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	<title>राष्ट्रीय Archives - Samvaad India</title>
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	<title>राष्ट्रीय Archives - Samvaad India</title>
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		<title>दलित न्याय पर सियासत तेज: राहुल गांधी की PM मोदी से अपील—निर्दोष युवाओं को मिले राहत</title>
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		<dc:creator><![CDATA[संवाद इंडिया]]></dc:creator>
		<pubDate>Fri, 03 Apr 2026 04:30:20 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[<p>नई दिल्ली, 02 अप्रैल। देश की राजनीति में दलित अधिकारों और सामाजिक न्याय का मुद्दा एक बार फिर</p>
<p>The post <a href="https://www.samvaadindia.com/politics-over-dalit-justice-intensifies-rahul-gandhi-appeals-to-pm-modi-innocent-youth-must-receive-relief/">दलित न्याय पर सियासत तेज: राहुल गांधी की PM मोदी से अपील—निर्दोष युवाओं को मिले राहत</a> appeared first on <a href="https://www.samvaadindia.com">Samvaad India</a>.</p>
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										<content:encoded><![CDATA[<p>नई दिल्ली, 02 अप्रैल। देश की राजनीति में दलित अधिकारों और सामाजिक न्याय का मुद्दा एक बार फिर केंद्र में आ गया है। कांग्रेस नेता और लोकसभा में विपक्ष के नेता Rahul Gandhi ने प्रधानमंत्री Narendra Modi को पत्र लिखकर 2018 के एससी-एसटी एक्ट बचाओ आंदोलन के दौरान दर्ज मुकदमों को वापस लेने की मांग की है। इस मुद्दे को लेकर कांग्रेस ने केंद्र सरकार पर तीखा हमला बोला है और इसे सामाजिक न्याय से जुड़ा गंभीर विषय बताया है।<br />
02 अप्रैल 2018 को देशभर में व्यापक स्तर पर अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति समुदाय के लोगों ने विरोध प्रदर्शन किया था। यह आंदोलन सुप्रीम कोर्ट के उस फैसले के खिलाफ था, जिसे दलित संगठनों ने एससी-एसटी (अत्याचार निवारण) अधिनियम को कमजोर करने वाला बताया था। इस आंदोलन में लाखों लोग सड़कों पर उतरे और कई जगहों पर हिंसा की घटनाएं भी सामने आईं।<br />
कांग्रेस का दावा है कि यह आंदोलन मूलतः संवैधानिक और शांतिपूर्ण था, लेकिन प्रशासनिक सख्ती और पुलिस कार्रवाई के कारण हालात बिगड़े। पार्टी नेताओं का कहना है कि इस दौरान 14 लोगों की मौत हुई और हजारों युवाओं पर मुकदमे दर्ज किए गए, जिनमें से कई आज भी अदालतों में लंबित हैं।<br />
Rahul Gandhi ने अपने पत्र में लिखा है कि आठ साल बाद भी हजारों युवा इन मुकदमों का बोझ उठा रहे हैं, जबकि उन्होंने लोकतांत्रिक अधिकारों का इस्तेमाल करते हुए आंदोलन किया था।<br />
उन्होंने कहा कि इन युवाओं में बड़ी संख्या ऐसे छात्रों और युवाओं की है, जो अपने परिवार में पहली पीढ़ी के शिक्षित लोग हैं। इन मुकदमों के कारण उनकी पढ़ाई, नौकरी और सामाजिक प्रतिष्ठा पर गहरा असर पड़ा है।<br />
राहुल गांधी ने प्रधानमंत्री से अपील की कि वे व्यक्तिगत हस्तक्षेप करते हुए इन मामलों को समाप्त कराने की दिशा में कदम उठाएं। उन्होंने यह भी कहा कि एक मजबूत एससी-एसटी एक्ट सिर्फ कानून नहीं, बल्कि सामाजिक न्याय की आधारशिला है।<br />
कांग्रेस ने इस मुद्दे को केवल केंद्र सरकार तक सीमित नहीं रखा है। पार्टी ने अपने शासित राज्यों के मुख्यमंत्रियों को भी निर्देश दिए हैं कि वे अपने-अपने राज्यों में दर्ज मामलों की समीक्षा करें और निर्दोष युवाओं के खिलाफ दर्ज मुकदमों को वापस लेने की प्रक्रिया शुरू करें।<br />
यह कदम कांग्रेस की उस रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है, जिसके तहत वह खुद को दलित हितों के सबसे बड़े संरक्षक के रूप में स्थापित करना चाहती है।<br />
कांग्रेस के अनुसूचित जाति विभाग के अध्यक्ष Rajendra Pal Gautam ने इस मुद्दे पर प्रेस वार्ता करते हुए भाजपा सरकार को कटघरे में खड़ा किया।<br />
उन्होंने कहा कि 2018 का आंदोलन पूरी तरह संवैधानिक था, लेकिन सरकार ने इसे दबाने के लिए व्यापक स्तर पर मुकदमे दर्ज कर दिए। गौतम ने आरोप लगाया कि आज भी हजारों युवा न्याय के लिए अदालतों के चक्कर काट रहे हैं, जबकि उनकी कोई गलती नहीं थी।<br />
उन्होंने मृतकों को श्रद्धांजलि देते हुए कहा कि यह आंदोलन सामाजिक न्याय की लड़ाई का प्रतीक था, जिसे दबाने की कोशिश की गई।<br />
प्रेस वार्ता में गौतम ने केवल आंदोलन तक ही अपनी बात सीमित नहीं रखी, बल्कि दलित अधिकारियों के साथ होने वाले कथित भेदभाव का मुद्दा भी उठाया।<br />
उन्होंने उत्तर प्रदेश कैडर के आईएएस अधिकारी Rinku Singh Rahi के इस्तीफे का मामला उठाते हुए कहा कि यह केवल एक व्यक्ति की कहानी नहीं, बल्कि पूरे सिस्टम की सच्चाई को उजागर करता है।<br />
गौतम के अनुसार, रिंकू सिंह राही ने पीसीएस अधिकारी रहते हुए एससी फंड से जुड़े करोड़ों रुपये के घोटाले का पर्दाफाश किया था। इसके बाद उन पर जानलेवा हमला हुआ, जिसमें उन्हें सात गोलियां लगीं। इसके बावजूद उन्होंने हार नहीं मानी और 2021 में आईएएस परीक्षा पास कर ली।<br />
गौतम ने सवाल उठाया कि क्या भ्रष्टाचार के खिलाफ आवाज उठाने वाले अधिकारियों को इसी तरह प्रताड़ित किया जाएगा?<br />
उन्होंने कहा कि राही को पिछले आठ महीनों से कोई जिम्मेदारी नहीं दी गई, जिससे आहत होकर उन्होंने वेतन लेने से इनकार कर दिया और अंततः इस्तीफा भेज दिया।<br />
गौतम ने राष्ट्रपति से मांग की कि रिंकू सिंह राही का इस्तीफा स्वीकार न किया जाए और उन्हें सम्मानजनक पद दिया जाए।<br />
रिंकू सिंह राही के हवाले से गौतम ने दावा किया कि नौकरशाही में एक समानांतर भ्रष्टाचार तंत्र काम कर रहा है, जहां बिना काम के भी भुगतान होता है।<br />
यह बयान प्रशासनिक व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े करता है और यह संकेत देता है कि भ्रष्टाचार के खिलाफ लड़ाई लड़ने वाले अधिकारियों को संस्थागत स्तर पर समर्थन नहीं मिल रहा।<br />
कांग्रेस ने इस मुद्दे को व्यापक सामाजिक संदर्भ में भी जोड़ा। गौतम ने हरियाणा में असिस्टेंट प्रोफेसर भर्ती का उदाहरण देते हुए कहा कि 120 पदों में से केवल तीन दलित उम्मीदवारों का चयन किया गया, जबकि बाकी को ‘नॉट फाउंड सूटेबल’ बताकर बाहर कर दिया गया।<br />
उन्होंने इसे संस्थागत भेदभाव का उदाहरण बताते हुए कहा कि योग्य उम्मीदवारों को भी अवसर नहीं दिया जा रहा है।<br />
गौतम ने विश्वविद्यालयों में दलित छात्रों के साथ होने वाले भेदभाव का मुद्दा उठाते हुए Rohith Vemula और Payal Tadvi के मामलों का उल्लेख किया।<br />
उन्होंने कहा कि ये घटनाएं दिखाती हैं कि शिक्षा संस्थानों में भी दलित छात्रों को मानसिक प्रताड़ना का सामना करना पड़ता है, जो कई बार गंभीर परिणामों में बदल जाती है।<br />
कांग्रेस ने इस पूरे मुद्दे को भाजपा सरकार की नीतियों से जोड़ते हुए कहा कि दलितों के अधिकारों की रक्षा में सरकार विफल रही है।<br />
पार्टी नेताओं का आरोप है कि एक तरफ सरकार दलित कल्याण की बात करती है, वहीं दूसरी तरफ जमीनी स्तर पर भेदभाव और उत्पीड़न की घटनाएं लगातार सामने आ रही हैं।<br />
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह मुद्दा केवल सामाजिक न्याय तक सीमित नहीं है, बल्कि इसमें राजनीतिक रणनीति भी शामिल है।<br />
आगामी चुनावों को देखते हुए कांग्रेस दलित वोट बैंक को साधने की कोशिश कर रही है। वहीं भाजपा भी अपने स्तर पर दलित समुदाय के बीच अपनी पकड़ मजबूत करने के प्रयास में है।<br />
मुकदमों को वापस लेने का सवाल केवल राजनीतिक नहीं, बल्कि कानूनी भी है। किसी भी मामले को वापस लेने के लिए राज्य सरकारों को कानूनी प्रक्रिया का पालन करना होता है, जिसमें अदालत की मंजूरी भी आवश्यक होती है। ऐसे में यह देखना दिलचस्प होगा कि कांग्रेस शासित राज्य इस दिशा में कितनी तेजी से कदम उठाते हैं।</p>
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राहुल गांधी ने अपने पत्र में विशेष रूप से इस बात पर जोर दिया कि इन मुकदमों का सबसे ज्यादा असर युवाओं के भविष्य पर पड़ा है।.कई युवा सरकारी नौकरियों के लिए आवेदन नहीं कर पा रहे हैं, क्योंकि उनके खिलाफ आपराधिक मामले लंबित हैं। इससे उनकी सामाजिक और आर्थिक स्थिति पर भी असर पड़ा यह मुद्दा एक बार फिर यह सवाल खड़ा करता है कि क्या शांतिपूर्ण आंदोलन करना वास्तव में सुरक्षित है?<br />
राहुल गांधी ने कहा कि लोकतंत्र में विरोध करना नागरिकों का अधिकार है और इसे अपराध की तरह नहीं देखा जाना चाहिए।<br />
फिलहाल इस पूरे मामले पर केंद्र सरकार की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। हालांकि, राजनीतिक गलियारों में इस मुद्दे को लेकर बहस तेज हो गई है और आने वाले दिनों में यह संसद और सड़क दोनों जगह चर्चा का विषय बन सकता है।<br />
एससी-एसटी एक्ट बचाओ आंदोलन से जुड़े मुकदमों को वापस लेने की मांग ने एक बार फिर देश में सामाजिक न्याय, प्रशासनिक जवाबदेही और राजनीतिक इच्छाशक्ति पर बहस को तेज कर दिया है।<br />
Rahul Gandhi की चिट्ठी ने इस मुद्दे को राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा के केंद्र में ला दिया है। अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि Narendra Modi सरकार इस पर क्या रुख अपनाती है और क्या वाकई उन युवाओं को राहत मिल पाती है, जो वर्षों से न्याय की उम्मीद में अदालतों के चक्कर काट रहे हैं।</p>
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		<title>बिहार की धड़कनों में उठी “वोट बचाओ” की गूंज</title>
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		<dc:creator><![CDATA[संवाद इंडिया]]></dc:creator>
		<pubDate>Sun, 24 Aug 2025 01:18:17 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[<p>नई दिल्ली, 24 अगस्त। बिहार की राजनीति का तापमान एक बार फिर चरम पर है। राहुल गांधी की</p>
<p>The post <a href="https://www.samvaadindia.com/the-echo-of-save-vote-arose-in-the-heartbeat-of-bihar/">बिहार की धड़कनों में उठी “वोट बचाओ” की गूंज</a> appeared first on <a href="https://www.samvaadindia.com">Samvaad India</a>.</p>
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										<content:encoded><![CDATA[<p>नई दिल्ली, 24 अगस्त। बिहार की राजनीति का तापमान एक बार फिर चरम पर है। राहुल गांधी की अगुवाई में चल रही <em>वोटर अधिकार यात्रा</em> सातवें दिन कटिहार पहुंची और वहां का दृश्य अद्भुत था। जिस तरह हजारों-लाखों लोग इस यात्रा में शामिल हुए, वह साफ संकेत है कि बिहार की जनता लोकतंत्र और अपने मताधिकार की सुरक्षा को लेकर गंभीर है। मंच पर राहुल गांधी ने न सिर्फ भाजपा पर सीधा हमला बोला, बल्कि चुनाव आयोग की निष्पक्षता पर भी बड़े सवाल खड़े किए।</p>
<h2>जनसैलाब: पेड़ों पर चढ़कर राहुल की झलक पाने को बेताब लोग</h2>
<p>कटिहार की सड़कों और मैदानों में जिस तरह का नजारा देखने को मिला, वह किसी राजनीतिक रैली से बढ़कर आंदोलन जैसा प्रतीत हो रहा था। भीड़ इतनी विशाल थी कि राहुल गांधी की झलक पाने के लिए लोग पेड़ों और मकानों की छतों तक पर चढ़ गए। जनसभा स्थल चारों ओर से “वोट चोर, गद्दी छोड़” और “संविधान बचाओ” जैसे नारों से गूंज रहा था। यह भीड़ केवल संख्या नहीं थी, बल्कि संदेश थी कि जनता अब लोकतंत्र पर हो रहे हमलों को बर्दाश्त करने के मूड में नहीं है।</p>
<h2>राहुल गांधी का तीखा हमला: &#8220;भाजपा दलितों-पिछड़ों का हक मार रही&#8221;</h2>
<p>राहुल गांधी ने अपने संबोधन में कहा –<br />
&#8220;भाजपा चुनाव आयोग के साथ मिलकर देशभर में वोट चोरी कर रही है। इसका मकसद सिर्फ एक है – दलितों, पिछड़ों और गरीबों से उनका संवैधानिक हक छीनना।&#8221;</p>
<p>उन्होंने आरोप लगाया कि महाराष्ट्र और हरियाणा की तरह ही बिहार में भी एसआईआर (Special Identification Register) के बहाने लाखों लोगों के नाम वोटर लिस्ट से काट दिए गए।</p>
<p><img decoding="async" class="aligncenter wp-image-1045 size-full" src="https://www.samvaadindia.com/wp-content/uploads/2025/08/images-54.jpeg" alt="" width="739" height="415" srcset="https://www.samvaadindia.com/wp-content/uploads/2025/08/images-54.jpeg 739w, https://www.samvaadindia.com/wp-content/uploads/2025/08/images-54-300x168.jpeg 300w" sizes="(max-width: 739px) 100vw, 739px" /></p>
<h2>संविधान बनाम संघ की विचारधारा</h2>
<p>अपने भाषण के दौरान राहुल गांधी ने संविधान की प्रति भी लहराई। उन्होंने कहा कि संविधान भारत की हजारों साल पुरानी सोच का प्रतीक है, जो हर नागरिक को समान मान्यता देता है। इसके उलट भाजपा-आरएसएस की विचारधारा समाज को ऊंच-नीच में बांटकर दलितों-पिछड़ों को नीचे धकेलने की है। उन्होंने तीखे शब्दों में कहा –<br />
&#8220;महात्मा गांधी ने संविधान की बुनियाद रखने वाले मूल्यों के लिए अपना जीवन दे दिया। गोडसे ने गांधी की हत्या की क्योंकि वह संविधान से नफरत करता था। आज वही सोच भाजपा और आरएसएस चला रहे हैं।&#8221;</p>
<h2>बेरोजगारी का मुद्दा: बिहार को बताया केंद्र</h2>
<p>राहुल गांधी ने जनसभा में बेरोजगारी का मुद्दा पूरी ताकत से उठाया। उन्होंने कहा कि नोटबंदी और गलत जीएसटी जैसे फैसलों ने अर्थव्यवस्था को बर्बाद कर दिया। नतीजा यह हुआ कि रोजगार के अवसर घटते चले गए।<br />
&#8220;आज बिहार बेरोजगारी का केंद्र है। सरकारी नौकरियां बंद हैं, सेना में भर्ती बंद है, व्यापारी संकट में हैं और किसानों को सहारा नहीं मिल रहा। दूसरी ओर अरबपतियों के लाखों-करोड़ के कर्ज माफ किए जा रहे हैं।&#8221;</p>
<h2>मखाना किसानों से संवाद: ज़मीन से जुड़ाव का संदेश</h2>
<p>कटिहार पहुंचने से पहले राहुल गांधी ने खेतों में जाकर मखाना किसानों से मुलाकात की। किसानों ने उन्हें बताया कि मंडी व्यवस्था और न्यूनतम समर्थन मूल्य की कमी से वे भारी संकट में हैं। राहुल गांधी ने किसानों को आश्वासन दिया कि कांग्रेस और इंडिया गठबंधन सत्ता में आने पर किसानों को आर्थिक सुरक्षा देंगे। यह मुलाकात यात्रा को केवल राजनीतिक न रखकर ज़मीनी स्तर पर जोड़ने का संदेश देती है।</p>
<h2>मीडिया पर हमला: &#8220;यह अरबपतियों की मीडिया है&#8221;</h2>
<p>राहुल गांधी ने मीडिया को भी कटघरे में खड़ा किया। उन्होंने कहा –<br />
जनता ‘वोट चोर, गद्दी छोड़’ का नारा लगा रही है, लेकिन मीडिया इसे दिखा नहीं रही, क्योंकि यह अरबपतियों की मीडिया है।&#8221;<br />
उनका इशारा साफ था – बड़े कॉर्पोरेट घरानों के प्रभाव में काम कर रहे मीडिया संस्थान जनता की असली आवाज को दबा रहे हैं।</p>
<h2>INDIA गठबंधन की ताकत का प्रदर्शन</h2>
<p>कटिहार की रैली में राहुल गांधी अकेले नहीं थे। उनके साथ राजद नेता तेजस्वी यादव, कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष राजेश राम, विधायक दल के नेता शकील अहमद, सीपीआई (एमएल) के दीपांकर भट्टाचार्य, वीआईपी पार्टी के मुकेश सहनी और कर्नाटक के उपमुख्यमंत्री डीके शिवकुमार मौजूद थे। यह मंच INDIA गठबंधन की एकजुटता का संदेश दे रहा था और जनता के बीच यह संदेश गया कि भाजपा के खिलाफ विपक्ष मिलकर लड़ रहा है।</p>
<h2>वोटर अधिकार यात्रा: क्या है मकसद?</h2>
<p>कांग्रेस का दावा है कि इस यात्रा का मुख्य उद्देश्य जनता को यह बताना है कि वोट उनका संवैधानिक अधिकार है और इसे छीने जाने की साजिश हो रही है। बिहार जैसे राज्यों में लाखों लोगों के नाम मतदाता सूची से हटाए जाने की शिकायतें आ रही हैं। राहुल गांधी का कहना है कि एसआईआर के नाम पर यह वोट चोरी का नया तरीका है।</p>
<h2>भीड़ का जोश: आंदोलन में बदलती यात्रा</h2>
<p>कटिहार में जिस तरह लोग उमड़े, वह केवल राजनीतिक सभा नहीं थी। भीड़ का उत्साह किसी आंदोलन की तरह था। राहुल गांधी की हर बात पर जोरदार तालियां और नारे गूंज रहे थे। यह दृश्य बताता है कि वोटर अधिकार यात्रा केवल कांग्रेस का कार्यक्रम नहीं रह गया, बल्कि जनता की बेचैनी और गुस्से का प्रतीक बन गया है।</p>
<h2>भाजपा पर सीधा वार: &#8220;देश का धन कुछ हाथों में&#8221;</h2>
<p>राहुल गांधी ने कहा कि भाजपा सरकार की नीतियों से देश का सारा धन अंबानी-अडानी जैसे कुछ अरबपतियों के हाथों में केंद्रित हो गया है। जबकि आम आदमी, किसान और छोटे व्यापारी संकट में हैं। यह आरोप उन्होंने बार-बार दोहराया ताकि संदेश सीधे जनता तक पहुंचे।</p>
<h2>जनता का नारा: &#8220;वोट बचाओ, संविधान बचाओ&#8221;</h2>
<p>सभा में शामिल लोगों के हाथों में तख्तियां और झंडे थे। हर ओर सिर्फ एक ही आवाज गूंज रही थी –<br />
&#8220;वोट बचाओ, संविधान बचाओ&#8221;<br />
यह नारा यात्रा का केंद्रीय संदेश बन चुका है और तेजी से गांव-गांव तक पहुंच रहा है।</p>
<h2>विपक्ष की रणनीति: बिहार से शुरू, देशभर तक विस्तार</h2>
<p>विशेषज्ञों का मानना है कि कांग्रेस और INDIA गठबंधन ने बिहार को इसलिए चुना क्योंकि यह राज्य सामाजिक न्याय और आंदोलन की राजनीति का केंद्र रहा है। यहां से उठी आवाज देशभर में असर डाल सकती है। यात्रा का मकसद केवल वोट चोरी का मुद्दा उठाना ही नहीं, बल्कि बेरोजगारी, महंगाई और किसान संकट को भी राजनीतिक एजेंडे पर लाना है।</p>
<h2>भाजपा की प्रतिक्रिया: आरोपों को बताया बेतुका</h2>
<p>भाजपा ने राहुल गांधी के आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि कांग्रेस निराधार बातें कर रही है। भाजपा नेताओं का कहना है कि कांग्रेस जनता का विश्वास खो चुकी है, इसलिए अब चुनाव आयोग पर आरोप लगाकर भ्रम फैलाने की कोशिश कर रही है। हालांकि, भीड़ का रुख और जनता का उत्साह यह दर्शाता है कि राहुल गांधी का संदेश जमीन पर असर डाल रहा है।</p>
<h2>क्या वोटर अधिकार यात्रा बनेगी 2025 की राजनीति का मोड़?</h2>
<p>कटिहार की ऐतिहासिक सभा ने यह साफ कर दिया है कि राहुल गांधी का यह अभियान केवल राजनीतिक यात्रा नहीं, बल्कि लोकतंत्र बचाने का आंदोलन बनने की क्षमता रखता है। भीड़ का जोश, विपक्ष की एकजुटता और भाजपा पर सीधे हमले – यह सब मिलकर यात्रा को राष्ट्रीय विमर्श का केंद्र बना रहे हैं। आने वाले महीनों में यह तय करेगा कि 2025 और 2026 के चुनावी परिदृश्य में जनता किसके साथ खड़ी होती है।</p>
<p>The post <a href="https://www.samvaadindia.com/the-echo-of-save-vote-arose-in-the-heartbeat-of-bihar/">बिहार की धड़कनों में उठी “वोट बचाओ” की गूंज</a> appeared first on <a href="https://www.samvaadindia.com">Samvaad India</a>.</p>
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		<title>मोदी सरकार की चुप्पी पर कांग्रेस का तीखा हमला</title>
		<link>https://www.samvaadindia.com/congresss-sharp-attack-on-modi-governments-silence/</link>
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		<dc:creator><![CDATA[संवाद इंडिया]]></dc:creator>
		<pubDate>Sun, 25 May 2025 11:05:53 +0000</pubDate>
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		<category><![CDATA[राष्ट्रीय]]></category>
		<category><![CDATA[Congress's sharp attack on Modi government's silence]]></category>
		<category><![CDATA[प्रणीति शिंदे]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>नई दिल्ली, 25 मई। केंद्र सरकार पर हमलावर रुख अपनाते हुए कांग्रेस पार्टी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और उनकी</p>
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										<content:encoded><![CDATA[<p><strong>नई दिल्ली, 25 मई।</strong> केंद्र सरकार पर हमलावर रुख अपनाते हुए कांग्रेस पार्टी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और उनकी कैबिनेट पर कई गंभीर आरोप लगाए। खासकर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के संघर्ष विराम के दावे, पहलगाम आतंकी हमला, और ‘ऑपरेशन सिंदूर’ को लेकर कांग्रेस नेता प्रणीति शिंदे ने विस्तृत सवाल उठाए और सरकार की चुप्पी को भारत की कमजोरी के रूप में प्रस्तुत किया।</p>
<p><strong>ट्रंप के दावे पर मोदी सरकार की चुप्पी</strong><br />
प्रणीति शिंदे ने पत्रकारों से कहा कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का दावा, कि भारत को संघर्ष विराम के लिए मजबूर किया गया, अत्यंत अपमानजनक है। उन्होंने सवाल उठाया कि सरकार ने इस पर आधिकारिक प्रतिक्रिया क्यों नहीं दी। उनका आरोप था कि सरकार की चुप्पी ने अंतरराष्ट्रीय मंच पर भारत की प्रतिष्ठा को कमजोर किया और यह संकेत दिया कि हम बाहरी दबावों के आगे झुकते हैं।</p>
<p><strong>पहलगाम हमले के आतंकवादियों का सवाल</strong><br />
कांग्रेस ने सीधे पूछा कि पहलगाम में 26 निर्दोष लोगों की हत्या के पीछे जिन आतंकियों का हाथ था, वे कहां हैं। शिंदे ने कहा कि हमले को हफ्तों बीत चुके हैं, लेकिन न तो कोई गिरफ्तारी हुई और न ही कोई ठोस कार्रवाई सामने आई। उन्होंने सरकार से पूछा कि क्या यह नाकामी भारतीय सुरक्षा तंत्र की कमजोरी का संकेत नहीं है। ऑपरेशन सिंदूर, जिसे मोदी सरकार ने बड़ी उपलब्धि के रूप में प्रचारित किया, कांग्रेस की नजर में दिखावे और आत्मप्रशंसा का जरिया बनकर रह गया। शिंदे ने आरोप लगाया कि प्रधानमंत्री ने इस सैन्य कार्रवाई को अपनी छवि चमकाने के लिए इस्तेमाल किया, लेकिन वास्तविक जवाबदेही से बचते रहे।</p>
<p><strong>अमेरिका के व्यापारिक दबाव का असर</strong><br />
कांग्रेस का आरोप है कि अमेरिका ने भारत पर व्यापारिक और कूटनीतिक दबाव बनाकर संघर्ष विराम के लिए मजबूर किया। शिंदे ने पूछा, “क्या सरकार ने इस दबाव की जानकारी पहले से संसद और जनता के साथ साझा की? अगर नहीं, तो क्यों नहीं?” उन्होंने इसे पारदर्शिता की कमी और रणनीतिक विफलता बताया।</p>
<p><strong>विदेश मंत्री की भूमिका पर सवाल</strong><br />
विदेश मंत्री एस. जयशंकर की भूमिका पर भी कांग्रेस ने सवाल उठाए। पार्टी का आरोप है कि जयशंकर ने पाकिस्तान को भारतीय हमले की पूर्व सूचना देकर रणनीतिक बढ़त गंवाई। शिंदे ने पूछा, “इससे भारतीय सुरक्षा बलों को कितना नुकसान हुआ? क्या इससे हमारी खुफिया और सैन्य तैयारियां प्रभावित हुईं?”</p>
<p><strong>सेना और जनता के मनोबल पर असर</strong><br />
कांग्रेस ने आरोप लगाया कि डोनाल्ड ट्रंप के संघर्ष विराम की घोषणा और भारत की चुप्पी से सेना और जनता का मनोबल गिरा। शिंदे ने कहा कि जब नेतृत्व स्पष्ट और मजबूत नहीं होता, तो सैनिकों और नागरिकों को यह संदेश जाता है कि सरकार उनके साथ खड़ी नहीं है।</p>
<p><strong>ऐतिहासिक संदर्भ में तुलना</strong><br />
शिंदे ने 1971 के युद्ध का उदाहरण देते हुए याद दिलाया कि तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने अमेरिका के दबाव में न आकर पाकिस्तान को ऐतिहासिक सरेंडर के लिए मजबूर किया था। उन्होंने कहा, “आज मोदी सरकार उसी आत्मविश्वास और दृढ़ता का प्रदर्शन क्यों नहीं कर पा रही?”</p>
<p><strong>प्रधानमंत्री की जवाबदेही पर सवाल</strong><br />
कांग्रेस ने प्रधानमंत्री मोदी के संसद की विशेष बैठक न बुलाने और सर्वदलीय बैठक में शामिल न होने पर सवाल उठाया। शिंदे ने कहा कि ऐसे महत्वपूर्ण राष्ट्रीय मुद्दों पर प्रधानमंत्री की अनुपस्थिति और चुप्पी गंभीर प्रश्न खड़े करती है — आखिर वे क्या छुपा रहे हैं?</p>
<p><strong>राहुल गांधी का पुंछ दौरा</strong><br />
कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने सोशल मीडिया पर बताया कि उन्होंने पुंछ में पाकिस्तान की गोलाबारी में जान गंवाने वाले परिवारों से मुलाकात की। उन्होंने उनके साहस और हिम्मत की सराहना की और कहा कि इन परिवारों की मांगों और मुद्दों को वे राष्ट्रीय स्तर पर उठाएंगे।</p>
<blockquote class="twitter-tweet" data-width="550" data-dnt="true">
<p lang="hi" dir="ltr">आज पुंछ में पाकिस्तान की गोलाबारी में जान गंवाने वाले लोगों के परिवारों से मिला।</p>
<p>टूटे मकान, बिखरा सामान, नम आंखें और हर कोने में अपनों को खोने की दर्द भरी दास्तान &#8211; ये देशभक्त परिवार हर बार जंग का सबसे बड़ा बोझ साहस और गरिमा के साथ उठाते हैं। उनके हौसले को सलाम है।</p>
<p>पीड़ित… <a href="https://t.co/CIDEXmqXxG">pic.twitter.com/CIDEXmqXxG</a></p>
<p>&mdash; Rahul Gandhi (@RahulGandhi) <a href="https://twitter.com/RahulGandhi/status/1926179931823776133?ref_src=twsrc%5Etfw">May 24, 2025</a></p></blockquote>
<p><script async src="https://platform.twitter.com/widgets.js" charset="utf-8"></script></p>
<p><strong>सांप्रदायिक सौहार्द की मिसाल</strong><br />
राहुल गांधी ने पुंछ में मंदिर, गुरुद्वारा और मदरसे का दौरा कर कहा, “यहां हर धर्म के लोग साथ रहते हैं, साथ दुख सहते हैं। यही असली हिंदुस्तान है — सौहार्द, एकता और देशप्रेम की मिसाल।” उन्होंने कहा कि हमें बांटने और तोड़ने की कोशिश करने वाले कभी सफल नहीं होंगे।</p>
<blockquote class="twitter-tweet" data-width="550" data-dnt="true">
<p lang="hi" dir="ltr">आज, पुंछ में पाकिस्तानी हमलों से प्रभावित मंदिर, गुरुद्वारा और मदरसे में गया।</p>
<p>यहां हर धर्म के लोग साथ रहते हैं, साथ दुख सहते हैं।</p>
<p>यही पुंछ है &#8211; यही हिंदुस्तान है, जहां सौहार्द है, एकता है, देशप्रेम है।</p>
<p>हमें बांटने और तोड़ने की कोशिश करने वाले कभी सफल नहीं होंगे &#8211; हम हमेशा… <a href="https://t.co/MP1R9Ic1o9">pic.twitter.com/MP1R9Ic1o9</a></p>
<p>&mdash; Rahul Gandhi (@RahulGandhi) <a href="https://twitter.com/RahulGandhi/status/1926230462344659221?ref_src=twsrc%5Etfw">May 24, 2025</a></p></blockquote>
<p><script async src="https://platform.twitter.com/widgets.js" charset="utf-8"></script></p>
<p><strong>सरकार की पारदर्शिता पर हमला</strong><br />
कांग्रेस ने कहा कि आज देश को स्पष्टता, पारदर्शिता और निर्णायक नेतृत्व की जरूरत है। शिंदे ने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी स्क्रिप्टेड भाषण और प्रायोजित चुप्पी से काम नहीं चला सकते। जनता को ईमानदार, ठोस और स्पष्ट जवाब चाहिए।</p>
<p><strong>जनता की अपेक्षाओं का सवाल</strong><br />
कांग्रेस ने अंत में कहा कि जनता को अब भरोसा चाहिए — न सिर्फ सैन्य कार्रवाई में सफलता का दावा, बल्कि ठोस परिणाम, सुरक्षा और अंतरराष्ट्रीय मंच पर मजबूत स्थिति का प्रदर्शन। पार्टी ने मांग की कि सरकार इन सभी मामलों पर संसद में खुलकर जवाब दे और देश को सच्चाई बताए।</p>
<p>इस तरह, कांग्रेस ने अपनी प्रेस वार्ता में मोदी सरकार पर चौतरफा हमला किया, राष्ट्रीय सुरक्षा, कूटनीति और घरेलू जवाबदेही जैसे बड़े सवालों को उठाकर बहस को गर्मा दिया है। आने वाले दिनों में इन मुद्दों पर राजनीतिक हलकों में घमासान तेज होने की पूरी संभावना है।</p>
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		<title>वक्फ संशोधन अधिनियम पर सुप्रीम कोर्ट की अंतरिम रोक का कांग्रेस ने किया स्वागत, कहा- यह संविधान की आत्मा पर हमला था</title>
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		<dc:creator><![CDATA[संवाद इंडिया]]></dc:creator>
		<pubDate>Thu, 17 Apr 2025 16:54:05 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[अंतरराष्ट्रीय]]></category>
		<category><![CDATA[खास खबर]]></category>
		<category><![CDATA[राष्ट्रीय]]></category>
		<category><![CDATA[Congress]]></category>
		<category><![CDATA[Congress welcomed the Supreme Court's interim stay on the Wakf Amendment Act]]></category>
		<category><![CDATA[said- it was an attack on the spirit of the Constitution]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>नई दिल्ली, 17 अप्रैल। वक्फ अधिनियम में हालिया संशोधनों पर सुप्रीम कोर्ट द्वारा लगाई गई अंतरिम रोक का</p>
<p>The post <a href="https://www.samvaadindia.com/congress-welcomed-the-supreme-courts-interim-stay-on-the-wakf-amendment-act-said-it-was-an-attack-on-the-spirit-of-the-constitution/">वक्फ संशोधन अधिनियम पर सुप्रीम कोर्ट की अंतरिम रोक का कांग्रेस ने किया स्वागत, कहा- यह संविधान की आत्मा पर हमला था</a> appeared first on <a href="https://www.samvaadindia.com">Samvaad India</a>.</p>
]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p><strong>नई दिल्ली, 17 अप्रैल। </strong>वक्फ अधिनियम में हालिया संशोधनों पर सुप्रीम कोर्ट द्वारा लगाई गई अंतरिम रोक का कांग्रेस पार्टी ने खुले शब्दों में स्वागत किया है। पार्टी के वरिष्ठ नेता और संवैधानिक मामलों के विशेषज्ञ, राज्यसभा सांसद डॉ. अभिषेक मनु सिंघवी ने इसे &#8220;संविधान की आत्मा की जीत&#8221; करार दिया। कांग्रेस कार्यालय में आयोजित विशेष प्रेस वार्ता में सिंघवी के साथ मौजूद पार्टी के राष्ट्रीय सचिव और राज्यसभा सांसद इमरान प्रतापगढ़ी ने भी इसे &#8220;न्यायपालिका द्वारा अल्पसंख्यकों के अधिकारों की सुरक्षा&#8221; बताया और उम्मीद जताई कि आने वाली सुनवाई में और राहत मिलेगी।</p>
<h3>वैचारिक हमले की राजनीति और कानूनी प्रतिक्रिया</h3>
<p>डॉ. सिंघवी ने कहा कि केंद्र सरकार जिस अधिनियम को प्रशासनिक सुधार का नाम दे रही है, वह वास्तव में एक वैचारिक हमला है। उन्होंने कहा, “वक्फ अधिनियम में किए गए संशोधन प्रशासनिक बदलाव नहीं, बल्कि संवैधानिक मूल्यों, धार्मिक स्वायत्तता और लोकतांत्रिक सिद्धांतों के विरुद्ध हैं।” उन्होंने आगे स्पष्ट किया कि यह केवल एक धार्मिक समुदाय का मुद्दा नहीं, बल्कि भारतीय संविधान के अनुच्छेद 26 में प्रदत्त मूल अधिकारों का मामला है, जो प्रत्येक नागरिक को अपने धर्म के पालन, प्रचार, प्रबंधन और संबंधित संस्थानों के संचालन का अधिकार देता है।</p>
<h3>सुप्रीम कोर्ट का अंतरिम आदेश और उसका प्रभाव</h3>
<p>गुरुवार को सुप्रीम कोर्ट में हुई सुनवाई के बाद अदालत ने वक्फ संशोधन अधिनियम की कुछ महत्वपूर्ण धाराओं, जैसे कि धारा 9 और 14, पर अंतरिम रोक लगा दी। धारा 9 में प्रावधान था कि केंद्रीय वक्फ परिषद में 22 में से 12 सदस्य गैर-मुस्लिम हो सकते हैं, जबकि धारा 14 में वक्फ बोर्ड के 11 में से 7 सदस्यों को गैर-मुस्लिम बनाए जाने की व्यवस्था थी। सुप्रीम कोर्ट ने इन विवादित प्रावधानों पर अगले आदेश तक रोक लगा दी है, जिसे कांग्रेस ने संविधान की आत्मा की रक्षा की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम बताया है।</p>
<h3>स्वायत्तता पर प्रहार, संविधान पर प्रश्न</h3>
<p>डॉ. सिंघवी ने कहा कि वक्फ अधिनियम की धारा 11, जो चुनाव आधारित प्रतिनिधियों को हटाकर सभी सदस्यों की नियुक्ति सरकार द्वारा करने की बात करती है, सीधे-सीधे संस्थागत स्वायत्तता पर प्रहार है। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि इस प्रकार का परिवर्तन धार्मिक संस्थानों को सरकारी नियंत्रण में लाने का प्रयास है, जो भारत जैसे धर्मनिरपेक्ष गणराज्य के मूलभूत ढांचे के खिलाफ है।</p>
<h3>लोकतंत्र और न्यायिक संतुलन पर सवाल</h3>
<p>प्रेस वार्ता में डॉ. सिंघवी ने यह भी बताया कि संशोधित अधिनियम के अनुसार यदि वक्फ बोर्ड के सभी सदस्य मिलकर भी अध्यक्ष के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पारित करें, तो भी अध्यक्ष को नहीं हटाया जा सकता जब तक कि सरकार स्वयं उस पर कार्रवाई न करे। “यह न केवल हास्यास्पद है, बल्कि लोकतांत्रिक प्रक्रिया का भी अपमान है,” उन्होंने कहा। उन्होंने यह भी बताया कि अब वक्फ बोर्ड का सीईओ गैर-मुस्लिम भी हो सकता है, जो संस्थागत पहचान और समुदाय की स्वायत्तता दोनों पर सवाल खड़ा करता है।</p>
<h3>वक्फ संपत्ति को लेकर विवाद की खुली छूट</h3>
<p>डॉ. सिंघवी ने एक अन्य विवादास्पद प्रावधान का उल्लेख करते हुए कहा कि अब किसी भी व्यक्ति द्वारा कलेक्टर को एक साधारण शिकायत पत्र देकर वक्फ संपत्ति को विवादित घोषित कराया जा सकता है, जिसमें न कोई कारण बताने की बाध्यता है, न ही निर्णय लेने की कोई समय-सीमा। “इससे न केवल संपत्ति विवाद बढ़ेंगे, बल्कि धार्मिक संस्थाओं की वैधानिक सुरक्षा भी खतरे में पड़ जाएगी,” उन्होंने जोड़ा।</p>
<h3>संविधान विरोधी प्रावधानों के खिलाफ कांग्रेस की भूमिका</h3>
<p>इमरान प्रतापगढ़ी ने स्पष्ट किया कि इस अधिनियम के संशोधनों के खिलाफ उन्होंने स्वयं और अन्य याचिकाकर्ताओं ने सुप्रीम कोर्ट का रुख किया था, जब संसद में विपक्ष द्वारा दिए गए सुझावों को सरकार ने नकार दिया। उन्होंने सुप्रीम कोर्ट के अंतरिम आदेश को &#8216;संविधान की जीत&#8217; बताया और कहा कि “आज जब एक समुदाय की धार्मिक संस्थाओं पर नियंत्रण की कोशिश हो रही है, तो कल यह संकट किसी भी अल्पसंख्यक या बहुसंख्यक धर्म की संस्था पर आ सकता है।”</p>
<p><img loading="lazy" decoding="async" class="aligncenter wp-image-978 size-full" src="https://www.samvaadindia.com/wp-content/uploads/2025/04/IMG-20250417-WA0027-scaled.jpg" alt="" width="2560" height="2560" srcset="https://www.samvaadindia.com/wp-content/uploads/2025/04/IMG-20250417-WA0027-scaled.jpg 2560w, https://www.samvaadindia.com/wp-content/uploads/2025/04/IMG-20250417-WA0027-300x300.jpg 300w, https://www.samvaadindia.com/wp-content/uploads/2025/04/IMG-20250417-WA0027-1024x1024.jpg 1024w, https://www.samvaadindia.com/wp-content/uploads/2025/04/IMG-20250417-WA0027-150x150.jpg 150w, https://www.samvaadindia.com/wp-content/uploads/2025/04/IMG-20250417-WA0027-768x768.jpg 768w, https://www.samvaadindia.com/wp-content/uploads/2025/04/IMG-20250417-WA0027-1536x1536.jpg 1536w, https://www.samvaadindia.com/wp-content/uploads/2025/04/IMG-20250417-WA0027-2048x2048.jpg 2048w" sizes="auto, (max-width: 2560px) 100vw, 2560px" /></p>
<h3>कांग्रेस का संविधान रक्षा संकल्प</h3>
<p>उन्होंने दोहराया कि कांग्रेस ने न सिर्फ भारत का संविधान बनाया, बल्कि उसकी रक्षा की जिम्मेदारी भी हर युग में निभाई है। “हम यह लड़ाई न किसी धर्म के नाम पर लड़ रहे हैं, न किसी जाति के नाम पर, बल्कि इस मुल्क की उस रूह के लिए लड़ रहे हैं जो संविधान की प्रस्तावना में समाहित है—न्याय, स्वतंत्रता, समानता और बंधुत्व।”</p>
<h3>वक्फ &#8216;बाय यूजर&#8217; की कानूनी स्थिति भी संकट में</h3>
<p>डॉ. सिंघवी ने यह भी रेखांकित किया कि नए अधिनियम के तहत वक्फ &#8216;बाय यूजर&#8217; (यानि लंबे समय से धार्मिक उपयोग में आ रही संपत्ति) की कानूनी मान्यता समाप्त हो गई है, लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने अपने आदेश में यह स्पष्ट कर दिया है कि फिलहाल जो संपत्तियाँ घोषित या पंजीकृत हैं, उनकी यथास्थिति बनी रहेगी।</p>
<h3>आगे की रणनीति और न्याय की आशा</h3>
<p>प्रतापगढ़ी और सिंघवी दोनों ने विश्वास जताया कि आने वाली सुनवाइयों में सुप्रीम कोर्ट इस अधिनियम के और अधिक प्रावधानों को रद्द करेगा। उन्होंने कहा कि कांग्रेस इस मुद्दे पर संवैधानिक तरीके से संघर्ष करती रहेगी और हर धार्मिक समुदाय के अधिकारों की रक्षा के लिए प्रतिबद्ध है।</p>
<h3>संविधान बनाम सत्ता</h3>
<p>कांग्रेस द्वारा दी गई इस प्रतिक्रिया से स्पष्ट है कि वक्फ संशोधन अधिनियम पर अब केवल राजनीतिक नहीं, बल्कि गंभीर संवैधानिक बहस शुरू हो चुकी है। यह मामला अब किसी विशेष समुदाय की भावनाओं से कहीं अधिक, उस लोकतांत्रिक ढांचे और सांविधानिक सिद्धांतों की रक्षा से जुड़ा हुआ है, जिन पर भारत की नींव टिकी है। सुप्रीम कोर्ट के आने वाले फैसले इस बहस की दिशा तय करेंगे और शायद यह भविष्य में अन्य धार्मिक संस्थानों की स्वायत्तता के लिए भी एक मिसाल बनेंगे।</p>
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		<title>कांग्रेस की न्याय पथ यात्रा: प्रजातंत्र और संविधान की रक्षा को लेकर अहमदाबाद में हुआ ऐतिहासिक संकल्प</title>
		<link>https://www.samvaadindia.com/congresss-nyay-path-yatra-a-historic-resolution-was-taken-in-ahmedabad-to-protect-democracy-and-the-constitution/</link>
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		<dc:creator><![CDATA[संवाद इंडिया]]></dc:creator>
		<pubDate>Wed, 09 Apr 2025 06:08:43 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[अंतरराष्ट्रीय]]></category>
		<category><![CDATA[गुजरात]]></category>
		<category><![CDATA[ब्रेकिंग]]></category>
		<category><![CDATA[राष्ट्रीय]]></category>
		<category><![CDATA[Congress]]></category>
		<category><![CDATA[Congress's Nyay Path Yatra: A historic resolution was taken in Ahmedabad to protect democracy and the Constitution]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>अहमदाबाद की ऐतिहासिक धरती पर गूंजा लोकतंत्र का स्वर अहमदाबाद 9 अप्रैल। कांग्रेस पार्टी की विस्तारित कार्यसमिति की</p>
<p>The post <a href="https://www.samvaadindia.com/congresss-nyay-path-yatra-a-historic-resolution-was-taken-in-ahmedabad-to-protect-democracy-and-the-constitution/">कांग्रेस की न्याय पथ यात्रा: प्रजातंत्र और संविधान की रक्षा को लेकर अहमदाबाद में हुआ ऐतिहासिक संकल्प</a> appeared first on <a href="https://www.samvaadindia.com">Samvaad India</a>.</p>
]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p><strong>अहमदाबाद की ऐतिहासिक धरती पर गूंजा लोकतंत्र का स्वर</strong><br />
अहमदाबाद 9 अप्रैल। कांग्रेस पार्टी की विस्तारित कार्यसमिति की बैठक एक ऐतिहासिक क्षण बनकर सामने आई, जिसमें पार्टी ने ‘न्याय पथ’ पर चलकर देश के लोकतांत्रिक मूल्यों और संविधान की रक्षा का संकल्प लिया। यह केवल एक राजनीतिक बैठक नहीं थी, बल्कि कांग्रेस के वैचारिक पुनरुद्धार और सामाजिक-राजनीतिक प्रतिबद्धता का उद्घोष था। बैठक में देशभर से आए वरिष्ठ नेताओं ने न केवल वर्तमान राजनीतिक परिदृश्य पर मंथन किया, बल्कि भारत के संविधान की प्रस्तावना में निहित सामाजिक, आर्थिक और राजनीतिक न्याय के संकल्प को दोहराया। यह वह क्षण था जब पार्टी ने अपने ऐतिहासिक मूल्यों की ओर लौटने और जनसरोकारों को प्राथमिकता देने की दिशा में ठोस रणनीति बनाने का कार्य किया।</p>
<p><strong>सरदार पटेल को श्रद्धांजलि और आदर्शों पर पुनः प्रतिबद्धता</strong><br />
बैठक के केंद्र में एक विशेष प्रस्ताव रहा जो भारत रत्न सरदार वल्लभभाई पटेल को समर्पित था। कांग्रेस कार्यसमिति ने पटेल को स्वतंत्रता संग्राम का झंडाबरदार और आधुनिक भारत का निर्माता बताते हुए उनके सिद्धांतों को वर्तमान राजनीतिक संघर्ष की नींव बताया। प्रस्ताव में कहा गया कि कांग्रेस पार्टी सरदार पटेल की राह पर चलकर किसानों, मजदूरों, कामगारों, वंचितों और शोषित वर्गों के अधिकारों की रक्षा के लिए प्रतिबद्ध है। साथ ही यह भी दोहराया गया कि &#8216;नफरत छोड़ो, भारत जोड़ो&#8217; अभियान पार्टी की विचारधारा का केंद्र बनेगा और कांग्रेस सांप्रदायिक उन्माद के खिलाफ एक मजबूत वैचारिक मोर्चा तैयार करेगी।</p>
<p><strong>संविधान की प्रस्तावना को राजनीतिक एजेंडा बनाने का ऐलान</strong><br />
कांग्रेस संचार विभाग के प्रभारी महासचिव जयराम रमेश ने संवाददाताओं से बातचीत में बताया कि बैठक में संविधान की प्रस्तावना को लेकर गहन चर्चा हुई, जिसमें सामाजिक न्याय, आर्थिक न्याय और राजनीतिक न्याय को लेकर कांग्रेस के आगामी एजेंडे पर विचार किया गया। उन्होंने कहा कि यह एजेंडा केवल एक घोषणापत्र नहीं होगा, बल्कि एक जनआंदोलन का रूप लेगा। कांग्रेस पार्टी अब संविधान में निहित मूलभूत अधिकारों को आमजन के जीवन का हिस्सा बनाने की दिशा में काम करेगी। उन्होंने कहा कि जब सरकारें संविधान की भावना के साथ खिलवाड़ करें, तब विपक्ष की ज़िम्मेदारी है कि वह उसकी रक्षा के लिए खड़ा हो।</p>
<p><strong>कांग्रेस और गुजरात का ऐतिहासिक रिश्ता:</strong><br />
कांग्रेस महासचिव केसी वेणुगोपाल ने बताया कि इस वर्ष दो महत्वपूर्ण अवसर हैं – महात्मा गांधी के कांग्रेस अध्यक्ष बनने की 100वीं वर्षगांठ और सरदार पटेल की 150वीं जयंती। इन दोनों महान नेताओं का गहरा रिश्ता गुजरात से है और इसी राज्य में स्वतंत्रता संग्राम के बीज पनपे थे। कांग्रेस का यह निर्णय कि वह गुजरात में राष्ट्रीय स्तर की बैठक करेगी, प्रतीकात्मक नहीं बल्कि एक रणनीतिक संदेश है। पार्टी यह दिखाना चाहती है कि गुजरात केवल किसी एक राजनीतिक दल का गढ़ नहीं है, बल्कि यह कांग्रेस की वैचारिक और ऐतिहासिक भूमि भी है, जहां से स्वतंत्रता की प्रेरणा निकली थी।</p>
<p><strong>आगामी अधिवेशन में राष्ट्रीय और प्रादेशिक मुद्दों पर प्रस्ताव</strong><br />
बैठक के बाद हुई प्रेस वार्ता में जानकारी दी गई कि बुधवार को कांग्रेस का राष्ट्रीय अधिवेशन आयोजित होगा, जिसमें दो प्रमुख प्रस्तावों पर चर्चा होगी। पहला प्रस्ताव देश की मौजूदा राजनीतिक और सामाजिक परिस्थितियों को लेकर होगा, जबकि दूसरा गुजरात की विशेष राजनीतिक स्थिति पर केंद्रित रहेगा। इन प्रस्तावों के माध्यम से कांग्रेस देश को यह संदेश देना चाहती है कि वह केवल विपक्षी भूमिका में नहीं, बल्कि एक वैकल्पिक और सशक्त राजनीतिक मार्गदर्शक के रूप में तैयार है। पार्टी सामाजिक न्याय की अवधारणा को राजनीतिक कार्यक्रम में परिवर्तित करने की दिशा में अग्रसर होगी।</p>
<p><strong>वरिष्ठ नेतृत्व की एकजुटता और विचारों का संगम</strong><br />
बैठक में कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे, संसदीय दल की अध्यक्ष सोनिया गांधी, लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी समेत तमाम वरिष्ठ नेताओं की मौजूदगी ने यह स्पष्ट कर दिया कि पार्टी अपने अंदरूनी मतभेदों को किनारे रखकर एकजुटता की दिशा में बढ़ रही है। सभी नेताओं ने एक स्वर में कहा कि भारत के समक्ष जो चुनौतियाँ हैं – जैसे बढ़ती बेरोज़गारी, सामाजिक विभाजन, संवैधानिक संस्थाओं का क्षरण – उनके समाधान के लिए एक व्यापक और नैतिक दृष्टिकोण की ज़रूरत है, जो केवल कांग्रेस दे सकती है। इस एकजुटता का संदेश देशभर के कार्यकर्ताओं के लिए प्रेरणास्रोत बन सकता है।</p>
<p><strong>संगठनात्मक पुनर्गठन की दिशा में ठोस प्रयास</strong><br />
सचिन पायलट ने अपने संबोधन में बताया कि वर्ष 2025 को संगठन समर्पित वर्ष घोषित किया गया है। इसका तात्पर्य है कि कांग्रेस बूथ स्तर से लेकर राष्ट्रीय स्तर तक संगठन को मजबूत करने के अभियान में जुट जाएगी। यह निर्णय कांग्रेस के लिए केवल रणनीतिक नहीं बल्कि अस्तित्व से जुड़ा कदम है। उन्होंने कहा कि एक मज़बूत संगठन ही किसी विचारधारा को जन-जन तक पहुँचा सकता है और पार्टी का यह अभियान पूरे देश में पार्टी कार्यकर्ताओं को सक्रिय करने का माध्यम बनेगा। पायलट ने यह भी कहा कि संगठनात्मक मजबूती के बिना कोई भी वैचारिक लड़ाई नहीं जीती जा सकती।</p>
<p><strong>मीडिया और प्रचार में नई रणनीति की ज़रूरत पर बल</strong><br />
पवन खेड़ा ने बताया कि आज के दौर में संचार ही सबसे बड़ा अस्त्र है और कांग्रेस इसके माध्यम से जनता तक सीधे संवाद की योजना बना रही है। उन्होंने कहा कि भ्रामक प्रचार, झूठे नैरेटिव और विकृत इतिहास को चुनौती देने के लिए एक संगठित और प्रभावशाली संचार रणनीति बनाई जा रही है। इसके लिए पार्टी डिजिटल माध्यमों, ग्राउंड रिपोर्टिंग और स्थानीय संवादों को प्राथमिकता देगी। उनका कहना था कि कांग्रेस अब यह समझ चुकी है कि केवल नीतियाँ बनाना काफी नहीं, उन्हें आम जनता तक सही रूप में पहुँचाना और उनकी भावनाओं को समझना भी उतना ही आवश्यक है।</p>
<p><strong>वैकल्पिक आर्थिक और सामाजिक मॉडल की दिशा में पहल</strong><br />
गौरव गोगोई ने कहा कि इस बैठक से एक नई आर्थिक और सामाजिक सोच उभरकर सामने आई है। उन्होंने कहा कि जब देश की अधिकांश जनता महंगाई, बेरोज़गारी और असमानता से जूझ रही हो, तब विपक्ष की ज़िम्मेदारी केवल आलोचना करने तक सीमित नहीं रह सकती। कांग्रेस अब एक ऐसा वैकल्पिक आर्थिक मॉडल तैयार करने की दिशा में काम करेगी, जिसमें संसाधनों का न्यायपूर्ण वितरण, श्रम का सम्मान और अवसरों की समानता को प्राथमिकता दी जाएगी। उन्होंने बताया कि आने वाले अधिवेशनों में इन मुद्दों को लेकर ठोस नीति प्रस्ताव पेश किए जाएंगे।</p>
<p><strong>पटेल और नेहरू को लेकर फैलाए जा रहे भ्रम पर करारा जवाब</strong><br />
बैठक में विशेष रूप से इस बात पर चर्चा हुई कि सरदार पटेल और जवाहरलाल नेहरू के रिश्तों को लेकर जो भ्रांतियाँ फैलाई जा रही हैं, उनका खंडन किया जाए। जयराम रमेश ने स्पष्ट किया कि यह दोनों नेता आधुनिक भारत की नींव के स्तंभ थे और इन्होंने महात्मा गांधी के नेतृत्व में देश को स्वतंत्रता दिलाने के लिए अभूतपूर्व योगदान दिया। उन्होंने कहा कि कांग्रेस इतिहास के साथ छेड़छाड़ के विरुद्ध एक वैचारिक अभियान चलाएगी और सच्चाई को सामने लाने का प्रयास करेगी, ताकि आने वाली पीढ़ियाँ ऐतिहासिक तथ्यों से परिचित रहें। यह अभियान केवल नेताओं की छवि की रक्षा नहीं, बल्कि राष्ट्र की चेतना की रक्षा के लिए आवश्यक है।</p>
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		<title>वक्फ से जुड़ा भ्रम टूटा नहीं</title>
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		<dc:creator><![CDATA[संवाद इंडिया]]></dc:creator>
		<pubDate>Fri, 04 Apr 2025 08:56:02 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[अंतरराष्ट्रीय]]></category>
		<category><![CDATA[खास खबर]]></category>
		<category><![CDATA[ब्रेकिंग]]></category>
		<category><![CDATA[राष्ट्रीय]]></category>
		<category><![CDATA[The confusion related to Waqf has not been dispelled]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>के. विक्रम राव  उर्दू शब्दकोश के अनुसार वक्फ़ का अर्थ है अल्लाह को समर्पित संपत्ति। हालांकि भारत में</p>
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										<content:encoded><![CDATA[<p style="text-align: left;"><strong>के. विक्रम राव </strong></p>
<p>उर्दू शब्दकोश के अनुसार वक्फ़ का अर्थ है अल्लाह को समर्पित संपत्ति। हालांकि भारत में वक्फ़ के तहत भूमि अधिकतर छिपे तरीके से निजी हित में कब्जियाकर इस्तेमाल होती रही। यह गंभीर पहलू कल के (02 अप्रैल 2025) संसदीय बहस में सुनाई नहीं दिया। बात 1955 की है जब हैदराबाद सरकार ने पहला वक्फ़ बोर्ड गठित किया था, तभी एक साल बीते थे नेहरू सरकार को केंद्रीय वक्फ़ अधिनियम लागू किये। मगर महाराष्ट्र की कांग्रेस सरकार ने औरंगाबाद मंडलायुक्त का प्रशासक नियुक्त कर इस पहले वक्फ़ बोर्ड को भंग कर दिया था।<br />
वक्फ की अवधारणा इस्लाम के प्रारंभिक दौर में शुरू हुई। इसे धार्मिक और सामाजिक प्रयोजनों के लिए संपत्तियों को समर्पित करने के उद्देश्य से स्थापित किया गया। समय के साथ, वक्फ संस्थाएं बनीं, जिनका उद्देश्य समुदाय की भलाई को बढ़ावा देना था। एक कहानी और प्रचलित है कि एक बार खलीफा उमर ने खैबर में एक जमीन खरीदी। उन्होंने पैगंबर मोहम्मद से पूछा कि इस जमीन का सबसे अच्छा उपयोग कैसे किया जा सकता है। पैगंबर ने उन्हें सलाह दी कि इस जमीन को रोक लेना चाहिए। इसे बेचने, उपहार में देने या विरासत में देने के बजाय, इसके फायदे को लोगों की जरूरतों पर खर्च करना चाहिए। इस तरीके से उस जमीन को &#8216;वक्फ&#8217; कर दिया गया, जिसका मतलब है कि उस जमीन से होने वाले लाभ सभी लोगों के लिए उपयोगी होंगे।<br />
कुछ इतिहास का संदर्भ देखें। वक्फ की संपत्ति की शुरुआत दो गांवों के दान से हुई थी, जो हमलावर मोहम्मद गोरी से जुड़ी हुई है। बारहवीं शताब्दी के अंत में जब मोहम्मद गोरी ने पृथ्वीराज चौहान को हराया, तो उसने अपनी शक्ति को मजबूत करने के लिए मुसलमानों की शिक्षा और इबादत के लिए कदम उठाए। उसने मुल्तान की जामा मस्जिद के लिए दो गांव दान किए और इसे भारत में वक्फ का एक शुरुआती उदाहरण माना जाता है।<br />
मगर कालांतर में हिंदुओं की संपत्ति भी जबरन वक्फ़ के कब्जे में जाती रही। गनीमत है कि मुख्तार अंसारी और अतीक अहमद द्वारा कब्जियाई संपत्ति वक्फ़ नहीं बन पाई।<br />
इसी परिवेश में जानना जरूरी है कि भारत का नया संसद भवन यदि कांग्रेस शासन लौटा तो वक्फ़ संपत्ति घोषित की जा सकती है। हालांकि यह संभावना 2021 में सच साबित हो रही थी। न्यायिक निर्णय (हाईकोर्ट : 1 जून 2021) के बाद राजधानी के &#8221;सेन्ट्रल विस्ता&#8221; योजना का निर्माण कार्य निर्बाध रुप से चलेगा। किन्तु दिल्ली वक्फ बोर्ड के अध्यक्ष और ओखला क्षेत्र से आम आदमी पार्टी के विधायक मियां मोहम्मद अमानतुल्ला खान ने (4 जून 2021) प्रधानमंत्री को पत्र लिख कर आग्रह किया कि इस नयी राजधानी निर्माण क्षेत्र में आने वाली मस्जिदों को बनी रहने दिया जाये। उन्होंने लिखा कि इंडिया गेट के पास के जलाशय के समीप वाली जाब्तागंज मस्जिद न तोड़ी जाये। इसी प्रकार कृषि भवन तथा राष्ट्रपति भवन की मस्जिद भी सुरक्षित रहें। उनकी लिस्ट में सुनहरी बाग रोड, रेड क्रास रोड की (संसद मार्ग), जामा मस्जिद (शाहजहांवाला नहीं) आदि भी शामिल हैं। ध्यान रहें कि ये सब वक्फ की संपत्ति नहीं हैं। एक दफा हरियाणा के चन्द जाट किसानों ने रायसीना हिल्स पर अपना दावा ठोका था। वे राष्ट्रपति को बेदखल कर खुद रहना चाहते थे (20 फरवरी 2017, दि हिन्दू )। इस जाट किसान महाबीर का कहना था कि उसके परदादा के पिता कल्लू जाट रायसीना भूभाग पर हल चलाते थे। उनके पुत्र नत्थू भी यहीं जोताई करता था। मगर 1911 में नयी राजधानी निर्माण पर ब्रिटिश राज ने उन्हें बेदखल कर दिया था।<br />
विधायक खान ने दस दिन की नोटिस भारत सरकार को दिया है। वे नहीं चाहते कि अदालत का दरवाजा खटखटाना पड़े। इसकी पूरी रपट चैन्नई के वामपंथी अंग्रेजी दैनिक &#8221;दि हिन्दू&#8221; में (5 जून 2021, पृष्ठ—3, कालम : 4—6 में) छपी है। यूं तो नयी दिल्ली के कई चौराहों पर के उद्यानों में मस्जिदों को असलियत में बिना नक्शे को पारित कराये बनी इमारतें ही कहा जायेगा।<br />
यहां मजहबी मुसलमानों को वक्फ़ से जुड़े ऐतिहासिक तथ्यों से अवगत हो जाना चाहिए। मक्का में डेढ़ सौ से अधिक पुरानी मस्जिदों को गत वर्षों में साउदी बादशाह के हुक्म से तोड़ा गया था ताकि हज के लिये आनेवाले जायरीनों के आवास, भोजन और दर्शन हेतु पर्याप्त व्यवस्था हो सके। मक्का—मदीना इस्लाम का पवित्रतम तीर्थस्थल है। &#8221;साउदी गजट&#8221; समाचार—पत्र के अनुसार 126 मस्जिदें तथा 96 मजहबी इमारतें जमीनदोज कर दी गयीं थीं, ताकि विशाल पुनर्निर्माण कार्य हो सके। इस पर बीस अरब डालर (चौदह खरब रुपये) खर्च किये गये। उमराह तथा हज एक ही समय संभव हो, इस निमित्त से यह ध्वंस तथा पुनर्निर्माण कार्य हुआ। ओटोमन तुर्को द्वारा निर्मित संगमरमर के भवनों को पवित्र काबा के समीप से हटाया गया ताकि विशाल मस्जिद चौड़ी की जा सके। बीस लाख यात्रियों को इससे सहूलियत मिली। राजधानी की 98 प्रतिशत ऐतिहासिक इमारतें तोड़ी गयीं ताकि साउदी अरब की राजधानी (ठीक नयी दिल्ली की भांति) समुचित रुप से निर्मित हो सके। यह 1985 की बात है।<br />
मगर यह ऐतिहासिक सच्चाई है कि सेकुलर संविधान के तहत धर्म हो पर आधारित संपत्ति संबंधी कानून अवाइत हैं हालांकि संसद में हुए भाषणों में इस तथ्य से सदस्य अनभिज्ञ थे। इसका परिणाम अगली पीढ़ी को भुगतना होगा।</p>
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		<title>खरगे-राहुल ने जिला कांग्रेस अध्यक्षों की बैठक को संबोधित किया</title>
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		<dc:creator><![CDATA[संवाद इंडिया]]></dc:creator>
		<pubDate>Fri, 28 Mar 2025 15:58:04 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[अंतरराष्ट्रीय]]></category>
		<category><![CDATA[ब्रेकिंग]]></category>
		<category><![CDATA[राजनीति]]></category>
		<category><![CDATA[राष्ट्रीय]]></category>
		<category><![CDATA[Congress]]></category>
		<category><![CDATA[Kharge-Rahul addressed the meeting of district Congress presidents]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>आरएसएस-भाजपा के खिलाफ लड़ाई जारी रहेगी: खरगे खरगे ने कहा, जिला अध्यक्ष पार्टी के अग्रिम पंक्ति के सेनापति</p>
<p>The post <a href="https://www.samvaadindia.com/kharge-rahul-addressed-the-meeting-of-district-congress-presidents/">खरगे-राहुल ने जिला कांग्रेस अध्यक्षों की बैठक को संबोधित किया</a> appeared first on <a href="https://www.samvaadindia.com">Samvaad India</a>.</p>
]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<h3><strong>आरएसएस-भाजपा के खिलाफ लड़ाई जारी रहेगी: खरगे</strong></h3>
<h3><strong>खरगे ने कहा, जिला अध्यक्ष पार्टी के अग्रिम पंक्ति के सेनापति हैं</strong></h3>
<p>नई दिल्ली, 27 मार्च: कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे और लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने गुरुवार को 13 राज्यों और तीन केंद्र शासित प्रदेशों के जिला कांग्रेस अध्यक्षों की बैठक को संबोधित किया। इस बैठक का उद्देश्य पार्टी संगठन को मजबूत करना और भाजपा-आरएसएस के खिलाफ कांग्रेस की राजनीतिक लड़ाई को और धार देना था।</p>
<p>खरगे ने अपने संबोधन में स्पष्ट किया कि कांग्रेस केवल चुनावी राजनीति नहीं कर रही है, बल्कि भारतीय लोकतंत्र, संविधान और स्वतंत्र संस्थाओं को बचाने की लड़ाई लड़ रही है। उन्होंने कहा कि यह लड़ाई केवल संसद तक सीमित नहीं हो सकती, बल्कि इसे जमीन और सड़कों तक ले जाना होगा।</p>
<h3><strong>2024 के लोकसभा चुनाव और इंडिया गठबंधन का विश्लेषण</strong></h3>
<p>खरगे ने 2024 के लोकसभा चुनावों के नतीजों का विश्लेषण करते हुए कहा कि इंडिया गठबंधन ने भाजपा को 240 सीटों पर सीमित कर दिया। कांग्रेस ने लगभग 100 सीटें जीतीं, लेकिन अगर गठबंधन और मेहनत करता तो 20-30 और सीटें जीत सकता था।</p>
<p>उन्होंने कहा कि यह लड़ाई केवल संख्याओं की नहीं थी, बल्कि अगर कांग्रेस और उसके सहयोगी बेहतर प्रदर्शन करते, तो देश में वैकल्पिक सरकार बन सकती थी। इससे न केवल संवैधानिक संस्थाओं को बचाया जा सकता था, बल्कि लोकतंत्र को कमजोर करने वाली नीतियों पर भी अंकुश लगाया जा सकता था।</p>
<h3><strong>आर्थिक स्थिति और सामाजिक असमानता पर कांग्रेस का रुख</strong></h3>
<p>कांग्रेस अध्यक्ष ने देश की आर्थिक स्थिति पर गंभीर चिंता व्यक्त की। उन्होंने कहा कि मौजूदा सरकार की नीतियों ने अर्थव्यवस्था को कमजोर कर दिया है। अमीर और अमीर हो रहे हैं, जबकि गरीब और गरीब होते जा रहे हैं। बेरोजगारी अपने चरम पर है और महंगाई ने आम जनता की कमर तोड़ दी है।</p>
<p>खरगे ने बताया कि घरेलू बचत दर दशकों में सबसे कम स्तर पर पहुँच गई है। उन्होंने इसे देश की आर्थिक स्थिरता के लिए गंभीर खतरा बताया। कांग्रेस का मानना है कि सरकार की गलत नीतियों के कारण केवल कुछ उद्योगपतियों को फायदा हो रहा है, जबकि आम आदमी संघर्ष कर रहा है।</p>
<h3><strong>जाति जनगणना की मांग और सामाजिक न्याय</strong></h3>
<p>बैठक के दौरान खरगे ने जाति जनगणना की मांग को दोहराया। उन्होंने इसे सामाजिक न्याय की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम बताया। कांग्रेस का मानना है कि जाति जनगणना से समाज में हाशिए पर मौजूद समुदायों की वास्तविक स्थिति का पता चलेगा और उनके लिए नीतियाँ बनाना आसान होगा।</p>
<p>राहुल गांधी ने भी इस मुद्दे पर जोर देते हुए कहा कि कांग्रेस का संघर्ष केवल राजनीतिक नहीं है, बल्कि यह एक सामाजिक आंदोलन भी है। पार्टी का लक्ष्य एक ऐसा भारत बनाना है, जहाँ हर नागरिक को समान अवसर मिले और कोई भी भेदभाव का शिकार न हो।</p>
<h3><strong>विदेश नीति पर सरकार की विफलता और भाजपा की रणनीति</strong></h3>
<p>कांग्रेस अध्यक्ष ने केंद्र सरकार की विदेश नीति की भी आलोचना की। उन्होंने कहा कि अमेरिका और अन्य देशों ने भारत के नागरिकों का अपमान किया है और काउंटर-टैरिफ लगाकर भारत को नुकसान पहुँचाया है।</p>
<p>उन्होंने कहा कि भाजपा सरकार केवल सांप्रदायिक मुद्दों पर ध्यान केंद्रित कर रही है और इससे जनता का ध्यान बुनियादी समस्याओं से भटक रहा है। खरगे ने कहा कि कांग्रेस का फोकस इस बात पर रहेगा कि जनता के असली मुद्दों को उठाया जाए और भाजपा के दुष्प्रचार का जवाब दिया जाए।</p>
<h3><strong>जिला अध्यक्षों की भूमिका और पार्टी संगठन का महत्व</strong></h3>
<p>खरगे ने बैठक में मौजूद जिला कांग्रेस अध्यक्षों को संबोधित करते हुए कहा कि वे सिर्फ संदेशवाहक नहीं हैं, बल्कि पार्टी के सेनापति हैं। उनकी भूमिका केवल पार्टी के निर्देशों को लागू करने तक सीमित नहीं है, बल्कि वे कांग्रेस के विचारों को जमीन पर उतारने वाले असली नेता हैं।</p>
<p>उन्होंने कहा कि कांग्रेस की विचारधारा बहुत मजबूत है, लेकिन सत्ता के बिना इसे लागू नहीं किया जा सकता। इसलिए हर कार्यकर्ता को संगठन को मजबूत करने और कांग्रेस को सत्ता में लाने के लिए मेहनत करनी होगी।</p>
<h3><strong>चुनावी रणनीति और मतदाता सूची प्रबंधन</strong></h3>
<p>बैठक में यह भी चर्चा की गई कि भाजपा कैसे मतदाता सूची में विसंगतियाँ बढ़ा रही है। कांग्रेस अध्यक्ष ने जिला अध्यक्षों को निर्देश दिया कि वे इस समस्या पर ध्यान दें और सुनिश्चित करें कि किसी भी मतदाता का नाम गलत तरीके से न काटा जाए।</p>
<p>इसके अलावा, उन्होंने आगामी असम, केरल, पुडुचेरी और तमिलनाडु के चुनावों पर भी ध्यान केंद्रित करने को कहा। उन्होंने कहा कि यह जिला कांग्रेस अध्यक्षों की जिम्मेदारी है कि वे अपने-अपने जिलों में पार्टी के उम्मीदवारों की जीत सुनिश्चित करें।</p>
<p><strong>कांग्रेस की विचारधारा और भाजपा-आरएसएस के खिलाफ लड़ाई</strong></p>
<p>बैठक को संबोधित करते हुए राहुल गांधी ने कांग्रेस की विचारधारा को स्पष्ट किया। उन्होंने कहा कि कांग्रेस सिर्फ भाजपा-आरएसएस का विरोध नहीं कर रही है, बल्कि एक समावेशी भारत के निर्माण की दिशा में काम कर रही है।</p>
<p>उन्होंने कहा कि कांग्रेस का लक्ष्य एक ऐसा भारत बनाना है जहाँ हर नागरिक को समान अवसर मिले, न्याय मिले और किसी के साथ भेदभाव न हो। उन्होंने कहा कि यह संघर्ष केवल राजनीतिक नहीं, बल्कि एक वैचारिक संघर्ष भी है, जिसे कांग्रेस पूरी ताकत से लड़ेगी।</p>
<h3><strong>कांग्रेस की रणनीति और आगे की राह</strong></h3>
<p>बैठक के अंत में, कांग्रेस प्रवक्ता पवन खेड़ा ने बताया कि इस बैठक में कुल 338 जिला अध्यक्षों ने भाग लिया। उन्होंने कहा कि बैठक दोतरफा संवाद का हिस्सा थी, जहाँ न केवल वरिष्ठ नेताओं ने बात की, बल्कि जिला अध्यक्षों को भी अपनी समस्याएँ और सुझाव रखने का अवसर मिला।</p>
<p>कांग्रेस अब पूरी तरह से जमीनी स्तर पर संगठन को मजबूत करने और भाजपा-आरएसएस के खिलाफ लड़ाई को तेज करने के मूड में है। यह देखना दिलचस्प होगा कि कांग्रेस इस बैठक में लिए गए निर्णयों को कैसे लागू करती है और आने वाले चुनावों में इसका कितना प्रभाव पड़ता है।</p>
<p>The post <a href="https://www.samvaadindia.com/kharge-rahul-addressed-the-meeting-of-district-congress-presidents/">खरगे-राहुल ने जिला कांग्रेस अध्यक्षों की बैठक को संबोधित किया</a> appeared first on <a href="https://www.samvaadindia.com">Samvaad India</a>.</p>
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		<item>
		<title>GST 2.0 की जरूरत: कांग्रेस का केंद्र सरकार से सरलीकरण और व्यापक सुधार की मांग</title>
		<link>https://www.samvaadindia.com/need-for-gst-2-0-congress-demands-simplification-and-comprehensive-reform-from-the-central-government/</link>
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		<dc:creator><![CDATA[संवाद इंडिया]]></dc:creator>
		<pubDate>Sun, 09 Mar 2025 17:56:28 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[अंतरराष्ट्रीय]]></category>
		<category><![CDATA[ब्रेकिंग]]></category>
		<category><![CDATA[राष्ट्रीय]]></category>
		<category><![CDATA[Need for GST 2.0: Congress demands simplification and comprehensive reform from the central government]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>GST दरों में कमी का ऐलान, लेकिन कांग्रेस ने उठाए व्यापक सुधार के सवाल नई दिल्ली, 9 मार्च।</p>
<p>The post <a href="https://www.samvaadindia.com/need-for-gst-2-0-congress-demands-simplification-and-comprehensive-reform-from-the-central-government/">GST 2.0 की जरूरत: कांग्रेस का केंद्र सरकार से सरलीकरण और व्यापक सुधार की मांग</a> appeared first on <a href="https://www.samvaadindia.com">Samvaad India</a>.</p>
]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p style="text-align: center;"><strong>GST दरों में कमी का ऐलान, लेकिन कांग्रेस ने उठाए व्यापक सुधार के सवाल</strong></p>
<p>नई दिल्ली, 9 मार्च। केंद्रीय वित्त मंत्री द्वारा जल्द ही वस्तु एवं सेवा कर (GST) की दरों में कमी की घोषणा के बाद, भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस ने इस पहल को अपर्याप्त करार दिया है। कांग्रेस के महासचिव (संचार) और सांसद जयराम रमेश ने एक विस्तृत बयान जारी कर केंद्र सरकार की GST नीतियों की जटिलताओं को उजागर किया और व्यापक कर सुधारों की मांग की।</p>
<p>उन्होंने कहा कि सरकार केवल चुनिंदा वस्तुओं, जैसे कैरामेल पॉपकॉर्न, पर टैक्स दर घटाने की बात कर रही है, लेकिन पॉपकॉर्न पर ही तीन अलग-अलग टैक्स स्लैब लागू होने जैसी जटिलताएं बनी हुई हैं। कांग्रेस ने मांग की है कि केवल दरों में कटौती ही नहीं, बल्कि एक पूर्ण रूप से सरलीकृत और प्रभावी ‘GST 2.0’ लागू करने की जरूरत है।</p>
<p><strong>GST की जटिल संरचना: मौजूदा प्रणाली की कमियां</strong></p>
<p><strong>1. कर स्लैब की बहुलता से बढ़ी समस्याएं</strong></p>
<p>वर्तमान GST प्रणाली में कर स्लैब की अधिकता और उलझनें कर चोरी, प्रशासनिक बोझ और अनुपालन में कठिनाइयों को बढ़ा रही हैं। जयराम रमेश ने उदाहरण देते हुए कहा कि पॉपकॉर्न पर तीन अलग-अलग टैक्स दरें हैं, वहीं क्रीम बन और साधारण बन पर भी अलग-अलग टैक्स लागू किए गए हैं। यह कर संरचना इतनी जटिल हो चुकी है कि इसे समझना और पालन करना कठिन हो गया है।</p>
<p>उन्होंने पूर्व मुख्य आर्थिक सलाहकार अरविंद सुब्रमण्यन के एक बयान का हवाला दिया, जिसमें उन्होंने कहा था कि GST प्रणाली में उपकरों (cesses) को मिलाकर करीब 100 प्रकार की अलग-अलग दरें मौजूद हैं।</p>
<p>इस तरह की जटिलता न केवल व्यापारियों के लिए परेशानी का सबब बनी हुई है, बल्कि इससे सरकार के कर राजस्व को भी नुकसान हो रहा है।</p>
<p><strong>2. GST चोरी का बढ़ता खतरा</strong></p>
<p>कांग्रेस नेता ने कहा कि जटिल कर ढांचे और कड़े अनुपालन नियमों की वजह से भारत में GST चोरी अभूतपूर्व स्तर पर पहुंच चुकी है। उन्होंने सरकार के आंकड़ों का हवाला देते हुए कहा कि वित्त वर्ष 2023-24 में 2.01 लाख करोड़ रुपये की GST चोरी दर्ज की गई, जो 2022-23 में 1.01 लाख करोड़ रुपये थी। यानी, एक साल में चोरी की राशि लगभग दोगुनी हो गई।</p>
<p>अब तक 18,000 फर्जी कंपनियों का खुलासा हुआ है, लेकिन वास्तविक संख्या इससे कहीं अधिक हो सकती है। कांग्रेस का कहना है कि मोदी सरकार ने ‘गुड एंड सिंपल टैक्स’ का वादा किया था, लेकिन आज की स्थिति में यह न तो ‘गुड’ है और न ही ‘सिंपल’ बल्कि व्यापार और प्रशासनिक तंत्र के लिए एक भारी चुनौती बन चुका है।</p>
<p><strong>GST प्रणाली में इनपुट टैक्स क्रेडिट (ITC) धोखाधड़ी और टैक्स रिफंड का संकट</strong></p>
<p><strong>1. धोखाधड़ी से प्रभावित टैक्स रिफंड प्रक्रिया</strong></p>
<p>पिछले कुछ महीनों में सरकार का शुद्ध GST संग्रह घटा है, जिसका एक बड़ा कारण टैक्स रिफंड में हुई भारी बढ़ोतरी है। दिसंबर 2024 के आंकड़ों के अनुसार, रिफंड समायोजन के बाद शुद्ध GST संग्रह की वृद्धि दर घटकर मात्र 3.3% रह गई।</p>
<p>रिफंड में इस वृद्धि का एक हिस्सा वैध हो सकता है, लेकिन कांग्रेस ने आशंका जताई है कि बड़ी मात्रा में फर्जी रिफंड के मामले सामने आ सकते हैं। इनपुट टैक्स क्रेडिट (ITC) से जुड़े फर्जीवाड़े में अब तक ₹35,132 करोड़ की धोखाधड़ी पकड़ी जा चुकी है, लेकिन इस राशि की वसूली दर मात्र 12% ही रही है।</p>
<p><strong>2. नकली कंपनियों द्वारा टैक्स चोरी</strong></p>
<p>GST प्रणाली की कमजोरियों के कारण कई फर्जी कंपनियां बिना किसी वास्तविक व्यापार के पंजीकरण करा रही हैं और बड़े पैमाने पर टैक्स रिफंड प्राप्त कर रही हैं। न्यूनतम सत्यापन और भौतिक जांच की कमी के चलते ऑनलाइन पंजीकरण की प्रक्रिया का दुरुपयोग हो रहा है। कई कंपनियां ऐसे निर्यातों पर भी टैक्स रिफंड का दावा कर रही हैं, जो इन लाभों के लिए पात्र ही नहीं हैं।</p>
<p><strong>आवश्यक वस्तुओं पर ऊंची GST दरों की समीक्षा की जरूरत</strong></p>
<p>कांग्रेस ने आरोप लगाया है कि मोदी सरकार गरीब और मध्यम वर्ग पर अप्रत्यक्ष करों का बोझ बढ़ा रही है। इसके उदाहरणस्वरूप उन्होंने शिक्षा क्षेत्र का हवाला दिया:</p>
<p style="padding-left: 40px;">1. शैक्षणिक पाठ्यपुस्तकों और स्टेशनरी पर GST लगाया जा रहा है।</p>
<p style="padding-left: 40px;">2. स्कूल यूनिफॉर्म, स्कूल बैग, और अन्य शैक्षणिक सामग्री भी GST के दायरे में है।</p>
<p style="padding-left: 40px;">3. कॉलेज द्वारा विश्वविद्यालय को दी जाने वाली संबद्धता फीस और डिस्टेंस लर्निंग पाठ्यक्रमों पर 18% कर लगाया गया है।</p>
<p>कांग्रेस ने मांग की है कि शिक्षा से जुड़ी सेवाओं और उत्पादों को GST से मुक्त किया जाना चाहिए ताकि गरीब और मध्यम वर्ग के परिवारों को राहत मिले।</p>
<p><strong>GST 2.0 की जरूरत और कांग्रेस का प्रस्तावित समाधान</strong></p>
<p><strong>1. टैक्स स्लैब में कटौती और सरलीकरण</strong></p>
<p>कांग्रेस ने प्रस्ताव दिया है कि वर्तमान 5%, 12%, 18% और 28% के चार टैक्स स्लैब को सरल बनाकर सिर्फ दो या तीन स्लैब में समाहित किया जाए।</p>
<p><strong>2. कर चोरी रोकने के लिए मजबूत अनुपालन प्रणाली</strong></p>
<p>व्यापार पंजीकरण के दौरान फर्जी कंपनियों को रोकने के लिए सख्त सत्यापन प्रक्रिया लागू की जाए। इनवॉइस और सप्लाई चेन ट्रैकिंग को डिजिटल रूप से मजबूत किया जाए ताकि फर्जी इनपुट टैक्स क्रेडिट दावे रोके जा सकें</p>
<p><strong>3. आवश्यक वस्तुओं पर कर कटौती</strong></p>
<p>कांग्रेस ने मांग की है कि शिक्षा, स्वास्थ्य, और बुनियादी जरूरतों से जुड़ी वस्तुओं पर करों को या तो समाप्त किया जाए या न्यूनतम दर पर लाया जाए।</p>
<p><strong>4. ITC धोखाधड़ी रोकने के लिए सुधार</strong></p>
<p>फर्जी GST रिफंड के मामलों की ऑडिटिंग तेज की जाए।</p>
<p>दोषी कंपनियों और व्यक्तियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई हो।</p>
<p><strong>क्या सरकार उठाएगी यह ऐतिहासिक कदम?</strong></p>
<p>कांग्रेस ने अपने 2024 के लोकसभा चुनाव घोषणापत्र में ‘GST 2.0’ का वादा किया था। पार्टी ने एक व्यापक सुधार की रूपरेखा प्रस्तुत की है, जिसे लागू करने के लिए केंद्र सरकार के पास संसाधन और समय दोनों मौजूद हैं।</p>
<p>GST मुआवजा उपकर के वित्तीय लक्ष्य लगभग पूरे हो चुके हैं, जिससे अब एक सरलीकृत कर प्रणाली लागू करने की संभावनाएं बढ़ गई हैं। अब यह केंद्र सरकार के ऊपर है कि वह इस ऐतिहासिक अवसर का लाभ उठाती है या नहीं।</p>
<p>वर्तमान GST प्रणाली न केवल जटिल है, बल्कि इसकी कमजोरियां कर चोरी को बढ़ावा दे रही हैं। कांग्रेस का मानना है कि केवल दरों में कमी से समस्याओं का समाधान नहीं होगा, बल्कि एक व्यापक और संरचनात्मक सुधार की आवश्यकता है।</p>
<p>यदि सरकार सच में ‘गुड एंड सिंपल टैक्स’ लागू करने के लिए प्रतिबद्ध है, तो उसे GST 2.0 की दिशा में ठोस कदम उठाने होंगे। अन्यथा, यह सिर्फ दिखावटी सुधार बनकर रह जाएगा।</p>
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		<title>पूर्व प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह के निधन से देश में शोक: सात दिन का राष्ट्रीय शोक घोषित</title>
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		<dc:creator><![CDATA[संवाद इंडिया]]></dc:creator>
		<pubDate>Fri, 27 Dec 2024 07:22:54 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[अंतरराष्ट्रीय]]></category>
		<category><![CDATA[खास खबर]]></category>
		<category><![CDATA[ब्रेकिंग]]></category>
		<category><![CDATA[राष्ट्रीय]]></category>
		<category><![CDATA[Manmohan singh]]></category>
		<category><![CDATA[Narendra modi]]></category>
		<category><![CDATA[The country mourns the death of Prime Minister Dr. Manmohan Singh: Seven days of national mourning declared]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>नई दिल्ली 26 दिसंबर। भारत के पूर्व प्रधानमंत्री और प्रसिद्ध अर्थशास्त्री डॉ. मनमोहन सिंह के निधन से देशभर</p>
<p>The post <a href="https://www.samvaadindia.com/the-country-mourns-the-death-of-prime-minister-dr-manmohan-singh-seven-days-of-national-mourning-declared/">पूर्व प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह के निधन से देश में शोक: सात दिन का राष्ट्रीय शोक घोषित</a> appeared first on <a href="https://www.samvaadindia.com">Samvaad India</a>.</p>
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										<content:encoded><![CDATA[<p>नई दिल्ली 26 दिसंबर। भारत के पूर्व प्रधानमंत्री और प्रसिद्ध अर्थशास्त्री डॉ. मनमोहन सिंह के निधन से देशभर में शोक की लहर दौड़ गई है। केंद्र सरकार ने उनके सम्मान में सात दिन के राष्ट्रीय शोक की घोषणा की है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी समेत कई राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय नेताओं ने डॉ. सिंह को श्रद्धांजलि अर्पित की है। प्रधानमंत्री मोदी ने उनके आवास पर जाकर उन्हें अंतिम श्रद्धा सुमन अर्पित किए और उनके परिवार के प्रति अपनी संवेदनाएं व्यक्त कीं।</p>
<p>प्रधानमंत्री मोदी ने अपने शोक संदेश में कहा, “डॉ. मनमोहन सिंह के निधन से हम सभी बेहद दुखी हैं। उनका जीवन भावी पीढ़ियों के लिए प्रेरणा का स्रोत है। उन्होंने ईमानदारी, सादगी और बौद्धिकता से समाज और राष्ट्र की सेवा की। एक अर्थशास्त्री और नेता के रूप में उनका योगदान अतुलनीय है। वे सुधारों के प्रति पूरी तरह समर्पित रहे और देश की विकास यात्रा में अहम भूमिका निभाई।”</p>
<p>डॉ. सिंह के जीवन की कहानी भारतीय राजनीति और अर्थशास्त्र के इतिहास में अद्वितीय है। 26 सितंबर 1932 को ब्रिटिश भारत के पंजाब (अब पाकिस्तान) के गाह में जन्मे डॉ. सिंह ने शुरुआती जीवन में ही गरीबी और कठिनाइयों का सामना किया। लेकिन उनकी दृढ़ता और अध्ययन के प्रति समर्पण ने उन्हें उच्च शैक्षिक और राजनीतिक मुकाम तक पहुंचाया।<br />
उन्होंने पंजाब विश्वविद्यालय, कैम्ब्रिज और ऑक्सफोर्ड जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों से शिक्षा प्राप्त की। 1970 के दशक में वे भारतीय रिजर्व बैंक के गवर्नर बने और देश की मौद्रिक नीतियों को मजबूत किया। 1991 में, जब भारत गंभीर आर्थिक संकट से गुजर रहा था, तत्कालीन प्रधानमंत्री पीवी नरसिम्हा राव ने उन्हें वित्त मंत्री नियुक्त किया।</p>
<p><img loading="lazy" decoding="async" class="aligncenter wp-image-844 size-full" src="https://www.samvaadindia.com/wp-content/uploads/2024/12/7274447-scaled.jpg" alt="" width="2560" height="1732" srcset="https://www.samvaadindia.com/wp-content/uploads/2024/12/7274447-scaled.jpg 2560w, https://www.samvaadindia.com/wp-content/uploads/2024/12/7274447-300x203.jpg 300w, https://www.samvaadindia.com/wp-content/uploads/2024/12/7274447-1024x693.jpg 1024w, https://www.samvaadindia.com/wp-content/uploads/2024/12/7274447-768x520.jpg 768w, https://www.samvaadindia.com/wp-content/uploads/2024/12/7274447-1536x1039.jpg 1536w, https://www.samvaadindia.com/wp-content/uploads/2024/12/7274447-2048x1386.jpg 2048w" sizes="auto, (max-width: 2560px) 100vw, 2560px" /></p>
<p>डॉ. सिंह ने आर्थिक सुधारों का मार्ग प्रशस्त किया, जिसने भारतीय अर्थव्यवस्था को उदारीकरण की दिशा में अग्रसर किया। उनके नेतृत्व में भारत ने विश्व मंच पर अपनी आर्थिक स्थिति मजबूत की। उनकी नीति-निर्माण क्षमता और दूरदर्शिता ने देश को स्थायित्व और विकास का मार्ग दिखाया।</p>
<p><strong>प्रधानमंत्री के रूप में ऐतिहासिक योगदान और निजी व्यक्तित्व</strong></p>
<p>2004 में, जब भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस ने लोकसभा चुनावों में विजय प्राप्त की, डॉ. मनमोहन सिंह को देश का 14वां प्रधानमंत्री नियुक्त किया गया। यह पहली बार था जब एक गैर-राजनीतिक पृष्ठभूमि वाले व्यक्ति ने भारत के प्रधानमंत्री पद की शपथ ली। उनके नेतृत्व में यूपीए सरकार ने कई महत्वपूर्ण सामाजिक और आर्थिक नीतियां लागू कीं।</p>
<p>डॉ. सिंह ने अपने कार्यकाल में शिक्षा, स्वास्थ्य और ग्रामीण विकास के क्षेत्रों में कई सुधार किए। महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम (MGNREGA) और शिक्षा का अधिकार अधिनियम जैसे कानून उनकी दूरदृष्टि का परिणाम थे। उन्होंने भारत-अमेरिका परमाणु समझौते को भी सफलतापूर्वक अंजाम दिया, जिससे भारत को वैश्विक स्तर पर ऊर्जा के क्षेत्र में नई पहचान मिली।</p>
<p>प्रधानमंत्री मोदी ने उनके योगदान को याद करते हुए कहा, “डॉ. मनमोहन सिंह का जीवन सादगी और ईमानदारी का प्रतीक था। उनके पास हर किसी के लिए समय और सहानुभूति थी। जब मैं गुजरात का मुख्यमंत्री था, तब उनसे राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय मुद्दों पर मेरी खुली चर्चाएं होती थीं। उन चर्चाओं और उनके नेतृत्व से बहुत कुछ सीखने को मिला।”</p>
<p>डॉ. सिंह के व्यक्तित्व की सबसे बड़ी विशेषता उनकी सौम्यता और बौद्धिकता थी। वे विवादों से दूर रहने वाले नेता थे, जिनका ध्यान हमेशा देश की प्रगति पर केंद्रित रहा। वे राजनीति में एक दुर्लभ उदाहरण थे, जिन्होंने उच्च पदों पर रहते हुए भी सादगी और नैतिकता को बनाए रखा।</p>
<p>उनका निधन भारतीय राजनीति में एक युग का अंत है। देश ने एक ऐसे नेता को खो दिया, जिसने अपनी सादगी और दूरदर्शिता से भारतीय राजनीति और अर्थव्यवस्था में गहरी छाप छोड़ी। आज उनकी अनुपस्थिति देश को गहरा आघात पहुंचा रही है। प्रधानमंत्री मोदी ने कहा, “डॉ. सिंह का योगदान और उनके जीवन से प्रेरणा लेने की जरूरत है। वे हमेशा हमारे दिलों में जीवित रहेंगे।”</p>
<p>इस कठिन समय में पूरा देश उनके परिवार के साथ खड़ा है। डॉ. मनमोहन सिंह का जीवन और उनकी सेवाएं भावी पीढ़ियों के लिए प्रेरणा बनी रहेंगी।</p>
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		<title>भारत-चीन सीमा विवाद: विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर का लोकसभा में वक्तव्य</title>
		<link>https://www.samvaadindia.com/india-china-border-dispute-foreign-minister-dr-s-jaishankars-statement-in-lok-sabha/</link>
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		<dc:creator><![CDATA[संवाद इंडिया]]></dc:creator>
		<pubDate>Wed, 04 Dec 2024 06:35:09 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[अंतरराष्ट्रीय]]></category>
		<category><![CDATA[ब्रेकिंग]]></category>
		<category><![CDATA[राष्ट्रीय]]></category>
		<category><![CDATA[India-China border dispute: Foreign Minister Dr. S. Jaishankar's statement in Lok Sabha]]></category>
		<category><![CDATA[Jay shankar prasad]]></category>
		<category><![CDATA[Lok sabha]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>नई दिल्ली 4 दिसंबर। भारत-चीन सीमा विवाद पर विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर ने 3 दिसंबर 2024 को लोकसभा</p>
<p>The post <a href="https://www.samvaadindia.com/india-china-border-dispute-foreign-minister-dr-s-jaishankars-statement-in-lok-sabha/">भारत-चीन सीमा विवाद: विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर का लोकसभा में वक्तव्य</a> appeared first on <a href="https://www.samvaadindia.com">Samvaad India</a>.</p>
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										<content:encoded><![CDATA[<p>नई दिल्ली 4 दिसंबर। भारत-चीन सीमा विवाद पर विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर ने 3 दिसंबर 2024 को लोकसभा में एक महत्वपूर्ण बयान दिया। उन्होंने इस बयान में पूर्वी लद्दाख में जारी सीमा विवाद, द्विपक्षीय संबंधों, और हालिया घटनाक्रमों का विस्तार से विवरण प्रस्तुत किया। उन्होंने सीमा विवाद के ऐतिहासिक, सैन्य, कूटनीतिक और भौगोलिक पहलुओं को स्पष्ट किया।</p>
<p><strong>भारत-चीन सीमा विवाद का ऐतिहासिक परिप्रेक्ष्य</strong></p>
<p>डॉ. जयशंकर ने अपने बयान की शुरुआत भारत-चीन सीमा विवाद के ऐतिहासिक संदर्भ से की। उन्होंने बताया कि चीन 38,000 वर्ग किमी भारतीय क्षेत्र पर अवैध कब्जा किए हुए है। यह क्षेत्र 1962 के भारत-चीन युद्ध और उससे पहले की घटनाओं के कारण विवादित है। इसके अतिरिक्त, 1963 में पाकिस्तान ने भी 5,180 वर्ग किमी भारतीय भूमि चीन को अवैध रूप से सौंप दी थी।</p>
<p>उन्होंने जोर देकर कहा कि भारत और चीन के बीच सीमा विवाद को सुलझाने के लिए दशकों से द्विपक्षीय वार्ताएं हो रही हैं। हालांकि, पूर्वी लद्दाख में 2020 से शुरू हुए सैन्य तनाव ने इस विवाद को और जटिल बना दिया।</p>
<p><strong>2020 की घटनाओं और गलवान झड़प का प्रभाव</strong></p>
<p>2020 में पूर्वी लद्दाख में चीन द्वारा बड़ी संख्या में सैनिकों की तैनाती और भारतीय क्षेत्र में घुसपैठ के प्रयासों के कारण सीमा पर गंभीर तनाव उत्पन्न हुआ। गलवान घाटी में हुई हिंसक झड़प, जिसमें भारतीय सैनिकों ने वीरता का प्रदर्शन किया, 45 वर्षों में पहली बार दोनों देशों के बीच हताहतों का कारण बनी।</p>
<p>डॉ. जयशंकर ने बताया कि इस स्थिति से निपटने के लिए भारत ने तीन महत्वपूर्ण कदम उठाए</p>
<p><strong>1. तत्काल जवाबी तैनाती:</strong> भारतीय सेना ने कोविड महामारी के कठिन समय में भी सीमाओं पर त्वरित और प्रभावी तैनाती सुनिश्चित की।</p>
<p><strong>2. कूटनीतिक प्रयास:</strong> सीमा पर तनाव कम करने के लिए गहन बातचीत की गई।</p>
<p><strong>3. लंबी अवधि की रणनीति:</strong> सीमा विवाद के समाधान के लिए दीर्घकालिक उपायों पर ध्यान केंद्रित किया गया।</p>
<p><strong>द्विपक्षीय समझौतों का अवलोकन</strong></p>
<p>जयशंकर ने भारत-चीन संबंधों की ऐतिहासिक पृष्ठभूमि को भी रेखांकित किया। 1988 में दोनों देशों के बीच यह सहमति बनी थी कि सीमा विवाद का समाधान शांतिपूर्ण वार्ता के माध्यम से किया जाएगा। इसके बाद 1993, 1996, और 2005 में शांति स्थापना और विश्वास निर्माण के लिए समझौते किए गए।</p>
<p>2013 में बार्डर डिफेंस कोऑपरेशन एग्रीमेंट और 2012 में वर्किंग मैकेनिज्म फॉर कंसल्टेशन एंड कोऑर्डिनेशन (WMCC) की स्थापना ने सीमा पर शांति बनाए रखने के लिए महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।</p>
<p><strong>गलवान घाटी के बाद की स्थिति और हालिया घटनाक्रम</strong></p>
<p>गलवान घटना के बाद, भारत और चीन ने पूर्वी लद्दाख के कई विवादित क्षेत्रों में सैनिकों के बीच दूरी बनाए रखने के लिए कई चरणों में कदम उठाए। हाल ही में, 21 अक्टूबर 2024 को देपसांग और डेमचोक क्षेत्रों में दोनों देशों के बीच समझौता हुआ।</p>
<p><strong>देपसांग और डेमचोक समझौता:</strong></p>
<ul>
<li>भारतीय गश्त को पारंपरिक क्षेत्रों में बहाल किया गया।</li>
<li>स्थानीय चरवाहों को उनके पारंपरिक चरागाहों तक पहुंचने की अनुमति दी गई।</li>
<li>दोनों पक्षों ने सैनिकों की तैनाती में कमी करने का निर्णय लिया।</li>
</ul>
<p>इस समझौते के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग के बीच 23 अक्टूबर को कज़ान में ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के दौरान मुलाकात हुई।</p>
<p><strong>सीमा पर बुनियादी ढांचे का विकास</strong></p>
<p>डॉ. जयशंकर ने सीमा पर भारत के बढ़ते बुनियादी ढांचे की सराहना की। उन्होंने कहा कि सरकार ने सीमाई क्षेत्रों में सड़क, पुल, और सुरंग निर्माण पर तीन गुना अधिक व्यय किया है।</p>
<p><strong>प्रमुख उपलब्धियां:</strong></p>
<ul>
<li>अटल टनल (लाहौल-स्पीति),</li>
<li>सेला और नेचिपु टनल (तवांग)।</li>
<li>उमलिंगला पास रोड (दक्षिण लद्दाख)।</li>
<li>जोजिला एक्सिस का विस्तार।</li>
</ul>
<p>इन प्रयासों ने भारतीय सशस्त्र बलों की परिचालन क्षमता को बढ़ाया है।</p>
<p><strong>सीमा प्रबंधन और कूटनीतिक प्रयास</strong></p>
<p>2020 के बाद से, भारत ने चीन के साथ 21 उच्च-स्तरीय सैन्य कमांडर बैठकें और 17 WMCC बैठकें कीं। इन बैठकों का उद्देश्य सीमा विवाद को सुलझाना और विश्वास बहाली के उपाय लागू करना था।</p>
<p>डॉ. जयशंकर ने बताया कि सीमा प्रबंधन के लिए तीन सिद्धांतों का पालन किया गया:</p>
<p style="padding-left: 40px;">1. एलएसी का सम्मान और पालन।</p>
<p style="padding-left: 40px;">2. यथास्थिति में एकतरफा बदलाव न करना।</p>
<p style="padding-left: 40px;">3. पिछले समझौतों का पूर्ण अनुपालन।</p>
<p><strong>आगे की दिशा और द्विपक्षीय संबंधों का पुनर्निर्माण</strong></p>
<p>जयशंकर ने स्पष्ट किया कि भारत-चीन संबंध तब तक सामान्य नहीं हो सकते जब तक सीमा क्षेत्रों में शांति और स्थिरता सुनिश्चित नहीं होती। उन्होंने बताया कि हालिया समझौते के बाद, दोनों देशों ने द्विपक्षीय वार्ताओं को पुनः शुरू करने और विश्वास निर्माण उपायों को मजबूत करने का निर्णय लिया है।</p>
<p><strong>भविष्य की प्राथमिकताएं:</strong></p>
<ul>
<li>सीमाई क्षेत्रों में डी-एस्केलेशन।</li>
<li>सीमा विवाद के दीर्घकालिक समाधान के लिए विशेष प्रतिनिधियों की बैठक।</li>
<li>द्विपक्षीय संबंधों को चरणबद्ध तरीके से पुनर्निर्मित करना।</li>
</ul>
<p><strong>प्रभात भारत विशेष</strong></p>
<p>डॉ. जयशंकर ने अपने बयान में भारत की कूटनीतिक और सैन्य रणनीति को रेखांकित करते हुए कहा कि सरकार ने राष्ट्रीय सुरक्षा और सीमाई क्षेत्र की स्थिरता सुनिश्चित करने के लिए निर्णायक कदम उठाए हैं।</p>
<p>उन्होंने भरोसा जताया कि भारत-चीन सीमा विवाद का समाधान शांतिपूर्ण वार्ता और रणनीतिक प्रयासों के माध्यम से निकाला जाएगा। इसके साथ ही, उन्होंने लोकसभा से इस दिशा में सरकार के प्रयासों को पूर्ण समर्थन देने की अपील की।</p>
<p>The post <a href="https://www.samvaadindia.com/india-china-border-dispute-foreign-minister-dr-s-jaishankars-statement-in-lok-sabha/">भारत-चीन सीमा विवाद: विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर का लोकसभा में वक्तव्य</a> appeared first on <a href="https://www.samvaadindia.com">Samvaad India</a>.</p>
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