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	<title>Mayawati Archives - Samvaad India</title>
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	<title>Mayawati Archives - Samvaad India</title>
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		<title>दक्षिण भारत में संगठन विस्तार और सामाजिक समावेश पर बसपा सुप्रीमो मायावती का फोकस</title>
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		<dc:creator><![CDATA[संवाद इंडिया]]></dc:creator>
		<pubDate>Sat, 19 Apr 2025 14:52:19 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[अंतरराष्ट्रीय]]></category>
		<category><![CDATA[खास खबर]]></category>
		<category><![CDATA[ब्रेकिंग]]></category>
		<category><![CDATA[Bsp]]></category>
		<category><![CDATA[BSP supremo Mayawati's focus is on organisational expansion and social inclusion in South India]]></category>
		<category><![CDATA[Mayawati]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>भाषा विवाद, जनगणना व शिक्षा नीति को लेकर केंद्र पर साधा निशाना नई दिल्ली/लखनऊ 19 अप्रैल। बहुजन समाज</p>
<p>The post <a href="https://www.samvaadindia.com/bsp-supremo-mayawatis-focus-is-on-organisational-expansion-and-social-inclusion-in-south-india/">दक्षिण भारत में संगठन विस्तार और सामाजिक समावेश पर बसपा सुप्रीमो मायावती का फोकस</a> appeared first on <a href="https://www.samvaadindia.com">Samvaad India</a>.</p>
]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p style="text-align: center;"><strong>भाषा विवाद, जनगणना व शिक्षा नीति को लेकर केंद्र पर साधा निशाना</strong></p>
<p>नई दिल्ली/लखनऊ 19 अप्रैल। बहुजन समाज पार्टी (बसपा) की राष्ट्रीय अध्यक्ष और उत्तर प्रदेश की पूर्व मुख्यमंत्री मायावती ने शुक्रवार को दक्षिण भारत, महाराष्ट्र और गुजरात जैसे राज्यों में पार्टी संगठन को मजबूत करने की दिशा में कमर कस ली है। उन्होंने दिल्ली में एक उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक कर पार्टी की रणनीति तय करते हुए साफ संकेत दिया कि बसपा अब केवल उत्तर भारत तक सीमित नहीं रहना चाहती, बल्कि देश के उन हिस्सों में भी अपनी उपस्थिति मजबूत करना चाहती है जहां सामाजिक न्याय और बहुजन आंदोलन की गुंजाइश मौजूद है।</p>
<blockquote class="twitter-tweet" data-width="550" data-dnt="true">
<p lang="hi" dir="ltr">1. पश्चिम के महाराष्ट्र, गुजरात तथा दक्षिण भारत के कर्नाटक, तमिलनाडु व केरल में बीएसपी संगठन के गठन की तैयारी व मजबूती एवं पार्टी के जनाधार को बढ़ाने आदि पर दिल्ली में हुई बैठक में गहन समीक्षा व आगे पूरे तन, मन, धन से पार्टी के कार्यों को दिशा-निर्देशानुसार बढ़ाने का संकल्प।</p>
<p>&mdash; Mayawati (@Mayawati) <a href="https://twitter.com/Mayawati/status/1913463900617560509?ref_src=twsrc%5Etfw">April 19, 2025</a></p></blockquote>
<p><script async src="https://platform.twitter.com/widgets.js" charset="utf-8"></script></p>
<p>बैठक के बाद मायावती ने अपने आधिकारिक ट्विटर अकाउंट से किए गए सिलसिलेवार ट्वीट्स में पार्टी की आगामी रणनीति का खाका प्रस्तुत किया। उन्होंने कहा कि महाराष्ट्र, गुजरात, कर्नाटक, तमिलनाडु और केरल जैसे राज्यों में बसपा संगठन को पुनर्गठित करने और उसे मजबूती देने की दिशा में गंभीर प्रयास किए जा रहे हैं। पार्टी ने इन राज्यों में जनाधार बढ़ाने और जनसंवाद को तीव्र करने के लिए स्थानीय स्तर पर बैठकों, कार्यकर्ता प्रशिक्षण और जमीनी मुद्दों को प्रमुखता देने की योजना बनाई है।</p>
<p>मायावती ने अपने ट्वीट में लिखा, &#8220;दिल्ली में हुई गहन समीक्षा बैठक में यह निर्णय लिया गया कि पूरे तन, मन, धन से पार्टी के कार्यों को दिशा-निर्देशानुसार बढ़ाने का संकल्प लिया गया है।&#8221; यह बयान न केवल बसपा के भावी रणनीतिक विस्तार की झलक देता है, बल्कि यह भी दर्शाता है कि पार्टी अब अन्य दलों के पारंपरिक प्रभाव क्षेत्रों में चुनौती देने को तैयार है।</p>
<blockquote class="twitter-tweet" data-width="550" data-dnt="true">
<p lang="hi" dir="ltr">2. जनगणना व उसके आधार पर लोकसभा सीटों का पुनः आवंटन, नई शिक्षा नीति व भाषा थोपने आदि के इन राज्यों व केन्द्र के बीच विवाद के राजनीतिक स्वार्थ के लिए उपयोग से जन व देशहित का प्रभावित होना स्वाभाविक। गुड गवरनेन्स वही जो पूरे देश को संविधान के हिसाब से साथ लेकर चले।</p>
<p>&mdash; Mayawati (@Mayawati) <a href="https://twitter.com/Mayawati/status/1913463766202581231?ref_src=twsrc%5Etfw">April 19, 2025</a></p></blockquote>
<p><script async src="https://platform.twitter.com/widgets.js" charset="utf-8"></script></p>
<p>इस क्रम में उन्होंने दक्षिण भारत में उभरते विवादों पर भी चिंता जाहिर की, जिनमें जनगणना आधारित लोकसभा सीटों का पुनःआवंटन, नई शिक्षा नीति और हिंदी भाषा थोपे जाने जैसे मुद्दे प्रमुख हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि केंद्र सरकार इन मसलों का इस्तेमाल अपने राजनीतिक स्वार्थों की पूर्ति हेतु कर रही है, जिससे न केवल आमजन बल्कि देश की एकता और विविधता पर भी प्रतिकूल असर पड़ सकता है। मायावती ने स्पष्ट किया कि ‘गुड गवर्नेंस’ वही है जो देश के संविधान के अनुरूप कार्य करे और सभी क्षेत्रों, भाषाओं और जातियों के बीच समानता बनाए रखे।</p>
<p>जनगणना को लेकर उन्होंने विशेष चिंता व्यक्त की और कहा कि इसके आधार पर लोकसभा सीटों का पुनःआवंटन करना दक्षिण भारत के राज्यों के प्रति अन्यायपूर्ण होगा। उन्होंने इशारा किया कि जनसंख्या वृद्धि की तुलना में शिक्षा, स्वास्थ्य, मानव संसाधन विकास जैसे क्षेत्रों में योगदान को भी महत्व दिया जाना चाहिए, न कि केवल जनसंख्या आंकड़ों को। &#8220;यह स्वाभाविक है कि जब किसी क्षेत्र की अवहेलना होती है, तो वहां से रोष भी उत्पन्न होता है,&#8221; उन्होंने लिखा।</p>
<blockquote class="twitter-tweet" data-width="550" data-dnt="true">
<p lang="hi" dir="ltr">3. वैसे भी सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाले खासकर शोषित-उपेक्षित गरीबों, दलितों, आदिवासियों व पिछड़े वर्ग आदि के बच्चे-बच्चियाँ अंग्रेजी का ज्ञान अर्जित किए बिना आगे चलकर आईटी व स्किल्ड क्षेत्र में कैसे आगे बढ़़ सकते हैं, सरकार इस बात का जरूर ध्यान रखे। भाषा के प्रति नफरत अनुचित।</p>
<p>&mdash; Mayawati (@Mayawati) <a href="https://twitter.com/Mayawati/status/1913463768211730821?ref_src=twsrc%5Etfw">April 19, 2025</a></p></blockquote>
<p><script async src="https://platform.twitter.com/widgets.js" charset="utf-8"></script></p>
<p>मायावती ने तीसरे ट्वीट में सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाले गरीब, दलित, आदिवासी और पिछड़े वर्गों के बच्चों की शिक्षा की गुणवत्ता पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि आज भी इन वर्गों के बच्चे अंग्रेज़ी भाषा में दक्षता न होने के कारण आईटी और स्किल क्षेत्रों में पिछड़ रहे हैं। उन्होंने सरकार से अपील की कि शिक्षा नीति बनाते समय इन वर्गों की वास्तविकता को ध्यान में रखा जाए और भाषा के आधार पर भेदभाव या श्रेष्ठता बोध उत्पन्न करने की प्रवृत्ति से बचा जाए।</p>
<p>&#8220;भाषा के प्रति नफरत अनुचित है,&#8221; उन्होंने दो टूक लिखा। यह बयान न केवल दक्षिण भारत में हिंदी के विरोध में उठ रही आवाजों के प्रति सहानुभूति का प्रतीक है, बल्कि बहुभाषी भारत के सामाजिक ताने-बाने को बनाए रखने की अपील भी है। उन्होंने केंद्र सरकार को सलाह दी कि वह संघीय ढांचे की गरिमा को बनाए रखे और शिक्षा, संस्कृति तथा भाषा जैसे विषयों में राज्यों के अधिकारों का सम्मान करे।</p>
<p>विश्लेषकों का मानना है कि मायावती का यह बयान केवल एक राजनीतिक रणनीति नहीं, बल्कि सामाजिक न्याय और संवैधानिक मूल्यों की पुनर्पुष्टि है। जहां अन्य दल राष्ट्रीय स्तर पर जातिगत समीकरण साधने में लगे हैं, वहीं बसपा एक बार फिर से अपनी मूल विचारधारा की ओर लौटती नजर आ रही है — एक ऐसी राजनीति जो वंचितों, शोषितों और हाशिये पर खड़े समाजों के लिए समर्पित है।</p>
<p>राजनीतिक विशेषज्ञ यह भी मानते हैं कि 2024 के लोकसभा चुनावों के बाद बसपा अपनी खोई हुई ज़मीन को वापस पाने के लिए न केवल उत्तर प्रदेश में, बल्कि देश के अन्य हिस्सों में भी सामाजिक मुद्दों को केंद्र में रखकर आगे बढ़ रही है। दक्षिण भारत में संगठन विस्तार की योजना उसी दिशा में एक बड़ा कदम मानी जा रही है।</p>
<p>अंत में, मायावती का यह बयान एक व्यापक संदेश देता है कि देश की राजनीति को केवल वोट बैंक तक सीमित न रखकर उसे एक संवेदनशील, समावेशी और समानतावादी दिशा में ले जाना ज़रूरी है। चाहे वह जनगणना आधारित सीट बंटवारा हो, नई शिक्षा नीति हो या भाषा नीति — हर निर्णय को संवैधानिक मूल्यों और सामाजिक न्याय के तराजू पर तोलना ही लोकतांत्रिक मर्यादा की पहचान है।</p>
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		<title>मायावती ने जताई महाराष्ट्र की घटना पर चिंता, घटना को बताया शर्मनाक</title>
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		<dc:creator><![CDATA[संवाद इंडिया]]></dc:creator>
		<pubDate>Thu, 12 Dec 2024 03:48:18 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[अंतरराष्ट्रीय]]></category>
		<category><![CDATA[महाराष्ट्र]]></category>
		<category><![CDATA[लोकसभा चुनाव 2024]]></category>
		<category><![CDATA[Bsp]]></category>
		<category><![CDATA[called it shameful]]></category>
		<category><![CDATA[Mayawati]]></category>
		<category><![CDATA[Mayawati expressed concern over the incident in Maharashtra]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>लखनऊ 12 दिसंबर। बहुजन समाज पार्टी (बसपा) की सुप्रीमो मायावती ने महाराष्ट्र के परभणी जिले में घटित एक</p>
<p>The post <a href="https://www.samvaadindia.com/mayawati-expressed-concern-over-the-incident-in-maharashtra-called-it-shameful/">मायावती ने जताई महाराष्ट्र की घटना पर चिंता, घटना को बताया शर्मनाक</a> appeared first on <a href="https://www.samvaadindia.com">Samvaad India</a>.</p>
]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p>लखनऊ 12 दिसंबर। बहुजन समाज पार्टी (बसपा) की सुप्रीमो मायावती ने महाराष्ट्र के परभणी जिले में घटित एक घटना पर तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त की है। यह घटना डॉ. भीमराव अंबेडकर की प्रतिमा और भारतीय संविधान के अपमान से संबंधित है। मायावती ने अपने आधिकारिक सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म &#8216;एक्स&#8217; पर एक पोस्ट के माध्यम से इस घटना को &#8220;अति-निंदनीय और शर्मनाक&#8221; करार दिया।</p>
<blockquote class="twitter-tweet" data-width="550" data-dnt="true">
<p lang="hi" dir="ltr">1. महाराष्ट्र राज्य के परभणी में स्थित भारतरत्न बाबा साहेब डा. भीमराव अम्बेडकर की प्रतिमा एवं संविधान का किया गया अपमान अति-निन्दनीय व शर्मनाक। इस घटना से पार्टी काफी दुःखी व चिन्तित भी है।<br />(1/2)</p>
<p>&mdash; Mayawati (@Mayawati) <a href="https://twitter.com/Mayawati/status/1867028995856081352?ref_src=twsrc%5Etfw">December 12, 2024</a></p></blockquote>
<p><script async src="https://platform.twitter.com/widgets.js" charset="utf-8"></script></p>
<p>उन्होंने लिखा कि इस कृत्य ने संविधान निर्माता और भारत रत्न बाबा साहेब डॉ. भीमराव अंबेडकर के प्रति समाज में गहरी असंवेदनशीलता और जातिवादी मानसिकता को उजागर किया है। बसपा प्रमुख ने घटना को लेकर अपनी पार्टी की गहरी चिंता और दुःख व्यक्त किया। उन्होंने इसे न केवल बाबा साहेब का बल्कि पूरे संविधान और उस विचारधारा का अपमान बताया, जिसने भारत को सामाजिक समानता और न्याय का आदर्श दिया।</p>
<p><img fetchpriority="high" decoding="async" class="size-full wp-image-816 aligncenter" src="https://www.samvaadindia.com/wp-content/uploads/2024/12/Screenshot_20241212_085756_WhatsApp-scaled.jpg" alt="" width="2560" height="1768" srcset="https://www.samvaadindia.com/wp-content/uploads/2024/12/Screenshot_20241212_085756_WhatsApp-scaled.jpg 2560w, https://www.samvaadindia.com/wp-content/uploads/2024/12/Screenshot_20241212_085756_WhatsApp-300x207.jpg 300w" sizes="(max-width: 2560px) 100vw, 2560px" /></p>
<p>मायावती ने अपने संदेश में महाराष्ट्र की सरकार से मांग की कि वह इस मामले में जातिवादी और असामाजिक तत्वों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई करे। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि समय रहते दोषियों के खिलाफ कार्रवाई नहीं की गई, तो राज्य में हालात बिगड़ सकते हैं। उन्होंने इस घटना को भारतीय समाज की सामाजिक एकता के लिए बड़ा खतरा बताया।</p>
<p>बसपा सुप्रीमो ने अपनी अपील में सभी नागरिकों से शांति बनाए रखने और कानून-व्यवस्था का पालन करने का अनुरोध किया। उन्होंने कहा कि हिंसा और अशांति किसी भी समस्या का समाधान नहीं है, बल्कि न्याय के लिए कानूनी और लोकतांत्रिक प्रक्रिया अपनाना सबसे सही रास्ता है।</p>
<p><strong>घटना का सामाजिक और राजनीतिक प्रभाव</strong></p>
<p>डॉ. भीमराव अंबेडकर की प्रतिमा और संविधान का अपमान केवल एक घटना नहीं है, बल्कि यह भारतीय समाज में मौजूद जातिवादी मानसिकता का प्रमाण है। परभणी की इस घटना ने न केवल स्थानीय बल्कि राष्ट्रीय स्तर पर भी बड़े पैमाने पर रोष उत्पन्न किया है। मायावती जैसी प्रमुख दलित नेता के बयान ने इस मुद्दे को और अधिक राजनीतिक धार दी है।</p>
<p>महाराष्ट्र में दलित समुदाय के लोग इस घटना को लेकर प्रदर्शन कर रहे हैं और न्याय की मांग कर रहे हैं। कई सामाजिक संगठनों और अंबेडकरवादी समूहों ने भी इस घटना की निंदा की है और दोषियों को तत्काल गिरफ्तार करने की मांग की है।</p>
<p>राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि मायावती की प्रतिक्रिया इस मुद्दे को राष्ट्रीय राजनीति में और जोरदार ढंग से उठाएगी। बसपा प्रमुख का बयान दलित समुदाय के समर्थन को मजबूत करने की दिशा में उठाया गया एक महत्वपूर्ण कदम है।</p>
<p>घटना के बाद महाराष्ट्र की सरकार पर दबाव बढ़ गया है। मुख्यमंत्री ने इस मामले की जांच के आदेश दिए हैं और पुलिस ने मामले में प्राथमिकी दर्ज कर ली है।</p>
<p>इस घटना ने यह भी दिखाया है कि भारतीय समाज को सामाजिक समानता और न्याय की दिशा में अभी भी लंबा सफर तय करना है। बाबा साहेब की विचारधारा और उनके द्वारा लिखे गए संविधान का सम्मान करना हर नागरिक का कर्तव्य है। मायावती ने इस बात पर जोर दिया कि इस घटना को किसी भी सूरत में नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।</p>
<p>महाराष्ट्र के परभणी में डॉ. अंबेडकर की प्रतिमा और संविधान का अपमान न केवल एक कानूनी मामला है, बल्कि यह भारत की सामाजिक संरचना और समरसता पर एक गंभीर सवाल खड़ा करता है। मायावती की सख्त प्रतिक्रिया ने इस मुद्दे को राष्ट्रीय चर्चा का विषय बना दिया है। यह घटना दर्शाती है कि जातिवाद और असमानता के खिलाफ संघर्ष को और मजबूत करने की आवश्यकता है।</p>
<p>The post <a href="https://www.samvaadindia.com/mayawati-expressed-concern-over-the-incident-in-maharashtra-called-it-shameful/">मायावती ने जताई महाराष्ट्र की घटना पर चिंता, घटना को बताया शर्मनाक</a> appeared first on <a href="https://www.samvaadindia.com">Samvaad India</a>.</p>
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		<item>
		<title>बाबा साहेब डॉ. भीमराव अंबेडकर के परिनिर्वाण दिवस पर बीएसपी का राष्ट्रव्यापी श्रद्धांजलि कार्यक्रम</title>
		<link>https://www.samvaadindia.com/bsps-nationwide-tribute-program-on-baba-saheb-dr-bhimrao-ambedkars-death-anniversary/</link>
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		<dc:creator><![CDATA[संवाद इंडिया]]></dc:creator>
		<pubDate>Fri, 06 Dec 2024 06:30:46 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[अंतरराष्ट्रीय]]></category>
		<category><![CDATA[उत्तर प्रदेश]]></category>
		<category><![CDATA[ब्रेकिंग]]></category>
		<category><![CDATA[लोकसभा चुनाव 2024]]></category>
		<category><![CDATA[Bsp]]></category>
		<category><![CDATA[BSP's nationwide tribute program on Baba Saheb Dr. Bhimrao Ambedkar's death anniversary]]></category>
		<category><![CDATA[Mayawati]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>लखनऊ, 6 दिसंबर। बहुजन समाज पार्टी (बीएसपी) ने आज भारतरत्न बाबा साहेब डॉ. भीमराव अंबेडकर के परिनिर्वाण दिवस</p>
<p>The post <a href="https://www.samvaadindia.com/bsps-nationwide-tribute-program-on-baba-saheb-dr-bhimrao-ambedkars-death-anniversary/">बाबा साहेब डॉ. भीमराव अंबेडकर के परिनिर्वाण दिवस पर बीएसपी का राष्ट्रव्यापी श्रद्धांजलि कार्यक्रम</a> appeared first on <a href="https://www.samvaadindia.com">Samvaad India</a>.</p>
]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p>लखनऊ, 6 दिसंबर। बहुजन समाज पार्टी (बीएसपी) ने आज भारतरत्न बाबा साहेब डॉ. भीमराव अंबेडकर के परिनिर्वाण दिवस के अवसर पर राष्ट्रव्यापी श्रद्धांजलि कार्यक्रमों का आयोजन किया। उत्तर प्रदेश समेत देशभर में आयोजित इन कार्यक्रमों में बाबा साहेब के मानवतावादी और जनकल्याणकारी विचारों पर चर्चा हुई। बीएसपी प्रमुख सुश्री मायावती ने अपने संबोधन में बाबा साहेब को श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए कहा कि संविधान के आदर्शों को सही ढंग से लागू करना देश के शोषित, दलित और पिछड़े वर्गों के उत्थान के लिए आवश्यक है।</p>
<p>सुश्री मायावती ने आरोप लगाया कि भाजपा और कांग्रेस जैसी पार्टियों ने संविधान के मूल आदर्शों के साथ छल किया है। उन्होंने कहा, &#8220;इन दलों की नीयत में कुछ और है और जुबान पर कुछ और। बहुजन समाज को अपने संवैधानिक अधिकारों के लिए सत्ता की मास्टर चाबी प्राप्त करनी होगी। तभी देश गंभीर समस्याओं—जैसे महंगाई, गरीबी, बेरोज़गारी, और अशिक्षा—से निकलकर आत्म-सम्मान और स्वाभिमान का जीवन जी पाएगा। यही बाबा साहेब के परिनिर्वाण दिवस का संदेश है।&#8221;</p>
<p>मायावती ने विशेष रूप से भाजपा और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि आरएसएस के संगठन संविधान को कमजोर करने के लिए भाजपा की हर संभव मदद करते हैं। हाल ही में अधिक बच्चे पैदा करने की आरएसएस की सलाह को उन्होंने सरकार की विफलताओं से ध्यान भटकाने की कोशिश करार दिया।</p>
<p>उन्होंने कहा कि कांग्रेस और भाजपा ने पिछले 75 वर्षों में जातिवादी मानसिकता के साथ शासन किया, जिससे समाज के वंचित तबके अपने संवैधानिक अधिकारों से वंचित रह गए। &#8220;बहुजन समाज को अब जागरूक होकर सत्ता पर अपना अधिकार स्थापित करना होगा। &#8216;वोट हमारा, राज तुम्हारा&#8217; की व्यवस्था को खत्म करना होगा,&#8221; मायावती ने जोर देकर कहा।</p>
<p>बीएसपी प्रमुख ने किसानों, गरीबों और छोटे व्यापारियों की स्थिति पर भी चिंता व्यक्त की। उन्होंने कहा कि भारत एक किसान-प्रधान देश है, लेकिन सरकारी उदासीनता के कारण छोटे किसानों की हालत लगातार खराब हो रही है। &#8220;महान भारत और सुखी समाज के निर्माण के लिए बाबा साहेब के विचारों को लागू करना जरूरी है,&#8221; उन्होंने कहा।</p>
<p><strong>देशभर में आयोजित कार्यक्रम और बीएसपी की भूमिका</strong></p>
<p>उत्तर प्रदेश में लखनऊ के गोमती नगर स्थित डॉ. भीमराव अंबेडकर सामाजिक परिवर्तन स्थल पर हजारों लोगों ने बाबा साहेब को श्रद्धांजलि अर्पित की। इस दौरान बीएसपी समर्थकों और नेताओं ने संविधान के आदर्शों के प्रति अपनी निष्ठा दोहराई। इसी तरह, गौतम बुद्ध नगर स्थित राष्ट्रीय दलित प्रेरणा स्थल में मेरठ मंडल और दिल्ली के लोगों ने श्रद्धा-सुमन अर्पित किए।</p>
<p>प्रदेश के अन्य 14 मंडलों में भी बीएसपी के तत्वावधान में विचार संगोष्ठियों का आयोजन हुआ, जहां बाबा साहेब के विचारों और उनके संघर्षों पर चर्चा की गई। मायावती ने इन सभी कार्यक्रमों में भाग लेने वाले लोगों का आभार प्रकट किया।</p>
<p>देश के अन्य राज्यों में भी बीएसपी कार्यकर्ताओं ने बाबा साहेब के योगदान को याद करते हुए कार्यक्रम आयोजित किए। उन्होंने बाबा साहेब के अधूरे मिशन को पूरा करने का संकल्प लिया। मायावती ने कहा कि बाबा साहेब ने शोषितों और वंचितों को आत्म-सम्मान का जीवन देने के लिए संविधान में जो प्रावधान किए, वे जातिवादी पार्टियों के शासन में कभी सही से लागू नहीं हुए।</p>
<p>मायावती ने पार्टी कार्यकर्ताओं को आगाह किया कि कांग्रेस, भाजपा और इनके समर्थक जातिवादी संगठन बीएसपी के मूवमेंट को कमजोर करने के लिए षड्यंत्र रचते रहते हैं। &#8220;सजग रहकर बाबा साहेब के मिशन को आगे बढ़ाना हमारा दायित्व है,&#8221; उन्होंने कहा।</p>
<p>मायावती ने किसानों के मुद्दों पर भी बीएसपी के रुख को स्पष्ट किया। उन्होंने कहा कि फसल का लाभकारी मूल्य सुनिश्चित करना जरूरी है, लेकिन सरकारें इस दिशा में गंभीर प्रयास नहीं कर रही हैं। &#8220;गरीबों, किसानों और छोटे व्यापारियों के लिए बाबा साहेब के विचारों पर आधारित नीतियां ही समाधान दे सकती हैं,&#8221; उन्होंने कहा।</p>
<p><strong>संविधान के आदर्शों का महत्व:</strong></p>
<p>बीएसपी प्रमुख ने संविधान के महत्व को रेखांकित करते हुए कहा कि भारत के भविष्य को सुरक्षित रखने के लिए सभी को सबसे पहले भारतीय बनने का मूल मंत्र अपनाना चाहिए। &#8220;जाति, धर्म और संप्रदाय के आधार पर राजनीति करने वाले देश का भला नहीं कर सकते,&#8221; उन्होंने कहा।</p>
<p><strong>संघर्ष जारी रखने का आह्वान:</strong></p>
<p>मायावती ने दलितों, पिछड़ों और शोषितों को सत्ता की मास्टर चाबी हासिल करने के संघर्ष में जुटे रहने की अपील की। &#8220;बाबा साहेब ने जो रास्ता दिखाया है, वह हमारा मार्गदर्शन करता रहेगा,&#8221; उन्होंने कहा।</p>
<p>बाबा साहेब के परिनिर्वाण दिवस के अवसर पर बीएसपी के इन आयोजनों ने संविधान की मूल भावना और समाज में समानता की जरूरत को एक बार फिर से रेखांकित किया।</p>
<p>The post <a href="https://www.samvaadindia.com/bsps-nationwide-tribute-program-on-baba-saheb-dr-bhimrao-ambedkars-death-anniversary/">बाबा साहेब डॉ. भीमराव अंबेडकर के परिनिर्वाण दिवस पर बीएसपी का राष्ट्रव्यापी श्रद्धांजलि कार्यक्रम</a> appeared first on <a href="https://www.samvaadindia.com">Samvaad India</a>.</p>
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		<title>मनुस्मृति पढ़ाए जाने का प्रस्ताव रद्द किए जाने का फैसला स्वागत योग्य- मायावती</title>
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		<dc:creator><![CDATA[संवाद इंडिया]]></dc:creator>
		<pubDate>Fri, 12 Jul 2024 13:42:17 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[उत्तर प्रदेश]]></category>
		<category><![CDATA[Delhi university]]></category>
		<category><![CDATA[Mayawati]]></category>
		<category><![CDATA[Rahul gandhi]]></category>
		<category><![CDATA[Yogi Adityanath]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>लखनऊ। बहुजन समाज पार्टी की राष्ट्रीय अध्यक्ष मायावती ने दिल्ली विश्वविद्यालय के विधि के छात्रों को मनुस्मृति पढ़ाये</p>
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										<content:encoded><![CDATA[<p>लखनऊ। बहुजन समाज पार्टी की राष्ट्रीय अध्यक्ष मायावती ने दिल्ली विश्वविद्यालय के विधि के छात्रों को मनुस्मृति पढ़ाये जाने के प्रस्ताव को खारिज किए जाने के फैसले का स्वागत किया है। मायावती ने एक्स पोस्ट में कहा कि भारतीय संविधान के मान-सम्मान व मर्यादा तथा इसके समतामूलक एवं कल्याणकारी उद्देश्यों के विरुद्ध जाकर दिल्ली विश्वविद्यालय के विधि विभाग में मनुस्मृति पढ़ाए जाने के प्रस्ताव का तीव्र विरोध स्वाभाविक है। इस प्रस्ताव को रद्द किए जाने का फैसला स्वागत योग्य है।</p>
<p>डॉ. भीमराव अम्बेडकर ने ख़ासकर उपेक्षितों व महिलाओं के आत्मसम्मान व स्वाभिमान के साथ ही मानवतावाद एवं धर्मनिरपेक्षता को मूल में रखकर भारतीय संविधान की संरचना की, जो मनुस्मृति से कतई मेल नहीं खाता है। अतः ऐसा कोई प्रयास कतई उचित नहीं।</p>
<p>https://x.com/Mayawati/status/1811631156426580063?t=GQXBxB-RgLUxIz-yYh0KMg&#038;s=19</p>
<p>&nbsp;</p>
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		<title>&#8220;मायावती और मुस्लिम समाज&#8221; नाराजगी के पीछे की कहानी</title>
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		<dc:creator><![CDATA[संवाद इंडिया]]></dc:creator>
		<pubDate>Thu, 06 Jun 2024 09:30:09 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[उत्तर प्रदेश]]></category>
		<category><![CDATA[राष्ट्रीय]]></category>
		<category><![CDATA[लोकसभा चुनाव 2024]]></category>
		<category><![CDATA[Bsp]]></category>
		<category><![CDATA[Mayawati]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>( वशीन्द्र मिश्रा) उत्तर  प्रदेश की पूर्व मुख्यमंत्री और बीएसपी सुप्रीमो मायावती ने लोकसभा चुनाव में हुए शर्मनाक</p>
<p>The post <a href="https://www.samvaadindia.com/mayawati-and-muslim-society-the-story-behind-the-resentment/">&#8220;मायावती और मुस्लिम समाज&#8221; नाराजगी के पीछे की कहानी</a> appeared first on <a href="https://www.samvaadindia.com">Samvaad India</a>.</p>
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										<content:encoded><![CDATA[<p>( वशीन्द्र मिश्रा) उत्तर  प्रदेश की पूर्व मुख्यमंत्री और बीएसपी सुप्रीमो मायावती ने लोकसभा चुनाव में हुए शर्मनाक हार के लिए मुस्लिम समाज पर नाराजगी जाहिर की है। मायावती ने कहा है कि देश का मुस्लिम समाज उनकी पार्टी के साथ अपेक्षित सहयोग नहीं किया नतीजतन बीएसपी को इस चुनाव में करारी हार का सामना करना पड़ा है मायावती को शायद नहीं मालूम कि देश का मुस्लिम समाज अब बाक़ी समाजों की तरह राजनीतिक तौर पर बेहद जागरूक हो चुका है।मुस्लिम समाज अब महज़ एक वोट बैंक नहीं है। मुस्लिम समाज को महज बहुसंख्यक समाज का डर दिखाकर, आरएसएस और बीजेपी का डर दिखाकर अपने पाले में नहीं किया जा सकता देश का मुस्लिम समाज अलग-अलग राज्यों में प्रैक्टिकल वोटिंग करता रहा है और इस बार के चुनाव में खास तौर से उत्तर प्रदेश में मुस्लिम समाज की टैक्टिकल वोटिंग के चलते जहां एक तरफ भारतीय जनता पार्टी को खासा नुकसान उठाना पड़ा है वहीं दूसरी तरफ बीएसपी को भी काफी नुकसान हुआ है<br />
उत्तर प्रदेश में इस बार दलित मुस्लिम अति पिछड़े और अगाड़ी समाज के लोगों ने भी अपने राजनीतिक भविष्य, अपने आर्थिक भविष्य के मद्दे नजर टैक्टिकल वोटिंग की है इस इस चुनाव में बीएसपी का सर्वाधिक नुकसान हुआ है। इस नुकसान के पीछे मायावती के कार्य शैली, मायावती द्वारा अपने आर्थिक साम्राज्य को बचाए रखने के लिए समय-समय पर किए गए घोषित और अघोसित समझौते और दलित समाज के हितों की अनदेखी करते हुए कुछ खास दलों के साथ उत्तर प्रदेश और उत्तर प्रदेश के बाहर अलग-अलग राज्यों में समझौता करना बताया जा रहा।<br />
बताया जा रहा है कि मायावती इसके पहले भी गुजरात पंजाब छत्तीसगढ़ मध्य प्रदेश राजस्थान और बिहार जैसे राज्यों में अपने आर्थिक साम्राज्य को बचाए रखने के मकसद से एक दल विशेष के कहने पर कांग्रेस आरजेडी के खिलाफ प्रत्याशी उतारती रही जिसका राजनीतिक फायदा उन राज्यों में गैर कांग्रेसी गैर आरजेडी दलों को होता रहा है। इस बार के लोकसभा के चुनाव में भी मायावती की तरफ से इस रणनीति पर काम किया गया था ।यहां तक की एक दल विशेष के दबाव में अपने राजनीतिक उत्तराधिकारी और अपने परिवार के ही एक नेता को पार्टी के सभी पदों से हटा दिया था।</p>
<p>मायावती की यह कार्यशाली न केवल मुस्लिम समाज में बल्कि उनके समाज में भी अंदेशा और आशंका पैदा कर गई ।दलित समाज और मुस्लिम समाज को लगा कि मायावती एक बार फिर अपने आर्थिक साम्राज्य को बचाने के लिए ऐसे दल से परोक्ष रूप से समझौता कर बैठी है जो सत्ता में आने के बाद बाबा साहब अंबेडकर के द्वारा बनाए गए संविधान और दिए गए आरक्षण के अधिकार को समाप्त कर देगा और यही डर दलित समाज और मुस्लिम समाज को मायावती की पार्टी से दूर भागने के लिए विवश कर दिया इसलिए मुस्लिम समाज के प्रति मायावती की नाराजगी मुनासिब नहीं है मायावती को मुस्लिम समाज सहित अन्य समाजों को कोसने के बजाय अपनी नीतियों अपने कार्यशाली की समीक्षा करनी चाहिए और आर्थिक साम्राज्य को बचाने के बजाय बहुजन समाज के लिए अपने प्रतिबद्धता दिखानी चाहिए।</p>
<p>मायावती का आर्थिक साम्राज्य इस बहुजन समाज की राजनीतिक ताकत का प्रतिफल है जब बहुजन समाज जुड़ा तभी आर्थिक ताकत भी बड़ी और देश के लोगों ने अलग-अलग तरीके से मायावती को आर्थिक मदद पहुंचाई इसलिए यहां पर मैं समाजवादी पार्टी के संस्थापक और और देश के शीर्ष नेता रहे मुलायम सिंह यादव जी का एक कथन उधृत कर रहा हूं मुलायम सिंह जी सत्ता से बाहर हो गए थे!सत्ता से बाहर होने के साथ ही उनके तमाम व्यापारी मित्र उनको छोड़कर भाग गए थे मुलायम सिंह नए सिरे से सत्ता में वापसी के लिए अपनी पार्टी को मजबूत करने में जुटे हुए थे इस दौरान उनका गंभीर आर्थिक संकट से भी गुजरना पड़ रहा था।<br />
जब मैं उनसे पूछा की सत्ता में रहते हुए आपने तमाम लोगों की मदद की है अब उनके सहयोग की जरूरत है। वे लोग आपके आसपास क्यों नहीं दिखाई दे रहे है।<br />
मुलायम सिंह जी मुस्कुराए और बहुत ही सरलता से मेरे सवालों का जवाब दिए उन्होंने कहा कि कारोबारी सत्ता के साथ जुड़ता है और सत्ता के जाने के साथ ही छोड़ कर चला जाता है<br />
सार्वजनिक जीवन में काम करने वाले लोगों को किसी भी कारोबारी से लंबे समय तक बेहतर रिश्तों की उम्मीद नहीं करनी चाहिए!सार्वजनिक जीवन में काम करने वालों की असली ताकत जनता होती है! जन समर्थन के दम पर राजनेता सत्ता तक पहुंच सकता है और जब राजनेता सत्ता तक पहुंच जाता है तो फिर वही कारोबारी लोग उसके आसपास दिखाई देने लगते हैं इसलिए राजनेता को कारोबारी लोगों की धन वैभव के पीछे भागना नहीं चाहिए उसकी असली पूंजी उसकी अपनी साख विश्वसनीयता और जनता की ताकत होती है।<br />
इसी तरह की बात कांग्रेस से अलग हुए पंडित नारायण दत्त तिवारी जी ने भी कही थी!एक दौर था जब पीवी नरसिंह राव से नाराजगी के चलते अर्जुन सिंह जी और नारायण दत्त तिवारी ने मिलकर अलग कांग्रेस बनाई थी नई पार्टी चलाने के लिए संसाधनों की जरूरत होती है शुरुआती दौर में अर्जुन सिंह जी ने संसाधन मुहैया कराया लेकिन धीरे-धीरे संसाधनों में कमी महसूस की जाने लगी<br />
नारायण दत्त जी प्रधानमंत्री और राष्ट्रपति के अलावा कांग्रेस के अच्छे दौर में सरकार में लगभग सभी महत्वपूर्ण पदों पर रह चुके थे और महत्वपूर्ण पदों पर रहने के चलते नारायण दत्त तिवारी जी के आसपास कारोबारी लोगों का जमावड़ा लगा रहता था<br />
नारायण दत्त जी को गलतफहमी थी कि उनके आसपास वाले कारोबारी उनके सच्चे दोस्त हैं, लेकिन उन सच्चे दोस्तों की जब जरूरत पड़ी तो वे नारायण दत्त तिवारी जी को छोड़कर भाग गए<br />
नारायण दत्त तिवारी जी अपने जीवन के आखिरी दौर में जब सत्ता में नहीं थे और नई पार्टी का खर्चा जुटाना मुश्किल हो रहा था तो उनकी तरफ से उन सभी कारोबारी मित्रों को लगातार फोन किया जाता रहा लेकिन उन कारोबारी दोस्तों ने श्री तिवारी जी का फोन उठाना भी मुनासिब नहीं समझा!जब मैं तिवारी जी से इस बाबत जानने की कोशिश की तो उन्होंने भी ठीक उसी तरह का जवाब दिया जिस तरह का जवाब श्री मुलायम सिंह यादव जी ने दिया था<br />
मायावती जी को राजनीति के इन दो धुरंधरों और सत्ता में लंबे समय तक रह चुके महान नेताओं के अनुभव से सबक लेते हुए अपनी पार्टी को नए सिरे से मजबूत करने की कोशिश करनी चाहिए मुस्लिम समाज को भला बुरा कहने से उनकी अपनी कमजोरी छुप नहीं सकती।</p>
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