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	<title>Amit shah Archives - Samvaad India</title>
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	<title>Amit shah Archives - Samvaad India</title>
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		<title>उत्तर प्रदेश में अब नेतृत्व परिवर्तन नहीं होगा</title>
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		<dc:creator><![CDATA[संवाद इंडिया]]></dc:creator>
		<pubDate>Sun, 21 Jul 2024 16:09:08 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[उत्तर प्रदेश]]></category>
		<category><![CDATA[एक्सक्लूसिव]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>(वसिंद्र मिश्र) बीजेपी हाई कमान  ने गंभीर सोच विचार के बाद यह तय किया है की उपचुनाव तक</p>
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										<content:encoded><![CDATA[<div>(वसिंद्र मिश्र) बीजेपी हाई कमान  ने गंभीर सोच विचार के बाद यह तय किया है की उपचुनाव तक उत्तर प्रदेश में यथा स्थिति बनाई रखी जाएगी और उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को पूरी तरह से फ्री हैंड देने का निर्णय लिया गया है ऐसी स्थिति में योगी आदित्यनाथ का विरोध कर रहे केशव प्रसाद मौर्य और उनके गुटके बाकी नेताओं और विधायकों के लिए बेहद मुश्किल का दौर आने वाला है।</div>
<div>
<div dir="auto">
<div dir="auto">इसकी शुरुआत हो गयीं है अभी प्रारंभिक तौर पर योगी आदित्यनाथ ने उपचुनाव के प्रबंधन और तैयारी के लिए जो कमेटी बनाई है उसमें केशव प्रसाद मौर्य और उनके करीबियों को जिम्मेदारी नहीं सौंप गई है जो लोग योगी आदित्यनाथ को जानते हैं उनको कोई गलतफहमी नहीं होनी चाहिए योगी आदित्यनाथ की कार्यशैली बहुत ही स्वतंत्र रूप से कार्य करने की रही है वे अपने कामकाज में बहुत लंबे समय तक बाहरी दखलअंदाजी पसंद नहीं करते हैं और अगर उनकी मर्जी के खिलाफ कोई निर्णय होता है तो वह उस फैसले को दिल से स्वीकार नहीं करते हैं।</div>
<div dir="auto">उदाहरण के तौर पर उत्तर प्रदेश के मुख्य सचिव के पद पर कुछ साल पहले हुई दुर्गा शंकर मिश्रा की नियुक्ति है दुर्गा शंकर मिश्रा की नियुक्ति पार्टी वाला कमान ने  योगी आदित्य नाथ की इच्छा के विरुद्ध किया था और योगी की इच्छा के विरुद्ध उनको सेवा विस्तार भी दिया जाता रहा लेकिन योगी आदित्यनाथ ने कभी भी दुर्गा शंकर मिश्र पर भरोसा नहीं किया उनके रिटायरमेंट के बाद अपने सबसे भरोसेमंद अधिकारी मनोज कुमार सिंह को मुख्यमंत्री ने मुख्य सचिव की कुर्सी सौंप दी योगी आदित्यनाथ 2017 में भी केंद्र सरकार की कार्यशैली से नाराज होकर दिल्ली से गोरखपुर चले गए थे और वे लखनऊ तब आए जब उनको यह आश्वासन दिया गया की मुख्यमंत्री के पद पर उन्हीं को तैनात किया जा रहा है</div>
<div dir="auto"> 2022 के विधानसभा के चुनाव में भी योगी आदित्यनाथ ने अपने शर्तों पर मुख्यमंत्री का पद हासिल किया योगी आदित्यनाथ इंडिपेंडेंट माइंडसेट से काम करते हैं और खास तौर से दागी और संदिग्ध छवि वाले नेताओं और अधिकारियों से दूरी बनाए रखने की कोशिश करते हैं।</div>
<div dir="auto"> शायद यही कारण है कि उनके मंत्री मण्डल में शामिल कुछ नेता और उनकी सरकार में शामिल कुछ अधिकारी पिछली कल्याण सिंह की सरकार की तरह उनके खिलाफ भी समय-समय पर साजिश करने की कोशिश करते रहते हैं भारतीय राजनीति में इस तरह की घटनाएं इसके पहले भी कई बार होती रही हैं जब केंद्रीय नेतृत्व राज्य नेतृत्व के खिलाफ जो जोर आजमाइस करता रहा</div>
<div dir="auto">हाल के वर्षों में अगर देखा जाए तो विश्वनाथ प्रताप सिंह हेमवती नंदन बहुगुणा और कांग्रेस पार्टी के केंद्रीय नेतृत्व ने समय-समय पर अपने राज्य नेतृत्व के खिलाफ विफल कोशिश की थी कांग्रेस पार्टी छोड़कर जन मोर्चा बनाने वाले विश्वनाथ प्रताप सिंह ने चौधरी अजीत सिंह को मुलायम सिंह के मुकाबले मुख्यमंत्री का चुनाव लड़ा दिया था लेकिन ऐन वक्त पर परिस्थितियों का आकलन करने के बाद उन्होंने अपने घटक दल के पांच विधायकों को अजीत सिंह के बजाय मुलायम सिंह के पक्ष में समर्थन देने का निर्देश दे दिया परिणाम स्वरूप मुलायम सिंह चौधरी अजीत सिंह को शिकस्त देने में कामयाब रहे और पहली बार मुख्यमंत्री बन गए यह अलग बात रही की विश्वनाथ प्रताप सिंह और मुलायम सिंह के बीच में हमेशा से 36 का रिश्ता रहा जब विश्वनाथ प्रताप सिंह उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री थे तो कांग्रेस पार्टी में उनके विरोधी लोगों ने मुलायम सिंह की मदद से उनके कथित दहिया ट्रस्ट में हुए घोटाले का मुद्दा उछाला था।</div>
<div dir="auto">दूसरी घटना हेमवती नंदन बहुगुणा और राज मंगल पांडे के दौर में हुई राज मंगल पांडे, हेमवती नंदन बहुगुणा के करीबी माने जाते थे लेकिन जब उत्तर प्रदेश में मुख्यमंत्री के चयन के समय राज मंगल पांडे और उनके विरोधी के बीच में शक्ति परीक्षण हुआ तो बहुगुणा ने राज मंगल पांडे का साथ नहीं दिया कांग्रेस पार्टी विधानमंडल के नेता के रूप में प्रमोद तिवारी की नियुक्ति के समय इस तरह की घटनाएं तो कई बार हुई नरेश अग्रवाल खुद को कांग्रेस विधान मंडल दल के नेता के दावेदार मानते थे और उनकी कोशिश रहती थी की प्रमोद तिवारी के बजाएं नेता विधानमंडल दल की जिम्मेदारी उनको दी जाए लेकिन जब-जब नेता विधान मंडल दल के चयन की स्थिति पैदा हुई तो उसे समय कांग्रेस पार्टी आला कमान  की तरफ से नरेश अग्रवाल के मुकाबले प्रमोद तिवारी को सपोर्ट किया गया</div>
<div dir="auto">इसकी शुरुआत नवल किशोर शर्मा से हुई और उनके बाद जीतेन्द्र प्रसाद सत्यव्रत चतुर्वेदी दिग्विजय सिंह जितने भी केंद्रीय पर्यवेक्षक और प्रभारी उत्तर प्रदेश में आए सभी ने नरेश अग्रवाल के मुकाबले प्रमोद तिवारी को सपोर्ट किया।</div>
<div dir="auto">नरेश अग्रवाल नव कांग्रेस पार्टी में अपना करियर समाप्त होता देखकर उन्होंने कांग्रेस विधानमंडल दल को तोड़ दिया और लगभग 22 विधायकों के साथ उत्तर प्रदेश में कल्याण सिंह सरकार को समर्थन दे दिया था और कल्याण सिंह मंत्रिमंडल में शामिल हो गए तब से लेकर अब तक कांग्रेस पार्टी उत्तर प्रदेश में अपने सर्वाइवल के लिए संघर्ष कर रही है।</div>
<div dir="auto">केशव प्रसाद मौर्य के साथ इस समय जो कुछ हुआ है भारतीय राजनीति में यह कोई पहली घटना नहीं है जब केंद्रीय नेतृत्व अपने चहेते नेताओं को आगे करके अपने विरोधियों को कमजोर करने की हो और कामयाबी नहीं मिलने की स्थिति में यू टर्न ले लिया जो नेता उसके इशारे पर विरोध के स्वर बुलंद करते रहे उन्ही को डंप कर दिया मौजूदा राजनीति इस समय ओबीसी दलित और अति पिछड़ों की राजनीति है देश की सभी पार्टियों इन वर्गों को अपने पक्ष में जुटाने के लिए कोशिश में लगे हैं जनता पार्टी के अंदर भी सामाजिक समीकरण और जातीय समीकरण बनाने की कोशिश चल रही है और इसी कोशिश के तहत उत्तर प्रदेश में भी सत्ता और संगठन में संतुलन बनाने की कोशिश जारी है लेकिन योगी आदित्यनाथ के बढ़त कद और पापुलैरिटी के सामने पार्टी आला कमान अपने मिशन को कुछ समय के लिए स्थगित करने के मूड में दिखाई दे रहा है यही कारण है की योगी विरोधियों को कुछ समय के लिए शांत रहने के संकेत दे दिए गए हैं।</div>
<div dir="auto">इस माह के अंत में उत्तर प्रदेश विधानसभा का सत्र शुरू होने वाला है और उम्मीद की जा रही है की उपचुनाव की तारीख भी इसी माह मे घोषित हो जाएगी ऐसी स्थिति में पार्टी नेतृत्व संगठन और सरकार को बेहतर तालमेल बनाकर उपचुनाव में जीत हासिल करने के निर्देश दिए हैँ मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ पहले ही दावा कर चुके हैं कि भारतीय जनता पार्टी उपचुनाव में सर्वाधिक सीटे जीतेगी  भारतीय जनता पार्टी और सरकार के अंदर उठा बवंडर अब उपचुनाव के परिणाम आने तक शांत रहने वाला है।</div>
<div dir="auto"></div>
</div>
</div>
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		<title>क्या कल्याण सिंह की तरह योगी आदित्यनाथ के खिलाफ हो रही है साजिश</title>
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		<dc:creator><![CDATA[संवाद इंडिया]]></dc:creator>
		<pubDate>Tue, 16 Jul 2024 13:25:26 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[उत्तर प्रदेश]]></category>
		<category><![CDATA[एक्सक्लूसिव]]></category>
		<category><![CDATA[Amit shah]]></category>
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		<category><![CDATA[Moti singh]]></category>
		<category><![CDATA[nripendra mishra]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>(वसिंद्र मिश्र) क्या उत्तर प्रदेश की राजनीति में एक बार फिर कल्याण सिंह का दौर वापस आ गया</p>
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]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p>(वसिंद्र मिश्र) क्या उत्तर प्रदेश की राजनीति में एक बार फिर कल्याण सिंह का दौर वापस आ गया है? क्या उत्तर प्रदेश में एक बार फिर जिस तरीके से कल्याण सिंह के खिलाफ पार्टी के अंदर एक विद्रोह की स्थिति पैदा की गई और उसके बाद उनको बहुत ही संयोजित तरीके से मुख्यमंत्री पद से हटाया गया था उसी तरह का माहौल बनता जा रहा है? मौजूदा मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के खिलाफ क्या एक बार फिर उत्तर प्रदेश की सरकार और भारतीय जनता पार्टी और उसका संगठन उसके नेता उसके विधायक मुख्यमंत्री के खिलाफ होते जा रहे हैं?<br />
यह तमाम ऐसे सवाल है जो पिछले 4 जून के लोकसभा के चुनाव परिणाम आने के बाद से लेकर लगातार सार्वजनिक तौर पर पूछे जा रहे हैं और बताए जा रहे हैं कुछ लोगों का लगातार यह मानना रहा है कि अब उत्तर प्रदेश में नेतृत्व परिवर्तन महज एक औपचारिकता बची है और किसी भी दिन उत्तर प्रदेश में नेतृत्व परिवर्तन हो सकता है और मुख्यमंत्री के रूप में किसी दूसरे व्यक्ति की ताजपोशी हो सकती है लेकिन क्या आज के हालात में मौजूदा मुख्यमंत्री को बदलने से भारतीय जनता पार्टी को फायदा होने वाला है आने वाले 2027 के चुनाव में या जिस तरीके से कल्याण सिंह को बदलने में कुछ चुनिंदा नेताओं का अहम जरूर शांत हो गया वह खुश हो गए लेकिन लेकिन लंबे समय के बाद बीजेपी का बहुत ही ज्यादा नुकसान हुआ था क्या ठीक उसी तरीके से मौजूदा नेतृत्व के बदलने से भारतीय जनता पार्टी को दीर्घकालीन उसका नुकसान उठाना पड़ेगा राजनीतिक तौर पर यह तमाम ऐसे सवाल हैं जिसका उत्तर खोजना जरूरी है।</p>
<p>हम शुरुआत करते हैं कि उत्तर प्रदेश में क्या एक बार फिर कल्याण सिंह का दौर वापस आ गया है क्या जिस तरह से कल्याण सिंह के दौर में केंद्र की सरकार और केंद्र का पार्टी नेतृत्व और उत्तर प्रदेश की सरकार और उत्तर प्रदेश का पार्टी नेतृत्व एक दूसरे के खिलाफ काम कर रहा था क्या जिस तरीके से कल्याण सिंह के वक्त में उत्तर प्रदेश भाजपा के उत्तर प्रदेश सरकार में शामिल तमाम महत्वाकांक्षी नेताओं ने कल्याण सिंह के खिलाफ काम किया था और उनको हटाने में अपनी भूमिका निभाई थी क्या ठीक उसी तरीके की स्थिति इस समय उत्तर प्रदेश में बनती दिखाई नहीं दे रही है जिस तरीके के रिएक्शन संगठन से लेकर पार्टी कि नेताओं की तरफ से पहले देवरिया फिर गोरखपुर फिर प्रतापगढ़ फिर जौनपुर इन तमाम जनपदों से जिस तरीके के रिएक्शन पार्टी के नेताओं के द्वारा एक के बाद एक देखने और पढ़ने को मिल रहा है जिस तरीके से नेताओं की तरफ से लगातार यह आरोप लगाया जा रहा है की नौकरशाही बेलगाम हो गई है नौकरशाही पार्टी के कार्यकर्ताओं का अनादर कर रही है नौकरशाह पार्टी के नेताओं का अनादर कर रही है पार्टी के नेताओं और कार्यकर्ताओं का सम्मान नहीं कर रही है नौकरशाही में व्यापक स्तर पर भ्रष्टाचार बढ़ गया है तमाम ऐसे सवाल हैं जो इनडायरेक्ट मौजूद मुख्यमंत्री की कार्य शैली पर सवाल खड़े करते हैं यह सवाल कोई और नहीं उठा रहा है बल्कि बीजेपी के जिम्मेदार नेता उठा रहे हैं चाहे डिप्टी मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य हों या उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री मोती सिंह हो या उत्तर प्रदेश भाजपा के विधायक रमेश मिश्रा हों या इस तरीके के तमाम और नेता हैं जो संगठन के अंदर और संगठन के बाहर चाहे बीजेपी के गोरखपुर के एमएलसी देवेंद्र प्रताप सिंह इन सभी लोगों की तरफ से उत्तर प्रदेश की सरकार और नौकरशाही को कटघरे में खड़ा किया जा रहा है।</p>
<p>मैं एक-एक करके आप लोगों के सामने उन हालातो का विश्लेषण करने जा रहा हूं किस तरीके से धीरे-धीरे योगी सरकार और योगी आदित्यनाथ के खिलाफ माहौल बनाने की कोशिश हो रही है मैं एक बार फिर आप लोगों को इतिहास की तरफ ले जाने की कोशिश करता हूं कल्याण सिंह उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री थे कल्याण सिंह के मुख्यमंत्री काल के दौरान उनके कैबिनेट मंत्री में शामिल कलराज मिश्रा लाल जी टंडन सरीखे नेता उनके खिलाफ दबी जुबान से काम करते थे उस समय पार्टी संगठन भी कल्याण सिंह के खिलाफ था इन लोगों की कोशिश थी कि कल्याण सिंह को मुख्यमंत्री के पद से हटवा कर मुख्यमंत्री की कुर्सी हथियाई जाए इसलिए हर रोज कल्याण सिंह की सरकार पर नौकरशाही के बेलगाम होने का नौकरशाही का भ्रष्टाचार में लिप्त होने का गंभीर आरोप लगने लगे और आरोप लगाने में बाकी मीडिया तो पीछे रही जो आरएसएस से जुड़े हुए मुखपत्र थे पब्लिकेशन थे ऑर्गेनाइजर थे उन लोगों ने बहुत बढ चढ़कर हिस्सा लिया यहां तक कि उस समय के प्रमुख सचिव मुख्यमंत्री नृपेंद्र मिश्रा उस समय के डीजी पुलिस प्रकाश सिंह के बीच में शीत युद्ध चल रहा था बताया जा रहा था कि प्रकाश सिंह और नृपेंद्र मिश्रा एक दूसरे को सीधे तौर पर देखना नहीं चाहते हैं एक दूसरे से बेहतर समन्वय और तालमेल नहीं है नृपेंद्र मिश्रा के खिलाफ उस समय आरएसएस के मुखपत्रों में रोज खबरें छपती थी और कहा जाता था कि नृपेंद्र मिश्रा मुख्यमंत्री को अपने हिसाब से समझाते हैं और मुख्यमंत्री उन्हीं की सलाह से काम करते हैं नतीजन पार्टी के कार्यकर्ताओं की अनदेखी हो रही है इसी बीच लाल कृष्ण आडवाणी की रथ यात्रा को लेकर एक रिपोर्ट तैयार हुई थी कि उत्तर प्रदेश के गृह विभाग की तरफ से उत्तर प्रदेश के अभिसूचना विभाग की तरफ से और उसे रिपोर्ट को डीजी पुलिस प्रकाश सिंह की तरफ से मुख्यमंत्री को कॉन्फिडेंसिली भेजा गया था उस रिपोर्ट में तमाम ऐसे बिंदुओं की ओर इशारा किया गया था जिसको लेकर बाद में तूफान खड़ा हो गया उस रिपोर्ट में कथित तौर पर कहा गया था कि अगर आडवाणी जी की यात्रा उत्तर प्रदेश उत्तर प्रदेश की सीमा में आएगी तो उत्तर प्रदेश के कुछ जनपदों में सांप्रदायिक तनाव बढ़ने की संभावना है यह रिपोर्ट पूरी तरीके से गोपनीय और अति गोपनीय थी उसे रिपोर्ट को डीजीपी कार्यालय और डीजी इंटेलिजेंस की तरफ से मुख्यमंत्री को भेजा गया था लेकिन वह रिपोर्ट किन्हीं कारणों से कुछ चुनिंदा अखबारों में छपवा दी गई रिपोर्ट के छपने के बाद बवाल मच गया पार्टी का शीर्श नेतृत्व और संघ परिवार इस बात को लेकर काफी नाराजगी जताई और कहा गया कि यह रिपोर्ट अपने ही सरकार में कैसे बनाई गई और कैसे लीक हुई परिणाम यह हुआ उसकी जांच के लिए तत्कालीन डीजी पुलिस प्रकाश सिंह ने ऑफिसियल सीक्रेट एक्ट के तहत लखनऊ के हजरतगंज थाने में एक मुकदमा कायम करा दिया अज्ञात लोगों के खिलाफ अब उस मुकदमा के कायम होने के बाद जो शीत युद्ध तत्कालीन प्रमुख सचिव नृपेंद्र मिश्रा और डीजी पुलिस प्रकाश कुमार के बीच चल रहा था वह और तेज हो गया और इन दो शीर्ष अधिकारियों के आपसी खींचतान को कम करने के लिए मुख्यमंत्री ने डीजी पुलिस और उनकी टीम को बदल दिया प्रकाश सिंह को डीजी होमगार्ड बनाकर भेज दिया गया प्रकाश सिंह ने विरोध के तौर पर डीजी होमगार्ड का पद नहीं संभाला और वह छुट्टी चले गए प्रकाश सिंह उस समय के संघ प्रमुख राजू भैया के करीबी माने जाते थे और राजू भैया का उनको संरक्षण हासिल था प्रकाश सिंह के लिए रज्जू भैया ने सिफारिश किया और कुछ दिनों के बाद प्रकाश सिंह को फिर से डीजे पुलिस बना दिया गया और प्रकाश सिंह ने उस समय के अपने चाहते एसपी शैलजा कांत मिश्रा को फिर से एसएसपी लखनऊ बनवाया वही शैलजा कांत मिश्रा जो इस समय मथुरा तीर्थ विकास क्षेत्र के बड़े पद पर कार्यरत हैं योगी आदित्यनाथ के मुख्यमंत्री बनने के दिन से और फिर नृपेंद्र मिश्रा को प्रमुख सचिव मुख्यमंत्री के पद से हटाकर बोर्ड ऑफ रेवेन्यू में इलाहाबाद भेज दिया गया बहुत ही महत्वहीन पद पर नृपेंद्र मिश्रा कुछ दिन उस पद पर रहे बाद में वह अपने तरीके से चीजों को मैनेज किया और फिर कुछ दिन में वापसी हो गई उसके बाद यह विवाद धीरे-धीरे बढ़ता रहा और अंत में कल्याण सिंह को हटाने का फैसला हो गया और कल्याण सिंह को तैयार करके राम प्रकाश गुप्ता को उनका सक्सेसर अपॉइंट कर दिया गया लेकिन जो महत्वाकांक्षी नेता उस समय सरकार में थे चाहे वह कलराज मिश्रा हों लाल जी टंडन हो यह सभी लोग चैन से नहीं बैठे लगातार राम प्रकाश गुप्ता के खिलाफ भी मुहिम चलाते रहे और अंत में फिर एक बार उत्तर प्रदेश में नेतृत्व परिवर्तन हुआ राम प्रकाश गुप्ता की जगह राजनाथ सिंह को मुख्यमंत्री बना दिया गया यह अलग बात है कि उत्तर प्रदेश विधानसभा का चुनाव हुआ तो उत्तर प्रदेश में बीजेपी की शर्मनाक हार हुई और लगभग एक दशक तक उत्तर प्रदेश की सत्ता से बाहर रही आज कमोबेश वही स्थिति है योगी आदित्यनाथ के खिलाफ उत्तर प्रदेश सरकार के कुछ मंत्री से लेकर कुछ विधायक सक्रिय है उनको केंद्रीय नेतृत्व से संरक्षण हासिल है वह केंद्रीय नेतृत्व के संरक्षण में रोज योगी आदित्यनाथ के खिलाफ कुछ ना कुछ कस्तानी कारनामें करते रहते हैं इसकी शुरुआत 4 जून के बाद ज्यादा तेजी से देखने को मिल रही है जब उत्तर प्रदेश में कार्यकर्ता अभिनंदन सम्मेलन के जरिये जिलों जिलों में उत्तर प्रदेश सरकार के खिलाफ और नौकरशाही के खिलाफ आरोप लगाए जा रहे हैं हद तो तब हो गई जब जब उत्तर प्रदेश के पूर्व मंत्री और भारतीय जनता पार्टी के वरिष्ठ नेता प्रतापगढ़ से मोती सिंह ने कार्यकर्ता अभिनंदन सम्मेलन में इस बात पर गंभीर आरोप लगाया कि उत्तर प्रदेश के नौकरशाही में भ्रष्टाचार अपनी चरम सीमा पर पहुंच गया है नौकरशाही बेलगाम है उन्होंने यह भी दावा किया तो उनके 40 साल के राजनीतिक जीवन में इस लेवल का भ्रष्टाचार इसके पहले उन्होंने कभी नहीं देखा था कमोवेश इसी तरह का आरोप जौनपुर से बीजेपी के एमएलए रमेश मिश्रा ने लगाया और उसके बाद जब अभी कार्य समिति की बैठक हुई थी तो उसमें डिप्टी चीफ मिनिस्टर केशव प्रसाद मौर्य ने भी कार्यकर्ताओं की उपेक्षा का आरोप लगाया और उन्होंने कहा संगठन सरकार से बड़ा है संगठन सरकार से ज्यादा महत्वपूर्ण है और सरकार की तुलना में संगठन और कार्यकर्ताओं को ज्यादा तरजीह मिलना चाहिए ज्यादा महत्व मिलना चाहिए।<br />
मैं अब आपको एक बार फिर से इतिहास में ले जाना चाहता हूं जब कल्याण सिंह के खिलाफ मुहिम शुरू हुई थी धीरे-धीरे उसे समय भी ब्राह्मण बिरादरी के 55 विधायकों ने कल्याण सिंह के खिलाफ दुर्गा प्रसाद मिश्रा जो उस समय देवरिया के बीजेपी के विधायक थे उनकी रहनुमाई में एक प्रेशर ग्रुप बनाया और कल्याण सिंह की सरकार पर ब्राह्मण विरोधी होने का आरोप लगाया था और उस समय भी दुर्गा प्रसाद मिश्र और उन विधायकों के खिलाफ अनुशासनहीनता की कार्रवाई करने के बजाय केंद्रीय नेतृत्व ने बीच बचाव का रास्ता अपनाया दोनों तरफ शांत करा कर एक तरफ कल्याण सिंह को और दूसरी तरफ दुर्गा प्रसाद मिश्रा और उनके लगभग 50-55 विधायकों को शांत कराया ठीक उसी तरीके से सिनेरियो एक बार फिर बनता दिखाई दे रहा है इस बार पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा की मौजूदगी में पार्टी के कार्य समिति में कार्यकर्ता के उपेक्षाओं के गंभीर आरोप लगाए गए और जगह-जगह जो कार्यकर्ता अभिनंदन सम्मेलन हो रहे हैं उसमें भी बेलगाम नौकरशाही, नौकरशाही में व्याप्त भ्रष्टाचार उसको लेकर गंभीर आरोप लगाए जा रहे हैं पढ़ने को मिल रहे हैं देखने को मिले हैं तो क्या माना जाए एक बार फिर उत्तर प्रदेश की राजनीति में कल्याण सिंह का दौर वापस आ गया है क्या यह माना जाए एक बार फिर जिस तरीके से कल्याण सिंह के खिलाफ राजनीतिक साजिश करके उनको मजबूर किया गया कुर्सी से इस्तीफा देने के लिए पद से इस्तीफा देने के लिए और अपने पसंदीदा किसी व्यक्ति को मुख्यमंत्री बनने के लिए ठीक उसी तरीके से स्थिति इस तरीके की हालत योगी आदित्यनाथ के साथ पैदा करने की कोशिश हो रही है और अगर ऐसा होता है तो क्या बीजेपी के शीर्ष नेतृत्व नें कल्याण सिंह के वक्त में हुई उसे राजनीतिक चूक से सबक नहीं लिया क्या वहीं घटना फिर से रिपीट होती है और उसी तरीके के फैसले फिर दोहराए जाते हैं तो यह तय नहीं है कि 2027 के चुनाव में योगी आदित्यनाथ के हटाये जाने का खामियाजा पार्टी और नेताओं को भुगतना पड़ सकता है महज नेताओं के आपसी अहंकार आपसी खींचतान का नतीजा क्या लॉन्ग टर्म में बीजेपी, बीजेपी का शीर्श नेतृत्व बीजेपी के और उससे जुड़े हुए महत्वपूर्ण नेता उठाने के लिए और भुगतने के लिए तैयार हैं यह तो पार्टी को तय करना है पार्टी के नेतृत्व को तय करना है।</p>
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		<title>इंडी गठबंधन षडयंत्रकारियों का समूह, कर रहा है सरकार के खिलाफ दुष्प्रचार- डा दिनेश शर्मा</title>
		<link>https://www.samvaadindia.com/indi-alliance-a-group-of-conspirators-is-spreading-propaganda-against-the-government-dr-dinesh-sharma/</link>
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		<dc:creator><![CDATA[संवाद इंडिया]]></dc:creator>
		<pubDate>Wed, 26 Jun 2024 04:53:15 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[उत्तर प्रदेश]]></category>
		<category><![CDATA[खास खबर]]></category>
		<category><![CDATA[दिल्ली]]></category>
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		<category><![CDATA[Narendra modi]]></category>
		<category><![CDATA[Upgov]]></category>
		<category><![CDATA[Yogi Adityanath]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>दिल्ली /लखनऊ। राज्यसभा सांसद व यूपी के पूर्व उपमुख्यमंत्री डा दिनेश शर्मा ने इंडी गठबंधन को षडयंकारियों का</p>
<p>The post <a href="https://www.samvaadindia.com/indi-alliance-a-group-of-conspirators-is-spreading-propaganda-against-the-government-dr-dinesh-sharma/">इंडी गठबंधन षडयंत्रकारियों का समूह, कर रहा है सरकार के खिलाफ दुष्प्रचार- डा दिनेश शर्मा</a> appeared first on <a href="https://www.samvaadindia.com">Samvaad India</a>.</p>
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										<content:encoded><![CDATA[<p>दिल्ली /लखनऊ। राज्यसभा सांसद व यूपी के पूर्व उपमुख्यमंत्री डा दिनेश शर्मा ने इंडी गठबंधन को षडयंकारियों का समूह बताते हुए कहा कि सरकार के खिलाफ दुष्प्रचार करना इनका एकमात्र उद्देश्य है। वे येन केन प्रकारेण सत्ता पर काबिज होने का सपना देखते रहे हैं। लोकसभा अध्यक्ष के चुनाव के लिए सहमति नहीं बनने के लिए विपक्ष को जिम्मेदार बताते हुए उन्होंने कहा कि एनडीए की ओर से रक्षा मंत्री ने सहमति बनाकर लोकतंत्रिक परम्पराओं को बनाए रखने का प्रयास किया था पर विपक्ष की मंशा ठीक नहीं थी इसलिए उसने प्रत्याशी उतारा दिया है। अब दूध का दूध और पानी का पानी हो जाएगा।</p>
<p>पत्रकारों से बात करते हुए डा शर्मा ने कहा कि लोकसभा चुनाव में मोदी मैजिक ने देश भर में काम किया है। यह सही है कि कुछ सीटों का नुकसान हुआ है पर इसके बावजूद चार राज्यों सहित देश में एनडीए की सरकार बनी है। अरुणाचल,सिक्कम, उडीसा और आन्ध्र में जिस प्रकार से एनडीए की सरकार बनी है उससे यह साफ हो गया है कि भाजपा पूरे देश की पार्टी बन चुकी है। भाजपा को काडर आधारित दल बताते हुए उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में तीसरी बार एनडीए की सरकार बनी है।<br />
सांसद ने कहा कि कांग्रेस बैसाखी वाली पार्टी है जिसका अपना कोई अस्तित्व नहीं है और दूसरे दलों पर आश्रित होकर राजनीति कर रही है। चुनाव में 100 का आंकडा पार नहीं करने वाली कांग्रेस जीत का जश्र मना रही है। हाल यह है कि विपक्ष के सभी दल ने मिलकर जितनी सीट जीती है भाजपा ने अकेले उससे कही अधिक सीटों पर जीत दर्ज की है। विपक्ष आज भी जनता के बीच में भ्रम फैला रहा है।<br />
उन्होंने नोएडा भाजपा कार्यालय सभागार में एकत्रित जन समूह को मुख्य अतिथि के रूप में संबोधित करते हुए कहा कि आज 25 जून है जिसे देश के लोकतंत्र के इतिहास में काला दिवस के रूप में मनाया जाता है। इसी दिन देश में आपातकाल लगा था और जनता को कांग्रेस की तत्कालीन सरकार का लोकतंत्र एवं संविधान विरोधी सबसे भयानक चेहरा देखने को मिला था । तब देश की जनता ने कांग्रेस सरकार का जनता पर अत्याचार का तांडव देखा था। आज संविधान को बदलने का आरोप लगाने वाली कांग्रेस की तत्कालीन प्रधानमंत्री श्रीमती इंदिरा गांधी ने देश में आपातकाल लगाने के एक दिन बाद अपने मंत्रिमंडल को उस निर्णय की सूचना दी थी। ऐसा करके उन्होंने संविधान की धज्जियां उडा दी थी। देश के राष्ट्रपति पर दबाव डालकर एक दिन बाद इस निर्णय पर हस्ताक्षर कराए गए थे।आपातकाल लगाकर डेढ लाख लोगों को जेल में डाला गया था। मीडिया पर भी प्रतिबंध लगाया गया था। कांग्रेस की सरकारों ने 50 से अधिक बार संविधान को बदला है । 92 बार संवैधानिक तरीके से चीन की सरकारों को बर्खास्त किया है।<br />
लोकसभा चुनाव में उत्तर प्रदेश के परिणाम पर उन्होंने कहा कि इस बार भी भाजपा को सपा से आठ प्रतिशत मत अधिक मिला है पर सीट कम रह गईं। ये परिणाम बेहतर हो सकते थे। पार्टी कमियों की समीक्षा कर रही है। आपातकाल विरोधी दिवस के अवसर पर नोएडा भाजपा कार्यालय में आयोजित कार्यक्रम में क्षेत्रीय सांसद श्री महेश शर्मा पूर्व राज्यसभा सांसद कांता कर्दम महानगर अध्यक्ष मनोज गुप्ता एवं भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय प्रवक्ता श्री गोपाल कृष्ण अग्रवाल सहित भारी संख्या में लोग उपस्थित थे।</p>
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