प्रयागराज, 19 जनवरी। महाकुंभ मेले के सेक्टर-19 में शनिवार को एक भयावह हादसे में शास्त्री ब्रिज के नीचे बने टेंटों में भीषण आग लग गई। यह आग सिलेंडर फटने से शुरू हुई, जिसने देखते ही देखते पूरे क्षेत्र को अपनी चपेट में ले लिया। करीब 25 से अधिक टेंट जलकर खाक हो गए, और रुक-रुक कर सिलेंडरों के धमाकों ने स्थिति को और खतरनाक बना दिया। दमकल विभाग की 15 से 16 गाड़ियां मौके पर पहुंचीं और घंटों की कड़ी मशक्कत के बाद आग पर काबू पाया जा सका।
इस घटना में कोई हताहत नहीं हुआ, लेकिन मेला क्षेत्र में भगदड़ और दहशत का माहौल बना रहा। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने स्वयं घटनास्थल पर पहुंचकर स्थिति का जायजा लिया। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी मुख्यमंत्री से बातचीत कर घटना की पूरी जानकारी ली।
घटना का विवरण: आग लगने से मची भगदड़
शनिवार की दोपहर सेक्टर-19 में पांटून पुल 12 के पास स्थित अखिल भारतीय धर्म संघ श्रीकरपात्री धाम वाराणसी के शिविर में अचानक आग लग गई। प्रारंभिक जांच में सामने आया कि आग शिविर में रखे एक एलपीजी सिलेंडर के फटने से लगी। इसके बाद एक के बाद एक सिलेंडर फटते चले गए। समाचार एजेंसी पीटीआई के मुताबिक, कुल 19 सिलेंडर फटे, जिससे आग ने विकराल रूप ले लिया।
तेज हवा ने आग को और फैलने में मदद की। देखते ही देखते आग 100 वर्ग मीटर से अधिक क्षेत्र में फैल गई और 30 फीट तक ऊंची लपटें उठने लगीं। आसमान में करीब 300 फीट ऊपर तक धुएं का गुबार देखा गया। घटनास्थल पर मौजूद श्रद्धालु और साधु-संत अपनी जान बचाने के लिए इधर-उधर भागने लगे।
दमकल विभाग की तत्परता और मशक्कत
आग की सूचना मिलते ही दमकल विभाग की गाड़ियां महज दो मिनट में मौके पर पहुंच गईं। हालांकि, आग की तीव्रता इतनी अधिक थी कि पहले दस मिनट में इसे नियंत्रित करना संभव नहीं हो सका। दमकल कर्मियों ने तुरंत अतिरिक्त सहायता के लिए और गाड़ियां बुलाईं। कुल मिलाकर 15-16 दमकल गाड़ियों ने मिलकर आग को बुझाने का काम शुरू किया।
करीब दो घंटे की मशक्कत के बाद आग पर पूरी तरह से काबू पाया जा सका। दमकल कर्मियों ने बताया कि सिलेंडरों के लगातार फटने और तेज हवा के चलते आग को रोकने में मुश्किलें आ रही थीं।
मुख्यमंत्री का घटनास्थल पर दौरा
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, जो घटना के समय महाकुंभ मेला क्षेत्र में ही मौजूद थे, तुरंत घटनास्थल पर पहुंचे। उन्होंने अधिकारियों से स्थिति की पूरी जानकारी ली और राहत कार्यों की निगरानी की। मुख्यमंत्री ने प्रभावित क्षेत्रों का निरीक्षण करते हुए अधिकारियों को निर्देश दिया कि अग्नि सुरक्षा के सभी उपाय सुनिश्चित किए जाएं।
#WATCH | Fire at #MahaKumbhMela2025 | Uttar Pradesh CM Yogi Adityanath arrives at the fire incident spot in the #MahaKumbhMela2025
The fire has been brought under control. No causality has been reported. pic.twitter.com/qKJQBFyezI
— ANI (@ANI) January 19, 2025
मुख्यमंत्री ने यह भी सुनिश्चित करने को कहा कि किसी भी घायल को तुरंत चिकित्सा सहायता प्रदान की जाए। हालांकि, राहत की बात यह रही कि इस घटना में किसी के हताहत होने की सूचना नहीं मिली।
प्रधानमंत्री ने की घटना पर चर्चा
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से फोन पर बातचीत कर घटना की जानकारी ली। उन्होंने मेला क्षेत्र में सुरक्षा व्यवस्था की समीक्षा करने और ऐसी घटनाओं को दोबारा न होने देने के लिए जरूरी कदम उठाने का सुझाव दिया। प्रधानमंत्री ने इस घटना को दुर्भाग्यपूर्ण बताते हुए लोगों की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता देने पर जोर दिया।
रेलवे सेवाएं प्रभावित
घटनास्थल के पास लोहे का रेलवे पुल होने के कारण आग के प्रभाव को देखते हुए रेलवे प्रशासन ने ट्रेनों का संचालन अस्थायी रूप से रोक दिया। अधिकारियों ने बताया कि पुल की संरचनात्मक जांच के बाद ही इसे फिर से चालू किया गया।
चिकित्सा सुविधा और आपातकालीन स्थिति
आग लगने की घटना के तुरंत बाद महाकुंभ के केंद्रीय अस्पताल को अलर्ट मोड पर रखा गया। करीब 10 चिकित्सकों की टीम को इमरजेंसी ड्यूटी पर बुलाया गया। एसआरएन अस्पताल को भी तैयार रहने का निर्देश दिया गया।
हालांकि, गनीमत रही कि इस हादसे में किसी को चोट नहीं आई। प्रशासन ने अस्पतालों में पर्याप्त संसाधन उपलब्ध कराए और आपात स्थिति से निपटने की तैयारी रखी।
प्रत्यक्षदर्शियों के बयान
घटनास्थल पर मौजूद एक साधु ने बताया, “हम लोग दोपहर में भजन कर रहे थे, तभी अचानक तेज धमाके की आवाज सुनाई दी। कुछ ही पलों में आग ने पूरे शिविर को घेर लिया। लोग अपनी जान बचाने के लिए इधर-उधर भागने लगे।”
एक अन्य श्रद्धालु ने कहा, “आग इतनी तेजी से फैली कि हमें कुछ समझने का मौका ही नहीं मिला। दमकल गाड़ियां तुरंत आईं, लेकिन आग की लपटें बहुत ऊंची थीं।”
सुरक्षा उपायों पर सवाल
महाकुंभ जैसे बड़े आयोजन में इस तरह की घटना ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। मेला क्षेत्र में लगी भीषण आग ने यह दर्शाया कि सुरक्षा मानकों में अभी भी खामियां हैं।
विशेषज्ञों का कहना है कि एलपीजी सिलेंडरों के इस्तेमाल के लिए सख्त दिशा-निर्देश लागू किए जाने चाहिए। मेला क्षेत्र में अग्निशमन उपकरणों की उपलब्धता और शिविरों की संरचनाओं में अग्निरोधक सामग्री के उपयोग को अनिवार्य किया जाना चाहिए।
प्रशासन की प्रतिक्रिया
घटना के बाद प्रयागराज के जिलाधिकारी ने मेला क्षेत्र का दौरा किया और स्थिति का जायजा लिया। उन्होंने कहा कि प्रशासन इस घटना की जांच के लिए एक उच्च स्तरीय समिति का गठन करेगा। जिलाधिकारी ने यह भी आश्वासन दिया कि भविष्य में इस तरह की घटनाओं को रोकने के लिए सभी जरूरी कदम उठाए जाएंगे।
धर्मगुरुओं की प्रतिक्रिया
घटना के बाद कई धर्मगुरुओं ने चिंता व्यक्त की। अखिल भारतीय धर्म संघ के प्रमुख ने कहा, “यह घटना बहुत दुखद है। प्रशासन को इस बात का ध्यान रखना चाहिए कि ऐसा हादसा दोबारा न हो।”
महाकुंभ मेला 2025 में हुई इस आगजनी की घटना ने पूरे देश का ध्यान खींचा है। यह घटना न केवल सुरक्षा व्यवस्थाओं की खामियों को उजागर करती है, बल्कि भविष्य में ऐसे हादसों को रोकने के लिए बेहतर प्रबंधन की आवश्यकता को भी रेखांकित करती है।
हालांकि, राहत की बात यह है कि इस हादसे में कोई हताहत नहीं हुआ। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा किए गए त्वरित प्रयासों ने स्थिति को संभालने में अहम भूमिका निभाई। प्रशासन अब मेला क्षेत्र में सुरक्षा व्यवस्था को और पुख्ता करने की दिशा में काम कर रहा है, ताकि महाकुंभ मेला 2025 का आयोजन श्रद्धालुओं के लिए सुरक्षित और स्मरणीय बन सके।
