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	<title>Rajnath singh Archives - Samvaad India</title>
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	<title>Rajnath singh Archives - Samvaad India</title>
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		<title>क्या कल्याण सिंह की तरह योगी आदित्यनाथ के खिलाफ हो रही है साजिश</title>
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		<dc:creator><![CDATA[संवाद इंडिया]]></dc:creator>
		<pubDate>Tue, 16 Jul 2024 13:25:26 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[उत्तर प्रदेश]]></category>
		<category><![CDATA[एक्सक्लूसिव]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>(वसिंद्र मिश्र) क्या उत्तर प्रदेश की राजनीति में एक बार फिर कल्याण सिंह का दौर वापस आ गया</p>
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										<content:encoded><![CDATA[<p>(वसिंद्र मिश्र) क्या उत्तर प्रदेश की राजनीति में एक बार फिर कल्याण सिंह का दौर वापस आ गया है? क्या उत्तर प्रदेश में एक बार फिर जिस तरीके से कल्याण सिंह के खिलाफ पार्टी के अंदर एक विद्रोह की स्थिति पैदा की गई और उसके बाद उनको बहुत ही संयोजित तरीके से मुख्यमंत्री पद से हटाया गया था उसी तरह का माहौल बनता जा रहा है? मौजूदा मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के खिलाफ क्या एक बार फिर उत्तर प्रदेश की सरकार और भारतीय जनता पार्टी और उसका संगठन उसके नेता उसके विधायक मुख्यमंत्री के खिलाफ होते जा रहे हैं?<br />
यह तमाम ऐसे सवाल है जो पिछले 4 जून के लोकसभा के चुनाव परिणाम आने के बाद से लेकर लगातार सार्वजनिक तौर पर पूछे जा रहे हैं और बताए जा रहे हैं कुछ लोगों का लगातार यह मानना रहा है कि अब उत्तर प्रदेश में नेतृत्व परिवर्तन महज एक औपचारिकता बची है और किसी भी दिन उत्तर प्रदेश में नेतृत्व परिवर्तन हो सकता है और मुख्यमंत्री के रूप में किसी दूसरे व्यक्ति की ताजपोशी हो सकती है लेकिन क्या आज के हालात में मौजूदा मुख्यमंत्री को बदलने से भारतीय जनता पार्टी को फायदा होने वाला है आने वाले 2027 के चुनाव में या जिस तरीके से कल्याण सिंह को बदलने में कुछ चुनिंदा नेताओं का अहम जरूर शांत हो गया वह खुश हो गए लेकिन लेकिन लंबे समय के बाद बीजेपी का बहुत ही ज्यादा नुकसान हुआ था क्या ठीक उसी तरीके से मौजूदा नेतृत्व के बदलने से भारतीय जनता पार्टी को दीर्घकालीन उसका नुकसान उठाना पड़ेगा राजनीतिक तौर पर यह तमाम ऐसे सवाल हैं जिसका उत्तर खोजना जरूरी है।</p>
<p>हम शुरुआत करते हैं कि उत्तर प्रदेश में क्या एक बार फिर कल्याण सिंह का दौर वापस आ गया है क्या जिस तरह से कल्याण सिंह के दौर में केंद्र की सरकार और केंद्र का पार्टी नेतृत्व और उत्तर प्रदेश की सरकार और उत्तर प्रदेश का पार्टी नेतृत्व एक दूसरे के खिलाफ काम कर रहा था क्या जिस तरीके से कल्याण सिंह के वक्त में उत्तर प्रदेश भाजपा के उत्तर प्रदेश सरकार में शामिल तमाम महत्वाकांक्षी नेताओं ने कल्याण सिंह के खिलाफ काम किया था और उनको हटाने में अपनी भूमिका निभाई थी क्या ठीक उसी तरीके की स्थिति इस समय उत्तर प्रदेश में बनती दिखाई नहीं दे रही है जिस तरीके के रिएक्शन संगठन से लेकर पार्टी कि नेताओं की तरफ से पहले देवरिया फिर गोरखपुर फिर प्रतापगढ़ फिर जौनपुर इन तमाम जनपदों से जिस तरीके के रिएक्शन पार्टी के नेताओं के द्वारा एक के बाद एक देखने और पढ़ने को मिल रहा है जिस तरीके से नेताओं की तरफ से लगातार यह आरोप लगाया जा रहा है की नौकरशाही बेलगाम हो गई है नौकरशाही पार्टी के कार्यकर्ताओं का अनादर कर रही है नौकरशाह पार्टी के नेताओं का अनादर कर रही है पार्टी के नेताओं और कार्यकर्ताओं का सम्मान नहीं कर रही है नौकरशाही में व्यापक स्तर पर भ्रष्टाचार बढ़ गया है तमाम ऐसे सवाल हैं जो इनडायरेक्ट मौजूद मुख्यमंत्री की कार्य शैली पर सवाल खड़े करते हैं यह सवाल कोई और नहीं उठा रहा है बल्कि बीजेपी के जिम्मेदार नेता उठा रहे हैं चाहे डिप्टी मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य हों या उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री मोती सिंह हो या उत्तर प्रदेश भाजपा के विधायक रमेश मिश्रा हों या इस तरीके के तमाम और नेता हैं जो संगठन के अंदर और संगठन के बाहर चाहे बीजेपी के गोरखपुर के एमएलसी देवेंद्र प्रताप सिंह इन सभी लोगों की तरफ से उत्तर प्रदेश की सरकार और नौकरशाही को कटघरे में खड़ा किया जा रहा है।</p>
<p>मैं एक-एक करके आप लोगों के सामने उन हालातो का विश्लेषण करने जा रहा हूं किस तरीके से धीरे-धीरे योगी सरकार और योगी आदित्यनाथ के खिलाफ माहौल बनाने की कोशिश हो रही है मैं एक बार फिर आप लोगों को इतिहास की तरफ ले जाने की कोशिश करता हूं कल्याण सिंह उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री थे कल्याण सिंह के मुख्यमंत्री काल के दौरान उनके कैबिनेट मंत्री में शामिल कलराज मिश्रा लाल जी टंडन सरीखे नेता उनके खिलाफ दबी जुबान से काम करते थे उस समय पार्टी संगठन भी कल्याण सिंह के खिलाफ था इन लोगों की कोशिश थी कि कल्याण सिंह को मुख्यमंत्री के पद से हटवा कर मुख्यमंत्री की कुर्सी हथियाई जाए इसलिए हर रोज कल्याण सिंह की सरकार पर नौकरशाही के बेलगाम होने का नौकरशाही का भ्रष्टाचार में लिप्त होने का गंभीर आरोप लगने लगे और आरोप लगाने में बाकी मीडिया तो पीछे रही जो आरएसएस से जुड़े हुए मुखपत्र थे पब्लिकेशन थे ऑर्गेनाइजर थे उन लोगों ने बहुत बढ चढ़कर हिस्सा लिया यहां तक कि उस समय के प्रमुख सचिव मुख्यमंत्री नृपेंद्र मिश्रा उस समय के डीजी पुलिस प्रकाश सिंह के बीच में शीत युद्ध चल रहा था बताया जा रहा था कि प्रकाश सिंह और नृपेंद्र मिश्रा एक दूसरे को सीधे तौर पर देखना नहीं चाहते हैं एक दूसरे से बेहतर समन्वय और तालमेल नहीं है नृपेंद्र मिश्रा के खिलाफ उस समय आरएसएस के मुखपत्रों में रोज खबरें छपती थी और कहा जाता था कि नृपेंद्र मिश्रा मुख्यमंत्री को अपने हिसाब से समझाते हैं और मुख्यमंत्री उन्हीं की सलाह से काम करते हैं नतीजन पार्टी के कार्यकर्ताओं की अनदेखी हो रही है इसी बीच लाल कृष्ण आडवाणी की रथ यात्रा को लेकर एक रिपोर्ट तैयार हुई थी कि उत्तर प्रदेश के गृह विभाग की तरफ से उत्तर प्रदेश के अभिसूचना विभाग की तरफ से और उसे रिपोर्ट को डीजी पुलिस प्रकाश सिंह की तरफ से मुख्यमंत्री को कॉन्फिडेंसिली भेजा गया था उस रिपोर्ट में तमाम ऐसे बिंदुओं की ओर इशारा किया गया था जिसको लेकर बाद में तूफान खड़ा हो गया उस रिपोर्ट में कथित तौर पर कहा गया था कि अगर आडवाणी जी की यात्रा उत्तर प्रदेश उत्तर प्रदेश की सीमा में आएगी तो उत्तर प्रदेश के कुछ जनपदों में सांप्रदायिक तनाव बढ़ने की संभावना है यह रिपोर्ट पूरी तरीके से गोपनीय और अति गोपनीय थी उसे रिपोर्ट को डीजीपी कार्यालय और डीजी इंटेलिजेंस की तरफ से मुख्यमंत्री को भेजा गया था लेकिन वह रिपोर्ट किन्हीं कारणों से कुछ चुनिंदा अखबारों में छपवा दी गई रिपोर्ट के छपने के बाद बवाल मच गया पार्टी का शीर्श नेतृत्व और संघ परिवार इस बात को लेकर काफी नाराजगी जताई और कहा गया कि यह रिपोर्ट अपने ही सरकार में कैसे बनाई गई और कैसे लीक हुई परिणाम यह हुआ उसकी जांच के लिए तत्कालीन डीजी पुलिस प्रकाश सिंह ने ऑफिसियल सीक्रेट एक्ट के तहत लखनऊ के हजरतगंज थाने में एक मुकदमा कायम करा दिया अज्ञात लोगों के खिलाफ अब उस मुकदमा के कायम होने के बाद जो शीत युद्ध तत्कालीन प्रमुख सचिव नृपेंद्र मिश्रा और डीजी पुलिस प्रकाश कुमार के बीच चल रहा था वह और तेज हो गया और इन दो शीर्ष अधिकारियों के आपसी खींचतान को कम करने के लिए मुख्यमंत्री ने डीजी पुलिस और उनकी टीम को बदल दिया प्रकाश सिंह को डीजी होमगार्ड बनाकर भेज दिया गया प्रकाश सिंह ने विरोध के तौर पर डीजी होमगार्ड का पद नहीं संभाला और वह छुट्टी चले गए प्रकाश सिंह उस समय के संघ प्रमुख राजू भैया के करीबी माने जाते थे और राजू भैया का उनको संरक्षण हासिल था प्रकाश सिंह के लिए रज्जू भैया ने सिफारिश किया और कुछ दिनों के बाद प्रकाश सिंह को फिर से डीजे पुलिस बना दिया गया और प्रकाश सिंह ने उस समय के अपने चाहते एसपी शैलजा कांत मिश्रा को फिर से एसएसपी लखनऊ बनवाया वही शैलजा कांत मिश्रा जो इस समय मथुरा तीर्थ विकास क्षेत्र के बड़े पद पर कार्यरत हैं योगी आदित्यनाथ के मुख्यमंत्री बनने के दिन से और फिर नृपेंद्र मिश्रा को प्रमुख सचिव मुख्यमंत्री के पद से हटाकर बोर्ड ऑफ रेवेन्यू में इलाहाबाद भेज दिया गया बहुत ही महत्वहीन पद पर नृपेंद्र मिश्रा कुछ दिन उस पद पर रहे बाद में वह अपने तरीके से चीजों को मैनेज किया और फिर कुछ दिन में वापसी हो गई उसके बाद यह विवाद धीरे-धीरे बढ़ता रहा और अंत में कल्याण सिंह को हटाने का फैसला हो गया और कल्याण सिंह को तैयार करके राम प्रकाश गुप्ता को उनका सक्सेसर अपॉइंट कर दिया गया लेकिन जो महत्वाकांक्षी नेता उस समय सरकार में थे चाहे वह कलराज मिश्रा हों लाल जी टंडन हो यह सभी लोग चैन से नहीं बैठे लगातार राम प्रकाश गुप्ता के खिलाफ भी मुहिम चलाते रहे और अंत में फिर एक बार उत्तर प्रदेश में नेतृत्व परिवर्तन हुआ राम प्रकाश गुप्ता की जगह राजनाथ सिंह को मुख्यमंत्री बना दिया गया यह अलग बात है कि उत्तर प्रदेश विधानसभा का चुनाव हुआ तो उत्तर प्रदेश में बीजेपी की शर्मनाक हार हुई और लगभग एक दशक तक उत्तर प्रदेश की सत्ता से बाहर रही आज कमोबेश वही स्थिति है योगी आदित्यनाथ के खिलाफ उत्तर प्रदेश सरकार के कुछ मंत्री से लेकर कुछ विधायक सक्रिय है उनको केंद्रीय नेतृत्व से संरक्षण हासिल है वह केंद्रीय नेतृत्व के संरक्षण में रोज योगी आदित्यनाथ के खिलाफ कुछ ना कुछ कस्तानी कारनामें करते रहते हैं इसकी शुरुआत 4 जून के बाद ज्यादा तेजी से देखने को मिल रही है जब उत्तर प्रदेश में कार्यकर्ता अभिनंदन सम्मेलन के जरिये जिलों जिलों में उत्तर प्रदेश सरकार के खिलाफ और नौकरशाही के खिलाफ आरोप लगाए जा रहे हैं हद तो तब हो गई जब जब उत्तर प्रदेश के पूर्व मंत्री और भारतीय जनता पार्टी के वरिष्ठ नेता प्रतापगढ़ से मोती सिंह ने कार्यकर्ता अभिनंदन सम्मेलन में इस बात पर गंभीर आरोप लगाया कि उत्तर प्रदेश के नौकरशाही में भ्रष्टाचार अपनी चरम सीमा पर पहुंच गया है नौकरशाही बेलगाम है उन्होंने यह भी दावा किया तो उनके 40 साल के राजनीतिक जीवन में इस लेवल का भ्रष्टाचार इसके पहले उन्होंने कभी नहीं देखा था कमोवेश इसी तरह का आरोप जौनपुर से बीजेपी के एमएलए रमेश मिश्रा ने लगाया और उसके बाद जब अभी कार्य समिति की बैठक हुई थी तो उसमें डिप्टी चीफ मिनिस्टर केशव प्रसाद मौर्य ने भी कार्यकर्ताओं की उपेक्षा का आरोप लगाया और उन्होंने कहा संगठन सरकार से बड़ा है संगठन सरकार से ज्यादा महत्वपूर्ण है और सरकार की तुलना में संगठन और कार्यकर्ताओं को ज्यादा तरजीह मिलना चाहिए ज्यादा महत्व मिलना चाहिए।<br />
मैं अब आपको एक बार फिर से इतिहास में ले जाना चाहता हूं जब कल्याण सिंह के खिलाफ मुहिम शुरू हुई थी धीरे-धीरे उसे समय भी ब्राह्मण बिरादरी के 55 विधायकों ने कल्याण सिंह के खिलाफ दुर्गा प्रसाद मिश्रा जो उस समय देवरिया के बीजेपी के विधायक थे उनकी रहनुमाई में एक प्रेशर ग्रुप बनाया और कल्याण सिंह की सरकार पर ब्राह्मण विरोधी होने का आरोप लगाया था और उस समय भी दुर्गा प्रसाद मिश्र और उन विधायकों के खिलाफ अनुशासनहीनता की कार्रवाई करने के बजाय केंद्रीय नेतृत्व ने बीच बचाव का रास्ता अपनाया दोनों तरफ शांत करा कर एक तरफ कल्याण सिंह को और दूसरी तरफ दुर्गा प्रसाद मिश्रा और उनके लगभग 50-55 विधायकों को शांत कराया ठीक उसी तरीके से सिनेरियो एक बार फिर बनता दिखाई दे रहा है इस बार पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा की मौजूदगी में पार्टी के कार्य समिति में कार्यकर्ता के उपेक्षाओं के गंभीर आरोप लगाए गए और जगह-जगह जो कार्यकर्ता अभिनंदन सम्मेलन हो रहे हैं उसमें भी बेलगाम नौकरशाही, नौकरशाही में व्याप्त भ्रष्टाचार उसको लेकर गंभीर आरोप लगाए जा रहे हैं पढ़ने को मिल रहे हैं देखने को मिले हैं तो क्या माना जाए एक बार फिर उत्तर प्रदेश की राजनीति में कल्याण सिंह का दौर वापस आ गया है क्या यह माना जाए एक बार फिर जिस तरीके से कल्याण सिंह के खिलाफ राजनीतिक साजिश करके उनको मजबूर किया गया कुर्सी से इस्तीफा देने के लिए पद से इस्तीफा देने के लिए और अपने पसंदीदा किसी व्यक्ति को मुख्यमंत्री बनने के लिए ठीक उसी तरीके से स्थिति इस तरीके की हालत योगी आदित्यनाथ के साथ पैदा करने की कोशिश हो रही है और अगर ऐसा होता है तो क्या बीजेपी के शीर्ष नेतृत्व नें कल्याण सिंह के वक्त में हुई उसे राजनीतिक चूक से सबक नहीं लिया क्या वहीं घटना फिर से रिपीट होती है और उसी तरीके के फैसले फिर दोहराए जाते हैं तो यह तय नहीं है कि 2027 के चुनाव में योगी आदित्यनाथ के हटाये जाने का खामियाजा पार्टी और नेताओं को भुगतना पड़ सकता है महज नेताओं के आपसी अहंकार आपसी खींचतान का नतीजा क्या लॉन्ग टर्म में बीजेपी, बीजेपी का शीर्श नेतृत्व बीजेपी के और उससे जुड़े हुए महत्वपूर्ण नेता उठाने के लिए और भुगतने के लिए तैयार हैं यह तो पार्टी को तय करना है पार्टी के नेतृत्व को तय करना है।</p>
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		<title>नीट को लेकर गरीब ग्रामीण नौजवानों की दुहाई दे रही है सरकार और विपक्ष, नौजवानों में असंतोष और आक्रोश</title>
		<link>https://www.samvaadindia.com/government-and-opposition-are-appealing-to-the-youth-of-poor-rural-areas-regarding-neet-examinations-dissatisfaction-and-anger-among-the-youth/</link>
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		<dc:creator><![CDATA[संवाद इंडिया]]></dc:creator>
		<pubDate>Fri, 21 Jun 2024 03:24:10 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[उत्तर प्रदेश]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>(वसिंद्र मिश्र) नई दिल्ली 21 जून। नीट की परीक्षाओं में हुई धांधली को लेकर देश के नौजवान आंदोलित</p>
<p>The post <a href="https://www.samvaadindia.com/government-and-opposition-are-appealing-to-the-youth-of-poor-rural-areas-regarding-neet-examinations-dissatisfaction-and-anger-among-the-youth/">नीट को लेकर गरीब ग्रामीण नौजवानों की दुहाई दे रही है सरकार और विपक्ष, नौजवानों में असंतोष और आक्रोश</a> appeared first on <a href="https://www.samvaadindia.com">Samvaad India</a>.</p>
]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p>(वसिंद्र मिश्र) नई दिल्ली 21 जून। नीट की परीक्षाओं में हुई धांधली को लेकर देश के नौजवान आंदोलित हैं, उद्दवलित है, देश की प्रमुख विपक्षी पार्टियां भी आन्दोलित है और कांग्रेस पार्टी के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी से लेकर इंडिया गठबंधन के लगभग सभी नेताओं ने नीट परीक्षा में हुई कथित धाधली के खिलाफ अपनी आवाज़ बुलंद की है। विपक्ष के आरोपों की सफाई देने के लिए देश के शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान मीडिया से मुखातिब हुए हैं। धर्मेंद्र प्रधान के मीडिया की साथ जो चर्चा हुई है उसको भी आप लोगो ने अलग-अलग समाचार माध्यमों के जरिए देखा है, सुना है, अब तक आप लोगों ने पढ़ लिया होगा मैं यहां पर इन दोनों नेताओं की प्रेस कॉन्फ्रेंसेज और उन प्रेस कॉन्फ्सेज के आधार पर कई सवाल उपजे हैं जिनके जवाब जरूरी है।<br />
सबसे पहले हम चर्चा करते हैं देश के शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान की तरफ से प्रेस कॉन्फ्र्स के जरिए नीट परीक्षा में शामिल लाखों युवा को आश्वस्त करने वाली बातों को लेके धर्मेंद्र प्रधान ने प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान आज पहली बार यह स्वीकार किया है कि इस परीक्षा में हुई कथित गड़बड़ी और खामियों के लिए वे खुद को नैतिक रूप से जिम्मेदार मानते हैं। उन्होंने यह भी ऐलान किया है, कि सरकार जल्दी ही एक हाई पावर कमेटी बनाएगी और उस हाई पावर कमेटी में हाई लेवल के टेक्नोक्रैट, ब्यूरोक्रैट, एडमिनिस्ट्रेटर, शिक्षाविद, समाज के अलग-अलग क्षेत्रों के जो एक्सपर्ट होंगे उनको शामिल किया जाएगा, और उस कमेटी की रिकमेन्डेशन आने के बाद एनटीए के स्ट्रक्चर, एनटीए के आमूलचूल परिवर्तनों और सुधार के बारे में विचार किया जाएगा। एक और बात उन्होंने बार &#8211; बार दोहराया है कि मैं विपक्ष के नेताओं से गरीब छात्रों के हित में अपील कर रहा हूँ कि नीट की परीक्षा का राजनीतिकरण न करें, नीट की परीक्षा के राजनीतिकरण से देश के लाखों गरीब छात्रों का भविष्य दांव पर लग जाया, उन्होंने यह भी कहा है कि पिछले सरकार ने संसद में एंटी चीटिंग एक्ट बनाने के लिए बिल पास कर दिया था, और उस बिल में पारित प्राविधान के तहत देश का कानून मंत्रालय जल्दी ही एक विस्तृत नोटिफिकेशन जारी करेगा और उस एंटी चीटिंग बिल के कानून बनने के बाद इस तरह के जो आरोप है, इस तरह की जो गड़बढ़िया हैं, जो देश के अलग-अलग राज्यों में केंद्रीय परीक्षाओं में समय &#8211; समय पर देखने को &#8211; सुनने को मिलती है उस पर अंकुश लगाया जा सकता है अब सवाल यह उठता है कि<br />
क्या महज कानून बना देने से किसी अपराधिक मामले पर लगाम लगाया जा सकता है?<br />
हमारे देश में तमाम इस तरह के कानून मौजूद हैं। चाहे महिलाओं के खिलाफ अत्याचार रोकने का सवाल हो, एस. सी. एस. टी. के खिलाफ रोज होने वाले उत्पीड़न का सवाल हो या इस तरह के तमाम और सामाजिक बुराइयों, और राजनैतिक बुराइयों से लड़ने के लिए या करप्शन को रोकने का सवाल हो इस पर सैकड़ों कानून बने हुए अलग-अलग राज्यों और देश में, तो क्या इन कानूनों ने हमारे समाज के अंदर हमारे देश के अलग-अलग राज्यों में इस तरह की बुराइयों को पूरी तरह से समाप्त कर दिया है, लगाम लगा दिया है। क्या हमने कुछ साल पहले मध्यप्रदेश में हुए व्यापम घोटाले से अब तक कोई सबक नहीं लिया है?</p>
<p><img fetchpriority="high" decoding="async" class="alignnone size-medium wp-image-409" src="https://www.samvaadindia.com/wp-content/uploads/2024/06/images-20-300x193.jpeg" alt="" width="300" height="193" srcset="https://www.samvaadindia.com/wp-content/uploads/2024/06/images-20-300x193.jpeg 300w, https://www.samvaadindia.com/wp-content/uploads/2024/06/images-20-1024x660.jpeg 1024w, https://www.samvaadindia.com/wp-content/uploads/2024/06/images-20-768x495.jpeg 768w, https://www.samvaadindia.com/wp-content/uploads/2024/06/images-20-1536x990.jpeg 1536w, https://www.samvaadindia.com/wp-content/uploads/2024/06/images-20-2048x1321.jpeg 2048w" sizes="(max-width: 300px) 100vw, 300px" /></p>
<p>क्या हमने अब तक अलग-अलग राज्यों में हुए तमाम प्रतियोगी परीक्षाओं के पेपर लीक होने से लेकर उसके कैंसिलेशन तक से कोई सबक नहीं लिया है?<br />
क्या महज कानून बनाना ही इस तरह की बुराइयों पर लगाम लगाना है?<br />
एंटी चीटिंग एक्ट संभवतः जितनी मेरी जानकारी है उसमें देश में सबसे पहले राजनाथ सिंह ने उत्तर प्रदेश में बनाई थी जब राजनाथ सिंह उत्तर प्रदेश की सरकार में शिक्षा मंत्री थे उस समय उत्तर प्रदेश में भारतीय जनता पार्टी की सरकार थी, कल्याण सिंह उस सरकार के मुख्यमंत्री थे। राजनाथ सिंह बहैसियत शिक्षा मंत्री नकल विरोधी कानून बनाए थे और उसके बाद जब चुनाव हुआ तो बीजेपी सत्ता से बेदखल हो गई उसके बाद राज्य में जो सरकार बनी थी उसने उस कानून में बदलाव किया और जब तक वह कानून रहा तब तक उत्तर प्रदेश में हुई परीक्षाओं में तमाम ऐसे लड़के &#8211; लड़किया जेल भेज दिए गए जिनकी कोई बडी गलती नहीं थी जो अभी तक का अनुभव बताता है कि ज्यादातर मामलों में ज्यादातर वक्त में बने कानूनों का सत्ता में बैठे हुए प्रशासनिक अधिकारी अपनी सुविधा के अनुसार उसका दुरुपयोग करते रहे हैं तो क्या जिस तरह से देश में बने अलग-अलग वक्त में अलग-अलग अपराधों की प्रकृति को रोकने के लिए जो कानून बने हैं उन्हीं कड़ी में एक और यह कानून शक्ल लेगा जो कि कुछ पिछले कार्यकाल में नरेंद्र मोदी की सरकार ने संसद के दोनों सदनों से पारित किया था और उसका नोटिफिकेशन होने वाला है जिसकी औपचारिक घोषणा आज देश के शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने की है । एक और जो महत्वपूर्ण सवाल धर्मेंद्र प्रधान से जब पूछा गया तो उनका यह कहना था कि यूजीसी नेट की परीक्षा को कैंसिल करने के पीछे देश के गृह मंत्रालय की तरफ से उनको जानकारी मिली थी। वह जानकारी पुख्ता थी इसलिए उस जानकारी के आधार पर यूजीसी नेट की परीक्षा कैंसल की गई तो नीट की परीक्षा के बारे में भी तो बिहार की सरकार और वहां के जांच एजेंसियों ने कई हफ्ते पहले केंद्र की सरकार और जो परीक्षा आयोजित करती है उस संस्था को और शिक्षा मंत्रालय को जानकारी दे दी थी बावजूद उसके अभी तक नीट के बारे में सरकार ने कोई तार्किक निर्णय क्यों नहीं लिया?<br />
क्या सरकार अभी तक विपक्ष के राजनैतिक प्रेसर का इंतजार कर रही थी?<br />
क्या आज सरकार को लगा नीट के सवाल पर नीट की परीक्षा में हुई कथित धांधली के सवाल पर जिस तरह से आक्रामक मुद्रा में राहुल गांधी से ले के विपक्ष के बाकी नेताओं के तरफ से देखने को मिल रहा है वह आने वाले संसद के सत्र में सरकार के लिए मुश्किल पैदा कर सकता है देश के नौजवानों में सरकार के प्रति नाराजगी और असंतोष बढ़ा सकता है देश की पूरी की पूरी परीक्षा प्रणाली पर एक सवालिया निशान खड़ा कर सकता है और नेट जैसे उच्च स्तरीय संस्था पर उसकी विश्वसनीयता पर सवाल खड़ा कर सकता है इसलिए आज देश के शिक्षा मंत्री को मीडिया के सामने मुखातिब होना पडा है और आज उन्होंने नैतिक तौर पर अपनी जिम्मेदारी ली है, ज़िम्मेदारी स्वीकार की। हम सब जानते हैं कि जिस समय सेंट्रलाइज़ एडमिशन सिस्टम को लेकर केंद्र की सरकार कानून बना रही थी और इस संस्था का गठन कर रही थी तब से लगातार दक्षिण भारत के राज्यों की तरफ से इसका विरोध होता रहा। तमिलनाडु की तरफ से लगातार इस बात का आरोप लगाया जाता रहा कि नेट के जरिए दक्षिण भारत के राज्यों के नौजवानों के साथ, अभ्यर्थियों के साथ नाइंसाफी करने की तैयारी चल रही है। यह कानून जब बना, यह संस्था जब बनी अपने गठन के वक्त से ही लगातार विवादों में रही है लेकिन सरकार ने उन सभी आपत्तियों को, उन सभी आशंकाओं को सिरे से खारिज करते हुए इस संस्था का गठन किया और उस संस्था को प्रतियोगी परीक्षाओं को आयोजित करने की जिम्मेदारी सौंप दी । हम सबने देखा है कि शुरुआती दौर में पहले संस्था के एक अधिकारी की तरफ से, फिर देश के शिक्षा मंत्री की तरफ से नीट में हुई कथित धांधली के आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया गया था और जब एक &#8211; एक कर के लोग गिरफ्तार हो रहे है, अब एक &#8211; एक करके जब उसके तार एक-दूसरे से जुड़ते नजर आ रहा है जब एक &#8211; एक करके इस कथित घोटाले का केंद्र देश के कुछ राज्य बनते दिखाई दे रहे हैं तब केंद्र के शिक्षा मंत्री और उनकी विभाग की तरफ से पूरे मामले के उच्च स्तरीय जांच कराने की मांगों को स्वीकार कर लिया गया है, अब अभी तक जो उच्च स्तरीय कमेटी बनने जा रही है उसका नोटिफिकेशन नहीं जारी हुआ उस उच्चस्तरीय कमेटी में कौन-कौन मेम्बर होगा उनके नामों का भी ऐलान नहीं हुआ।</p>
<p>अब हम आते हैं राहुल गांधी की आज की प्रेस कॉन्फ्रेंस पर, राहुल गांधी ने आज एक बार फिर सीधे तौर पर भारतीय जनता पार्टी, संघ परिवार और उनसे जुडे हुए पदाधिकारियों और अधिकारियों पर हमला बोला है। उन्होंने अपने प्रेस कॉन्फ्रेंस में सीधे तौर पर आरोप लगाया है, कि देश के तमाम संस्थाओं पर एक विचारधारा विशेष के लोगों के नियुक्ति हो रही है और उस विचारधारा विशेष के लोगों के जो क्षमता है जो उनकी विश्वसनीयता है वह इस लायक नहीं है, कि वे इतने महत्वपूर्ण संस्थानों के मुखिया के रूप में इस तरह की परीक्षाओं का बिना किसी विवाद के, बिना किसी आरोप के उसका आयोजन कर सके उसको संपन्न करा सके। राहुल गांधी ने यह भी आरोप लगाया है कि पिछले 10 वर्षों से लगातार देश के लगभग सभी संस्थाओं पर एक विचारधारा विशेष के लोगों को तैनात किया जाता रहा है और इस तैनाती में क्षमता योग्यता और विश्वसनीयता की अनदेखी की जाती रही है जिसका नतीजा है कि ज्यादातर संस्थाए पीछे होती जा रही है। उन संस्थाओं का प्रदर्शन गिरता जा रहा है उनका शासन बहुत ही खराब होता जा रहा है। राहुल गांधी ने सीधे प्रधानमंत्री पर भी आरोप लगाया है और उन्होंने कहा है कि प्रधानमंत्री की कोशिश इस समय देश के नौजवानो की समस्याओं के निराकरण से ज्यादा लोकसभा में स्पीकर कौन होगा इसके चयन को लेके हैं। प्रधानमंत्री की सारी चिंता इस बात की है कि किसी भी तरह से लोकसभा के स्पीकर के पद पर अपने पसंदीदा व्यक्ति की तैनाती कराई जाए उनका यह भी आरोप है कि प्रधानमंत्री से लेकर उनकी पूरी की पूरी सरकार पारदर्शिता और विश्वसनीयता से काम नहीं कर रहे। यही कारण है कि चाहे नेट की परीक्षा हो या नीट की परीक्षा हो या अलग-अलग राज्यों में पिछले कुछ वर्षों में हुई पेपर लीक की घटनाएं हों उन सभी मामलों में सरकार का प्रदर्शन संस्थाओं का प्रदर्शन बेहद निराशाजनक और लचर रहा है, उन्होंने मांग की है कि नीट की कथित घोटाले के जांच के साथ &#8211; साथ इस पूरे मामले में यथा शीघ्र तार्किक कार्रवाई होनी चाहिए जिससे कि देश के लाखों नौजवानों का भविष्य बचाया जा सके। अब दोनों तरफ से देश के नौजवानों के भविष्य की दुहाई दी जा रही है आपने सुना होगा कि देश के शिक्षा मंत्री भी अपने बचाव में देश के उन तमाम गरीब ग्रामीण क्षेत्र के नौजवानों के भविष्य की दुहाई दे रहे और विपक्ष से अपील कर रहे हैं कि वे देश के लाखों गरीब ग्रामीण क्षेत्र के नौजवानों के भविष्य को ध्यान में रखते हुए नीट की परीक्षा पर किसी भी तरह का संदेह पैदा न करें और राहुल गांधी भी देश के उन्ही लाखों गरीब वंचित नौजवानों की बात कर रहे हैं और कह रहे हैं इस सरकार की तरफ से, सरकार द्वारा अपॉइंटेड एजेंसीज की तरफ से, सरकार द्वारा गठित संस्थाओं की तरफ से और सरकार द्वारा इन संस्थाओं में अप्वाइंटेड अधिकारियों की तरफ से जो काम हो रहा है उनके चलते देश के लाखों &#8211; लाखों नौजवान अपने भविष्य को डूबता देख रहा है और यह बहुत गंभीर विषय है, देश के भविष्य का सवाल है क्योंकि अगर देश के नौजवान का भविष्य सुरक्षित नहीं होगा तो देश का भी भविष्य सुरक्षित नहीं होगा। अब इससे एक बात बिल्कुल तय है कि संसद के आने वाले सत्र में लोकसभा के स्पीकर का चयन तो प्राथमिकता पर है टॉप एजेंडा है लेकिन उसके साथ ही संपूर्ण विपक्ष की कोशिश है कि नीट और नेट जैसे परीक्षाओं में कोई कथित धाधली को लेकर सरकार के घेरा बंदी किया जाए सरकार को कठघरे में खड़ा किया जाए और देश के लाखों नौजवानों को न्याय दिलाया जाए और ये जो कथित घोटाला हुआ है इसकी जांच करके इस घोटाले में शामिल व्यक्तियों और विरोह को कठोर से कठोर कार्रवाई कराई जाए। उनके विरुद्ध कठोर से कठोर दंड दिया जाए। अभी सरकार को तय करना है कि सरकार विपक्ष के इस आक्रमक रुख को देखते हुए सरकार लाखों नौजवानों के असंतोष और आक्रोश को देखते हुए कितना जल्दी सुधारात्मक उपाय करती है या अभी इस मामले को कुछ दिन और टालने की पक्षधर है लेकिन एक बात तय है कि पिछले कुछ दिनों से लगातार सरकार पर दबाव बढता जा रहा है और यह भी तय है कि नौजवानों की नाराजगी सरकार के प्रति लगातार और उग्र होती जा रही सबसे दिलचस्प बात यह है कि नीट की परीक्षा में हुए कथित घोटाले को लेकर अन्य छात्र संगठनों के साथ &#8211; साथ भारतीय जनता पार्टी से जुड़े अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद की तरफ से भी विरोध किया जा रहा है और परीक्षा में हुई कथित धांधली के खिलाफ आवाज़ उठाई जा रही है। वैसे एक बात बिल्कुल तय है कि नीट की परीक्षा में हुई कथित धांधली के मामले में पार्टी से हट कर नौजवानों का गुस्सा लगातार बढ़ रहा है। बेहतर होगा कि सरकार नौजवानों के इस बढ़ते गुस्से का आकलन करके इस पर जल्दी से जल्दी कोई फैसला ले और नौजवानों के वक्त और उनके भविष्य के साथ न्याय करें।</p>
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		<title>यूपी के मुखिया योगी आदित्यनाथ ने स्वयं संभाली राजनाथ के रथ की कमान,लखनऊ बोला साथ-साथ फिर जीतेंगे राजनाथ</title>
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		<dc:creator><![CDATA[संवाद इंडिया]]></dc:creator>
		<pubDate>Mon, 29 Apr 2024 10:38:40 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[उत्तर प्रदेश]]></category>
		<category><![CDATA[Bjp]]></category>
		<category><![CDATA[Rajnath]]></category>
		<category><![CDATA[Rajnath singh]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>लखनऊ, 29 अप्रैल। राजधानी लखनऊ की सड़कों पर सोमवार को भारतीय जनता पार्टी का विकास रथ&#8217; निकला। इस</p>
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										<content:encoded><![CDATA[<p style="text-align: left;">लखनऊ, 29 अप्रैल। राजधानी लखनऊ की सड़कों पर सोमवार को भारतीय जनता पार्टी का विकास रथ&#8217; निकला। इस पर सवार रक्षा मंत्री, लखनऊ के सांसद राजनाथ सिंह हाथ जोड़ आमजन का अभिवादन करते रहे तो दूसरी तरफ उत्तर प्रदेश को सर्वोत्तम प्रदेश बनाने वाले मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ हाथ में &#8216;कमल का फूल&#8217; और चेहरे पर मुस्कान लिए आमजन से जुड़े रहे। भारतीय जनता पार्टी कार्यालय से प्रारंभ हुआ रोड शो कलेक्ट्रेट तक पहुंचा। कार्यकर्ताओं के हौसलों के आगे चिलचिलाती धूप भी बौनी दिखी। रास्ते में कई स्थानों पर कार्यकर्ताओं समेत समाज के विभिन्न वर्गों ने योगी-राजनाथ पर पुष्पवर्षा भी की। पूरा रास्ते भाजपा के झंडे संग भगवामय रहा।</p>
<p><img decoding="async" class="alignnone size-medium wp-image-349" src="https://www.samvaadindia.com/wp-content/uploads/2024/04/IMG-20240429-WA0019-278x300.jpg" alt="" width="278" height="300" srcset="https://www.samvaadindia.com/wp-content/uploads/2024/04/IMG-20240429-WA0019-278x300.jpg 278w, https://www.samvaadindia.com/wp-content/uploads/2024/04/IMG-20240429-WA0019-948x1024.jpg 948w, https://www.samvaadindia.com/wp-content/uploads/2024/04/IMG-20240429-WA0019-768x830.jpg 768w, https://www.samvaadindia.com/wp-content/uploads/2024/04/IMG-20240429-WA0019-1422x1536.jpg 1422w, https://www.samvaadindia.com/wp-content/uploads/2024/04/IMG-20240429-WA0019-1896x2048.jpg 1896w, https://www.samvaadindia.com/wp-content/uploads/2024/04/IMG-20240429-WA0019-1024x1106.jpg 1024w" sizes="(max-width: 278px) 100vw, 278px" /></p>
<p>रोड शो के दौरान उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, उत्तरांखड के सीएम पुष्कर सिंह धामी, भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष चौधरी भूपेंद्र सिंह, उप मुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक, केशव प्रसाद मौर्य, केंद्रीय मंत्री महेंद्र नाथ पांडेय, कौशल किशोर, महापौर सुषमा खर्कवाल, देवरिया के सांसद डॉ. रमापति राम त्रिपाठी, राज्यसभा सांसद संजय सेठ, विधायक राजेश्वर सिंह, नीरज बोरा, पंकज सिंह आदि जनप्रतिनिधि मौजूद रहे।</p>
<p><strong>यूपी के मुखिया योगी आदित्यनाथ ने स्वयं संभाली कमान</strong><br />
उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने बीच-बीच में स्वयं कमान संभाल लेते हुए व्यवस्था संभालने का आह्वान जनसमुद्र से करते रहे। योगी ने लखनऊवासियों का आभार जताया तो &#8216;भारत मां की जयकार, वंदे मातरम, फिर एक बार-मोदी सरकार&#8217; आदि नारे लगवाते रहे। योगी आदित्यनाथ रास्ते की व्यवस्था को भी माइक से संभालते रहे। अव्यवस्था न हो, इसके लिए बीच-बीच में भाजपा कार्यकर्ताओं व व्यवस्था से जुड़े लोगों को रथ से ही निर्देश भी देते रहे। विकास रथ पर राजनाथ सिंह हाथ जोड़ आमजन का अभिवादन करते रहे तो योगी आदित्यनाथ कमल का फूल चुनाव चिह्न लेकर अबकी बार-400 पार का संवाद भी करते रहे।</p>
<p><img decoding="async" class="alignnone size-medium wp-image-352" src="https://www.samvaadindia.com/wp-content/uploads/2024/04/IMG-20240429-WA0014-300x196.jpg" alt="" width="300" height="196" srcset="https://www.samvaadindia.com/wp-content/uploads/2024/04/IMG-20240429-WA0014-300x196.jpg 300w, https://www.samvaadindia.com/wp-content/uploads/2024/04/IMG-20240429-WA0014-1024x668.jpg 1024w, https://www.samvaadindia.com/wp-content/uploads/2024/04/IMG-20240429-WA0014-768x501.jpg 768w, https://www.samvaadindia.com/wp-content/uploads/2024/04/IMG-20240429-WA0014-1536x1002.jpg 1536w, https://www.samvaadindia.com/wp-content/uploads/2024/04/IMG-20240429-WA0014-2048x1336.jpg 2048w" sizes="(max-width: 300px) 100vw, 300px" /></p>
<p><strong>देशभक्ति गीतों संग जुड़ा लखनऊ</strong><br />
रोड शो के दौरान देशभक्ति गीत भी लोगों में जोश भरता रहा। जो राम को लाए हैं हम उनको लाएंगे. ऐ वतन-ऐ वतन आदि गीतों पर ढोल-नगाड़े संग लोग झूमते रहे। वहीं बीच में आई एंबुलेंस को भी रास्ता देकर भाजपा कार्यकर्ताओं ने अपनी संजीदगी को दर्शाया। रोड शो के दौरान भाजपा कार्यकर्ताओं का अनुशासन व जोश भी दिखा।</p>
<p><strong>अल्पसंख्यक समाज समेत समाज के विभिन्न वर्गों ने भी किया स्वागत</strong><br />
रास्ते में अल्पसंख्यक समाज ने रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह व सीएम योगी आदित्यनाथ का स्वागत किया। मंच पर भाजपा अल्पसंख्यक मोर्चा के पदाधिकारियों संग समाज की महिला-पुरुषों ने भी विकास रथ पर पुष्पवर्षा की। साथ ही व्यापार मंडल, अधिवक्ता समाज, बैंड बाजा एसोसिएशन, रेलवे से जुड़े संगठनों के पदाधिकारी, अग्रवाल समाज, विभिन्न वर्गों और भाजपा के सभी आनुसांगिक संगठनों के लोगों ने विकास रथ और इस पर खड़े नेताओं का जोरदार स्वागत किया।</p>
<p><strong>कैमरे में कैद करते रहे पल-पल की तस्वीर</strong><br />
राजनाथ सिंह के नामांकन में उमड़ी भीड़ पल-पल की तस्वीर को कैमरे में कैद करती रही। भाजपा का कार्यकर्ता हो या आम जनमानस, हर कोई अपने मोबाइल में पल-पल की तस्वीर को खींच रहा था। वहीं राजनाथ सिंह और योगी आदित्यनाथ कार्यकर्ताओं की हौसलाअफजाई और आमजन का अभिवादन भी करते नजर आए।</p>
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