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	<title>Priyanka gandhi Archives - Samvaad India</title>
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	<title>Priyanka gandhi Archives - Samvaad India</title>
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		<title>केरल त्रासदी पर दलगत राजनीति से ऊपर उठकर काम करें केंद्र सरकार</title>
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		<dc:creator><![CDATA[संवाद इंडिया]]></dc:creator>
		<pubDate>Wed, 04 Dec 2024 13:54:21 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[<p>नई दिल्ली, 4 दिसंबर। कांग्रेस महासचिव और वायनाड से सांसद प्रियंका गांधी वाड्रा ने केरल में हाल ही</p>
<p>The post <a href="https://www.samvaadindia.com/the-central-government-should-work-on-the-kerala-tragedy-by-rising-above-party-politics/">केरल त्रासदी पर दलगत राजनीति से ऊपर उठकर काम करें केंद्र सरकार</a> appeared first on <a href="https://www.samvaadindia.com">Samvaad India</a>.</p>
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										<content:encoded><![CDATA[<p>नई दिल्ली, 4 दिसंबर। कांग्रेस महासचिव और वायनाड से सांसद प्रियंका गांधी वाड्रा ने केरल में हाल ही में आई प्राकृतिक आपदा से प्रभावित लोगों के लिए केंद्र सरकार से त्वरित और पर्याप्त राहत की मांग की है। प्रियंका गांधी ने बुधवार को कांग्रेस महासचिव (संगठन) केसी वेणुगोपाल और केरल के अन्य सांसदों के साथ केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से मुलाकात की। इस दौरान उन्होंने आपदा प्रभावित क्षेत्रों में जीवन को सामान्य बनाने के लिए केंद्र से तुरंत कदम उठाने का आग्रह किया।</p>
<p>बैठक के बाद संवाददाताओं को संबोधित करते हुए प्रियंका गांधी ने कहा, &#8220;यह त्रासदी इतनी बड़ी है कि इसे दलगत राजनीति से ऊपर उठकर देखा जाना चाहिए। वायनाड और अन्य प्रभावित क्षेत्रों में हजारों लोग अपने घरों और आजीविका से वंचित हो गए हैं। ऐसी स्थिति में केंद्र सरकार का समर्थन अत्यंत आवश्यक है।&#8221;</p>
<p>प्रियंका गांधी ने बताया कि प्राकृतिक आपदा के चलते कई परिवार पूरी तरह उजड़ गए हैं, बच्चों ने अपने माता-पिता और पूरे परिवार को खो दिया है। &#8220;अगर इन लोगों को केंद्र सरकार से सहायता नहीं मिलती है, तो वे किस पर भरोसा करेंगे?&#8221; उन्होंने सवाल किया।</p>
<p><strong>चार महीने बाद भी कोई राहत नहीं</strong></p>
<p>कांग्रेस महासचिव ने इस बात पर गहरी नाराजगी व्यक्त की कि आपदा के चार महीने बीत जाने के बावजूद केंद्र सरकार की ओर से कोई ठोस राहत नहीं दी गई है। उन्होंने बताया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आपदा प्रभावित क्षेत्रों का दौरा किया था, जिससे लोगों में राहत की उम्मीद जगी थी, लेकिन अब तक उन्हें निराशा ही हाथ लगी है।</p>
<p>प्रियंका गांधी ने बताया कि प्रतिनिधिमंडल ने गृह मंत्री को ज्ञापन सौंपते हुए वायनाड और आसपास के क्षेत्रों की दुर्दशा के बारे में विस्तार से जानकारी दी। &#8220;हमने उनसे आग्रह किया है कि इस त्रासदी को गंभीरता से लें और जल्द से जल्द आवश्यक धनराशि जारी करें। इससे न केवल प्रभावित लोगों का पुनर्वास हो सकेगा, बल्कि आवश्यक बुनियादी ढांचे की बहाली भी की जा सकेगी।&#8221;</p>
<p>गृह मंत्री अमित शाह ने प्रतिनिधिमंडल को आश्वस्त किया कि गुरुवार शाम तक इस मुद्दे पर केंद्र सरकार की ओर से विस्तृत जानकारी दी जाएगी और आगे की राहत प्रक्रिया पर चर्चा की जाएगी।</p>
<p>दलगत राजनीति से ऊपर उठकर राहत की मांग</p>
<p>प्रियंका गांधी ने कहा कि इस आपदा में सबसे ज्यादा जरूरत इस बात की है कि सभी राजनीतिक दल और सरकारें अपनी जिम्मेदारी समझें और दलगत राजनीति से ऊपर उठकर आपदा राहत कार्यों को प्राथमिकता दें। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि जब इतने बड़े पैमाने पर लोग पीड़ित हैं, तो केवल राजनीति से बचना पर्याप्त नहीं है; उन्हें तुरंत ठोस कदम उठाने की आवश्यकता है।</p>
<p><strong>आपदा से प्रभावित क्षेत्र और चुनौतियां</strong></p>
<p>वायनाड और आसपास के क्षेत्रों में इस प्राकृतिक आपदा ने व्यापक तबाही मचाई है। भारी बारिश और भूस्खलन ने हजारों घरों को नष्ट कर दिया, फसलों को तबाह कर दिया और सैकड़ों लोगों की जान ले ली। प्रियंका गांधी ने बताया कि कई बच्चे अपने पूरे परिवार को खो चुके हैं और अब बेसहारा हो गए हैं।</p>
<p>&#8220;ऐसे हालात में अगर केंद्र सरकार की ओर से मदद नहीं मिलती है, तो यह पीड़ितों के लिए एक और बड़ा आघात होगा। यह न केवल आर्थिक संकट की बात है, बल्कि एक मानवीय संकट है, जिसे तुरंत संबोधित किया जाना चाहिए,&#8221; प्रियंका गांधी ने कहा।</p>
<p><strong>स्थानीय प्रशासन की सीमित क्षमताएं</strong></p>
<p>हालांकि राज्य सरकार और स्थानीय प्रशासन ने अपने स्तर पर राहत कार्यों को अंजाम दिया है, लेकिन इतनी बड़ी आपदा से निपटने के लिए उनके पास संसाधनों की भारी कमी है। प्रियंका गांधी ने बताया कि क्षेत्र की स्थिति को सुधारने के लिए केंद्र की ओर से अधिक वित्तीय और प्रशासनिक सहयोग की आवश्यकता है।</p>
<p><strong>जनता के बीच बढ़ती निराशा</strong></p>
<p>प्रियंका गांधी ने यह भी बताया कि वायनाड और अन्य प्रभावित क्षेत्रों में लोग केंद्र सरकार की उदासीनता से गहरी निराशा में हैं। &#8220;लोगों को लगने लगा है कि उनकी दुर्दशा पर कोई ध्यान नहीं दे रहा है। जब प्रधानमंत्री ने दौरा किया था, तब उन्हें भरोसा हुआ था कि उन्हें सहायता मिलेगी, लेकिन चार महीने के लंबे इंतजार ने उनकी उम्मीदों को तोड़ दिया है।&#8221;</p>
<p><strong>प्रधानमंत्री और गृह मंत्री को ज्ञापन</strong></p>
<p>प्रियंका गांधी ने बताया कि उन्होंने गृह मंत्री के साथ-साथ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को भी ज्ञापन सौंपा है। उन्होंने उम्मीद जताई कि केंद्र सरकार इस मुद्दे पर त्वरित कार्रवाई करेगी और आवश्यक धनराशि और संसाधनों की व्यवस्था करेगी।</p>
<p><strong>पीड़ितों को राहत की दरकार</strong></p>
<p>वायनाड और आसपास के क्षेत्रों में प्राकृतिक आपदा ने लोगों को अभूतपूर्व संकट में डाल दिया है। प्रियंका गांधी और कांग्रेस प्रतिनिधिमंडल का यह कदम प्रभावित लोगों की आवाज को केंद्र तक पहुंचाने का प्रयास है। अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि केंद्र सरकार इस मामले में क्या कदम उठाती है और कितनी जल्दी पीड़ितों को राहत पहुंचाई जाती है।</p>
<p>यह घटना एक बार फिर यह स्पष्ट करती है कि प्राकृतिक आपदाओं से निपटने के लिए केंद्र और राज्य सरकारों के बीच सामंजस्य और त्वरित कार्रवाई की आवश्यकता है। प्रभावित लोग आज भी आशा लगाए बैठे हैं कि उनके दर्द को समझा जाएगा और उन्हें जल्द ही राहत मिलेगी।</p>
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		<title>कांग्रेस कार्यसमिति का प्रस्ताव: भाजपा सरकार पर आरोप, संगठनात्मक सुधार और राष्ट्रीय आंदोलन की घोषणा</title>
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		<dc:creator><![CDATA[संवाद इंडिया]]></dc:creator>
		<pubDate>Fri, 29 Nov 2024 15:02:24 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[<p>नई दिल्ली, 29 नवंबर। संसद के शीतकालीन सत्र के दौरान आज कांग्रेस कार्यसमिति (CWC) की एक महत्वपूर्ण बैठक</p>
<p>The post <a href="https://www.samvaadindia.com/congress-working-committee-proposal-allegations-on-bjp-government-organizational-reforms-and-announcement-of-national-movement/">कांग्रेस कार्यसमिति का प्रस्ताव: भाजपा सरकार पर आरोप, संगठनात्मक सुधार और राष्ट्रीय आंदोलन की घोषणा</a> appeared first on <a href="https://www.samvaadindia.com">Samvaad India</a>.</p>
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										<content:encoded><![CDATA[<p>नई दिल्ली, 29 नवंबर। संसद के शीतकालीन सत्र के दौरान आज कांग्रेस कार्यसमिति (CWC) की एक महत्वपूर्ण बैठक संपन्न हुई। इस बैठक में पार्टी ने देश के समक्ष खड़े ज्वलंत मुद्दों पर विस्तार से चर्चा की और केंद्र की मोदी सरकार को घेरते हुए एक विस्तृत प्रस्ताव पारित किया। इस दौरान पार्टी ने सरकार पर भ्रष्टाचार, सांप्रदायिकता को बढ़ावा देने और संवैधानिक संस्थाओं की स्वतंत्रता पर हमला करने का आरोप लगाया। इसके साथ ही कांग्रेस कार्यसमिति ने आगामी चुनावों के मद्देनजर संगठन को मजबूत करने और जनता से जुड़े मुद्दों को राष्ट्रीय आंदोलन के रूप में उठाने की रणनीति बनाई।</p>
<p><strong>भ्रष्टाचार, मणिपुर हिंसा और सांप्रदायिकता पर मोदी सरकार को कठघरे में खड़ा किया</strong></p>
<p>बैठक के दौरान कांग्रेस ने मोदी सरकार की नीतियों और कार्यप्रणाली पर तीखा हमला किया। कांग्रेस ने हाल ही में एक प्रमुख व्यापारिक समूह से जुड़े भ्रष्टाचार के खुलासे का जिक्र करते हुए इसे प्रधानमंत्री के &#8220;घनिष्ठ संबंध&#8221; से जोड़कर उनकी विश्वसनीयता पर सवाल उठाए। पार्टी ने मणिपुर में जारी हिंसा और मई 2023 के बाद प्रधानमंत्री द्वारा इस अशांत राज्य का दौरा न करने पर गंभीर चिंता व्यक्त की।</p>
<p><img fetchpriority="high" decoding="async" class="aligncenter wp-image-759 size-full" src="https://www.samvaadindia.com/wp-content/uploads/2024/11/20241129_202239.jpg" alt="" width="2048" height="1366" srcset="https://www.samvaadindia.com/wp-content/uploads/2024/11/20241129_202239.jpg 2048w, https://www.samvaadindia.com/wp-content/uploads/2024/11/20241129_202239-300x200.jpg 300w, https://www.samvaadindia.com/wp-content/uploads/2024/11/20241129_202239-1024x683.jpg 1024w, https://www.samvaadindia.com/wp-content/uploads/2024/11/20241129_202239-768x512.jpg 768w, https://www.samvaadindia.com/wp-content/uploads/2024/11/20241129_202239-1536x1025.jpg 1536w" sizes="(max-width: 2048px) 100vw, 2048px" /></p>
<p>कांग्रेस कार्यसमिति ने भाजपा पर सांप्रदायिक तनाव भड़काने का भी आरोप लगाया, खासकर उत्तर प्रदेश में हाल के घटनाक्रमों का जिक्र करते हुए। बैठक में कहा गया कि यह पार्टी की &#8220;सुनियोजित रणनीति&#8221; का हिस्सा है, जिससे देश में सामाजिक सौहार्द और सांप्रदायिक शांति को खतरा है।</p>
<p><strong>पूजा स्थल अधिनियम, 1991 पर प्रतिबद्धता</strong></p>
<p>कांग्रेस कार्यसमिति ने पूजा स्थल (विशेष प्रावधान) अधिनियम, 1991 के प्रति अपनी दृढ़ प्रतिबद्धता दोहराई। इस कानून को सांप्रदायिक सौहार्द बनाए रखने के लिए एक आवश्यक कदम मानते हुए, कांग्रेस ने भाजपा पर इसके &#8220;बेशर्मी से उल्लंघन&#8221; का आरोप लगाया।</p>
<p><strong>चुनावों के नतीजों पर समीक्षा और संगठनात्मक सुधार पर जोर</strong></p>
<p>चार राज्यों में हाल ही में संपन्न विधानसभा चुनावों और वायनाड उपचुनाव के परिणामों पर चर्चा करते हुए कांग्रेस ने मिश्रित प्रतिक्रिया दी। वायनाड में प्रियंका गांधी वाड्रा की भारी जीत को कार्यकर्ताओं और जनता के लिए प्रेरणा स्रोत बताते हुए कांग्रेस ने झारखंड और जम्मू-कश्मीर में अपने गठबंधन की सफलता पर खुशी जताई।</p>
<p>हालांकि, हरियाणा और महाराष्ट्र में पार्टी के प्रदर्शन को &#8220;अपेक्षा से कम&#8221; बताते हुए कांग्रेस ने इसे &#8220;आंतरिक संगठनात्मक कमजोरियों&#8221; और &#8220;बाहरी हस्तक्षेप&#8221; का नतीजा बताया। पार्टी ने चुनावी गड़बड़ियों और हेरफेर की ओर इशारा किया, जिसने परिणामों को प्रभावित किया।</p>
<p><img decoding="async" class="aligncenter wp-image-760 size-full" src="https://www.samvaadindia.com/wp-content/uploads/2024/11/20241129_202228.jpg" alt="" width="2048" height="1366" srcset="https://www.samvaadindia.com/wp-content/uploads/2024/11/20241129_202228.jpg 2048w, https://www.samvaadindia.com/wp-content/uploads/2024/11/20241129_202228-300x200.jpg 300w, https://www.samvaadindia.com/wp-content/uploads/2024/11/20241129_202228-1024x683.jpg 1024w, https://www.samvaadindia.com/wp-content/uploads/2024/11/20241129_202228-768x512.jpg 768w, https://www.samvaadindia.com/wp-content/uploads/2024/11/20241129_202228-1536x1025.jpg 1536w" sizes="(max-width: 2048px) 100vw, 2048px" /></p>
<p>कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे जल्द ही विस्तृत राज्यवार समीक्षा करने और संगठनात्मक बदलाव की घोषणा करने वाले हैं। कार्यसमिति ने सभी स्तरों पर एकता और अनुशासन बनाए रखने की अपील की।</p>
<p><strong>राष्ट्रीय मुद्दों पर कांग्रेस का रोडमैप</strong></p>
<p>कांग्रेस कार्यसमिति ने भारत जोड़ो यात्रा, भारत जोड़ो न्याय यात्रा और लोकसभा चुनाव अभियान के दौरान उठाए गए मुद्दों पर अपनी प्रतिबद्धता दोहराई। इन मुद्दों में जाति जनगणना, आरक्षण सीमा में वृद्धि, बढ़ती बेरोजगारी और मूल्य वृद्धि पर नियंत्रण, और अर्थव्यवस्था में एकाधिकार को रोकने के लिए सख्त कदम शामिल हैं।</p>
<p>कांग्रेस ने जाति जनगणना को &#8220;पूर्ण सामाजिक न्याय&#8221; के लिए आवश्यक बताते हुए अनुसूचित जातियों, अनुसूचित जनजातियों और अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) के लिए आरक्षण पर 50% की सीमा हटाने का आह्वान किया।</p>
<p><strong>चुनावी प्रक्रिया और चुनाव आयोग पर सवाल</strong></p>
<p>कांग्रेस ने देश में स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव सुनिश्चित करने की प्रक्रिया पर भी गंभीर सवाल उठाए। चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली को &#8220;पक्षपातपूर्ण&#8221; बताते हुए पार्टी ने इसे लोकतंत्र के लिए खतरनाक करार दिया। कांग्रेस का मानना है कि चुनावी प्रक्रिया की अखंडता से समझौता किया जा रहा है, जिससे समाज के विभिन्न वर्गों में निराशा और असुरक्षा बढ़ रही है।</p>
<p><strong>राष्ट्रीय आंदोलन की घोषणा</strong></p>
<p>कांग्रेस कार्यसमिति ने देश में बढ़ती सामाजिक, आर्थिक और राजनीतिक असमानताओं को लेकर &#8220;राष्ट्रीय आंदोलन&#8221; छेड़ने की घोषणा की। पार्टी का उद्देश्य इन जनचिंताओं को व्यापक स्तर पर उठाना और सरकार की जवाबदेही सुनिश्चित करना है।</p>
<p><strong>भविष्य की रणनीति</strong></p>
<p>कांग्रेस कार्यसमिति ने सभी राज्यों में अपने संगठन को मजबूत करने, जमीनी स्तर पर कार्यकर्ताओं को प्रेरित करने और आगामी लोकसभा चुनावों के लिए पूरी तैयारी के साथ आगे बढ़ने का आह्वान किया।</p>
<p>कांग्रेस ने स्पष्ट किया कि वर्तमान चुनौतियों का सामना करते हुए पार्टी जनता के हितों की रक्षा के लिए पूरी प्रतिबद्धता के साथ काम करेगी। बैठक के अंत में कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने कहा, &#8220;देश के लोकतंत्र, संविधान और सामाजिक न्याय की रक्षा के लिए कांग्रेस हर चुनौती का सामना करने को तैयार है।&#8221;</p>
<p>इस प्रस्ताव और बैठक में किए गए निर्णय कांग्रेस की राजनीतिक दिशा को निर्धारित करेंगे और आने वाले समय में पार्टी की रणनीति के केंद्र बिंदु होंगे।</p>
<p>The post <a href="https://www.samvaadindia.com/congress-working-committee-proposal-allegations-on-bjp-government-organizational-reforms-and-announcement-of-national-movement/">कांग्रेस कार्यसमिति का प्रस्ताव: भाजपा सरकार पर आरोप, संगठनात्मक सुधार और राष्ट्रीय आंदोलन की घोषणा</a> appeared first on <a href="https://www.samvaadindia.com">Samvaad India</a>.</p>
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		<title>नीट को लेकर गरीब ग्रामीण नौजवानों की दुहाई दे रही है सरकार और विपक्ष, नौजवानों में असंतोष और आक्रोश</title>
		<link>https://www.samvaadindia.com/government-and-opposition-are-appealing-to-the-youth-of-poor-rural-areas-regarding-neet-examinations-dissatisfaction-and-anger-among-the-youth/</link>
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		<dc:creator><![CDATA[संवाद इंडिया]]></dc:creator>
		<pubDate>Fri, 21 Jun 2024 03:24:10 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[उत्तर प्रदेश]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>(वसिंद्र मिश्र) नई दिल्ली 21 जून। नीट की परीक्षाओं में हुई धांधली को लेकर देश के नौजवान आंदोलित</p>
<p>The post <a href="https://www.samvaadindia.com/government-and-opposition-are-appealing-to-the-youth-of-poor-rural-areas-regarding-neet-examinations-dissatisfaction-and-anger-among-the-youth/">नीट को लेकर गरीब ग्रामीण नौजवानों की दुहाई दे रही है सरकार और विपक्ष, नौजवानों में असंतोष और आक्रोश</a> appeared first on <a href="https://www.samvaadindia.com">Samvaad India</a>.</p>
]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p>(वसिंद्र मिश्र) नई दिल्ली 21 जून। नीट की परीक्षाओं में हुई धांधली को लेकर देश के नौजवान आंदोलित हैं, उद्दवलित है, देश की प्रमुख विपक्षी पार्टियां भी आन्दोलित है और कांग्रेस पार्टी के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी से लेकर इंडिया गठबंधन के लगभग सभी नेताओं ने नीट परीक्षा में हुई कथित धाधली के खिलाफ अपनी आवाज़ बुलंद की है। विपक्ष के आरोपों की सफाई देने के लिए देश के शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान मीडिया से मुखातिब हुए हैं। धर्मेंद्र प्रधान के मीडिया की साथ जो चर्चा हुई है उसको भी आप लोगो ने अलग-अलग समाचार माध्यमों के जरिए देखा है, सुना है, अब तक आप लोगों ने पढ़ लिया होगा मैं यहां पर इन दोनों नेताओं की प्रेस कॉन्फ्रेंसेज और उन प्रेस कॉन्फ्सेज के आधार पर कई सवाल उपजे हैं जिनके जवाब जरूरी है।<br />
सबसे पहले हम चर्चा करते हैं देश के शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान की तरफ से प्रेस कॉन्फ्र्स के जरिए नीट परीक्षा में शामिल लाखों युवा को आश्वस्त करने वाली बातों को लेके धर्मेंद्र प्रधान ने प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान आज पहली बार यह स्वीकार किया है कि इस परीक्षा में हुई कथित गड़बड़ी और खामियों के लिए वे खुद को नैतिक रूप से जिम्मेदार मानते हैं। उन्होंने यह भी ऐलान किया है, कि सरकार जल्दी ही एक हाई पावर कमेटी बनाएगी और उस हाई पावर कमेटी में हाई लेवल के टेक्नोक्रैट, ब्यूरोक्रैट, एडमिनिस्ट्रेटर, शिक्षाविद, समाज के अलग-अलग क्षेत्रों के जो एक्सपर्ट होंगे उनको शामिल किया जाएगा, और उस कमेटी की रिकमेन्डेशन आने के बाद एनटीए के स्ट्रक्चर, एनटीए के आमूलचूल परिवर्तनों और सुधार के बारे में विचार किया जाएगा। एक और बात उन्होंने बार &#8211; बार दोहराया है कि मैं विपक्ष के नेताओं से गरीब छात्रों के हित में अपील कर रहा हूँ कि नीट की परीक्षा का राजनीतिकरण न करें, नीट की परीक्षा के राजनीतिकरण से देश के लाखों गरीब छात्रों का भविष्य दांव पर लग जाया, उन्होंने यह भी कहा है कि पिछले सरकार ने संसद में एंटी चीटिंग एक्ट बनाने के लिए बिल पास कर दिया था, और उस बिल में पारित प्राविधान के तहत देश का कानून मंत्रालय जल्दी ही एक विस्तृत नोटिफिकेशन जारी करेगा और उस एंटी चीटिंग बिल के कानून बनने के बाद इस तरह के जो आरोप है, इस तरह की जो गड़बढ़िया हैं, जो देश के अलग-अलग राज्यों में केंद्रीय परीक्षाओं में समय &#8211; समय पर देखने को &#8211; सुनने को मिलती है उस पर अंकुश लगाया जा सकता है अब सवाल यह उठता है कि<br />
क्या महज कानून बना देने से किसी अपराधिक मामले पर लगाम लगाया जा सकता है?<br />
हमारे देश में तमाम इस तरह के कानून मौजूद हैं। चाहे महिलाओं के खिलाफ अत्याचार रोकने का सवाल हो, एस. सी. एस. टी. के खिलाफ रोज होने वाले उत्पीड़न का सवाल हो या इस तरह के तमाम और सामाजिक बुराइयों, और राजनैतिक बुराइयों से लड़ने के लिए या करप्शन को रोकने का सवाल हो इस पर सैकड़ों कानून बने हुए अलग-अलग राज्यों और देश में, तो क्या इन कानूनों ने हमारे समाज के अंदर हमारे देश के अलग-अलग राज्यों में इस तरह की बुराइयों को पूरी तरह से समाप्त कर दिया है, लगाम लगा दिया है। क्या हमने कुछ साल पहले मध्यप्रदेश में हुए व्यापम घोटाले से अब तक कोई सबक नहीं लिया है?</p>
<p><img decoding="async" class="alignnone size-medium wp-image-409" src="https://www.samvaadindia.com/wp-content/uploads/2024/06/images-20-300x193.jpeg" alt="" width="300" height="193" srcset="https://www.samvaadindia.com/wp-content/uploads/2024/06/images-20-300x193.jpeg 300w, https://www.samvaadindia.com/wp-content/uploads/2024/06/images-20-1024x660.jpeg 1024w, https://www.samvaadindia.com/wp-content/uploads/2024/06/images-20-768x495.jpeg 768w, https://www.samvaadindia.com/wp-content/uploads/2024/06/images-20-1536x990.jpeg 1536w, https://www.samvaadindia.com/wp-content/uploads/2024/06/images-20-2048x1321.jpeg 2048w" sizes="(max-width: 300px) 100vw, 300px" /></p>
<p>क्या हमने अब तक अलग-अलग राज्यों में हुए तमाम प्रतियोगी परीक्षाओं के पेपर लीक होने से लेकर उसके कैंसिलेशन तक से कोई सबक नहीं लिया है?<br />
क्या महज कानून बनाना ही इस तरह की बुराइयों पर लगाम लगाना है?<br />
एंटी चीटिंग एक्ट संभवतः जितनी मेरी जानकारी है उसमें देश में सबसे पहले राजनाथ सिंह ने उत्तर प्रदेश में बनाई थी जब राजनाथ सिंह उत्तर प्रदेश की सरकार में शिक्षा मंत्री थे उस समय उत्तर प्रदेश में भारतीय जनता पार्टी की सरकार थी, कल्याण सिंह उस सरकार के मुख्यमंत्री थे। राजनाथ सिंह बहैसियत शिक्षा मंत्री नकल विरोधी कानून बनाए थे और उसके बाद जब चुनाव हुआ तो बीजेपी सत्ता से बेदखल हो गई उसके बाद राज्य में जो सरकार बनी थी उसने उस कानून में बदलाव किया और जब तक वह कानून रहा तब तक उत्तर प्रदेश में हुई परीक्षाओं में तमाम ऐसे लड़के &#8211; लड़किया जेल भेज दिए गए जिनकी कोई बडी गलती नहीं थी जो अभी तक का अनुभव बताता है कि ज्यादातर मामलों में ज्यादातर वक्त में बने कानूनों का सत्ता में बैठे हुए प्रशासनिक अधिकारी अपनी सुविधा के अनुसार उसका दुरुपयोग करते रहे हैं तो क्या जिस तरह से देश में बने अलग-अलग वक्त में अलग-अलग अपराधों की प्रकृति को रोकने के लिए जो कानून बने हैं उन्हीं कड़ी में एक और यह कानून शक्ल लेगा जो कि कुछ पिछले कार्यकाल में नरेंद्र मोदी की सरकार ने संसद के दोनों सदनों से पारित किया था और उसका नोटिफिकेशन होने वाला है जिसकी औपचारिक घोषणा आज देश के शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने की है । एक और जो महत्वपूर्ण सवाल धर्मेंद्र प्रधान से जब पूछा गया तो उनका यह कहना था कि यूजीसी नेट की परीक्षा को कैंसिल करने के पीछे देश के गृह मंत्रालय की तरफ से उनको जानकारी मिली थी। वह जानकारी पुख्ता थी इसलिए उस जानकारी के आधार पर यूजीसी नेट की परीक्षा कैंसल की गई तो नीट की परीक्षा के बारे में भी तो बिहार की सरकार और वहां के जांच एजेंसियों ने कई हफ्ते पहले केंद्र की सरकार और जो परीक्षा आयोजित करती है उस संस्था को और शिक्षा मंत्रालय को जानकारी दे दी थी बावजूद उसके अभी तक नीट के बारे में सरकार ने कोई तार्किक निर्णय क्यों नहीं लिया?<br />
क्या सरकार अभी तक विपक्ष के राजनैतिक प्रेसर का इंतजार कर रही थी?<br />
क्या आज सरकार को लगा नीट के सवाल पर नीट की परीक्षा में हुई कथित धांधली के सवाल पर जिस तरह से आक्रामक मुद्रा में राहुल गांधी से ले के विपक्ष के बाकी नेताओं के तरफ से देखने को मिल रहा है वह आने वाले संसद के सत्र में सरकार के लिए मुश्किल पैदा कर सकता है देश के नौजवानों में सरकार के प्रति नाराजगी और असंतोष बढ़ा सकता है देश की पूरी की पूरी परीक्षा प्रणाली पर एक सवालिया निशान खड़ा कर सकता है और नेट जैसे उच्च स्तरीय संस्था पर उसकी विश्वसनीयता पर सवाल खड़ा कर सकता है इसलिए आज देश के शिक्षा मंत्री को मीडिया के सामने मुखातिब होना पडा है और आज उन्होंने नैतिक तौर पर अपनी जिम्मेदारी ली है, ज़िम्मेदारी स्वीकार की। हम सब जानते हैं कि जिस समय सेंट्रलाइज़ एडमिशन सिस्टम को लेकर केंद्र की सरकार कानून बना रही थी और इस संस्था का गठन कर रही थी तब से लगातार दक्षिण भारत के राज्यों की तरफ से इसका विरोध होता रहा। तमिलनाडु की तरफ से लगातार इस बात का आरोप लगाया जाता रहा कि नेट के जरिए दक्षिण भारत के राज्यों के नौजवानों के साथ, अभ्यर्थियों के साथ नाइंसाफी करने की तैयारी चल रही है। यह कानून जब बना, यह संस्था जब बनी अपने गठन के वक्त से ही लगातार विवादों में रही है लेकिन सरकार ने उन सभी आपत्तियों को, उन सभी आशंकाओं को सिरे से खारिज करते हुए इस संस्था का गठन किया और उस संस्था को प्रतियोगी परीक्षाओं को आयोजित करने की जिम्मेदारी सौंप दी । हम सबने देखा है कि शुरुआती दौर में पहले संस्था के एक अधिकारी की तरफ से, फिर देश के शिक्षा मंत्री की तरफ से नीट में हुई कथित धांधली के आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया गया था और जब एक &#8211; एक कर के लोग गिरफ्तार हो रहे है, अब एक &#8211; एक करके जब उसके तार एक-दूसरे से जुड़ते नजर आ रहा है जब एक &#8211; एक करके इस कथित घोटाले का केंद्र देश के कुछ राज्य बनते दिखाई दे रहे हैं तब केंद्र के शिक्षा मंत्री और उनकी विभाग की तरफ से पूरे मामले के उच्च स्तरीय जांच कराने की मांगों को स्वीकार कर लिया गया है, अब अभी तक जो उच्च स्तरीय कमेटी बनने जा रही है उसका नोटिफिकेशन नहीं जारी हुआ उस उच्चस्तरीय कमेटी में कौन-कौन मेम्बर होगा उनके नामों का भी ऐलान नहीं हुआ।</p>
<p>अब हम आते हैं राहुल गांधी की आज की प्रेस कॉन्फ्रेंस पर, राहुल गांधी ने आज एक बार फिर सीधे तौर पर भारतीय जनता पार्टी, संघ परिवार और उनसे जुडे हुए पदाधिकारियों और अधिकारियों पर हमला बोला है। उन्होंने अपने प्रेस कॉन्फ्रेंस में सीधे तौर पर आरोप लगाया है, कि देश के तमाम संस्थाओं पर एक विचारधारा विशेष के लोगों के नियुक्ति हो रही है और उस विचारधारा विशेष के लोगों के जो क्षमता है जो उनकी विश्वसनीयता है वह इस लायक नहीं है, कि वे इतने महत्वपूर्ण संस्थानों के मुखिया के रूप में इस तरह की परीक्षाओं का बिना किसी विवाद के, बिना किसी आरोप के उसका आयोजन कर सके उसको संपन्न करा सके। राहुल गांधी ने यह भी आरोप लगाया है कि पिछले 10 वर्षों से लगातार देश के लगभग सभी संस्थाओं पर एक विचारधारा विशेष के लोगों को तैनात किया जाता रहा है और इस तैनाती में क्षमता योग्यता और विश्वसनीयता की अनदेखी की जाती रही है जिसका नतीजा है कि ज्यादातर संस्थाए पीछे होती जा रही है। उन संस्थाओं का प्रदर्शन गिरता जा रहा है उनका शासन बहुत ही खराब होता जा रहा है। राहुल गांधी ने सीधे प्रधानमंत्री पर भी आरोप लगाया है और उन्होंने कहा है कि प्रधानमंत्री की कोशिश इस समय देश के नौजवानो की समस्याओं के निराकरण से ज्यादा लोकसभा में स्पीकर कौन होगा इसके चयन को लेके हैं। प्रधानमंत्री की सारी चिंता इस बात की है कि किसी भी तरह से लोकसभा के स्पीकर के पद पर अपने पसंदीदा व्यक्ति की तैनाती कराई जाए उनका यह भी आरोप है कि प्रधानमंत्री से लेकर उनकी पूरी की पूरी सरकार पारदर्शिता और विश्वसनीयता से काम नहीं कर रहे। यही कारण है कि चाहे नेट की परीक्षा हो या नीट की परीक्षा हो या अलग-अलग राज्यों में पिछले कुछ वर्षों में हुई पेपर लीक की घटनाएं हों उन सभी मामलों में सरकार का प्रदर्शन संस्थाओं का प्रदर्शन बेहद निराशाजनक और लचर रहा है, उन्होंने मांग की है कि नीट की कथित घोटाले के जांच के साथ &#8211; साथ इस पूरे मामले में यथा शीघ्र तार्किक कार्रवाई होनी चाहिए जिससे कि देश के लाखों नौजवानों का भविष्य बचाया जा सके। अब दोनों तरफ से देश के नौजवानों के भविष्य की दुहाई दी जा रही है आपने सुना होगा कि देश के शिक्षा मंत्री भी अपने बचाव में देश के उन तमाम गरीब ग्रामीण क्षेत्र के नौजवानों के भविष्य की दुहाई दे रहे और विपक्ष से अपील कर रहे हैं कि वे देश के लाखों गरीब ग्रामीण क्षेत्र के नौजवानों के भविष्य को ध्यान में रखते हुए नीट की परीक्षा पर किसी भी तरह का संदेह पैदा न करें और राहुल गांधी भी देश के उन्ही लाखों गरीब वंचित नौजवानों की बात कर रहे हैं और कह रहे हैं इस सरकार की तरफ से, सरकार द्वारा अपॉइंटेड एजेंसीज की तरफ से, सरकार द्वारा गठित संस्थाओं की तरफ से और सरकार द्वारा इन संस्थाओं में अप्वाइंटेड अधिकारियों की तरफ से जो काम हो रहा है उनके चलते देश के लाखों &#8211; लाखों नौजवान अपने भविष्य को डूबता देख रहा है और यह बहुत गंभीर विषय है, देश के भविष्य का सवाल है क्योंकि अगर देश के नौजवान का भविष्य सुरक्षित नहीं होगा तो देश का भी भविष्य सुरक्षित नहीं होगा। अब इससे एक बात बिल्कुल तय है कि संसद के आने वाले सत्र में लोकसभा के स्पीकर का चयन तो प्राथमिकता पर है टॉप एजेंडा है लेकिन उसके साथ ही संपूर्ण विपक्ष की कोशिश है कि नीट और नेट जैसे परीक्षाओं में कोई कथित धाधली को लेकर सरकार के घेरा बंदी किया जाए सरकार को कठघरे में खड़ा किया जाए और देश के लाखों नौजवानों को न्याय दिलाया जाए और ये जो कथित घोटाला हुआ है इसकी जांच करके इस घोटाले में शामिल व्यक्तियों और विरोह को कठोर से कठोर कार्रवाई कराई जाए। उनके विरुद्ध कठोर से कठोर दंड दिया जाए। अभी सरकार को तय करना है कि सरकार विपक्ष के इस आक्रमक रुख को देखते हुए सरकार लाखों नौजवानों के असंतोष और आक्रोश को देखते हुए कितना जल्दी सुधारात्मक उपाय करती है या अभी इस मामले को कुछ दिन और टालने की पक्षधर है लेकिन एक बात तय है कि पिछले कुछ दिनों से लगातार सरकार पर दबाव बढता जा रहा है और यह भी तय है कि नौजवानों की नाराजगी सरकार के प्रति लगातार और उग्र होती जा रही सबसे दिलचस्प बात यह है कि नीट की परीक्षा में हुए कथित घोटाले को लेकर अन्य छात्र संगठनों के साथ &#8211; साथ भारतीय जनता पार्टी से जुड़े अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद की तरफ से भी विरोध किया जा रहा है और परीक्षा में हुई कथित धांधली के खिलाफ आवाज़ उठाई जा रही है। वैसे एक बात बिल्कुल तय है कि नीट की परीक्षा में हुई कथित धांधली के मामले में पार्टी से हट कर नौजवानों का गुस्सा लगातार बढ़ रहा है। बेहतर होगा कि सरकार नौजवानों के इस बढ़ते गुस्से का आकलन करके इस पर जल्दी से जल्दी कोई फैसला ले और नौजवानों के वक्त और उनके भविष्य के साथ न्याय करें।</p>
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