कांशीराम जयंती पर लखनऊ में संविधान सम्मेलन, भारत रत्न देने का प्रस्ताव पास; भागीदारी, विदेश नीति और व्यापार समझौते पर केंद्र सरकार पर तीखा हमला
नई दिल्ली/लखनऊ, 13 मार्च। लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्र सरकार की नीतियों पर तीखा हमला बोलते हुए कहा कि मोदी भारत के प्रधानमंत्री की तरह काम नहीं कर रहे, बल्कि अमेरिका के हितों को ध्यान में रखकर फैसले ले रहे हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार की विदेश नीति दबाव में काम कर रही है और इसके कारण देश के आर्थिक और रणनीतिक हितों से समझौता किया जा रहा है।
राहुल गांधी शुक्रवार शाम लखनऊ के इंदिरा गांधी प्रतिष्ठान में बहुजन आंदोलन के महानायक कांशीराम की जयंती के अवसर पर आयोजित संविधान सम्मेलन को संबोधित कर रहे थे। इस सम्मेलन में कांशीराम के सामाजिक और राजनीतिक योगदान को याद करते हुए उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की गई। कार्यक्रम के दौरान सर्वसम्मति से कांशीराम को भारत रत्न देने का प्रस्ताव भी पारित किया गया।
विदेश नीति पर केंद्र सरकार पर हमला
अपने संबोधन में राहुल गांधी ने कहा कि जब वह संसद में यह सवाल उठाने जा रहे थे कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अमेरिका के दबाव में फैसले ले रहे हैं, तो प्रधानमंत्री सदन से बाहर चले गए। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री आंख से आंख मिलाकर इन सवालों का जवाब नहीं दे सकते।
राहुल गांधी ने आरोप लगाया कि अमेरिका ने उद्योगपति गौतम अडानी से जुड़े मामलों को लेकर दबाव बनाया है। उनका कहना था कि अडानी समूह भारतीय जनता पार्टी के वित्तीय ढांचे का एक बड़ा हिस्सा है और इसी कारण इस मामले को लेकर सरकार पर अंतरराष्ट्रीय दबाव बनाया जा रहा है। राहुल गांधी ने कहा कि यदि सरकार अमेरिका की बात नहीं मानेगी तो अडानी से जुड़े मामलों को लेकर बड़े खुलासे किए जा सकते हैं।
उन्होंने दावा किया कि इसी दबाव के कारण भारत और अमेरिका के बीच लंबे समय से लंबित व्यापार समझौते को जल्दबाजी में अंतिम रूप दिया गया। राहुल गांधी ने कहा कि उनके संसद में दिए भाषण के तुरंत बाद प्रधानमंत्री ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप से बात की और समझौते को अंतिम रूप देने पर सहमति जताई।
व्यापार समझौते पर गंभीर आरोप
कांग्रेस नेता ने कहा कि इस समझौते के कारण भारत को कोई विशेष लाभ नहीं मिला है। इसके उलट, भारत ने अमेरिका के सामने कई बड़े आर्थिक समझौते कर दिए हैं। राहुल गांधी के अनुसार, भारत ने अपना महत्वपूर्ण डेटा अमेरिका को सौंप दिया है और अमेरिकी किसानों के लिए भारतीय बाजार खोलने की सहमति दी है।
उन्होंने आरोप लगाया कि भारत ने हर साल करीब नौ लाख करोड़ रुपये के अमेरिकी उत्पाद खरीदने का भी वादा किया है। राहुल गांधी ने कहा कि इससे भारत की आर्थिक आत्मनिर्भरता कमजोर होगी और घरेलू उद्योगों पर दबाव बढ़ेगा।
उन्होंने यह भी कहा कि ऊर्जा सुरक्षा के मामले में भी भारत ने अमेरिका पर निर्भरता बढ़ा दी है। राहुल गांधी के अनुसार अब यह स्थिति बन रही है कि भारत को तेल और गैस कहां से खरीदना है, यह भी अमेरिका तय करेगा। उन्होंने कहा कि देश में गैस की किल्लत इसी नीति का परिणाम है।
हरदीप पुरी का भी किया जिक्र
अपने भाषण में राहुल गांधी ने केंद्रीय मंत्री हरदीप सिंह पुरी का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि पुरी का नाम कथित तौर पर एपस्टीन से जुड़े दस्तावेजों में सामने आया है और यह भी आरोप लगाया कि पुरी की बेटी की कंपनी में अंतरराष्ट्रीय निवेशक जॉर्ज सोरोस का पैसा लगा हुआ है।
राहुल गांधी ने कहा कि जब उन्होंने संसद में यह मुद्दा उठाने की कोशिश की तो उन्हें बोलने से रोक दिया गया। उनका आरोप था कि सरकार ऐसे सवालों से बचना चाहती है जो उसकी विदेश नीति और आर्थिक फैसलों को कठघरे में खड़ा करते हैं।
सावरकर और आरएसएस पर भी साधा निशाना
राहुल गांधी ने अपने भाषण में महात्मा गांधी, डॉ. भीमराव आंबेडकर और कांशीराम के संघर्षों का उल्लेख करते हुए कहा कि इन महान नेताओं ने कभी अपने सिद्धांतों से समझौता नहीं किया। इसके विपरीत, उन्होंने कहा कि समझौता करना आरएसएस की विचारधारा से जुड़े लोगों की पुरानी आदत रही है।
उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि देश के संविधान में वीर सावरकर या नाथूराम गोडसे की विचारधारा नहीं है। राहुल गांधी ने कहा कि संविधान समानता, न्याय और सामाजिक भागीदारी की बात करता है, जबकि वर्तमान सरकार इन मूल्यों को कमजोर कर रही है।
कांशीराम के योगदान को बताया ऐतिहासिक
राहुल गांधी ने कांशीराम के सामाजिक आंदोलन को भारतीय लोकतंत्र के लिए ऐतिहासिक बताया। उन्होंने कहा कि कांशीराम ने दलितों, पिछड़ों और वंचित वर्गों को राजनीतिक आवाज दी।
उन्होंने कहा कि कांग्रेस पार्टी भी मानती है कि अतीत में कई बार वह इन वर्गों की आकांक्षाओं को पूरी तरह से समझ नहीं पाई। राहुल गांधी ने स्वीकार किया कि यही वजह रही कि कांशीराम का आंदोलन व्यापक समर्थन हासिल कर सका।
उन्होंने यह भी कहा कि यदि कांशीराम पंडित जवाहरलाल नेहरू के दौर में सक्रिय होते तो संभवतः वह कांग्रेस पार्टी के मुख्यमंत्री बन सकते थे। राहुल गांधी ने कहा कि कांशीराम का सपना सामाजिक न्याय और भागीदारी का था, जिसे आज भी पूरा करने की जरूरत है।
भागीदारी और प्रतिनिधित्व का मुद्दा उठाया
राहुल गांधी ने अपने भाषण का बड़ा हिस्सा सामाजिक भागीदारी के मुद्दे को समर्पित किया। उन्होंने कहा कि देश की प्रमुख संस्थाओं में दलितों, पिछड़ों और आदिवासियों की भागीदारी बेहद कम है।
उन्होंने कहा कि न्यायपालिका, बड़े कॉरपोरेट घरानों के टॉप मैनेजमेंट, नौकरशाही, बड़े अस्पतालों और निजी स्कूलों के प्रबंधन में इन वर्गों की मौजूदगी लगभग शून्य है। राहुल गांधी ने कहा कि दूसरी तरफ मनरेगा मजदूरों की सूची में यही वर्ग 85 प्रतिशत तक दिखाई देते हैं।
उन्होंने कहा कि यह स्थिति बताती है कि देश की आर्थिक और प्रशासनिक संरचना में असमानता कितनी गहरी है।
इंटरव्यू प्रक्रिया पर भी सवाल
राहुल गांधी ने कहा कि नौकरी भर्ती प्रक्रिया में इंटरव्यू को इस तरह इस्तेमाल किया जा रहा है कि दलित, पिछड़े और आदिवासी युवाओं को अवसर न मिले। उन्होंने आरोप लगाया कि इंटरव्यू एक ऐसा माध्यम बन गया है जिसके जरिए योग्य उम्मीदवारों को भी बाहर कर दिया जाता है।
उन्होंने कहा कि सार्वजनिक क्षेत्र की नौकरियों में भी इन वर्गों को पर्याप्त अवसर नहीं मिल रहे हैं। राहुल गांधी ने कहा कि सामाजिक न्याय के लिए जरूरी है कि भर्ती प्रक्रिया पूरी तरह पारदर्शी और समान अवसर वाली हो।
जाति जनगणना की मांग दोहराई
कांग्रेस नेता ने इस दौरान जाति जनगणना कराने की अपनी मांग भी दोहराई। उन्होंने कहा कि जब तक देश में वास्तविक सामाजिक और आर्थिक आंकड़े सामने नहीं आएंगे, तब तक न्यायपूर्ण नीतियां बनाना मुश्किल होगा।
राहुल गांधी ने कहा कि जाति जनगणना से यह स्पष्ट हो जाएगा कि किस वर्ग की आबादी कितनी है और उन्हें सरकारी योजनाओं और संस्थाओं में कितना प्रतिनिधित्व मिल रहा है।
कांग्रेस की विचारधारा पर जोर
अपने भाषण के अंत में राहुल गांधी ने कहा कि कांग्रेस पार्टी एक गरीब पार्टी है और वह अमीर बनना भी नहीं चाहती। उन्होंने कहा कि यदि कांग्रेस अमीर पार्टी बन जाएगी तो वह भी भाजपा जैसी हो जाएगी।
उन्होंने याद दिलाया कि पिछले लोकसभा चुनाव के दौरान कांग्रेस के बैंक खाते फ्रीज कर दिए गए थे। इसके बावजूद पार्टी ने चुनाव लड़ा और अपनी विचारधारा के आधार पर जनता के बीच काम किया।
राहुल गांधी ने कहा कि कांग्रेस की असली ताकत पैसा नहीं, बल्कि उसकी विचारधारा और संविधान के प्रति उसकी प्रतिबद्धता है।
बड़ी संख्या में मौजूद रहे नेता
संविधान सम्मेलन में कांग्रेस के कई वरिष्ठ नेता और सामाजिक कार्यकर्ता मौजूद रहे। कार्यक्रम में कांग्रेस अनुसूचित जाति विभाग के राष्ट्रीय अध्यक्ष राजेंद्र पाल गौतम, ओबीसी विभाग के राष्ट्रीय अध्यक्ष अनिल जयहिंद, उत्तर प्रदेश प्रभारी अविनाश पांडे, प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय, सांसद तनुज पुनिया, ओबीसी विभाग के प्रदेश अध्यक्ष मनोज यादव, राष्ट्रीय उपाध्यक्ष ओमप्रकाश महतो समेत बड़ी संख्या में नेता उपस्थित रहे।
इसके अलावा कांशीराम के सहयोगी रहे पूर्व मंत्री लालमणि प्रसाद, केके गौतम, बीपी अशोक, अनीस अंसारी, सेवानिवृत्त न्यायाधीश वीरेंद्र सिंह यादव, वरिष्ठ नेता बृजलाल खाबरी, राकेश राठौर, पूर्व सांसद रवि वर्मा, भगवती चौधरी, ओमवती, अनुराधा मिश्रा और आलोक प्रसाद सहित कई गणमान्य लोग सम्मेलन में शामिल हुए।
कार्यक्रम के अंत में कांशीराम के सामाजिक और राजनीतिक योगदान को याद करते हुए यह संकल्प लिया गया कि उनके विचारों को आगे बढ़ाया जाएगा और सामाजिक न्याय की लड़ाई को मजबूत किया जाएगा। सम्मेलन में पारित प्रस्ताव के जरिए केंद्र सरकार से मांग की गई कि बहुजन आंदोलन के इस महान नेता को देश के सर्वोच्च नागरिक सम्मान भारत रत्न से सम्मानित किया जाए।
