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	<title>Rahul gandhi Archives - Samvaad India</title>
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	<title>Rahul gandhi Archives - Samvaad India</title>
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		<title>बिहार की धड़कनों में उठी “वोट बचाओ” की गूंज</title>
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		<dc:creator><![CDATA[संवाद इंडिया]]></dc:creator>
		<pubDate>Sun, 24 Aug 2025 01:18:17 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[अंतरराष्ट्रीय]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>नई दिल्ली, 24 अगस्त। बिहार की राजनीति का तापमान एक बार फिर चरम पर है। राहुल गांधी की</p>
<p>The post <a href="https://www.samvaadindia.com/the-echo-of-save-vote-arose-in-the-heartbeat-of-bihar/">बिहार की धड़कनों में उठी “वोट बचाओ” की गूंज</a> appeared first on <a href="https://www.samvaadindia.com">Samvaad India</a>.</p>
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										<content:encoded><![CDATA[<p>नई दिल्ली, 24 अगस्त। बिहार की राजनीति का तापमान एक बार फिर चरम पर है। राहुल गांधी की अगुवाई में चल रही <em>वोटर अधिकार यात्रा</em> सातवें दिन कटिहार पहुंची और वहां का दृश्य अद्भुत था। जिस तरह हजारों-लाखों लोग इस यात्रा में शामिल हुए, वह साफ संकेत है कि बिहार की जनता लोकतंत्र और अपने मताधिकार की सुरक्षा को लेकर गंभीर है। मंच पर राहुल गांधी ने न सिर्फ भाजपा पर सीधा हमला बोला, बल्कि चुनाव आयोग की निष्पक्षता पर भी बड़े सवाल खड़े किए।</p>
<h2>जनसैलाब: पेड़ों पर चढ़कर राहुल की झलक पाने को बेताब लोग</h2>
<p>कटिहार की सड़कों और मैदानों में जिस तरह का नजारा देखने को मिला, वह किसी राजनीतिक रैली से बढ़कर आंदोलन जैसा प्रतीत हो रहा था। भीड़ इतनी विशाल थी कि राहुल गांधी की झलक पाने के लिए लोग पेड़ों और मकानों की छतों तक पर चढ़ गए। जनसभा स्थल चारों ओर से “वोट चोर, गद्दी छोड़” और “संविधान बचाओ” जैसे नारों से गूंज रहा था। यह भीड़ केवल संख्या नहीं थी, बल्कि संदेश थी कि जनता अब लोकतंत्र पर हो रहे हमलों को बर्दाश्त करने के मूड में नहीं है।</p>
<h2>राहुल गांधी का तीखा हमला: &#8220;भाजपा दलितों-पिछड़ों का हक मार रही&#8221;</h2>
<p>राहुल गांधी ने अपने संबोधन में कहा –<br />
&#8220;भाजपा चुनाव आयोग के साथ मिलकर देशभर में वोट चोरी कर रही है। इसका मकसद सिर्फ एक है – दलितों, पिछड़ों और गरीबों से उनका संवैधानिक हक छीनना।&#8221;</p>
<p>उन्होंने आरोप लगाया कि महाराष्ट्र और हरियाणा की तरह ही बिहार में भी एसआईआर (Special Identification Register) के बहाने लाखों लोगों के नाम वोटर लिस्ट से काट दिए गए।</p>
<p><img fetchpriority="high" decoding="async" class="aligncenter wp-image-1045 size-full" src="https://www.samvaadindia.com/wp-content/uploads/2025/08/images-54.jpeg" alt="" width="739" height="415" srcset="https://www.samvaadindia.com/wp-content/uploads/2025/08/images-54.jpeg 739w, https://www.samvaadindia.com/wp-content/uploads/2025/08/images-54-300x168.jpeg 300w" sizes="(max-width: 739px) 100vw, 739px" /></p>
<h2>संविधान बनाम संघ की विचारधारा</h2>
<p>अपने भाषण के दौरान राहुल गांधी ने संविधान की प्रति भी लहराई। उन्होंने कहा कि संविधान भारत की हजारों साल पुरानी सोच का प्रतीक है, जो हर नागरिक को समान मान्यता देता है। इसके उलट भाजपा-आरएसएस की विचारधारा समाज को ऊंच-नीच में बांटकर दलितों-पिछड़ों को नीचे धकेलने की है। उन्होंने तीखे शब्दों में कहा –<br />
&#8220;महात्मा गांधी ने संविधान की बुनियाद रखने वाले मूल्यों के लिए अपना जीवन दे दिया। गोडसे ने गांधी की हत्या की क्योंकि वह संविधान से नफरत करता था। आज वही सोच भाजपा और आरएसएस चला रहे हैं।&#8221;</p>
<h2>बेरोजगारी का मुद्दा: बिहार को बताया केंद्र</h2>
<p>राहुल गांधी ने जनसभा में बेरोजगारी का मुद्दा पूरी ताकत से उठाया। उन्होंने कहा कि नोटबंदी और गलत जीएसटी जैसे फैसलों ने अर्थव्यवस्था को बर्बाद कर दिया। नतीजा यह हुआ कि रोजगार के अवसर घटते चले गए।<br />
&#8220;आज बिहार बेरोजगारी का केंद्र है। सरकारी नौकरियां बंद हैं, सेना में भर्ती बंद है, व्यापारी संकट में हैं और किसानों को सहारा नहीं मिल रहा। दूसरी ओर अरबपतियों के लाखों-करोड़ के कर्ज माफ किए जा रहे हैं।&#8221;</p>
<h2>मखाना किसानों से संवाद: ज़मीन से जुड़ाव का संदेश</h2>
<p>कटिहार पहुंचने से पहले राहुल गांधी ने खेतों में जाकर मखाना किसानों से मुलाकात की। किसानों ने उन्हें बताया कि मंडी व्यवस्था और न्यूनतम समर्थन मूल्य की कमी से वे भारी संकट में हैं। राहुल गांधी ने किसानों को आश्वासन दिया कि कांग्रेस और इंडिया गठबंधन सत्ता में आने पर किसानों को आर्थिक सुरक्षा देंगे। यह मुलाकात यात्रा को केवल राजनीतिक न रखकर ज़मीनी स्तर पर जोड़ने का संदेश देती है।</p>
<h2>मीडिया पर हमला: &#8220;यह अरबपतियों की मीडिया है&#8221;</h2>
<p>राहुल गांधी ने मीडिया को भी कटघरे में खड़ा किया। उन्होंने कहा –<br />
जनता ‘वोट चोर, गद्दी छोड़’ का नारा लगा रही है, लेकिन मीडिया इसे दिखा नहीं रही, क्योंकि यह अरबपतियों की मीडिया है।&#8221;<br />
उनका इशारा साफ था – बड़े कॉर्पोरेट घरानों के प्रभाव में काम कर रहे मीडिया संस्थान जनता की असली आवाज को दबा रहे हैं।</p>
<h2>INDIA गठबंधन की ताकत का प्रदर्शन</h2>
<p>कटिहार की रैली में राहुल गांधी अकेले नहीं थे। उनके साथ राजद नेता तेजस्वी यादव, कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष राजेश राम, विधायक दल के नेता शकील अहमद, सीपीआई (एमएल) के दीपांकर भट्टाचार्य, वीआईपी पार्टी के मुकेश सहनी और कर्नाटक के उपमुख्यमंत्री डीके शिवकुमार मौजूद थे। यह मंच INDIA गठबंधन की एकजुटता का संदेश दे रहा था और जनता के बीच यह संदेश गया कि भाजपा के खिलाफ विपक्ष मिलकर लड़ रहा है।</p>
<h2>वोटर अधिकार यात्रा: क्या है मकसद?</h2>
<p>कांग्रेस का दावा है कि इस यात्रा का मुख्य उद्देश्य जनता को यह बताना है कि वोट उनका संवैधानिक अधिकार है और इसे छीने जाने की साजिश हो रही है। बिहार जैसे राज्यों में लाखों लोगों के नाम मतदाता सूची से हटाए जाने की शिकायतें आ रही हैं। राहुल गांधी का कहना है कि एसआईआर के नाम पर यह वोट चोरी का नया तरीका है।</p>
<h2>भीड़ का जोश: आंदोलन में बदलती यात्रा</h2>
<p>कटिहार में जिस तरह लोग उमड़े, वह केवल राजनीतिक सभा नहीं थी। भीड़ का उत्साह किसी आंदोलन की तरह था। राहुल गांधी की हर बात पर जोरदार तालियां और नारे गूंज रहे थे। यह दृश्य बताता है कि वोटर अधिकार यात्रा केवल कांग्रेस का कार्यक्रम नहीं रह गया, बल्कि जनता की बेचैनी और गुस्से का प्रतीक बन गया है।</p>
<h2>भाजपा पर सीधा वार: &#8220;देश का धन कुछ हाथों में&#8221;</h2>
<p>राहुल गांधी ने कहा कि भाजपा सरकार की नीतियों से देश का सारा धन अंबानी-अडानी जैसे कुछ अरबपतियों के हाथों में केंद्रित हो गया है। जबकि आम आदमी, किसान और छोटे व्यापारी संकट में हैं। यह आरोप उन्होंने बार-बार दोहराया ताकि संदेश सीधे जनता तक पहुंचे।</p>
<h2>जनता का नारा: &#8220;वोट बचाओ, संविधान बचाओ&#8221;</h2>
<p>सभा में शामिल लोगों के हाथों में तख्तियां और झंडे थे। हर ओर सिर्फ एक ही आवाज गूंज रही थी –<br />
&#8220;वोट बचाओ, संविधान बचाओ&#8221;<br />
यह नारा यात्रा का केंद्रीय संदेश बन चुका है और तेजी से गांव-गांव तक पहुंच रहा है।</p>
<h2>विपक्ष की रणनीति: बिहार से शुरू, देशभर तक विस्तार</h2>
<p>विशेषज्ञों का मानना है कि कांग्रेस और INDIA गठबंधन ने बिहार को इसलिए चुना क्योंकि यह राज्य सामाजिक न्याय और आंदोलन की राजनीति का केंद्र रहा है। यहां से उठी आवाज देशभर में असर डाल सकती है। यात्रा का मकसद केवल वोट चोरी का मुद्दा उठाना ही नहीं, बल्कि बेरोजगारी, महंगाई और किसान संकट को भी राजनीतिक एजेंडे पर लाना है।</p>
<h2>भाजपा की प्रतिक्रिया: आरोपों को बताया बेतुका</h2>
<p>भाजपा ने राहुल गांधी के आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि कांग्रेस निराधार बातें कर रही है। भाजपा नेताओं का कहना है कि कांग्रेस जनता का विश्वास खो चुकी है, इसलिए अब चुनाव आयोग पर आरोप लगाकर भ्रम फैलाने की कोशिश कर रही है। हालांकि, भीड़ का रुख और जनता का उत्साह यह दर्शाता है कि राहुल गांधी का संदेश जमीन पर असर डाल रहा है।</p>
<h2>क्या वोटर अधिकार यात्रा बनेगी 2025 की राजनीति का मोड़?</h2>
<p>कटिहार की ऐतिहासिक सभा ने यह साफ कर दिया है कि राहुल गांधी का यह अभियान केवल राजनीतिक यात्रा नहीं, बल्कि लोकतंत्र बचाने का आंदोलन बनने की क्षमता रखता है। भीड़ का जोश, विपक्ष की एकजुटता और भाजपा पर सीधे हमले – यह सब मिलकर यात्रा को राष्ट्रीय विमर्श का केंद्र बना रहे हैं। आने वाले महीनों में यह तय करेगा कि 2025 और 2026 के चुनावी परिदृश्य में जनता किसके साथ खड़ी होती है।</p>
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		<item>
		<title>राहुल गांधी ने मध्य प्रदेश से किया &#8216;संगठन सृजन अभियान&#8217; का शुभारंभ, केंद्र पर बोले तीखे हमले</title>
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		<dc:creator><![CDATA[संवाद इंडिया]]></dc:creator>
		<pubDate>Wed, 04 Jun 2025 03:42:42 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[अंतरराष्ट्रीय]]></category>
		<category><![CDATA[ब्रेकिंग]]></category>
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		<category><![CDATA[made sharp attacks on the Center]]></category>
		<category><![CDATA[Rahul gandhi]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>भोपाल, 03 जून । कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने मंगलवार</p>
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										<content:encoded><![CDATA[<p><strong>भोपाल, 03 जून</strong> । कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने मंगलवार को मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल से &#8216;संगठन सृजन अभियान&#8217; की शुरुआत की। इस अभियान का उद्देश्य कांग्रेस पार्टी के संगठन को जमीनी स्तर पर सशक्त और पुनर्गठित करना है। रविंद्र भवन में आयोजित एक भव्य कार्यकर्ता सम्मेलन में उन्होंने न केवल पार्टी कार्यकर्ताओं को संबोधित किया बल्कि केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार और आरएसएस पर तीखे राजनीतिक प्रहार भी किए। राहुल गांधी ने सामाजिक न्याय, आर्थिक असमानता और संगठनात्मक ढांचे को केंद्र में रखकर अपना संबोधन दिया, जो कांग्रेस की आगामी रणनीति की झलक भी देता है।</p>
<p>राहुल गांधी ने कार्यक्रम के दौरान स्पष्ट किया कि संगठन का पुनर्गठन केवल औपचारिकता नहीं होगा, बल्कि यह पार्टी को सत्ता से जोड़ने वाली वास्तविक कड़ी बनेगा। उन्होंने कहा कि कांग्रेस जिला अध्यक्षों को अब केवल दिखावटी पद नहीं मिलेगा, बल्कि उन्हें ताकत, जिम्मेदारी और निर्णय लेने का अधिकार भी सौंपा जाएगा। “जो जिला अध्यक्ष होंगे, वही पार्टी को चलाएंगे,” उन्होंने कहा। यह घोषणा कांग्रेस पार्टी में लंबे समय से मांग रहे जमीनी नेतृत्व को महत्व देने के संकेत के रूप में देखी जा रही है। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि भविष्य में प्रत्याशियों के चयन में जिला अध्यक्षों की राय को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जाएगी।</p>
<p>अपने राजनीतिक हमलों के दौरान राहुल गांधी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर सीधा निशाना साधा। उन्होंने कहा कि जब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का एक फोन आया, तो प्रधानमंत्री मोदी ने पाकिस्तान के साथ संघर्ष विराम की बात तुरंत मान ली। राहुल ने इस घटना को एक उदाहरण के तौर पर पेश किया कि कैसे भाजपा और आरएसएस का नेतृत्व विदेशी दबाव में आकर निर्णय लेता है। उन्होंने कहा, “भाजपा और आरएसएस पर ज़रा सा दबाव पड़ता है, तो ये तुरंत सरेंडर कर देते हैं। अमेरिका के इशारे पर मोदी जी ने ‘जी हुजूर’ कह दिया और पीछे हट गए।”</p>
<p>इतिहास का हवाला देते हुए राहुल गांधी ने इंदिरा गांधी की 1971 की रणनीति की सराहना की। उन्होंने कहा कि अमेरिका की धमकियों के बावजूद इंदिरा गांधी ने पाकिस्तान के दो टुकड़े कर दिए और बांग्लादेश का निर्माण संभव किया। उन्होंने कहा, “इंदिरा गांधी ने किसी से डरकर सरेंडर नहीं किया, बल्कि भारत के हित में निर्णायक कदम उठाए। कांग्रेस की परंपरा रही है कि वह झुकती नहीं, बल्कि लड़ती है। चाहे वो महात्मा गांधी हों, नेहरू हों या सरदार पटेल, किसी ने भी बाहरी ताकतों के आगे घुटने नहीं टेके।”</p>
<p>सामाजिक न्याय के मुद्दे पर विस्तार से बोलते हुए राहुल गांधी ने लोकसभा में अपने उस संकल्प को दोहराया, जिसमें उन्होंने कहा था कि इस कार्यकाल में जातिगत जनगणना कराई जाएगी। उन्होंने कहा कि जातिगत जनगणना केवल आंकड़े भर नहीं होंगे, बल्कि यह सामाजिक और आर्थिक अन्याय की परतें खोलने का माध्यम बनेगा। राहुल ने आरोप लगाया कि केंद्र सरकार और आरएसएस इस मुद्दे से कतराते हैं क्योंकि इससे यह उजागर होगा कि देश की सत्ता और संसाधनों पर कुछ ही समुदायों और परिवारों का वर्चस्व है।</p>
<p>राहुल गांधी ने बिहार और तेलंगाना के जातिगत सर्वेक्षण मॉडल की तुलना करते हुए बताया कि कैसे एक राज्य ने बिना संवाद के केवल अधिकारियों के बल पर सर्वेक्षण किया जबकि दूसरे राज्य ने दलित, आदिवासी और पिछड़े वर्ग के संगठनों को पूरी प्रक्रिया में शामिल किया। “तेलंगाना मॉडल ने दिखाया कि अगर सभी पक्षों की भागीदारी हो तो परिणाम विश्वसनीय और समाज के लिए उपयोगी हो सकते हैं,” उन्होंने कहा। उन्होंने दावा किया कि तेलंगाना में हुए जातिगत सर्वेक्षण से स्पष्ट हुआ कि कॉर्पोरेट, शिक्षा और प्रशासनिक क्षेत्रों में दलित, आदिवासी और पिछड़े वर्ग की भागीदारी लगभग न के बराबर है।</p>
<p>कांग्रेस नेता ने कहा कि आज देश की संपत्ति कुछ मुट्ठीभर उद्योगपतियों — विशेषकर अडानी और अंबानी — के हाथों में केंद्रित होती जा रही है। उन्होंने दावा किया कि भाजपा और आरएसएस की विचारधारा यही है कि सत्ता और पूंजी एक खास वर्ग तक सीमित हो। “आज देश का पैसा कुछ लोगों के हाथों में दे दिया गया है। हर जगह अडानी और अंबानी का नाम आता है, ऐसा लगता है जैसे इनके अलावा देश में कोई व्यापारी है ही नहीं,” उन्होंने व्यंग्य के लहजे में कहा।</p>
<p>राहुल गांधी ने चीन के साथ व्यापारिक संबंधों पर भी सवाल उठाए और आरोप लगाया कि बड़े कारोबारी भारत में चीनी माल बेचते हैं, जिससे फायदा तो अडानी-अंबानी को होता है, लेकिन रोज़गार चीन के युवाओं को मिलता है। उन्होंने कहा कि “भारत में बेरोजगारी बढ़ रही है, युवा हताश हैं और हम सुपर पावर बनने की बात कर रहे हैं? यह तभी संभव है जब समाज के सभी वर्गों को बराबरी का अवसर मिले।”</p>
<p>कार्यक्रम के दौरान राहुल गांधी ने पार्टी कार्यकर्ताओं को स्पष्ट संदेश दिया कि आने वाले वर्षों में कांग्रेस का कायाकल्प जमीनी स्तर से किया जाएगा। उन्होंने यह भी कहा कि पार्टी नेताओं को पद नहीं, बल्कि जिम्मेदारी मिलेगी। उन्होंने कार्यकर्ताओं से कहा कि वे न सिर्फ संगठन को मजबूत बनाएं बल्कि समाज में व्याप्त असमानता और अन्याय के खिलाफ आवाज भी बुलंद करें। “हम सिर्फ चुनाव जीतने के लिए काम नहीं कर रहे हैं, हम भारत के भविष्य को बेहतर बनाने के लिए लड़ाई लड़ रहे हैं,” उन्होंने भावुक अंदाज में कहा।</p>
<p>राहुल गांधी ने यह भी कहा कि पार्टी अब केवल बड़े शहरों या राजधानी केंद्रित नहीं रहेगी। जिला स्तर के नेताओं और कार्यकर्ताओं को संगठन का असली चेहरा बनाया जाएगा। उन्होंने कहा कि संगठन सृजन अभियान एक नई शुरुआत है, जिसमें कांग्रेस न केवल संगठनात्मक रूप से मजबूत होगी, बल्कि वैचारिक रूप से भी साफ संदेश देगी कि वह सामाजिक न्याय, आर्थिक बराबरी और लोकतांत्रिक सहभागिता की पक्षधर है।</p>
<p>अपने संबोधन के अंत में राहुल गांधी ने सभी कार्यकर्ताओं को एकजुट होकर काम करने का आग्रह किया। उन्होंने कहा कि “आज अगर हम एकजुट रहें, तो कोई ताकत कांग्रेस को नहीं रोक सकती। लेकिन यह तभी होगा जब हम हर जिले, हर गांव, हर मोहल्ले तक पहुंचेंगे।” उन्होंने कहा कि संगठन सृजन अभियान केवल एक राजनीतिक गतिविधि नहीं, बल्कि एक सामाजिक आंदोलन है, जो भारत के पुनर्निर्माण की दिशा में पहला कदम है।</p>
<p>राहुल गांधी की इस सभा को लेकर कांग्रेस के प्रदेश नेतृत्व में भी उत्साह देखा गया। कार्यक्रम में पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ, प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी, वरिष्ठ नेता दिग्विजय सिंह और सैकड़ों कार्यकर्ता उपस्थित रहे। राहुल के संदेशों को आगामी संगठनात्मक पुनर्निर्माण और रणनीतिक अभियानों की आधारशिला माना जा रहा है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह दौरा मध्य प्रदेश में कांग्रेस की वापसी की कोशिशों में एक महत्वपूर्ण मोड़ हो सकता है।</p>
<p>The post <a href="https://www.samvaadindia.com/rahul-gandhi-launched-organization-creation-campaign-from-madhya-pradesh-made-sharp-attacks-on-the-center/">राहुल गांधी ने मध्य प्रदेश से किया &#8216;संगठन सृजन अभियान&#8217; का शुभारंभ, केंद्र पर बोले तीखे हमले</a> appeared first on <a href="https://www.samvaadindia.com">Samvaad India</a>.</p>
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		<title>महंगाई की मार और पेट्रोल-डीज़ल की लूट: सरकार की नीतियों पर सवाल- जयराम रमेश</title>
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		<dc:creator><![CDATA[संवाद इंडिया]]></dc:creator>
		<pubDate>Mon, 14 Apr 2025 01:56:13 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[अंतरराष्ट्रीय]]></category>
		<category><![CDATA[खास खबर]]></category>
		<category><![CDATA[ब्रेकिंग]]></category>
		<category><![CDATA[Congress]]></category>
		<category><![CDATA[Inflation and loot of petrol and diesel: Questions on government policies- Jairam Ramesh]]></category>
		<category><![CDATA[Jayram ramesh]]></category>
		<category><![CDATA[Rahul gandhi]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>नई दिल्ली, 14 अप्रैल। देश की अर्थव्यवस्था एक ओर वैश्विक चुनौतियों से जूझ रही है, तो दूसरी ओर</p>
<p>The post <a href="https://www.samvaadindia.com/inflation-and-loot-of-petrol-and-diesel-questions-on-government-policies-jairam-ramesh/">महंगाई की मार और पेट्रोल-डीज़ल की लूट: सरकार की नीतियों पर सवाल- जयराम रमेश</a> appeared first on <a href="https://www.samvaadindia.com">Samvaad India</a>.</p>
]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p><strong>नई दिल्ली, 14 अप्रैल।</strong> देश की अर्थव्यवस्था एक ओर वैश्विक चुनौतियों से जूझ रही है, तो दूसरी ओर घरेलू नीतियों को लेकर विपक्ष सरकार पर लगातार हमलावर है। कांग्रेस नेता और वरिष्ठ सांसद श्री जयराम रमेश ने एक बार फिर मोदी सरकार पर आर्थिक शोषण का गंभीर आरोप लगाते हुए दावा किया है कि केंद्र की नीतियों ने आम जनता की जेब काटी है और निजी तेल कंपनियों को अप्रत्याशित मुनाफा पहुंचाया है। उन्होंने पेट्रोलियम सेक्टर की नीतियों की निष्पक्ष ऑडिट और जांच की मांग करते हुए इसे ‘खुली लूट’ की संज्ञा दी है।</p>
<p>श्री रमेश ने तथ्यों के आधार पर केंद्र सरकार की पिछले ग्यारह वर्षों की तेल नीति पर सवाल उठाए हैं। उनके अनुसार मई 2014 में पेट्रोल पर एक्साइज ड्यूटी ₹9.20 प्रति लीटर और डीज़ल पर ₹3.46 प्रति लीटर थी, जिसे वर्तमान सरकार ने बढ़ाकर क्रमशः ₹19.90 और ₹15.80 कर दिया। यह बढ़ोतरी पेट्रोल पर 57% और डीज़ल पर 54% है, जो आम नागरिकों पर प्रत्यक्ष आर्थिक बोझ डालती है। इसके बावजूद केंद्र सरकार लगातार यह दावा करती रही है कि वह महंगाई नियंत्रण में है।</p>
<blockquote class="twitter-tweet" data-width="550" data-dnt="true">
<p lang="hi" dir="ltr">भारत की जनता लूटी जा रही है — मोदी सरकार द्वारा एक तरफ़ टैक्स का बोझ बढ़ाकर जहां जनता की जेब काट रही है, वहीं दूसरी तरफ़ प्राइवेट व सरकारी तेल कंपनियां मुनाफ़ा कमा रही हैं!</p>
<p>यह खुला आर्थिक शोषण है!</p>
<p>सच्चाई यह है :</p>
<p>1. मई 2014 में पेट्रोल पर एक्साइज ड्यूटी ₹9.20 और डीज़ल पर… <a href="https://t.co/1JAYmNVUa7">pic.twitter.com/1JAYmNVUa7</a></p>
<p>&mdash; Jairam Ramesh (@Jairam_Ramesh) <a href="https://twitter.com/Jairam_Ramesh/status/1911273550134088138?ref_src=twsrc%5Etfw">April 13, 2025</a></p></blockquote>
<p><script async src="https://platform.twitter.com/widgets.js" charset="utf-8"></script></p>
<p>&nbsp;</p>
<p>आंकड़े यह भी बताते हैं कि सरकार ने पेट्रोलियम सेक्टर से पिछले ग्यारह वर्षों में ₹39.54 लाख करोड़ का राजस्व अर्जित किया है। यह एक विशाल राशि है, जिससे उम्मीद की जाती थी कि जनता को टैक्स में राहत, सब्सिडी या किसी प्रकार की प्रत्यक्ष सहायता मिलेगी, लेकिन ऐसा कुछ नहीं हुआ। इसके बजाय, सरकार ने इस राजस्व का उपयोग बजटीय घाटे को संतुलित करने और कुछ चुनिंदा परियोजनाओं में निवेश करने में किया, जिससे आम आदमी को कोई सीधा लाभ नहीं मिला।</p>
<p>जयराम रमेश ने यह भी उजागर किया कि जब यूपीए सरकार सत्ता में थी, उस वक्त अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमत लगभग $108 प्रति बैरल थी, और तब भी पेट्रोल दिल्ली में ₹71.41 और डीज़ल ₹55.49 प्रति लीटर में बिक रहा था। इसके उलट, आज जबकि कच्चे तेल की कीमत $65.31 प्रति बैरल है — यानी लगभग 40% की कमी — पेट्रोल ₹94.77 और डीज़ल ₹87.67 प्रति लीटर पर बिक रहा है। इससे स्पष्ट होता है कि कीमतों में गिरावट का लाभ जनता तक नहीं पहुंचाया गया।</p>
<p>सरकार द्वारा एक्साइज ड्यूटी बढ़ाए जाने से सिर्फ राजस्व ही नहीं बढ़ा, बल्कि यह नीति निजी और सार्वजनिक तेल कंपनियों के लिए भी फायदेमंद साबित हुई। रिफाइनिंग, मार्केटिंग और डिस्ट्रीब्यूशन के विभिन्न चरणों में इन कंपनियों ने भारी मुनाफा कमाया है। सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनियों की बैलेंस शीट तो मजबूत हुई ही है, निजी कंपनियों ने भी इस दौरान अपना बाजार और मुनाफा दोनों बढ़ाया। सवाल उठता है कि क्या यह लाभ सिर्फ बाज़ार की परिस्थितियों के कारण था या फिर सरकार की नीतियों ने इन्हें लाभ पहुंचाने का विशेष अवसर दिया?</p>
<p>इस गंभीर मुद्दे पर श्री रमेश ने मांग की है कि भारत के नियंत्रक और महालेखा परीक्षक (CAG) को पेट्रोलियम क्षेत्र में पिछले एक दशक के वित्तीय प्रबंधन की व्यापक ऑडिट करनी चाहिए। उनका कहना है कि इस ऑडिट से यह स्पष्ट हो सकेगा कि सरकार की नीतियां जनता के हित में थीं या कुछ गिने-चुने औद्योगिक घरानों को फायदा पहुंचाने के लिए बनाई गई थीं। यह पारदर्शिता और जवाबदेही के सिद्धांतों के अनुरूप होगा।</p>
<p>सिर्फ ऑडिट ही नहीं, बल्कि उन्होंने केंद्रीय सतर्कता आयोग (CVC) और केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) से इस पूरी प्रक्रिया की जांच की भी मांग की है। उन्होंने सवाल उठाया कि कहीं यह जानबूझकर की गई लापरवाही तो नहीं थी या फिर सरकार और तेल कंपनियों के बीच कोई अंदरूनी मिलीभगत थी। यदि ऐसा पाया जाता है तो यह न केवल नीति विफलता है, बल्कि यह जनहित के विरुद्ध आपराधिक लापरवाही भी होगी।</p>
<p>यह मुद्दा केवल आर्थिक नहीं, बल्कि राजनीतिक और सामाजिक भी है। जहां एक ओर सरकार अंतरराष्ट्रीय परिस्थितियों और वैश्विक बाजार को दोष देती है, वहीं विपक्ष लगातार यह कहता आ रहा है कि जब वैश्विक स्तर पर तेल सस्ता हो रहा है, तब भारत में कीमतें क्यों बढ़ रही हैं। इससे मध्यम वर्ग, गरीब और छोटे व्यवसायी वर्ग को सर्वाधिक नुकसान हो रहा है। कृषि, परिवहन और अन्य सेवाएं भी महंगे ईंधन की मार झेल रही हैं, जिससे महंगाई की श्रृंखला और तेज़ हो गई है।</p>
<p>जयराम रमेश के इस बयान ने एक बार फिर सरकार को कठघरे में खड़ा कर दिया है। वे केवल आरोप नहीं लगा रहे, बल्कि ठोस आंकड़ों के साथ जनहित की बात कर रहे हैं। यदि सरकार इस विषय पर चुप रहती है या कोई संतोषजनक उत्तर नहीं देती, तो यह मुद्दा आगामी चुनावों में एक बड़ा राजनीतिक मसला बन सकता है। ऐसे समय में जब देश महंगाई, बेरोजगारी और आर्थिक असमानता की चुनौतियों से जूझ रहा है, हर नीतिगत निर्णय की पारदर्शिता और न्यायिकता का परीक्षण अत्यंत आवश्यक है।</p>
<p>The post <a href="https://www.samvaadindia.com/inflation-and-loot-of-petrol-and-diesel-questions-on-government-policies-jairam-ramesh/">महंगाई की मार और पेट्रोल-डीज़ल की लूट: सरकार की नीतियों पर सवाल- जयराम रमेश</a> appeared first on <a href="https://www.samvaadindia.com">Samvaad India</a>.</p>
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		<title>तेलंगाना में OBC आरक्षण बढ़ाने का कांग्रेस का वादा पूरा, जातिगत जनगणना से बना नया रास्ता- राहुल गांधी</title>
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		<dc:creator><![CDATA[संवाद इंडिया]]></dc:creator>
		<pubDate>Wed, 19 Mar 2025 04:12:00 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[अंतरराष्ट्रीय]]></category>
		<category><![CDATA[तेलंगाना]]></category>
		<category><![CDATA[ब्रेकिंग]]></category>
		<category><![CDATA[caste census has created a new path- Rahul Gandhi]]></category>
		<category><![CDATA[Congress' promise to increase OBC reservation in Telangana has been fulfilled]]></category>
		<category><![CDATA[Rahul gandhi]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>हैदराबाद: कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म &#8216;X&#8217; पर एक बड़ी घोषणा करते हुए बताया कि</p>
<p>The post <a href="https://www.samvaadindia.com/congress-promise-to-increase-obc-reservation-in-telangana-has-been-fulfilled-caste-census-has-created-a-new-path-rahul-gandhi/">तेलंगाना में OBC आरक्षण बढ़ाने का कांग्रेस का वादा पूरा, जातिगत जनगणना से बना नया रास्ता- राहुल गांधी</a> appeared first on <a href="https://www.samvaadindia.com">Samvaad India</a>.</p>
]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p><strong>हैदराबाद:</strong> कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म &#8216;X&#8217; पर एक बड़ी घोषणा करते हुए बताया कि कांग्रेस सरकार ने तेलंगाना में अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) के आरक्षण को बढ़ाने का अपना चुनावी वादा पूरा कर दिया है। तेलंगाना सरकार द्वारा किए गए वैज्ञानिक जातिगत सर्वेक्षण के आधार पर पिछड़े वर्गों की वास्तविक संख्या को स्वीकार करते हुए शिक्षा, रोजगार और राजनीति में उनकी समान भागीदारी सुनिश्चित करने के लिए विधानसभा में 42% आरक्षण का बिल पारित किया गया है।</p>
<p>यह निर्णय भारत में सामाजिक न्याय के क्षेत्र में एक क्रांतिकारी कदम माना जा रहा है, क्योंकि इसने आरक्षण पर लगाई गई 50% की संवैधानिक सीमा को तोड़ते हुए नए रास्ते खोल दिए हैं। इस फैसले को लेकर राजनीतिक हलकों में भी गहरी चर्चा चल रही है। राहुल गांधी ने इसे पूरे देश के लिए एक आदर्श उदाहरण बताया और कहा कि भारत में जाति जनगणना करवाना अब समय की आवश्यकता बन चुकी है।</p>
<h2><strong>तेलंगाना में OBC आरक्षण कैसे बढ़ाया गया?</strong></h2>
<p>तेलंगाना सरकार ने जातिगत सर्वेक्षण के माध्यम से OBC समुदाय की वास्तविक संख्या का पता लगाया। इस सर्वेक्षण के डेटा के आधार पर यह स्पष्ट हुआ कि पिछड़े वर्गों की आबादी पहले अनुमानित आंकड़ों से अधिक है। इसके बाद सरकार ने एक स्वतंत्र विशेषज्ञ समूह का गठन किया, जिसने विभिन्न समुदायों की सामाजिक और आर्थिक स्थिति का गहन विश्लेषण किया। इस अध्ययन के निष्कर्षों के आधार पर सरकार ने विधानसभा में 42% आरक्षण का बिल प्रस्तुत किया, जिसे विधायकों ने बहुमत से पारित कर दिया।</p>
<blockquote class="twitter-tweet" data-width="550" data-dnt="true">
<p lang="hi" dir="ltr">कांग्रेस सरकार ने तेलंगाना में OBC आरक्षण बढ़ाने का वादा पूरा कर दिया है।</p>
<p>राज्य में वैज्ञानिक तरीके से हुई जातिगत गिनती से मिली OBC समुदाय की वास्तविक संख्या स्वीकार की गई और शिक्षा, रोजगार और राजनीति में उनकी समान भागीदारी सुनिश्चित करने के लिए विधानसभा में 42% आरक्षण का बिल… <a href="https://t.co/MdXwryq34O">https://t.co/MdXwryq34O</a></p>
<p>&mdash; Rahul Gandhi (@RahulGandhi) <a href="https://twitter.com/RahulGandhi/status/1901863301107085763?ref_src=twsrc%5Etfw">March 18, 2025</a></p></blockquote>
<p><script async src="https://platform.twitter.com/widgets.js" charset="utf-8"></script></p>
<p>इस फैसले के बाद तेलंगाना अब उन राज्यों की सूची में शामिल हो गया है, जिन्होंने आरक्षण की 50% की सीमा को पार किया है। इससे पहले तमिलनाडु और कुछ अन्य राज्यों में भी आरक्षण की सीमा 50% से अधिक की जा चुकी है। इस तरह, तेलंगाना का यह कदम पूरे देश में आरक्षण नीति को पुनः परिभाषित करने का एक महत्वपूर्ण उदाहरण बन सकता है।</p>
<h2><strong>जातिगत सर्वेक्षण से सामाजिक और आर्थिक सुधार की नई दिशा</strong></h2>
<p>तेलंगाना सरकार का मानना है कि इस जातिगत जनगणना से हर समुदाय की सटीक सामाजिक और आर्थिक स्थिति का पता लगाया जा सकता है, जिससे नीतियों को अधिक प्रभावी बनाया जा सकेगा। सरकार ने इस दिशा में काम करने के लिए एक स्वतंत्र विशेषज्ञ समूह का गठन किया है, जो जातिगत सर्वेक्षण के डेटा के आधार पर विभिन्न समुदायों के उत्थान के लिए योजनाएं तैयार करेगा।</p>
<p>इस सर्वेक्षण का सबसे महत्वपूर्ण पहलू यह है कि इससे केवल आरक्षण नीति ही नहीं, बल्कि शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार और आर्थिक विकास से जुड़ी योजनाओं को भी अधिक समावेशी और प्रभावी बनाया जा सकेगा। सामाजिक न्याय की दिशा में यह एक बड़ा बदलाव साबित हो सकता है, जो पूरे देश में अन्य राज्यों के लिए एक मिसाल पेश करेगा।</p>
<h2><strong>50% की सीमा का टूटना: सामाजिक न्याय की नई परिभाषा?</strong></h2>
<p>संविधान के अनुच्छेद 15(4) और 16(4) के तहत सरकारों को यह अधिकार प्राप्त है कि वे सामाजिक और शैक्षिक रूप से पिछड़े वर्गों को विशेष लाभ देने के लिए आरक्षण की व्यवस्था कर सकें। लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने इंदिरा साहनी केस (1992) में आरक्षण की सीमा 50% तक निर्धारित कर दी थी।</p>
<p>हालांकि, हाल के वर्षों में कुछ राज्यों ने इस सीमा को पार कर आरक्षण का विस्तार किया है। महाराष्ट्र ने मराठा आरक्षण, राजस्थान ने गुर्जर आरक्षण और तमिलनाडु ने अपने विशेष अधिनियम के तहत 69% आरक्षण लागू किया था। अब तेलंगाना ने OBC आरक्षण को बढ़ाकर यह संकेत दिया है कि आरक्षण नीति को समय के साथ बदलने की आवश्यकता है।</p>
<p>राहुल गांधी ने भी इस संदर्भ में कहा कि सामाजिक न्याय को सुनिश्चित करने के लिए यह कदम जरूरी था। उन्होंने केंद्र सरकार से मांग की कि पूरे देश में जातिगत जनगणना करवाई जाए ताकि पिछड़े वर्गों की वास्तविक स्थिति का सही आंकलन हो सके और उन्हें उनकी जनसंख्या के अनुपात में अधिकार मिल सकें।</p>
<h2><strong>जातिगत जनगणना: राहुल गांधी की मांग और राष्ट्रीय राजनीति पर असर</strong></h2>
<p>राहुल गांधी लंबे समय से जातिगत जनगणना की मांग कर रहे हैं। उनका मानना है कि जब तक देश में पिछड़े और वंचित वर्गों की वास्तविक संख्या का पता नहीं चलेगा, तब तक उन्हें समान अवसर और अधिकार नहीं मिल सकते। उनका यह तर्क है कि X-ray (जातिगत जनगणना) से ही यह स्पष्ट होगा कि कौन सा समुदाय कहां खड़ा है और उसे आगे बढ़ाने के लिए कौन-कौन सी नीतियां लागू करनी चाहिए।</p>
<p>जातिगत जनगणना का मुद्दा 2024 के लोकसभा चुनाव के दौरान भी प्रमुख रूप से उठाया गया था। कांग्रेस ने इसे अपने चुनावी एजेंडे में शामिल किया था, लेकिन भाजपा ने इस पर कोई स्पष्ट रुख नहीं अपनाया। हालांकि, बिहार सरकार ने जातिगत सर्वेक्षण कराकर यह साबित कर दिया कि यह संभव है और इसके आधार पर राज्य की नीतियों में महत्वपूर्ण बदलाव भी किए गए।</p>
<h2><strong>तेलंगाना का फैसला: अन्य राज्यों पर क्या असर पड़ेगा?</strong></h2>
<p>तेलंगाना में OBC आरक्षण बढ़ाने के इस फैसले का असर अन्य राज्यों पर भी पड़ सकता है। कई राज्यों में जातिगत आरक्षण को लेकर नई मांगें उठ सकती हैं। महाराष्ट्र, उत्तर प्रदेश, बिहार, राजस्थान और मध्य प्रदेश जैसे बड़े राज्यों में इस मुद्दे पर राजनीतिक बहस तेज हो सकती है।</p>
<p>विशेषज्ञों का मानना है कि अगर केंद्र सरकार जातिगत जनगणना करवाती है, तो इससे पूरे देश में सामाजिक न्याय की एक नई तस्वीर उभरेगी। इससे सरकारों को यह समझने में आसानी होगी कि किन समुदायों को किन क्षेत्रों में अधिक समर्थन की जरूरत है।</p>
<h2><strong>आरक्षण बनाम मेरिट का विवाद</strong></h2>
<p>हालांकि, आरक्षण बढ़ाने के इस फैसले की आलोचना भी हो रही है। कुछ विशेषज्ञों का कहना है कि आरक्षण की सीमा बढ़ाने से &#8216;मेरिट&#8217; आधारित प्रणाली प्रभावित हो सकती है। उच्च शिक्षा संस्थानों, सरकारी नौकरियों और राजनीतिक प्रतिनिधित्व में आरक्षण बढ़ाने से सामान्य वर्ग के छात्रों और उम्मीदवारों के अवसर सीमित हो सकते हैं।</p>
<p>लेकिन दूसरी ओर, सामाजिक न्याय समर्थकों का कहना है कि जब तक ऐतिहासिक रूप से वंचित वर्गों को बराबरी का अवसर नहीं मिलेगा, तब तक &#8216;मेरिट&#8217; की अवधारणा अधूरी ही रहेगी। उनके अनुसार, समान अवसरों की उपलब्धता ही असली मेरिट का आधार होनी चाहिए।</p>
<h2><strong>क्या भारत में जातिगत जनगणना अब अनिवार्य हो गई है?</strong></h2>
<p>तेलंगाना सरकार का यह कदम देश में एक नई बहस को जन्म दे सकता है। क्या भारत को अब एक समग्र जातिगत जनगणना की ओर बढ़ना चाहिए? क्या OBC और अन्य वंचित वर्गों को उनकी जनसंख्या के अनुपात में अधिकार देने के लिए नई नीतियों की जरूरत है?</p>
<p>राहुल गांधी ने साफ कर दिया है कि वह इस मुद्दे को राष्ट्रीय स्तर पर उठाते रहेंगे। उन्होंने कहा, <strong>&#8220;तेलंगाना ने रास्ता दिखा दिया है, यही पूरे देश की ज़रूरत है। भारत में जाति जनगणना होकर रहेगी।&#8221;</strong></p>
<p>अब देखना होगा कि इस मुद्दे पर केंद्र सरकार और अन्य राजनीतिक दल क्या रुख अपनाते हैं। क्या यह फैसला पूरे देश में सामाजिक न्याय की एक नई दिशा तय करेगा, या फिर यह केवल एक राज्य तक सीमित रह जाएगा? यह सवाल आने वाले समय में भारतीय राजनीति की सबसे बड़ी बहसों में से एक बन सकता है।</p>
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		<item>
		<title>कांग्रेस का पलटवार—आंबेडकर और अदाणी मुद्दे पर सरकार को घेरा</title>
		<link>https://www.samvaadindia.com/congresss-counter-attack-cornered-the-government-on-ambedkar-and-adani-issue/</link>
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		<dc:creator><![CDATA[संवाद इंडिया]]></dc:creator>
		<pubDate>Thu, 19 Dec 2024 13:47:41 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[अंतरराष्ट्रीय]]></category>
		<category><![CDATA[ब्रेकिंग]]></category>
		<category><![CDATA[लोकसभा चुनाव 2024]]></category>
		<category><![CDATA[Bjp]]></category>
		<category><![CDATA[Congress]]></category>
		<category><![CDATA[Rahul gandhi]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>नई दिल्ली 19 दिसंबर। संसद भवन में धक्का-मुक्की के विवाद के बाद कांग्रेस ने भाजपा पर तीखा पलटवार</p>
<p>The post <a href="https://www.samvaadindia.com/congresss-counter-attack-cornered-the-government-on-ambedkar-and-adani-issue/">कांग्रेस का पलटवार—आंबेडकर और अदाणी मुद्दे पर सरकार को घेरा</a> appeared first on <a href="https://www.samvaadindia.com">Samvaad India</a>.</p>
]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p>नई दिल्ली 19 दिसंबर। संसद भवन में धक्का-मुक्की के विवाद के बाद कांग्रेस ने भाजपा पर तीखा पलटवार किया। कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे, लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी और अन्य वरिष्ठ नेताओं ने प्रेस कॉन्फ्रेंस के जरिए भाजपा पर गंभीर आरोप लगाए। कांग्रेस ने दावा किया कि भाजपा, डॉ. भीमराव आंबेडकर और देश के लोकतांत्रिक मूल्यों पर हमला कर रही है।</p>
<p><strong>आंबेडकर पर गृह मंत्री के बयान से शुरू हुआ विवाद</strong></p>
<p>कांग्रेस ने आरोप लगाया कि गृह मंत्री अमित शाह ने आंबेडकर पर टिप्पणी करते हुए तथ्यात्मक गलतियां कीं। मल्लिकार्जुन खरगे ने कहा,</p>
<p><strong>&#8220;गृह मंत्री ने कल जो बयान दिया, वह तथ्यों से परे था। यह आंबेडकर और नेहरू दोनों का अपमान है। भाजपा इतिहास को तोड़-मरोड़कर पेश कर रही है। हमारी मांग है कि अमित शाह देश से माफी मांगें और अपने पद से इस्तीफा दें।</strong></p>
<blockquote class="twitter-tweet" data-width="550" data-dnt="true">
<p lang="en" dir="ltr"><a href="https://twitter.com/hashtag/WATCH?src=hash&amp;ref_src=twsrc%5Etfw">#WATCH</a> | Delhi: On Union HM&#39;s speech in RS during Constitution debate, Rajya Sabha LoP and Congress president Mallikarjun Kharge says, &quot;The statements that the government and especially the Prime Minister and Union Home Minister Amit Shah are making about Dr BR Ambedkar are very… <a href="https://t.co/BRdGhkKjyC">pic.twitter.com/BRdGhkKjyC</a></p>
<p>&mdash; ANI (@ANI) <a href="https://twitter.com/ANI/status/1869703595320631694?ref_src=twsrc%5Etfw">December 19, 2024</a></p></blockquote>
<p><script async src="https://platform.twitter.com/widgets.js" charset="utf-8"></script></p>
<p>कांग्रेस का कहना है कि भाजपा का रवैया संविधान विरोधी है। खरगे ने कहा,</p>
<p>&#8220;<strong>प्रधानमंत्री और गृह मंत्री बार-बार संविधान निर्माता बाबासाहेब आंबेडकर का नाम लेकर उनकी विरासत को मिटाने का प्रयास कर रहे हैं। यह बेहद दुखद और चिंताजनक है।&#8221;</strong></p>
<blockquote class="twitter-tweet" data-width="550" data-dnt="true">
<p lang="en" dir="ltr"><a href="https://twitter.com/hashtag/WATCH?src=hash&amp;ref_src=twsrc%5Etfw">#WATCH</a> | Delhi: Congress president Mallikarjun Kharge says, &quot;&#8230;They (BJP MPs) stopped us at the door and did this to show their muscle power. They forcefully attacked us. I am not in a position to push anyone, but they pushed me. Now they are accusing us that we pushed them&#8230;So… <a href="https://t.co/01rRE3GaGt">pic.twitter.com/01rRE3GaGt</a></p>
<p>&mdash; ANI (@ANI) <a href="https://twitter.com/ANI/status/1869710807266930920?ref_src=twsrc%5Etfw">December 19, 2024</a></p></blockquote>
<p><script async src="https://platform.twitter.com/widgets.js" charset="utf-8"></script></p>
<p><strong>अदाणी मुद्दे पर चर्चा से बचने का आरोप</strong></p>
<p>राहुल गांधी ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा कि भाजपा संसद में अदाणी विवाद पर चर्चा से बचने की कोशिश कर रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा ने जानबूझकर आंबेडकर का मुद्दा उठाकर ध्यान भटकाने का प्रयास किया। राहुल गांधी ने कहा</p>
<p>&#8220;<strong>अदाणी के खिलाफ अमेरिका में मामला दर्ज हुआ है। भाजपा इस मुद्दे पर संसद में चर्चा करने से भाग रही है। यह उनकी पुरानी रणनीति है कि एक मुद्दे से ध्यान हटाने के लिए दूसरा विवाद खड़ा किया जाए।&#8221;</strong></p>
<p><strong>मकर द्वार पर धक्का-मुक्की का मामला</strong></p>
<p>कांग्रेस नेताओं ने भाजपा पर आरोप लगाया कि जब वे शांतिपूर्ण तरीके से प्रदर्शन कर रहे थे, तब भाजपा सांसदों ने उनके साथ दुर्व्यवहार किया। खरगे ने कहा,</p>
<p>&#8220;<strong>हम हर दिन संसद परिसर में प्रदर्शन करते हैं, लेकिन आज हमारे साथ धक्का-मुक्की की गई। भाजपा सांसदों ने मुझे और हमारी महिला सांसदों को धक्का दिया।&#8221;</strong></p>
<blockquote class="twitter-tweet" data-width="550" data-dnt="true">
<p lang="en" dir="ltr"><a href="https://twitter.com/hashtag/WATCH?src=hash&amp;ref_src=twsrc%5Etfw">#WATCH</a> | Delhi: Congress MP and Lok Sabha LoP Rahul Gandhi says, &quot;A few days before the Parliament session, the Adani case came up in America and the BJP tried to stop the discussion on it. The basic strategy of the BJP was that there should be no discussion on the Adani case, it… <a href="https://t.co/4LW2tRX45L">pic.twitter.com/4LW2tRX45L</a></p>
<p>&mdash; ANI (@ANI) <a href="https://twitter.com/ANI/status/1869706416354939023?ref_src=twsrc%5Etfw">December 19, 2024</a></p></blockquote>
<p><script async src="https://platform.twitter.com/widgets.js" charset="utf-8"></script></p>
<p>राहुल गांधी ने इसे भाजपा का &#8220;तानाशाही रवैया&#8221; करार दिया और कहा कि इस घटना से साबित होता है कि भाजपा संविधान और लोकतांत्रिक मूल्यों का सम्मान नहीं करती।</p>
<p><strong>देशव्यापी प्रदर्शन की योजना</strong></p>
<p>मल्लिकार्जुन खरगे ने कहा कि कांग्रेस इस घटना को लेकर पूरे देश में प्रदर्शन करेगी। उन्होंने कहा,</p>
<p>&#8220;<strong>यह केवल कांग्रेस पर हमला नहीं है, बल्कि संविधान और लोकतंत्र पर हमला है। हम इसे बर्दाश्त नहीं करेंगे और देशभर में भाजपा की नीतियों और उनके झूठ का पर्दाफाश करेंगे।&#8221;</strong></p>
<p><strong>राहुल गांधी ने गृह मंत्री का इस्तीफा मांगा</strong></p>
<p>राहुल गांधी ने भाजपा पर आंबेडकर के विचारों के खिलाफ होने का आरोप लगाते हुए गृह मंत्री से इस्तीफे की मांग की। उन्होंने कहा:</p>
<p>&#8220;<strong>गृह मंत्री को तुरंत अपने पद से इस्तीफा देना चाहिए। उन्होंने न केवल आंबेडकर का अपमान किया है, बल्कि देश की जनता के साथ भी अन्याय किया है।&#8221;</strong></p>
<p><strong>भाजपा की प्रतिक्रिया: &#8220;अहंकार और झूठ की राजनीति&#8221;</strong></p>
<p>भाजपा ने कांग्रेस के आरोपों को खारिज करते हुए इसे &#8220;अहंकार और झूठ की राजनीति&#8221; बताया। भाजपा नेताओं ने कहा कि कांग्रेस केवल अदाणी मामले का बहाना लेकर भाजपा की छवि खराब करने की कोशिश कर रही है।</p>
<p><strong>केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा,</strong></p>
<p>&#8220;कांग्रेस का रवैया अराजकता फैलाने वाला है। राहुल गांधी ने जानबूझकर हमारे सांसदों को उकसाया और गुंडागर्दी की। भाजपा इस मामले में सख्त कार्रवाई करेगी।&#8221;</p>
<p><strong>अदाणी और आंबेडकर विवाद: राजनीतिक खेल या वैचारिक संघर्ष?</strong></p>
<p>विशेषज्ञों का मानना है कि अदाणी और आंबेडकर मुद्दे को लेकर सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच संघर्ष केवल राजनीतिक नहीं है, बल्कि यह भारतीय राजनीति में बढ़ती वैचारिक खाई का संकेत भी है।</p>
<p>संसद परिसर में हुई यह घटना भारतीय राजनीति के लिए चिंताजनक है। आंबेडकर और अदाणी जैसे गंभीर मुद्दों पर चर्चा के बजाय, सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच आरोप-प्रत्यारोप लोकतंत्र के लिए घातक है।</p>
<p>आने वाले दिनों में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि क्या इस विवाद से जुड़े मुद्दों पर कोई समाधान निकलेगा या यह केवल राजनीतिक बयानबाजी तक सीमित रहेगा।</p>
<p>The post <a href="https://www.samvaadindia.com/congresss-counter-attack-cornered-the-government-on-ambedkar-and-adani-issue/">कांग्रेस का पलटवार—आंबेडकर और अदाणी मुद्दे पर सरकार को घेरा</a> appeared first on <a href="https://www.samvaadindia.com">Samvaad India</a>.</p>
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		<title>राहुल गांधी और भाजपा के बीच आरोप-प्रत्यारोप का नाटकीय घटनाक्रम</title>
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		<dc:creator><![CDATA[संवाद इंडिया]]></dc:creator>
		<pubDate>Thu, 19 Dec 2024 13:22:45 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[अंतरराष्ट्रीय]]></category>
		<category><![CDATA[ब्रेकिंग]]></category>
		<category><![CDATA[Bjp]]></category>
		<category><![CDATA[Rahul gandhi]]></category>
		<category><![CDATA[Shivraj]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>नई दिल्ली 19 दिसंबर। भारतीय राजनीति में एक बार फिर एक बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। संसद</p>
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										<content:encoded><![CDATA[<p>नई दिल्ली 19 दिसंबर। भारतीय राजनीति में एक बार फिर एक बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। संसद के भीतर और बाहर हालिया घटनाओं ने न केवल लोकतंत्र के मंदिर की गरिमा को प्रभावित किया है, बल्कि राजनीतिक दलों के बीच गहराते वैचारिक और व्यक्तिगत मतभेदों को भी उजागर किया है।</p>
<p><strong>घटना का प्रारंभ</strong></p>
<p>यह विवाद गृह मंत्री अमित शाह की टिप्पणी से शुरू हुआ, जिसे कांग्रेस ने डॉ. भीमराव आंबेडकर के अपमान से जोड़कर भाजपा के खिलाफ मोर्चा खोल दिया। कांग्रेस सांसदों ने संसद भवन में विरोध मार्च निकालते हुए गृह मंत्री से माफी और इस्तीफे की मांग की। दूसरी ओर, भाजपा ने कांग्रेस पर आरोप लगाया कि वह इस मुद्दे का उपयोग करते हुए उद्योगपति गौतम अडानी के खिलाफ अमेरिका में दर्ज मामलों से ध्यान भटकाने का प्रयास कर रही है।</p>
<p><strong>भाजपा का पक्ष: राहुल गांधी पर गुंडागर्दी का आरोप</strong></p>
<p>भाजपा सांसदों ने आरोप लगाया कि राहुल गांधी ने जानबूझकर मकर द्वार पर प्रदर्शन कर रहे भाजपा सांसदों के पास जाकर उकसाने वाले व्यवहार का प्रदर्शन किया। केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने भाजपा की प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा:</p>
<p>&#8220;<strong>राहुल गांधी ने गुंडागर्दी की। उन्होंने योजनाबद्ध तरीके से हमारे सांसदों के साथ हाथापाई की, जिससे प्रताप सारंगी गंभीर रूप से घायल हो गए। यह व्यवहार सभ्य समाज के लिए अकल्पनीय है।&#8221;</strong></p>
<p>प्रताप सारंगी, जिन्हें इस विवाद के दौरान चोटें आईं, आईसीयू में भर्ती हैं। भाजपा ने राहुल गांधी के खिलाफ संसद मार्ग थाने में शिकायत दर्ज कराई है और इस मुद्दे पर &#8220;उचित कार्रवाई&#8221; की बात कही है।</p>
<p><strong>कांग्रेस का पक्ष: अडानी मुद्दे पर चर्चा से बचने की रणनीति</strong></p>
<p>राहुल गांधी और कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने भाजपा के आरोपों को खारिज करते हुए इसे &#8220;<strong>ध्यान भटकाने की रणनीति&#8221; बताया। राहुल गांधी ने कहा कि यह विवाद अमित शाह के &#8220;संविधान-विरोधी और आंबेडकर-विरोधी&#8221; बयान पर हो रहे विरोध को दबाने के लिए भाजपा का प्रयास है।</strong></p>
<p><strong>&#8220;अडानी और अंबेडकर दोनों मुद्दों पर भाजपा चर्चा से भाग रही है। वे डॉ. आंबेडकर का अपमान कर रहे हैं और नरेंद्र मोदी भारत को अडानी को बेच रहे हैं।&#8221;</strong></p>
<p>कांग्रेस ने भाजपा पर &#8220;संविधान और लोकतंत्र के मूल्यों को दबाने&#8221; का आरोप लगाया और अमित शाह से माफी व इस्तीफे की मांग की।</p>
<p><strong>मकर द्वार पर झड़प और आरोप-प्रत्यारोप</strong></p>
<p>मकर द्वार पर हुई झड़प के दौरान कांग्रेस और भाजपा दोनों दलों के सांसदों ने एक-दूसरे पर हिंसा का आरोप लगाया। भाजपा ने दावा किया कि राहुल गांधी ने जानबूझकर भाजपा सांसदों को उकसाया और धक्का-मुक्की की। इसके विपरीत, कांग्रेस ने कहा कि भाजपा सांसदों ने डंडे लेकर उनका रास्ता रोका और उन्हें संसद में प्रवेश करने से रोका।</p>
<p><strong>विवाद के निहितार्थ और राजनीतिक रणनीतियां</strong></p>
<p>राहुल गांधी ने अपनी प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा कि भाजपा अडानी के खिलाफ अमेरिका में दर्ज मामलों पर चर्चा से बचने के लिए आंबेडकर के नाम पर नया विवाद खड़ा कर रही है।</p>
<p>&#8220;वे (भाजपा) अंबेडकर जी की यादों और योगदान को मिटाना चाहते हैं। यह उनका असली उद्देश्य है।&#8221;</p>
<p>अडानी मामले पर चर्चा से बचना और आंबेडकर के नाम पर भावनाओं को भड़काना, दोनों ही मुद्दों ने इस विवाद को और जटिल बना दिया है।</p>
<p><strong>भाजपा की रणनीति और कांग्रेस की जवाबी कार्रवाई</strong></p>
<p>भाजपा ने कांग्रेस के आरोपों को &#8220;अहंकारी&#8221; और &#8220;झूठा&#8221; करार दिया। शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि कांग्रेस केवल अपनी विफलताओं को छिपाने के लिए इस प्रकार के हंगामे कर रही है।</p>
<p>&#8220;राहुल गांधी का व्यवहार उनके अहंकार को दर्शाता है। वे माफी मांगने के बजाय झूठे आरोप लगा रहे हैं।&#8221;</p>
<p>दूसरी ओर, कांग्रेस ने इसे भाजपा की &#8220;तानाशाही सोच&#8221; का उदाहरण बताते हुए कहा कि यह घटना लोकतांत्रिक मूल्यों पर हमला है।</p>
<p><strong>राजनीतिक परिदृश्य पर प्रभाव</strong></p>
<p>इस घटना ने भाजपा और कांग्रेस के बीच की वैचारिक खाई को और गहरा कर दिया है। यह विवाद आने वाले लोकसभा चुनावों से पहले दोनों पार्टियों के लिए एक महत्वपूर्ण मुद्दा बन सकता है। भाजपा जहां इस घटना को कांग्रेस की &#8220;अराजकता और असभ्यता&#8221; के रूप में प्रस्तुत कर रही है, वहीं कांग्रेस इसे भाजपा की &#8220;अडानी को बचाने और संविधान पर हमला करने&#8221; की रणनीति के रूप में प्रचारित कर रही है।</p>
<p><strong>जनता और मीडिया की प्रतिक्रिया</strong></p>
<p>मीडिया और जनता ने इस विवाद पर मिश्रित प्रतिक्रिया दी है। कुछ इसे भारतीय राजनीति का &#8220;नया निम्न स्तर&#8221; कह रहे हैं, तो कुछ इसे वैचारिक संघर्ष के रूप में देख रहे हैं। सोशल मीडिया पर दोनों पक्षों के समर्थकों के बीच तीखी बहस जारी है।</p>
<p>संसद भवन में हुई इस अप्रिय घटना ने भारत के लोकतांत्रिक ढांचे को झकझोर दिया है। अडानी मामले से लेकर आंबेडकर की विरासत तक, यह विवाद कई जटिल मुद्दों को उजागर करता है। सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच बढ़ता यह टकराव भारतीय राजनीति के भविष्य के लिए गंभीर सवाल खड़े करता है।</p>
<p>आने वाले दिनों में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि क्या इस विवाद से जुड़े मुद्दों पर सार्थक चर्चा होगी, या यह केवल आरोप-प्रत्यारोप का हिस्सा बनकर रह जाएगा।</p>
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		<title>मेक इन इंडिया: एक दशक बाद वादे और हकीकत</title>
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		<dc:creator><![CDATA[संवाद इंडिया]]></dc:creator>
		<pubDate>Tue, 03 Dec 2024 14:40:25 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[अंतरराष्ट्रीय]]></category>
		<category><![CDATA[ब्रेकिंग]]></category>
		<category><![CDATA[राष्ट्रीय]]></category>
		<category><![CDATA[Congress]]></category>
		<category><![CDATA[Jayram ramesh]]></category>
		<category><![CDATA[Rahul gandhi]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>नई दिल्ली 3 दिसंबर। जुलाई-सितंबर 2024 की तिमाही के लिए जारी किए गए ताजा जीडीपी आंकड़े देश की</p>
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										<content:encoded><![CDATA[<p>नई दिल्ली 3 दिसंबर। जुलाई-सितंबर 2024 की तिमाही के लिए जारी किए गए ताजा जीडीपी आंकड़े देश की आर्थिक स्थिति को लेकर गंभीर चिंताएं पैदा कर रहे हैं। ये आंकड़े न केवल विकास दर में भारी कमी को उजागर करते हैं, बल्कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के बहुप्रचारित &#8220;मेक इन इंडिया&#8221; अभियान की वास्तविकता पर भी सवाल उठाते हैं। इस योजना को 2014 में भारत को वैश्विक विनिर्माण और निर्यात केंद्र बनाने के उद्देश्य से शुरू किया गया था, लेकिन दस साल बाद इसके परिणाम उम्मीदों से काफी दूर नजर आते हैं।</p>
<p>भारतीय अर्थव्यवस्था का प्रमुख आधार विनिर्माण क्षेत्र जुलाई-सितंबर 2024 में मात्र 2.2% की धीमी वृद्धि दर्ज कर सका। वहीं, निर्यात में वृद्धि भी केवल 2.8% तक सीमित रही। ये आंकड़े बताते हैं कि मेक इन इंडिया अपने प्रमुख लक्ष्यों को पूरा करने में विफल रहा है।</p>
<p><strong>विनिर्माण क्षेत्र: पिछड़ती रीढ़</strong></p>
<p>विनिर्माण क्षेत्र, जिसे किसी भी देश की अर्थव्यवस्था का स्तंभ माना जाता है, भारत में लगातार कमजोर होता जा रहा है। कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने सरकार पर इस योजना को लेकर तीखा हमला किया। उनका कहना है कि मेक इन इंडिया के दस वर्षों में भारत का विनिर्माण क्षेत्र अपनी क्षमता खोता जा रहा है।</p>
<p>2011-12 में सकल मूल्य वर्धन (जीवीए) में विनिर्माण का योगदान 18.1% था, जो 2022-23 में घटकर केवल 14.3% रह गया। रोजगार के मोर्चे पर हालात और भी खराब हैं। 2017 में विनिर्माण क्षेत्र में 51.3 मिलियन लोग कार्यरत थे, लेकिन 2022-23 तक यह संख्या घटकर मात्र 35.65 मिलियन रह गई।</p>
<p><strong>निर्यात में गिरावट: एक और झटका</strong></p>
<p>प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का सपना था कि मेक इन इंडिया के जरिए भारत एक बड़ा निर्यातक बनेगा। हालांकि, स्थिति इसके ठीक उलट है। वस्त्र उद्योग, जो परंपरागत रूप से ग्रामीण क्षेत्रों में बड़े पैमाने पर रोजगार देता है, इस गिरावट का बड़ा उदाहरण है।</p>
<ul>
<li>2013-14 में भारत का वस्त्र निर्यात 15 बिलियन डॉलर था।</li>
<li>2023-24 में यह घटकर केवल 14.5 बिलियन डॉलर रह गया।</li>
</ul>
<p>भारत न केवल वैश्विक बाजार में प्रतिस्पर्धा खो रहा है, बल्कि बांग्लादेश और वियतनाम जैसे छोटे देश भी अब निर्यात में भारत से आगे निकल चुके हैं। निर्यात में यह गिरावट घरेलू अर्थव्यवस्था पर दोहरा प्रहार कर रही है।</p>
<ul>
<li>रोजगार में कमी</li>
<li>विदेशी मुद्रा आय में गिरावट।</li>
</ul>
<p><strong>चीनी आयात से बढ़ती चुनौती</strong></p>
<p>मेक इन इंडिया का उद्देश्य था कि भारतीय विनिर्माण को बढ़ावा देकर आत्मनिर्भरता हासिल की जाए। इसके तहत उत्पादन आधारित प्रोत्साहन और कर कटौती जैसे कदम उठाए गए। लेकिन, चीन से आने वाले सस्ते उत्पादों ने भारतीय उद्योगों पर गहरा प्रहार किया।</p>
<ul>
<li>गुजरात का स्टेनलेस स्टील उद्योग इस समस्या का बड़ा उदाहरण है।</li>
<li>चीनी आयात के कारण यहां के एक तिहाई सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्योग (एमएसएमई) बंद हो गए हैं।</li>
</ul>
<p>सस्ती कीमत और बेहतर गुणवत्ता के चलते चीनी उत्पाद भारतीय बाजार पर हावी हो रहे हैं। घरेलू विनिर्माण लागत अधिक होने और उत्पादन तकनीकों में पिछड़ने के कारण भारतीय उत्पाद अंतरराष्ट्रीय और घरेलू बाजार दोनों में प्रतिस्पर्धा नहीं कर पा रहे हैं।</p>
<p><strong>नीतियों में खामियां और निवेश का अभाव</strong></p>
<p>विशेषज्ञों का कहना है कि मेक इन इंडिया के तहत निजी निवेश को आकर्षित करने में सरकार नाकाम रही है। नीति निर्माण में पारदर्शिता की कमी और अप्रभावी प्रोत्साहन योजनाओं के कारण निवेशकों का विश्वास कमजोर हुआ।</p>
<p>जयराम रमेश ने इस योजना को &#8220;मेक-बिलीव इन इंडिया&#8221; करार देते हुए कहा कि यह सिर्फ प्रचार तक सीमित रह गई है। इसके विपरीत, उन्होंने 2005-15 के दशक को भारत के निर्यात और विनिर्माण क्षेत्र के लिए सुनहरा समय बताया। उस समय भारत का वैश्विक व्यापार में हिस्सा तेजी से बढ़ा, जो तत्कालीन नीतियों का परिणाम था।</p>
<p><strong>वादा बनाम वास्तविकता</strong></p>
<p>मेक इन इंडिया योजना को शुरू हुए दस साल पूरे हो चुके हैं, लेकिन इसके वादे अभी तक अधूरे ही हैं। यह योजना न तो विनिर्माण क्षेत्र को गति दे पाई और न ही रोजगार सृजन में कोई बड़ा योगदान कर पाई।</p>
<p>आज भारत के लिए यह जरूरी है कि वह इन विफलताओं से सीखते हुए नीतियों को धरातल पर लागू करे। मेक इन इंडिया का सपना तभी साकार हो सकता है, जब इसे ठोस नीतियों और ईमानदार क्रियान्वयन के साथ लागू किया जाए। अगर समय रहते यह सुधार नहीं किया गया, तो भारत की आर्थिक स्थिति को भारी नुकसान झेलना पड़ सकता है।</p>
<p>यह योजना प्रचार से आगे बढ़कर भारत के विकास का आधार बन सके, यही देश के लिए आवश्यक है। अन्यथा, यह केवल एक अधूरा वादा बनकर रह जाएगी।</p>
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		<item>
		<title>मुंडक्कई और चूरलमाला त्रासदी: पीड़ितों के प्रति श्रद्धांजलि और वायनाड के लिए कांग्रेस की प्रतिबद्धता</title>
		<link>https://www.samvaadindia.com/mundakkai-and-choorlamalla-tragedies-tributes-to-the-victims-and-congress-commitment-to-wayanad/</link>
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		<dc:creator><![CDATA[संवाद इंडिया]]></dc:creator>
		<pubDate>Sat, 30 Nov 2024 11:40:34 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[अंतरराष्ट्रीय]]></category>
		<category><![CDATA[केरल]]></category>
		<category><![CDATA[ब्रेकिंग]]></category>
		<category><![CDATA[लोकसभा चुनाव 2024]]></category>
		<category><![CDATA[Mundakkai and Choorlamalla tragedies: Tributes to the victims and Congress' commitment to Wayanad]]></category>
		<category><![CDATA[Rahul gandhi]]></category>
		<category><![CDATA[Soniya gandhi]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>वायनाड, 30 नवंबर। मुंडक्कई और चूरलमाला की भयावह त्रासदी ने न केवल वायनाड बल्कि पूरे केरल को झकझोर</p>
<p>The post <a href="https://www.samvaadindia.com/mundakkai-and-choorlamalla-tragedies-tributes-to-the-victims-and-congress-commitment-to-wayanad/">मुंडक्कई और चूरलमाला त्रासदी: पीड़ितों के प्रति श्रद्धांजलि और वायनाड के लिए कांग्रेस की प्रतिबद्धता</a> appeared first on <a href="https://www.samvaadindia.com">Samvaad India</a>.</p>
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										<content:encoded><![CDATA[<p>वायनाड, 30 नवंबर। मुंडक्कई और चूरलमाला की भयावह त्रासदी ने न केवल वायनाड बल्कि पूरे केरल को झकझोर कर रख दिया है। पीड़ितों के प्रति श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए, कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने अपने संबोधन में उन परिवारों और व्यक्तियों के प्रति सहानुभूति व्यक्त की जिन्होंने अपने प्रियजनों और आजीविका को खो दिया है। उन्होंने इस दुखद घड़ी में वायनाड और केरल के लोगों के साथ एकजुटता की भावना व्यक्त की और पार्टी कार्यकर्ताओं और यूनाइटेड डेमोक्रेटिक फ्रंट (यूडीएफ) के सदस्यों से अपील की कि वे पीड़ितों की मदद के लिए सरकार पर दबाव डालें।</p>
<p><img decoding="async" class="size-full wp-image-763 aligncenter" src="https://www.samvaadindia.com/wp-content/uploads/2024/11/IMG-20241130-WA0041-scaled.jpg" alt="" width="2560" height="1707" srcset="https://www.samvaadindia.com/wp-content/uploads/2024/11/IMG-20241130-WA0041-scaled.jpg 2560w, https://www.samvaadindia.com/wp-content/uploads/2024/11/IMG-20241130-WA0041-300x200.jpg 300w" sizes="(max-width: 2560px) 100vw, 2560px" /></p>
<p><strong>त्रासदी और पीड़ितों की सहायता का आह्वान</strong></p>
<p>राहुल गांधी ने स्पष्ट किया कि कांग्रेस और यूडीएफ के पास सरकार जैसी क्षमता नहीं है, लेकिन यह उन्हें पीड़ितों की मदद करने से नहीं रोक सकती। उन्होंने कहा, “हम केवल उन लोगों के प्रति सम्मान व्यक्त कर सकते हैं जिन्होंने अपना सब कुछ खो दिया है। यह हमारा कर्तव्य है कि हम उन्हें वह समर्थन दें जिसकी उन्हें इस समय सबसे अधिक आवश्यकता है।&#8221; उन्होंने विशेष रूप से इस बात पर जोर दिया कि पीड़ितों की मदद के लिए ठोस और दीर्घकालिक कदम उठाने के लिए राज्य और केंद्र सरकार को तत्काल कार्रवाई करनी चाहिए।</p>
<p>उन्होंने वायनाड के लोगों के प्रति केरल के बाकी हिस्सों के समर्थन और एकता की सराहना करते हुए कहा, “केरल के लोगों ने दिखाया है कि कैसे कठिन समय में मानवता और करुणा एक साथ आ सकती है। यह भावना वायनाड के पुनर्निर्माण के प्रयासों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।”</p>
<p><img decoding="async" class="size-full wp-image-764 aligncenter" src="https://www.samvaadindia.com/wp-content/uploads/2024/11/IMG-20241130-WA0051-scaled.jpg" alt="" width="2560" height="1920" srcset="https://www.samvaadindia.com/wp-content/uploads/2024/11/IMG-20241130-WA0051-scaled.jpg 2560w, https://www.samvaadindia.com/wp-content/uploads/2024/11/IMG-20241130-WA0051-300x225.jpg 300w" sizes="(max-width: 2560px) 100vw, 2560px" /></p>
<p><strong>वायनाड के लोगों का विश्वास और राहुल गांधी का दायित्व</strong></p>
<p>अपने संसदीय क्षेत्र वायनाड के साथ अपने संबंध को रेखांकित करते हुए राहुल गांधी ने कहा, “पांच साल पहले, आपने मुझे अपना सांसद चुना। आज, मेरी बहन ने संसद में वायनाड का प्रतिनिधित्व करने की शपथ ली है। हम दोनों ने एक ही प्रतिज्ञा की है—वायनाड के लोगों के दिलों में बसने वाली भावना को संसद में आवाज देना।”</p>
<p>उन्होंने कहा कि वायनाड के लोगों ने उन पर जो विश्वास जताया है, वह केवल राजनीतिक प्रतिनिधित्व नहीं बल्कि एक भावनात्मक और नैतिक जिम्मेदारी है। “जब मैं यहां किसी बच्चे को देखता हूं, तो मुझे एहसास होता है कि उसके माता-पिता ने मुझ पर भरोसा किया है। मेरी ज़िम्मेदारी है कि मैं उनकी देखभाल करूं और उनके चेहरों पर मुस्कान लाने की कोशिश करूं,” उन्होंने कहा।</p>
<p><img loading="lazy" decoding="async" class="size-full wp-image-765 aligncenter" src="https://www.samvaadindia.com/wp-content/uploads/2024/11/IMG-20241130-WA0057-scaled.jpg" alt="" width="2560" height="1707" srcset="https://www.samvaadindia.com/wp-content/uploads/2024/11/IMG-20241130-WA0057-scaled.jpg 2560w, https://www.samvaadindia.com/wp-content/uploads/2024/11/IMG-20241130-WA0057-300x200.jpg 300w" sizes="auto, (max-width: 2560px) 100vw, 2560px" /></p>
<p><strong>संविधान और वैचारिक संघर्ष</strong></p>
<p>राहुल गांधी ने अपने संबोधन में भारतीय संविधान की रक्षा के लिए चल रही लड़ाई पर भी जोर दिया। उन्होंने कहा कि देश में एक वैचारिक संघर्ष चल रहा है—एक तरफ कांग्रेस और उसके सहयोगी हैं, जो संवेदनाओं, स्नेह और प्रेम की बात करते हैं, तो दूसरी तरफ भाजपा है, जो नफरत, क्रोध और विभाजन को बढ़ावा देती है।</p>
<p>उन्होंने कहा, “संविधान कहता है कि हर व्यक्ति के साथ समान व्यवहार होना चाहिए। लेकिन पीएम मोदी ने स्पष्ट कर दिया है कि गौतम अडानी के साथ हर दूसरे भारतीय से अलग व्यवहार किया जाएगा। यह संविधान के मूल सिद्धांतों के खिलाफ है।”</p>
<p>राहुल गांधी ने इस बात पर भी नाराजगी जताई कि वायनाड जैसी जगह, जिसने हाल ही में प्राकृतिक आपदा का सामना किया है, उसे केंद्र सरकार से वह समर्थन नहीं मिल रहा जिसके वह हकदार हैं। उन्होंने कहा कि “प्रधानमंत्री मोदी ने न केवल संविधान के सिद्धांतों का उल्लंघन किया है बल्कि उन्होंने वायनाड के लोगों को भी निराश किया है। यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि एक क्षेत्र को उसकी त्रासदी के बावजूद नज़रअंदाज किया जा रहा है,”</p>
<p><img loading="lazy" decoding="async" class="alignright size-full wp-image-766" src="https://www.samvaadindia.com/wp-content/uploads/2024/11/IMG-20241130-WA0079-scaled.jpg" alt="" width="2560" height="1707" srcset="https://www.samvaadindia.com/wp-content/uploads/2024/11/IMG-20241130-WA0079-scaled.jpg 2560w, https://www.samvaadindia.com/wp-content/uploads/2024/11/IMG-20241130-WA0079-300x200.jpg 300w" sizes="auto, (max-width: 2560px) 100vw, 2560px" /></p>
<p><strong>भाजपा के खिलाफ जनता की ताकत</strong></p>
<p>भाजपा के खिलाफ कांग्रेस की लड़ाई को रेखांकित करते हुए राहुल गांधी ने कहा कि भाजपा के पास सत्ता, पैसा, मीडिया और केंद्रीय एजेंसियां हैं, लेकिन कांग्रेस के पास लोगों का समर्थन है। उन्होंने कहा, “भाजपा ने सीबीआई, ईडी, और आईटी जैसे सभी संस्थानों को अपने हथियार बना लिया है। लेकिन उनके पास जो भी ताकत हो, अंततः जनता की भावना ही विजयी होती है।”</p>
<p>उन्होंने विश्वास जताया कि कांग्रेस और उसके सहयोगी भाजपा की विचारधारा को हराने में सफल होंगे। “हमारा संघर्ष किसी व्यक्ति के खिलाफ नहीं, बल्कि उनकी विचारधारा के खिलाफ है। यह विचारधारा संविधान को तोड़ती है, लोकतंत्र को कमजोर करती है, और समाज को विभाजित करती है। लेकिन हमें विश्वास है कि हम इस वैचारिक लड़ाई में विजयी होंगे,” राहुल गांधी ने कहा।</p>
<p><img loading="lazy" decoding="async" class="size-full wp-image-768 aligncenter" src="https://www.samvaadindia.com/wp-content/uploads/2024/11/IMG-20241130-WA0075-scaled.jpg" alt="" width="2560" height="1707" srcset="https://www.samvaadindia.com/wp-content/uploads/2024/11/IMG-20241130-WA0075-scaled.jpg 2560w, https://www.samvaadindia.com/wp-content/uploads/2024/11/IMG-20241130-WA0075-300x200.jpg 300w" sizes="auto, (max-width: 2560px) 100vw, 2560px" /></p>
<p><strong>वायनाड का पुनर्निर्माण: एक साझा जिम्मेदारी</strong></p>
<p>राहुल गांधी ने अपने संबोधन का समापन वायनाड के पुनर्निर्माण के लिए साझा जिम्मेदारी के आह्वान के साथ किया। उन्होंने कहा कि यह न केवल सरकार बल्कि समाज के हर व्यक्ति की जिम्मेदारी है कि वह त्रासदी से प्रभावित लोगों की मदद करे।</p>
<p>उन्होंने वायनाड के लोगों से अपील की कि वे एकजुट रहें और इस चुनौतीपूर्ण समय में धैर्य बनाए रखें। “हमारी सबसे बड़ी ताकत हमारी एकजुटता है। हमें एक साथ मिलकर वायनाड को फिर से खड़ा करना होगा और इसे एक बेहतर भविष्य देना होगा,” उन्होंने कहा।</p>
<p>मुंडक्कई और चूरलमाला की त्रासदी ने एक बार फिर यह साबित कर दिया है कि मानवता की भावना और एकता हर चुनौती का सामना कर सकती है। वायनाड के लोग, राहुल गांधी और कांग्रेस पार्टी के समर्थन के साथ, इस कठिन समय से उबरने के लिए प्रतिबद्ध हैं।</p>
<p>यह संबोधन केवल एक राजनीतिक भाषण नहीं, बल्कि वायनाड के लोगों के साथ राहुल गांधी के गहरे भावनात्मक जुड़ाव और उनके अधिकारों के लिए लड़ने की प्रतिबद्धता का प्रमाण है।</p>
<p>The post <a href="https://www.samvaadindia.com/mundakkai-and-choorlamalla-tragedies-tributes-to-the-victims-and-congress-commitment-to-wayanad/">मुंडक्कई और चूरलमाला त्रासदी: पीड़ितों के प्रति श्रद्धांजलि और वायनाड के लिए कांग्रेस की प्रतिबद्धता</a> appeared first on <a href="https://www.samvaadindia.com">Samvaad India</a>.</p>
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		<title>कांग्रेस कार्यसमिति का प्रस्ताव: भाजपा सरकार पर आरोप, संगठनात्मक सुधार और राष्ट्रीय आंदोलन की घोषणा</title>
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		<dc:creator><![CDATA[संवाद इंडिया]]></dc:creator>
		<pubDate>Fri, 29 Nov 2024 15:02:24 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[अंतरराष्ट्रीय]]></category>
		<category><![CDATA[अरुणाचल प्रदेश]]></category>
		<category><![CDATA[आंध्रप्रदेश]]></category>
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		<category><![CDATA[लोकसभा चुनाव 2024]]></category>
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		<category><![CDATA[Mallikarjun khadge]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>नई दिल्ली, 29 नवंबर। संसद के शीतकालीन सत्र के दौरान आज कांग्रेस कार्यसमिति (CWC) की एक महत्वपूर्ण बैठक</p>
<p>The post <a href="https://www.samvaadindia.com/congress-working-committee-proposal-allegations-on-bjp-government-organizational-reforms-and-announcement-of-national-movement/">कांग्रेस कार्यसमिति का प्रस्ताव: भाजपा सरकार पर आरोप, संगठनात्मक सुधार और राष्ट्रीय आंदोलन की घोषणा</a> appeared first on <a href="https://www.samvaadindia.com">Samvaad India</a>.</p>
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										<content:encoded><![CDATA[<p>नई दिल्ली, 29 नवंबर। संसद के शीतकालीन सत्र के दौरान आज कांग्रेस कार्यसमिति (CWC) की एक महत्वपूर्ण बैठक संपन्न हुई। इस बैठक में पार्टी ने देश के समक्ष खड़े ज्वलंत मुद्दों पर विस्तार से चर्चा की और केंद्र की मोदी सरकार को घेरते हुए एक विस्तृत प्रस्ताव पारित किया। इस दौरान पार्टी ने सरकार पर भ्रष्टाचार, सांप्रदायिकता को बढ़ावा देने और संवैधानिक संस्थाओं की स्वतंत्रता पर हमला करने का आरोप लगाया। इसके साथ ही कांग्रेस कार्यसमिति ने आगामी चुनावों के मद्देनजर संगठन को मजबूत करने और जनता से जुड़े मुद्दों को राष्ट्रीय आंदोलन के रूप में उठाने की रणनीति बनाई।</p>
<p><strong>भ्रष्टाचार, मणिपुर हिंसा और सांप्रदायिकता पर मोदी सरकार को कठघरे में खड़ा किया</strong></p>
<p>बैठक के दौरान कांग्रेस ने मोदी सरकार की नीतियों और कार्यप्रणाली पर तीखा हमला किया। कांग्रेस ने हाल ही में एक प्रमुख व्यापारिक समूह से जुड़े भ्रष्टाचार के खुलासे का जिक्र करते हुए इसे प्रधानमंत्री के &#8220;घनिष्ठ संबंध&#8221; से जोड़कर उनकी विश्वसनीयता पर सवाल उठाए। पार्टी ने मणिपुर में जारी हिंसा और मई 2023 के बाद प्रधानमंत्री द्वारा इस अशांत राज्य का दौरा न करने पर गंभीर चिंता व्यक्त की।</p>
<p><img loading="lazy" decoding="async" class="aligncenter wp-image-759 size-full" src="https://www.samvaadindia.com/wp-content/uploads/2024/11/20241129_202239.jpg" alt="" width="2048" height="1366" srcset="https://www.samvaadindia.com/wp-content/uploads/2024/11/20241129_202239.jpg 2048w, https://www.samvaadindia.com/wp-content/uploads/2024/11/20241129_202239-300x200.jpg 300w, https://www.samvaadindia.com/wp-content/uploads/2024/11/20241129_202239-1024x683.jpg 1024w, https://www.samvaadindia.com/wp-content/uploads/2024/11/20241129_202239-768x512.jpg 768w, https://www.samvaadindia.com/wp-content/uploads/2024/11/20241129_202239-1536x1025.jpg 1536w" sizes="auto, (max-width: 2048px) 100vw, 2048px" /></p>
<p>कांग्रेस कार्यसमिति ने भाजपा पर सांप्रदायिक तनाव भड़काने का भी आरोप लगाया, खासकर उत्तर प्रदेश में हाल के घटनाक्रमों का जिक्र करते हुए। बैठक में कहा गया कि यह पार्टी की &#8220;सुनियोजित रणनीति&#8221; का हिस्सा है, जिससे देश में सामाजिक सौहार्द और सांप्रदायिक शांति को खतरा है।</p>
<p><strong>पूजा स्थल अधिनियम, 1991 पर प्रतिबद्धता</strong></p>
<p>कांग्रेस कार्यसमिति ने पूजा स्थल (विशेष प्रावधान) अधिनियम, 1991 के प्रति अपनी दृढ़ प्रतिबद्धता दोहराई। इस कानून को सांप्रदायिक सौहार्द बनाए रखने के लिए एक आवश्यक कदम मानते हुए, कांग्रेस ने भाजपा पर इसके &#8220;बेशर्मी से उल्लंघन&#8221; का आरोप लगाया।</p>
<p><strong>चुनावों के नतीजों पर समीक्षा और संगठनात्मक सुधार पर जोर</strong></p>
<p>चार राज्यों में हाल ही में संपन्न विधानसभा चुनावों और वायनाड उपचुनाव के परिणामों पर चर्चा करते हुए कांग्रेस ने मिश्रित प्रतिक्रिया दी। वायनाड में प्रियंका गांधी वाड्रा की भारी जीत को कार्यकर्ताओं और जनता के लिए प्रेरणा स्रोत बताते हुए कांग्रेस ने झारखंड और जम्मू-कश्मीर में अपने गठबंधन की सफलता पर खुशी जताई।</p>
<p>हालांकि, हरियाणा और महाराष्ट्र में पार्टी के प्रदर्शन को &#8220;अपेक्षा से कम&#8221; बताते हुए कांग्रेस ने इसे &#8220;आंतरिक संगठनात्मक कमजोरियों&#8221; और &#8220;बाहरी हस्तक्षेप&#8221; का नतीजा बताया। पार्टी ने चुनावी गड़बड़ियों और हेरफेर की ओर इशारा किया, जिसने परिणामों को प्रभावित किया।</p>
<p><img loading="lazy" decoding="async" class="aligncenter wp-image-760 size-full" src="https://www.samvaadindia.com/wp-content/uploads/2024/11/20241129_202228.jpg" alt="" width="2048" height="1366" srcset="https://www.samvaadindia.com/wp-content/uploads/2024/11/20241129_202228.jpg 2048w, https://www.samvaadindia.com/wp-content/uploads/2024/11/20241129_202228-300x200.jpg 300w, https://www.samvaadindia.com/wp-content/uploads/2024/11/20241129_202228-1024x683.jpg 1024w, https://www.samvaadindia.com/wp-content/uploads/2024/11/20241129_202228-768x512.jpg 768w, https://www.samvaadindia.com/wp-content/uploads/2024/11/20241129_202228-1536x1025.jpg 1536w" sizes="auto, (max-width: 2048px) 100vw, 2048px" /></p>
<p>कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे जल्द ही विस्तृत राज्यवार समीक्षा करने और संगठनात्मक बदलाव की घोषणा करने वाले हैं। कार्यसमिति ने सभी स्तरों पर एकता और अनुशासन बनाए रखने की अपील की।</p>
<p><strong>राष्ट्रीय मुद्दों पर कांग्रेस का रोडमैप</strong></p>
<p>कांग्रेस कार्यसमिति ने भारत जोड़ो यात्रा, भारत जोड़ो न्याय यात्रा और लोकसभा चुनाव अभियान के दौरान उठाए गए मुद्दों पर अपनी प्रतिबद्धता दोहराई। इन मुद्दों में जाति जनगणना, आरक्षण सीमा में वृद्धि, बढ़ती बेरोजगारी और मूल्य वृद्धि पर नियंत्रण, और अर्थव्यवस्था में एकाधिकार को रोकने के लिए सख्त कदम शामिल हैं।</p>
<p>कांग्रेस ने जाति जनगणना को &#8220;पूर्ण सामाजिक न्याय&#8221; के लिए आवश्यक बताते हुए अनुसूचित जातियों, अनुसूचित जनजातियों और अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) के लिए आरक्षण पर 50% की सीमा हटाने का आह्वान किया।</p>
<p><strong>चुनावी प्रक्रिया और चुनाव आयोग पर सवाल</strong></p>
<p>कांग्रेस ने देश में स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव सुनिश्चित करने की प्रक्रिया पर भी गंभीर सवाल उठाए। चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली को &#8220;पक्षपातपूर्ण&#8221; बताते हुए पार्टी ने इसे लोकतंत्र के लिए खतरनाक करार दिया। कांग्रेस का मानना है कि चुनावी प्रक्रिया की अखंडता से समझौता किया जा रहा है, जिससे समाज के विभिन्न वर्गों में निराशा और असुरक्षा बढ़ रही है।</p>
<p><strong>राष्ट्रीय आंदोलन की घोषणा</strong></p>
<p>कांग्रेस कार्यसमिति ने देश में बढ़ती सामाजिक, आर्थिक और राजनीतिक असमानताओं को लेकर &#8220;राष्ट्रीय आंदोलन&#8221; छेड़ने की घोषणा की। पार्टी का उद्देश्य इन जनचिंताओं को व्यापक स्तर पर उठाना और सरकार की जवाबदेही सुनिश्चित करना है।</p>
<p><strong>भविष्य की रणनीति</strong></p>
<p>कांग्रेस कार्यसमिति ने सभी राज्यों में अपने संगठन को मजबूत करने, जमीनी स्तर पर कार्यकर्ताओं को प्रेरित करने और आगामी लोकसभा चुनावों के लिए पूरी तैयारी के साथ आगे बढ़ने का आह्वान किया।</p>
<p>कांग्रेस ने स्पष्ट किया कि वर्तमान चुनौतियों का सामना करते हुए पार्टी जनता के हितों की रक्षा के लिए पूरी प्रतिबद्धता के साथ काम करेगी। बैठक के अंत में कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने कहा, &#8220;देश के लोकतंत्र, संविधान और सामाजिक न्याय की रक्षा के लिए कांग्रेस हर चुनौती का सामना करने को तैयार है।&#8221;</p>
<p>इस प्रस्ताव और बैठक में किए गए निर्णय कांग्रेस की राजनीतिक दिशा को निर्धारित करेंगे और आने वाले समय में पार्टी की रणनीति के केंद्र बिंदु होंगे।</p>
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		<title>कांग्रेस नेतृत्व की दागी क्षेत्रीय नेताओं पर निर्भरता: एक गहराई से विश्लेषण</title>
		<link>https://www.samvaadindia.com/congress-leaderships-reliance-on-tainted-regional-leaders-an-in-depth-analysis/</link>
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		<dc:creator><![CDATA[संवाद इंडिया]]></dc:creator>
		<pubDate>Sun, 13 Oct 2024 03:49:12 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[एक्सक्लूसिव]]></category>
		<category><![CDATA[खास खबर]]></category>
		<category><![CDATA[Ashok gahlot]]></category>
		<category><![CDATA[Bhupesh baghel]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस, जो कभी भारतीय राजनीति का केंद्रीय स्तंभ थी, आज एक कठिन दौर से गुजर रही</p>
<p>The post <a href="https://www.samvaadindia.com/congress-leaderships-reliance-on-tainted-regional-leaders-an-in-depth-analysis/">कांग्रेस नेतृत्व की दागी क्षेत्रीय नेताओं पर निर्भरता: एक गहराई से विश्लेषण</a> appeared first on <a href="https://www.samvaadindia.com">Samvaad India</a>.</p>
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										<content:encoded><![CDATA[<figure id="attachment_571" aria-describedby="caption-attachment-571" style="width: 150px" class="wp-caption alignright"><img loading="lazy" decoding="async" class="wp-image-571 size-thumbnail" src="https://www.samvaadindia.com/wp-content/uploads/2024/10/Screenshot_20241010_083749_Facebook-150x150.jpg" alt="" width="150" height="150" srcset="https://www.samvaadindia.com/wp-content/uploads/2024/10/Screenshot_20241010_083749_Facebook-150x150.jpg 150w, https://www.samvaadindia.com/wp-content/uploads/2024/10/Screenshot_20241010_083749_Facebook-300x300.jpg 300w, https://www.samvaadindia.com/wp-content/uploads/2024/10/Screenshot_20241010_083749_Facebook-768x768.jpg 768w, https://www.samvaadindia.com/wp-content/uploads/2024/10/Screenshot_20241010_083749_Facebook.jpg 1019w" sizes="auto, (max-width: 150px) 100vw, 150px" /><figcaption id="caption-attachment-571" class="wp-caption-text">वासिंद्र मिश्रा</figcaption></figure>
<p>भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस, जो कभी भारतीय राजनीति का केंद्रीय स्तंभ थी, आज एक कठिन दौर से गुजर रही है। एक के बाद एक चुनावी हार के बावजूद पार्टी का नेतृत्व उन क्षेत्रीय नेताओं पर निर्भर है, जो या तो भ्रष्टाचार के आरोपों से घिरे हुए हैं या जिनकी निष्ठा पार्टी से ज्यादा उनके व्यक्तिगत स्वार्थों में है। यह निर्भरता न केवल कांग्रेस को कमजोर कर रही है, बल्कि उसके राजनीतिक भविष्य पर भी सवाल खड़े कर रही है।</p>
<p>वहीं दूसरी ओर, भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का नेतृत्व सख्त और परिणाम-उन्मुख है। मोदी के नेतृत्व में बीजेपी ने परिणाम देने वाले नेताओं पर भरोसा किया है और यह सुनिश्चित किया है कि पार्टी के भीतर कोई भी नेता पार्टी या उसके नेतृत्व के खिलाफ खुलकर विरोध न कर सके।</p>
<p>इस लेख में हम यह समझने की कोशिश करेंगे कि आखिर कांग्रेस का शीर्ष नेतृत्व लगातार दागी नेताओं पर क्यों निर्भर है, इस निर्भरता के पीछे क्या कारण हैं, और इसका पार्टी के राजनीतिक भविष्य पर क्या असर हो सकता है। इसके साथ ही, हम यह भी देखेंगे कि कैसे नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में बीजेपी ने खुद को एक सशक्त और संगठित पार्टी के रूप में स्थापित किया है।</p>
<p><strong>कांग्रेस की दागी क्षेत्रीय नेताओं पर निर्भरता</strong></p>
<p>कांग्रेस पार्टी की सबसे बड़ी समस्या उसकी क्षेत्रीय राजनीति में नजर आती है, जहां सत्ता और प्रभाव का केंद्रीकरण उन नेताओं के हाथों में है, जो या तो भ्रष्टाचार के आरोपों में लिप्त हैं या जिनकी निष्ठा पार्टी के बजाय उनके निजी स्वार्थों में निहित है।</p>
<p><strong>हरियाणा एक उदाहरण</strong></p>
<p>हरियाणा इसका एक प्रमुख उदाहरण है। यहां पर भूपेंद्र सिंह हुड्डा और उनके परिवार का प्रभाव कांग्रेस के शीर्ष नेतृत्व के लिए चुनौती बन गया है। हुड्डा परिवार ने पार्टी नेतृत्व की इच्छा के बावजूद आम आदमी पार्टी (आप) और समाजवादी पार्टी (सपा) से तालमेल नहीं किया, जिससे कांग्रेस को राज्य में चुनावी हार का सामना करना पड़ा। हरियाणा में जाट और दलित बिरादरी के अलावा यादव समुदाय की भी बड़ी तादाद है, लेकिन कांग्रेस ने यादवों की अनदेखी की। इंदिरा गांधी के समय में यादव बिरादरी के राव वीरेंद्र सिंह मुख्यमंत्री हुआ करते थे, लेकिन इस बार अखिलेश यादव को चुनाव प्रचार के लिए भी आमंत्रित नहीं किया गया।</p>
<p><img loading="lazy" decoding="async" class="aligncenter wp-image-577 size-full" src="https://www.samvaadindia.com/wp-content/uploads/2024/10/PSX_20241013_085213.jpg" alt="" width="589" height="846" srcset="https://www.samvaadindia.com/wp-content/uploads/2024/10/PSX_20241013_085213.jpg 589w, https://www.samvaadindia.com/wp-content/uploads/2024/10/PSX_20241013_085213-209x300.jpg 209w" sizes="auto, (max-width: 589px) 100vw, 589px" /></p>
<p>लालू यादव के परिवार की भी हरियाणा के चुनावों में कोई भूमिका नहीं रही, और इसका परिणाम यह हुआ कि यादव-प्रभावित क्षेत्रों में भी कांग्रेस बुरी तरह से हार गई। इसी तरह दलित-प्रभावित क्षेत्रों में भी कांग्रेस की रणनीति विफल रही। कांग्रेस ने ओबीसी और गैर-जाट वोट बैंक की पूरी तरह से अनदेखी की, जिससे पार्टी का प्रदर्शन अत्यधिक खराब रहा।</p>
<p>यहां पर कांग्रेस का नेतृत्व पूरी तरह से हुड्डा परिवार के प्रभाव में नजर आया। हुड्डा परिवार के सामने गांधी परिवार भी लाचार दिखा। इसका मुख्य कारण हुड्डा का राज्य में व्यक्तिगत प्रभाव और उनका पार्टी के अंदरूनी ढांचे पर नियंत्रण है।</p>
<p><strong>मध्य प्रदेश: कमलनाथ की राजनीति</strong></p>
<p>हरियाणा के बाद, मध्य प्रदेश में भी कांग्रेस की क्षेत्रीय राजनीति दागी नेताओं पर निर्भर रही है। कमलनाथ और दिग्विजय सिंह की जोड़ी ने पहले ज्योतिरादित्य सिंधिया को पार्टी तोड़ने के लिए मजबूर किया, जिससे राज्य में कांग्रेस की सरकार गिर गई।</p>
<p><img loading="lazy" decoding="async" class="aligncenter wp-image-579 size-full" src="https://www.samvaadindia.com/wp-content/uploads/2024/10/PSX_20241013_084819.jpg" alt="" width="381" height="548" srcset="https://www.samvaadindia.com/wp-content/uploads/2024/10/PSX_20241013_084819.jpg 381w, https://www.samvaadindia.com/wp-content/uploads/2024/10/PSX_20241013_084819-209x300.jpg 209w" sizes="auto, (max-width: 381px) 100vw, 381px" /></p>
<p>&nbsp;</p>
<p>इसके बाद हुए चुनावों में कांग्रेस ने समाजवादी पार्टी के साथ तालमेल नहीं किया, और परिणामस्वरूप कांग्रेस को बड़ी हार का सामना करना पड़ा। सिंधिया का बीजेपी में जाना और चुनाव में कांग्रेस का सफाया होना, यह दर्शाता है कि पार्टी का नेतृत्व अपने स्वार्थों के लिए किसी भी हद तक जा सकता है, भले ही इससे पार्टी को नुकसान हो।</p>
<p><strong>राजस्थान: गहलोत और पायलट की गुटबाजी</strong></p>
<p>राजस्थान में कांग्रेस की राजनीति में भी गुटबाजी और आंतरिक संघर्ष हावी है। अशोक गहलोत और सचिन पायलट के बीच की खींचतान ने राज्य में पार्टी की स्थिति को कमजोर कर दिया है। अशोक गहलोत, जो तीन बार मुख्यमंत्री रह चुके हैं, ने अपनी सत्ता की भूख के चलते सचिन पायलट जैसे युवा और उभरते नेता को किनारे कर दिया।</p>
<p><img loading="lazy" decoding="async" class="aligncenter wp-image-580 size-full" src="https://www.samvaadindia.com/wp-content/uploads/2024/10/PSX_20241013_084953-1.jpg" alt="" width="497" height="714" srcset="https://www.samvaadindia.com/wp-content/uploads/2024/10/PSX_20241013_084953-1.jpg 497w, https://www.samvaadindia.com/wp-content/uploads/2024/10/PSX_20241013_084953-1-209x300.jpg 209w" sizes="auto, (max-width: 497px) 100vw, 497px" /></p>
<p>पार्टी के भीतर इस गुटबाजी ने राजस्थान में कांग्रेस की संभावनाओं को बुरी तरह प्रभावित किया। गहलोत की जिद और पायलट के साथ चल रहे संघर्ष ने राज्य में कांग्रेस की पकड़ कमजोर कर दी है। परिणामस्वरूप, विधानसभा चुनावों में कांग्रेस को भारी नुकसान हुआ और राज्य में पार्टी का प्रदर्शन बेहद खराब रहा।</p>
<p><strong>छत्तीसगढ़: भूपेश बघेल और टीएस सिंह देव की प्रतिस्पर्धा</strong></p>
<p>छत्तीसगढ़ में कांग्रेस ने ईमानदार और जनप्रिय नेता टीएस सिंह देव के बजाय दागी भूपेश बघेल को मुख्यमंत्री की जिम्मेदारी सौंपी। भूपेश बघेल पर भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप लगे हैं, लेकिन इसके बावजूद उन्होंने पार्टी के केंद्रीय नेतृत्व को पूरी तरह से अपने नियंत्रण में रखा।</p>
<p><img loading="lazy" decoding="async" class="aligncenter wp-image-581 size-full" src="https://www.samvaadindia.com/wp-content/uploads/2024/10/PSX_20241013_085129.jpg" alt="" width="461" height="662" srcset="https://www.samvaadindia.com/wp-content/uploads/2024/10/PSX_20241013_085129.jpg 461w, https://www.samvaadindia.com/wp-content/uploads/2024/10/PSX_20241013_085129-209x300.jpg 209w" sizes="auto, (max-width: 461px) 100vw, 461px" /></p>
<p>कांग्रेस के अंदरूनी सूत्रों का कहना है कि बघेल के भ्रष्टाचार के कारण ही छत्तीसगढ़ में कांग्रेस की पकड़ कमजोर हो गई। इसके बावजूद, पार्टी नेतृत्व ने बघेल पर अपना भरोसा बनाए रखा। यह दर्शाता है कि कांग्रेस का शीर्ष नेतृत्व स्वच्छ छवि वाले नेताओं के बजाय दागी नेताओं पर अधिक भरोसा करता है, क्योंकि यह उन्हें सत्ता में बने रहने का अवसर देता है।</p>
<p><strong>उत्तर प्रदेश: कमजोर नेतृत्व और लंबे समय से सत्ता से बाहर</strong></p>
<p>उत्तर प्रदेश में कांग्रेस का नेतृत्व भी कमजोर और दिशाहीन है। राज्य में कांग्रेस पिछले 35 साल से अधिक समय से सत्ता से बाहर है, और पार्टी के अधिकांश प्रमुख नेता राज्यसभा के माध्यम से दूसरे राज्यों से आते हैं।</p>
<p>उत्तर प्रदेश, जो भारत का सबसे बड़ा राज्य है, में कांग्रेस की जमीनी पकड़ लगातार कमजोर हो रही है। राज्य में पार्टी का कोई ठोस नेतृत्व नहीं है, और इसके परिणामस्वरूप कांग्रेस उत्तर प्रदेश की राजनीति में हाशिए पर चली गई है। पार्टी का आधार लगातार गिरता जा रहा है, और इसका मुख्य कारण पार्टी नेतृत्व का स्थानीय राजनीति से जुड़ाव न होना और क्षेत्रीय नेताओं की अनदेखी करना है।</p>
<p><strong>कांग्रेस की आंतरिक राजनीति: व्यक्तिगत स्वार्थ और सत्ता की भूख</strong></p>
<p>कांग्रेस की वर्तमान स्थिति का एक प्रमुख कारण उसकी आंतरिक राजनीति में व्याप्त स्वार्थ और सत्ता की भूख है। पार्टी के भीतर कुछ नेताओं का आरोप है कि कांग्रेस का शीर्ष नेतृत्व उन नेताओं पर निर्भर करता है, जो उन्हें वित्तीय सहायता प्रदान कर सकते हैं।</p>
<p>कई विश्लेषकों का मानना है कि कांग्रेस का नेतृत्व स्वच्छ छवि वाले नेताओं को पसंद नहीं करता, क्योंकि ऐसे नेता पार्टी के भीतर व्याप्त भ्रष्टाचार और अनियमितताओं के खिलाफ आवाज उठा सकते हैं। इसलिए, पार्टी का नेतृत्व बार-बार चुनाव हारने के बावजूद उन नेताओं पर निर्भर रहता है, जिनकी निष्ठा पार्टी से ज्यादा उनके व्यक्तिगत स्वार्थों में होती है।</p>
<p><strong>बीजेपी की नेतृत्व शैली: परिणाम-उन्मुख और संगठित</strong></p>
<p>दूसरी ओर, भारतीय जनता पार्टी में नेतृत्व की पूरी संरचना परिणाम-उन्मुख है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बीजेपी को एक संगठित और अनुशासित पार्टी के रूप में स्थापित किया है। मोदी के नेतृत्व में बीजेपी ने केवल उन नेताओं को आगे बढ़ाया है, जो पार्टी के लिए परिणाम देने में सक्षम होते हैं।</p>
<p>बीजेपी में अगर कोई नेता पार्टी की दिशा या नेतृत्व से असंतुष्ट होता है, तो उसे पार्टी से बाहर का रास्ता दिखा दिया जाता है। बीजेपी में नेताओं को पार्टी के साथ पूरी तरह से वफादार होना पड़ता है, और मोदी के खिलाफ बोलने की किसी को छूट नहीं दी जाती।</p>
<p><strong>कांग्रेस के भविष्य पर सवाल</strong></p>
<p>कांग्रेस की वर्तमान स्थिति को देखते हुए, यह स्पष्ट है कि पार्टी का नेतृत्व अपनी आंतरिक राजनीति और दागी नेताओं पर निर्भरता के कारण लगातार कमजोर हो रही है।</p>
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