नई दिल्ली 28 फरवरी। कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के हालिया इजरायल दौरे को लेकर तीखी प्रतिक्रिया दी है। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर किए गए अपने एक विस्तृत पोस्ट में उन्होंने प्रधानमंत्री की विदेश नीति और इस दौरे के समय को लेकर गंभीर सवाल उठाए हैं।
कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने अपने बयान में कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के इज़राइल दौरे के मात्र दो दिन बाद इज़राइल और यूनाइटेड स्टेट्स ने मिलकर ईरान पर सैन्य कार्रवाई शुरू कर दी। उन्होंने दावा किया कि पिछले कई महीनों से जिस प्रकार की सैन्य तैयारियां दिखाई दे रही थीं, उससे इस तरह की कार्रवाई की आशंका पहले से ही जताई जा रही थी।
जयराम रमेश ने लिखा कि इन परिस्थितियों के बावजूद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का इज़राइल जाने का फैसला बेहद विवादास्पद और चिंताजनक था। उनके मुताबिक, ऐसे संवेदनशील समय में किसी एक पक्ष के साथ खुलकर खड़े होने की घोषणा करना भारत की पारंपरिक संतुलित विदेश नीति के खिलाफ है।
कांग्रेस नेता ने प्रधानमंत्री पर आरोप लगाते हुए कहा कि इज़राइल में उन्होंने “सबसे बड़ी नैतिक कायरता” दिखाई। जयराम रमेश ने अपने पोस्ट में लिखा कि प्रधानमंत्री ने सार्वजनिक रूप से घोषणा की कि भारत इज़राइल के साथ खड़ा है, और ऐसा कहकर उन्होंने एक तरह से अपने लिए राजनीतिक इनाम हासिल करने की कोशिश की।
उन्होंने आगे कहा कि यह दौरा केवल एक कूटनीतिक यात्रा नहीं था, बल्कि उस समय हुआ जब पश्चिम एशिया में तनाव अपने चरम पर था। रमेश के मुताबिक, भारत को ऐसी स्थिति में संतुलित और सावधान भूमिका निभानी चाहिए थी, क्योंकि देश की विदेश नीति लंबे समय से “रणनीतिक स्वायत्तता” और “संतुलित कूटनीति” पर आधारित रही है।
कांग्रेस महासचिव ने अपने बयान में यह भी कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के दो “अच्छे दोस्तों” द्वारा शुरू की गई इस जंग के संदर्भ में इज़राइल का दौरा और भी ज्यादा शर्मनाक प्रतीत होता है। उन्होंने संकेत दिया कि वैश्विक राजनीति में व्यक्तिगत समीकरणों के बजाय राष्ट्रीय हितों और अंतरराष्ट्रीय संतुलन को प्राथमिकता दी जानी चाहिए।
रमेश के इस बयान के बाद राजनीतिक हलकों में बहस तेज हो गई है। कांग्रेस पार्टी लंबे समय से केंद्र सरकार की विदेश नीति को लेकर सवाल उठाती रही है। पार्टी का कहना है कि भारत को अंतरराष्ट्रीय संघर्षों में किसी एक पक्ष के साथ स्पष्ट रूप से खड़ा होने के बजाय मध्यस्थ और संतुलित भूमिका निभानी चाहिए।
वहीं दूसरी ओर भारतीय जनता पार्टी के नेताओं का कहना है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की विदेश नीति भारत के राष्ट्रीय हितों को ध्यान में रखकर तय की जाती है। भाजपा नेताओं का तर्क है कि भारत और इज़राइल के बीच पिछले एक दशक में रणनीतिक, तकनीकी और सुरक्षा सहयोग काफी मजबूत हुआ है, और दोनों देशों के संबंध लगातार गहरे होते जा रहे हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि पश्चिम एशिया की स्थिति बेहद जटिल है और भारत के लिए यह क्षेत्र रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण भी है। एक ओर भारत के इज़राइल के साथ रक्षा और तकनीकी सहयोग मजबूत हैं, वहीं दूसरी ओर ईरान के साथ ऊर्जा, व्यापार और क्षेत्रीय संपर्क के भी अहम संबंध रहे हैं। ऐसे में भारत को अक्सर संतुलित कूटनीतिक रणनीति अपनानी पड़ती है।
राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, जयराम रमेश का यह बयान केवल विदेश नीति की आलोचना नहीं है, बल्कि यह आने वाले समय में सरकार और विपक्ष के बीच विदेश नीति को लेकर बढ़ने वाली राजनीतिक बहस का संकेत भी देता है। सोशल मीडिया पर भी इस बयान को लेकर व्यापक चर्चा देखने को मिल रही है, जहां कुछ लोग कांग्रेस नेता के आरोपों का समर्थन कर रहे हैं तो कुछ इसे राजनीतिक बयानबाजी बता रहे हैं।
कुल मिलाकर, प्रधानमंत्री के इज़राइल दौरे और पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के बीच कांग्रेस नेता जयराम रमेश का यह बयान भारतीय राजनीति में एक नई बहस को जन्म देता नजर आ रहा है। आने वाले दिनों में यह देखना दिलचस्प होगा कि केंद्र सरकार इस आलोचना पर किस तरह प्रतिक्रिया देती है और भारत की विदेश नीति को लेकर राजनीतिक विमर्श किस दिशा में आगे बढ़ता है।
