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	<title>Congress Archives - Samvaad India</title>
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		<title>बिहार की धड़कनों में उठी “वोट बचाओ” की गूंज</title>
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		<dc:creator><![CDATA[संवाद इंडिया]]></dc:creator>
		<pubDate>Sun, 24 Aug 2025 01:18:17 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[अंतरराष्ट्रीय]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>नई दिल्ली, 24 अगस्त। बिहार की राजनीति का तापमान एक बार फिर चरम पर है। राहुल गांधी की</p>
<p>The post <a href="https://www.samvaadindia.com/the-echo-of-save-vote-arose-in-the-heartbeat-of-bihar/">बिहार की धड़कनों में उठी “वोट बचाओ” की गूंज</a> appeared first on <a href="https://www.samvaadindia.com">Samvaad India</a>.</p>
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										<content:encoded><![CDATA[<p>नई दिल्ली, 24 अगस्त। बिहार की राजनीति का तापमान एक बार फिर चरम पर है। राहुल गांधी की अगुवाई में चल रही <em>वोटर अधिकार यात्रा</em> सातवें दिन कटिहार पहुंची और वहां का दृश्य अद्भुत था। जिस तरह हजारों-लाखों लोग इस यात्रा में शामिल हुए, वह साफ संकेत है कि बिहार की जनता लोकतंत्र और अपने मताधिकार की सुरक्षा को लेकर गंभीर है। मंच पर राहुल गांधी ने न सिर्फ भाजपा पर सीधा हमला बोला, बल्कि चुनाव आयोग की निष्पक्षता पर भी बड़े सवाल खड़े किए।</p>
<h2>जनसैलाब: पेड़ों पर चढ़कर राहुल की झलक पाने को बेताब लोग</h2>
<p>कटिहार की सड़कों और मैदानों में जिस तरह का नजारा देखने को मिला, वह किसी राजनीतिक रैली से बढ़कर आंदोलन जैसा प्रतीत हो रहा था। भीड़ इतनी विशाल थी कि राहुल गांधी की झलक पाने के लिए लोग पेड़ों और मकानों की छतों तक पर चढ़ गए। जनसभा स्थल चारों ओर से “वोट चोर, गद्दी छोड़” और “संविधान बचाओ” जैसे नारों से गूंज रहा था। यह भीड़ केवल संख्या नहीं थी, बल्कि संदेश थी कि जनता अब लोकतंत्र पर हो रहे हमलों को बर्दाश्त करने के मूड में नहीं है।</p>
<h2>राहुल गांधी का तीखा हमला: &#8220;भाजपा दलितों-पिछड़ों का हक मार रही&#8221;</h2>
<p>राहुल गांधी ने अपने संबोधन में कहा –<br />
&#8220;भाजपा चुनाव आयोग के साथ मिलकर देशभर में वोट चोरी कर रही है। इसका मकसद सिर्फ एक है – दलितों, पिछड़ों और गरीबों से उनका संवैधानिक हक छीनना।&#8221;</p>
<p>उन्होंने आरोप लगाया कि महाराष्ट्र और हरियाणा की तरह ही बिहार में भी एसआईआर (Special Identification Register) के बहाने लाखों लोगों के नाम वोटर लिस्ट से काट दिए गए।</p>
<p><img fetchpriority="high" decoding="async" class="aligncenter wp-image-1045 size-full" src="https://www.samvaadindia.com/wp-content/uploads/2025/08/images-54.jpeg" alt="" width="739" height="415" srcset="https://www.samvaadindia.com/wp-content/uploads/2025/08/images-54.jpeg 739w, https://www.samvaadindia.com/wp-content/uploads/2025/08/images-54-300x168.jpeg 300w" sizes="(max-width: 739px) 100vw, 739px" /></p>
<h2>संविधान बनाम संघ की विचारधारा</h2>
<p>अपने भाषण के दौरान राहुल गांधी ने संविधान की प्रति भी लहराई। उन्होंने कहा कि संविधान भारत की हजारों साल पुरानी सोच का प्रतीक है, जो हर नागरिक को समान मान्यता देता है। इसके उलट भाजपा-आरएसएस की विचारधारा समाज को ऊंच-नीच में बांटकर दलितों-पिछड़ों को नीचे धकेलने की है। उन्होंने तीखे शब्दों में कहा –<br />
&#8220;महात्मा गांधी ने संविधान की बुनियाद रखने वाले मूल्यों के लिए अपना जीवन दे दिया। गोडसे ने गांधी की हत्या की क्योंकि वह संविधान से नफरत करता था। आज वही सोच भाजपा और आरएसएस चला रहे हैं।&#8221;</p>
<h2>बेरोजगारी का मुद्दा: बिहार को बताया केंद्र</h2>
<p>राहुल गांधी ने जनसभा में बेरोजगारी का मुद्दा पूरी ताकत से उठाया। उन्होंने कहा कि नोटबंदी और गलत जीएसटी जैसे फैसलों ने अर्थव्यवस्था को बर्बाद कर दिया। नतीजा यह हुआ कि रोजगार के अवसर घटते चले गए।<br />
&#8220;आज बिहार बेरोजगारी का केंद्र है। सरकारी नौकरियां बंद हैं, सेना में भर्ती बंद है, व्यापारी संकट में हैं और किसानों को सहारा नहीं मिल रहा। दूसरी ओर अरबपतियों के लाखों-करोड़ के कर्ज माफ किए जा रहे हैं।&#8221;</p>
<h2>मखाना किसानों से संवाद: ज़मीन से जुड़ाव का संदेश</h2>
<p>कटिहार पहुंचने से पहले राहुल गांधी ने खेतों में जाकर मखाना किसानों से मुलाकात की। किसानों ने उन्हें बताया कि मंडी व्यवस्था और न्यूनतम समर्थन मूल्य की कमी से वे भारी संकट में हैं। राहुल गांधी ने किसानों को आश्वासन दिया कि कांग्रेस और इंडिया गठबंधन सत्ता में आने पर किसानों को आर्थिक सुरक्षा देंगे। यह मुलाकात यात्रा को केवल राजनीतिक न रखकर ज़मीनी स्तर पर जोड़ने का संदेश देती है।</p>
<h2>मीडिया पर हमला: &#8220;यह अरबपतियों की मीडिया है&#8221;</h2>
<p>राहुल गांधी ने मीडिया को भी कटघरे में खड़ा किया। उन्होंने कहा –<br />
जनता ‘वोट चोर, गद्दी छोड़’ का नारा लगा रही है, लेकिन मीडिया इसे दिखा नहीं रही, क्योंकि यह अरबपतियों की मीडिया है।&#8221;<br />
उनका इशारा साफ था – बड़े कॉर्पोरेट घरानों के प्रभाव में काम कर रहे मीडिया संस्थान जनता की असली आवाज को दबा रहे हैं।</p>
<h2>INDIA गठबंधन की ताकत का प्रदर्शन</h2>
<p>कटिहार की रैली में राहुल गांधी अकेले नहीं थे। उनके साथ राजद नेता तेजस्वी यादव, कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष राजेश राम, विधायक दल के नेता शकील अहमद, सीपीआई (एमएल) के दीपांकर भट्टाचार्य, वीआईपी पार्टी के मुकेश सहनी और कर्नाटक के उपमुख्यमंत्री डीके शिवकुमार मौजूद थे। यह मंच INDIA गठबंधन की एकजुटता का संदेश दे रहा था और जनता के बीच यह संदेश गया कि भाजपा के खिलाफ विपक्ष मिलकर लड़ रहा है।</p>
<h2>वोटर अधिकार यात्रा: क्या है मकसद?</h2>
<p>कांग्रेस का दावा है कि इस यात्रा का मुख्य उद्देश्य जनता को यह बताना है कि वोट उनका संवैधानिक अधिकार है और इसे छीने जाने की साजिश हो रही है। बिहार जैसे राज्यों में लाखों लोगों के नाम मतदाता सूची से हटाए जाने की शिकायतें आ रही हैं। राहुल गांधी का कहना है कि एसआईआर के नाम पर यह वोट चोरी का नया तरीका है।</p>
<h2>भीड़ का जोश: आंदोलन में बदलती यात्रा</h2>
<p>कटिहार में जिस तरह लोग उमड़े, वह केवल राजनीतिक सभा नहीं थी। भीड़ का उत्साह किसी आंदोलन की तरह था। राहुल गांधी की हर बात पर जोरदार तालियां और नारे गूंज रहे थे। यह दृश्य बताता है कि वोटर अधिकार यात्रा केवल कांग्रेस का कार्यक्रम नहीं रह गया, बल्कि जनता की बेचैनी और गुस्से का प्रतीक बन गया है।</p>
<h2>भाजपा पर सीधा वार: &#8220;देश का धन कुछ हाथों में&#8221;</h2>
<p>राहुल गांधी ने कहा कि भाजपा सरकार की नीतियों से देश का सारा धन अंबानी-अडानी जैसे कुछ अरबपतियों के हाथों में केंद्रित हो गया है। जबकि आम आदमी, किसान और छोटे व्यापारी संकट में हैं। यह आरोप उन्होंने बार-बार दोहराया ताकि संदेश सीधे जनता तक पहुंचे।</p>
<h2>जनता का नारा: &#8220;वोट बचाओ, संविधान बचाओ&#8221;</h2>
<p>सभा में शामिल लोगों के हाथों में तख्तियां और झंडे थे। हर ओर सिर्फ एक ही आवाज गूंज रही थी –<br />
&#8220;वोट बचाओ, संविधान बचाओ&#8221;<br />
यह नारा यात्रा का केंद्रीय संदेश बन चुका है और तेजी से गांव-गांव तक पहुंच रहा है।</p>
<h2>विपक्ष की रणनीति: बिहार से शुरू, देशभर तक विस्तार</h2>
<p>विशेषज्ञों का मानना है कि कांग्रेस और INDIA गठबंधन ने बिहार को इसलिए चुना क्योंकि यह राज्य सामाजिक न्याय और आंदोलन की राजनीति का केंद्र रहा है। यहां से उठी आवाज देशभर में असर डाल सकती है। यात्रा का मकसद केवल वोट चोरी का मुद्दा उठाना ही नहीं, बल्कि बेरोजगारी, महंगाई और किसान संकट को भी राजनीतिक एजेंडे पर लाना है।</p>
<h2>भाजपा की प्रतिक्रिया: आरोपों को बताया बेतुका</h2>
<p>भाजपा ने राहुल गांधी के आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि कांग्रेस निराधार बातें कर रही है। भाजपा नेताओं का कहना है कि कांग्रेस जनता का विश्वास खो चुकी है, इसलिए अब चुनाव आयोग पर आरोप लगाकर भ्रम फैलाने की कोशिश कर रही है। हालांकि, भीड़ का रुख और जनता का उत्साह यह दर्शाता है कि राहुल गांधी का संदेश जमीन पर असर डाल रहा है।</p>
<h2>क्या वोटर अधिकार यात्रा बनेगी 2025 की राजनीति का मोड़?</h2>
<p>कटिहार की ऐतिहासिक सभा ने यह साफ कर दिया है कि राहुल गांधी का यह अभियान केवल राजनीतिक यात्रा नहीं, बल्कि लोकतंत्र बचाने का आंदोलन बनने की क्षमता रखता है। भीड़ का जोश, विपक्ष की एकजुटता और भाजपा पर सीधे हमले – यह सब मिलकर यात्रा को राष्ट्रीय विमर्श का केंद्र बना रहे हैं। आने वाले महीनों में यह तय करेगा कि 2025 और 2026 के चुनावी परिदृश्य में जनता किसके साथ खड़ी होती है।</p>
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		<title>वक्फ संशोधन अधिनियम पर सुप्रीम कोर्ट की अंतरिम रोक का कांग्रेस ने किया स्वागत, कहा- यह संविधान की आत्मा पर हमला था</title>
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		<dc:creator><![CDATA[संवाद इंडिया]]></dc:creator>
		<pubDate>Thu, 17 Apr 2025 16:54:05 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[अंतरराष्ट्रीय]]></category>
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		<category><![CDATA[said- it was an attack on the spirit of the Constitution]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>नई दिल्ली, 17 अप्रैल। वक्फ अधिनियम में हालिया संशोधनों पर सुप्रीम कोर्ट द्वारा लगाई गई अंतरिम रोक का</p>
<p>The post <a href="https://www.samvaadindia.com/congress-welcomed-the-supreme-courts-interim-stay-on-the-wakf-amendment-act-said-it-was-an-attack-on-the-spirit-of-the-constitution/">वक्फ संशोधन अधिनियम पर सुप्रीम कोर्ट की अंतरिम रोक का कांग्रेस ने किया स्वागत, कहा- यह संविधान की आत्मा पर हमला था</a> appeared first on <a href="https://www.samvaadindia.com">Samvaad India</a>.</p>
]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p><strong>नई दिल्ली, 17 अप्रैल। </strong>वक्फ अधिनियम में हालिया संशोधनों पर सुप्रीम कोर्ट द्वारा लगाई गई अंतरिम रोक का कांग्रेस पार्टी ने खुले शब्दों में स्वागत किया है। पार्टी के वरिष्ठ नेता और संवैधानिक मामलों के विशेषज्ञ, राज्यसभा सांसद डॉ. अभिषेक मनु सिंघवी ने इसे &#8220;संविधान की आत्मा की जीत&#8221; करार दिया। कांग्रेस कार्यालय में आयोजित विशेष प्रेस वार्ता में सिंघवी के साथ मौजूद पार्टी के राष्ट्रीय सचिव और राज्यसभा सांसद इमरान प्रतापगढ़ी ने भी इसे &#8220;न्यायपालिका द्वारा अल्पसंख्यकों के अधिकारों की सुरक्षा&#8221; बताया और उम्मीद जताई कि आने वाली सुनवाई में और राहत मिलेगी।</p>
<h3>वैचारिक हमले की राजनीति और कानूनी प्रतिक्रिया</h3>
<p>डॉ. सिंघवी ने कहा कि केंद्र सरकार जिस अधिनियम को प्रशासनिक सुधार का नाम दे रही है, वह वास्तव में एक वैचारिक हमला है। उन्होंने कहा, “वक्फ अधिनियम में किए गए संशोधन प्रशासनिक बदलाव नहीं, बल्कि संवैधानिक मूल्यों, धार्मिक स्वायत्तता और लोकतांत्रिक सिद्धांतों के विरुद्ध हैं।” उन्होंने आगे स्पष्ट किया कि यह केवल एक धार्मिक समुदाय का मुद्दा नहीं, बल्कि भारतीय संविधान के अनुच्छेद 26 में प्रदत्त मूल अधिकारों का मामला है, जो प्रत्येक नागरिक को अपने धर्म के पालन, प्रचार, प्रबंधन और संबंधित संस्थानों के संचालन का अधिकार देता है।</p>
<h3>सुप्रीम कोर्ट का अंतरिम आदेश और उसका प्रभाव</h3>
<p>गुरुवार को सुप्रीम कोर्ट में हुई सुनवाई के बाद अदालत ने वक्फ संशोधन अधिनियम की कुछ महत्वपूर्ण धाराओं, जैसे कि धारा 9 और 14, पर अंतरिम रोक लगा दी। धारा 9 में प्रावधान था कि केंद्रीय वक्फ परिषद में 22 में से 12 सदस्य गैर-मुस्लिम हो सकते हैं, जबकि धारा 14 में वक्फ बोर्ड के 11 में से 7 सदस्यों को गैर-मुस्लिम बनाए जाने की व्यवस्था थी। सुप्रीम कोर्ट ने इन विवादित प्रावधानों पर अगले आदेश तक रोक लगा दी है, जिसे कांग्रेस ने संविधान की आत्मा की रक्षा की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम बताया है।</p>
<h3>स्वायत्तता पर प्रहार, संविधान पर प्रश्न</h3>
<p>डॉ. सिंघवी ने कहा कि वक्फ अधिनियम की धारा 11, जो चुनाव आधारित प्रतिनिधियों को हटाकर सभी सदस्यों की नियुक्ति सरकार द्वारा करने की बात करती है, सीधे-सीधे संस्थागत स्वायत्तता पर प्रहार है। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि इस प्रकार का परिवर्तन धार्मिक संस्थानों को सरकारी नियंत्रण में लाने का प्रयास है, जो भारत जैसे धर्मनिरपेक्ष गणराज्य के मूलभूत ढांचे के खिलाफ है।</p>
<h3>लोकतंत्र और न्यायिक संतुलन पर सवाल</h3>
<p>प्रेस वार्ता में डॉ. सिंघवी ने यह भी बताया कि संशोधित अधिनियम के अनुसार यदि वक्फ बोर्ड के सभी सदस्य मिलकर भी अध्यक्ष के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पारित करें, तो भी अध्यक्ष को नहीं हटाया जा सकता जब तक कि सरकार स्वयं उस पर कार्रवाई न करे। “यह न केवल हास्यास्पद है, बल्कि लोकतांत्रिक प्रक्रिया का भी अपमान है,” उन्होंने कहा। उन्होंने यह भी बताया कि अब वक्फ बोर्ड का सीईओ गैर-मुस्लिम भी हो सकता है, जो संस्थागत पहचान और समुदाय की स्वायत्तता दोनों पर सवाल खड़ा करता है।</p>
<h3>वक्फ संपत्ति को लेकर विवाद की खुली छूट</h3>
<p>डॉ. सिंघवी ने एक अन्य विवादास्पद प्रावधान का उल्लेख करते हुए कहा कि अब किसी भी व्यक्ति द्वारा कलेक्टर को एक साधारण शिकायत पत्र देकर वक्फ संपत्ति को विवादित घोषित कराया जा सकता है, जिसमें न कोई कारण बताने की बाध्यता है, न ही निर्णय लेने की कोई समय-सीमा। “इससे न केवल संपत्ति विवाद बढ़ेंगे, बल्कि धार्मिक संस्थाओं की वैधानिक सुरक्षा भी खतरे में पड़ जाएगी,” उन्होंने जोड़ा।</p>
<h3>संविधान विरोधी प्रावधानों के खिलाफ कांग्रेस की भूमिका</h3>
<p>इमरान प्रतापगढ़ी ने स्पष्ट किया कि इस अधिनियम के संशोधनों के खिलाफ उन्होंने स्वयं और अन्य याचिकाकर्ताओं ने सुप्रीम कोर्ट का रुख किया था, जब संसद में विपक्ष द्वारा दिए गए सुझावों को सरकार ने नकार दिया। उन्होंने सुप्रीम कोर्ट के अंतरिम आदेश को &#8216;संविधान की जीत&#8217; बताया और कहा कि “आज जब एक समुदाय की धार्मिक संस्थाओं पर नियंत्रण की कोशिश हो रही है, तो कल यह संकट किसी भी अल्पसंख्यक या बहुसंख्यक धर्म की संस्था पर आ सकता है।”</p>
<p><img decoding="async" class="aligncenter wp-image-978 size-full" src="https://www.samvaadindia.com/wp-content/uploads/2025/04/IMG-20250417-WA0027-scaled.jpg" alt="" width="2560" height="2560" srcset="https://www.samvaadindia.com/wp-content/uploads/2025/04/IMG-20250417-WA0027-scaled.jpg 2560w, https://www.samvaadindia.com/wp-content/uploads/2025/04/IMG-20250417-WA0027-300x300.jpg 300w, https://www.samvaadindia.com/wp-content/uploads/2025/04/IMG-20250417-WA0027-1024x1024.jpg 1024w, https://www.samvaadindia.com/wp-content/uploads/2025/04/IMG-20250417-WA0027-150x150.jpg 150w, https://www.samvaadindia.com/wp-content/uploads/2025/04/IMG-20250417-WA0027-768x768.jpg 768w, https://www.samvaadindia.com/wp-content/uploads/2025/04/IMG-20250417-WA0027-1536x1536.jpg 1536w, https://www.samvaadindia.com/wp-content/uploads/2025/04/IMG-20250417-WA0027-2048x2048.jpg 2048w" sizes="(max-width: 2560px) 100vw, 2560px" /></p>
<h3>कांग्रेस का संविधान रक्षा संकल्प</h3>
<p>उन्होंने दोहराया कि कांग्रेस ने न सिर्फ भारत का संविधान बनाया, बल्कि उसकी रक्षा की जिम्मेदारी भी हर युग में निभाई है। “हम यह लड़ाई न किसी धर्म के नाम पर लड़ रहे हैं, न किसी जाति के नाम पर, बल्कि इस मुल्क की उस रूह के लिए लड़ रहे हैं जो संविधान की प्रस्तावना में समाहित है—न्याय, स्वतंत्रता, समानता और बंधुत्व।”</p>
<h3>वक्फ &#8216;बाय यूजर&#8217; की कानूनी स्थिति भी संकट में</h3>
<p>डॉ. सिंघवी ने यह भी रेखांकित किया कि नए अधिनियम के तहत वक्फ &#8216;बाय यूजर&#8217; (यानि लंबे समय से धार्मिक उपयोग में आ रही संपत्ति) की कानूनी मान्यता समाप्त हो गई है, लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने अपने आदेश में यह स्पष्ट कर दिया है कि फिलहाल जो संपत्तियाँ घोषित या पंजीकृत हैं, उनकी यथास्थिति बनी रहेगी।</p>
<h3>आगे की रणनीति और न्याय की आशा</h3>
<p>प्रतापगढ़ी और सिंघवी दोनों ने विश्वास जताया कि आने वाली सुनवाइयों में सुप्रीम कोर्ट इस अधिनियम के और अधिक प्रावधानों को रद्द करेगा। उन्होंने कहा कि कांग्रेस इस मुद्दे पर संवैधानिक तरीके से संघर्ष करती रहेगी और हर धार्मिक समुदाय के अधिकारों की रक्षा के लिए प्रतिबद्ध है।</p>
<h3>संविधान बनाम सत्ता</h3>
<p>कांग्रेस द्वारा दी गई इस प्रतिक्रिया से स्पष्ट है कि वक्फ संशोधन अधिनियम पर अब केवल राजनीतिक नहीं, बल्कि गंभीर संवैधानिक बहस शुरू हो चुकी है। यह मामला अब किसी विशेष समुदाय की भावनाओं से कहीं अधिक, उस लोकतांत्रिक ढांचे और सांविधानिक सिद्धांतों की रक्षा से जुड़ा हुआ है, जिन पर भारत की नींव टिकी है। सुप्रीम कोर्ट के आने वाले फैसले इस बहस की दिशा तय करेंगे और शायद यह भविष्य में अन्य धार्मिक संस्थानों की स्वायत्तता के लिए भी एक मिसाल बनेंगे।</p>
<p>The post <a href="https://www.samvaadindia.com/congress-welcomed-the-supreme-courts-interim-stay-on-the-wakf-amendment-act-said-it-was-an-attack-on-the-spirit-of-the-constitution/">वक्फ संशोधन अधिनियम पर सुप्रीम कोर्ट की अंतरिम रोक का कांग्रेस ने किया स्वागत, कहा- यह संविधान की आत्मा पर हमला था</a> appeared first on <a href="https://www.samvaadindia.com">Samvaad India</a>.</p>
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		<title>महंगाई की मार और पेट्रोल-डीज़ल की लूट: सरकार की नीतियों पर सवाल- जयराम रमेश</title>
		<link>https://www.samvaadindia.com/inflation-and-loot-of-petrol-and-diesel-questions-on-government-policies-jairam-ramesh/</link>
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		<dc:creator><![CDATA[संवाद इंडिया]]></dc:creator>
		<pubDate>Mon, 14 Apr 2025 01:56:13 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[अंतरराष्ट्रीय]]></category>
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		<category><![CDATA[Congress]]></category>
		<category><![CDATA[Inflation and loot of petrol and diesel: Questions on government policies- Jairam Ramesh]]></category>
		<category><![CDATA[Jayram ramesh]]></category>
		<category><![CDATA[Rahul gandhi]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>नई दिल्ली, 14 अप्रैल। देश की अर्थव्यवस्था एक ओर वैश्विक चुनौतियों से जूझ रही है, तो दूसरी ओर</p>
<p>The post <a href="https://www.samvaadindia.com/inflation-and-loot-of-petrol-and-diesel-questions-on-government-policies-jairam-ramesh/">महंगाई की मार और पेट्रोल-डीज़ल की लूट: सरकार की नीतियों पर सवाल- जयराम रमेश</a> appeared first on <a href="https://www.samvaadindia.com">Samvaad India</a>.</p>
]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p><strong>नई दिल्ली, 14 अप्रैल।</strong> देश की अर्थव्यवस्था एक ओर वैश्विक चुनौतियों से जूझ रही है, तो दूसरी ओर घरेलू नीतियों को लेकर विपक्ष सरकार पर लगातार हमलावर है। कांग्रेस नेता और वरिष्ठ सांसद श्री जयराम रमेश ने एक बार फिर मोदी सरकार पर आर्थिक शोषण का गंभीर आरोप लगाते हुए दावा किया है कि केंद्र की नीतियों ने आम जनता की जेब काटी है और निजी तेल कंपनियों को अप्रत्याशित मुनाफा पहुंचाया है। उन्होंने पेट्रोलियम सेक्टर की नीतियों की निष्पक्ष ऑडिट और जांच की मांग करते हुए इसे ‘खुली लूट’ की संज्ञा दी है।</p>
<p>श्री रमेश ने तथ्यों के आधार पर केंद्र सरकार की पिछले ग्यारह वर्षों की तेल नीति पर सवाल उठाए हैं। उनके अनुसार मई 2014 में पेट्रोल पर एक्साइज ड्यूटी ₹9.20 प्रति लीटर और डीज़ल पर ₹3.46 प्रति लीटर थी, जिसे वर्तमान सरकार ने बढ़ाकर क्रमशः ₹19.90 और ₹15.80 कर दिया। यह बढ़ोतरी पेट्रोल पर 57% और डीज़ल पर 54% है, जो आम नागरिकों पर प्रत्यक्ष आर्थिक बोझ डालती है। इसके बावजूद केंद्र सरकार लगातार यह दावा करती रही है कि वह महंगाई नियंत्रण में है।</p>
<blockquote class="twitter-tweet" data-width="550" data-dnt="true">
<p lang="hi" dir="ltr">भारत की जनता लूटी जा रही है — मोदी सरकार द्वारा एक तरफ़ टैक्स का बोझ बढ़ाकर जहां जनता की जेब काट रही है, वहीं दूसरी तरफ़ प्राइवेट व सरकारी तेल कंपनियां मुनाफ़ा कमा रही हैं!</p>
<p>यह खुला आर्थिक शोषण है!</p>
<p>सच्चाई यह है :</p>
<p>1. मई 2014 में पेट्रोल पर एक्साइज ड्यूटी ₹9.20 और डीज़ल पर… <a href="https://t.co/1JAYmNVUa7">pic.twitter.com/1JAYmNVUa7</a></p>
<p>&mdash; Jairam Ramesh (@Jairam_Ramesh) <a href="https://twitter.com/Jairam_Ramesh/status/1911273550134088138?ref_src=twsrc%5Etfw">April 13, 2025</a></p></blockquote>
<p><script async src="https://platform.twitter.com/widgets.js" charset="utf-8"></script></p>
<p>&nbsp;</p>
<p>आंकड़े यह भी बताते हैं कि सरकार ने पेट्रोलियम सेक्टर से पिछले ग्यारह वर्षों में ₹39.54 लाख करोड़ का राजस्व अर्जित किया है। यह एक विशाल राशि है, जिससे उम्मीद की जाती थी कि जनता को टैक्स में राहत, सब्सिडी या किसी प्रकार की प्रत्यक्ष सहायता मिलेगी, लेकिन ऐसा कुछ नहीं हुआ। इसके बजाय, सरकार ने इस राजस्व का उपयोग बजटीय घाटे को संतुलित करने और कुछ चुनिंदा परियोजनाओं में निवेश करने में किया, जिससे आम आदमी को कोई सीधा लाभ नहीं मिला।</p>
<p>जयराम रमेश ने यह भी उजागर किया कि जब यूपीए सरकार सत्ता में थी, उस वक्त अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमत लगभग $108 प्रति बैरल थी, और तब भी पेट्रोल दिल्ली में ₹71.41 और डीज़ल ₹55.49 प्रति लीटर में बिक रहा था। इसके उलट, आज जबकि कच्चे तेल की कीमत $65.31 प्रति बैरल है — यानी लगभग 40% की कमी — पेट्रोल ₹94.77 और डीज़ल ₹87.67 प्रति लीटर पर बिक रहा है। इससे स्पष्ट होता है कि कीमतों में गिरावट का लाभ जनता तक नहीं पहुंचाया गया।</p>
<p>सरकार द्वारा एक्साइज ड्यूटी बढ़ाए जाने से सिर्फ राजस्व ही नहीं बढ़ा, बल्कि यह नीति निजी और सार्वजनिक तेल कंपनियों के लिए भी फायदेमंद साबित हुई। रिफाइनिंग, मार्केटिंग और डिस्ट्रीब्यूशन के विभिन्न चरणों में इन कंपनियों ने भारी मुनाफा कमाया है। सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनियों की बैलेंस शीट तो मजबूत हुई ही है, निजी कंपनियों ने भी इस दौरान अपना बाजार और मुनाफा दोनों बढ़ाया। सवाल उठता है कि क्या यह लाभ सिर्फ बाज़ार की परिस्थितियों के कारण था या फिर सरकार की नीतियों ने इन्हें लाभ पहुंचाने का विशेष अवसर दिया?</p>
<p>इस गंभीर मुद्दे पर श्री रमेश ने मांग की है कि भारत के नियंत्रक और महालेखा परीक्षक (CAG) को पेट्रोलियम क्षेत्र में पिछले एक दशक के वित्तीय प्रबंधन की व्यापक ऑडिट करनी चाहिए। उनका कहना है कि इस ऑडिट से यह स्पष्ट हो सकेगा कि सरकार की नीतियां जनता के हित में थीं या कुछ गिने-चुने औद्योगिक घरानों को फायदा पहुंचाने के लिए बनाई गई थीं। यह पारदर्शिता और जवाबदेही के सिद्धांतों के अनुरूप होगा।</p>
<p>सिर्फ ऑडिट ही नहीं, बल्कि उन्होंने केंद्रीय सतर्कता आयोग (CVC) और केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) से इस पूरी प्रक्रिया की जांच की भी मांग की है। उन्होंने सवाल उठाया कि कहीं यह जानबूझकर की गई लापरवाही तो नहीं थी या फिर सरकार और तेल कंपनियों के बीच कोई अंदरूनी मिलीभगत थी। यदि ऐसा पाया जाता है तो यह न केवल नीति विफलता है, बल्कि यह जनहित के विरुद्ध आपराधिक लापरवाही भी होगी।</p>
<p>यह मुद्दा केवल आर्थिक नहीं, बल्कि राजनीतिक और सामाजिक भी है। जहां एक ओर सरकार अंतरराष्ट्रीय परिस्थितियों और वैश्विक बाजार को दोष देती है, वहीं विपक्ष लगातार यह कहता आ रहा है कि जब वैश्विक स्तर पर तेल सस्ता हो रहा है, तब भारत में कीमतें क्यों बढ़ रही हैं। इससे मध्यम वर्ग, गरीब और छोटे व्यवसायी वर्ग को सर्वाधिक नुकसान हो रहा है। कृषि, परिवहन और अन्य सेवाएं भी महंगे ईंधन की मार झेल रही हैं, जिससे महंगाई की श्रृंखला और तेज़ हो गई है।</p>
<p>जयराम रमेश के इस बयान ने एक बार फिर सरकार को कठघरे में खड़ा कर दिया है। वे केवल आरोप नहीं लगा रहे, बल्कि ठोस आंकड़ों के साथ जनहित की बात कर रहे हैं। यदि सरकार इस विषय पर चुप रहती है या कोई संतोषजनक उत्तर नहीं देती, तो यह मुद्दा आगामी चुनावों में एक बड़ा राजनीतिक मसला बन सकता है। ऐसे समय में जब देश महंगाई, बेरोजगारी और आर्थिक असमानता की चुनौतियों से जूझ रहा है, हर नीतिगत निर्णय की पारदर्शिता और न्यायिकता का परीक्षण अत्यंत आवश्यक है।</p>
<p>The post <a href="https://www.samvaadindia.com/inflation-and-loot-of-petrol-and-diesel-questions-on-government-policies-jairam-ramesh/">महंगाई की मार और पेट्रोल-डीज़ल की लूट: सरकार की नीतियों पर सवाल- जयराम रमेश</a> appeared first on <a href="https://www.samvaadindia.com">Samvaad India</a>.</p>
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			</item>
		<item>
		<title>एआईसीसी के अहमदाबाद प्रस्ताव का राष्ट्रीय प्रचार अभियान: कांग्रेस की सांगठनिक रणनीति को जनसंपर्क में बदलने की बड़ी तैयारी</title>
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		<dc:creator><![CDATA[संवाद इंडिया]]></dc:creator>
		<pubDate>Sat, 12 Apr 2025 04:44:16 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[अंतरराष्ट्रीय]]></category>
		<category><![CDATA[एक्सक्लूसिव]]></category>
		<category><![CDATA[ब्रेकिंग]]></category>
		<category><![CDATA[Congress]]></category>
		<category><![CDATA[National publicity campaign of AICC's Ahmedabad resolution: Big preparations to transform Congress' organizational strategy into public relations]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>नई दिल्ली, 12 अप्रैल। कांग्रेस कार्य समिति (CWC) की अहमदाबाद में आयोजित बैठक ऐतिहासिक साबित हुई। इस बैठक</p>
<p>The post <a href="https://www.samvaadindia.com/national-publicity-campaign-of-aiccs-ahmedabad-resolution-big-preparations-to-transform-congress-organizational-strategy-into-public-relations/">एआईसीसी के अहमदाबाद प्रस्ताव का राष्ट्रीय प्रचार अभियान: कांग्रेस की सांगठनिक रणनीति को जनसंपर्क में बदलने की बड़ी तैयारी</a> appeared first on <a href="https://www.samvaadindia.com">Samvaad India</a>.</p>
]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p>नई दिल्ली, 12 अप्रैल। कांग्रेस कार्य समिति (CWC) की अहमदाबाद में आयोजित बैठक ऐतिहासिक साबित हुई। इस बैठक में कांग्रेस की केंद्रीय इकाई, अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी (AICC) ने पार्टी के विचारों और नीतियों को प्रभावशाली तरीके से जनमानस तक पहुँचाने के उद्देश्य से &#8220;अहमदाबाद प्रस्ताव&#8221; पारित किया। प्रस्ताव के ज़रिए यह तय किया गया कि देश भर में कांग्रेस एक संगठित और सुनियोजित जनसंपर्क अभियान शुरू करेगी ताकि आम जनता को यह बताया जा सके कि पार्टी किन विचारों, आदर्शों और लक्ष्यों के साथ देश की सेवा करना चाहती है। यह सिर्फ एक वैचारिक दस्तावेज नहीं बल्कि एक सक्रिय राजनीतिक औज़ार के रूप में देखा जा रहा है।</p>
<p><strong>संगठनात्मक क्रियान्वयन और आंतरिक प्रशिक्षण की रणनीति</strong><br />
AICC के इस निर्णय के तहत कांग्रेस पार्टी के सभी प्रदेश, ज़िला और ब्लॉक स्तर के कार्यकर्ताओं और नेताओं को प्रस्ताव की गहराई से समझ देने के लिए 10-दिवसीय आंतरिक सक्रियता कार्यक्रम चलाया जाएगा। इस अभियान की शुरुआत डीसीसी (जिला कांग्रेस कमेटी) अध्यक्षों के ओरिएंटेशन से होगी, जिसमें उन्हें सांगठनिक दृष्टिकोण से मीडिया, डिजिटल प्रचार, सामाजिक संवाद और जन अभियान के नए तरीके सिखाए जाएंगे। यह ओरिएंटेशन पार्टी के पॉलिटिकल अफेयर्स डिपार्टमेंट (पीएडी) द्वारा पीपीटी प्रेजेंटेशन, इंफोग्राफिक्स और प्री-रिकॉर्डेड वीडियो के माध्यम से आयोजित किया जाएगा।</p>
<p><strong>कंटेंट निर्माण और सूचना का डिजिटलीकरण</strong><br />
प्रस्ताव के प्रभावी प्रचार के लिए कांग्रेस पार्टी की केंद्रीय सोशल मीडिया टीम प्रत्येक डीसीसी को हिंदी और अन्य प्रादेशिक भाषाओं में तैयार सामग्रियों के साथ डिजिटल टूल्स उपलब्ध कराएगी। इसमें स्लाइड प्रजेंटेशन, तथ्यों पर आधारित प्रश्नोत्तर (FAQs), उद्धरण, ऑडियो-विज़ुअल कंटेंट, और सोशल मीडिया पोस्ट शामिल होंगे। उद्देश्य यह है कि प्रत्येक कार्यकर्ता न केवल प्रस्ताव की जानकारी रखे, बल्कि उसे आम लोगों तक असरदार तरीके से पहुँचा भी सके।</p>
<p><strong>जिला स्तर पर जन संवाद और कार्यकर्ता सम्मेलन</strong><br />
प्रत्येक जिला कांग्रेस कमेटी को निर्देश दिया गया है कि वे आने वाले दिनों में अपने-अपने जिलों में कार्यकर्ता सम्मेलन आयोजित करें, जिसमें ब्लॉक कांग्रेस, युवा कांग्रेस, महिला कांग्रेस, एनएसयूआई, सेवा दल आदि की भागीदारी सुनिश्चित की जाए। इन सम्मेलनों के माध्यम से न केवल पार्टी की विचारधारा साझा की जाएगी, बल्कि जमीनी स्तर पर पार्टी की मौजूदगी को भी मज़बूत किया जाएगा। इस प्रक्रिया में प्रत्येक विधानसभा क्षेत्र से कार्यकर्ताओं को शामिल किया जाएगा।</p>
<p><strong>सोशल मीडिया और डिजिटल कैम्पेन का प्रसार</strong><br />
सोशल मीडिया को इस अभियान का केंद्र बिंदु माना गया है। कांग्रेस की आईटी और डिजिटल कमेटियों को निर्देशित किया गया है कि वे अपने ट्विटर हैंडल, फेसबुक पेज, इंस्टाग्राम, यूट्यूब चैनल और वाट्सऐप ग्रुप्स के माध्यम से प्रतिदिन प्रस्ताव की प्रमुख बातें साझा करें। डिजिटल स्लोगन्स, उद्धरण, ग्राफिक्स और नेता के वक्तव्यों को इस तरह प्रसारित किया जाए कि वे जन-जन तक पहुंचें और बातचीत की विषयवस्तु बनें।</p>
<p><strong>पैम्फलेट और घोषणापत्र का जन वितरण</strong><br />
प्रत्येक डीसीसी को यह ज़िम्मेदारी दी गई है कि वे प्रस्ताव पर आधारित पैम्फलेट्स और घोषणापत्र का जन वितरण सुनिश्चित करें। इनका उद्देश्य यह है कि आम जनता यह समझ सके कि कांग्रेस किस दृष्टिकोण से देश के भविष्य की बात कर रही है। साथ ही, भाजपा/एनडीए शासन की असफलताओं, आर्थिक विषमता, जातीय वैमनस्य, बेरोज़गारी और महंगाई जैसे मुद्दों को कांग्रेस के वैकल्पिक दृष्टिकोण के साथ सामने रखा जाए।</p>
<p><strong>स्थानीय मीडिया की भागीदारी और संवाद</strong><br />
कांग्रेस पार्टी ने इस प्रस्ताव के प्रचार-प्रसार में स्थानीय मीडिया की भूमिका को अत्यंत महत्वपूर्ण बताया है। डीसीसी अध्यक्षों को निर्देश दिए गए हैं कि वे अपने क्षेत्र के प्रिंट और इलेक्ट्रॉनिक मीडिया के पत्रकारों के साथ संवाद स्थापित करें और प्रेस कॉन्फ्रेंस, लेख, टीवी डिबेट्स आदि के माध्यम से जनजागरण करें। यह संवाद स्थानीय भाषाओं में होना चाहिए ताकि संदेश अधिक गहराई से लोगों तक पहुँचे।</p>
<p><strong>सांस्कृतिक, धार्मिक और सामाजिक मंचों पर प्रस्तुति</strong><br />
प्रस्ताव के प्रचार को सीमित नहीं रखा जाएगा। इसके तहत प्रमुख सामाजिक आयोजनों, धार्मिक मेलों, पंचायत बैठकों, सांस्कृतिक समारोहों और ग्रामीण उत्सवों में भी प्रस्ताव के बिंदुओं को प्रस्तुत किया जाएगा। कांग्रेस पार्टी का मानना है कि जनता तक पहुँचने के लिए केवल राजनीतिक मंचों का प्रयोग पर्याप्त नहीं है, बल्कि समाज के हर वर्ग से जुड़ने के लिए उसके परंपरागत संवाद स्थलों पर भी पहुंचना ज़रूरी है।</p>
<p><strong>ग्रामीण और वंचित क्षेत्रों तक संदेश विस्तार</strong><br />
कांग्रेस ने विशेष रूप से ग्रामीण, दलित, आदिवासी, पिछड़े और अल्पसंख्यक समुदायों तक पहुंचने पर ज़ोर दिया है। इसके लिए ग्राम पंचायत स्तर तक विशेष सभाओं और चौपालों का आयोजन किया जाएगा। इसके अतिरिक्त, ग़रीबी से प्रभावित क्षेत्रों में मोबाइल वैन और नुक्कड़ नाटक के माध्यम से संवाद स्थापित किया जाएगा। पार्टी का उद्देश्य है कि कोई भी नागरिक अपने अधिकारों और कांग्रेस की वैकल्पिक नीतियों से अनभिज्ञ न रहे।</p>
<p><strong>आगे की रणनीति</strong><br />
अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी का यह अहमदाबाद प्रस्ताव केवल एक राजनीतिक बयान नहीं, बल्कि आगामी लोकसभा चुनावों से पूर्व पार्टी के वैचारिक, सांगठनिक और जनसंवेदनशीलता को व्यक्त करने का एक ठोस माध्यम है। इस प्रस्ताव के ज़रिए कांग्रेस यह संदेश देना चाहती है कि वह सिर्फ अतीत की विरासत नहीं, बल्कि भविष्य की दिशा देने वाली पार्टी है। K.C. वेणुगोपाल के हस्ताक्षरित इस निर्देश पत्र ने देशभर की कांग्रेस इकाइयों को एक साथ जोड़ते हुए एक राष्ट्रव्यापी अभियान का संकेत दे दिया है, जिससे भारतीय राजनीति में एक नई बहस की शुरुआत हो सकती है।</p>
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		<title>कांग्रेस की न्याय पथ यात्रा: प्रजातंत्र और संविधान की रक्षा को लेकर अहमदाबाद में हुआ ऐतिहासिक संकल्प</title>
		<link>https://www.samvaadindia.com/congresss-nyay-path-yatra-a-historic-resolution-was-taken-in-ahmedabad-to-protect-democracy-and-the-constitution/</link>
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		<dc:creator><![CDATA[संवाद इंडिया]]></dc:creator>
		<pubDate>Wed, 09 Apr 2025 06:08:43 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[अंतरराष्ट्रीय]]></category>
		<category><![CDATA[गुजरात]]></category>
		<category><![CDATA[ब्रेकिंग]]></category>
		<category><![CDATA[राष्ट्रीय]]></category>
		<category><![CDATA[Congress]]></category>
		<category><![CDATA[Congress's Nyay Path Yatra: A historic resolution was taken in Ahmedabad to protect democracy and the Constitution]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>अहमदाबाद की ऐतिहासिक धरती पर गूंजा लोकतंत्र का स्वर अहमदाबाद 9 अप्रैल। कांग्रेस पार्टी की विस्तारित कार्यसमिति की</p>
<p>The post <a href="https://www.samvaadindia.com/congresss-nyay-path-yatra-a-historic-resolution-was-taken-in-ahmedabad-to-protect-democracy-and-the-constitution/">कांग्रेस की न्याय पथ यात्रा: प्रजातंत्र और संविधान की रक्षा को लेकर अहमदाबाद में हुआ ऐतिहासिक संकल्प</a> appeared first on <a href="https://www.samvaadindia.com">Samvaad India</a>.</p>
]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p><strong>अहमदाबाद की ऐतिहासिक धरती पर गूंजा लोकतंत्र का स्वर</strong><br />
अहमदाबाद 9 अप्रैल। कांग्रेस पार्टी की विस्तारित कार्यसमिति की बैठक एक ऐतिहासिक क्षण बनकर सामने आई, जिसमें पार्टी ने ‘न्याय पथ’ पर चलकर देश के लोकतांत्रिक मूल्यों और संविधान की रक्षा का संकल्प लिया। यह केवल एक राजनीतिक बैठक नहीं थी, बल्कि कांग्रेस के वैचारिक पुनरुद्धार और सामाजिक-राजनीतिक प्रतिबद्धता का उद्घोष था। बैठक में देशभर से आए वरिष्ठ नेताओं ने न केवल वर्तमान राजनीतिक परिदृश्य पर मंथन किया, बल्कि भारत के संविधान की प्रस्तावना में निहित सामाजिक, आर्थिक और राजनीतिक न्याय के संकल्प को दोहराया। यह वह क्षण था जब पार्टी ने अपने ऐतिहासिक मूल्यों की ओर लौटने और जनसरोकारों को प्राथमिकता देने की दिशा में ठोस रणनीति बनाने का कार्य किया।</p>
<p><strong>सरदार पटेल को श्रद्धांजलि और आदर्शों पर पुनः प्रतिबद्धता</strong><br />
बैठक के केंद्र में एक विशेष प्रस्ताव रहा जो भारत रत्न सरदार वल्लभभाई पटेल को समर्पित था। कांग्रेस कार्यसमिति ने पटेल को स्वतंत्रता संग्राम का झंडाबरदार और आधुनिक भारत का निर्माता बताते हुए उनके सिद्धांतों को वर्तमान राजनीतिक संघर्ष की नींव बताया। प्रस्ताव में कहा गया कि कांग्रेस पार्टी सरदार पटेल की राह पर चलकर किसानों, मजदूरों, कामगारों, वंचितों और शोषित वर्गों के अधिकारों की रक्षा के लिए प्रतिबद्ध है। साथ ही यह भी दोहराया गया कि &#8216;नफरत छोड़ो, भारत जोड़ो&#8217; अभियान पार्टी की विचारधारा का केंद्र बनेगा और कांग्रेस सांप्रदायिक उन्माद के खिलाफ एक मजबूत वैचारिक मोर्चा तैयार करेगी।</p>
<p><strong>संविधान की प्रस्तावना को राजनीतिक एजेंडा बनाने का ऐलान</strong><br />
कांग्रेस संचार विभाग के प्रभारी महासचिव जयराम रमेश ने संवाददाताओं से बातचीत में बताया कि बैठक में संविधान की प्रस्तावना को लेकर गहन चर्चा हुई, जिसमें सामाजिक न्याय, आर्थिक न्याय और राजनीतिक न्याय को लेकर कांग्रेस के आगामी एजेंडे पर विचार किया गया। उन्होंने कहा कि यह एजेंडा केवल एक घोषणापत्र नहीं होगा, बल्कि एक जनआंदोलन का रूप लेगा। कांग्रेस पार्टी अब संविधान में निहित मूलभूत अधिकारों को आमजन के जीवन का हिस्सा बनाने की दिशा में काम करेगी। उन्होंने कहा कि जब सरकारें संविधान की भावना के साथ खिलवाड़ करें, तब विपक्ष की ज़िम्मेदारी है कि वह उसकी रक्षा के लिए खड़ा हो।</p>
<p><strong>कांग्रेस और गुजरात का ऐतिहासिक रिश्ता:</strong><br />
कांग्रेस महासचिव केसी वेणुगोपाल ने बताया कि इस वर्ष दो महत्वपूर्ण अवसर हैं – महात्मा गांधी के कांग्रेस अध्यक्ष बनने की 100वीं वर्षगांठ और सरदार पटेल की 150वीं जयंती। इन दोनों महान नेताओं का गहरा रिश्ता गुजरात से है और इसी राज्य में स्वतंत्रता संग्राम के बीज पनपे थे। कांग्रेस का यह निर्णय कि वह गुजरात में राष्ट्रीय स्तर की बैठक करेगी, प्रतीकात्मक नहीं बल्कि एक रणनीतिक संदेश है। पार्टी यह दिखाना चाहती है कि गुजरात केवल किसी एक राजनीतिक दल का गढ़ नहीं है, बल्कि यह कांग्रेस की वैचारिक और ऐतिहासिक भूमि भी है, जहां से स्वतंत्रता की प्रेरणा निकली थी।</p>
<p><strong>आगामी अधिवेशन में राष्ट्रीय और प्रादेशिक मुद्दों पर प्रस्ताव</strong><br />
बैठक के बाद हुई प्रेस वार्ता में जानकारी दी गई कि बुधवार को कांग्रेस का राष्ट्रीय अधिवेशन आयोजित होगा, जिसमें दो प्रमुख प्रस्तावों पर चर्चा होगी। पहला प्रस्ताव देश की मौजूदा राजनीतिक और सामाजिक परिस्थितियों को लेकर होगा, जबकि दूसरा गुजरात की विशेष राजनीतिक स्थिति पर केंद्रित रहेगा। इन प्रस्तावों के माध्यम से कांग्रेस देश को यह संदेश देना चाहती है कि वह केवल विपक्षी भूमिका में नहीं, बल्कि एक वैकल्पिक और सशक्त राजनीतिक मार्गदर्शक के रूप में तैयार है। पार्टी सामाजिक न्याय की अवधारणा को राजनीतिक कार्यक्रम में परिवर्तित करने की दिशा में अग्रसर होगी।</p>
<p><strong>वरिष्ठ नेतृत्व की एकजुटता और विचारों का संगम</strong><br />
बैठक में कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे, संसदीय दल की अध्यक्ष सोनिया गांधी, लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी समेत तमाम वरिष्ठ नेताओं की मौजूदगी ने यह स्पष्ट कर दिया कि पार्टी अपने अंदरूनी मतभेदों को किनारे रखकर एकजुटता की दिशा में बढ़ रही है। सभी नेताओं ने एक स्वर में कहा कि भारत के समक्ष जो चुनौतियाँ हैं – जैसे बढ़ती बेरोज़गारी, सामाजिक विभाजन, संवैधानिक संस्थाओं का क्षरण – उनके समाधान के लिए एक व्यापक और नैतिक दृष्टिकोण की ज़रूरत है, जो केवल कांग्रेस दे सकती है। इस एकजुटता का संदेश देशभर के कार्यकर्ताओं के लिए प्रेरणास्रोत बन सकता है।</p>
<p><strong>संगठनात्मक पुनर्गठन की दिशा में ठोस प्रयास</strong><br />
सचिन पायलट ने अपने संबोधन में बताया कि वर्ष 2025 को संगठन समर्पित वर्ष घोषित किया गया है। इसका तात्पर्य है कि कांग्रेस बूथ स्तर से लेकर राष्ट्रीय स्तर तक संगठन को मजबूत करने के अभियान में जुट जाएगी। यह निर्णय कांग्रेस के लिए केवल रणनीतिक नहीं बल्कि अस्तित्व से जुड़ा कदम है। उन्होंने कहा कि एक मज़बूत संगठन ही किसी विचारधारा को जन-जन तक पहुँचा सकता है और पार्टी का यह अभियान पूरे देश में पार्टी कार्यकर्ताओं को सक्रिय करने का माध्यम बनेगा। पायलट ने यह भी कहा कि संगठनात्मक मजबूती के बिना कोई भी वैचारिक लड़ाई नहीं जीती जा सकती।</p>
<p><strong>मीडिया और प्रचार में नई रणनीति की ज़रूरत पर बल</strong><br />
पवन खेड़ा ने बताया कि आज के दौर में संचार ही सबसे बड़ा अस्त्र है और कांग्रेस इसके माध्यम से जनता तक सीधे संवाद की योजना बना रही है। उन्होंने कहा कि भ्रामक प्रचार, झूठे नैरेटिव और विकृत इतिहास को चुनौती देने के लिए एक संगठित और प्रभावशाली संचार रणनीति बनाई जा रही है। इसके लिए पार्टी डिजिटल माध्यमों, ग्राउंड रिपोर्टिंग और स्थानीय संवादों को प्राथमिकता देगी। उनका कहना था कि कांग्रेस अब यह समझ चुकी है कि केवल नीतियाँ बनाना काफी नहीं, उन्हें आम जनता तक सही रूप में पहुँचाना और उनकी भावनाओं को समझना भी उतना ही आवश्यक है।</p>
<p><strong>वैकल्पिक आर्थिक और सामाजिक मॉडल की दिशा में पहल</strong><br />
गौरव गोगोई ने कहा कि इस बैठक से एक नई आर्थिक और सामाजिक सोच उभरकर सामने आई है। उन्होंने कहा कि जब देश की अधिकांश जनता महंगाई, बेरोज़गारी और असमानता से जूझ रही हो, तब विपक्ष की ज़िम्मेदारी केवल आलोचना करने तक सीमित नहीं रह सकती। कांग्रेस अब एक ऐसा वैकल्पिक आर्थिक मॉडल तैयार करने की दिशा में काम करेगी, जिसमें संसाधनों का न्यायपूर्ण वितरण, श्रम का सम्मान और अवसरों की समानता को प्राथमिकता दी जाएगी। उन्होंने बताया कि आने वाले अधिवेशनों में इन मुद्दों को लेकर ठोस नीति प्रस्ताव पेश किए जाएंगे।</p>
<p><strong>पटेल और नेहरू को लेकर फैलाए जा रहे भ्रम पर करारा जवाब</strong><br />
बैठक में विशेष रूप से इस बात पर चर्चा हुई कि सरदार पटेल और जवाहरलाल नेहरू के रिश्तों को लेकर जो भ्रांतियाँ फैलाई जा रही हैं, उनका खंडन किया जाए। जयराम रमेश ने स्पष्ट किया कि यह दोनों नेता आधुनिक भारत की नींव के स्तंभ थे और इन्होंने महात्मा गांधी के नेतृत्व में देश को स्वतंत्रता दिलाने के लिए अभूतपूर्व योगदान दिया। उन्होंने कहा कि कांग्रेस इतिहास के साथ छेड़छाड़ के विरुद्ध एक वैचारिक अभियान चलाएगी और सच्चाई को सामने लाने का प्रयास करेगी, ताकि आने वाली पीढ़ियाँ ऐतिहासिक तथ्यों से परिचित रहें। यह अभियान केवल नेताओं की छवि की रक्षा नहीं, बल्कि राष्ट्र की चेतना की रक्षा के लिए आवश्यक है।</p>
<p>The post <a href="https://www.samvaadindia.com/congresss-nyay-path-yatra-a-historic-resolution-was-taken-in-ahmedabad-to-protect-democracy-and-the-constitution/">कांग्रेस की न्याय पथ यात्रा: प्रजातंत्र और संविधान की रक्षा को लेकर अहमदाबाद में हुआ ऐतिहासिक संकल्प</a> appeared first on <a href="https://www.samvaadindia.com">Samvaad India</a>.</p>
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		<item>
		<title>खरगे-राहुल ने जिला कांग्रेस अध्यक्षों की बैठक को संबोधित किया</title>
		<link>https://www.samvaadindia.com/kharge-rahul-addressed-the-meeting-of-district-congress-presidents/</link>
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		<dc:creator><![CDATA[संवाद इंडिया]]></dc:creator>
		<pubDate>Fri, 28 Mar 2025 15:58:04 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[अंतरराष्ट्रीय]]></category>
		<category><![CDATA[ब्रेकिंग]]></category>
		<category><![CDATA[राजनीति]]></category>
		<category><![CDATA[राष्ट्रीय]]></category>
		<category><![CDATA[Congress]]></category>
		<category><![CDATA[Kharge-Rahul addressed the meeting of district Congress presidents]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>आरएसएस-भाजपा के खिलाफ लड़ाई जारी रहेगी: खरगे खरगे ने कहा, जिला अध्यक्ष पार्टी के अग्रिम पंक्ति के सेनापति</p>
<p>The post <a href="https://www.samvaadindia.com/kharge-rahul-addressed-the-meeting-of-district-congress-presidents/">खरगे-राहुल ने जिला कांग्रेस अध्यक्षों की बैठक को संबोधित किया</a> appeared first on <a href="https://www.samvaadindia.com">Samvaad India</a>.</p>
]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<h3><strong>आरएसएस-भाजपा के खिलाफ लड़ाई जारी रहेगी: खरगे</strong></h3>
<h3><strong>खरगे ने कहा, जिला अध्यक्ष पार्टी के अग्रिम पंक्ति के सेनापति हैं</strong></h3>
<p>नई दिल्ली, 27 मार्च: कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे और लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने गुरुवार को 13 राज्यों और तीन केंद्र शासित प्रदेशों के जिला कांग्रेस अध्यक्षों की बैठक को संबोधित किया। इस बैठक का उद्देश्य पार्टी संगठन को मजबूत करना और भाजपा-आरएसएस के खिलाफ कांग्रेस की राजनीतिक लड़ाई को और धार देना था।</p>
<p>खरगे ने अपने संबोधन में स्पष्ट किया कि कांग्रेस केवल चुनावी राजनीति नहीं कर रही है, बल्कि भारतीय लोकतंत्र, संविधान और स्वतंत्र संस्थाओं को बचाने की लड़ाई लड़ रही है। उन्होंने कहा कि यह लड़ाई केवल संसद तक सीमित नहीं हो सकती, बल्कि इसे जमीन और सड़कों तक ले जाना होगा।</p>
<h3><strong>2024 के लोकसभा चुनाव और इंडिया गठबंधन का विश्लेषण</strong></h3>
<p>खरगे ने 2024 के लोकसभा चुनावों के नतीजों का विश्लेषण करते हुए कहा कि इंडिया गठबंधन ने भाजपा को 240 सीटों पर सीमित कर दिया। कांग्रेस ने लगभग 100 सीटें जीतीं, लेकिन अगर गठबंधन और मेहनत करता तो 20-30 और सीटें जीत सकता था।</p>
<p>उन्होंने कहा कि यह लड़ाई केवल संख्याओं की नहीं थी, बल्कि अगर कांग्रेस और उसके सहयोगी बेहतर प्रदर्शन करते, तो देश में वैकल्पिक सरकार बन सकती थी। इससे न केवल संवैधानिक संस्थाओं को बचाया जा सकता था, बल्कि लोकतंत्र को कमजोर करने वाली नीतियों पर भी अंकुश लगाया जा सकता था।</p>
<h3><strong>आर्थिक स्थिति और सामाजिक असमानता पर कांग्रेस का रुख</strong></h3>
<p>कांग्रेस अध्यक्ष ने देश की आर्थिक स्थिति पर गंभीर चिंता व्यक्त की। उन्होंने कहा कि मौजूदा सरकार की नीतियों ने अर्थव्यवस्था को कमजोर कर दिया है। अमीर और अमीर हो रहे हैं, जबकि गरीब और गरीब होते जा रहे हैं। बेरोजगारी अपने चरम पर है और महंगाई ने आम जनता की कमर तोड़ दी है।</p>
<p>खरगे ने बताया कि घरेलू बचत दर दशकों में सबसे कम स्तर पर पहुँच गई है। उन्होंने इसे देश की आर्थिक स्थिरता के लिए गंभीर खतरा बताया। कांग्रेस का मानना है कि सरकार की गलत नीतियों के कारण केवल कुछ उद्योगपतियों को फायदा हो रहा है, जबकि आम आदमी संघर्ष कर रहा है।</p>
<h3><strong>जाति जनगणना की मांग और सामाजिक न्याय</strong></h3>
<p>बैठक के दौरान खरगे ने जाति जनगणना की मांग को दोहराया। उन्होंने इसे सामाजिक न्याय की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम बताया। कांग्रेस का मानना है कि जाति जनगणना से समाज में हाशिए पर मौजूद समुदायों की वास्तविक स्थिति का पता चलेगा और उनके लिए नीतियाँ बनाना आसान होगा।</p>
<p>राहुल गांधी ने भी इस मुद्दे पर जोर देते हुए कहा कि कांग्रेस का संघर्ष केवल राजनीतिक नहीं है, बल्कि यह एक सामाजिक आंदोलन भी है। पार्टी का लक्ष्य एक ऐसा भारत बनाना है, जहाँ हर नागरिक को समान अवसर मिले और कोई भी भेदभाव का शिकार न हो।</p>
<h3><strong>विदेश नीति पर सरकार की विफलता और भाजपा की रणनीति</strong></h3>
<p>कांग्रेस अध्यक्ष ने केंद्र सरकार की विदेश नीति की भी आलोचना की। उन्होंने कहा कि अमेरिका और अन्य देशों ने भारत के नागरिकों का अपमान किया है और काउंटर-टैरिफ लगाकर भारत को नुकसान पहुँचाया है।</p>
<p>उन्होंने कहा कि भाजपा सरकार केवल सांप्रदायिक मुद्दों पर ध्यान केंद्रित कर रही है और इससे जनता का ध्यान बुनियादी समस्याओं से भटक रहा है। खरगे ने कहा कि कांग्रेस का फोकस इस बात पर रहेगा कि जनता के असली मुद्दों को उठाया जाए और भाजपा के दुष्प्रचार का जवाब दिया जाए।</p>
<h3><strong>जिला अध्यक्षों की भूमिका और पार्टी संगठन का महत्व</strong></h3>
<p>खरगे ने बैठक में मौजूद जिला कांग्रेस अध्यक्षों को संबोधित करते हुए कहा कि वे सिर्फ संदेशवाहक नहीं हैं, बल्कि पार्टी के सेनापति हैं। उनकी भूमिका केवल पार्टी के निर्देशों को लागू करने तक सीमित नहीं है, बल्कि वे कांग्रेस के विचारों को जमीन पर उतारने वाले असली नेता हैं।</p>
<p>उन्होंने कहा कि कांग्रेस की विचारधारा बहुत मजबूत है, लेकिन सत्ता के बिना इसे लागू नहीं किया जा सकता। इसलिए हर कार्यकर्ता को संगठन को मजबूत करने और कांग्रेस को सत्ता में लाने के लिए मेहनत करनी होगी।</p>
<h3><strong>चुनावी रणनीति और मतदाता सूची प्रबंधन</strong></h3>
<p>बैठक में यह भी चर्चा की गई कि भाजपा कैसे मतदाता सूची में विसंगतियाँ बढ़ा रही है। कांग्रेस अध्यक्ष ने जिला अध्यक्षों को निर्देश दिया कि वे इस समस्या पर ध्यान दें और सुनिश्चित करें कि किसी भी मतदाता का नाम गलत तरीके से न काटा जाए।</p>
<p>इसके अलावा, उन्होंने आगामी असम, केरल, पुडुचेरी और तमिलनाडु के चुनावों पर भी ध्यान केंद्रित करने को कहा। उन्होंने कहा कि यह जिला कांग्रेस अध्यक्षों की जिम्मेदारी है कि वे अपने-अपने जिलों में पार्टी के उम्मीदवारों की जीत सुनिश्चित करें।</p>
<p><strong>कांग्रेस की विचारधारा और भाजपा-आरएसएस के खिलाफ लड़ाई</strong></p>
<p>बैठक को संबोधित करते हुए राहुल गांधी ने कांग्रेस की विचारधारा को स्पष्ट किया। उन्होंने कहा कि कांग्रेस सिर्फ भाजपा-आरएसएस का विरोध नहीं कर रही है, बल्कि एक समावेशी भारत के निर्माण की दिशा में काम कर रही है।</p>
<p>उन्होंने कहा कि कांग्रेस का लक्ष्य एक ऐसा भारत बनाना है जहाँ हर नागरिक को समान अवसर मिले, न्याय मिले और किसी के साथ भेदभाव न हो। उन्होंने कहा कि यह संघर्ष केवल राजनीतिक नहीं, बल्कि एक वैचारिक संघर्ष भी है, जिसे कांग्रेस पूरी ताकत से लड़ेगी।</p>
<h3><strong>कांग्रेस की रणनीति और आगे की राह</strong></h3>
<p>बैठक के अंत में, कांग्रेस प्रवक्ता पवन खेड़ा ने बताया कि इस बैठक में कुल 338 जिला अध्यक्षों ने भाग लिया। उन्होंने कहा कि बैठक दोतरफा संवाद का हिस्सा थी, जहाँ न केवल वरिष्ठ नेताओं ने बात की, बल्कि जिला अध्यक्षों को भी अपनी समस्याएँ और सुझाव रखने का अवसर मिला।</p>
<p>कांग्रेस अब पूरी तरह से जमीनी स्तर पर संगठन को मजबूत करने और भाजपा-आरएसएस के खिलाफ लड़ाई को तेज करने के मूड में है। यह देखना दिलचस्प होगा कि कांग्रेस इस बैठक में लिए गए निर्णयों को कैसे लागू करती है और आने वाले चुनावों में इसका कितना प्रभाव पड़ता है।</p>
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		<title>बिहार में स्वास्थ्य सेवाओं की बदहाली: CAG रिपोर्ट में उजागर हुई भयावह तस्वीर- पवन खेड़ा</title>
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		<dc:creator><![CDATA[संवाद इंडिया]]></dc:creator>
		<pubDate>Wed, 19 Mar 2025 04:25:49 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[अंतरराष्ट्रीय]]></category>
		<category><![CDATA[बिहार]]></category>
		<category><![CDATA[bihar]]></category>
		<category><![CDATA[Congress]]></category>
		<category><![CDATA[The condition of health services in Bihar: The CAG report reveals a horrific picture - Pawan Khare]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>पटना 19 मार्च। बिहार का स्वास्थ्य ढांचा गंभीर संकट में है, और हाल ही में जारी कैग (CAG) रिपोर्ट</p>
<p>The post <a href="https://www.samvaadindia.com/the-condition-of-health-services-in-bihar-the-cag-report-reveal-a-horrific-picture-pawan-khare/">बिहार में स्वास्थ्य सेवाओं की बदहाली: CAG रिपोर्ट में उजागर हुई भयावह तस्वीर- पवन खेड़ा</a> appeared first on <a href="https://www.samvaadindia.com">Samvaad India</a>.</p>
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										<content:encoded><![CDATA[<h3><strong style="font-size: 16px;">पटना 19 मार्च।</strong><span style="font-size: 16px;"> बिहार का स्वास्थ्य ढांचा गंभीर संकट में है, और हाल ही में जारी कैग (CAG) रिपोर्ट ने इसकी भयावह स्थिति को उजागर कर दिया है। रिपोर्ट के अनुसार, राज्य के स्वास्थ्य विभाग में 49% पद खाली पड़े हैं, जिससे स्वास्थ्य सेवाओं पर गंभीर असर पड़ रहा है। डॉक्टरों की भारी कमी, जरूरी दवाओं की अनुपलब्धता, जर्जर अस्पताल, आवश्यक सुविधाओं का अभाव और बजट का सही इस्तेमाल न होना – ये सभी कारक बिहार की स्वास्थ्य सेवाओं की दयनीय स्थिति को दर्शाते हैं।</span></h3>
<p>CAG की रिपोर्ट के मुताबिक, बिहार में केवल <strong>58,144 एलोपैथिक डॉक्टर</strong> कार्यरत हैं, जबकि विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के मानकों के अनुसार, राज्य में <strong>1,24,919 डॉक्टरों की आवश्यकता</strong> है। इसका मतलब यह है कि राज्य में आधे से ज्यादा डॉक्टरों की कमी बनी हुई है। इतना ही नहीं, <strong>13,340 स्वास्थ्य विभाग के पदों पर भर्ती लंबित</strong> रही, जिससे चिकित्सा सुविधाओं में और गिरावट आई। अस्पतालों में जरूरी उपकरणों का घोर अभाव है, जिससे मरीजों को पर्याप्त इलाज नहीं मिल पा रहा है। बिहार सरकार की उदासीनता का ही नतीजा है कि <strong>बाह्यरोगी विभाग (OPD) में बुनियादी चिकित्सा सुविधाएं तक उपलब्ध नहीं हैं।</strong> कैग की जांच में पाया गया कि जिन अनुमंडलीय अस्पतालों का सर्वे किया गया, उनमें से <strong>100% अस्पतालों में आपातकालीन ऑपरेशन थियेटर नहीं थे।</strong> इसके अलावा, <strong>19% से 100% तक अस्पतालों में नैदानिक सेवाएँ पूरी तरह अनुपस्थित पाई गईं,</strong> और <strong>100% अस्पतालों में लैब तकनीशियनों की कमी</strong> थी। इन आंकड़ों से स्पष्ट है कि राज्य में स्वास्थ्य सेवाओं की स्थिति गंभीर बनी हुई है।</p>
<blockquote class="twitter-tweet" data-width="550" data-dnt="true">
<p lang="hi" dir="ltr">बिहार का स्वास्थ्य ढांचा उदासीनता की हालत में है। कैग की रिपोर्ट के मुताबिक:</p>
<p>1. स्वास्थ्य विभाग की प्रमुख इकाइयों में 49% पद खाली थे। बिहार में केवल 58,144 एलोपैथिक डॉक्टर थे, जबकि विश्व स्वास्थ्य संगठन के मापदंडों के तहत 1,24,919 एलोपैथिक डॉक्टरों की जरूरत थी। स्वास्थ्य सेवाओं… <a href="https://t.co/1AqcCxFyEo">https://t.co/1AqcCxFyEo</a></p>
<p>&mdash; Pawan Khera 🇮🇳 (@Pawankhera) <a href="https://twitter.com/Pawankhera/status/1901970375749079110?ref_src=twsrc%5Etfw">March 18, 2025</a></p></blockquote>
<p><script async src="https://platform.twitter.com/widgets.js" charset="utf-8"></script></p>
<p>इसके अलावा, राज्य सरकार द्वारा दवाइयों की खरीद में भारी लापरवाही बरती गई। कैग की रिपोर्ट के अनुसार, <strong>आवश्यक दवाइयों का केवल 14% से 63% तक ही स्टॉक उपलब्ध था,</strong> जिससे मरीजों को सही समय पर दवाइयाँ नहीं मिल पा रही थीं। मेडिकल कॉलेजों को भी <strong>45% से 68% तक दवाओं की कमी</strong> का सामना करना पड़ा। अस्पतालों में <strong>25% से 100% तक जरूरी चिकित्सा उपकरणों की कमी थी,</strong> और जिन वेंटिलेटर्स की आपूर्ति की गई थी, उनमें से केवल <strong>54% ही काम कर रहे थे।</strong> यह स्थिति कोविड-19 जैसी किसी भी महामारी के दौरान स्वास्थ्य सेवाओं की तैयारियों पर बड़ा सवाल खड़ा करती है। स्वास्थ्य विभाग की इस लापरवाही की वजह से आम जनता को इलाज के लिए निजी अस्पतालों का सहारा लेना पड़ रहा है, जहां महंगे इलाज की वजह से गरीब मरीजों को कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है।</p>
<h3><strong>बिहार के अस्पतालों में बुनियादी सुविधाओं की भारी कमी</strong></h3>
<p>बिहार में स्वास्थ्य ढांचे की सबसे गंभीर समस्या अनुमंडलीय अस्पतालों और सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों (CHC) की कमी है। रिपोर्ट के अनुसार, <strong>47 अनुमंडलों में अनुमंडलीय अस्पताल ही मौजूद नहीं हैं,</strong> जिससे लाखों लोगों को इलाज के लिए बड़े शहरों की ओर भागना पड़ता है। इसी तरह, <strong>399 स्वीकृत सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों में से केवल 191 ही बनाए गए हैं,</strong> जिसका अर्थ है कि आधे से अधिक स्वास्थ्य केंद्र केवल कागजों पर ही हैं। ग्रामीण इलाकों में चिकित्सा सुविधाएं पहले से ही बदहाल थीं, और इस रिपोर्ट ने इसे और प्रमाणित कर दिया है।</p>
<p>इसके अलावा, <strong>44% प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र (PHC) 24&#215;7 संचालित नहीं हो रहे,</strong> यानी आधे से ज्यादा अस्पताल ऐसे हैं जो जरूरतमंद मरीजों के लिए हर समय उपलब्ध नहीं हैं। कई प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों में डॉक्टर, नर्स और आवश्यक उपकरणों का भारी अभाव है। बिहार सरकार स्वास्थ्य सेवाओं में सुधार के लिए जो भी दावे कर रही है, कैग की रिपोर्ट ने उन्हें झूठा साबित कर दिया है। सरकार की विफलता का सबसे बड़ा प्रमाण यह है कि अस्पतालों में बिस्तरों की भारी कमी के कारण मरीजों को फर्श पर इलाज करवाने को मजबूर होना पड़ता है। इसके अलावा, गर्भवती महिलाओं के लिए प्रसव केंद्रों की कमी और नवजात बच्चों के लिए ICU की अनुपलब्धता भी बिहार के स्वास्थ्य तंत्र की बदहाली को दर्शाती है।</p>
<h3><strong>बिहार सरकार का बजट आवंटन और स्वास्थ्य सेवाओं में असंतुलन</strong></h3>
<p>कैग रिपोर्ट के मुताबिक, <strong>बिहार सरकार ने स्वास्थ्य विभाग के लिए ₹69,790.83 करोड़ का बजट आवंटित किया था, लेकिन उसमें से केवल 69% ही खर्च किया गया।</strong> इसका मतलब है कि <strong>₹21,743.04 करोड़ की राशि बिना इस्तेमाल किए पड़ी रही।</strong> इस राशि का सही उपयोग नहीं होने की वजह से बिहार की स्वास्थ्य सेवाओं में अपेक्षित सुधार नहीं हो सका। रिपोर्ट के अनुसार, बिहार सरकार ने राज्य के सकल घरेलू उत्पाद (GSDP) का <strong>केवल 1.33% से 1.73%</strong> तक ही स्वास्थ्य सेवाओं पर खर्च किया, जबकि आवश्यक न्यूनतम स्तर <strong>2.5%</strong> होना चाहिए था। अगर बिहार सरकार अपने आवंटित बजट का सही इस्तेमाल करती, तो अस्पतालों की स्थिति में सुधार हो सकता था और मरीजों को बेहतर इलाज मिल सकता था।</p>
<p>राजनीतिक दृष्टि से देखा जाए तो यह रिपोर्ट चुनावी माहौल में बड़ा मुद्दा बन सकती है। भाजपा और जदयू की सरकार पिछले कई वर्षों से बिहार में शासन कर रही है, लेकिन स्वास्थ्य सेवाओं में कोई बड़ा सुधार नहीं हुआ है। विपक्ष लगातार सरकार पर स्वास्थ्य व्यवस्था की अनदेखी करने का आरोप लगाता रहा है। इस रिपोर्ट के बाद यह आरोप और भी मजबूत हो गया है। अब सवाल यह उठता है कि बिहार सरकार इस रिपोर्ट के निष्कर्षों को कैसे स्वीकार करती है और भविष्य में स्वास्थ्य सेवाओं में सुधार के लिए क्या ठोस कदम उठाती है।</p>
<p>राज्य में स्वास्थ्य सेवाओं की इस बदतर स्थिति के कारण गरीब और मध्यम वर्ग के लोग सबसे ज्यादा प्रभावित हो रहे हैं। सरकारी अस्पतालों की दुर्दशा के कारण मरीजों को निजी अस्पतालों में महंगे इलाज के लिए मजबूर होना पड़ता है। हालांकि, राज्य सरकार विकास के बड़े-बड़े दावे करती है, लेकिन जमीनी हकीकत कुछ और ही बयां कर रही है। बिहार जैसे बड़े राज्य में अगर स्वास्थ्य सेवाएं इस तरह से चरमराई हुई हैं, तो इसका सीधा असर प्रदेश के आर्थिक विकास और मानव संसाधन पर पड़ेगा।</p>
<h3><strong>क्या बिहार की स्वास्थ्य सेवाओं में सुधार संभव है?</strong></h3>
<p>बिहार की स्वास्थ्य सेवाओं को सुधारने के लिए सरकार को ठोस नीतियों और योजनाओं की जरूरत है। सबसे पहले, <strong>स्वास्थ्य विभाग में खाली पड़े 49% पदों को तत्काल भरा जाना चाहिए।</strong> डॉक्टरों, नर्सों और लैब तकनीशियनों की भर्ती में तेजी लाने की जरूरत है ताकि अस्पतालों में मरीजों को समय पर उचित इलाज मिल सके। साथ ही, सरकार को यह सुनिश्चित करना होगा कि <strong>बजट का पूरा उपयोग हो और स्वास्थ्य सेवाओं में निवेश बढ़ाया जाए।</strong> इसके अलावा, राज्य के सभी अनुमंडलों में <strong>अनुमंडलीय अस्पतालों की स्थापना की जानी चाहिए</strong> और सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों का निर्माण पूरा किया जाना चाहिए।</p>
<p>अगर बिहार सरकार स्वास्थ्य क्षेत्र में गंभीर सुधार नहीं करती, तो इसका असर आने वाले चुनावों में देखने को मिल सकता है। जनता अब विकास के खोखले दावों पर विश्वास करने के बजाय जमीनी हकीकत पर ध्यान दे रही है। कैग की रिपोर्ट ने यह साबित कर दिया है कि बिहार की स्वास्थ्य सेवाएं सिर्फ नाममात्र की हैं और जमीनी स्तर पर लोग स्वास्थ्य सुविधाओं के लिए तरस रहे हैं।</p>
<p>अब देखना यह है कि सरकार इस गंभीर रिपोर्ट को कितनी गंभीरता से लेती है और आने वाले समय में स्वास्थ्य क्षेत्र में क्या सुधार करती है। अगर राज्य सरकार ने समय रहते ठोस कदम नहीं उठाए, तो यह मुद्दा आगामी चुनावों में बड़ा राजनीतिक हथियार बन सकता है।</p>
<p>The post <a href="https://www.samvaadindia.com/the-condition-of-health-services-in-bihar-the-cag-report-reveal-a-horrific-picture-pawan-khare/">बिहार में स्वास्थ्य सेवाओं की बदहाली: CAG रिपोर्ट में उजागर हुई भयावह तस्वीर- पवन खेड़ा</a> appeared first on <a href="https://www.samvaadindia.com">Samvaad India</a>.</p>
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		<item>
		<title>बजट 2025: कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने जीडीपी वृद्धि के अनुमान में कटौती पर सरकार पर साधा निशाना, उठाए आर्थिक नीतियों पर सवाल</title>
		<link>https://www.samvaadindia.com/budget-2025-congress-targets-the-government-over-reduction-in-gdp-growth-estimates-raises-questions-on-economic-policies/</link>
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		<dc:creator><![CDATA[संवाद इंडिया]]></dc:creator>
		<pubDate>Wed, 08 Jan 2025 13:29:06 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[अंतरराष्ट्रीय]]></category>
		<category><![CDATA[दिल्ली]]></category>
		<category><![CDATA[Budget 2025: Congress targets the government over reduction in GDP growth estimates]]></category>
		<category><![CDATA[Congress]]></category>
		<category><![CDATA[raises questions on economic policies]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>नई दिल्ली, बिजनेस डेस्क 8 जनवरी। 2025 के केंद्रीय बजट से पहले भारतीय अर्थव्यवस्था की स्थिति पर चर्चा</p>
<p>The post <a href="https://www.samvaadindia.com/budget-2025-congress-targets-the-government-over-reduction-in-gdp-growth-estimates-raises-questions-on-economic-policies/">बजट 2025: कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने जीडीपी वृद्धि के अनुमान में कटौती पर सरकार पर साधा निशाना, उठाए आर्थिक नीतियों पर सवाल</a> appeared first on <a href="https://www.samvaadindia.com">Samvaad India</a>.</p>
]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p>नई दिल्ली, बिजनेस डेस्क 8 जनवरी। 2025 के केंद्रीय बजट से पहले भारतीय अर्थव्यवस्था की स्थिति पर चर्चा तेज हो गई है। विपक्षी पार्टी कांग्रेस ने सरकार को जीडीपी वृद्धि के अनुमान में कटौती और आर्थिक मंदी के संकेतों को लेकर घेरा है। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और महासचिव (संचार) जयराम रमेश ने इसे &#8220;निराशाजनक पृष्ठभूमि&#8221; करार देते हुए सरकार की नीतियों और आर्थिक रणनीतियों की कड़ी आलोचना की है। उन्होंने जीडीपी वृद्धि में कमी, निजी निवेश की सुस्ती, और खपत में गिरावट जैसे मुद्दों पर चिंता जताई।</p>
<p>जयराम रमेश ने कहा कि सरकार द्वारा वित्त वर्ष 2024-25 के लिए जीडीपी वृद्धि का 6.4% का अनुमान आरबीआई के 6.6% और पिछले वित्त वर्ष के 8.2% की तुलना में काफी कम है। उन्होंने इसे चार साल का निचला स्तर बताया और कहा कि यह अर्थव्यवस्था में गहराते संकट का प्रमाण है। रमेश ने कहा, &#8220;महज कुछ हफ्तों में भारतीय अर्थव्यवस्था का आधार कमजोर हो गया है। विकास और निवेश में आई सुस्ती सरकार की नीतिगत विफलता को दर्शाती है।&#8221;</p>
<p>कांग्रेस नेता ने निजी खपत और मध्यम वर्ग की आर्थिक स्थिति पर विशेष जोर दिया। उन्होंने कहा, &#8220;दूसरी तिमाही के आंकड़ों के अनुसार, निजी अंतिम उपभोग व्यय (PFCE) की वृद्धि दर पिछली तिमाही के 7.4% से घटकर 6% रह गई। कार की बिक्री चार साल के निचले स्तर पर है। मध्यम वर्ग की खपत में कमी अर्थव्यवस्था के लिए गंभीर समस्या है।&#8221;</p>
<p>उन्होंने भारतीय उद्योग जगत के सीईओ द्वारा मध्यम वर्ग की स्थिति पर जताई गई चिंता का हवाला देते हुए कहा कि खपत में नरमी न केवल जीडीपी वृद्धि को प्रभावित कर रही है, बल्कि निजी क्षेत्र को भी निवेश से रोक रही है।</p>
<p>जयराम रमेश ने निजी क्षेत्र के निवेश में कमी को सरकार की नीतिगत विफलता बताया। उन्होंने कहा, &#8220;सकल स्थिर पूंजी निर्माण (GFCF) वित्त वर्ष 2024-25 में 6.4% तक धीमा हो जाएगा, जबकि पिछले वर्ष यह 9% थी। निजी क्षेत्र नई परियोजनाओं में निवेश करने से हिचकिचा रहा है, जिससे मध्यम और दीर्घकालिक वृद्धि बाधित हो रही है।&#8221;</p>
<p>उन्होंने सरकार पर पूंजीगत व्यय के आंकड़ों में वादों और वास्तविकता के बीच अंतर का आरोप लगाया। रमेश ने कहा कि 2024-25 के केंद्रीय बजट में 11.11 लाख करोड़ रुपये के पूंजीगत निवेश का वादा किया गया था, लेकिन नवंबर 2024 तक केवल 5.13 लाख करोड़ रुपये खर्च किए गए। यह पिछले साल की तुलना में 12% कम है।</p>
<p>कांग्रेस नेता ने घरेलू बचत में आई गिरावट पर भी चिंता जताई। उन्होंने कहा कि परिवारों की शुद्ध बचत 2020-21 से 2022-23 के बीच 9 लाख करोड़ रुपये कम हो गई है। घरेलू वित्तीय देनदारियां जीडीपी के 6.4% तक पहुंच गई हैं, जो दशकों में सबसे अधिक है। रमेश ने कहा, &#8220;कोविड-19 महामारी के दौरान हुई नीतिगत विफलताएं आज भी भारतीय परिवारों पर भारी पड़ रही हैं।&#8221;</p>
<p>जयराम रमेश ने बजट से पहले गरीबों और मध्यम वर्ग के लिए ठोस कदम उठाने की मांग की। उन्होंने सुझाव दिया कि:</p>
<ul>
<li><strong>मनरेगा मजदूरी:</strong> ग्रामीण गरीबों की आय बढ़ाने के लिए मनरेगा मजदूरी में वृद्धि की जाए।</li>
<li><strong>न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP):</strong> किसानों की समस्याओं को कम करने के लिए एमएसपी में वृद्धि की जाए।</li>
<li><strong>जीएसटी सुधार:</strong> मौजूदा जीएसटी प्रणाली को सरल और अधिक प्रभावी बनाया जाए।</li>
<li><strong>मध्यम वर्ग के लिए आयकर राहत:</strong> आर्थिक दबाव झेल रहे मध्यम वर्ग को आयकर में राहत दी जाए।</li>
</ul>
<p>कांग्रेस नेता ने विनिर्माण क्षेत्र में विकास की धीमी रफ्तार पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा, &#8220;विनिर्माण क्षेत्र में वैसी वृद्धि नहीं हो रही, जैसी होनी चाहिए। इससे रोजगार सृजन और निर्यात दोनों पर नकारात्मक प्रभाव पड़ रहा है।&#8221;</p>
<p><strong>सरकार पर आरोप: वादे और प्रदर्शन में अंतर</strong></p>
<p>जयराम रमेश ने सरकार पर वादे और प्रदर्शन के बीच भारी अंतर का आरोप लगाया। उन्होंने कहा, &#8220;सरकार ने बड़े वादे किए थे, लेकिन आंकड़े बताते हैं कि उनकी योजनाएं जमीनी स्तर पर नाकाम रही हैं। निवेश और खपत में कमी का मतलब है कि अर्थव्यवस्था के पुनरुद्धार की गति धीमी रहेगी।&#8221;</p>
<p>कांग्रेस ने सरकार से मांग की कि विकास और निवेश में आई मंदी को दूर करने के लिए ठोस और मौलिक कदम उठाए जाएं। रमेश ने कहा, &#8220;बजट 2025 देश के आर्थिक संकट को दूर करने का आखिरी मौका हो सकता है। इसके लिए सरकार को नीतिगत सुधारों के साथ-साथ व्यावहारिक कदम उठाने होंगे।&#8221;</p>
<p>जयराम रमेश के बयान ने बजट 2025 से पहले आर्थिक बहस को तेज कर दिया है। कांग्रेस ने जीडीपी वृद्धि में कटौती, खपत और निवेश में गिरावट, और घरेलू बचत में कमी जैसे मुद्दों को लेकर सरकार की नीतियों पर सवाल उठाए हैं। आने वाले बजट में सरकार किस तरह से इन चिंताओं को दूर करती है, यह देखना अहम होगा। बजट 2025 सिर्फ आर्थिक दस्तावेज नहीं, बल्कि सरकार की नीतिगत प्राथमिकताओं का प्रतिबिंब होगा। यह देश के गरीबों, किसानों, और मध्यम वर्ग की समस्याओं को हल करने का एक महत्वपूर्ण अवसर है। विपक्ष की आलोचनाओं के बीच, यह देखना होगा कि सरकार कैसे इन चुनौतियों का सामना करती है और देश को विकास की नई दिशा देती है।</p>
<p>The post <a href="https://www.samvaadindia.com/budget-2025-congress-targets-the-government-over-reduction-in-gdp-growth-estimates-raises-questions-on-economic-policies/">बजट 2025: कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने जीडीपी वृद्धि के अनुमान में कटौती पर सरकार पर साधा निशाना, उठाए आर्थिक नीतियों पर सवाल</a> appeared first on <a href="https://www.samvaadindia.com">Samvaad India</a>.</p>
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		<title>दिल्ली विधानसभा चुनाव 2025: आप, भाजपा और कांग्रेस के बीच सियासी घमासान</title>
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		<dc:creator><![CDATA[संवाद इंडिया]]></dc:creator>
		<pubDate>Tue, 07 Jan 2025 16:18:15 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[Delhi elections]]></category>
		<category><![CDATA[अंतरराष्ट्रीय]]></category>
		<category><![CDATA[दिल्ली]]></category>
		<category><![CDATA[ब्रेकिंग]]></category>
		<category><![CDATA[लोकसभा चुनाव 2024]]></category>
		<category><![CDATA[Aap]]></category>
		<category><![CDATA[Bjp]]></category>
		<category><![CDATA[BJP and Congress]]></category>
		<category><![CDATA[Congress]]></category>
		<category><![CDATA[Delhi Assembly Elections 2025: Political battle between AAP]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>दिल्ली, 7 जनवरी। विधानसभा चुनाव की तारीखों का ऐलान हो गया है, और इस बार की लड़ाई तीन</p>
<p>The post <a href="https://www.samvaadindia.com/delhi-assembly-elections-2025-political-battle-between-aap-bjp-and-congress/">दिल्ली विधानसभा चुनाव 2025: आप, भाजपा और कांग्रेस के बीच सियासी घमासान</a> appeared first on <a href="https://www.samvaadindia.com">Samvaad India</a>.</p>
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										<content:encoded><![CDATA[<p>दिल्ली, 7 जनवरी। विधानसभा चुनाव की तारीखों का ऐलान हो गया है, और इस बार की लड़ाई तीन बड़े दलों- आम आदमी पार्टी (आप), भारतीय जनता पार्टी (भाजपा), और कांग्रेस के बीच बेहद दिलचस्प होने जा रही है। सत्तारूढ़ आप, जो पिछले 12 वर्षों से दिल्ली की सत्ता पर काबिज है, अपने काम के दम पर लगातार चौथी बार जीत दर्ज करने की कोशिश में है। वहीं, भाजपा और कांग्रेस, दोनों ही दल आप को घेरने और अपनी जमीन मजबूत करने के लिए पूरी ताकत झोंक रहे हैं।</p>
<p>इस चुनाव में कई प्रमुख मुद्दे और कद्दावर चेहरे चर्चा में हैं। जहां एक ओर आप पर भ्रष्टाचार और विवादों के आरोप लग रहे हैं, वहीं दूसरी ओर भाजपा और कांग्रेस अपने मजबूत उम्मीदवारों के साथ चुनावी रण में उतर चुके हैं।</p>
<p><strong>दिल्ली विधानसभा चुनाव 2025 के प्रमुख मुद्दे</strong></p>
<p><strong><span style="color: #ff0000;">1. मनी लॉन्ड्रिंग और शराब घोटाला</span></strong></p>
<p>पिछले कुछ वर्षों में आम आदमी पार्टी के शीर्ष नेताओं पर भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप लगे हैं। इनमें सबसे ज्यादा चर्चा में रहे हैं मनी लॉन्ड्रिंग और शराब घोटाला। इस घोटाले में पार्टी के प्रमुख नेता मनीष सिसोदिया और संजय सिंह जैसे बड़े नाम जेल जा चुके हैं।</p>
<p><strong>भाजपा और कांग्रेस का हमला:</strong> विपक्षी दलों ने इस मुद्दे को लेकर आप सरकार पर लगातार निशाना साधा है। भाजपा ने दावा किया है कि आप ने दिल्ली के खजाने को लूटा और भ्रष्टाचार को बढ़ावा दिया। कांग्रेस ने भी इस मुद्दे को लेकर आप को घेरते हुए इसे जनता के साथ धोखा करार दिया।</p>
<p><strong>आप का बचाव:</strong> आप ने इन आरोपों को राजनीतिक साजिश बताया है। पार्टी का कहना है कि केंद्र सरकार एजेंसियों का दुरुपयोग कर रही है ताकि आप नेताओं की छवि खराब की जा सके।</p>
<p><strong><span style="color: #ff0000;">2. यमुना नदी की सफाई</span></strong></p>
<p>आप सरकार ने अपने शुरुआती कार्यकाल में वादा किया था कि यमुना नदी को इतना साफ किया जाएगा कि लोग उसमें डुबकी लगा सकें। हालांकि, 12 वर्षों के बाद भी यमुना की स्थिति जस की तस है।</p>
<p><strong>विपक्ष का आरोप:</strong> भाजपा और कांग्रेस का कहना है कि यमुना की सफाई के लिए आवंटित धनराशि को आप ने अपने प्रचार में खर्च कर दिया।</p>
<p><strong>सरकार का पक्ष:</strong> सरकार का कहना है कि उसने कई सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट बनाए हैं और यमुना की सफाई के लिए लगातार प्रयासरत है।</p>
<p><span style="color: #ff0000;"><strong>3. मुख्यमंत्री बंगले का रेनोवेशन (शीशमहल मुद्दा)</strong></span></p>
<p>मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल के बंगले के रेनोवेशन पर करीब 33 करोड़ रुपये खर्च होने का मामला इस चुनाव में आप के लिए बड़ी चुनौती बनकर सामने आया है।</p>
<p><strong>भाजपा का हमला:</strong> भाजपा ने इसे जनता के पैसे का दुरुपयोग बताते हुए आप सरकार को आड़े हाथों लिया है।</p>
<p><strong>आप का बचाव:</strong> आप का कहना है कि यह खर्च सरकारी अनुमोदन के बाद हुआ और इसे बेवजह राजनीतिक रंग दिया जा रहा है।</p>
<p><span style="color: #ff0000;"><strong>4. महिलाओं के लिए आर्थिक योजनाएं</strong></span></p>
<p>आम आदमी पार्टी ने महिलाओं के लिए सम्मान राशि योजना की घोषणा की है, जिसके तहत 18 वर्ष से अधिक उम्र की महिलाओं को 1,000 रुपये प्रति माह देने का वादा किया गया है।</p>
<p><strong>विपक्ष का जवाब:</strong> कांग्रेस ने प्यारी दीदी योजना के तहत 2,500 रुपये देने का वादा किया है। भाजपा ने इसे जनता को गुमराह करने की रणनीति बताया है।</p>
<p><strong>प्रमुख चेहरे और सीटों का गणित</strong></p>
<p><strong><span style="color: #ff0000;">1. अरविंद केजरीवाल (आप)</span></strong></p>
<p>नई दिल्ली सीट से चुनाव लड़ रहे अरविंद केजरीवाल एक बार फिर से मुख्यमंत्री पद के लिए सबसे प्रबल दावेदार हैं।</p>
<p><strong>चुनौती:</strong> भाजपा और कांग्रेस ने इस बार मजबूत उम्मीदवार उतारकर केजरीवाल को कड़ी टक्कर देने की तैयारी की है।</p>
<p><span style="color: #ff0000;"><strong>2. संदीप दीक्षित (कांग्रेस)</strong></span></p>
<p>नई दिल्ली सीट पर कांग्रेस ने पूर्व मुख्यमंत्री शीला दीक्षित के बेटे संदीप दीक्षित को मैदान में उतारा है।</p>
<p><strong>मजबूती:</strong> संदीप दीक्षित का राजनीतिक अनुभव और कांग्रेस की पुरानी पकड़ इस सीट पर मुकाबले को दिलचस्प बना रही है।</p>
<p><span style="color: #ff0000;"><strong>3. प्रवेश वर्मा (भाजपा)</strong></span></p>
<p>भाजपा ने प्रवेश वर्मा को नई दिल्ली सीट से उतारा है।</p>
<p><strong>रणनीति:</strong> भाजपा का लक्ष्य है कि केजरीवाल को उनके गढ़ में हराकर बड़ा संदेश दिया जाए।</p>
<p><strong><span style="color: #ff0000;">4. मनीष सिसोदिया (आप)</span></strong></p>
<p>पटपड़गंज सीट को छोड़कर इस बार मनीष सिसोदिया जंगपुरा सीट से चुनाव लड़ रहे हैं।</p>
<p><span style="color: #000000;"><strong>रणनीति:</strong> </span>जंगपुरा आप का गढ़ मानी जाती है, और सिसोदिया यहां से सुरक्षित जीत हासिल करना चाहते हैं।</p>
<p><span style="color: #ff0000;"><strong>5. आतिशी मर्लेना (आप)</strong></span></p>
<p>कालकाजी सीट से मौजूदा मुख्यमंत्री आतिशी मर्लेना चुनाव लड़ रही हैं।</p>
<p><strong>चुनौती:</strong> भाजपा ने उनके खिलाफ रमेश बिधूड़ी को मैदान में उतारा है, जो इस सीट पर कड़ी टक्कर दे सकते हैं।</p>
<p><span style="color: #ff0000;"><strong>6. अलका लांबा (कांग्रेस)</strong></span></p>
<p>अलका लांबा कालकाजी सीट से कांग्रेस की उम्मीदवार हैं।</p>
<p><strong>रणनीति:</strong> अलका लांबा का अनुभव और उनकी क्षेत्र में पकड़ कांग्रेस के लिए फायदेमंद हो सकती है।</p>
<p><strong>चुनावी प्रचार और संभावनाएं</strong></p>
<p><strong><span style="color: #ff0000;">आप का प्रचार</span></strong></p>
<p>आम आदमी पार्टी अपने काम को केंद्र में रखकर प्रचार कर रही है। मोहल्ला क्लीनिक, शिक्षा क्षेत्र में सुधार, और बिजली-पानी की सस्ती दरों को आप अपने मुख्य उपलब्धियों के तौर पर पेश कर रही है।</p>
<p><span style="color: #ff0000;"><strong>भाजपा का अभियान</strong></span></p>
<p>भाजपा ने इस बार आप पर लगाए गए भ्रष्टाचार के आरोपों को मुख्य मुद्दा बनाया है। साथ ही, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की लोकप्रियता को भुनाने के लिए बड़े पैमाने पर प्रचार अभियान चलाया जा रहा है।</p>
<p><strong><span style="color: #ff0000;">कांग्रेस की रणनीति</span></strong></p>
<p>कांग्रेस अपने पुराने जनाधार को वापस पाने की कोशिश कर रही है। पार्टी का फोकस महिलाओं, युवाओं और अल्पसंख्यकों पर है।</p>
<p><strong>सम्पादक विशेष</strong></p>
<p>दिल्ली विधानसभा चुनाव 2025 त्रिकोणीय मुकाबले की ओर बढ़ रहा है। जहां एक तरफ आप को अपने विवादों और भ्रष्टाचार के आरोपों का सामना करना पड़ रहा है, वहीं भाजपा और कांग्रेस भी आप को कड़ी टक्कर देने के लिए पूरी तरह तैयार हैं।</p>
<p>इस चुनाव के परिणाम न केवल दिल्ली की राजनीति को बल्कि देश की राजनीति को भी नई दिशा दे सकते हैं। जनता किसे अपना नेता चुनती है, यह देखने के लिए 8 फरवरी 2025 का इंतजार करना होगा।</p>
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		<title>पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह के अंतिम संस्कार को लेकर विवाद: कांग्रेस और भाजपा आमने-सामने</title>
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		<dc:creator><![CDATA[संवाद इंडिया]]></dc:creator>
		<pubDate>Sat, 28 Dec 2024 15:14:41 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[अंतरराष्ट्रीय]]></category>
		<category><![CDATA[दिल्ली]]></category>
		<category><![CDATA[ब्रेकिंग]]></category>
		<category><![CDATA[Bjp]]></category>
		<category><![CDATA[Congress]]></category>
		<category><![CDATA[Dispute over funeral of former Prime Minister Manmohan Singh: Congress and BJP face to face]]></category>
		<category><![CDATA[Manmohan singh]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>नई दिल्ली, 28 दिसंबर। पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह का 27 दिसंबर को निधन हुआ। इसके बाद उनका अंतिम</p>
<p>The post <a href="https://www.samvaadindia.com/dispute-over-funeral-of-former-prime-minister-manmohan-singh-congress-and-bjp-face-to-face/">पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह के अंतिम संस्कार को लेकर विवाद: कांग्रेस और भाजपा आमने-सामने</a> appeared first on <a href="https://www.samvaadindia.com">Samvaad India</a>.</p>
]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p>नई दिल्ली, 28 दिसंबर। पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह का 27 दिसंबर को निधन हुआ। इसके बाद उनका अंतिम संस्कार दिल्ली के निगमबोध घाट पर किया गया। कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने इस निर्णय पर सरकार की तीखी आलोचना करते हुए इसे &#8220;सिख समुदाय और भारत के महान सपूत&#8221; का अपमान करार दिया। उन्होंने कहा कि सभी पूर्व प्रधानमंत्रियों का अंतिम संस्कार विशेष स्मारक स्थलों पर किया गया है, जिससे आम लोग उन्हें श्रद्धांजलि दे सकें।</p>
<p>राहुल ने लिखा, &#8220;मनमोहन सिंह जी ने भारत को आर्थिक महाशक्ति बनाने और वंचितों को मुख्यधारा में लाने का कार्य किया। उनका अंतिम संस्कार निगमबोध घाट पर करना न केवल उनकी गरिमा का हनन है, बल्कि एक गलत परंपरा की शुरुआत है।&#8221;</p>
<p>कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने इसे &#8220;जानबूझकर किया गया अपमान&#8221; बताते हुए कहा कि सरकार ने सिख समुदाय और भारत के पहले सिख प्रधानमंत्री को सम्मान देने में असफलता दिखाई।</p>
<blockquote class="twitter-tweet" data-width="550" data-dnt="true">
<p lang="hi" dir="ltr">भारत माता के महान सपूत और सिख समुदाय के पहले प्रधानमंत्री डॉ मनमोहन सिंह जी का अंतिम संस्कार आज निगमबोध घाट पर करवाकर वर्तमान सरकार द्वारा उनका सरासर अपमान किया गया है।</p>
<p>एक दशक के लिए वह भारत के प्रधानमंत्री रहे, उनके दौर में देश आर्थिक महाशक्ति बना और उनकी नीतियां आज भी देश के…</p>
<p>&mdash; Rahul Gandhi (@RahulGandhi) <a href="https://twitter.com/RahulGandhi/status/1872952908502974976?ref_src=twsrc%5Etfw">December 28, 2024</a></p></blockquote>
<p><script async src="https://platform.twitter.com/widgets.js" charset="utf-8"></script></p>
<p><strong>भाजपा का पलटवार और सरकार का स्पष्टीकरण </strong></p>
<p>राहुल गांधी के आरोपों के बाद भाजपा ने कांग्रेस पर पलटवार करते हुए इस मुद्दे पर राजनीति करने का आरोप लगाया। भाजपा प्रवक्ता संबित पात्रा ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा, &#8220;पूर्व प्रधानमंत्री के निधन पर राजनीति करना कांग्रेस की असंवेदनशीलता को दिखाता है। भाजपा और सरकार का मानना है कि मृत्यु के समय गरिमा सर्वोपरि होनी चाहिए।&#8221;</p>
<p>पात्रा ने कहा कि केंद्र सरकार ने पहले ही मनमोहन सिंह के परिवार और कांग्रेस पार्टी को सूचित किया था कि उनकी स्मृति में एक स्मारक स्थल बनाया जाएगा। उन्होंने कहा, &#8220;अंतिम संस्कार के समय देरी नहीं की जा सकती। स्मारक के लिए प्रक्रिया चल रही है। लेकिन कांग्रेस ने इसे राजनीतिक मुद्दा बना दिया।&#8221;</p>
<blockquote class="twitter-tweet" data-width="550" data-dnt="true">
<p lang="en" dir="ltr">BJP National Spokesperson Dr. <a href="https://twitter.com/sambitswaraj?ref_src=twsrc%5Etfw">@sambitswaraj</a> addresses press conference in Bhubaneswar, Odisha. <a href="https://t.co/hN9Iazj63e">https://t.co/hN9Iazj63e</a></p>
<p>&mdash; BJP (@BJP4India) <a href="https://twitter.com/BJP4India/status/1872971452833787982?ref_src=twsrc%5Etfw">December 28, 2024</a></p></blockquote>
<p><script async src="https://platform.twitter.com/widgets.js" charset="utf-8"></script></p>
<p>गृह मंत्रालय ने भी एक बयान में कहा कि कैबिनेट बैठक के बाद कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे और स्वर्गीय मनमोहन सिंह के परिवार को सूचित किया गया था कि स्मारक के लिए जगह आवंटित की जाएगी। मंत्रालय ने स्पष्ट किया कि स्मारक के लिए ट्रस्ट का गठन और स्थान आवंटन एक प्रक्रिया के तहत किया जाएगा।</p>
<p><strong>विपक्ष और अन्य नेताओं की प्रतिक्रिया</strong></p>
<p>दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने भी इस मामले में भाजपा पर निशाना साधा। उन्होंने कहा, &#8220;डॉ. मनमोहन सिंह के अंतिम संस्कार के लिए सरकार 1,000 गज जमीन भी आवंटित नहीं कर सकी। यह शर्मनाक है। उन्होंने भारत का नाम वैश्विक मंच पर ऊंचा किया और उनकी इस तरह से उपेक्षा करना बेहद गलत है।&#8221;</p>
<p>अन्य विपक्षी नेताओं ने भी इस मामले को लेकर केंद्र सरकार की आलोचना की। तृणमूल कांग्रेस और शिवसेना ने इसे एक बड़े नेता का अपमान बताते हुए भाजपा की प्राथमिकताओं पर सवाल उठाए।</p>
<p><strong>मनमोहन सिंह की विरासत और स्मारक पर विवाद का असर</strong></p>
<p>मनमोहन सिंह को उनके कार्यकाल के दौरान आर्थिक सुधारों के लिए याद किया जाता है। उन्होंने उदारीकरण, प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (FDI) और सामाजिक कल्याण योजनाओं के जरिए भारत को नई ऊंचाइयों पर पहुंचाया।</p>
<p>उनकी मृत्यु के बाद स्मारक को लेकर हुआ विवाद उनकी विरासत पर चर्चा को नया आयाम देता है। जहां एक ओर कांग्रेस इसे राजनीतिक अपमान बता रही है, वहीं भाजपा इसे संवेदनशील विषय पर राजनीति कह रही है।</p>
<p>सरकार की ओर से स्मारक की घोषणा के बावजूद, कांग्रेस और अन्य विपक्षी दलों ने इस मुद्दे को राजनीतिक बहस का केंद्र बना दिया है। यह विवाद भविष्य में भी सत्ताधारी और विपक्षी दलों के बीच टकराव का कारण बन सकता है।</p>
<p>मनमोहन सिंह के अंतिम संस्कार और स्मारक को लेकर विवाद ने भारतीय राजनीति के नए आयाम को उजागर किया है। यह घटनाक्रम दिखाता है कि संवेदनशील मुद्दे भी राजनीतिक बहस में तब्दील हो सकते हैं। मनमोहन सिंह का योगदान उनकी नीतियों और कृतित्व में अमर रहेगा, लेकिन यह विवाद उनकी विरासत को अनावश्यक विवादों में घसीटता हुआ प्रतीत होता है।</p>
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