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	<title>Saman nagrik sanhita Archives - Samvaad India</title>
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		<title>उत्तराखंड में समान नागरिक संहिता लागू: भारत के इतिहास में नया अध्याय</title>
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		<dc:creator><![CDATA[संवाद इंडिया]]></dc:creator>
		<pubDate>Mon, 27 Jan 2025 10:07:28 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[अंतरराष्ट्रीय]]></category>
		<category><![CDATA[उत्तराखंड]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>देहरादून, 27 जनवरी। उत्तराखंड ने आज अपने इतिहास में एक महत्वपूर्ण अध्याय जोड़ते हुए समान नागरिक संहिता (यूसीसी)</p>
<p>The post <a href="https://www.samvaadindia.com/uniform-civil-code-implemented-in-uttarakhand-a-new-chapter-in-the-history-of-india/">उत्तराखंड में समान नागरिक संहिता लागू: भारत के इतिहास में नया अध्याय</a> appeared first on <a href="https://www.samvaadindia.com">Samvaad India</a>.</p>
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										<content:encoded><![CDATA[<p>देहरादून, 27 जनवरी। उत्तराखंड ने आज अपने इतिहास में एक महत्वपूर्ण अध्याय जोड़ते हुए समान नागरिक संहिता (यूसीसी) को लागू कर दिया। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने मुख्य सेवक सदन में आयोजित एक भव्य कार्यक्रम में यूसीसी के पोर्टल और नियमावली का लोकार्पण किया। इसके साथ ही उत्तराखंड देश का पहला ऐसा राज्य बन गया है, जिसने समान नागरिक संहिता लागू करने का साहसिक कदम उठाया है।</p>
<p>यह ऐतिहासिक उपलब्धि केवल उत्तराखंड के लिए ही नहीं, बल्कि पूरे देश के लिए एक प्रेरणादायक मिसाल है। मुख्यमंत्री ने कहा, “यह देवभूमि के नागरिकों के समर्थन और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मार्गदर्शन का ही परिणाम है कि हम आज यह ऐतिहासिक कदम उठाने में सक्षम हुए हैं।”</p>
<p><strong>यूसीसी की यात्रा: ढाई साल का सफर</strong></p>
<p>समान नागरिक संहिता की दिशा में उत्तराखंड का यह सफर आसान नहीं था। 27 मई 2022 को विशेषज्ञ समिति के गठन से लेकर आज के दिन तक, यह प्रक्रिया कई चुनौतियों और मील के पत्थरों से होकर गुजरी।</p>
<p><strong>महत्वपूर्ण पड़ाव:</strong></p>
<p><em><strong>1. समिति का गठन (27 मई 2022):</strong></em></p>
<p>सुप्रीम कोर्ट की पूर्व न्यायाधीश जस्टिस रंजना प्रकाश देसाई की अध्यक्षता में एक विशेषज्ञ समिति बनाई गई, जिसमें विधि, समाजशास्त्र, और प्रशासनिक क्षेत्र के विशेषज्ञ शामिल थे।</p>
<p><em><strong>2. जनता से संवाद:</strong></em></p>
<p>20 लाख से अधिक सुझाव: समिति ने जनता से ऑनलाइन और ऑफलाइन दोनों माध्यमों से सुझाव मांगे।</p>
<p><em><strong>ढाई लाख लोगों से सीधा संवाद:</strong> </em>विशेषज्ञ समिति ने व्यक्तिगत रूप से उत्तराखंड के विभिन्न जिलों और ग्रामीण क्षेत्रों में जाकर लोगों की राय ली।</p>
<p><em><strong>गहन अध्ययन:</strong> </em>सऊदी अरब, तुर्कीए, इंडोनेशिया, फ्रांस, जापान, कनाडा जैसे देशों की समान नागरिक संहिता का अध्ययन किया गया।</p>
<p><em><strong>3. विधानसभा में पारित (8 मार्च 2024):</strong></em></p>
<p>यूसीसी विधेयक को विधानसभा में पेश किया गया और इसे सर्वसम्मति से पारित किया गया।</p>
<p><em><strong>4. राष्ट्रपति की मंजूरी (12 मार्च 2024):</strong></em></p>
<p>विधेयक को राष्ट्रपति का अनुमोदन प्राप्त हुआ, जिससे इसे कानूनी रूप से लागू करने का रास्ता साफ हुआ।</p>
<p><em><strong>5. तकनीकी व्यवस्था:</strong></em></p>
<p>नागरिकों और अधिकारियों के लिए एक ऑनलाइन पोर्टल विकसित किया गया। पंजीकरण प्रक्रिया को डिजिटल और पारदर्शी बनाने के लिए मॉक ड्रिल आयोजित की गई।</p>
<p><strong>यूसीसी के लागू होने के बाद बदलाव</strong></p>
<p>समान नागरिक संहिता का उद्देश्य सभी धर्मों और समुदायों के नागरिकों के लिए एक समान कानून व्यवस्था लागू करना है। यूसीसी के तहत विवाह, तलाक, विरासत, गुजारा भत्ता और संपत्ति से जुड़े मुद्दों पर समान नियम लागू होंगे।</p>
<p><strong>प्रमुख बदलाव:</strong></p>
<p><em><strong>1. विवाह और तलाक:</strong></em></p>
<p>सभी धर्मों के लिए विवाह और तलाक का एक समान कानून।</p>
<p>विवाह का पंजीकरण अनिवार्य, न करने पर 25,000 रुपये तक का जुर्माना।</p>
<p>लड़के और लड़की की विवाह के लिए न्यूनतम आयु क्रमशः 21 और 18 वर्ष।</p>
<p><strong>2. संपत्ति और विरासत:</strong></p>
<p>बेटा और बेटी को संपत्ति में समान अधिकार।</p>
<p>जायज और नाजायज बच्चों में कोई भेदभाव नहीं।</p>
<p>गोद लिए, सरोगेसी से या एआरटी (असिस्टेड रिप्रोडक्टिव टेक्नोलॉजी) से जन्मे बच्चों को जैविक संतान का दर्जा मिलेगा।</p>
<p><strong>3. लिव-इन रिलेशनशिप:</strong></p>
<p>लिव-इन में रहने वाले जोड़ों को पंजीकरण अनिवार्य।</p>
<p>लिव-इन में जन्मे बच्चों को जैविक संतान का दर्जा और समान अधिकार।</p>
<p>बिना पंजीकरण के रहने पर 6 महीने की सजा या 25,000 रुपये जुर्माना।</p>
<p><strong>4. महिलाओं के अधिकार:</strong></p>
<p>सभी धर्मों की महिलाओं को तलाक और विरासत के समान अधिकार।</p>
<p>हलाला, इद्दत जैसी प्रथाओं पर प्रतिबंध।</p>
<p>महिला का दूसरा विवाह करने पर किसी भी तरह की शर्तें लागू नहीं होंगी।</p>
<p><strong>5. बच्चों की कस्टडी:</strong></p>
<p>तलाक या विवाद की स्थिति में 5 वर्ष तक के बच्चे की प्राथमिक कस्टडी मां को दी जाएगी।</p>
<p><strong>6. धर्म परिवर्तन:</strong></p>
<p>जबरन धर्म परिवर्तन की स्थिति में दूसरे पक्ष को तलाक और गुजारा भत्ता का अधिकार।</p>
<p><strong>यूसीसी लागू करने में उत्तराखंड का योगदान</strong></p>
<p>मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने इसे उत्तराखंड के लिए एक ऐतिहासिक उपलब्धि करार दिया। उन्होंने कहा, “यूसीसी केवल एक कानून नहीं, बल्कि समावेशी समाज की ओर एक कदम है। यह हमारी संस्कृति, परंपरा और आधुनिकीकरण का संगम है।”</p>
<p><strong>सीएम ने जताई भावनाएं:</strong></p>
<p>“आज मैं गर्व और भावुकता से भर गया हूं। समान नागरिक संहिता लागू करने का सपना जो हमने 2022 में देखा था, आज वह साकार हो गया है। यह केवल उत्तराखंड नहीं, बल्कि पूरे देश के लिए एक आदर्श है।”</p>
<p><strong>समीक्षा और भविष्य की योजनाएं</strong></p>
<p>यूसीसी के क्रियान्वयन के लिए एक विशेष समीक्षा समिति बनाई गई है, जो यह सुनिश्चित करेगी कि इस कानून के तहत किसी भी नागरिक को किसी प्रकार की असुविधा न हो। सरकार ने विभिन्न स्तरों पर अधिकारियों को प्रशिक्षित किया है और पोर्टल को अत्यधिक उपयोगकर्ता-अनुकूल बनाया है।</p>
<p><strong>समाज पर प्रभाव:</strong></p>
<p>मुख्य सचिव राधा रतूड़ी ने कहा, “यूसीसी के लागू होने से समाज में समानता और न्याय की भावना को बढ़ावा मिलेगा। यह कानून केवल कानून नहीं, बल्कि एक सामाजिक क्रांति है।”</p>
<p>समान नागरिक संहिता का उत्तराखंड में लागू होना भारत के लिए एक ऐतिहासिक क्षण है। यह कानून न केवल सामाजिक समानता को बढ़ावा देगा, बल्कि अन्य राज्यों को भी इसी दिशा में कदम उठाने के लिए प्रेरित करेगा। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी और उत्तराखंड की जनता ने मिलकर यह साबित किया है कि एक संकल्प को दृढ़ इच्छा शक्ति और कड़ी मेहनत से साकार किया जा सकता है।</p>
<p>समान नागरिक संहिता का यह कदम केवल उत्तराखंड की सीमाओं तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि यह देशभर में समानता और समावेशिता के नए युग की शुरुआत करेगा।</p>
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