अनुच्छेद 370, ओबीसी आरक्षण और छत्रपति संभाजी बनाम औरंगजेब की विचारधारा का मुद्दा उठाया
नई दिल्ली, 14 नवंबर 2024 – प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गुरुवार को महाराष्ट्र चुनाव के लिए एक जनसभा को संबोधित करते हुए कांग्रेस और उसके सहयोगियों पर तीखे आरोप लगाए। उन्होंने कांग्रेस पर पाकिस्तान की भाषा बोलने का आरोप लगाते हुए कहा कि पार्टी अनुच्छेद 370 को फिर से लागू करने और कश्मीर में अलग संविधान बनाने की साजिश रच रही है। इसके साथ ही उन्होंने छत्रपति संभाजी महाराज और औरंगजेब के अनुयायियों के बीच चुनाव का मुद्दा उठाया, और राज्य में ‘संभाजी महाराज में विश्वास रखने वाले देशभक्तों और औरंगजेब की प्रशंसा करने वालों’ के बीच चुनाव का विकल्प दिया।
प्रधानमंत्री ने अपने भाषण में कहा कि महाराष्ट्र का चुनाव केवल राज्य का नहीं बल्कि राष्ट्र के भविष्य को भी तय करने वाला है। उन्होंने लोगों से पूछा कि क्या वे ऐसी पार्टियों का समर्थन करना चाहेंगे जो पाकिस्तान की भाषा बोलती हैं। प्रधानमंत्री ने अपने भाषण के दौरान स्पष्ट किया कि कांग्रेस और उसके सहयोगी अब भी अनुच्छेद 370 को बहाल करने के लिए प्रयासरत हैं, जो कि भाजपा द्वारा जम्मू-कश्मीर में एकता लाने की प्रक्रिया को विफल करने का प्रयास है।
अनुच्छेद 370 पर भाजपा और कांग्रेस के बीच विचारधारा का संघर्ष
प्रधानमंत्री ने रैली के दौरान जोर देकर कहा कि अनुच्छेद 370 को हटाकर भाजपा ने जम्मू-कश्मीर को भारत के संविधान के अंतर्गत लाने का काम किया। उन्होंने कांग्रेस पर आरोप लगाया कि उन्होंने इस फैसले का संसद और न्यायालय में विरोध किया। प्रधानमंत्री ने कहा, “कांग्रेस ने हाल ही में एक प्रस्ताव पास कर यह स्पष्ट किया है कि वे अनुच्छेद 370 को फिर से बहाल करना चाहते हैं और कश्मीर को एक अलग संविधान देना चाहते हैं।” उन्होंने कहा कि यह कांग्रेस की पुरानी मानसिकता को दर्शाता है, जो कश्मीर को भारत का हिस्सा मानने से कतराती है।

प्रधानमंत्री ने जोर दिया कि भारत के सभी नागरिक चाहते हैं कि कश्मीर में सिर्फ डॉ. बाबासाहेब अंबेडकर के संविधान के अनुसार शासन हो, न कि किसी अलग संविधान के आधार पर। उनका यह बयान कांग्रेस पर एक गहरी चोट थी, जो लगातार भाजपा की अनुच्छेद 370 हटाने की नीति का विरोध करती रही है।
जातिगत आरक्षण पर कांग्रेस की सोच
प्रधानमंत्री मोदी ने कांग्रेस पर आरोप लगाया कि उसने हमेशा अनुसूचित जातियों (एससी), अनुसूचित जनजातियों (एसटी) और अन्य पिछड़े वर्गों (ओबीसी) के साथ विभाजन की राजनीति की है। उन्होंने कांग्रेस की मानसिकता की आलोचना करते हुए कहा कि पार्टी जातिगत आरक्षण के खिलाफ रही है और इसे केवल योग्यता के खिलाफ मानती है। उन्होंने कांग्रेस के पुराने बयानों का उल्लेख करते हुए कहा कि कांग्रेस की नजर में आरक्षण देश की प्रगति के खिलाफ है।
प्रधानमंत्री ने कहा, “कांग्रेस ने हमेशा ओबीसी, एससी और एसटी को छोटी जातियों में विभाजित करने का काम किया है ताकि वे आपस में बंटे रहें और कांग्रेस का एजेंडा चलता रहे। यही कारण है कि कांग्रेस को यह बात पसंद नहीं कि पिछले 10 सालों से ओबीसी वर्ग का एक व्यक्ति देश का प्रधानमंत्री बना हुआ है।”
संभाजी महाराज बनाम औरंगजेब की विचारधारा का चुनाव
महाराष्ट्र चुनाव में कांग्रेस और उसके सहयोगियों के समर्थन के खिलाफ बोलते हुए प्रधानमंत्री मोदी ने यह मुद्दा उठाया कि आज यह चुनाव केवल राजनीतिक दलों के बीच नहीं, बल्कि विचारधाराओं के बीच का चुनाव है। उन्होंने संभाजी महाराज की विचारधारा को राष्ट्रप्रेम और औरंगजेब की विचारधारा को विदेशी सोच का प्रतीक बताते हुए कहा, “महाराष्ट्र के लोगों के पास आज एक मौका है कि वे यह तय करें कि वे किसके साथ खड़े होना चाहते हैं—संभाजी महाराज के अनुयायियों के साथ, या औरंगजेब की प्रशंसा करने वालों के साथ।”

प्रधानमंत्री ने कहा कि आज का महाराष्ट्र संभाजी महाराज की वीरता और मराठा साम्राज्य की गौरवशाली परंपरा का प्रतिनिधित्व करता है और इसे बनाए रखने के लिए जरूरी है कि राज्य में भाजपा का शासन हो। उनका यह बयान मराठा समुदाय के गौरव को बचाने की प्रतिबद्धता के रूप में देखा गया और जनता के बीच एक भावनात्मक संबंध स्थापित करने का प्रयास था।
छत्रपति संभाजीनगर का नामकरण और सांस्कृतिक गौरव
प्रधानमंत्री ने यह भी कहा कि भाजपा-नेतृत्व वाली महायुति सरकार ने शिवसेना संस्थापक बाल ठाकरे की लंबे समय से चली आ रही मांग को पूरा करते हुए औरंगाबाद का नाम बदलकर छत्रपति संभाजीनगर किया। उन्होंने कहा कि यह केवल भाजपा-नेतृत्व वाली महायुति ही थी, जिसने महाराष्ट्र की सांस्कृतिक धरोहर को बनाए रखने के लिए यह कदम उठाया। उन्होंने यह भी दावा किया कि कांग्रेस और उसके सहयोगियों ने अदालत में इस नाम परिवर्तन का विरोध किया था, और महा विकास अघाड़ी सरकार में कांग्रेस के दबाव के कारण इस परिवर्तन को लागू करने का “साहस” नहीं दिखा पाई।
मराठी को शास्त्रीय भाषा का दर्जा देने का प्रयास
प्रधानमंत्री ने भाजपा के प्रयासों की चर्चा करते हुए मराठी भाषा को शास्त्रीय भाषा का दर्जा दिलाने की कोशिश का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि भाजपा सरकार मराठी भाषा के संरक्षण और संवर्धन के लिए कृतसंकल्प है। उन्होंने यह बताया कि इस भाषा को शास्त्रीय भाषा का दर्जा मिलने से महाराष्ट्र की सांस्कृतिक विरासत को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान मिलेगी।
महाराष्ट्र की आर्थिक प्रगति और विदेशी प्रत्यक्ष निवेश
प्रधानमंत्री मोदी ने महाराष्ट्र की आर्थिक प्रगति पर भी बात की और भाजपा सरकार के उन प्रयासों का उल्लेख किया जिनसे राज्य में विदेशी प्रत्यक्ष निवेश (FDI) में रिकॉर्ड वृद्धि हुई है। उन्होंने कहा कि यह निवेश महाराष्ट्र की समृद्धि को बढ़ावा देता है और राज्य की आर्थिक प्रगति को नई ऊंचाइयों तक ले जा रहा है। उन्होंने इसे भाजपा की आर्थिक नीतियों का प्रतिफल बताया और कहा कि महाराष्ट्र की प्रगति में भाजपा का महत्वपूर्ण योगदान है।
“भाजपा- महायुति आहे, गति आहे, महाराष्ट्राची प्रगति आहे”
प्रधानमंत्री मोदी ने अपने भाषण का समापन करते हुए कहा कि महाराष्ट्र का भविष्य भाजपा के हाथों में सुरक्षित है। उन्होंने कहा, “भाजपा- महायुति आहे, गति आहे, महाराष्ट्राची प्रगति आहे” (अगर महायुति है, तो महाराष्ट्र में प्रगति है)। उन्होंने महाराष्ट्र के लोगों से भाजपा-नेतृत्व वाली महायुति सरकार को समर्थन देने की अपील की और कहा कि यही गठबंधन राज्य में विकास और सांस्कृतिक गौरव की गारंटी है।
प्रधानमंत्री के इस भाषण का असर महाराष्ट्र के चुनावों पर गहरा हो सकता है, क्योंकि उन्होंने न केवल राज्य के मुद्दों को उठाया बल्कि राष्ट्रीय हितों को भी जोड़कर कांग्रेस पर बड़ा हमला किया। उनका यह संबोधन न केवल मराठा संस्कृति और राज्य की धरोहर को सुरक्षित रखने के लिए था, बल्कि इसे राष्ट्रीय एकता और संविधान के प्रति उनकी प्रतिबद्धता का प्रतीक भी माना जा रहा है।
