके ऐलान में जुटे हुए हैं  केजरीवाल की पार्टी भी दिल्ली पंजाब हरियाणा गुजरात गोवा और असम में अपना उम्मीदवार खड़ा करने वाली है केजरीवाल की ईमानदारी और बेईमानी का फैसला देश की सबसे बड़ी लोक अदालत में भी होने वाला है अब देखना है कि देश की अदालतों के अलावा लोक अदालत केजरीवाल के पक्ष में फैसला देती है या जांच एजेंसी के पक्ष में एजेंसी की दावों पर अगर भरोसा किया जाए तो केजरीवाल के खिलाफ दिल्ली के कथित शराब घोटाले में शामिल होने के पर्याप्त सबूत है ऐसी स्थिति में अब अदालत को तय करना है की जांच एजेंसी के द्वारा जुटाए गए एविडेंस कितने प्रमाणिक हैं और कितने भरोसेमंद है, लेकिन एक बात तय है की दिल्ली के कथित शराब घोटाले में अब तक जिस तरह की गिरफ्तारियां हुई है उसके आधार पर कहा जा सकता है की जांच एजेंटीयों के एविडेंस प्रारंभिक तौर पर ज्यादा भरोसेमंद और प्रामाणिक प्रतीत होते हैं</p>
<p>The post <a href="https://www.samvaadindia.com/another-failed-experiment-in-indian-politics-political-rise-and-fall-of-arvind-kejriwal/">भारतीय राजनीति में एक और प्रयोग विफल, अरविंद केजरीवाल का राजनैतिक उद्भव और पतन</a> appeared first on <a href="https://www.samvaadindia.com">Samvaad India</a>.</p>
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