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	<title>उत्तर प्रदेश Archives - Samvaad India</title>
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	<title>उत्तर प्रदेश Archives - Samvaad India</title>
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		<title>राष्ट्रभक्ति ही देश संचालन का आधार, जाति-धर्म की राजनीति से नहीं चलेगा राष्ट्र : डॉ दिनेश शर्मा</title>
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		<pubDate>Mon, 13 Apr 2026 04:32:14 +0000</pubDate>
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		<category><![CDATA[the nation will not run on caste-religion politics: Dr. Dinesh Sharma]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>लखनऊ/शामली,  13 अप्रैल। राज्यसभा सांसद एवं उत्तर प्रदेश के पूर्व उपमुख्यमंत्री डॉ दिनेश शर्मा ने स्पष्ट शब्दों में</p>
<p>The post <a href="https://www.samvaadindia.com/patriotism-is-the-basis-of-running-the-country-the-nation-will-not-run-on-caste-religion-politics-dr-dinesh-sharma/">राष्ट्रभक्ति ही देश संचालन का आधार, जाति-धर्म की राजनीति से नहीं चलेगा राष्ट्र : डॉ दिनेश शर्मा</a> appeared first on <a href="https://www.samvaadindia.com">Samvaad India</a>.</p>
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										<content:encoded><![CDATA[<p>लखनऊ/शामली,  13 अप्रैल। राज्यसभा सांसद एवं उत्तर प्रदेश के पूर्व उपमुख्यमंत्री डॉ दिनेश शर्मा ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि भारत जैसे विशाल और विविधतापूर्ण देश को केवल राष्ट्रभक्ति के आधार पर ही संचालित किया जा सकता है। उन्होंने कहा कि जाति और धर्म के आधार पर राजनीति करना देश की एकता और अखंडता के लिए घातक है। गुर्जर समाज के वरिष्ठ नेता एवं सदस्य विधान परिषद वीरेंद्र सिंह और भाजपा नेता मनीष चौहान के संयोजन में आयोजित विशाल जनसभा में मुख्य अतिथि के रूप में संबोधित करते हुए उन्होंने यह विचार व्यक्त किए।<br />
उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में देश की राजनीति को राष्ट्रहित और जनकल्याण की दिशा में आगे बढ़ाना आवश्यक है। उन्होंने जोर देकर कहा कि भारतीय जनता पार्टी की सरकार “सबका साथ, सबका विकास और सबका विश्वास” के सिद्धांत पर कार्य कर रही है, जिसमें किसी भी वर्ग के साथ भेदभाव नहीं किया जा रहा है।<br />
डॉ शर्मा ने विपक्षी दलों पर तीखा प्रहार करते हुए कहा कि अल्पसंख्यक समुदाय को लंबे समय तक केवल वोट बैंक के रूप में इस्तेमाल किया गया। उन्होंने कहा कि जहां विपक्षी दलों ने तुष्टिकरण की राजनीति की, वहीं भाजपा सरकार अल्पसंख्यकों को देश का सम्मानित नागरिक मानते हुए उनके विकास के लिए कार्य कर रही है। उन्होंने कहा कि देश को मजबूत बनाने का यही सही रास्ता है, जहां हर नागरिक को समान अवसर और सम्मान मिले।<br />
शामली में आयोजित एक अन्य कार्यक्रम में बोलते हुए उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में केंद्र सरकार महिलाओं को संसद और विधानसभाओं में आरक्षण देने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठा रही है। उन्होंने कहा कि यह निर्णय महिलाओं को सशक्त बनाने और उन्हें राष्ट्र निर्माण की मुख्यधारा में शामिल करने की दिशा में ऐतिहासिक साबित होगा। इस दौरान उपस्थित जनसमूह ने हाथ उठाकर महिला आरक्षण के समर्थन में अपनी सहमति जताई।<br />
उन्होंने कहा कि विपक्षी दलों को सरकार की यह पहल रास नहीं आएगी, क्योंकि उनकी राजनीति हमेशा वादाखिलाफी और भ्रम फैलाने पर आधारित रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस सहित कई दलों ने वर्षों तक जनता से किए गए वादों को पूरा नहीं किया, जिससे नेताओं की विश्वसनीयता पर प्रश्नचिह्न लग गया।<br />
डॉ शर्मा ने भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस पर निशाना साधते हुए कहा कि गरीबी हटाने के नाम पर वर्षों तक शासन करने के बावजूद गरीबों की स्थिति में कोई ठोस सुधार नहीं हुआ। उन्होंने कहा कि कांग्रेस शासनकाल में आपातकाल जैसे निर्णय लेकर लोकतंत्र को भी कलंकित किया गया।<br />
समाजवादी पार्टी पर हमला करते हुए उन्होंने कहा कि पूर्व में प्रदेश में दंगों का माहौल रहता था और सत्ता में बैठे लोग ही समाज को बांटने का काम करते थे। उन्होंने राम मंदिर आंदोलन का उल्लेख करते हुए कहा कि आस्था के मुद्दे पर गोली चलवाने का इतिहास भी जनता भूली नहीं है।<br />
उन्होंने कहा कि भाजपा की कथनी और करनी में एकरूपता है, जिसके कारण जनता का भरोसा फिर से राजनीतिक नेतृत्व पर मजबूत हुआ है। उन्होंने कहा कि आज देश का नेतृत्व एक मजबूत और निर्णायक हाथों में है, जिसने भारत को वैश्विक स्तर पर नई पहचान दिलाई है।<br />
डॉ शर्मा ने कहा कि आज का भारत आत्मनिर्भर और आत्मविश्वासी राष्ट्र के रूप में उभर रहा है। उन्होंने कहा कि अंतरराष्ट्रीय मंचों पर भारत की स्थिति पहले से कहीं अधिक सशक्त हुई है। उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि जी-20 जैसे मंचों पर भारत की भूमिका नेतृत्वकारी रही है, जो देश की बढ़ती वैश्विक प्रतिष्ठा को दर्शाता है।<br />
उन्होंने पड़ोसी देशों की स्थिति का उल्लेख करते हुए कहा कि जहां अन्य देशों में आर्थिक और राजनीतिक अस्थिरता देखने को मिल रही है, वहीं भारत में केंद्र सरकार के कुशल प्रबंधन के कारण आम जनता पर किसी प्रकार का संकट नहीं आया है। उन्होंने कहा कि वैश्विक परिस्थितियों के बावजूद भारत में आवश्यक वस्तुओं की उपलब्धता और स्थिरता बनी हुई है।<br />
पश्चिमी उत्तर प्रदेश के विकास का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि पहले यह क्षेत्र बदहाल सड़कों और दंगों के लिए जाना जाता था, लेकिन आज यहां की तस्वीर पूरी तरह बदल चुकी है। उन्होंने कहा कि भाजपा सरकार के कार्यकाल में सड़क, बिजली और बुनियादी सुविधाओं में अभूतपूर्व सुधार हुआ है।<br />
उन्होंने कहा कि आज प्रदेश में सड़कों का जाल बिछ चुका है और आवागमन में लगने वाला समय काफी कम हो गया है। बिजली व्यवस्था में सुधार का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि पहले बिजली आना खबर बनती थी, जबकि आज बिजली जाना खबर बन जाता है।<br />
डॉ शर्मा ने केंद्र और राज्य सरकार की योजनाओं का जिक्र करते हुए कहा कि प्रधानमंत्री जन धन योजना, प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना और आयुष्मान भारत योजना जैसी योजनाओं ने गरीब और मध्यम वर्ग के जीवन में व्यापक परिवर्तन लाया है। उन्होंने कहा कि अब लाभ सीधे लोगों के खातों में पहुंच रहा है, जिससे पारदर्शिता बढ़ी है।<br />
उन्होंने गोरखपुर क्षेत्र का उदाहरण देते हुए कहा कि स्वच्छता अभियान के कारण मस्तिष्क ज्वर जैसी गंभीर बीमारी पर नियंत्रण पाया गया है, जो पहले हर साल कई बच्चों की जान ले लेती थी।<br />
उत्तर प्रदेश में हो रहे विकास कार्यों का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में प्रदेश ने नई ऊंचाइयों को छुआ है। उन्होंने कहा कि प्रदेश में एक्सप्रेसवे, हवाई अड्डों और रेलवे स्टेशनों का तेजी से विकास हुआ है।<br />
उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश अब माफिया मुक्त हो चुका है और कानून का राज स्थापित हुआ है। उन्होंने कहा कि अपराधियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई ने प्रदेश में सुरक्षा का माहौल बनाया है, जिससे निवेश और विकास को गति मिली है।<br />
उन्होंने युवाओं के संदर्भ में कहा कि आज का युवा रोजगार पाने के साथ-साथ रोजगार देने वाला भी बन रहा है। उन्होंने कहा कि सरकार की नीतियों ने युवाओं को आत्मनिर्भर बनने के लिए प्रेरित किया है।<br />
कृषि क्षेत्र का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि किसानों को आर्थिक सहायता और सिंचाई सुविधाओं के विस्तार से उनकी आय में वृद्धि हो रही है। उन्होंने “हर घर नल से जल” योजना का भी जिक्र किया, जिससे ग्रामीण क्षेत्रों में पेयजल की समस्या दूर हो रही है।<br />
कश्यप जयंती के अवसर पर आयोजित कार्यक्रम में बोलते हुए उन्होंने महर्षि कश्यप के योगदान को याद किया और कहा कि भारतीय संस्कृति में ऋषि-मुनियों का महत्वपूर्ण स्थान रहा है। उन्होंने भगवान राम और निषादराज की कथा का उल्लेख करते हुए सामाजिक समरसता का संदेश दिया।<br />
उन्होंने कहा कि जो लोग भगवान राम का विरोध करते हैं, वे समाज की भावनाओं को समझने में असफल हैं। उन्होंने कहा कि समाज ऐसे लोगों को उचित जवाब देगा।<br />
अंत में उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा पिछड़ा वर्ग आयोग को संवैधानिक दर्जा देना सामाजिक न्याय की दिशा में बड़ा कदम है। उन्होंने कहा कि आज प्रदेश और देश दोनों विकास के पथ पर अग्रसर हैं और जनता का विश्वास भाजपा के साथ मजबूती से जुड़ा हुआ है।<br />
कार्यक्रम में कई जनप्रतिनिधि और गणमान्य लोग उपस्थित रहे, जिनमें भाजपा प्रदेश महामंत्री मोहित बेनीवाल, जिला अध्यक्ष रामजीलाल कश्यप, हरियाणा की मेयर कोमल सैनी सहित अन्य नेता शामिल रहे। जनसभा में बड़ी संख्या में लोगों की भागीदारी ने कार्यक्रम को सफल बनाया।</p>
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		<title>बदलता जनसंख्या स्वरूप चिंताजनक: डॉ. दिनेश शर्मा ने मांगी समावेशी नीति</title>
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		<dc:creator><![CDATA[संवाद इंडिया]]></dc:creator>
		<pubDate>Fri, 03 Apr 2026 04:40:52 +0000</pubDate>
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		<category><![CDATA[Changing population pattern is worrying: Dr. Dinesh Sharma calls for an inclusive policy]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>नई दिल्ली/लखनऊ। देश में जनसंख्या के बदलते स्वरूप को लेकर राजनीतिक और सामाजिक विमर्श एक बार फिर तेज</p>
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]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p>नई दिल्ली/लखनऊ। देश में जनसंख्या के बदलते स्वरूप को लेकर राजनीतिक और सामाजिक विमर्श एक बार फिर तेज हो गया है। राज्यसभा सांसद और उत्तर प्रदेश के पूर्व उपमुख्यमंत्री Dinesh Sharma ने संसद में यह मुद्दा उठाते हुए कहा कि देश के सीमावर्ती क्षेत्रों और कुछ राज्यों में जनसंख्या संरचना में तेजी से हो रहा बदलाव सामाजिक समरसता और राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए चिंता का विषय बनता जा रहा है। उन्होंने इसे केवल सांख्यिकीय परिवर्तन नहीं, बल्कि दीर्घकालिक रणनीतिक चुनौती करार दिया।<br />
जनसांख्यिकीय संतुलन पर आधारित होती है राष्ट्र की स्थिरता<br />
राज्यसभा में विशेष उल्लेख के दौरान Dinesh Sharma ने कहा कि किसी भी राष्ट्र की स्थिरता और विकास उसकी संतुलित जनसांख्यिकीय संरचना पर आधारित होती है। यदि जनसंख्या का संतुलन बिगड़ता है, तो इसका असर सामाजिक ढांचे, संसाधनों के वितरण और राष्ट्रीय सुरक्षा पर पड़ता है।<br />
उन्होंने कहा कि भारत जैसे विविधतापूर्ण देश में जनसंख्या संतुलन बनाए रखना अत्यंत आवश्यक है, क्योंकि यहां धर्म, भाषा और संस्कृति की विविधता ही इसकी सबसे बड़ी ताकत है। लेकिन यदि किसी एक क्षेत्र या समुदाय की जनसंख्या तेजी से बढ़ती है और दूसरे की घटती है, तो इससे सामाजिक असंतुलन पैदा हो सकता है।<br />
सांसद ने विशेष रूप से सीमावर्ती क्षेत्रों का जिक्र करते हुए कहा कि वहां जनसंख्या के स्वरूप में हो रहे बदलाव को गंभीरता से देखने की आवश्यकता है। उन्होंने संकेत दिया कि ऐसे क्षेत्रों में यह बदलाव केवल सामाजिक नहीं, बल्कि रणनीतिक दृष्टि से भी महत्वपूर्ण हो सकता है।<br />
उन्होंने कहा कि देश के कई सीमावर्ती जिलों में जनसंख्या का अनुपात तेजी से बदल रहा है, जिससे भविष्य में सुरक्षा से जुड़े जोखिम भी उत्पन्न हो सकते हैं। ऐसे में केंद्र और राज्य सरकारों को मिलकर इस दिशा में ठोस नीति बनाने की जरूरत है।<br />
Dinesh Sharma ने अपने वक्तव्य में पिछले 65 वर्षों के आंकड़ों का हवाला देते हुए कहा कि देश में हिंदू आबादी में लगभग 8 प्रतिशत की कमी आई है, जबकि मुस्लिम आबादी में करीब 43 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई है।<br />
उन्होंने यह भी कहा कि देश के सात राज्यों और सीमावर्ती 100 से अधिक जिलों में हिंदू समुदाय अल्पसंख्यक हो गया है। यह स्थिति सामाजिक संतुलन के लिए चिंता का विषय है और इसे नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।<br />
सांसद ने जनसंख्या के एक और महत्वपूर्ण पहलू पर ध्यान आकर्षित किया—प्रजनन दर में गिरावट। उन्होंने कहा कि हिंदू समाज की कुल प्रजनन दर (TFR) 1.9 से कम हो गई है, जो जनसंख्या स्थिरीकरण के मानक 2.1 से नीचे है।<br />
उन्होंने चेतावनी दी कि यदि यह प्रवृत्ति जारी रहती है, तो भविष्य में देश को वृद्धजन की बढ़ती संख्या का सामना करना पड़ सकता है। इससे स्वास्थ्य सेवाओं, पेंशन व्यवस्था और सामाजिक सुरक्षा पर अतिरिक्त दबाव पड़ेगा।<br />
Dinesh Sharma ने कहा कि असंतुलित जनसंख्या वृद्धि का असर समाज की संरचना पर भी पड़ रहा है। उन्होंने कहा कि कई क्षेत्रों में सांस्कृतिक और सामाजिक बदलाव तेजी से हो रहे हैं, जो स्थानीय पहचान और परंपराओं को प्रभावित कर सकते हैं।<br />
उन्होंने यह भी कहा कि यदि समय रहते इस पर ध्यान नहीं दिया गया, तो भविष्य में सामाजिक तनाव और टकराव की स्थिति भी उत्पन्न हो सकती है।<br />
सांसद ने इस समस्या के समाधान के लिए एक समान और समावेशी जनसंख्या नीति बनाने की मांग की। उन्होंने कहा कि ऐसी नीति सभी वर्गों पर समान रूप से लागू होनी चाहिए और इसमें किसी प्रकार का भेदभाव नहीं होना चाहिए।<br />
उन्होंने सुझाव दिया कि सरकार को जनसंख्या नियंत्रण और संतुलन के लिए दीर्घकालिक रणनीति तैयार करनी चाहिए, जिसमें शिक्षा, स्वास्थ्य और जागरूकता को प्रमुखता दी जाए।<br />
Dinesh Sharma ने अपने वक्तव्य में अवैध घुसपैठ और जबरन या प्रलोभन के जरिए किए जा रहे धर्मांतरण के मुद्दे को भी उठाया।<br />
उन्होंने कहा कि इन दोनों कारकों का भी जनसंख्या संरचना पर प्रभाव पड़ता है और इन पर कठोर नियंत्रण आवश्यक है। उन्होंने सरकार से आग्रह किया कि इस दिशा में प्रभावी कानून और सख्त कार्रवाई सुनिश्चित की जाए।<br />
सांसद ने कहा कि जिन क्षेत्रों में जनसंख्या संरचना में तेजी से बदलाव आया है, वहां संसाधनों और सरकारी योजनाओं का वैज्ञानिक और न्यायसंगत पुनर्वितरण किया जाना चाहिए।<br />
उन्होंने कहा कि इससे न केवल विकास का संतुलन बना रहेगा, बल्कि सामाजिक समरसता भी मजबूत होगी। उन्होंने यह भी कहा कि योजनाओं के क्रियान्वयन में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करना जरूरी है।<br />
Dinesh Sharma ने कहा कि केवल सरकारी नीतियों से ही समस्या का समाधान संभव नहीं है। इसके लिए समाज के सभी वर्गों की भागीदारी जरूरी है।<br />
उन्होंने संतुलित परिवार व्यवस्था के प्रति लोगों को जागरूक करने की आवश्यकता पर जोर दिया और कहा कि शिक्षा और जागरूकता के माध्यम से ही जनसंख्या संतुलन को कायम रखा जा सकता है।<br />
डॉ. दिनेश शर्मा के इस बयान के बाद राजनीतिक हलकों में बहस तेज होने की संभावना है। जहां एक ओर इसे राष्ट्रीय सुरक्षा और सामाजिक संतुलन से जुड़ा गंभीर मुद्दा बताया जा रहा है, वहीं दूसरी ओर विपक्ष इस पर अलग दृष्टिकोण पेश कर सकता है।<br />
विशेषज्ञों का मानना है कि जनसंख्या से जुड़े मुद्दों पर चर्चा करते समय संतुलित और तथ्यपरक दृष्टिकोण अपनाना आवश्यक है, ताकि समाज में किसी प्रकार का विभाजन न हो।<br />
जनसंख्या विशेषज्ञों का कहना है कि भारत में कुल प्रजनन दर में गिरावट एक सामान्य वैश्विक प्रवृत्ति का हिस्सा है। जैसे-जैसे शिक्षा और आर्थिक विकास बढ़ता है, प्रजनन दर में कमी आती है।<br />
हालांकि, वे यह भी मानते हैं कि क्षेत्रीय असमानताएं और जनसंख्या वितरण में बदलाव नीतिगत स्तर पर ध्यान देने योग्य विषय हैं।<br />
डॉ. दिनेश शर्मा द्वारा उठाया गया मुद्दा केवल राजनीतिक बयान नहीं, बल्कि एक व्यापक सामाजिक और नीतिगत बहस का हिस्सा है।<br />
भारत जैसे विविधता भरे देश में जनसंख्या संतुलन बनाए रखना एक जटिल चुनौती है, जिसमें सरकार, समाज और विशेषज्ञों—सभी की भूमिका महत्वपूर्ण है।<br />
Dinesh Sharma के बयान ने इस बहस को एक नई दिशा दी है। अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि सरकार इस पर किस तरह की नीति बनाती है और क्या यह मुद्दा आने वाले समय में राष्ट्रीय स्तर पर एक बड़े विमर्श का रूप लेता है।</p>
<p>The post <a href="https://www.samvaadindia.com/changing-population-pattern-is-worrying-dr-dinesh-sharma-calls-for-an-inclusive-policy/">बदलता जनसंख्या स्वरूप चिंताजनक: डॉ. दिनेश शर्मा ने मांगी समावेशी नीति</a> appeared first on <a href="https://www.samvaadindia.com">Samvaad India</a>.</p>
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		<title>दलित न्याय पर सियासत तेज: राहुल गांधी की PM मोदी से अपील—निर्दोष युवाओं को मिले राहत</title>
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		<dc:creator><![CDATA[संवाद इंडिया]]></dc:creator>
		<pubDate>Fri, 03 Apr 2026 04:30:20 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[<p>नई दिल्ली, 02 अप्रैल। देश की राजनीति में दलित अधिकारों और सामाजिक न्याय का मुद्दा एक बार फिर</p>
<p>The post <a href="https://www.samvaadindia.com/politics-over-dalit-justice-intensifies-rahul-gandhi-appeals-to-pm-modi-innocent-youth-must-receive-relief/">दलित न्याय पर सियासत तेज: राहुल गांधी की PM मोदी से अपील—निर्दोष युवाओं को मिले राहत</a> appeared first on <a href="https://www.samvaadindia.com">Samvaad India</a>.</p>
]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p>नई दिल्ली, 02 अप्रैल। देश की राजनीति में दलित अधिकारों और सामाजिक न्याय का मुद्दा एक बार फिर केंद्र में आ गया है। कांग्रेस नेता और लोकसभा में विपक्ष के नेता Rahul Gandhi ने प्रधानमंत्री Narendra Modi को पत्र लिखकर 2018 के एससी-एसटी एक्ट बचाओ आंदोलन के दौरान दर्ज मुकदमों को वापस लेने की मांग की है। इस मुद्दे को लेकर कांग्रेस ने केंद्र सरकार पर तीखा हमला बोला है और इसे सामाजिक न्याय से जुड़ा गंभीर विषय बताया है।<br />
02 अप्रैल 2018 को देशभर में व्यापक स्तर पर अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति समुदाय के लोगों ने विरोध प्रदर्शन किया था। यह आंदोलन सुप्रीम कोर्ट के उस फैसले के खिलाफ था, जिसे दलित संगठनों ने एससी-एसटी (अत्याचार निवारण) अधिनियम को कमजोर करने वाला बताया था। इस आंदोलन में लाखों लोग सड़कों पर उतरे और कई जगहों पर हिंसा की घटनाएं भी सामने आईं।<br />
कांग्रेस का दावा है कि यह आंदोलन मूलतः संवैधानिक और शांतिपूर्ण था, लेकिन प्रशासनिक सख्ती और पुलिस कार्रवाई के कारण हालात बिगड़े। पार्टी नेताओं का कहना है कि इस दौरान 14 लोगों की मौत हुई और हजारों युवाओं पर मुकदमे दर्ज किए गए, जिनमें से कई आज भी अदालतों में लंबित हैं।<br />
Rahul Gandhi ने अपने पत्र में लिखा है कि आठ साल बाद भी हजारों युवा इन मुकदमों का बोझ उठा रहे हैं, जबकि उन्होंने लोकतांत्रिक अधिकारों का इस्तेमाल करते हुए आंदोलन किया था।<br />
उन्होंने कहा कि इन युवाओं में बड़ी संख्या ऐसे छात्रों और युवाओं की है, जो अपने परिवार में पहली पीढ़ी के शिक्षित लोग हैं। इन मुकदमों के कारण उनकी पढ़ाई, नौकरी और सामाजिक प्रतिष्ठा पर गहरा असर पड़ा है।<br />
राहुल गांधी ने प्रधानमंत्री से अपील की कि वे व्यक्तिगत हस्तक्षेप करते हुए इन मामलों को समाप्त कराने की दिशा में कदम उठाएं। उन्होंने यह भी कहा कि एक मजबूत एससी-एसटी एक्ट सिर्फ कानून नहीं, बल्कि सामाजिक न्याय की आधारशिला है।<br />
कांग्रेस ने इस मुद्दे को केवल केंद्र सरकार तक सीमित नहीं रखा है। पार्टी ने अपने शासित राज्यों के मुख्यमंत्रियों को भी निर्देश दिए हैं कि वे अपने-अपने राज्यों में दर्ज मामलों की समीक्षा करें और निर्दोष युवाओं के खिलाफ दर्ज मुकदमों को वापस लेने की प्रक्रिया शुरू करें।<br />
यह कदम कांग्रेस की उस रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है, जिसके तहत वह खुद को दलित हितों के सबसे बड़े संरक्षक के रूप में स्थापित करना चाहती है।<br />
कांग्रेस के अनुसूचित जाति विभाग के अध्यक्ष Rajendra Pal Gautam ने इस मुद्दे पर प्रेस वार्ता करते हुए भाजपा सरकार को कटघरे में खड़ा किया।<br />
उन्होंने कहा कि 2018 का आंदोलन पूरी तरह संवैधानिक था, लेकिन सरकार ने इसे दबाने के लिए व्यापक स्तर पर मुकदमे दर्ज कर दिए। गौतम ने आरोप लगाया कि आज भी हजारों युवा न्याय के लिए अदालतों के चक्कर काट रहे हैं, जबकि उनकी कोई गलती नहीं थी।<br />
उन्होंने मृतकों को श्रद्धांजलि देते हुए कहा कि यह आंदोलन सामाजिक न्याय की लड़ाई का प्रतीक था, जिसे दबाने की कोशिश की गई।<br />
प्रेस वार्ता में गौतम ने केवल आंदोलन तक ही अपनी बात सीमित नहीं रखी, बल्कि दलित अधिकारियों के साथ होने वाले कथित भेदभाव का मुद्दा भी उठाया।<br />
उन्होंने उत्तर प्रदेश कैडर के आईएएस अधिकारी Rinku Singh Rahi के इस्तीफे का मामला उठाते हुए कहा कि यह केवल एक व्यक्ति की कहानी नहीं, बल्कि पूरे सिस्टम की सच्चाई को उजागर करता है।<br />
गौतम के अनुसार, रिंकू सिंह राही ने पीसीएस अधिकारी रहते हुए एससी फंड से जुड़े करोड़ों रुपये के घोटाले का पर्दाफाश किया था। इसके बाद उन पर जानलेवा हमला हुआ, जिसमें उन्हें सात गोलियां लगीं। इसके बावजूद उन्होंने हार नहीं मानी और 2021 में आईएएस परीक्षा पास कर ली।<br />
गौतम ने सवाल उठाया कि क्या भ्रष्टाचार के खिलाफ आवाज उठाने वाले अधिकारियों को इसी तरह प्रताड़ित किया जाएगा?<br />
उन्होंने कहा कि राही को पिछले आठ महीनों से कोई जिम्मेदारी नहीं दी गई, जिससे आहत होकर उन्होंने वेतन लेने से इनकार कर दिया और अंततः इस्तीफा भेज दिया।<br />
गौतम ने राष्ट्रपति से मांग की कि रिंकू सिंह राही का इस्तीफा स्वीकार न किया जाए और उन्हें सम्मानजनक पद दिया जाए।<br />
रिंकू सिंह राही के हवाले से गौतम ने दावा किया कि नौकरशाही में एक समानांतर भ्रष्टाचार तंत्र काम कर रहा है, जहां बिना काम के भी भुगतान होता है।<br />
यह बयान प्रशासनिक व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े करता है और यह संकेत देता है कि भ्रष्टाचार के खिलाफ लड़ाई लड़ने वाले अधिकारियों को संस्थागत स्तर पर समर्थन नहीं मिल रहा।<br />
कांग्रेस ने इस मुद्दे को व्यापक सामाजिक संदर्भ में भी जोड़ा। गौतम ने हरियाणा में असिस्टेंट प्रोफेसर भर्ती का उदाहरण देते हुए कहा कि 120 पदों में से केवल तीन दलित उम्मीदवारों का चयन किया गया, जबकि बाकी को ‘नॉट फाउंड सूटेबल’ बताकर बाहर कर दिया गया।<br />
उन्होंने इसे संस्थागत भेदभाव का उदाहरण बताते हुए कहा कि योग्य उम्मीदवारों को भी अवसर नहीं दिया जा रहा है।<br />
गौतम ने विश्वविद्यालयों में दलित छात्रों के साथ होने वाले भेदभाव का मुद्दा उठाते हुए Rohith Vemula और Payal Tadvi के मामलों का उल्लेख किया।<br />
उन्होंने कहा कि ये घटनाएं दिखाती हैं कि शिक्षा संस्थानों में भी दलित छात्रों को मानसिक प्रताड़ना का सामना करना पड़ता है, जो कई बार गंभीर परिणामों में बदल जाती है।<br />
कांग्रेस ने इस पूरे मुद्दे को भाजपा सरकार की नीतियों से जोड़ते हुए कहा कि दलितों के अधिकारों की रक्षा में सरकार विफल रही है।<br />
पार्टी नेताओं का आरोप है कि एक तरफ सरकार दलित कल्याण की बात करती है, वहीं दूसरी तरफ जमीनी स्तर पर भेदभाव और उत्पीड़न की घटनाएं लगातार सामने आ रही हैं।<br />
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह मुद्दा केवल सामाजिक न्याय तक सीमित नहीं है, बल्कि इसमें राजनीतिक रणनीति भी शामिल है।<br />
आगामी चुनावों को देखते हुए कांग्रेस दलित वोट बैंक को साधने की कोशिश कर रही है। वहीं भाजपा भी अपने स्तर पर दलित समुदाय के बीच अपनी पकड़ मजबूत करने के प्रयास में है।<br />
मुकदमों को वापस लेने का सवाल केवल राजनीतिक नहीं, बल्कि कानूनी भी है। किसी भी मामले को वापस लेने के लिए राज्य सरकारों को कानूनी प्रक्रिया का पालन करना होता है, जिसमें अदालत की मंजूरी भी आवश्यक होती है। ऐसे में यह देखना दिलचस्प होगा कि कांग्रेस शासित राज्य इस दिशा में कितनी तेजी से कदम उठाते हैं।</p>
<p><img fetchpriority="high" decoding="async" class="aligncenter size-full wp-image-1161" src="https://www.samvaadindia.com/wp-content/uploads/2026/04/IMG-20260403-WA0000.jpg" alt="" width="966" height="1386" srcset="https://www.samvaadindia.com/wp-content/uploads/2026/04/IMG-20260403-WA0000.jpg 966w, https://www.samvaadindia.com/wp-content/uploads/2026/04/IMG-20260403-WA0000-209x300.jpg 209w, https://www.samvaadindia.com/wp-content/uploads/2026/04/IMG-20260403-WA0000-714x1024.jpg 714w, https://www.samvaadindia.com/wp-content/uploads/2026/04/IMG-20260403-WA0000-768x1102.jpg 768w" sizes="(max-width: 966px) 100vw, 966px" /><img decoding="async" class="aligncenter size-full wp-image-1162" src="https://www.samvaadindia.com/wp-content/uploads/2026/04/IMG-20260403-WA0001.jpg" alt="" width="982" height="1386" srcset="https://www.samvaadindia.com/wp-content/uploads/2026/04/IMG-20260403-WA0001.jpg 982w, https://www.samvaadindia.com/wp-content/uploads/2026/04/IMG-20260403-WA0001-213x300.jpg 213w, https://www.samvaadindia.com/wp-content/uploads/2026/04/IMG-20260403-WA0001-726x1024.jpg 726w, https://www.samvaadindia.com/wp-content/uploads/2026/04/IMG-20260403-WA0001-768x1084.jpg 768w" sizes="(max-width: 982px) 100vw, 982px" /><br />
राहुल गांधी ने अपने पत्र में विशेष रूप से इस बात पर जोर दिया कि इन मुकदमों का सबसे ज्यादा असर युवाओं के भविष्य पर पड़ा है।.कई युवा सरकारी नौकरियों के लिए आवेदन नहीं कर पा रहे हैं, क्योंकि उनके खिलाफ आपराधिक मामले लंबित हैं। इससे उनकी सामाजिक और आर्थिक स्थिति पर भी असर पड़ा यह मुद्दा एक बार फिर यह सवाल खड़ा करता है कि क्या शांतिपूर्ण आंदोलन करना वास्तव में सुरक्षित है?<br />
राहुल गांधी ने कहा कि लोकतंत्र में विरोध करना नागरिकों का अधिकार है और इसे अपराध की तरह नहीं देखा जाना चाहिए।<br />
फिलहाल इस पूरे मामले पर केंद्र सरकार की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। हालांकि, राजनीतिक गलियारों में इस मुद्दे को लेकर बहस तेज हो गई है और आने वाले दिनों में यह संसद और सड़क दोनों जगह चर्चा का विषय बन सकता है।<br />
एससी-एसटी एक्ट बचाओ आंदोलन से जुड़े मुकदमों को वापस लेने की मांग ने एक बार फिर देश में सामाजिक न्याय, प्रशासनिक जवाबदेही और राजनीतिक इच्छाशक्ति पर बहस को तेज कर दिया है।<br />
Rahul Gandhi की चिट्ठी ने इस मुद्दे को राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा के केंद्र में ला दिया है। अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि Narendra Modi सरकार इस पर क्या रुख अपनाती है और क्या वाकई उन युवाओं को राहत मिल पाती है, जो वर्षों से न्याय की उम्मीद में अदालतों के चक्कर काट रहे हैं।</p>
<p>The post <a href="https://www.samvaadindia.com/politics-over-dalit-justice-intensifies-rahul-gandhi-appeals-to-pm-modi-innocent-youth-must-receive-relief/">दलित न्याय पर सियासत तेज: राहुल गांधी की PM मोदी से अपील—निर्दोष युवाओं को मिले राहत</a> appeared first on <a href="https://www.samvaadindia.com">Samvaad India</a>.</p>
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		<title>संसद में चर्चा की मांग तेज—प्रियंका गांधी ने उठाया सवाल, “हालात स्पष्ट हैं तो बहस से परहेज़ क्यों?”</title>
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		<dc:creator><![CDATA[संवाद इंडिया]]></dc:creator>
		<pubDate>Mon, 23 Mar 2026 10:58:42 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[अंतरराष्ट्रीय]]></category>
		<category><![CDATA[अमेरिका ईरान युद्ध]]></category>
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		<category><![CDATA[Calls for Parliamentary Debate Intensify—Priyanka Gandhi Raises the Question: “If the Situation is Clear]]></category>
		<category><![CDATA[Why Avoid a Debate?”]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>नई दिल्ली 23 मार्च। देश की मौजूदा परिस्थितियों को लेकर सियासत एक बार फिर गरमा गई है। कांग्रेस</p>
<p>The post <a href="https://www.samvaadindia.com/calls-for-parliamentary-debate-intensify-priyanka-gandhi-raises-the-question-if-the-situation-is-clear-why-avoid-a-debate/">संसद में चर्चा की मांग तेज—प्रियंका गांधी ने उठाया सवाल, “हालात स्पष्ट हैं तो बहस से परहेज़ क्यों?”</a> appeared first on <a href="https://www.samvaadindia.com">Samvaad India</a>.</p>
]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p>नई दिल्ली 23 मार्च। देश की मौजूदा परिस्थितियों को लेकर सियासत एक बार फिर गरमा गई है। कांग्रेस महासचिव और सांसद प्रियंका गांधी वाड्रा ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के हालिया बयान का हवाला देते हुए संसद में विस्तृत चर्चा की मांग की है। उन्होंने कहा कि जब प्रधानमंत्री स्वयं देश को यह बता चुके हैं कि वर्तमान हालात क्या हैं, तो फिर विपक्ष द्वारा दिए गए चर्चा के नोटिस पर सरकार को सहमति देनी चाहिए, ताकि लोकतांत्रिक परंपरा के तहत सभी पक्षों की बात सामने आ सके।<br />
प्रियंका गांधी का यह बयान ऐसे समय में आया है जब संसद के दोनों सदनों में विभिन्न मुद्दों पर गतिरोध की स्थिति बनी हुई है। विपक्ष लगातार यह आरोप लगा रहा है कि सरकार महत्वपूर्ण राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय मुद्दों पर चर्चा से बच रही है, जबकि सरकार का कहना है कि विपक्ष अनावश्यक रूप से हंगामा कर संसद की कार्यवाही को बाधित कर रहा है।<br />
प्रियंका गांधी ने अपने बयान में कहा, “प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देश को बताया है कि हालात क्या हैं। जब देश के सर्वोच्च नेतृत्व ने स्थिति स्पष्ट कर दी है, तो यह और भी जरूरी हो जाता है कि संसद में इस पर गंभीर और व्यापक चर्चा हो। हमने जो नोटिस दिया है, उस पर बात होनी चाहिए ताकि सभी के पक्ष सामने आ सकें।”<br />
उन्होंने आगे कहा कि संसद लोकतंत्र का सबसे महत्वपूर्ण मंच है, जहां देश के ज्वलंत मुद्दों पर खुलकर चर्चा होनी चाहिए। “अगर सरकार के पास अपनी नीतियों और फैसलों को लेकर स्पष्टता है, तो उसे चर्चा से डरना नहीं चाहिए। बल्कि चर्चा के माध्यम से ही जनता को यह भरोसा दिलाया जा सकता है कि सरकार पारदर्शी और जवाबदेह है।</p>
<blockquote class="twitter-tweet" data-width="550" data-dnt="true">
<p lang="hi" dir="ltr">प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देश को बताया है कि अभी हालात क्या हैं। </p>
<p>ऐसे में हमने चर्चा के लिए जो नोटिस दिया है, उस पर भी बात होनी चाहिए, ताकि सभी के पक्ष सामने आ सकें।</p>
<p>: कांग्रेस महासचिव व सांसद श्रीमती <a href="https://twitter.com/priyankagandhi?ref_src=twsrc%5Etfw">@priyankagandhi</a> जी <a href="https://t.co/s9t5jHsb29">pic.twitter.com/s9t5jHsb29</a></p>
<p>&mdash; Congress (@INCIndia) <a href="https://twitter.com/INCIndia/status/2036016755521597778?ref_src=twsrc%5Etfw">March 23, 2026</a></p></blockquote>
<p><script async src="https://platform.twitter.com/widgets.js" charset="utf-8"></script><br />
कांग्रेस महासचिव का यह बयान विपक्ष की उस व्यापक रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है, जिसके तहत वह सरकार को संसद के भीतर घेरने की कोशिश कर रहा है। कांग्रेस सहित कई विपक्षी दलों ने हाल ही में विभिन्न मुद्दों—जैसे विदेश नीति, आर्थिक स्थिति, बेरोजगारी, और आंतरिक सुरक्षा—पर चर्चा की मांग की है।<br />
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि प्रियंका गांधी का यह बयान सीधे तौर पर सरकार की उस रणनीति पर सवाल उठाता है, जिसमें वह संसद में बहस को सीमित रखने की कोशिश करती दिखती है। उनका कहना है कि यदि प्रधानमंत्री ने खुद हालात का जिक्र किया है, तो यह सरकार के लिए एक अवसर है कि वह संसद में विस्तृत चर्चा कर विपक्ष के सवालों का जवाब दे।<br />
इस पूरे घटनाक्रम के बीच संसद की कार्यवाही कई बार बाधित भी हुई है। विपक्षी दलों के सांसदों ने सदन के भीतर और बाहर प्रदर्शन किया, नारेबाजी की और सरकार से जवाब मांगते रहे। वहीं, सरकार की ओर से यह कहा गया कि विपक्ष मुद्दों पर गंभीर चर्चा करने के बजाय राजनीतिक लाभ लेने के लिए माहौल खराब कर रहा है।<br />
प्रियंका गांधी ने अपने बयान में यह भी संकेत दिया कि लोकतंत्र में संवाद की कमी गंभीर समस्या बन सकती है। उन्होंने कहा, “जब संवाद बंद हो जाता है, तो लोकतंत्र कमजोर होता है। संसद का उद्देश्य ही यह है कि विभिन्न विचारधाराओं के लोग एक मंच पर आकर अपने विचार रखें और देशहित में निर्णय लिए जाएं।”<br />
कांग्रेस पार्टी ने इस मुद्दे को लेकर संसद के अंदर और बाहर अपनी रणनीति को और तेज कर दिया है। पार्टी के अन्य वरिष्ठ नेताओं ने भी प्रियंका गांधी के बयान का समर्थन करते हुए सरकार से चर्चा कराने की मांग दोहराई है। उनका कहना है कि सरकार को विपक्ष की आवाज दबाने के बजाय उसे सुनना चाहिए।<br />
वहीं, भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने कांग्रेस के इस आरोप को खारिज करते हुए कहा है कि सरकार चर्चा के लिए हमेशा तैयार रहती है, लेकिन विपक्ष का रवैया ही सहयोगात्मक नहीं है। भाजपा के नेताओं का कहना है कि विपक्ष पहले से तय एजेंडे के तहत संसद में व्यवधान पैदा करता है और फिर सरकार पर आरोप लगाता है कि चर्चा नहीं हो रही।<br />
राजनीतिक हलकों में यह भी चर्चा है कि आने वाले दिनों में यह मुद्दा और तूल पकड़ सकता है। संसद के आगामी सत्रों में इस पर तीखी बहस देखने को मिल सकती है, जहां एक ओर विपक्ष सरकार को घेरने की कोशिश करेगा, वहीं सरकार अपने फैसलों का बचाव करती नजर आएगी।<br />
प्रियंका गांधी ने यह भी कहा कि देश के नागरिकों को यह जानने का अधिकार है कि सरकार किन परिस्थितियों में कौन से फैसले ले रही है। “हम जनता के प्रतिनिधि हैं और हमारी जिम्मेदारी है कि हम उनके सवालों को संसद में उठाएं। इसलिए हमने जो नोटिस दिया है, उस पर चर्चा होना बेहद जरूरी है,” उन्होंने कहा।<br />
इस बीच, कांग्रेस के सूत्रों का कहना है कि यदि सरकार चर्चा के लिए तैयार नहीं होती है, तो पार्टी इस मुद्दे को लेकर देशव्यापी अभियान भी चला सकती है। पार्टी नेताओं का मानना है कि जनता के बीच जाकर इस मुद्दे को उठाना भी जरूरी है, ताकि सरकार पर दबाव बनाया जा सके।<br />
दूसरी ओर, भाजपा का कहना है कि विपक्ष का यह रवैया केवल राजनीतिक है और उसका उद्देश्य विकास कार्यों से ध्यान भटकाना है। पार्टी नेताओं का दावा है कि सरकार ने हमेशा संसद में चर्चा के लिए सकारात्मक रुख अपनाया है और आगे भी अपनाती रहेगी।<br />
राजनीतिक दृष्टि से देखा जाए तो यह विवाद केवल एक बयान या नोटिस तक सीमित नहीं है, बल्कि यह व्यापक तौर पर सत्ता और विपक्ष के बीच संवाद की स्थिति को दर्शाता है। एक ओर विपक्ष सरकार से जवाबदेही की मांग कर रहा है, वहीं सरकार विपक्ष पर सहयोग न करने का आरोप लगा रही है।<br />
आने वाले दिनों में यह देखना दिलचस्प होगा कि क्या सरकार विपक्ष की मांग मानते हुए संसद में इस मुद्दे पर चर्चा कराती है या फिर यह गतिरोध और लंबा खिंचता है। फिलहाल, प्रियंका गांधी का बयान इस बहस को और तेज करने का काम कर रहा है।</p>
<p>The post <a href="https://www.samvaadindia.com/calls-for-parliamentary-debate-intensify-priyanka-gandhi-raises-the-question-if-the-situation-is-clear-why-avoid-a-debate/">संसद में चर्चा की मांग तेज—प्रियंका गांधी ने उठाया सवाल, “हालात स्पष्ट हैं तो बहस से परहेज़ क्यों?”</a> appeared first on <a href="https://www.samvaadindia.com">Samvaad India</a>.</p>
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		<title>कांशीराम जयंती पर राहुल गांधी का बड़ा बयान “संविधान बहुजनों की ताकत, उसे कमजोर करने की कोशिश”</title>
		<link>https://www.samvaadindia.com/rahul-gandhis-major-statement-on-kanshi-ram-jayanti-the-constitution-is-the-strength-of-the-bahujans-there-is-an-attempt-to-weaken-it/</link>
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		<dc:creator><![CDATA[संवाद इंडिया]]></dc:creator>
		<pubDate>Sun, 15 Mar 2026 09:15:07 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[अंतरराष्ट्रीय]]></category>
		<category><![CDATA[उत्तर प्रदेश]]></category>
		<category><![CDATA[खास खबर]]></category>
		<category><![CDATA[दिल्ली]]></category>
		<category><![CDATA[ब्रेकिंग]]></category>
		<category><![CDATA[Rahul Gandhi’s Major Statement on Kanshi Ram Jayanti: “The Constitution is the Strength of the Bahujans; There is an Attempt to Weaken It”]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>कांशीराम को भारत रत्न देने की मांग, सामाजिक न्याय की लड़ाई को बताया अधूरा मिशन नई दिल्ली। बहुजन</p>
<p>The post <a href="https://www.samvaadindia.com/rahul-gandhis-major-statement-on-kanshi-ram-jayanti-the-constitution-is-the-strength-of-the-bahujans-there-is-an-attempt-to-weaken-it/">कांशीराम जयंती पर राहुल गांधी का बड़ा बयान “संविधान बहुजनों की ताकत, उसे कमजोर करने की कोशिश”</a> appeared first on <a href="https://www.samvaadindia.com">Samvaad India</a>.</p>
]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p><strong>कांशीराम को भारत रत्न देने की मांग, सामाजिक न्याय की लड़ाई को बताया अधूरा मिशन</strong><br />
नई दिल्ली। बहुजन आंदोलन के प्रणेता और सामाजिक न्याय की राजनीति के सबसे बड़े प्रतीकों में से एक कांशीराम  की जयंती के अवसर पर कांग्रेस नेता राहुल गाँधी ने उन्हें श्रद्धांजलि देते हुए केंद्र सरकार पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि कांशीराम का जीवन दलितों, पिछड़ों और वंचितों के अधिकारों के लिए समर्पित संघर्ष का प्रतीक रहा है और उनका सपना आज भी अधूरा है।<br />
सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X (ट्विटर) पर जारी अपने संदेश में राहुल गांधी ने कहा कि कांशीराम की पूरी विचारधारा सामाजिक न्याय, समान अधिकार और बहुजन समाज की राजनीतिक भागीदारी पर आधारित थी। उन्होंने कहा कि संविधान ही दलितों, पिछड़ों और वंचितों की असली ताकत है, लेकिन आज वही संविधान खतरे में दिखाई दे रहा है।<br />
<strong>कांशीराम को श्रद्धांजलि, संघर्ष को बताया प्रेरणा</strong><br />
राहुल गांधी ने अपने संदेश में लिखा कि बहुजन नायक कांशीराम को उनकी जयंती पर सादर नमन। उन्होंने कहा कि गरीबों, दलितों और वंचितों के अधिकारों के लिए कांशीराम का संघर्ष और समर्पण आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा है।</p>
<p><img decoding="async" class="aligncenter size-full wp-image-1125" src="https://www.samvaadindia.com/wp-content/uploads/2026/03/Screenshot_20260315_142909_Adobe-Scan.jpg" alt="" width="1080" height="1499" srcset="https://www.samvaadindia.com/wp-content/uploads/2026/03/Screenshot_20260315_142909_Adobe-Scan.jpg 1080w, https://www.samvaadindia.com/wp-content/uploads/2026/03/Screenshot_20260315_142909_Adobe-Scan-216x300.jpg 216w, https://www.samvaadindia.com/wp-content/uploads/2026/03/Screenshot_20260315_142909_Adobe-Scan-738x1024.jpg 738w, https://www.samvaadindia.com/wp-content/uploads/2026/03/Screenshot_20260315_142909_Adobe-Scan-768x1066.jpg 768w, https://www.samvaadindia.com/wp-content/uploads/2026/03/Screenshot_20260315_142909_Adobe-Scan-1024x1421.jpg 1024w" sizes="(max-width: 1080px) 100vw, 1080px" /><img loading="lazy" decoding="async" class="aligncenter size-full wp-image-1126" src="https://www.samvaadindia.com/wp-content/uploads/2026/03/Screenshot_20260315_142914_Adobe-Scan.jpg" alt="" width="1080" height="1478" srcset="https://www.samvaadindia.com/wp-content/uploads/2026/03/Screenshot_20260315_142914_Adobe-Scan.jpg 1080w, https://www.samvaadindia.com/wp-content/uploads/2026/03/Screenshot_20260315_142914_Adobe-Scan-219x300.jpg 219w, https://www.samvaadindia.com/wp-content/uploads/2026/03/Screenshot_20260315_142914_Adobe-Scan-748x1024.jpg 748w, https://www.samvaadindia.com/wp-content/uploads/2026/03/Screenshot_20260315_142914_Adobe-Scan-768x1051.jpg 768w, https://www.samvaadindia.com/wp-content/uploads/2026/03/Screenshot_20260315_142914_Adobe-Scan-1024x1401.jpg 1024w" sizes="auto, (max-width: 1080px) 100vw, 1080px" /></p>
<p>कांग्रेस नेता ने कहा कि कांशीराम ने भारत के सामाजिक ढांचे को समझते हुए एक बड़े आंदोलन की शुरुआत की थी। यह आंदोलन केवल राजनीति तक सीमित नहीं था बल्कि सामाजिक चेतना और आत्मसम्मान की लड़ाई भी था।</p>
<blockquote class="twitter-tweet" data-width="550" data-dnt="true">
<p lang="hi" dir="ltr">भारत सरकार से सामाजिक न्याय के महान योद्धा और बहुजन चेतना के मार्गदर्शक मान्यवर कांशीराम जी को भारत रत्न से सम्मानित करने की मांग करता हूं।</p>
<p>यह सर्वोच्च राष्ट्रीय सम्मान कांशीराम जी के साथ उस पूरे आंदोलन को श्रद्धांजलि होगी जिसने करोड़ों बहुजनों को हक़, हिस्सेदारी और आत्मसम्मान… <a href="https://t.co/XF9MGjcj4J">pic.twitter.com/XF9MGjcj4J</a></p>
<p>&mdash; Rahul Gandhi (@RahulGandhi) <a href="https://twitter.com/RahulGandhi/status/2033101797473341523?ref_src=twsrc%5Etfw">March 15, 2026</a></p></blockquote>
<p><script async src="https://platform.twitter.com/widgets.js" charset="utf-8"></script></p>
<p>उनका कहना था कि कांशीराम ने समाज के उस वर्ग को आवाज दी जो लंबे समय तक राजनीतिक और सामाजिक रूप से हाशिये पर रहा।<br />
<strong>संविधान को बताया बहुजनों की असली शक्ति</strong><br />
राहुल गांधी ने अपने ट्वीट में कहा कि कांशीराम का मानना था कि भीमराव अंबेडकर द्वारा निर्मित संविधान ही दलितों, पिछड़ों और वंचितों की असली ताकत है।<br />
उन्होंने कहा कि संविधान केवल एक कानूनी दस्तावेज नहीं बल्कि भारत के लोकतांत्रिक और सामाजिक न्याय के सपने की बुनियाद है।<br />
राहुल गांधी ने आरोप लगाया कि आज वही संविधान खतरे में है। उन्होंने कहा कि जो लोग बाबा साहेब के संविधान की शपथ लेकर सत्ता में बैठे हैं, वही उसे कमजोर करने की कोशिश कर रहे हैं।<br />
उनका कहना था कि संविधान की मूल भावना को कमजोर करना लोकतंत्र के लिए गंभीर खतरा है।<br />
<strong>सत्ता में भागीदारी के बिना न्याय संभव नहीं</strong><br />
राहुल गांधी ने अपने बयान में कांशीराम के प्रसिद्ध विचार का उल्लेख करते हुए कहा कि “जब तक सत्ता में भागीदारी नहीं, तब तक न्याय संभव नहीं।”<br />
उन्होंने कहा कि कांशीराम की पूरी राजनीतिक सोच इसी सिद्धांत पर आधारित थी। उनका मानना था कि जब तक दलित, पिछड़े और वंचित वर्ग राजनीतिक सत्ता में हिस्सेदारी नहीं पाएंगे, तब तक सामाजिक न्याय अधूरा रहेगा।<br />
कांग्रेस नेता ने कहा कि कांशीराम की यही विरासत आज भी देश के करोड़ों लोगों को प्रेरित करती है।<br />
<strong>बहुजन आंदोलन के सूत्रधार थे कांशीराम</strong><br />
भारतीय राजनीति में कांशीराम को बहुजन आंदोलन का जनक माना जाता है। उन्होंने 1970 और 1980 के दशक में दलितों, पिछड़ों और अन्य वंचित वर्गों को संगठित करने का व्यापक अभियान चलाया।<br />
उन्होंने सबसे पहले BAMCEF की स्थापना की, जिसका उद्देश्य सरकारी कर्मचारियों के बीच सामाजिक चेतना फैलाना था।<br />
इसके बाद उन्होंने Bahujan Samaj Party की स्थापना की, जिसने उत्तर प्रदेश सहित देश के कई हिस्सों में दलित राजनीति को नई दिशा दी।<br />
कांशीराम के नेतृत्व में बहुजन आंदोलन ने समाज के वंचित वर्गों को एक राजनीतिक मंच पर लाने का काम किया।<br />
<strong>मायावती का राजनीतिक उदय</strong><br />
कांशीराम की राजनीतिक विरासत को आगे बढ़ाने वालों में सबसे प्रमुख नाम Mayawati का माना जाता है।<br />
कांशीराम के मार्गदर्शन में मायावती ने राजनीति में कदम रखा और आगे चलकर उत्तर प्रदेश की चार बार मुख्यमंत्री बनीं।<br />
यह माना जाता है कि कांशीराम ने बहुजन आंदोलन को केवल एक सामाजिक अभियान नहीं रहने दिया बल्कि उसे सत्ता की राजनीति तक पहुंचाया।<br />
<strong>कांशीराम को भारत रत्न देने की मांग</strong><br />
राहुल गांधी ने केंद्र सरकार से मांग की कि सामाजिक न्याय के महान योद्धा कांशीराम को देश के सर्वोच्च नागरिक सम्मान भारत रत्न से सम्मानित किया जाए।</p>
<blockquote class="twitter-tweet" data-width="550" data-dnt="true">
<p lang="hi" dir="ltr">बहुजन नायक मान्यवर कांशीराम जी की जयंती पर उन्हें सादर नमन।</p>
<p>गरीबों, दलितों और वंचितों के अधिकारों के लिए उनका अथक संघर्ष और समर्पण हम सभी के लिए प्रेरणा है।</p>
<p>उनका मानना था संविधान ही दलितों, पिछड़ों और वंचितों की असली ताकत है। वही संविधान आज खतरे में है &#8211; बाबा साहेब के संविधान… <a href="https://t.co/Dx8dsSdmeL">pic.twitter.com/Dx8dsSdmeL</a></p>
<p>&mdash; Rahul Gandhi (@RahulGandhi) <a href="https://twitter.com/RahulGandhi/status/2033040966823633098?ref_src=twsrc%5Etfw">March 15, 2026</a></p></blockquote>
<p><script async src="https://platform.twitter.com/widgets.js" charset="utf-8"></script></p>
<p>उन्होंने कहा कि यह सम्मान केवल कांशीराम को नहीं बल्कि उस पूरे आंदोलन को श्रद्धांजलि होगा जिसने करोड़ों बहुजनों को हक, हिस्सेदारी और आत्मसम्मान की राह दिखाई।<br />
राहुल गांधी के अनुसार कांशीराम ने भारतीय लोकतंत्र को मजबूत करने में ऐतिहासिक योगदान दिया और उन्हें भारत रत्न दिया जाना चाहिए।<br />
<strong>कांग्रेस ने दोहराई सामाजिक न्याय की प्रतिबद्धता</strong><br />
राहुल गांधी ने अपने संदेश में कहा कि कांग्रेस पार्टी हमेशा से सामाजिक न्याय, समान अवसर और संविधान की रक्षा के लिए खड़ी रही है।<br />
उन्होंने कहा कि कांग्रेस बहुजन समाज की भागीदारी और सम्मान के लिए पहले भी संघर्ष करती रही है और आगे भी करती रहेगी।<br />
कांग्रेस नेता ने कहा कि कांशीराम के सपनों को पूरा करने के लिए सामाजिक न्याय की लड़ाई को और मजबूत करने की जरूरत है।<br />
<strong>राजनीति में बढ़ी चर्चा</strong><br />
राहुल गांधी के इस बयान के बाद राजनीतिक हलकों में भी चर्चा तेज हो गई है। कई सामाजिक संगठनों और दलित अधिकार समूहों ने कांशीराम को भारत रत्न देने की मांग का समर्थन किया है।<br />
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि उत्तर प्रदेश और देश की दलित राजनीति में कांशीराम की विरासत आज भी बेहद प्रभावशाली है।<br />
ऐसे में उनकी जयंती पर दिया गया यह बयान आने वाले समय में राजनीतिक विमर्श को भी प्रभावित कर सकता है।<br />
<strong>सामाजिक न्याय की राजनीति का प्रतीक</strong><br />
कांशीराम का नाम भारतीय राजनीति में सामाजिक न्याय की राजनीति के सबसे बड़े प्रतीकों में गिना जाता है। उन्होंने उस दौर में दलितों और पिछड़ों को संगठित करने का अभियान चलाया जब भारतीय राजनीति में उनकी आवाज अपेक्षाकृत कमजोर थी।<br />
उनकी रणनीति थी कि समाज के वंचित वर्गों को पहले सामाजिक रूप से जागरूक किया जाए और फिर उन्हें राजनीतिक रूप से संगठित किया जाए।<br />
इसी रणनीति के कारण बहुजन आंदोलन धीरे-धीरे एक मजबूत राजनीतिक शक्ति के रूप में उभरा।<br />
कांशीराम की जयंती पर राहुल गांधी का यह संदेश केवल श्रद्धांजलि नहीं बल्कि सामाजिक न्याय और संविधान की रक्षा के मुद्दे को फिर से राष्ट्रीय बहस के केंद्र में लाने की कोशिश भी माना जा रहा है।<br />
कांग्रेस नेता ने जहां एक ओर कांशीराम को नमन किया, वहीं दूसरी ओर संविधान की रक्षा, बहुजन समाज की राजनीतिक भागीदारी और सामाजिक न्याय की लड़ाई को आगे बढ़ाने की जरूरत पर जोर दिया।<br />
साथ ही उन्होंने कांशीराम को भारत रत्न देने की मांग कर यह संकेत दिया कि बहुजन आंदोलन का योगदान भारतीय लोकतंत्र के इतिहास में बेहद महत्वपूर्ण रहा है और उसे राष्ट्रीय स्तर पर सम्मानित किया जाना चाहिए।</p>
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		<title>मोदी अमेरिका के हितों के लिए काम कर रहे, देश के लिए नहीं – राहुल गांधी</title>
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		<dc:creator><![CDATA[संवाद इंडिया]]></dc:creator>
		<pubDate>Fri, 13 Mar 2026 16:07:28 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[अंतरराष्ट्रीय]]></category>
		<category><![CDATA[अमेरिका ईरान युद्ध]]></category>
		<category><![CDATA[उत्तर प्रदेश]]></category>
		<category><![CDATA[एक्सक्लूसिव]]></category>
		<category><![CDATA[खास खबर]]></category>
		<category><![CDATA[ब्रेकिंग]]></category>
		<category><![CDATA[Modi is working for America's interests]]></category>
		<category><![CDATA[not for the country – Rahul Gandhi]]></category>
		<category><![CDATA[देश के लिए नहीं – राहुल गांधी]]></category>
		<category><![CDATA[मोदी अमेरिका के हितों के लिए काम कर रहे]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>कांशीराम जयंती पर लखनऊ में संविधान सम्मेलन, भारत रत्न देने का प्रस्ताव पास; भागीदारी, विदेश नीति और व्यापार</p>
<p>The post <a href="https://www.samvaadindia.com/modi-is-working-for-americas-interests-not-for-the-country-rahul-gandhi/">मोदी अमेरिका के हितों के लिए काम कर रहे, देश के लिए नहीं – राहुल गांधी</a> appeared first on <a href="https://www.samvaadindia.com">Samvaad India</a>.</p>
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										<content:encoded><![CDATA[<p style="text-align: left;"><strong>कांशीराम जयंती पर लखनऊ में संविधान सम्मेलन, भारत रत्न देने का प्रस्ताव पास; भागीदारी, विदेश नीति और व्यापार समझौते पर केंद्र सरकार पर तीखा हमला</strong><br />
नई दिल्ली/लखनऊ, 13 मार्च। लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्र सरकार की नीतियों पर तीखा हमला बोलते हुए कहा कि मोदी भारत के प्रधानमंत्री की तरह काम नहीं कर रहे, बल्कि अमेरिका के हितों को ध्यान में रखकर फैसले ले रहे हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार की विदेश नीति दबाव में काम कर रही है और इसके कारण देश के आर्थिक और रणनीतिक हितों से समझौता किया जा रहा है।<br />
राहुल गांधी शुक्रवार शाम लखनऊ के इंदिरा गांधी प्रतिष्ठान में बहुजन आंदोलन के महानायक कांशीराम की जयंती के अवसर पर आयोजित संविधान सम्मेलन को संबोधित कर रहे थे। इस सम्मेलन में कांशीराम के सामाजिक और राजनीतिक योगदान को याद करते हुए उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की गई। कार्यक्रम के दौरान सर्वसम्मति से कांशीराम को भारत रत्न देने का प्रस्ताव भी पारित किया गया।<br />
<strong>विदेश नीति पर केंद्र सरकार पर हमला</strong><br />
अपने संबोधन में राहुल गांधी ने कहा कि जब वह संसद में यह सवाल उठाने जा रहे थे कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अमेरिका के दबाव में फैसले ले रहे हैं, तो प्रधानमंत्री सदन से बाहर चले गए। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री आंख से आंख मिलाकर इन सवालों का जवाब नहीं दे सकते।<br />
राहुल गांधी ने आरोप लगाया कि अमेरिका ने उद्योगपति गौतम अडानी से जुड़े मामलों को लेकर दबाव बनाया है। उनका कहना था कि अडानी समूह भारतीय जनता पार्टी के वित्तीय ढांचे का एक बड़ा हिस्सा है और इसी कारण इस मामले को लेकर सरकार पर अंतरराष्ट्रीय दबाव बनाया जा रहा है। राहुल गांधी ने कहा कि यदि सरकार अमेरिका की बात नहीं मानेगी तो अडानी से जुड़े मामलों को लेकर बड़े खुलासे किए जा सकते हैं।<br />
उन्होंने दावा किया कि इसी दबाव के कारण भारत और अमेरिका के बीच लंबे समय से लंबित व्यापार समझौते को जल्दबाजी में अंतिम रूप दिया गया। राहुल गांधी ने कहा कि उनके संसद में दिए भाषण के तुरंत बाद प्रधानमंत्री ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप से बात की और समझौते को अंतिम रूप देने पर सहमति जताई।<br />
<strong>व्यापार समझौते पर गंभीर आरोप</strong><br />
कांग्रेस नेता ने कहा कि इस समझौते के कारण भारत को कोई विशेष लाभ नहीं मिला है। इसके उलट, भारत ने अमेरिका के सामने कई बड़े आर्थिक समझौते कर दिए हैं। राहुल गांधी के अनुसार, भारत ने अपना महत्वपूर्ण डेटा अमेरिका को सौंप दिया है और अमेरिकी किसानों के लिए भारतीय बाजार खोलने की सहमति दी है।<br />
उन्होंने आरोप लगाया कि भारत ने हर साल करीब नौ लाख करोड़ रुपये के अमेरिकी उत्पाद खरीदने का भी वादा किया है। राहुल गांधी ने कहा कि इससे भारत की आर्थिक आत्मनिर्भरता कमजोर होगी और घरेलू उद्योगों पर दबाव बढ़ेगा।<br />
उन्होंने यह भी कहा कि ऊर्जा सुरक्षा के मामले में भी भारत ने अमेरिका पर निर्भरता बढ़ा दी है। राहुल गांधी के अनुसार अब यह स्थिति बन रही है कि भारत को तेल और गैस कहां से खरीदना है, यह भी अमेरिका तय करेगा। उन्होंने कहा कि देश में गैस की किल्लत इसी नीति का परिणाम है।<br />
<strong>हरदीप पुरी का भी किया जिक्र</strong><br />
अपने भाषण में राहुल गांधी ने केंद्रीय मंत्री हरदीप सिंह पुरी का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि पुरी का नाम कथित तौर पर एपस्टीन से जुड़े दस्तावेजों में सामने आया है और यह भी आरोप लगाया कि पुरी की बेटी की कंपनी में अंतरराष्ट्रीय निवेशक जॉर्ज सोरोस का पैसा लगा हुआ है।<br />
राहुल गांधी ने कहा कि जब उन्होंने संसद में यह मुद्दा उठाने की कोशिश की तो उन्हें बोलने से रोक दिया गया। उनका आरोप था कि सरकार ऐसे सवालों से बचना चाहती है जो उसकी विदेश नीति और आर्थिक फैसलों को कठघरे में खड़ा करते हैं।<br />
<strong>सावरकर और आरएसएस पर भी साधा निशाना</strong><br />
राहुल गांधी ने अपने भाषण में महात्मा गांधी, डॉ. भीमराव आंबेडकर और कांशीराम के संघर्षों का उल्लेख करते हुए कहा कि इन महान नेताओं ने कभी अपने सिद्धांतों से समझौता नहीं किया। इसके विपरीत, उन्होंने कहा कि समझौता करना आरएसएस की विचारधारा से जुड़े लोगों की पुरानी आदत रही है।<br />
उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि देश के संविधान में वीर सावरकर या नाथूराम गोडसे की विचारधारा नहीं है। राहुल गांधी ने कहा कि संविधान समानता, न्याय और सामाजिक भागीदारी की बात करता है, जबकि वर्तमान सरकार इन मूल्यों को कमजोर कर रही है।<br />
<strong>कांशीराम के योगदान को बताया ऐतिहासिक</strong><br />
राहुल गांधी ने कांशीराम के सामाजिक आंदोलन को भारतीय लोकतंत्र के लिए ऐतिहासिक बताया। उन्होंने कहा कि कांशीराम ने दलितों, पिछड़ों और वंचित वर्गों को राजनीतिक आवाज दी।<br />
उन्होंने कहा कि कांग्रेस पार्टी भी मानती है कि अतीत में कई बार वह इन वर्गों की आकांक्षाओं को पूरी तरह से समझ नहीं पाई। राहुल गांधी ने स्वीकार किया कि यही वजह रही कि कांशीराम का आंदोलन व्यापक समर्थन हासिल कर सका।<br />
उन्होंने यह भी कहा कि यदि कांशीराम पंडित जवाहरलाल नेहरू के दौर में सक्रिय होते तो संभवतः वह कांग्रेस पार्टी के मुख्यमंत्री बन सकते थे। राहुल गांधी ने कहा कि कांशीराम का सपना सामाजिक न्याय और भागीदारी का था, जिसे आज भी पूरा करने की जरूरत है।<br />
<strong>भागीदारी और प्रतिनिधित्व का मुद्दा उठाया</strong><br />
राहुल गांधी ने अपने भाषण का बड़ा हिस्सा सामाजिक भागीदारी के मुद्दे को समर्पित किया। उन्होंने कहा कि देश की प्रमुख संस्थाओं में दलितों, पिछड़ों और आदिवासियों की भागीदारी बेहद कम है।<br />
उन्होंने कहा कि न्यायपालिका, बड़े कॉरपोरेट घरानों के टॉप मैनेजमेंट, नौकरशाही, बड़े अस्पतालों और निजी स्कूलों के प्रबंधन में इन वर्गों की मौजूदगी लगभग शून्य है। राहुल गांधी ने कहा कि दूसरी तरफ मनरेगा मजदूरों की सूची में यही वर्ग 85 प्रतिशत तक दिखाई देते हैं।<br />
उन्होंने कहा कि यह स्थिति बताती है कि देश की आर्थिक और प्रशासनिक संरचना में असमानता कितनी गहरी है।<br />
<strong>इंटरव्यू प्रक्रिया पर भी सवाल</strong><br />
राहुल गांधी ने कहा कि नौकरी भर्ती प्रक्रिया में इंटरव्यू को इस तरह इस्तेमाल किया जा रहा है कि दलित, पिछड़े और आदिवासी युवाओं को अवसर न मिले। उन्होंने आरोप लगाया कि इंटरव्यू एक ऐसा माध्यम बन गया है जिसके जरिए योग्य उम्मीदवारों को भी बाहर कर दिया जाता है।<br />
उन्होंने कहा कि सार्वजनिक क्षेत्र की नौकरियों में भी इन वर्गों को पर्याप्त अवसर नहीं मिल रहे हैं। राहुल गांधी ने कहा कि सामाजिक न्याय के लिए जरूरी है कि भर्ती प्रक्रिया पूरी तरह पारदर्शी और समान अवसर वाली हो।<br />
<strong>जाति जनगणना की मांग दोहराई</strong><br />
कांग्रेस नेता ने इस दौरान जाति जनगणना कराने की अपनी मांग भी दोहराई। उन्होंने कहा कि जब तक देश में वास्तविक सामाजिक और आर्थिक आंकड़े सामने नहीं आएंगे, तब तक न्यायपूर्ण नीतियां बनाना मुश्किल होगा।<br />
राहुल गांधी ने कहा कि जाति जनगणना से यह स्पष्ट हो जाएगा कि किस वर्ग की आबादी कितनी है और उन्हें सरकारी योजनाओं और संस्थाओं में कितना प्रतिनिधित्व मिल रहा है।<br />
<strong>कांग्रेस की विचारधारा पर जोर</strong><br />
अपने भाषण के अंत में राहुल गांधी ने कहा कि कांग्रेस पार्टी एक गरीब पार्टी है और वह अमीर बनना भी नहीं चाहती। उन्होंने कहा कि यदि कांग्रेस अमीर पार्टी बन जाएगी तो वह भी भाजपा जैसी हो जाएगी।<br />
उन्होंने याद दिलाया कि पिछले लोकसभा चुनाव के दौरान कांग्रेस के बैंक खाते फ्रीज कर दिए गए थे। इसके बावजूद पार्टी ने चुनाव लड़ा और अपनी विचारधारा के आधार पर जनता के बीच काम किया।<br />
राहुल गांधी ने कहा कि कांग्रेस की असली ताकत पैसा नहीं, बल्कि उसकी विचारधारा और संविधान के प्रति उसकी प्रतिबद्धता है।<br />
बड़ी संख्या में मौजूद रहे नेता<br />
संविधान सम्मेलन में कांग्रेस के कई वरिष्ठ नेता और सामाजिक कार्यकर्ता मौजूद रहे। कार्यक्रम में कांग्रेस अनुसूचित जाति विभाग के राष्ट्रीय अध्यक्ष राजेंद्र पाल गौतम, ओबीसी विभाग के राष्ट्रीय अध्यक्ष अनिल जयहिंद, उत्तर प्रदेश प्रभारी अविनाश पांडे, प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय, सांसद तनुज पुनिया, ओबीसी विभाग के प्रदेश अध्यक्ष मनोज यादव, राष्ट्रीय उपाध्यक्ष ओमप्रकाश महतो समेत बड़ी संख्या में नेता उपस्थित रहे।<br />
इसके अलावा कांशीराम के सहयोगी रहे पूर्व मंत्री लालमणि प्रसाद, केके गौतम, बीपी अशोक, अनीस अंसारी, सेवानिवृत्त न्यायाधीश वीरेंद्र सिंह यादव, वरिष्ठ नेता बृजलाल खाबरी, राकेश राठौर, पूर्व सांसद रवि वर्मा, भगवती चौधरी, ओमवती, अनुराधा मिश्रा और आलोक प्रसाद सहित कई गणमान्य लोग सम्मेलन में शामिल हुए।<br />
कार्यक्रम के अंत में कांशीराम के सामाजिक और राजनीतिक योगदान को याद करते हुए यह संकल्प लिया गया कि उनके विचारों को आगे बढ़ाया जाएगा और सामाजिक न्याय की लड़ाई को मजबूत किया जाएगा। सम्मेलन में पारित प्रस्ताव के जरिए केंद्र सरकार से मांग की गई कि बहुजन आंदोलन के इस महान नेता को देश के सर्वोच्च नागरिक सम्मान भारत रत्न से सम्मानित किया जाए।</p>
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		<title>जयराम रमेश और के.सी. वेणुगोपाल ने उठाए गंभीर सवाल, विदेश नीति और महंगाई पर सरकार को बताया विफल</title>
		<link>https://www.samvaadindia.com/jairam-ramesh-and-k-c-venugopal-raised-serious-questions-calling-the-government-a-failure-on-foreign-policy-and-inflation/</link>
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		<dc:creator><![CDATA[संवाद इंडिया]]></dc:creator>
		<pubDate>Thu, 12 Mar 2026 08:20:06 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[अंतरराष्ट्रीय]]></category>
		<category><![CDATA[अमेरिका ईरान युद्ध]]></category>
		<category><![CDATA[उत्तर प्रदेश]]></category>
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		<category><![CDATA[खास खबर]]></category>
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		<category><![CDATA[ब्रेकिंग]]></category>
		<category><![CDATA[calling the government a failure on foreign policy and inflation.]]></category>
		<category><![CDATA[Jairam Ramesh and K.C. Venugopal raised serious questions]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>नई दिल्ली 12 मार्च। देश की संसद में पश्चिम एशिया में चल रहे तनाव और उससे भारत पर</p>
<p>The post <a href="https://www.samvaadindia.com/jairam-ramesh-and-k-c-venugopal-raised-serious-questions-calling-the-government-a-failure-on-foreign-policy-and-inflation/">जयराम रमेश और के.सी. वेणुगोपाल ने उठाए गंभीर सवाल, विदेश नीति और महंगाई पर सरकार को बताया विफल</a> appeared first on <a href="https://www.samvaadindia.com">Samvaad India</a>.</p>
]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p>नई दिल्ली 12 मार्च। देश की संसद में पश्चिम एशिया में चल रहे तनाव और उससे भारत पर पड़ रहे संभावित प्रभावों को लेकर राजनीतिक टकराव तेज हो गया है। विपक्षी दलों ने केंद्र सरकार पर आरोप लगाया है कि वह इस गंभीर मुद्दे पर संसद में चर्चा से बच रही है, जबकि देश के सामने गैस आपूर्ति संकट और बढ़ती महंगाई जैसी समस्याएं खड़ी हो गई हैं।<br />
कांग्रेस के वरिष्ठ नेता Jairam Ramesh और पार्टी के महासचिव K. C. Venugopal ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर पोस्ट करते हुए मोदी सरकार पर तीखा हमला बोला। उन्होंने आरोप लगाया कि पश्चिम एशिया की स्थिति पर चर्चा की मांग के बावजूद सरकार संसद में बहस कराने से हठपूर्वक इनकार कर रही है।</p>
<p><img loading="lazy" decoding="async" class="aligncenter wp-image-1114 size-full" src="https://www.samvaadindia.com/wp-content/uploads/2026/03/IMG-20260312-WA0015.jpg" alt="" width="1600" height="1200" srcset="https://www.samvaadindia.com/wp-content/uploads/2026/03/IMG-20260312-WA0015.jpg 1600w, https://www.samvaadindia.com/wp-content/uploads/2026/03/IMG-20260312-WA0015-300x225.jpg 300w, https://www.samvaadindia.com/wp-content/uploads/2026/03/IMG-20260312-WA0015-1024x768.jpg 1024w, https://www.samvaadindia.com/wp-content/uploads/2026/03/IMG-20260312-WA0015-768x576.jpg 768w, https://www.samvaadindia.com/wp-content/uploads/2026/03/IMG-20260312-WA0015-1536x1152.jpg 1536w" sizes="auto, (max-width: 1600px) 100vw, 1600px" /><br />
विपक्ष का कहना है कि मौजूदा वैश्विक परिस्थितियों का भारत की अर्थव्यवस्था, ऊर्जा सुरक्षा और आम जनता की जिंदगी पर गंभीर असर पड़ सकता है, लेकिन सरकार इन मुद्दों पर जवाबदेही से बच रही है। कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने अपने ट्वीट में कहा कि विपक्ष लगातार संसद के दोनों सदनों में पश्चिम एशिया की स्थिति पर चर्चा की मांग कर रहा है। उनका कहना है कि यह सिर्फ अंतरराष्ट्रीय मामला नहीं है, बल्कि इसका सीधा प्रभाव भारत की अर्थव्यवस्था, ऊर्जा आपूर्ति और कूटनीतिक स्थिति पर पड़ सकता है।<br />
उन्होंने आरोप लगाया कि केंद्र सरकार बहस से बच रही है क्योंकि उसकी विदेश नीति पहले ही पूरी तरह से उजागर हो चुकी है। जयराम रमेश ने कहा कि सरकार की कूटनीतिक रणनीति कमजोर साबित हुई है और वैश्विक स्तर पर भारत की स्थिति स्पष्ट नहीं दिखाई दे रही है।</p>
<p><img loading="lazy" decoding="async" class="aligncenter size-full wp-image-1115" src="https://www.samvaadindia.com/wp-content/uploads/2026/03/IMG-20260312-WA0011-scaled.jpg" alt="" width="2094" height="2560" srcset="https://www.samvaadindia.com/wp-content/uploads/2026/03/IMG-20260312-WA0011-scaled.jpg 2094w, https://www.samvaadindia.com/wp-content/uploads/2026/03/IMG-20260312-WA0011-245x300.jpg 245w" sizes="auto, (max-width: 2094px) 100vw, 2094px" /><br />
उन्होंने अपने बयान में कहा कि लोकतंत्र में संसद वह मंच है जहां देश से जुड़े गंभीर मुद्दों पर खुलकर चर्चा होनी चाहिए। लेकिन यदि सरकार बहस से ही बचने लगे तो इससे लोकतांत्रिक प्रक्रिया कमजोर होती है। पश्चिम एशिया लंबे समय से वैश्विक राजनीति का केंद्र रहा है। हाल के महीनों में इस क्षेत्र में बढ़ते तनाव ने पूरी दुनिया की चिंता बढ़ा दी है। भारत के लिए यह क्षेत्र कई कारणों से अत्यंत महत्वपूर्ण है।<br />
पहला कारण ऊर्जा आपूर्ति है। भारत अपनी तेल और गैस की जरूरतों का बड़ा हिस्सा इसी क्षेत्र से आयात करता है। यदि वहां तनाव बढ़ता है या आपूर्ति प्रभावित होती है तो इसका सीधा असर देश में ईंधन और गैस की कीमतों पर पड़ सकता है। दूसरा कारण वहां काम करने वाले भारतीय नागरिक हैं। लाखों भारतीय खाड़ी देशों में काम करते हैं और वहां की स्थिति बिगड़ने पर उनकी सुरक्षा और रोजगार पर असर पड़ सकता है।</p>
<p><img loading="lazy" decoding="async" class="aligncenter size-full wp-image-1116" src="https://www.samvaadindia.com/wp-content/uploads/2026/03/IMG-20260312-WA0014.jpg" alt="" width="1280" height="960" srcset="https://www.samvaadindia.com/wp-content/uploads/2026/03/IMG-20260312-WA0014.jpg 1280w, https://www.samvaadindia.com/wp-content/uploads/2026/03/IMG-20260312-WA0014-300x225.jpg 300w, https://www.samvaadindia.com/wp-content/uploads/2026/03/IMG-20260312-WA0014-1024x768.jpg 1024w, https://www.samvaadindia.com/wp-content/uploads/2026/03/IMG-20260312-WA0014-768x576.jpg 768w" sizes="auto, (max-width: 1280px) 100vw, 1280px" /><br />
तीसरा कारण वैश्विक व्यापार और समुद्री मार्ग हैं। यदि क्षेत्र में संघर्ष बढ़ता है तो समुद्री व्यापार मार्ग बाधित हो सकते हैं, जिससे आयात-निर्यात पर भी असर पड़ सकता है। इन्हीं संभावित प्रभावों को देखते हुए विपक्ष चाहता है कि संसद में इस विषय पर विस्तृत चर्चा हो और सरकार अपनी रणनीति स्पष्ट करे।<br />
कांग्रेस नेता के.सी. वेणुगोपाल ने अपने ट्वीट में देश में LPG की कथित कमी का मुद्दा उठाया। उन्होंने कहा कि कई जगहों पर गैस सिलेंडर के लिए लंबी कतारें लग रही हैं और आम लोगों को खाना बनाने तक में कठिनाई हो रही है। उनका आरोप है कि गैस की आपूर्ति बाधित होने से छोटे होटल और ढाबे भी प्रभावित हो रहे हैं। कई जगहों पर खाने की दुकानें बंद होने की खबरें सामने आ रही हैं, जिससे रोज़मर्रा की जिंदगी प्रभावित हो रही है।</p>
<p style="padding-left: 40px;"><img loading="lazy" decoding="async" class="wp-image-1117 size-full aligncenter" src="https://www.samvaadindia.com/wp-content/uploads/2026/03/IMG-20260312-WA0023-scaled.jpg" alt="" width="2560" height="1920" srcset="https://www.samvaadindia.com/wp-content/uploads/2026/03/IMG-20260312-WA0023-scaled.jpg 2560w, https://www.samvaadindia.com/wp-content/uploads/2026/03/IMG-20260312-WA0023-300x225.jpg 300w" sizes="auto, (max-width: 2560px) 100vw, 2560px" /><br />
वेणुगोपाल ने कहा कि इस स्थिति के कारण लोगों में भय और असमंजस का माहौल बन गया है। उन्होंने केंद्र सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि प्रधानमंत्री इस संकट को संभालने में पूरी तरह बेबस साबित हुए हैं। उन्होंने यह भी कहा कि सरकार को तुरंत ठोस कदम उठाने चाहिए ताकि गैस की आपूर्ति सामान्य हो सके और आम जनता को राहत मिल सके।<br />
इन मुद्दों को लेकर विपक्षी सांसदों ने संसद परिसर में विरोध प्रदर्शन भी किया। सांसदों ने नारेबाजी करते हुए सरकार से जवाब देने की मांग की। विपक्षी नेताओं का कहना है कि संसद का सत्र चल रहा है और ऐसे समय में यदि इतने गंभीर मुद्दों पर चर्चा ही नहीं होगी तो फिर संसद की उपयोगिता पर सवाल उठते हैं।<br />
प्रदर्शन के दौरान सांसदों ने यह भी मांग की कि सरकार पश्चिम एशिया में भारत की कूटनीतिक रणनीति, ऊर्जा सुरक्षा और आपूर्ति व्यवस्था को लेकर संसद को जानकारी दे।<br />
विपक्ष का कहना है कि सरकार इन मुद्दों पर स्पष्ट बयान देने से बच रही है। उनका आरोप है कि सरकार केवल राजनीतिक बयानबाजी कर रही है, लेकिन वास्तविक समस्याओं का समाधान करने में विफल रही है। विपक्षी नेताओं ने यह भी कहा कि यदि विदेश नीति मजबूत होती तो आज भारत को इस तरह की स्थिति का सामना नहीं करना पड़ता।<br />
हालांकि सरकार की ओर से अब तक आधिकारिक रूप से यह नहीं कहा गया है कि संसद में चर्चा क्यों नहीं कराई जा रही है। सरकार के कुछ नेताओं का कहना है कि अंतरराष्ट्रीय मुद्दों पर बयान देने से पहले कूटनीतिक संतुलन बनाए रखना आवश्यक होता है।<br />
भारत दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा ऊर्जा उपभोक्ता देश है। देश की बढ़ती अर्थव्यवस्था के कारण ऊर्जा की मांग लगातार बढ़ रही है।</p>
<p>विशेषज्ञों का मानना है कि यदि पश्चिम एशिया में तनाव लंबे समय तक जारी रहता है तो इसका असर तेल और गैस की वैश्विक कीमतों पर पड़ सकता है। इससे भारत में महंगाई बढ़ने की आशंका भी पैदा हो सकती है। यही कारण है कि विपक्ष इस मुद्दे को गंभीरता से उठा रहा है और चाहता है कि सरकार ऊर्जा सुरक्षा की अपनी रणनीति संसद के सामने रखे।<br />
LPG की आपूर्ति में बाधा की खबरों ने आम लोगों की चिंता बढ़ा दी है। घरेलू गैस सिलेंडर भारत के करोड़ों परिवारों के लिए रोजमर्रा की जरूरत है। यदि गैस की आपूर्ति प्रभावित होती है तो इसका असर सीधे घरों की रसोई पर पड़ता है। ग्रामीण और शहरी दोनों क्षेत्रों में इसका प्रभाव देखा जा सकता है।<br />
छोटे रेस्तरां, ढाबे और फूड स्टॉल भी LPG पर निर्भर होते हैं। ऐसे में गैस की कमी से उनके व्यवसाय पर भी असर पड़ सकता है।<br />
इन मुद्दों को लेकर संसद और देश की राजनीति में माहौल गरमा गया है। विपक्ष लगातार सरकार को घेरने की कोशिश कर रहा है, जबकि सरकार इन आरोपों को राजनीतिक बता रही है।<br />
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि आने वाले दिनों में यह मुद्दा और अधिक गर्मा सकता है, क्योंकि यह सीधे आम जनता की रोजमर्रा की जिंदगी से जुड़ा हुआ है।<br />
लोकतांत्रिक व्यवस्था में संसद को देश के सबसे महत्वपूर्ण मंच के रूप में देखा जाता है। यहां राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय दोनों मुद्दों पर चर्चा होती है। विशेषज्ञों का कहना है कि यदि पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव का असर भारत पर पड़ने की आशंका है तो इस विषय पर संसद में चर्चा होना स्वाभाविक है। इससे सरकार की रणनीति स्पष्ट होगी और विपक्ष को भी अपनी चिंताएं रखने का अवसर मिलेगा।<br />
यदि विपक्ष की मांग पर संसद में चर्चा होती है तो सरकार को अपनी विदेश नीति और ऊर्जा सुरक्षा से जुड़े कदमों का विवरण देना पड़ सकता है। इसके अलावा गैस आपूर्ति और महंगाई जैसे मुद्दों पर भी सरकार को स्पष्ट रुख अपनाना होगा। राजनीतिक तौर पर यह मुद्दा आने वाले दिनों में संसद की कार्यवाही को प्रभावित कर सकता है।<br />
पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव और देश में LPG आपूर्ति को लेकर उठ रहे सवालों ने भारत की राजनीति में नया विवाद खड़ा कर दिया है। विपक्ष सरकार पर गंभीर आरोप लगा रहा है और संसद में चर्चा की मांग कर रहा है।<br />
दूसरी ओर सरकार की चुप्पी और बहस से दूरी विपक्ष के आरोपों को और बल दे रही है। अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि सरकार संसद में इन मुद्दों पर चर्चा कराने का फैसला करती है या नहीं, क्योंकि यह विषय न केवल अंतरराष्ट्रीय राजनीति से जुड़ा है बल्कि देश की अर्थव्यवस्था और आम जनता के जीवन पर भी गहरा असर डाल सकता है।</p>
<p>The post <a href="https://www.samvaadindia.com/jairam-ramesh-and-k-c-venugopal-raised-serious-questions-calling-the-government-a-failure-on-foreign-policy-and-inflation/">जयराम रमेश और के.सी. वेणुगोपाल ने उठाए गंभीर सवाल, विदेश नीति और महंगाई पर सरकार को बताया विफल</a> appeared first on <a href="https://www.samvaadindia.com">Samvaad India</a>.</p>
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		<title>भारत दुनिया का नेतृत्व करने की दिशा में तेजी से बढ़ रहा : डॉ. दिनेश शर्मा</title>
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		<dc:creator><![CDATA[संवाद इंडिया]]></dc:creator>
		<pubDate>Sat, 28 Feb 2026 15:29:02 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[अंतरराष्ट्रीय]]></category>
		<category><![CDATA[उत्तर प्रदेश]]></category>
		<category><![CDATA[खास खबर]]></category>
		<category><![CDATA[ब्रेकिंग]]></category>
		<category><![CDATA[India is rapidly moving towards leading the world: Dr. Dinesh Sharma]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>कार्यक्रम में दिखी सनातन जागरण की झलक, संस्कृति-संस्कार के संरक्षण पर दिया बल लखनऊ 28 फरवरी। राज्यसभा सांसद</p>
<p>The post <a href="https://www.samvaadindia.com/india-is-rapidly-moving-towards-leading-the-world-dr-dinesh-sharma/">भारत दुनिया का नेतृत्व करने की दिशा में तेजी से बढ़ रहा : डॉ. दिनेश शर्मा</a> appeared first on <a href="https://www.samvaadindia.com">Samvaad India</a>.</p>
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										<content:encoded><![CDATA[<p>कार्यक्रम में दिखी सनातन जागरण की झलक, संस्कृति-संस्कार के संरक्षण पर दिया बल</p>
<p>लखनऊ 28 फरवरी। राज्यसभा सांसद एवं उत्तर प्रदेश के पूर्व उपमुख्यमंत्री डॉ. दिनेश शर्मा ने कहा कि भारत आज वैश्विक मंच पर तेज़ी से आगे बढ़ रहा है और दुनिया का नेतृत्व करने की दिशा में दृढ़ कदमों से बढ़ रहा है। उन्होंने कहा कि सदियों तक भारत पर कई आक्रांताओं ने आक्रमण किया और देश की संपदा को लूटने का प्रयास किया, लेकिन वे भारत की संस्कृति, परंपराओं और संस्कारों को कभी समाप्त नहीं कर सके। यही भारतीय सभ्यता की सबसे बड़ी शक्ति है।</p>
<p><img loading="lazy" decoding="async" class="aligncenter size-full wp-image-1099" src="https://www.samvaadindia.com/wp-content/uploads/2026/02/IMG-20260228-WA0032.jpg" alt="" width="1599" height="1066" srcset="https://www.samvaadindia.com/wp-content/uploads/2026/02/IMG-20260228-WA0032.jpg 1599w, https://www.samvaadindia.com/wp-content/uploads/2026/02/IMG-20260228-WA0032-300x200.jpg 300w, https://www.samvaadindia.com/wp-content/uploads/2026/02/IMG-20260228-WA0032-1024x683.jpg 1024w, https://www.samvaadindia.com/wp-content/uploads/2026/02/IMG-20260228-WA0032-768x512.jpg 768w, https://www.samvaadindia.com/wp-content/uploads/2026/02/IMG-20260228-WA0032-1536x1024.jpg 1536w" sizes="auto, (max-width: 1599px) 100vw, 1599px" /></p>
<p>डॉ. दिनेश शर्मा लखनऊ में आयोजित एक सांस्कृतिक एवं सामाजिक कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे। इस अवसर पर उन्होंने कहा कि भारत की संस्कृति और परंपराओं को सुरक्षित रखने में समाज के उस वर्ग की महत्वपूर्ण भूमिका रही है, जिसने सदैव धर्म, ज्ञान और परंपराओं की रक्षा का दायित्व निभाया। उन्होंने कहा कि वेदों के अध्ययन-अध्यापन, धार्मिक स्थलों की रक्षा और समाज को संस्कार देने का कार्य करने वाले लोगों ने भारतीय संस्कृति को अक्षुण्ण बनाए रखा।</p>
<p><img loading="lazy" decoding="async" class="aligncenter size-full wp-image-1100" src="https://www.samvaadindia.com/wp-content/uploads/2026/02/IMG-20260228-WA0026.jpg" alt="" width="1066" height="1599" srcset="https://www.samvaadindia.com/wp-content/uploads/2026/02/IMG-20260228-WA0026.jpg 1066w, https://www.samvaadindia.com/wp-content/uploads/2026/02/IMG-20260228-WA0026-200x300.jpg 200w, https://www.samvaadindia.com/wp-content/uploads/2026/02/IMG-20260228-WA0026-683x1024.jpg 683w, https://www.samvaadindia.com/wp-content/uploads/2026/02/IMG-20260228-WA0026-768x1152.jpg 768w, https://www.samvaadindia.com/wp-content/uploads/2026/02/IMG-20260228-WA0026-1024x1536.jpg 1024w" sizes="auto, (max-width: 1066px) 100vw, 1066px" /></p>
<p>उन्होंने कहा कि इतिहास में ऐसे कई दौर आए जब भारत की सामाजिक संरचना को कमजोर करने की कोशिशें की गईं। मुगलों और अंग्रेजों ने समाज को जातियों में बांटने का प्रयास किया, ताकि सनातन परंपरा के अनुयायी एकजुट न हो सकें। समाज की एकता को कमजोर करने के लिए सबसे पहले उन लोगों को निशाना बनाया गया, जो शास्त्रों का अध्ययन करते थे और धर्म एवं संस्कृति के संरक्षण का कार्य करते थे।</p>
<p>डॉ. शर्मा ने कहा कि जिन लोगों को समाज में ब्राह्मण कहा जाता है, उन्होंने कठिन परिस्थितियों में भी समाज को जोड़ने का कार्य किया। उन्होंने समाज में संवाद, संस्कार और धार्मिक परंपराओं को बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। उन्होंने कहा कि भारत की सामाजिक संरचना में प्रत्येक वर्ग की अपनी-अपनी जिम्मेदारी और भूमिका रही है, जिसके माध्यम से समाज को संगठित रखा गया।</p>
<p>उन्होंने विवाह संस्कार का उदाहरण देते हुए कहा कि भारतीय परंपराओं में हर वर्ग की अलग-अलग भूमिका निर्धारित की गई है। विवाह जैसे सामाजिक और धार्मिक आयोजनों में समाज के विभिन्न वर्गों की भागीदारी यह दर्शाती है कि भारतीय संस्कृति मूल रूप से समावेशी और एकजुट करने वाली है। यह व्यवस्था समाज के हर व्यक्ति को एक सूत्र में बांधती है।</p>
<p><img loading="lazy" decoding="async" class="aligncenter size-full wp-image-1101" src="https://www.samvaadindia.com/wp-content/uploads/2026/02/IMG-20260228-WA0019.jpg" alt="" width="1599" height="1066" srcset="https://www.samvaadindia.com/wp-content/uploads/2026/02/IMG-20260228-WA0019.jpg 1599w, https://www.samvaadindia.com/wp-content/uploads/2026/02/IMG-20260228-WA0019-300x200.jpg 300w, https://www.samvaadindia.com/wp-content/uploads/2026/02/IMG-20260228-WA0019-1024x683.jpg 1024w, https://www.samvaadindia.com/wp-content/uploads/2026/02/IMG-20260228-WA0019-768x512.jpg 768w, https://www.samvaadindia.com/wp-content/uploads/2026/02/IMG-20260228-WA0019-1536x1024.jpg 1536w" sizes="auto, (max-width: 1599px) 100vw, 1599px" /></p>
<p>डॉ. दिनेश शर्मा ने कहा कि ब्राह्मण समाज का मूल दायित्व परंपराओं को सहेजना, सनातन धर्म और समाज को जोड़ना तथा देवी-देवताओं के सम्मान की रक्षा करना रहा है। उन्होंने कहा कि आज के समय में जातीय विभाजन की बजाय समाज को एकजुट करने की आवश्यकता है। सनातन संस्कृति का मूल संदेश ही यही है कि समाज एक साथ खड़ा होकर अपनी सांस्कृतिक विरासत को आगे बढ़ाए।</p>
<p>उन्होंने कहा कि लंबे समय बाद भारत में सामाजिक और सांस्कृतिक चेतना का एक नया दौर दिखाई दे रहा है। देश के विभिन्न धार्मिक और सांस्कृतिक आयोजनों में लोगों की बढ़ती भागीदारी इस बात का प्रमाण है कि समाज अपनी जड़ों की ओर लौट रहा है।</p>
<p><img loading="lazy" decoding="async" class="aligncenter size-full wp-image-1102" src="https://www.samvaadindia.com/wp-content/uploads/2026/02/IMG-20260228-WA0020.jpg" alt="" width="1599" height="1066" srcset="https://www.samvaadindia.com/wp-content/uploads/2026/02/IMG-20260228-WA0020.jpg 1599w, https://www.samvaadindia.com/wp-content/uploads/2026/02/IMG-20260228-WA0020-300x200.jpg 300w, https://www.samvaadindia.com/wp-content/uploads/2026/02/IMG-20260228-WA0020-1024x683.jpg 1024w, https://www.samvaadindia.com/wp-content/uploads/2026/02/IMG-20260228-WA0020-768x512.jpg 768w, https://www.samvaadindia.com/wp-content/uploads/2026/02/IMG-20260228-WA0020-1536x1024.jpg 1536w" sizes="auto, (max-width: 1599px) 100vw, 1599px" /></p>
<p>डॉ. शर्मा ने कहा कि पहले नए वर्ष जैसे अवसरों पर लोग बड़े-बड़े होटलों और क्लबों में आयोजित कार्यक्रमों में शामिल होते थे, लेकिन अब बड़ी संख्या में लोग मंदिरों में जाकर पूजा-अर्चना कर रहे हैं। यह परिवर्तन भारतीय समाज की सांस्कृतिक चेतना और धार्मिक आस्था के पुनर्जागरण को दर्शाता है।</p>
<p>उन्होंने कहा कि हाल के वर्षों में देश में कई ऐसे ऐतिहासिक कार्य हुए हैं, जिन्होंने भारत की सांस्कृतिक विरासत को नई पहचान दी है। अयोध्या में श्रीराम जन्मभूमि मंदिर का निर्माण, काशी विश्वनाथ धाम कॉरिडोर का विकास, उज्जैन में महाकाल लोक का निर्माण और विंध्यवासिनी धाम क्षेत्र का पुनर्विकास जैसे कार्य भारत की सांस्कृतिक धरोहर को नई ऊर्जा देने वाले हैं।</p>
<p>उन्होंने कहा कि नैमिषारण्य, मथुरा और चित्रकूट धाम जैसे पौराणिक स्थलों के विकास के माध्यम से देश में धार्मिक पर्यटन और सांस्कृतिक चेतना को भी बढ़ावा मिला है। इन सभी प्रयासों ने भारत की प्राचीन परंपराओं और आध्यात्मिक धरोहर को दुनिया के सामने नए रूप में प्रस्तुत किया है।</p>
<p>डॉ. दिनेश शर्मा ने कहा कि महाकुंभ और माघ मेले जैसे आयोजनों में जिस तरह करोड़ों श्रद्धालुओं की भागीदारी होती है, वह भारत की सांस्कृतिक एकता और आध्यात्मिक शक्ति का सबसे बड़ा उदाहरण है। इन आयोजनों के माध्यम से दुनिया ने सनातन संस्कृति की विशालता और जीवंतता को देखा है।</p>
<p>उन्होंने कहा कि आज का समय सनातन के जागरण का समय है। समाज को चाहिए कि वह अपनी परंपराओं, संस्कृति और संस्कारों के संरक्षण के लिए एकजुट होकर कार्य करे। यदि समाज संगठित रहेगा तो भारत न केवल सांस्कृतिक रूप से मजबूत बनेगा बल्कि वैश्विक नेतृत्व की दिशा में भी आगे बढ़ेगा।</p>
<p>कार्यक्रम के दौरान उन्होंने आयोजकों द्वारा समाज के विभिन्न वर्गों के लोगों का सम्मान करने की पहल की भी सराहना की। उन्होंने कहा कि इस प्रकार के कार्यक्रम समाज में समरसता और एकता का संदेश देते हैं। जब सभी वर्गों के लोग एक मंच पर आकर एक-दूसरे का सम्मान करते हैं, तो समाज में सकारात्मक वातावरण बनता है।</p>
<p>अंत में उन्होंने कहा कि भारत की शक्ति उसकी विविधता, संस्कृति और सामाजिक एकता में निहित है। यदि समाज इन मूल्यों को बनाए रखेगा तो आने वाले समय में भारत निश्चित रूप से विश्व का मार्गदर्शन करने वाला राष्ट्र बनेगा।</p>
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		<title>इज़राइल यात्रा को लेकर कांग्रेस का निशाना, जयराम रमेश बोले— ‘मोदी का दौरा शर्मनाक’</title>
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		<dc:creator><![CDATA[संवाद इंडिया]]></dc:creator>
		<pubDate>Sat, 28 Feb 2026 11:10:05 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[अंतरराष्ट्रीय]]></category>
		<category><![CDATA[उत्तर प्रदेश]]></category>
		<category><![CDATA[एक्सक्लूसिव]]></category>
		<category><![CDATA[खास खबर]]></category>
		<category><![CDATA['Modi's visit is shameful']]></category>
		<category><![CDATA[Congress targets Modi's Israel visit]]></category>
		<category><![CDATA[Jairam Ramesh says]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>नई दिल्ली 28 फरवरी। कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के हालिया इजरायल दौरे को लेकर</p>
<p>The post <a href="https://www.samvaadindia.com/congress-targets-modis-israel-visit-jairam-ramesh-says-modis-visit-is-shameful/">इज़राइल यात्रा को लेकर कांग्रेस का निशाना, जयराम रमेश बोले— ‘मोदी का दौरा शर्मनाक’</a> appeared first on <a href="https://www.samvaadindia.com">Samvaad India</a>.</p>
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										<content:encoded><![CDATA[<p>नई दिल्ली 28 फरवरी। कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के हालिया इजरायल दौरे को लेकर तीखी प्रतिक्रिया दी है। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर किए गए अपने एक विस्तृत पोस्ट में उन्होंने प्रधानमंत्री की विदेश नीति और इस दौरे के समय को लेकर गंभीर सवाल उठाए हैं।<br />
कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने अपने बयान में कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के इज़राइल दौरे के मात्र दो दिन बाद इज़राइल और यूनाइटेड स्टेट्स ने मिलकर ईरान पर सैन्य कार्रवाई शुरू कर दी। उन्होंने दावा किया कि पिछले कई महीनों से जिस प्रकार की सैन्य तैयारियां दिखाई दे रही थीं, उससे इस तरह की कार्रवाई की आशंका पहले से ही जताई जा रही थी।<br />
जयराम रमेश ने लिखा कि इन परिस्थितियों के बावजूद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का इज़राइल जाने का फैसला बेहद विवादास्पद और चिंताजनक था। उनके मुताबिक, ऐसे संवेदनशील समय में किसी एक पक्ष के साथ खुलकर खड़े होने की घोषणा करना भारत की पारंपरिक संतुलित विदेश नीति के खिलाफ है।</p>
<p>कांग्रेस नेता ने प्रधानमंत्री पर आरोप लगाते हुए कहा कि इज़राइल में उन्होंने “सबसे बड़ी नैतिक कायरता” दिखाई। जयराम रमेश ने अपने पोस्ट में लिखा कि प्रधानमंत्री ने सार्वजनिक रूप से घोषणा की कि भारत इज़राइल के साथ खड़ा है, और ऐसा कहकर उन्होंने एक तरह से अपने लिए राजनीतिक इनाम हासिल करने की कोशिश की।<br />
उन्होंने आगे कहा कि यह दौरा केवल एक कूटनीतिक यात्रा नहीं था, बल्कि उस समय हुआ जब पश्चिम एशिया में तनाव अपने चरम पर था। रमेश के मुताबिक, भारत को ऐसी स्थिति में संतुलित और सावधान भूमिका निभानी चाहिए थी, क्योंकि देश की विदेश नीति लंबे समय से “रणनीतिक स्वायत्तता” और “संतुलित कूटनीति” पर आधारित रही है।<br />
कांग्रेस महासचिव ने अपने बयान में यह भी कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के दो “अच्छे दोस्तों” द्वारा शुरू की गई इस जंग के संदर्भ में इज़राइल का दौरा और भी ज्यादा शर्मनाक प्रतीत होता है। उन्होंने संकेत दिया कि वैश्विक राजनीति में व्यक्तिगत समीकरणों के बजाय राष्ट्रीय हितों और अंतरराष्ट्रीय संतुलन को प्राथमिकता दी जानी चाहिए।<br />
रमेश के इस बयान के बाद राजनीतिक हलकों में बहस तेज हो गई है। कांग्रेस पार्टी लंबे समय से केंद्र सरकार की विदेश नीति को लेकर सवाल उठाती रही है। पार्टी का कहना है कि भारत को अंतरराष्ट्रीय संघर्षों में किसी एक पक्ष के साथ स्पष्ट रूप से खड़ा होने के बजाय मध्यस्थ और संतुलित भूमिका निभानी चाहिए।<br />
वहीं दूसरी ओर भारतीय जनता पार्टी के नेताओं का कहना है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की विदेश नीति भारत के राष्ट्रीय हितों को ध्यान में रखकर तय की जाती है। भाजपा नेताओं का तर्क है कि भारत और इज़राइल के बीच पिछले एक दशक में रणनीतिक, तकनीकी और सुरक्षा सहयोग काफी मजबूत हुआ है, और दोनों देशों के संबंध लगातार गहरे होते जा रहे हैं।<br />
विशेषज्ञों का मानना है कि पश्चिम एशिया की स्थिति बेहद जटिल है और भारत के लिए यह क्षेत्र रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण भी है। एक ओर भारत के इज़राइल के साथ रक्षा और तकनीकी सहयोग मजबूत हैं, वहीं दूसरी ओर ईरान के साथ ऊर्जा, व्यापार और क्षेत्रीय संपर्क के भी अहम संबंध रहे हैं। ऐसे में भारत को अक्सर संतुलित कूटनीतिक रणनीति अपनानी पड़ती है।<br />
राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, जयराम रमेश का यह बयान केवल विदेश नीति की आलोचना नहीं है, बल्कि यह आने वाले समय में सरकार और विपक्ष के बीच विदेश नीति को लेकर बढ़ने वाली राजनीतिक बहस का संकेत भी देता है। सोशल मीडिया पर भी इस बयान को लेकर व्यापक चर्चा देखने को मिल रही है, जहां कुछ लोग कांग्रेस नेता के आरोपों का समर्थन कर रहे हैं तो कुछ इसे राजनीतिक बयानबाजी बता रहे हैं।<br />
कुल मिलाकर, प्रधानमंत्री के इज़राइल दौरे और पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के बीच कांग्रेस नेता जयराम रमेश का यह बयान भारतीय राजनीति में एक नई बहस को जन्म देता नजर आ रहा है। आने वाले दिनों में यह देखना दिलचस्प होगा कि केंद्र सरकार इस आलोचना पर किस तरह प्रतिक्रिया देती है और भारत की विदेश नीति को लेकर राजनीतिक विमर्श किस दिशा में आगे बढ़ता है।</p>
<p>The post <a href="https://www.samvaadindia.com/congress-targets-modis-israel-visit-jairam-ramesh-says-modis-visit-is-shameful/">इज़राइल यात्रा को लेकर कांग्रेस का निशाना, जयराम रमेश बोले— ‘मोदी का दौरा शर्मनाक’</a> appeared first on <a href="https://www.samvaadindia.com">Samvaad India</a>.</p>
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		<title>देश में नहीं चलेगी बहुरूपिया राजनीतिज्ञों की राजनीति : डा दिनेश शर्मा</title>
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		<dc:creator><![CDATA[संवाद इंडिया]]></dc:creator>
		<pubDate>Mon, 05 Jan 2026 17:09:58 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[अंतरराष्ट्रीय]]></category>
		<category><![CDATA[उत्तर प्रदेश]]></category>
		<category><![CDATA[ब्रेकिंग]]></category>
		<category><![CDATA[Kalyan Singh]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>टोपी लगाकर, जाति बताकर और जनेऊ दिखाकर वोट लेने का समय गया लखनऊ 5 जनवरी। राज्यसभा सांसद एवं</p>
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										<content:encoded><![CDATA[<p style="text-align: center;"><strong>टोपी लगाकर, जाति बताकर और जनेऊ दिखाकर वोट लेने का समय गया</strong></p>
<p>लखनऊ 5 जनवरी। राज्यसभा सांसद एवं यूपी के पूर्व उपमुख्यमंत्री यूपी डा दिनेश शर्मा ने कहा कि देश में अब बहुरूपिया राजनीतिज्ञों की राजनीति नहीं चलने वाली है। विपक्षी चुनाव के समय में मीठी बाते करके , टोपी लगाकर, जाति बताकर और जनेऊ दिखाकर वोट ले लेते थे । अब वह समय चला गया है। देश में अब सेवा के लिए तत्पर रहने वालों की राजनीति ही सफल होगी। देश में किसी भी धर्म का एक भी आदमी भाजपा सरकार पर योजनाओं का लाभ देने में भेदभाव करने का आरोप नहीं लगा सकता है।<br />
ममता चेरिटेबिल ट्रस्ट द्वारा पूर्व मुख्यमंत्री कल्याण सिंह की जयंती एवं भाजपा के पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष मुरली मनोहर जोशी के जन्म दिवस पर आयोजित कंबल वितरण कार्यक्रम में उन्होंने कहा कि भाजपा का लक्ष्य केवल चुनावी राजनीति करना और सत्ता प्राप्त करना नहीं हैै। पार्टी के लिए सेवा ही परम धर्म है। लखनऊ के सांसद रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने राजधानी का कायाकल्प किया है।</p>
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सांसद ने कहा कि राजधानी लखनऊ के लोग अपने कठिन समय में मदद के लिए भाजपा के कार्यकर्ताओं को खोजते हैं। क्योंकि वे लोग बिना किसी भेदभाव के लोगों की मदद कर रहे हैं। भाजपा पर भेदभाव का आरोप लगाने वालो को देखना चाहिए कि किसान सम्मान निधि से लेकर मकान , शौचालय , गैस का चूल्हा , आयुष्मान कार्ड से उपचार की व्यवस्था करते समय पार्टी अथवा पार्टी के कार्यकर्ता ने कभी किसी की जाति अथवा धर्म नहीं पूछा है। बिना भेदभाव के मदद की है और यहीं भाजपा की पहचान है।<br />
डा शर्मा ने कहा कि भारत अब बदल चुका है। मोदी सरकार ने जी राम जी बिल लाकर गरीबों को 125 दिन के रोजगार की गारन्टी दी है। अब घर में ही रोजगार की व्यवस्था कर दी है तथा रोजगार के लिए पलायन नहीं करना पडेगा। कांग्रेस ऐसे जनहितकारी बिल का विरोध कर रही है। केन्द्र सरकार अब जनता को अधिक पैसे देगी। वह गरीब के जीवनस्तर को उठाना चाहती है। कांग्रेस को जनता की भलाई रास नहीं आती है। जी राम जी बिल गरीबों के लिए अमृत की तरह है। केन्द्र सरकार दीनदयाल जी के बराबरी के सिद्धान्त को अमलीजामा पहना रही है। अलग-अलग कार्यक्रमों में नगर भाजपा अध्यक्ष श्री आनंद द्विवेदी भारतीय जनता पार्टी के क्षेत्रीय उपाध्यक्ष श्री राजीव मिश्रा पार्षद श्री गिरीश गुप्ता, साकेत शर्मा, कृष्ण कुमार लोधी श्री कृष्णा लोधी अनु मिश्रा राजीव बाजपेई सहित भारी संख्या में भारतीय जनता पार्टी के कार्यकर्ता एवं नागरिक गण उपस्थित थे। नगर निगम के सामने स्वर्गीय कल्याण सिंह जी की मूर्ति को माल्यार्पण कर जनसभा की गई तथा डॉ मुरली मनोहर जोशी के जन्म दिवस पर राजेंद्र नगर डी ए वी कॉलेज के सामने कंबल तथा ट्राई साइकिल का वितरण किया गया।</p>
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