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	<title>Jayram ramesh Archives - Samvaad India</title>
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	<description>Hindi news, हिंदी न्यूज़ , Hindi Samachar, हिंदी समाचार, Latest News in Hindi, Breaking News in Hindi, ताजा ख़बरें,Samvaad India</description>
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	<title>Jayram ramesh Archives - Samvaad India</title>
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		<title>महंगाई की मार और पेट्रोल-डीज़ल की लूट: सरकार की नीतियों पर सवाल- जयराम रमेश</title>
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		<dc:creator><![CDATA[संवाद इंडिया]]></dc:creator>
		<pubDate>Mon, 14 Apr 2025 01:56:13 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[अंतरराष्ट्रीय]]></category>
		<category><![CDATA[खास खबर]]></category>
		<category><![CDATA[ब्रेकिंग]]></category>
		<category><![CDATA[Congress]]></category>
		<category><![CDATA[Inflation and loot of petrol and diesel: Questions on government policies- Jairam Ramesh]]></category>
		<category><![CDATA[Jayram ramesh]]></category>
		<category><![CDATA[Rahul gandhi]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>नई दिल्ली, 14 अप्रैल। देश की अर्थव्यवस्था एक ओर वैश्विक चुनौतियों से जूझ रही है, तो दूसरी ओर</p>
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										<content:encoded><![CDATA[<p><strong>नई दिल्ली, 14 अप्रैल।</strong> देश की अर्थव्यवस्था एक ओर वैश्विक चुनौतियों से जूझ रही है, तो दूसरी ओर घरेलू नीतियों को लेकर विपक्ष सरकार पर लगातार हमलावर है। कांग्रेस नेता और वरिष्ठ सांसद श्री जयराम रमेश ने एक बार फिर मोदी सरकार पर आर्थिक शोषण का गंभीर आरोप लगाते हुए दावा किया है कि केंद्र की नीतियों ने आम जनता की जेब काटी है और निजी तेल कंपनियों को अप्रत्याशित मुनाफा पहुंचाया है। उन्होंने पेट्रोलियम सेक्टर की नीतियों की निष्पक्ष ऑडिट और जांच की मांग करते हुए इसे ‘खुली लूट’ की संज्ञा दी है।</p>
<p>श्री रमेश ने तथ्यों के आधार पर केंद्र सरकार की पिछले ग्यारह वर्षों की तेल नीति पर सवाल उठाए हैं। उनके अनुसार मई 2014 में पेट्रोल पर एक्साइज ड्यूटी ₹9.20 प्रति लीटर और डीज़ल पर ₹3.46 प्रति लीटर थी, जिसे वर्तमान सरकार ने बढ़ाकर क्रमशः ₹19.90 और ₹15.80 कर दिया। यह बढ़ोतरी पेट्रोल पर 57% और डीज़ल पर 54% है, जो आम नागरिकों पर प्रत्यक्ष आर्थिक बोझ डालती है। इसके बावजूद केंद्र सरकार लगातार यह दावा करती रही है कि वह महंगाई नियंत्रण में है।</p>
<blockquote class="twitter-tweet" data-width="550" data-dnt="true">
<p lang="hi" dir="ltr">भारत की जनता लूटी जा रही है — मोदी सरकार द्वारा एक तरफ़ टैक्स का बोझ बढ़ाकर जहां जनता की जेब काट रही है, वहीं दूसरी तरफ़ प्राइवेट व सरकारी तेल कंपनियां मुनाफ़ा कमा रही हैं!</p>
<p>यह खुला आर्थिक शोषण है!</p>
<p>सच्चाई यह है :</p>
<p>1. मई 2014 में पेट्रोल पर एक्साइज ड्यूटी ₹9.20 और डीज़ल पर… <a href="https://t.co/1JAYmNVUa7">pic.twitter.com/1JAYmNVUa7</a></p>
<p>&mdash; Jairam Ramesh (@Jairam_Ramesh) <a href="https://twitter.com/Jairam_Ramesh/status/1911273550134088138?ref_src=twsrc%5Etfw">April 13, 2025</a></p></blockquote>
<p><script async src="https://platform.twitter.com/widgets.js" charset="utf-8"></script></p>
<p>&nbsp;</p>
<p>आंकड़े यह भी बताते हैं कि सरकार ने पेट्रोलियम सेक्टर से पिछले ग्यारह वर्षों में ₹39.54 लाख करोड़ का राजस्व अर्जित किया है। यह एक विशाल राशि है, जिससे उम्मीद की जाती थी कि जनता को टैक्स में राहत, सब्सिडी या किसी प्रकार की प्रत्यक्ष सहायता मिलेगी, लेकिन ऐसा कुछ नहीं हुआ। इसके बजाय, सरकार ने इस राजस्व का उपयोग बजटीय घाटे को संतुलित करने और कुछ चुनिंदा परियोजनाओं में निवेश करने में किया, जिससे आम आदमी को कोई सीधा लाभ नहीं मिला।</p>
<p>जयराम रमेश ने यह भी उजागर किया कि जब यूपीए सरकार सत्ता में थी, उस वक्त अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमत लगभग $108 प्रति बैरल थी, और तब भी पेट्रोल दिल्ली में ₹71.41 और डीज़ल ₹55.49 प्रति लीटर में बिक रहा था। इसके उलट, आज जबकि कच्चे तेल की कीमत $65.31 प्रति बैरल है — यानी लगभग 40% की कमी — पेट्रोल ₹94.77 और डीज़ल ₹87.67 प्रति लीटर पर बिक रहा है। इससे स्पष्ट होता है कि कीमतों में गिरावट का लाभ जनता तक नहीं पहुंचाया गया।</p>
<p>सरकार द्वारा एक्साइज ड्यूटी बढ़ाए जाने से सिर्फ राजस्व ही नहीं बढ़ा, बल्कि यह नीति निजी और सार्वजनिक तेल कंपनियों के लिए भी फायदेमंद साबित हुई। रिफाइनिंग, मार्केटिंग और डिस्ट्रीब्यूशन के विभिन्न चरणों में इन कंपनियों ने भारी मुनाफा कमाया है। सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनियों की बैलेंस शीट तो मजबूत हुई ही है, निजी कंपनियों ने भी इस दौरान अपना बाजार और मुनाफा दोनों बढ़ाया। सवाल उठता है कि क्या यह लाभ सिर्फ बाज़ार की परिस्थितियों के कारण था या फिर सरकार की नीतियों ने इन्हें लाभ पहुंचाने का विशेष अवसर दिया?</p>
<p>इस गंभीर मुद्दे पर श्री रमेश ने मांग की है कि भारत के नियंत्रक और महालेखा परीक्षक (CAG) को पेट्रोलियम क्षेत्र में पिछले एक दशक के वित्तीय प्रबंधन की व्यापक ऑडिट करनी चाहिए। उनका कहना है कि इस ऑडिट से यह स्पष्ट हो सकेगा कि सरकार की नीतियां जनता के हित में थीं या कुछ गिने-चुने औद्योगिक घरानों को फायदा पहुंचाने के लिए बनाई गई थीं। यह पारदर्शिता और जवाबदेही के सिद्धांतों के अनुरूप होगा।</p>
<p>सिर्फ ऑडिट ही नहीं, बल्कि उन्होंने केंद्रीय सतर्कता आयोग (CVC) और केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) से इस पूरी प्रक्रिया की जांच की भी मांग की है। उन्होंने सवाल उठाया कि कहीं यह जानबूझकर की गई लापरवाही तो नहीं थी या फिर सरकार और तेल कंपनियों के बीच कोई अंदरूनी मिलीभगत थी। यदि ऐसा पाया जाता है तो यह न केवल नीति विफलता है, बल्कि यह जनहित के विरुद्ध आपराधिक लापरवाही भी होगी।</p>
<p>यह मुद्दा केवल आर्थिक नहीं, बल्कि राजनीतिक और सामाजिक भी है। जहां एक ओर सरकार अंतरराष्ट्रीय परिस्थितियों और वैश्विक बाजार को दोष देती है, वहीं विपक्ष लगातार यह कहता आ रहा है कि जब वैश्विक स्तर पर तेल सस्ता हो रहा है, तब भारत में कीमतें क्यों बढ़ रही हैं। इससे मध्यम वर्ग, गरीब और छोटे व्यवसायी वर्ग को सर्वाधिक नुकसान हो रहा है। कृषि, परिवहन और अन्य सेवाएं भी महंगे ईंधन की मार झेल रही हैं, जिससे महंगाई की श्रृंखला और तेज़ हो गई है।</p>
<p>जयराम रमेश के इस बयान ने एक बार फिर सरकार को कठघरे में खड़ा कर दिया है। वे केवल आरोप नहीं लगा रहे, बल्कि ठोस आंकड़ों के साथ जनहित की बात कर रहे हैं। यदि सरकार इस विषय पर चुप रहती है या कोई संतोषजनक उत्तर नहीं देती, तो यह मुद्दा आगामी चुनावों में एक बड़ा राजनीतिक मसला बन सकता है। ऐसे समय में जब देश महंगाई, बेरोजगारी और आर्थिक असमानता की चुनौतियों से जूझ रहा है, हर नीतिगत निर्णय की पारदर्शिता और न्यायिकता का परीक्षण अत्यंत आवश्यक है।</p>
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		<title>मेक इन इंडिया: एक दशक बाद वादे और हकीकत</title>
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		<dc:creator><![CDATA[संवाद इंडिया]]></dc:creator>
		<pubDate>Tue, 03 Dec 2024 14:40:25 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[अंतरराष्ट्रीय]]></category>
		<category><![CDATA[ब्रेकिंग]]></category>
		<category><![CDATA[राष्ट्रीय]]></category>
		<category><![CDATA[Congress]]></category>
		<category><![CDATA[Jayram ramesh]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>नई दिल्ली 3 दिसंबर। जुलाई-सितंबर 2024 की तिमाही के लिए जारी किए गए ताजा जीडीपी आंकड़े देश की</p>
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										<content:encoded><![CDATA[<p>नई दिल्ली 3 दिसंबर। जुलाई-सितंबर 2024 की तिमाही के लिए जारी किए गए ताजा जीडीपी आंकड़े देश की आर्थिक स्थिति को लेकर गंभीर चिंताएं पैदा कर रहे हैं। ये आंकड़े न केवल विकास दर में भारी कमी को उजागर करते हैं, बल्कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के बहुप्रचारित &#8220;मेक इन इंडिया&#8221; अभियान की वास्तविकता पर भी सवाल उठाते हैं। इस योजना को 2014 में भारत को वैश्विक विनिर्माण और निर्यात केंद्र बनाने के उद्देश्य से शुरू किया गया था, लेकिन दस साल बाद इसके परिणाम उम्मीदों से काफी दूर नजर आते हैं।</p>
<p>भारतीय अर्थव्यवस्था का प्रमुख आधार विनिर्माण क्षेत्र जुलाई-सितंबर 2024 में मात्र 2.2% की धीमी वृद्धि दर्ज कर सका। वहीं, निर्यात में वृद्धि भी केवल 2.8% तक सीमित रही। ये आंकड़े बताते हैं कि मेक इन इंडिया अपने प्रमुख लक्ष्यों को पूरा करने में विफल रहा है।</p>
<p><strong>विनिर्माण क्षेत्र: पिछड़ती रीढ़</strong></p>
<p>विनिर्माण क्षेत्र, जिसे किसी भी देश की अर्थव्यवस्था का स्तंभ माना जाता है, भारत में लगातार कमजोर होता जा रहा है। कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने सरकार पर इस योजना को लेकर तीखा हमला किया। उनका कहना है कि मेक इन इंडिया के दस वर्षों में भारत का विनिर्माण क्षेत्र अपनी क्षमता खोता जा रहा है।</p>
<p>2011-12 में सकल मूल्य वर्धन (जीवीए) में विनिर्माण का योगदान 18.1% था, जो 2022-23 में घटकर केवल 14.3% रह गया। रोजगार के मोर्चे पर हालात और भी खराब हैं। 2017 में विनिर्माण क्षेत्र में 51.3 मिलियन लोग कार्यरत थे, लेकिन 2022-23 तक यह संख्या घटकर मात्र 35.65 मिलियन रह गई।</p>
<p><strong>निर्यात में गिरावट: एक और झटका</strong></p>
<p>प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का सपना था कि मेक इन इंडिया के जरिए भारत एक बड़ा निर्यातक बनेगा। हालांकि, स्थिति इसके ठीक उलट है। वस्त्र उद्योग, जो परंपरागत रूप से ग्रामीण क्षेत्रों में बड़े पैमाने पर रोजगार देता है, इस गिरावट का बड़ा उदाहरण है।</p>
<ul>
<li>2013-14 में भारत का वस्त्र निर्यात 15 बिलियन डॉलर था।</li>
<li>2023-24 में यह घटकर केवल 14.5 बिलियन डॉलर रह गया।</li>
</ul>
<p>भारत न केवल वैश्विक बाजार में प्रतिस्पर्धा खो रहा है, बल्कि बांग्लादेश और वियतनाम जैसे छोटे देश भी अब निर्यात में भारत से आगे निकल चुके हैं। निर्यात में यह गिरावट घरेलू अर्थव्यवस्था पर दोहरा प्रहार कर रही है।</p>
<ul>
<li>रोजगार में कमी</li>
<li>विदेशी मुद्रा आय में गिरावट।</li>
</ul>
<p><strong>चीनी आयात से बढ़ती चुनौती</strong></p>
<p>मेक इन इंडिया का उद्देश्य था कि भारतीय विनिर्माण को बढ़ावा देकर आत्मनिर्भरता हासिल की जाए। इसके तहत उत्पादन आधारित प्रोत्साहन और कर कटौती जैसे कदम उठाए गए। लेकिन, चीन से आने वाले सस्ते उत्पादों ने भारतीय उद्योगों पर गहरा प्रहार किया।</p>
<ul>
<li>गुजरात का स्टेनलेस स्टील उद्योग इस समस्या का बड़ा उदाहरण है।</li>
<li>चीनी आयात के कारण यहां के एक तिहाई सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्योग (एमएसएमई) बंद हो गए हैं।</li>
</ul>
<p>सस्ती कीमत और बेहतर गुणवत्ता के चलते चीनी उत्पाद भारतीय बाजार पर हावी हो रहे हैं। घरेलू विनिर्माण लागत अधिक होने और उत्पादन तकनीकों में पिछड़ने के कारण भारतीय उत्पाद अंतरराष्ट्रीय और घरेलू बाजार दोनों में प्रतिस्पर्धा नहीं कर पा रहे हैं।</p>
<p><strong>नीतियों में खामियां और निवेश का अभाव</strong></p>
<p>विशेषज्ञों का कहना है कि मेक इन इंडिया के तहत निजी निवेश को आकर्षित करने में सरकार नाकाम रही है। नीति निर्माण में पारदर्शिता की कमी और अप्रभावी प्रोत्साहन योजनाओं के कारण निवेशकों का विश्वास कमजोर हुआ।</p>
<p>जयराम रमेश ने इस योजना को &#8220;मेक-बिलीव इन इंडिया&#8221; करार देते हुए कहा कि यह सिर्फ प्रचार तक सीमित रह गई है। इसके विपरीत, उन्होंने 2005-15 के दशक को भारत के निर्यात और विनिर्माण क्षेत्र के लिए सुनहरा समय बताया। उस समय भारत का वैश्विक व्यापार में हिस्सा तेजी से बढ़ा, जो तत्कालीन नीतियों का परिणाम था।</p>
<p><strong>वादा बनाम वास्तविकता</strong></p>
<p>मेक इन इंडिया योजना को शुरू हुए दस साल पूरे हो चुके हैं, लेकिन इसके वादे अभी तक अधूरे ही हैं। यह योजना न तो विनिर्माण क्षेत्र को गति दे पाई और न ही रोजगार सृजन में कोई बड़ा योगदान कर पाई।</p>
<p>आज भारत के लिए यह जरूरी है कि वह इन विफलताओं से सीखते हुए नीतियों को धरातल पर लागू करे। मेक इन इंडिया का सपना तभी साकार हो सकता है, जब इसे ठोस नीतियों और ईमानदार क्रियान्वयन के साथ लागू किया जाए। अगर समय रहते यह सुधार नहीं किया गया, तो भारत की आर्थिक स्थिति को भारी नुकसान झेलना पड़ सकता है।</p>
<p>यह योजना प्रचार से आगे बढ़कर भारत के विकास का आधार बन सके, यही देश के लिए आवश्यक है। अन्यथा, यह केवल एक अधूरा वादा बनकर रह जाएगी।</p>
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		<title>कॉर्पोरेट कर की अपेक्षा व्यक्तिगत आयकर बढ़ा रही है सरकार- जयराम रमेश</title>
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		<dc:creator><![CDATA[संवाद इंडिया]]></dc:creator>
		<pubDate>Sun, 14 Jul 2024 17:08:25 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[दिल्ली]]></category>
		<category><![CDATA[Congress]]></category>
		<category><![CDATA[Jayram ramesh]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>नई दिल्ली 14 जुलाई। जयराम रमेश ने एक बार फिर से भारतीय जनता पार्टी पर निशाना साधते हुए</p>
<p>The post <a href="https://www.samvaadindia.com/government-is-increasing-personal-income-tax-instead-of-corporate-tax-jairam-ramesh/">कॉर्पोरेट कर की अपेक्षा व्यक्तिगत आयकर बढ़ा रही है सरकार- जयराम रमेश</a> appeared first on <a href="https://www.samvaadindia.com">Samvaad India</a>.</p>
]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p>नई दिल्ली 14 जुलाई। जयराम रमेश ने एक बार फिर से भारतीय जनता पार्टी पर निशाना साधते हुए कहा है कि सरकार कॉरपोरेट टैक्स को कम कर रही है और व्यक्तिगत आयकर संग्रह को बढ़ाने का काम कर रही है जयराम रमेश ने सोशल साइट एक्स पर पोस्ट करते हुए लिखा है कि बजट की तारीख़ धीरे-धीरे नज़दीक आ रही है, 23 जुलाई को इसे पेश किया जाना है। अभी जारी डेटा से पता चलता है कि 1 अप्रैल से 1 जुलाई 2024 के दौरान सकल व्यक्तिगत आयकर संग्रह 3.61 लाख करोड़ रुपए था, जबकि सकल कॉर्पोरेट कर संग्रह 2.65 लाख करोड़ रुपए। यह उस बात की फ़िर से पुष्टि करता है जिसे हम लगातार कहते आ रहे हैं &#8211; लोग कंपनियों की तुलना में अधिक टैक्स का भुगतान कर रहे हैं।</p>
<p>जब डॉ. मनमोहन सिंह ने पद छोड़ा था तब व्यक्तिगत आयकर कुल कर संग्रह का 21% था, जबकि कॉर्पोरेट कर 35%। आज कुल कर संग्रह में कॉर्पोरेट करों का हिस्सा तेज़ी से गिरकर एक दशक के सबसे निचले स्तर, मात्र 26% पर आ गया है। इस बीच कुल कर संग्रह में व्यक्तिगत आयकर की हिस्सेदारी बढ़कर 28% हो गई है।</p>
<p>20 सितंबर 2019 को कॉर्पोरेट टैक्स दरों में इस उम्मीद से कटौती की गई कि इससे निजी निवेश में उछाल आएगा। लेकिन ऐसा नहीं हुआ है। इसके बजाय, निजी निवेश डॉ. मनमोहन सिंह के कार्यकाल में सकल घरेलू उत्पाद के 35% के उच्च स्तर से गिरकर 2014-24 के दौरान 29% से भी नीचे आ गया है। कॉर्पोरेट टैक्स में कटौती से अरबपतियों की जेब में 2 लाख करोड़ रुपए गए हैं, जबकि मध्यम वर्ग भारी टैक्स बोझ झेल रहा है।</p>
<p>https://x.com/jairam_ramesh/status/1812436283882647695?s=48&#038;t=nilsG_0xE8cTogroY-U8_g</p>
<p>The post <a href="https://www.samvaadindia.com/government-is-increasing-personal-income-tax-instead-of-corporate-tax-jairam-ramesh/">कॉर्पोरेट कर की अपेक्षा व्यक्तिगत आयकर बढ़ा रही है सरकार- जयराम रमेश</a> appeared first on <a href="https://www.samvaadindia.com">Samvaad India</a>.</p>
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			</item>
		<item>
		<title>बेरोजगारी की बीमारी देश में महामारी बन चुकी- राहुल गांधी</title>
		<link>https://www.samvaadindia.com/the-disease-of-unemployment-has-become-an-epidemic-in-the-country-rahul-gandhi/</link>
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		<dc:creator><![CDATA[संवाद इंडिया]]></dc:creator>
		<pubDate>Fri, 12 Jul 2024 13:59:16 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[उत्तर प्रदेश]]></category>
		<category><![CDATA[दिल्ली]]></category>
		<category><![CDATA[Bjp]]></category>
		<category><![CDATA[Congress]]></category>
		<category><![CDATA[Jayram ramesh]]></category>
		<category><![CDATA[Narendra modi]]></category>
		<category><![CDATA[Rahul gandhi]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>नई दिल्ली। गुजरात के भरूच का एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है। इसमें दिख रहा</p>
<p>The post <a href="https://www.samvaadindia.com/the-disease-of-unemployment-has-become-an-epidemic-in-the-country-rahul-gandhi/">बेरोजगारी की बीमारी देश में महामारी बन चुकी- राहुल गांधी</a> appeared first on <a href="https://www.samvaadindia.com">Samvaad India</a>.</p>
]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p>नई दिल्ली। गुजरात के भरूच का एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है। इसमें दिख रहा है कि छोटी सी जगह में सैकड़ों लोग इकट्‌ठा हैं और एक-दूसरे से आगे निकलने के लिए धक्का-मुक्की कर रहे हैं। भीड़ इतनी ज्यादा है कि स्टील की रेलिंग पहले तो टेढ़ी होती है और फिर लोगों के वजन से टूट जाती है। इसके साथ कई लोग नीचे गिर जाते हैं।दरअसल, यह भीड़ एक होटल में रखे गए इंटरव्यू के दौरान जुटी। यह इंटरव्यू थरमैक्स कंपनी ने अंकलेश्वर के लॉर्ड्स प्लाजा होटल में रखा था। अधिकारियों के मुताबिक थर्मैक्स कंपनी ने भरूच के झघडिया जीआईडीसी में बन रहे अपने नए प्लांट के लिए वैकेंसी निकाली थीं। इनमें शिफ्ट इंचार्ज, प्लांट ऑपरेटर, सुपरवाइजर, फिल्टर मैकेनिकल, एग्जीक्यूटिव, आईटीआई इंस्ट्रूमेंटेशन, इलेक्ट्रिशियन, सेफ्टी ऑफिसर, क्वालिटी केमिस्ट पद के लिए 10 वैकेंसी थीं।</p>
<p>कंपनी का अनुमान था कि 500-600 लोग पहुंचेंगे, लेकिन यहां 1500 से अधिक युवक पहुंच गए। होटल के मैनेजर और गार्ड्स ने हालात काबू करने की कोशिश की थी, लेकिन युवक होटल की गैलरी में पहुंच गए और इससे रैलिंग टूट गई। कुछ रिपोर्ट्स में इंटरव्यू के लिए पहुंचे युवकों की संख्या 1800 तक बताई गई है।</p>
<p>राहुल गांधी ने सोशल मीडिया साइट् एक्स पर पोस्ट करते हुए कहा कि बेरोजगारी की बीमारी देश में महामारी बन चुकी कांग्रेस सांसद राहुल गांधी ने सोशल मीडिया पोस्ट में कहा कि &#8216;बेरोजगारी की बीमारी&#8217; भारत में महामारी का रूप ले चुकी है और भाजपा शासित राज्य इस बीमारी का &#8216;एपिसेंटर&#8217; बन गए हैं। एक आम नौकरी के लिए कतारों में धक्के खाता ‘भारत का भविष्य’ ही नरेंद्र मोदी के ‘अमृतकाल’ की हकीकत है।</p>
<p>&nbsp;</p>
<p>https://x.com/rahulgandhi/status/1811421133528514823?s=48&#038;t=5FTgquAteoC4I8-DK21_NA</p>
<p>कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने सोशल मीडिया पर कहा कि जिस तथाकथित मोदी मॉडल को देश भर में प्रचारित किया जाता है, उसकी पोल खोलने के लिए यह वीडियो काफी है। प्राइवेट होटल में नौकरी के लिए युवाओं की यह भीड़ इस बात का स्पष्ट प्रमाण है कि गुजरात में सिर्फ अमीरों का भला हुआ है। 30 सालों से गुजरात में भाजपा की सरकार है, फिर भी राज्य में बेरोजगारी भयावह स्थिति में है।</p>
<p>https://x.com/jairam_ramesh/status/1811435540018872818?s=48&#038;t=nilsG_0xE8cTogroY-U8_g</p>
<p>कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने भी इस वीडियो को भाजपा सरकार के धोखेबाजी मॉडल का सबूत बताया है।</p>
<p>The post <a href="https://www.samvaadindia.com/the-disease-of-unemployment-has-become-an-epidemic-in-the-country-rahul-gandhi/">बेरोजगारी की बीमारी देश में महामारी बन चुकी- राहुल गांधी</a> appeared first on <a href="https://www.samvaadindia.com">Samvaad India</a>.</p>
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		<title>प्रतियोगी परीक्षाओं में बड़े पैमाने पर पेपर लीक हुए हैं और गड़बड़ी- जयराम रमेश</title>
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		<dc:creator><![CDATA[संवाद इंडिया]]></dc:creator>
		<pubDate>Fri, 28 Jun 2024 08:26:47 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[दिल्ली]]></category>
		<category><![CDATA[Bjp]]></category>
		<category><![CDATA[Congress]]></category>
		<category><![CDATA[Jayram ramesh]]></category>
		<category><![CDATA[New Delhi]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>नई दिल्ली 28 जून।जयराम रमेश ने पेपर लीक पर सरकार पर निशाना साधते हुए कहा है कि पिछले</p>
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										<content:encoded><![CDATA[<p>नई दिल्ली 28 जून।जयराम रमेश ने पेपर लीक पर सरकार पर निशाना साधते हुए कहा है कि पिछले दस वर्षों में देश भर में प्रतियोगी परीक्षाओं में बड़े पैमाने पर पेपर लीक हुए हैं और गड़बड़ी हुई है &#8211; NET और NEET केवल इसके सबसे ताज़ा उदाहरण हैं। सबसे हाल के आंकड़ों के मुताबिक़ देश भर में 2.26 करोड़ युवा इन पेपर लीक से प्रभावित हुए हैं।</p>
<p>यह मोदी सरकार की अक्षमता के साथ-साथ उसमें फैले व्यापक भ्रष्टाचार को भी दिखाता है। अहमदाबाद स्थित एक परीक्षा आयोजित करने वाली कंपनी, जो यूपी पुलिस कांस्टेबल भर्ती परीक्षा सहित कई पेपर लीक में फंसी है और जिसकी वजह से 48 लाख उम्मीदवार प्रभावित हुए हैं, को देश भर में मोदी सरकार और भाजपा की राज्य सरकारों से बार-बार संरक्षण मिल रहा है। यूपी और बिहार सरकार ने कंपनी को ब्लैकलिस्ट कर दिया है, लेकिन अक्टूबर 2023 तक मोदी सरकार उन्हें क़रीब 80 करोड़ के ठेके देती रही।</p>
<p>ऐसा क्यों? क्योंकि कंपनी का मालिक बीजेपी का वैचारिक और राजनीतिक समर्थक है।</p>
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